बीकानेर के ग्रामीण क्षेत्र में स्थित एक सरकारी स्कूल की बदहाल स्थिति ने शिक्षा व्यवस्था और बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्कूल भवन की हालत इतनी खराब है कि यदि इस समय ग्रीष्मकालीन अवकाश नहीं होता, तो कक्षा में पढ़ने वाले छात्रों की जान को खतरा हो सकता था। यह स्थिति तब है जब राजस्थान में पिछले वर्ष भी कई स्कूल भवन हादसों का शिकार हुए थे। सबसे दर्दनाक घटना झालावाड़ जिले के पिपलोद गांव में सामने आई थी, जहाँ स्कूल भवन का एक हिस्सा ढह जाने से सात बच्चों की मौत हो गई थी। इस भयावह हादसे के बाद राज्यभर में जर्जर स्कूल भवनों की जांच और मरम्मत के निर्देश जारी किए गए थे, और सरकार ने कई स्कूलों के लिए मरम्मत कार्यों के टेंडर भी निकाले थे। इसके बावजूद, बीकानेर के इस स्कूल की तस्वीरें और मौजूदा हालात यह दर्शाते हैं कि जमीनी स्तर पर अभी भी कई विद्यालय गंभीर जोखिम में हैं। मानसून शुरू होने से पहले ही यदि स्कूलों की यह स्थिति है, तो बरसात के मौसम में इन जर्जर भवनों में पढ़ने वाले हजारों बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि बारिश से पहले सभी जर्जर स्कूल भवनों का सर्वे कराया जाए और आवश्यक मरम्मत या वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी बड़े हादसे को टाला जा सके।
बीकानेर के ग्रामीण क्षेत्र में स्थित एक सरकारी स्कूल की बदहाल स्थिति ने शिक्षा व्यवस्था और बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्कूल भवन की हालत इतनी खराब है कि यदि इस समय ग्रीष्मकालीन अवकाश नहीं होता, तो कक्षा में पढ़ने वाले छात्रों की जान को खतरा हो सकता था। यह स्थिति तब है जब राजस्थान में पिछले वर्ष भी कई स्कूल भवन हादसों का शिकार हुए थे। सबसे दर्दनाक घटना झालावाड़ जिले के पिपलोद गांव में सामने आई थी, जहाँ स्कूल भवन का एक हिस्सा ढह जाने से सात बच्चों की मौत हो गई थी। इस भयावह हादसे के बाद राज्यभर में जर्जर स्कूल भवनों की जांच और मरम्मत के निर्देश जारी किए गए थे, और सरकार ने कई स्कूलों के लिए मरम्मत कार्यों के टेंडर भी निकाले थे। इसके बावजूद, बीकानेर के इस स्कूल की तस्वीरें और मौजूदा हालात यह दर्शाते हैं कि जमीनी स्तर पर अभी भी कई विद्यालय गंभीर जोखिम में हैं। मानसून शुरू होने से पहले ही यदि स्कूलों की यह स्थिति है, तो बरसात के मौसम में इन जर्जर भवनों में पढ़ने वाले हजारों बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि बारिश से पहले सभी जर्जर स्कूल भवनों का सर्वे कराया जाए और आवश्यक मरम्मत या वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी बड़े हादसे को टाला जा सके।
- जयपुर में टैक्सी और कमर्शियल वाहन चालकों को पुलिस तथा आरटीओ की कार्रवाई के डर से अपनी गाड़ियों पर लगे बंपर हटाने पड़ रहे हैं। वाहन चालकों का कहना है कि उन्हें यह कदम मजबूरी में उठाना पड़ रहा है, जबकि बंपर आमतौर पर वाहनों की सुरक्षा के लिए लगाए जाते हैं। इस स्थिति पर चालक सवाल उठा रहे हैं कि क्या सभी प्रकार के बंपरों को सीधे अवैध मान लिया जाए, या फिर प्रशासन को नियमों को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए। चालकों का यह भी तर्क है कि एक ओर वे बढ़ती महंगाई, ईंधन के दाम बढ़ने और घटती आमदनी जैसी चुनौतियों से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर चालान और प्रशासनिक कार्रवाई का डर उन्हें लगातार परेशान कर रहा है। इस बीच, पुलिस और परिवहन विभाग द्वारा यातायात नियमों के पालन को लेकर सख्ती लगातार बढ़ाई जा रही है। टैक्सी चालकों की मांग है कि नियमों को स्पष्ट किया जाए और वैध सुरक्षा उपकरणों पर अनावश्यक कार्रवाई से बचा जाए। वे जानना चाहते हैं कि क्या सुरक्षा और नियमों के बीच संतुलन बनाना आवश्यक नहीं है, और उनकी समस्याओं को आखिर कौन सुनेगा।1
- सोनम वांगचुक आज दिल्ली के जंतर मंतर पर आयोजित 'कॉकरोच प्रोटेस्ट' में शामिल हुए। इस विरोध प्रदर्शन में उन्हें अपने हाथों में फूल लिए देखा गया। इस घटना से संबंधित एक वीडियो भी सामने आया है।1
- देश के अविराम और निरंतर विकास को आगे बढ़ाने, सुरक्षा सुनिश्चित करने, आतंकवादियों का मुकाबला करने तथा देशविरोधी और देशद्रोहियों पर अंकुश लगाने के लिए बीजेपी का चयन करने का आह्वान किया गया है। लोगों से अपील की गई है कि इन महत्वपूर्ण उद्देश्यों की पूर्ति हेतु वे बीजेपी को चुनें।1
