विदिशा पुलिस के लिए यह एक गौरवपूर्ण और हर्ष का क्षण रहा, जब जिले के विभिन्न थाना एवं इकाइयों में कार्यरत 15 आरक्षकों को प्रधान आरक्षक (कार्यवाहक) के पद पर पदोन्नत किया गया। यह पदोन्नति उनकी वरिष्ठता, सेवा अनुभव और विभागीय पात्रता के आधार पर की गई है, जो उनकी वर्षों की कर्तव्यनिष्ठ सेवा, मेहनत और समर्पण का सम्मान है। इसे पुलिस व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पदोन्नति प्राप्त करने वालों में रामशंकर कुशवाह (बैच नं. 27), शैलेन्द्र सिंह भदौरिया (बैच नं. 194), मलखान सिंह ठाकुर (बैच नं. 320), दीपक ठाकरे (बैच नं. 531), ममता लोधी (बैच नं. 308), हेमन्त कुमार नायक (बैच नं. 589), नंदराम अहिरवार (बैच नं. 65), जय कुमार श्रीवास्तव (बैच नं. 384), कृष्ण कुमार मिश्रा (बैच नं. 474), सुरेन्द्र सिंह (बैच नं. 396), महेश कुमार भील (बैच नं. 242), अखिलेश शुक्ला (बैच नं. 423), अरविन्द पाठक (बैच नं. 449), कमल सिंह रघुवंशी (बैच नं. 619) और भूपेन्द्र शर्मा (बैच नं. 790) शामिल हैं। पुलिस अधीक्षक रोहित काशवानी ने सभी पदोन्नत पुलिसकर्मियों को शुभकामनाएं और बधाई दी, साथ ही उनके उज्ज्वल भविष्य और सफल कार्यकाल की कामना की। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि पदोन्नति के साथ जिम्मेदारियां भी बढ़ती हैं, और उन्हें उम्मीद है कि सभी पदोन्नत अधिकारी अपनी नई भूमिका में उत्कृष्ट कार्य करेंगे तथा जनता की अपेक्षाओं पर खरे उतरेंगे। विदिशा पुलिस परिवार में ऐसे पदोन्नति के अवसर न केवल कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाते हैं, बल्कि बेहतर पुलिसिंग, प्रभावी कार्यप्रणाली और जनसेवा के प्रति समर्पण को भी नई ऊर्जा प्रदान करते हैं।
विदिशा पुलिस के लिए यह एक गौरवपूर्ण और हर्ष का क्षण रहा, जब जिले के विभिन्न थाना एवं इकाइयों में कार्यरत 15 आरक्षकों को प्रधान आरक्षक (कार्यवाहक) के पद पर पदोन्नत किया गया। यह पदोन्नति उनकी वरिष्ठता, सेवा अनुभव और विभागीय पात्रता के आधार पर की गई है, जो उनकी वर्षों की कर्तव्यनिष्ठ सेवा, मेहनत और समर्पण का सम्मान है। इसे पुलिस व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पदोन्नति प्राप्त करने वालों में रामशंकर कुशवाह (बैच नं. 27), शैलेन्द्र सिंह भदौरिया (बैच नं. 194), मलखान सिंह ठाकुर (बैच नं. 320), दीपक ठाकरे (बैच नं. 531), ममता लोधी (बैच नं. 308), हेमन्त कुमार नायक (बैच नं. 589), नंदराम अहिरवार (बैच नं. 65), जय कुमार श्रीवास्तव (बैच नं. 384), कृष्ण कुमार मिश्रा (बैच नं. 474), सुरेन्द्र सिंह (बैच नं. 396), महेश कुमार भील (बैच नं. 242), अखिलेश शुक्ला (बैच नं. 423), अरविन्द पाठक (बैच नं. 449), कमल सिंह रघुवंशी (बैच नं. 619) और भूपेन्द्र शर्मा (बैच नं. 790) शामिल हैं। पुलिस अधीक्षक रोहित काशवानी ने सभी पदोन्नत पुलिसकर्मियों को शुभकामनाएं और बधाई दी, साथ ही उनके उज्ज्वल भविष्य और सफल कार्यकाल की कामना की। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि पदोन्नति के साथ जिम्मेदारियां भी बढ़ती हैं, और उन्हें उम्मीद है कि सभी पदोन्नत अधिकारी अपनी नई भूमिका में उत्कृष्ट कार्य करेंगे तथा जनता की अपेक्षाओं पर खरे उतरेंगे। विदिशा पुलिस परिवार में ऐसे पदोन्नति के अवसर न केवल कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाते हैं, बल्कि बेहतर पुलिसिंग, प्रभावी कार्यप्रणाली और जनसेवा के प्रति समर्पण को भी नई ऊर्जा प्रदान करते हैं।
