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जलभराव से पीड़ित परिवारों ने सड़क पे किया प्रदर्शन एक मां की पुकार ,क्या सुनेगी सरकार ❓ Lakhimpur Kheri dewkali road Gandhinagar shubham shrivtastava

11 hrs ago
user_Subham shrivtastava
Subham shrivtastava
लखीमपुर, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश•
11 hrs ago

जलभराव से पीड़ित परिवारों ने सड़क पे किया प्रदर्शन एक मां की पुकार ,क्या सुनेगी सरकार ❓ Lakhimpur Kheri dewkali road Gandhinagar shubham shrivtastava

More news from उत्तर प्रदेश and nearby areas
  • चकबंदी में गड़बड़ी का आरोप, 13 मजरे उजड़ने की आशंका विधायक को सौंपा ज्ञापन, जांच और कार्रवाई की मांग पलियाकलां। पलिया क्षेत्र की ग्राम पंचायत पटिहन के 13 मजरों में चल रही चकबंदी प्रक्रिया को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाते हुए पलिया विधायक‌ रोमी साहनी को एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन की मूल प्रति यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी भेजी गयी है। ग्राम प्रधान मंजीत मौर्य समेत ग्रामीणों ने ज्ञापन के माध्यम से चकबंदी विभाग पर नियमों के विपरीत चक काटे जाने का आरोप लगाया है। उन्होंने मामले की विभागीय जांच कराकर दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई करने एवं वर्षों से बसे गांवों की आबादी को उजड़ने से बचाने की मांग की है। ज्ञापन में बताया गया है कि ग्राम पंचायत पटिहन में करीब 42 वर्षों से चकबंदी की प्रक्रिया चल रही है। वर्ष 2023 में धारा 52 के तहत गांव को तहसील को हस्तांतरित किया गया। ग्राम पंचायत बड़ी होने के कारण इसमें मुसाफिरनगर, इंदिरा आवास कालोनी, खुशीपुर, अंबेडकरनगर, दरेरी, नयागांव, राजाटापर एवं अतरनगर सहित कुल 13 मजरे आते हैं। शिकायतकर्ताओं के अनुसार मुसाफिरनगर के गाटा संख्या 293, 294, 295, 296, 297, 274, 301 व 304 आदि पर वर्ष 1985 से गांव बसा हुआ है। इसी क्षेत्र में अम्बेडकरनगर का विद्या मंदिर नाम से मान्यता प्राप्त विद्यालय भी करीब 30 वर्षों से संचालित होने का दावा किया गया है। वहीं इंदिरा आवास कालोनी के गाटा संख्या 1061, 1068, 1069, 1070, 1071, 1072, 1082 व 1083 आदि पर भी वर्ष 1985 से आबादी बसी होने की बात ज्ञापन में कही गई है। इसी तरह खुशीपुर के गाटा संख्या 243 व 254 पर वर्ष 1960 से तथा दरेरी के गाटा संख्या 1108 पर करीब 40-42 वर्षों से गांव बसा होने का दावा किया गया है। 2021-22 में चक प्रदर्शित करने का आरोप ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि चकबंदी विभाग के तत्कालीन अधिकारियों व कर्मचारियों ने अंतिम अभिलेख तैयार करते समय वर्ष 2021-22 में इन गांवों की आबादी पर गलत ढंग से चक प्रदर्शित कर दिए। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि नियमानुसार वर्षों से बसे गांवों की आबादी पर चक प्रदर्शित नहीं किए जा सकते। आरोप है कि आबादी वाले क्षेत्रों में चक काटे जाने से ग्रामीणों के सामने अपने घर और जमीन बचाने का संकट खड़ा हो गया है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि चकबंदी नियमों के अनुसार नदी, नाला, बाग, सड़क और आबादी बसे गांवों के क्षेत्र को संबंधित प्रावधानों के तहत दर्ज किया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा न करते हुए कई स्थानों पर चक बना दिए गे। गलत चकों को निरस्त कर मूल अभिलेख में दर्ज करने की मांग ग्रामीणों ने मांग की है कि आबादी वाले क्षेत्रों में बनाए गए चकों की जांच कर उन्हें निरस्त किया जाए और गांवों की आबादी व स्कूल आदि को उनके मूल नक्शे व अभिलेख के आधार पर दर्ज किया जाए। साथ ही वर्ष 2021-22 में चकबंदी प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों व कर्मचारियों की भूमिका की विभागीय जांच कर दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जाए। ज्ञापन में विशेष रूप से मांग की गई है कि वर्षों से बसे गांवों की आबादी का अस्तित्व सुरक्षित रखते हुए ऐसी व्यवस्था की जाए, जिससे ग्रामीणों को अपने घरों से उजड़ने की स्थिति का सामना न करना पड़े। ज्ञापन पर ग्राम प्रधान मंजीत मौर्य के साथ जिला पंचायत सदस्य/भाजपा पदाधिकारी श्रीकृष्ण भार्गव सहित कई ग्रामीणों के हस्ताक्षर हैं।
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    चकबंदी में गड़बड़ी का आरोप, 13 मजरे उजड़ने की आशंका