- बांसखोह कस्बे से एक बड़ी खबर सामने आई है। कस्बे में स्थित पेट्रोल पंप के ठीक सामने सड़क पर कई जगहों पर नालियां अवरुद्ध हो गई हैं, जिसके परिणामस्वरूप सड़क पर गंदा पानी बह रहा है। यह जानकारी रमेश चंद्र सैनी द्वारा दी गई।1
- राजस्थान के दौसा जिला अस्पताल में कार्यरत राजमेश कर्मचारियों को दो दिन पहले सरकार के अचानक जारी किए गए एक 'तुगलकी फरमान' के तहत बिना किसी पूर्व नोटिस के हटा दिया गया है। इस कार्रवाई से जिला अस्पताल की पूरी व्यवस्था चरमरा गई है और मरीजों का इलाज बुरी तरह प्रभावित हुआ है, क्योंकि हटाए गए कर्मचारियों की संख्या से दोगुने स्टाफ की अस्पताल को आवश्यकता है। इस फैसले से परमानेंट यूनियनों में भारी रोष व्याप्त है। उनका कहना है कि पहले से ही स्टाफ की कमी थी, और अब जब व्यवस्था थोड़ी सुधरी थी, सरकार ने उसे फिर से खराब कर दिया है। इसके चलते मरीजों का समुचित इलाज नहीं हो पा रहा है, इलाज को लेकर मरीजों के साथ रोज झगड़े हो रहे हैं, और हालात बिगड़ने में देर नहीं लग रही, जिससे किसी बड़े हादसे का खतरा मंडरा रहा है। राजमेश कर्मचारियों को हटाने के विरोध में परमानेंट नर्सिंग कर्मचारियों ने दूसरे दिन भी जिला अस्पताल में कार्य बहिष्कार प्रदर्शन जारी रखा। जिला अध्यक्ष महेंद्र मीना ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार राजमेश कर्मचारियों को जल्द से जल्द वापस उनकी ड्यूटी पर नहीं रखती है, तो यह कार्य बहिष्कार और तेज किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि इस आंदोलन को शीघ्र ही प्रदेशव्यापी बनाया जाएगा, क्योंकि राजस्थान के सभी जिलों में नर्सिंग ऑफिसर और लैब टेक्नीशियन को हटाया गया है, जो नर्सिंग के अधिकारों का हनन है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने इस लड़ाई को 'स्वाभिमान की लड़ाई' बताते हुए सरकार को नर्सिंग ऑफिसर को हल्के में न लेने की बात कही और दृढ़ता से आंदोलन लड़ने तथा हटाए गए साथियों को वापस लगवाने का संकल्प लिया। जिला अस्पताल में कार्य बहिष्कार तब तक जारी रहेगा जब तक हटाए गए राजमेश कर्मचारियों को बहाल नहीं किया जाता। इस प्रदर्शन में बने सिंह, कुमेश कुंजेला, सत्यनारायण मीणा, सतीश मीणा, गायत्री गुप्ता, रामकेश मीणा, मनीष शर्मा, पुरण बैरवा, रामावतार मीणा, अनीता सवारियां, अनीता, सीमा, दिनेश बैरवा, धीरज बैसला और अन्य राजमेश कर्मचारी शामिल रहे।1
- दौसा के रामगढ़ पचवारा पुलिस थाना ने कार्रवाई करते हुए चोरी हुए एक डंपर को जब्त किया है। पुलिस ने इस डंपर को पलवल-फरीदाबाद चौराहे से बरामद किया।2
- आज जयपुर की सड़कों पर एक अनोखा नज़ारा देखने को मिला, जहाँ एक पिकअप वाहन में एक ऊंट बैठा हुआ था और उसके ऊपर एक गाड़ी रखी गई थी। यह परिवहन नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है। हालांकि, आम आदमी अक्सर कुछ पैसे बचाने के उद्देश्य से इस तरह का जोखिम उठाता है। सामान्यतः, ऊंट गाड़ियों को रेत में या सड़क पर चलते हुए देखा जाता है, लेकिन इस बार का दृश्य बिल्कुल अलग था।1
- एक वायरल वीडियो में एक इंटरसेप्टर पुलिस अधिकारी द्वारा एक ड्राइवर से कथित रूप से अपमानजनक भाषा में बात करने का मामला सामने आया है। घटना के अनुसार, यदि वाहन की गति निर्धारित सीमा से अधिक थी, तो नियमानुसार चालान किया जा सकता था। हालांकि, किसी भी चालक से अभद्र भाषा में बात करना या धमकी भरे अंदाज में संवाद करना न तो कानून की भावना के अनुरूप माना गया है और न ही एक जिम्मेदार अधिकारी की गरिमा के। इस घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या वर्दी किसी को किसी नागरिक का अपमान करने का अधिकार देती है। जनता का मानना है कि ड्राइवर भी इस देश के नागरिक हैं, जो दिन-रात मेहनत कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं और परिवहन व्यवस्था को चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह स्वीकार किया गया है कि कानून का पालन करवाना आवश्यक है, लेकिन नागरिकों के प्रति सम्मानजनक व्यवहार भी उतना ही ज़रूरी है। अगर ड्राइवर की गलती थी तो सिर्फ चालान बनना चाहिए था, न कि अपमानजनक शब्दों का प्रयोग। प्रशासन से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करने और सभी पक्षों की बात सामने लाने की मांग की जा रही है।1
- आमेर निवासी हमारे भाई सुनील जी सैनी को उनके जन्मदिन के अवसर पर ढेर सारी हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ दी गई हैं।1