- विदिशा में बीती रात तेज आंधी-तूफान के साथ बारिश हुई, जिसके चलते रात से ही शहर में बिजली आपूर्ति पूरी तरह से बाधित रही। यह स्थिति आंधी और बारिश के कारण उत्पन्न हुई है।3
- बीना में दांगी समाज अनावश्यक आर्थिक बोझ कम करने और रूढ़िवादी प्रथाओं व कुरीतियों को मिटाने की दिशा में लगातार कदम बढ़ा रहा है। इसी कड़ी में, धनोरा परिवार ने स्वर्गीय राम सिंह ठाकुर की तेरहवीं न करने का निर्णय लेते हुए उनकी स्मृति में वृक्ष वितरित किए। राम सिंह ठाकुर, जिनकी 88 वर्ष की आयु में मृत्यु हुई थी, पूर्व मंत्री प्रभुसिंह ठाकुर के बड़े भाई और अशोक सिंह, इंदर सिंह (वकील साहब) तथा राजेंद्र सिंह के पिता थे। वे एक सुलझे हुए, पशु एवं प्रकृति प्रेमी व्यक्ति थे और उनके निधन से क्षेत्र में शोक की लहर है। धनोरा परिवार द्वारा आयोजित श्रद्धांजलि सभा में दांगी समाज के साथ-साथ सामाजिक एवं राजनीतिक जगत की कई प्रमुख हस्तियाँ उपस्थित रहीं। सभी ने स्वर्गीय राम सिंह दाऊ के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर दो मिनट का मौन रखा। इस अवसर पर कुंवर सिंह ठाकुर ने जोर देते हुए कहा कि समाज तभी आगे बढ़ता है जब हम कुरीतियों से बचकर शिक्षा पर ध्यान दें। उन्होंने धनोरा परिवार के तेरहवीं प्रथा बंद करने के समाज के निर्णय का समर्थन करने को एक उचित कदम बताया, साथ ही कहा कि जब वरिष्ठ लोग कुप्रथाओं को समाप्त करते हैं, तो मध्यम और छोटे वर्ग का भी हौसला बढ़ता है। रेल सलाहकार संतोष ठाकुर ने स्वर्गीय राम सिंह दाऊ को सुलझे हुए व्यक्तित्व का धनी बताया। बैरसिया से आए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राम भरोसी राठौर ने याद दिलाया कि पूर्व मंत्री प्रभु सिंह ठाकुर ने भी अपनी माता जी की तेरहवीं न करके उनकी याद में अंबेडकर चौराहा पर हैंडपंप खनन करवाया था और कई स्थानों पर वृक्षारोपण किया था। उन्होंने इस पहल को समाज के लिए प्रेरणादायक बताते हुए इस प्रथा को पूरी तरह समाप्त करने का आह्वान किया। उल्लेखनीय है कि दांगी समाज ने कई माह पूर्व ही आर्थिक बोझ से बचने के लिए तेरहवीं प्रथा को बंद करने का निर्णय लिया था। धनोरा परिवार ने इसी निर्णय का पालन करते हुए तेरहवीं के स्थान पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन कर वृक्ष वितरित किए, जिसमें ग्रामीणजन, शुभचिंतक और विभिन्न सामाजिक-राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।4
- रायसेन नगर पालिका परिषद ने एक शानदार पहल करते हुए 'स्वच्छता चौपाटी' का निर्माण किया है, जो इंदौर की प्रसिद्ध 'छप्पन' की तर्ज पर विकसित हो रही है। इस चौपाटी के साथ ही, यहाँ फ्री ऑक्सीजन पार्क की भी बेहतरीन व्यवस्था की गई है, जो रायसेन के निवासियों को आकर्षित कर रही है। नगर पालिका की यह पहल शहर में स्वच्छता और स्वास्थ्य के लिए एक अनूठी व्यवस्था प्रदान कर रही है।1