विधायक को सौंपा ज्ञापन, जांच और कार्रवाई की मांग
पलियाकलां। पलिया क्षेत्र की ग्राम पंचायत पटिहन के 13 मजरों में चल रही चकबंदी प्रक्रिया को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाते हुए पलिया विधायक‌ रोमी साहनी को एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन की मूल प्रति यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी भेजी गयी है। ग्राम प्रधान मंजीत मौर्य समेत ग्रामीणों ने ज्ञापन के माध्यम से चकबंदी विभाग पर नियमों के विपरीत चक काटे जाने का आरोप लगाया है। उन्होंने मामले की विभागीय जांच कराकर दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई करने एवं वर्षों से बसे गांवों की आबादी को उजड़ने से बचाने की मांग की है।
ज्ञापन में बताया गया है कि ग्राम पंचायत पटिहन में करीब 42 वर्षों से चकबंदी की प्रक्रिया चल रही है। वर्ष 2023 में धारा 52 के तहत गांव को तहसील को हस्तांतरित किया गया। ग्राम पंचायत बड़ी होने के कारण इसमें मुसाफिरनगर, इंदिरा आवास कालोनी, खुशीपुर, अंबेडकरनगर, दरेरी, नयागांव, राजाटापर एवं अतरनगर सहित कुल 13 मजरे आते हैं।
शिकायतकर्ताओं के अनुसार मुसाफिरनगर के गाटा संख्या 293, 294, 295, 296, 297, 274, 301 व 304 आदि पर वर्ष 1985 से गांव बसा हुआ है। इसी क्षेत्र में अम्बेडकरनगर का विद्या मंदिर नाम से मान्यता प्राप्त विद्यालय भी करीब 30 वर्षों से संचालित होने का दावा किया गया है। वहीं इंदिरा आवास कालोनी के गाटा संख्या 1061, 1068, 1069, 1070, 1071, 1072, 1082 व 1083 आदि पर भी वर्ष 1985 से आबादी बसी होने की बात ज्ञापन में कही गई है।
इसी तरह खुशीपुर के गाटा संख्या 243 व 254 पर वर्ष 1960 से तथा दरेरी के गाटा संख्या 1108 पर करीब 40-42 वर्षों से गांव बसा होने का दावा किया गया है।
2021-22 में चक प्रदर्शित करने का आरोप
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि चकबंदी विभाग के तत्कालीन अधिकारियों व कर्मचारियों ने अंतिम अभिलेख तैयार करते समय वर्ष 2021-22 में इन गांवों की आबादी पर गलत ढंग से चक प्रदर्शित कर दिए। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि नियमानुसार वर्षों से बसे गांवों की आबादी पर चक प्रदर्शित नहीं किए जा सकते। आरोप है कि आबादी वाले क्षेत्रों में चक काटे जाने से ग्रामीणों के सामने अपने घर और जमीन बचाने का संकट खड़ा हो गया है।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि चकबंदी नियमों के अनुसार नदी, नाला, बाग, सड़क और आबादी बसे गांवों के क्षेत्र को संबंधित प्रावधानों के तहत दर्ज किया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा न करते हुए कई स्थानों पर चक बना दिए गे।
गलत चकों को निरस्त कर मूल अभिलेख में दर्ज करने की मांग
ग्रामीणों ने मांग की है कि आबादी वाले क्षेत्रों में बनाए गए चकों की जांच कर उन्हें निरस्त किया जाए और गांवों की आबादी व स्कूल आदि को उनके मूल नक्शे व अभिलेख के आधार पर दर्ज किया जाए। साथ ही वर्ष 2021-22 में चकबंदी प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों व कर्मचारियों की भूमिका की विभागीय जांच कर दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
ज्ञापन में विशेष रूप से मांग की गई है कि वर्षों से बसे गांवों की आबादी का अस्तित्व सुरक्षित रखते हुए ऐसी व्यवस्था की जाए, जिससे ग्रामीणों को अपने घरों से उजड़ने की स्थिति का सामना न करना पड़े।
ज्ञापन पर ग्राम प्रधान मंजीत मौर्य के साथ जिला पंचायत सदस्य/भाजपा पदाधिकारी श्रीकृष्ण भार्गव सहित कई ग्रामीणों के हस्ताक्षर हैं।
    user_निर्जेश मिश्र "पत्रकार"
    निर्जेश मिश्र "पत्रकार"
    लखीमपुर खीरी, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश•
    14 hrs ago
  • गोदाम में घुसा पानी, 120 बोरी डीएपी हुई बर्बाद! किसान खाद के लिए तरसते रहे, अछनिया बी-पैक्स में बारिश ने खोल दी भंडारण व्यवस्था की पोल बारिश की मार से खाद भीगी, नुकसान का जिम्मेदार कौन? मजदूरों ने बोरियां निकालकर बचाया, लेकिन तब तक हो चुका था बड़ा नुकसान बेहजम, लखीमपुर खीरी। किसानों के लिए डीएपी खाद की किल्लत और जरूरत के बीच अछनिया बी-पैक्स गोदाम में लापरवाही का ऐसा नजारा सामने आया, जिसने खाद के भंडारण की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार हो रही बारिश के चलते गोदाम में पानी भर गया और अंदर रखी करीब 120 बोरी डीएपी खाद पानी में भीग गई। बड़ी मात्रा में खाद के भीगने से नुकसान की स्थिति पैदा हो गई है। गोदाम में पानी भरने की जानकारी मिलते ही बी-पैक्स अध्यक्ष संजय दीक्षित एवं सचिव ने मजदूरों की मदद से आनन-फानन में खाद की बोरियां बाहर निकलवाईं और उन्हें सूखे स्थान पर रखवाया। हालांकि, तब तक करीब 120 बोरी डीएपी बारिश के पानी की चपेट में आ चुकी थी। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब बारिश का मौसम पहले से ही सामने था, तो किसानों के लिए महत्वपूर्ण डीएपी खाद के सुरक्षित भंडारण की पर्याप्त व्यवस्था क्यों नहीं की गई? गोदाम में पानी भरने की नौबत कैसे आई और खाद को बारिश के पानी से बचाने के लिए पहले से क्या इंतजाम किए गए थे? एक तरफ किसान डीएपी खाद के लिए परेशान हैं और खेतों में फसल बचाने के लिए खाद की जरूरत बनी हुई है, दूसरी तरफ बड़ी मात्रा में खाद का इस तरह भीग जाना व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि भीगी हुई खाद की वास्तविक स्थिति क्या है, कितनी खाद उपयोग योग्य बची है और हुए नुकसान का आकलन किस स्तर पर किया जाता है। किसानों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि जब खाद की एक-एक बोरी महत्वपूर्ण है, तो उसके सुरक्षित भंडारण में इतनी बड़ी चूक आखिर कैसे हुई?
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    गोदाम में घुसा पानी, 120 बोरी डीएपी हुई बर्बाद!

