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नरसिंहपुर पुलिस ने 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर हो रहे साइबर फ्रॉड से आम नागरिकों को सतर्क करने के लिए एक नई पहल शुरू की है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि 'डिजिटल अरेस्ट' कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह एक साइबर फ्रॉड है। जिले में साइबर अपराधों पर नकेल कसने और जनता को जागरूक करने के उद्देश्य से, नरसिंहपुर पुलिस अधीक्षक डॉ. ऋषिकेश मीना ने बुधवार को 'सेफ क्लिक 2.0' अभियान का शानदार शुभारंभ किया।
Satish Vishwakarma
नरसिंहपुर पुलिस ने 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर हो रहे साइबर फ्रॉड से आम नागरिकों को सतर्क करने के लिए एक नई पहल शुरू की है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि 'डिजिटल अरेस्ट' कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह एक साइबर फ्रॉड है। जिले में साइबर अपराधों पर नकेल कसने और जनता को जागरूक करने के उद्देश्य से, नरसिंहपुर पुलिस अधीक्षक डॉ. ऋषिकेश मीना ने बुधवार को 'सेफ क्लिक 2.0' अभियान का शानदार शुभारंभ किया।
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- नरसिंहपुर पुलिस ने 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर हो रहे साइबर फ्रॉड से आम नागरिकों को सतर्क करने के लिए एक नई पहल शुरू की है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि 'डिजिटल अरेस्ट' कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह एक साइबर फ्रॉड है। जिले में साइबर अपराधों पर नकेल कसने और जनता को जागरूक करने के उद्देश्य से, नरसिंहपुर पुलिस अधीक्षक डॉ. ऋषिकेश मीना ने बुधवार को 'सेफ क्लिक 2.0' अभियान का शानदार शुभारंभ किया।1
- नरसिंहपुर पुलिस ने नागरिकों को एक नए तरह के साइबर फ्रॉड, जिसे 'डिजिटल अरेस्ट' कहा जा रहा है, से सावधान रहने की सलाह दी है। नरसिंहपुर के पुलिस अधीक्षक ऋषिकेश मीणा ने स्पष्ट किया है कि 'डिजिटल अरेस्ट' कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह एक प्रकार की साइबर धोखाधड़ी है। उन्होंने लोगों से इस तरह के फर्जीवाड़े से सुरक्षित रहने और बचने का आग्रह किया है।1
- ठेले का किराया मांगना एक व्यक्ति को भारी पड़ गया, जिसके परिणामस्वरूप उसे अपनी जान गंवानी पड़ी।1
- नरसिंहपुर जिले के सुआतला थाना क्षेत्र के बरमान चौकी अंतर्गत ग्राम धरमपुरी स्थित एक आश्रम में कथित तौर पर तोड़फोड़, मारपीट और जानलेवा हमले की घटना ने क्षेत्र में हलचल मचा दी है। आश्रम संचालक संत मदन दास त्यागी ने इस मामले में पुलिस अधीक्षक नरसिंहपुर को एक विस्तृत आवेदन सौंपा है, जिसमें आरोपी के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई और उसे जिला बदर करने की मांग की गई है। पुलिस अधीक्षक को दिए गए आवेदन में संत मदन दास त्यागी ने आरोप लगाया है कि 23 जून की सुबह करीब 6 बजे ग्राम धरमपुरी निवासी राजा नौरिया कथित रूप से नशे की हालत में कुछ अन्य लोगों के साथ आश्रम परिसर में घुस आया। आरोप है कि आरोपी अपने साथ घन, छेनी, हथौड़ा और भाला जैसे हथियार लेकर पहुंचा और आते ही गाली-गलौज व तोड़फोड़ शुरू कर दी। आवेदन के अनुसार, आश्रम में रखे फ्रिज, हारमोनियम, ढोलक, गैस सिलेंडर, चूल्हा, कमंडल, किचन