हिंदी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर जतारा स्थित पत्रिका कार्यालय में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें क्षेत्र के अनेक पत्रकारों ने भाग लिया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य हिंदी पत्रकारिता के महत्व, दायित्वों और वर्तमान चुनौतियों पर विचार व्यक्त करना था। कार्यक्रम का संचालन पत्रकार आदम कादरी ने किया, जिन्होंने पत्रकारों से सकारात्मक सोच के साथ कार्य करने, एक-दूसरे को नीचा दिखाने के बजाय निष्पक्षता और अपने विशिष्ट अंदाज में पत्रकारिता करने का आह्वान किया। इस दौरान, पूर्व जिला उपाध्यक्ष मुकेश तिवारी ने पत्रकारिता को समाज की आवाज बताते हुए पत्रकारों को ईमानदारी और निष्ठा के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने पर जोर दिया। बालकिशन प्रजापति ने पत्रकारिता के मूल गुणों और उसकी सामाजिक जिम्मेदारियों पर प्रकाश डाला, जबकि दशरथ विश्वकर्मा ने पत्रकारों की भूमिका को लोकतंत्र का महत्वपूर्ण स्तंभ बताया। लाली झा ने जनहित के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने तथा समाज के प्रति पत्रकारों की जवाबदेही पर महत्वपूर्ण विचार रखे। वहीं, आलोक भार्गव ने हिंदी पत्रकारिता दिवस के इतिहास और उसके महत्व की विस्तृत जानकारी दी, और बॉबी दुबे ने पत्रकारिता के आदर्शों, नैतिक मूल्यों और जनसेवा की भावना को बनाए रखने का संदेश दिया। कार्यक्रम के अंत में, सभी पत्रकारों ने हिंदी पत्रकारिता की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने तथा निष्पक्ष, निर्भीक और जनहितकारी पत्रकारिता के लिए सदैव प्रतिबद्ध रहने का संकल्प लिया। यह पूरा कार्यक्रम सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।
हिंदी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर जतारा स्थित पत्रिका कार्यालय में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें क्षेत्र के अनेक पत्रकारों ने भाग लिया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य हिंदी पत्रकारिता के महत्व, दायित्वों और वर्तमान चुनौतियों पर विचार व्यक्त करना था। कार्यक्रम का संचालन पत्रकार आदम कादरी ने किया, जिन्होंने पत्रकारों से सकारात्मक सोच के
साथ कार्य करने, एक-दूसरे को नीचा दिखाने के बजाय निष्पक्षता और अपने विशिष्ट अंदाज में पत्रकारिता करने का आह्वान किया। इस दौरान, पूर्व जिला उपाध्यक्ष मुकेश तिवारी ने पत्रकारिता को समाज की आवाज बताते हुए पत्रकारों को ईमानदारी और निष्ठा के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने पर जोर दिया। बालकिशन प्रजापति ने पत्रकारिता के मूल गुणों और
उसकी सामाजिक जिम्मेदारियों पर प्रकाश डाला, जबकि दशरथ विश्वकर्मा ने पत्रकारों की भूमिका को लोकतंत्र का महत्वपूर्ण स्तंभ बताया। लाली झा ने जनहित के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने तथा समाज के प्रति पत्रकारों की जवाबदेही पर महत्वपूर्ण विचार रखे। वहीं, आलोक भार्गव ने हिंदी पत्रकारिता दिवस के इतिहास और उसके महत्व की विस्तृत जानकारी दी, और
बॉबी दुबे ने पत्रकारिता के आदर्शों, नैतिक मूल्यों और जनसेवा की भावना को बनाए रखने का संदेश दिया। कार्यक्रम के अंत में, सभी पत्रकारों ने हिंदी पत्रकारिता की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने तथा निष्पक्ष, निर्भीक और जनहितकारी पत्रकारिता के लिए सदैव प्रतिबद्ध रहने का संकल्प लिया। यह पूरा कार्यक्रम सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।
- टीकमगढ़ जिले के अजनौर में गरीबों के हक पर डाका डालने का मामला सामने आया है। यहां एक राशन की दुकान को सील कर दिया गया है, जहाँ से 119 क्विंटल अनाज गायब पाया गया है। यह कार्रवाई गरीबों के लिए आए अनाज की कथित हेराफेरी को लेकर की गई है।1