किसान खाद के लिए तरसते रहे, अछनिया बी-पैक्स में बारिश ने खोल दी भंडारण व्यवस्था की पोल

बारिश की मार से खाद भीगी, नुकसान का जिम्मेदार कौन?

मजदूरों ने बोरियां निकालकर बचाया, लेकिन तब तक हो चुका था बड़ा नुकसान

बेहजम, लखीमपुर खीरी। किसानों के लिए डीएपी खाद की किल्लत और जरूरत के बीच अछनिया बी-पैक्स गोदाम में लापरवाही का ऐसा नजारा सामने आया, जिसने खाद के भंडारण की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार हो रही बारिश के चलते गोदाम में पानी भर गया और अंदर रखी करीब 120 बोरी डीएपी खाद पानी में भीग गई। बड़ी मात्रा में खाद के भीगने से नुकसान की स्थिति पैदा हो गई है।
गोदाम में पानी भरने की जानकारी मिलते ही बी-पैक्स अध्यक्ष संजय दीक्षित एवं सचिव ने मजदूरों की मदद से आनन-फानन में खाद की बोरियां बाहर निकलवाईं और उन्हें सूखे स्थान पर रखवाया। हालांकि, तब तक करीब 120 बोरी डीएपी बारिश के पानी की चपेट में आ चुकी थी। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब बारिश का मौसम पहले से ही सामने था, तो किसानों के लिए महत्वपूर्ण डीएपी खाद के सुरक्षित भंडारण की पर्याप्त व्यवस्था क्यों नहीं की गई? गोदाम में पानी भरने की नौबत कैसे आई और खाद को बारिश के पानी से बचाने के लिए पहले से क्या इंतजाम किए गए थे? एक तरफ किसान डीएपी खाद के लिए परेशान हैं और खेतों में फसल बचाने के लिए खाद की जरूरत बनी हुई है, दूसरी तरफ बड़ी मात्रा में खाद का इस तरह भीग जाना व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि भीगी हुई खाद की वास्तविक स्थिति क्या है, कितनी खाद उपयोग योग्य बची है और हुए नुकसान का आकलन किस स्तर पर किया जाता है। किसानों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि जब खाद की एक-एक बोरी महत्वपूर्ण है, तो उसके सुरक्षित भंडारण में इतनी बड़ी चूक आखिर कैसे हुई?
    user_खुर्शीद आलम
    खुर्शीद आलम
    Newspaper publisher लखीमपुर, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश•
    16 hrs ago
  • लखीमपुर खीरी — कुंभी चीनी मिल की मालकिन अवंतिका सरावगी की किसानों से अपील लखीमपुर खीरी — कुंभी चीनी मिल की मालकिन अवंतिका सरावगी की किसानों से अपील कुंभी चीनी मिल की मालकिन अवंतिका सरावगी ने किसानों से खेतों में गिरे हुए गन्ने को उठाकर बांधने की अपील की है, उन्होंने कहा कि किसान गिरे हुए गन्ने को व्यवस्थित कर बांध दें, ताकि फसल को नुकसान से बचाया जा सके और गन्ने की कटाई एवं आपूर्ति में आसानी हो
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    लखीमपुर खीरी — कुंभी चीनी मिल की मालकिन अवंतिका सरावगी की किसानों से अपील
लखीमपुर खीरी — कुंभी चीनी मिल की मालकिन अवंतिका सरावगी की किसानों से अपील
कुंभी चीनी मिल की मालकिन अवंतिका सरावगी ने किसानों से खेतों में गिरे हुए गन्ने को उठाकर बांधने की अपील की है, उन्होंने कहा कि किसान गिरे हुए गन्ने को व्यवस्थित कर बांध दें, ताकि फसल को नुकसान से बचाया जा सके और गन्ने की कटाई एवं आपूर्ति में आसानी हो
    user_खीरी न्यूज़ अपडेट
    खीरी न्यूज़ अपडेट
    रिपोर्टर लखीमपुर, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश•
    18 hrs ago
  • *84 करोड़ के ओवरब्रिज पर भ्रष्टाचार का सवाल! बारिश ने खोली निर्माण की ‘पोल’?* *बारिश के बीच NH-730 पर गोला लखीमपुर रोड रेलवे क्रॉसिंग के पास नवनिर्मित ओवरब्रिज की सड़क शनिवार रात अचानक धंस गई। सड़क पर बने गहरे गड्ढे ने कुछ ही देर में राहगीरों और वाहन चालकों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया।* *हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि राहगीरों ने डंडे पर लाल टीशर्ट बांधकर मौके पर चेतावनी का इंतजाम किया, ताकि अंधेरे और बारिश में कोई वाहन गड्ढे में न जा गिरे। सूचना मिलते ही रात में प्रभारी निरीक्षक गोला अंबर सिंह पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे और सुरक्षा व्यवस्था कराई।* *सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस ओवरब्रिज को करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किया गया, उसकी सड़क बारिश के दौरान इतनी जल्दी कैसे धंस गई?