सामग्री, पेटियां और मंदिर परिसर की टाइल्स सहित लगभग डेढ़ लाख रुपये की संपत्ति को भारी नुकसान पहुँचाया गया। संत ने यह भी आरोप लगाया है कि आश्रम में ठहरे दो परिक्रमा वासियों पर भाले से हमला किया गया, जिससे अफरा-तफरी मच गई और लोगों को अपनी जान बचाने के लिए भागना पड़ा। इसके अतिरिक्त, आरोपी ने संत के साथ मारपीट की और गले में पट्टा लपेटकर जान से मारने की धमकी दी, साथ ही उनके थैले से 22 हजार रुपये चोरी करने का भी आरोप है। घटना की जानकारी मिलने पर स्थानीय ग्रामीण और मिढ़ली पंचायत के सरपंच प्रतिनिधि मौके पर पहुँचे और बीच-बचाव कर स्थिति को नियंत्रित किया। इसके बाद पीड़ित पक्ष ने सुआतला थाने में शिकायत दर्ज कराई। संत का कहना है कि आरोपी के विरुद्ध पहले से भी क्षेत्र में भय और दहशत का माहौल है और उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई आवश्यक है। संत मदन दास त्यागी ने अपने आवेदन में यह भी आरोप लगाया है कि आरोपी ने शासकीय विद्यालय के पास सरकारी भूमि पर अतिक्रमण किया है, जिससे सार्वजनिक हित प्रभावित हो रहा है। उन्होंने भविष्य में झूठे मामलों में फंसाने और नुकसान पहुँचाने की धमकियाँ मिलने की बात भी कही है। पीड़ित संत ने पुलिस अधीक्षक से मामले की निष्पक्ष और त्वरित जांच करने, दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने, धार्मिक स्थल की सुरक्षा सुनिश्चित करने और क्षेत्र में शांति व कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए आरोपी के विरुद्ध मध्यप्रदेश राज्य सुरक्षा अधिनियम के तहत जिला बदर की कार्यवाही शुरू करने की मांग की है। यह सभी आरोप पुलिस अधीक्षक को दिए गए लिखित आवेदन में लगाए गए हैं, और मामले की सत्यता एवं आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।3
- नरसिंहपुर जिले के धर्मपुरी स्थित रेवा मंदिर आश्रम में राजा नामक एक आरोपी ने तोड़फोड़ की घटना को अंजाम दिया है। इस मामले में आश्रम के संचालक ने पुलिस अधीक्षक (SP) से शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।1
- नरसिंहपुर पुलिस ने आम नागरिकों को 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर हो रहे साइबर फ्रॉड से सचेत करने के लिए एक नई पहल की शुरुआत की है। जिले में साइबर अपराधों पर लगाम लगाने और जनता को जागरूक करने के उद्देश्य से नरसिंहपुर पुलिस अधीक्षक डॉ. ऋषिकेश मीना ने बुधवार को "सेफ क्लिक 2.0" अभियान का शुभारंभ किया। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक डॉ. ऋषिकेश मीना ने स्पष्ट किया कि भारतीय कानून में "डिजिटल अरेस्ट" जैसी कोई कानूनी व्यवस्था मौजूद नहीं है। उन्होंने बताया कि ठग खुद को पुलिस, सीबीआई या ईडी का अधिकारी बताकर लोगों को वीडियो कॉल पर डराते हैं, उन्हें घंटों तक घर में बंधक बनाकर रखते हैं और लाखों रुपये की ठगी करते हैं। उन्होंने साफ किया कि कोई भी सरकारी अधिकारी वीडियो कॉल पर पैसे नहीं मांगता और न ही इस तरह की कोई गिरफ्तारी की जाती है। पुलिस अधीक्षक ने नागरिकों से अपील की है कि वे ऐसे कॉल आने पर घबराएं नहीं और तुरंत पुलिस को सूचना दें। उन्होंने जोर दिया कि ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार का भुगतान न करें और सीधे नजदीकी पुलिस स्टेशन या एसपी कार्यालय जाकर शिकायत दर्ज कराएं। "सेफ क्लिक 2.0" अभियान के माध्यम से पुलिस लोगों को सुरक्षित डिजिटल बैंकिंग और सोशल मीडिया के सही इस्तेमाल की ट्रेनिंग भी दे रही है, ताकि वे साइबर अपराधियों के जाल में फंसने से बच सकें।3