- बुंदेलखंड क्षेत्र में पिछले दो दिनों से लगातार बारिश और तेज हवाएं चल रही हैं, जिसके परिणामस्वरूप मौसम में भारी गिरावट दर्ज की गई है। इस स्थिति के चलते, किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपने खेतों की जुताई करवाएं और आगे के कृषि कार्यों को जारी रखें।1
- टीकमगढ़ के पलेरा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्वास्थ्य व्यवस्थाएं पूरी तरह से चरमरा गई हैं, जहां भीषण गर्मी में सैकड़ों मरीज इलाज के लिए पहुँच रहे हैं, लेकिन डॉक्टर नदारद मिल रहे हैं और कुर्सियां खाली पड़ी हैं। डॉक्टरों की इस लापरवाही से मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा है, जिसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। मरीजों और स्थानीय निवासियों का आरोप है कि सरकारी डॉक्टर सरकार से वेतन लेने के बावजूद अस्पताल पर कम ध्यान देते हैं। वे अपनी निजी क्लिनिक और घरों से मरीजों को देखते हैं, जबकि मरीजों को मेडिकल की बाहरी दवाइयां लिखकर अच्छा-खासा मुनाफा कमा रहे हैं। अस्पताल में पहले से ही दवाओं और डॉक्टरों की कमी है, जिसके कारण मरीजों को निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है और घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद भी इलाज नहीं मिल पाता। हाल ही में, अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकार संरक्षण संगठन के प्रांतीय नेतृत्व दल ने CHC पलेरा का आकस्मिक निरीक्षण किया। प्रांतीय महासचिव राम रतन दीक्षित के निरीक्षण में अस्पताल की भौतिक स्थिति अत्यंत दयनीय पाई गई, जिससे प्रशासनिक और नैतिक स्तर पर घोर अनियमितताएं उजागर हुईं। निरीक्षण के दौरान पता चला कि चिकित्सालय का मुख्य भवन अत्यंत प्राचीन और जीर्ण-शीर्ण है; स्टाफ ने बताया कि वर्षाकाल में छत से पानी टपकता है, जिससे बहुमूल्य चिकित्सीय उपकरण नष्ट हो रहे हैं और मरीजों में संक्रमण का खतरा बढ़ रहा है। संगठन ने अस्पताल में कुछ शासकीय कर्मचारियों की 'वटवृक्ष प्रवृत्ति' पर भी प्रकाश डाला, जो 5 से 10 वर्षों से एक ही स्थान पर जमे हुए हैं और शासकीय सेवा की आड़ में अवैध धनार्जन के लिए अनैतिक जड़ें फैला चुके हैं। इसके अतिरिक्त, 'हस्ताक्षर संस्कृति' का खुलासा हुआ, जहाँ कई कर्मचारी ड्यूटी से नदारद रहते हैं; वे या तो आते ही नहीं, या केवल उपस्थिति पंजी में हस्ताक्षर कर तुरंत चले जाते हैं, जिससे शासन को गुमराह कर बिना काम किए वेतन लिया जा रहा है। राम रतन दीक्षित ने इस स्थिति को शासकीय नियमों का घोर उल्लंघन और पलेरा क्षेत्र की गरीब जनता के स्वास्थ्य व मानव अधिकारों के साथ खिलवाड़ बताया है। संगठन ने जनहित में CMHO टीकमगढ़ से शिकायत कर कठोर कार्रवाई की मांग की है। उनकी प्रमुख मांगों में केवल हस्ताक्षर करके भागने वाले कर्मचारियों पर अंकुश लगाने के लिए अस्पताल में डिजिटल/बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य करना और समय-समय पर औचक निरीक्षण दल भेजना शामिल है।2
- शुक्रवार की रात करीब 9:30 बजे मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले में मौसम का मिजाज अचानक बदल गया। आसमान में काले बादल छाने के साथ ही तेज हवाओं के साथ झमाझम बारिश शुरू हो गई। पिछले कई दिनों से भीषण तपन और उमस झेल रहे टीकमगढ़ वासियों के लिए यह बारिश बड़ी राहत बनकर आई है। नौतपा की झुलसाने वाली गर्मी के बीच हुई इस बारिश और ठंडी हवाओं के चलते शहर का तापमान लुढ़ककर 27 डिग्री सेल्सियस पर आ गया है, जिससे वातावरण में अच्छी ठंडक घुल गई है। बारिश के दौरान लगभग 9 मील प्रति घंटे की रफ्तार से ठंडी हवाएं चलीं, जिसने परेशान लोगों को काफी सुकून प्रदान किया है।1
- टीकमगढ़ जिले के जतारा-पलेरा मार्ग पर स्थित कुड़ियाला गांव में ग्रामीणों ने शराब के विरोध में सड़क पर जाम लगा दिया। कनेरा चौकी के अंतर्गत आने वाले इस कुड़ियाला गांव में, महिलाओं सहित कई ग्रामीणों ने एकजुट होकर सड़क को अवरुद्ध किया और जमकर विरोध प्रदर्शन किया।1
- मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ से एक ब्रेकिंग न्यूज़ सामने आई है, जिसमें एक लाइव वीडियो के माध्यम से एक शख्स पर देशद्रोही होने का आरोप लगाया गया है। वीडियो में यह शख्स साधु के वेश में दिखाई दे रहा है और उसे डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के पोस्टर या बैनर पर आसन बनाकर बैठे हुए देखा जा सकता है। इस हरकत को लेकर पोस्ट में कड़ा आक्रोश व्यक्त किया गया है और साफ तौर पर कहा गया है कि ऐसे व्यक्ति को साधु नहीं, बल्कि देशद्रोही कहा जाना चाहिए। वीडियो को अधिक से अधिक लोगों तक शेयर करने की अपील की गई है ताकि इस शख्स को पकड़ा जा सके और उसे जेल की सलाखों के पीछे भेजा जा सके।1
- हिंदी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर जतारा स्थित पत्रिका कार्यालय में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें क्षेत्र के अनेक पत्रकारों ने भाग लिया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य हिंदी पत्रकारिता के महत्व, दायित्वों और वर्तमान चुनौतियों पर विचार व्यक्त करना था। कार्यक्रम का संचालन पत्रकार आदम कादरी ने किया, जिन्होंने पत्रकारों से सकारात्मक सोच के साथ कार्य करने, एक-दूसरे को नीचा दिखाने के बजाय निष्पक्षता और अपने विशिष्ट अंदाज में पत्रकारिता करने का आह्वान किया। इस दौरान, पूर्व जिला उपाध्यक्ष मुकेश तिवारी ने पत्रकारिता को समाज की आवाज बताते हुए पत्रकारों को ईमानदारी और निष्ठा के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने पर जोर दिया। बालकिशन प्रजापति ने पत्रकारिता के मूल गुणों और उसकी सामाजिक जिम्मेदारियों पर प्रकाश डाला, जबकि दशरथ विश्वकर्मा ने पत्रकारों की भूमिका को लोकतंत्र का महत्वपूर्ण स्तंभ बताया। लाली झा ने जनहित के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने तथा समाज के प्रति पत्रकारों की जवाबदेही पर महत्वपूर्ण विचार रखे। वहीं, आलोक भार्गव ने हिंदी पत्रकारिता दिवस के इतिहास और उसके महत्व की विस्तृत जानकारी दी, और बॉबी दुबे ने पत्रकारिता के आदर्शों, नैतिक मूल्यों और जनसेवा की भावना को बनाए रखने का संदेश दिया। कार्यक्रम के अंत में, सभी पत्रकारों ने हिंदी पत्रकारिता की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने तथा निष्पक्ष, निर्भीक और जनहितकारी पत्रकारिता के लिए सदैव प्रतिबद्ध रहने का संकल्प लिया। यह पूरा कार्यक्रम सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।4
- टीकमगढ़ जिले के जतारा और पलेरा के बीच कनेरा चौकी क्षेत्र के कुड़ियाला गांव में शराब की बिक्री और सेवन के विरोध में ग्रामीणों का भारी आक्रोश देखने को मिला। ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं ने, पलेरा-जतारा मार्ग को अवरुद्ध कर जोरदार प्रदर्शन किया, जिससे सड़क पर जाम लग गया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि गांव और आसपास के क्षेत्र में शराब के अवैध कारोबार के कारण सामाजिक माहौल बिगड़ रहा है, जिसका सीधा और नकारात्मक प्रभाव परिवारों तथा युवाओं पर पड़ रहा है। ग्रामीण महिलाओं ने सड़क पर बैठकर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और अवैध शराब की बिक्री पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। ग्रामीणों ने बताया कि इस संबंध में पहले भी कई बार शिकायतें की जा चुकी हैं, लेकिन समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है, जिसके कारण उन्हें सड़क पर उतरना पड़ा। इस प्रदर्शन के कारण पलेरा-जतारा मार्ग पर कुछ समय के लिए यातायात बाधित रहा और वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझाते हुए उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया, जिसके बाद स्थिति सामान्य हुई। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शराब की बिक्री पर प्रभावी रोक नहीं लगाई गई तो भविष्य में उनके आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।1