* *यदि निर्माण गुणवत्ता मानकों के अनुरूप थी तो सड़क के नीचे ऐसी स्थिति पैदा होने की वजह क्या है?* *ओवरब्रिज की सड़क पर पहले से हल्का जंप आने की बात भी सामने आ रही है। अब सड़क धंसने की घटना ने निर्माण सामग्री, सड़क की लेयरिंग, जल निकासी व्यवस्था और निर्माण की गुणवत्ता की जांच की जरूरत को और गंभीर बना दिया है।* *गोला फ्लाईओवर के लिए उपलब्ध निविदा रिकॉर्ड में परियोजना की अनुमानित लागत करीब ₹127.56 करोड़ और एल-1 बोली ₹85.30 करोड़ दर्ज है। इसलिए स्थानीय स्तर पर इसे सीधे “84 करोड़ का ओवरब्रिज” कहने से पहले परियोजना के आधिकारिक लागत विवरण की पुष्टि जरूरी है।* *अब सवाल सिर्फ गड्ढे का नहीं, जवाबदेही का है* *क्या निर्माण कार्य की गुणवत्ता की स्वतंत्र तकनीकी जांच होगी?* *क्या संबंधित कार्यदायी संस्था और जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब मांगा जाएगा?* *क्या सड़क धंसने के वास्तविक कारण की जांच कर रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी?* *और सबसे अहम—अगर आज एक गड्ढा बना है, तो क्या कल इससे भी बड़ा हादसा होने का इंतजार किया जाएगा?* *स्थानीय लोगों का कहना है कि मौके पर तत्काल गड्ढा भरकर खतरा टाल दिया गया, लेकिन सिर्फ गड्ढा भर देना समस्या का समाधान नहीं है। जरूरत इस बात की है कि सड़क के नीचे की संरचना और पूरे हिस्से की तकनीकी जांच कराई जाए।* *करोड़ों की परियोजना पर सवाल उठे हैं तो जांच भी उसी गंभीरता से होनी चाहिए। आखिर जनता के पैसे से बनी सड़क जनता के लिए सुरक्षित क्यों नहीं?* *84 करोड़ के ओवरब्रिज पर भ्रष्टाचार का सवाल! बारिश ने खोली निर्माण की ‘पोल’?* *बारिश के बीच NH-730 पर गोला लखीमपुर रोड रेलवे क्रॉसिंग के पास नवनिर्मित ओवरब्रिज की सड़क शनिवार रात अचानक धंस गई। सड़क पर बने गहरे गड्ढे ने कुछ ही देर में राहगीरों और वाहन चालकों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया।* *हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि राहगीरों ने डंडे पर लाल टीशर्ट बांधकर मौके पर चेतावनी का इंतजाम किया, ताकि अंधेरे और बारिश में कोई वाहन गड्ढे में न जा गिरे। सूचना मिलते ही रात में प्रभारी निरीक्षक गोला अंबर सिंह पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे और सुरक्षा व्यवस्था कराई।* *सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस ओवरब्रिज को करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किया गया, उसकी सड़क बारिश के दौरान इतनी जल्दी कैसे धंस गई?* *यदि निर्माण गुणवत्ता मानकों के अनुरूप थी तो सड़क के नीचे ऐसी स्थिति पैदा होने की वजह क्या है?* *ओवरब्रिज की सड़क पर पहले से हल्का जंप आने की बात भी सामने आ रही है। अब सड़क धंसने की घटना ने निर्माण सामग्री, सड़क की लेयरिंग, जल निकासी व्यवस्था और निर्माण की गुणवत्ता की जांच की जरूरत को और गंभीर बना दिया है।* *गोला फ्लाईओवर के लिए उपलब्ध निविदा रिकॉर्ड में परियोजना की अनुमानित लागत करीब ₹127.56 करोड़ और एल-1 बोली ₹85.30 करोड़ दर्ज है। इसलिए स्थानीय स्तर पर इसे सीधे “84 करोड़ का ओवरब्रिज” कहने से पहले परियोजना के आधिकारिक लागत विवरण की पुष्टि जरूरी है।* *अब सवाल सिर्फ गड्ढे का नहीं, जवाबदेही का है* *क्या निर्माण कार्य की गुणवत्ता की स्वतंत्र तकनीकी जांच होगी?* *क्या संबंधित कार्यदायी संस्था और जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब मांगा जाएगा?* *क्या सड़क धंसने के वास्तविक कारण की जांच कर रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी?* *और सबसे अहम—अगर आज एक गड्ढा बना है, तो क्या कल इससे भी बड़ा हादसा होने का इंतजार किया जाएगा?* *स्थानीय लोगों का कहना है कि मौके पर तत्काल गड्ढा भरकर खतरा टाल दिया गया, लेकिन सिर्फ गड्ढा भर देना समस्या का समाधान नहीं है। जरूरत इस बात की है कि सड़क के नीचे की संरचना और पूरे हिस्से की तकनीकी जांच कराई जाए।* *करोड़ों की परियोजना पर सवाल उठे हैं तो जांच भी उसी गंभीरता से होनी चाहिए। आखिर जनता के पैसे से बनी सड़क जनता के लिए सुरक्षित क्यों नहीं?*
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    *84 करोड़ के ओवरब्रिज पर भ्रष्टाचार का सवाल! बारिश ने खोली निर्माण की ‘पोल’?*