- विदिशा जिले के नटेरन में एक बेहद दुखद घटना सामने आई है, जहाँ घर के बाथरूम में नहाते समय 13 वर्षीय किशोर महेंद्र रघुवंशी की पानी की टंकी में डूबने से मौत हो गई। परिवार के सदस्य तत्काल उसे नटेरन अस्पताल लेकर पहुँचे, जिसके बाद उसे विदिशा मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। वहाँ डॉक्टरों ने जाँच के बाद महेंद्र को मृत घोषित कर दिया। परिवार के सदस्यों ने बताया कि घर में नहाने के लिए रखी बड़ी टंकी में वह अज्ञात कारण से डूब गया था। मृतक महेंद्र रघुवंशी का पोस्टमार्टम शुक्रवार दोपहर 12:30 बजे मेडिकल कॉलेज में कराया गया।4
- बीना के आगासौद थाना क्षेत्र के ग्राम देहरी में हुए एक अंधे कत्ल का पुलिस ने चंद घंटों में खुलासा कर दिया है। पहले जिसे सामान्य मौत समझा जा रहा था, वह परिजनों की सतर्कता और पुलिस की त्वरित कार्रवाई से हत्या का मामला निकला। पुलिस ने इस मामले में गांव के ही दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। जानकारी के अनुसार, देहरी निवासी 55 वर्षीय कल्लू चढ़ार गुरुवार रात गांव में एक कथा कार्यक्रम में शामिल होने गए थे। देर रात तक घर न लौटने पर उनकी तलाश की गई, जिसके बाद उनका शव गांव के एक बगीचे में संदिग्ध अवस्था में मिला। परिजन उन्हें तत्काल सिविल अस्पताल ले गए, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। अस्पताल से शव घर लाने के बाद परिजनों ने मृतक के गले और शरीर पर चोट के निशान देखे, जिससे उन्हें हत्या की आशंका हुई और उन्होंने डायल-112 के माध्यम से पुलिस को सूचना दी। आगासौद थाना पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सक्रियता दिखाई और शव को दोबारा जांच के लिए मर्चुरी में रखवाया। एफएसएल टीम और डॉक्टरों की जांच में गले पर दबाव के निशान पाए गए, जिससे गला घोंटकर हत्या किए जाने की पुष्टि हुई। पुलिस ने जांच तेज करते हुए गांव के ही कल्लू उर्फ विश्वनाथ ठाकुर और मनीष ठाकुर को हिरासत में लिया। कड़ी पूछताछ में दोनों आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। पुलिस जांच में सामने आया कि मृतक और आरोपियों के बीच लंबे समय से जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। इसी रंजिश के चलते आरोपियों ने पहले कल्लू चढ़ार के साथ मारपीट की और बाद में गला दबाकर उनकी हत्या कर दी। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहाँ से उन्हें जेल भेज दिया गया। वहीं, अस्पताल द्वारा शव का प्रारंभिक परीक्षण किए बिना परिजनों को सौंपने के मामले को भी केस डायरी में शामिल किया गया है, और पुलिस अधिकारियों ने वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र भेजकर विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा की है। पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया के निर्देशन में आगासौद थाना पुलिस की तत्परता से इस अंधे कत्ल का खुलासा कुछ ही घंटों में हो गया, जिसमें थाना प्रभारी नितिन पाल सहित प्रधान आरक्षक संतोष रेगवार, सतीश रावत, जगदीश कुमार, चालक संतोष तिवारी, आरक्षक लोकेंद्र यादव, रणवीर सिंह, सतीश शर्मा, रामकृष्ण योगी और दीपक की महत्वपूर्ण भूमिका रही।1