- नरसिंहपुर जिले में साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण लगाने और आम जनता को इस संबंध में जागरूक करने के उद्देश्य से, नरसिंहपुर पुलिस अधीक्षक ने एक नई पहल का शानदार शुभारंभ किया है। इस अभियान को 'सेफ क्लिक 2.0' नाम दिया गया है, जिसके तहत एसपी ने नागरिकों को विशेष रूप से आगाह करते हुए स्पष्ट किया कि कानून में 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी कोई व्यवस्था नहीं है। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि साइबर ठग अक्सर खुद को पुलिस, सीबीआई या ईडी का अधिकारी बताकर लोगों को वीडियो कॉल पर डराते हैं। ये अपराधी पीड़ितों को कई घंटों तक उनके घरों में बंधक बनाकर रखते हैं और लाखों रुपये की ठगी करते हैं। एसपी ने दृढ़ता से कहा कि कोई भी सरकारी एजेंसी न तो वीडियो कॉल पर पैसों की मांग करती है और न ही इस तरह से किसी को गिरफ्तार करती है। एसपी ने जनता से अपील की है कि ऐसे किसी भी संदिग्ध कॉल आने पर घबराएं नहीं, बल्कि तुरंत स्थानीय पुलिस को इसकी सूचना दें। 'सेफ क्लिक 2.0' अभियान के तहत लोगों को सुरक्षित डिजिटल बैंकिंग प्रक्रियाओं और सोशल मीडिया के सही व सुरक्षित उपयोग के बारे में प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा।1
- नरसिंहपुर के गाडरवारा में शक्कर नदी के रेलवे पुल के पास चल रहे पिचिंग कार्य में ठेकेदार द्वारा गंभीर लापरवाही बरते जाने का मामला सामने आया है। गाडरवारा से आने-जाने वाली अप और डाउन दोनों रेलवे लाइनों के लिए करोड़ों रुपए की लागत से किया जा रहा यह पिचिंग कार्य, जब ग्राउंड जीरो पर देखा गया तो चौंकाने वाली स्थिति दिखी। ठेकेदार ने रेलवे लाइन से सटी मिट्टी का ही पिचिंग कार्य में उपयोग कर लिया, जिसके चलते एक तरफ की रेलवे लाइन के ठीक बगल में 10 फीट की गहरी खुदाई कर दी गई और उसी मिट्टी से दूसरी तरफ की लाइन के पास पिचिंग की गई। इस संबंध में जब संबंधित अधिकारी से बात की गई तो उन्होंने कार्य जारी होने की बात कही, जबकि धरातल पर कोई काम होता नजर नहीं आ रहा है। इस बड़े पैमाने पर हो रहे रेलवे कार्य के दौरान जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर वे इस काम का निरीक्षण क्यों नहीं कर रहे थे। यह भी एक बड़ा प्रश्न है कि रेलवे विभाग की जमीन से इतनी बड़ी खुदाई की अनुमति किसने दी। जनप्रतिनिधियों, रेलवे प्रशासन और जिला प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों से इस ओर तत्काल ध्यान देने की अपील की गई है, क्योंकि यदि समय रहते इस गंभीर विषय पर ध्यान देकर समस्या का निवारण नहीं किया गया तो यह किसी अनहोनी घटना को न्योता देने जैसा होगा। रिपोर्ट में केंद्र सरकार के निर्माण कार्यों में भी हो रही बेईमानी पर सवाल उठाया गया है। अब देखना यह है कि इस खबर के सामने आने के बाद जिम्मेदार अधिकारी कब इस पूरे मामले को संज्ञान में लेकर दोषियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई करते हैं। मौके पर मौजूद ग्रामवासी की जुबानी भी पूरे मामले की कहानी दिखाने की बात कही गई है, ताकि "दूध का दूध और पानी का पानी" हो सके।1