 *बारिश के बीच NH-730 पर गोला लखीमपुर रोड रेलवे क्रॉसिंग के पास नवनिर्मित ओवरब्रिज की सड़क शनिवार रात अचानक धंस गई। सड़क पर बने गहरे गड्ढे ने कुछ ही देर में राहगीरों और वाहन चालकों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया।*

*हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि राहगीरों ने डंडे पर लाल टीशर्ट बांधकर मौके पर चेतावनी का इंतजाम किया, ताकि अंधेरे और बारिश में कोई वाहन गड्ढे में न जा गिरे। सूचना मिलते ही रात में प्रभारी निरीक्षक गोला अंबर सिंह पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे और सुरक्षा व्यवस्था कराई।*

*सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस ओवरब्रिज को करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किया गया, उसकी सड़क बारिश के दौरान इतनी जल्दी कैसे धंस गई?* 
*यदि निर्माण गुणवत्ता मानकों के अनुरूप थी तो सड़क के नीचे ऐसी स्थिति पैदा होने की वजह क्या है?*

*ओवरब्रिज की सड़क पर पहले से हल्का जंप आने की बात भी सामने आ रही है। अब सड़क धंसने की घटना ने निर्माण सामग्री, सड़क की लेयरिंग, जल निकासी व्यवस्था और निर्माण की गुणवत्ता की जांच की जरूरत को और गंभीर बना दिया है।*

*गोला फ्लाईओवर के लिए उपलब्ध निविदा रिकॉर्ड में परियोजना की अनुमानित लागत करीब ₹127.56 करोड़ और एल-1 बोली ₹85.30 करोड़ दर्ज है। इसलिए स्थानीय स्तर पर इसे सीधे “84 करोड़ का ओवरब्रिज” कहने से पहले परियोजना के आधिकारिक लागत विवरण की पुष्टि जरूरी है।*

*अब सवाल सिर्फ गड्ढे का नहीं, जवाबदेही का है*

*क्या निर्माण कार्य की गुणवत्ता की स्वतंत्र तकनीकी जांच होगी?*
*क्या संबंधित कार्यदायी संस्था और जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब मांगा जाएगा?*
*क्या सड़क धंसने के वास्तविक कारण की जांच कर रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी?*
*और सबसे अहम—अगर आज एक गड्ढा बना है, तो क्या कल इससे भी बड़ा हादसा होने का इंतजार किया जाएगा?*

*स्थानीय लोगों का कहना है कि मौके पर तत्काल गड्ढा भरकर खतरा टाल दिया गया, लेकिन सिर्फ गड्ढा भर देना समस्या का समाधान नहीं है। जरूरत इस बात की है कि सड़क के नीचे की संरचना और पूरे हिस्से की तकनीकी जांच कराई जाए।*

