झारखंड में हर सर्दी में, हमारे बच्चे कड़ाके की ठंड का सामना करते हैं, जबकि उन्हें ज़रूरी चीज़ें भी नहीं मिल पातीं। किया फ़ैयेदा आयशा बजट का मिलना या न्हा मिलने से| 2050 तक प्रगति का सपना देखने वाले इस राज्य में, ज़मीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां करती है, जो दिल दहला देने वाली है। व्यवस्थागत विफलताओं और सरकारी उदासीनता ने उनके संघर्षों को और बढ़ा दिया है, जबकि अधिकारी विदेश यात्रा करके आलीशान घर बनवा रहे हैं और उनकी मदद के लिए बनाई गई योजनाएँ अधूरी ही रह गई हैं। बसंत का मौसम आने ही वाला है, लेकिन सर्दी का दर्द अभी भी बना हुआ है। ये बच्चे झारखंड का भविष्य हैं - जब प्राथमिकताएँ गलत जगह पर हैं, तो हम उन्हें कैसे कष्ट सहने दे सकते हैं? आइए आत्मचिंतन करें और कार्रवाई के लिए प्रयास करें। उनकी सर्दी सिर्फ ठंडी ही नहीं थी - यह इस बात की कड़वी याद दिलाती है कि अभी भी बहुत कुछ बदलने की ज़रूरत है।
झारखंड में हर सर्दी में, हमारे बच्चे कड़ाके की ठंड का सामना करते हैं, जबकि उन्हें ज़रूरी चीज़ें भी नहीं मिल पातीं। किया फ़ैयेदा आयशा बजट का मिलना या न्हा मिलने से| 2050 तक प्रगति का सपना देखने वाले इस राज्य में, ज़मीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां करती है, जो दिल दहला देने वाली है। व्यवस्थागत विफलताओं और सरकारी उदासीनता ने उनके संघर्षों को और बढ़ा दिया है, जबकि अधिकारी विदेश यात्रा करके आलीशान घर बनवा रहे हैं और उनकी मदद के लिए बनाई गई योजनाएँ अधूरी ही रह गई हैं। बसंत का मौसम आने ही वाला है, लेकिन सर्दी का दर्द अभी भी बना हुआ है। ये बच्चे झारखंड का भविष्य हैं - जब प्राथमिकताएँ गलत जगह पर हैं, तो हम उन्हें कैसे कष्ट सहने दे सकते हैं? आइए आत्मचिंतन करें और कार्रवाई के लिए प्रयास करें। उनकी सर्दी सिर्फ ठंडी ही नहीं थी - यह इस बात की कड़वी याद दिलाती है कि अभी भी बहुत कुछ बदलने की ज़रूरत है।
- 2050 तक प्रगति का सपना देखने वाले इस राज्य में, ज़मीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां करती है, जो दिल दहला देने वाली है। व्यवस्थागत विफलताओं और सरकारी उदासीनता ने उनके संघर्षों को और बढ़ा दिया है, जबकि अधिकारी विदेश यात्रा करके आलीशान घर बनवा रहे हैं और उनकी मदद के लिए बनाई गई योजनाएँ अधूरी ही रह गई हैं। बसंत का मौसम आने ही वाला है, लेकिन सर्दी का दर्द अभी भी बना हुआ है। ये बच्चे झारखंड का भविष्य हैं - जब प्राथमिकताएँ गलत जगह पर हैं, तो हम उन्हें कैसे कष्ट सहने दे सकते हैं? आइए आत्मचिंतन करें और कार्रवाई के लिए प्रयास करें। उनकी सर्दी सिर्फ ठंडी ही नहीं थी - यह इस बात की कड़वी याद दिलाती है कि अभी भी बहुत कुछ बदलने की ज़रूरत है।1
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- धनबाद. (रिपोर्ट प्रेम कुमार). धनबाद कोर्ट कैंपस में बुधवार दिन 12 बजे के आसपास बम की खबर मिलने से यहाँ सनसनी फैल गई. इस खबर को लेकर प्रशासन के द्वारा पूरे कोर्ट कैंपस को खाली करवा कर सघनता से जांच किया जा रहा है. मौके पर पुलिस के कई वरीय वरीय अधिकारी सदल बल मौके पर मौजूद हैं. मामले की छान बीन जारी है हालांकि अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक सूचना जारी नहीं हुई है. यह खबर महज अफवाह है या कुछ ओर. फिलहाल प्रशासन सभी बिंदुओं पर जांच कर रही है.1
- *1.58 लाख करोड़ का यह बजट केवल आंकड़ों का खेल है, *इसे 'लूट का बजट' कहना गलत नहीं होगा, *क्योंकि बजट भाषण के दौरान मुख्यमंत्री का बेरुखा रवैया इसकी विफलता की कहानी खुद बयां कर रहा था।1