*करोड़ों की परियोजना पर सवाल उठे हैं तो जांच भी उसी गंभीरता से होनी चाहिए। आखिर जनता के पैसे से बनी सड़क जनता के लिए सुरक्षित क्यों नहीं?*
*84 करोड़ के ओवरब्रिज पर भ्रष्टाचार का सवाल! बारिश ने खोली निर्माण की ‘पोल’?*
*बारिश के बीच NH-730 पर गोला लखीमपुर रोड रेलवे क्रॉसिंग के पास नवनिर्मित ओवरब्रिज की सड़क शनिवार रात अचानक धंस गई। सड़क पर बने गहरे गड्ढे ने कुछ ही देर में राहगीरों और वाहन चालकों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया।*
*हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि राहगीरों ने डंडे पर लाल टीशर्ट बांधकर मौके पर चेतावनी का इंतजाम किया, ताकि अंधेरे और बारिश में कोई वाहन गड्ढे में न जा गिरे। सूचना मिलते ही रात में प्रभारी निरीक्षक गोला अंबर सिंह पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे और सुरक्षा व्यवस्था कराई।*
*सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस ओवरब्रिज को करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किया गया, उसकी सड़क बारिश के दौरान इतनी जल्दी कैसे धंस गई?* 
*यदि निर्माण गुणवत्ता मानकों के अनुरूप थी तो सड़क के नीचे ऐसी स्थिति पैदा होने की वजह क्या है?*
*ओवरब्रिज की सड़क पर पहले से हल्का जंप आने की बात भी सामने आ रही है। अब सड़क धंसने की घटना ने निर्माण सामग्री, सड़क की लेयरिंग, जल निकासी व्यवस्था और निर्माण की गुणवत्ता की जांच की जरूरत को और गंभीर बना दिया है।*
*गोला फ्लाईओवर के लिए उपलब्ध निविदा रिकॉर्ड में परियोजना की अनुमानित लागत करीब ₹127.56 करोड़ और एल-1 बोली ₹85.30 करोड़ दर्ज है। इसलिए स्थानीय स्तर पर इसे सीधे “84 करोड़ का ओवरब्रिज” कहने से पहले परियोजना के आधिकारिक लागत विवरण की पुष्टि जरूरी है।*
*अब सवाल सिर्फ गड्ढे का नहीं, जवाबदेही का है*
*क्या निर्माण कार्य की गुणवत्ता की स्वतंत्र तकनीकी जांच होगी?*
*क्या संबंधित कार्यदायी संस्था और जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब मांगा जाएगा?*
*क्या सड़क धंसने के वास्तविक कारण की जांच कर रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी?*
*और सबसे अहम—अगर आज एक गड्ढा बना है, तो क्या कल इससे भी बड़ा हादसा होने का इंतजार किया जाएगा?*
*स्थानीय लोगों का कहना है कि मौके पर तत्काल गड्ढा भरकर खतरा टाल दिया गया, लेकिन सिर्फ गड्ढा भर देना समस्या का समाधान नहीं है। जरूरत इस बात की है कि सड़क के नीचे की संरचना और पूरे हिस्से की तकनीकी जांच कराई जाए।*
*करोड़ों की परियोजना पर सवाल उठे हैं तो जांच भी उसी गंभीरता से होनी चाहिए। आखिर जनता के पैसे से बनी सड़क जनता के लिए सुरक्षित क्यों नहीं?*
    user_Sanjay rathour
    Sanjay rathour
    Tour operator लखीमपुर, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश•
    18 hrs ago
  • ज्ञानेश गद्दार की तलाश में दिल्ली स्थित आवास पहुंचे IYC कार्यकर्ता, अध्यक्ष उदय भानु भी रहे मौजूद ASTv24 digital शाहिद लखाही नई दिल्ली। इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) के कार्यकर्ता रविवार को ज्ञानेश के दिल्ली स्थित आधिकारिक आवास पर पहुंचे। इस दौरान IYC अध्यक्ष उदय भानु भी कार्यकर्ताओं के साथ मौजूद रहे। कार्यकर्ताओं ने कहा कि वे ज्ञानेश को न तो विदेश भागने देंगे और न ही दोबारा कथित तौर पर लोकतंत्र के खिलाफ कोई कार्रवाई करने देंगे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र से जुड़े मुद्दे का हिसाब होने तक उनका विरोध जारी रहेगा। IYC कार्यकर्ताओं ने इस दौरान अपने अभियान को लेकर नारेबाजी की और कहा कि वे लोकतांत्रिक अधिकारों एवं संस्थाओं से जुड़े सवालों को लगातार उठाते रहेंगे।
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    ज्ञानेश गद्दार की तलाश में दिल्ली स्थित आवास पहुंचे IYC कार्यकर्ता, अध्यक्ष उदय भानु भी रहे मौजूद
ASTv24 digital शाहिद लखाही 
नई दिल्ली। इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) के कार्यकर्ता रविवार को ज्ञानेश के दिल्ली स्थित आधिकारिक आवास पर पहुंचे। इस दौरान IYC अध्यक्ष उदय भानु भी कार्यकर्ताओं के साथ मौजूद रहे।
कार्यकर्ताओं ने कहा कि वे ज्ञानेश को न तो विदेश भागने देंगे और न ही दोबारा कथित तौर पर लोकतंत्र के खिलाफ कोई कार्रवाई करने देंगे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र से जुड़े मुद्दे का हिसाब होने तक उनका विरोध जारी रहेगा।
IYC कार्यकर्ताओं ने इस दौरान अपने अभियान को लेकर नारेबाजी की और कहा कि वे लोकतांत्रिक अधिकारों एवं संस्थाओं से जुड़े सवालों को लगातार उठाते रहेंगे।
    user_Journalist Shahid lakhahi
    Journalist Shahid lakhahi
    Mechanic लखीमपुर, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश•
    19 hrs ago
  • लखीमपुर खीरी देवकली रोड जलभराव से परेशान लोग उठे रोड पे प्रोटेस्ट करने जनता की एक ही मांग जलभराव से राहत दो🙏 भ्रष्टाचार का शिकार हुई जनता लखीमपुर खीरी देवकली रोड
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    लखीमपुर खीरी देवकली रोड जलभराव से परेशान लोग उठे रोड पे प्रोटेस्ट करने 
जनता की एक ही मांग जलभराव से राहत दो🙏
भ्रष्टाचार का शिकार हुई जनता लखीमपुर खीरी देवकली रोड
    user_Subham shrivtastava
    Subham shrivtastava
    लखीमपुर, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश•
    14 hrs ago
  • विकास कार्यों के अभाव में जलभराव से त्रिकौलिया के ग्रामीण बेहाल बारिश होते ही रास्तों पर भर जाता है पानी, कीचड़ से होकर निकलने को मजबूर ग्रामीण और स्कूली बच्चे पलियाकलां। पलिया क्षेत्र की ग्राम पंचायत त्रिकौलिया में विकास कार्यों के अभाव का खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। गांव में प्राथमिक विद्यालय के पीछे स्थित बस्ती में जलनिकासी की समुचित व्यवस्था न होने के कारण बारिश होते ही भारी जलभराव की स्थिति बन जाती है। रास्तों पर पानी और कीचड़ भरने से ग्रामीणों का आवागमन मुश्किल हो गया है। बारिश के दौरान बस्ती के रास्ते पूरी तरह जलमग्न हो जाते हैं। ऐसे में लोगों को मजबूरी में गंदे पानी और कीचड़ से होकर आवागमन करना पड़ता है। सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों को उठानी पड़ रही है। विद्यालय आने-जाने के दौरान बच्चों को जलभराव वाले रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे उनके कपड़े खराब होने के साथ ही फिसलकर गिरने का भी खतरा बना रहता है। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से जलनिकासी की समस्या बनी हुई है, लेकिन इस ओर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया। बारिश के दिनों में स्थिति और गंभीर हो जाती है। ग्रामीणों ने जिम्मेदार अधिकारियों से बस्ती में जलनिकासी की उचित व्यवस्था कराने एवं रास्तों का निर्माण कराए जाने की मांग की है, ताकि लोगों और स्कूली बच्चों को जलभराव व कीचड़ की समस्या से राहत मिल सके।
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    विकास कार्यों के अभाव में जलभराव से त्रिकौलिया के ग्रामीण बेहाल

बारिश होते ही रास्तों पर भर जाता है पानी, कीचड़ से होकर निकलने को मजबूर ग्रामीण और स्कूली बच्चे
पलियाकलां। पलिया क्षेत्र की ग्राम पंचायत त्रिकौलिया में विकास कार्यों के अभाव का खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। गांव में प्राथमिक विद्यालय के पीछे स्थित बस्ती में जलनिकासी की समुचित व्यवस्था न होने के कारण बारिश होते ही भारी जलभराव की स्थिति बन जाती है। रास्तों पर पानी और कीचड़ भरने से ग्रामीणों का आवागमन मुश्किल हो गया है। बारिश के दौरान बस्ती के रास्ते पूरी तरह जलमग्न हो जाते हैं। ऐसे में लोगों को मजबूरी में गंदे पानी और कीचड़ से होकर आवागमन करना पड़ता है। सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों को उठानी पड़ रही है। विद्यालय आने-जाने के दौरान बच्चों को जलभराव वाले रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे उनके कपड़े खराब होने के साथ ही फिसलकर गिरने का भी खतरा बना रहता है।
ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से जलनिकासी की समस्या बनी हुई है, लेकिन इस ओर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया। बारिश के दिनों में स्थिति और गंभीर हो जाती है। ग्रामीणों ने जिम्मेदार अधिकारियों से बस्ती में जलनिकासी की उचित व्यवस्था कराने एवं रास्तों का निर्माण कराए जाने की मांग की है, ताकि लोगों और स्कूली बच्चों को जलभराव व कीचड़ की समस्या से राहत मिल सके।
    user_निर्जेश मिश्र "पत्रकार"
    निर्जेश मिश्र "पत्रकार"
    लखीमपुर खीरी, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश•
    20 hrs ago
  • लखीमपुर खीरी- डीएम अंजनी कुमार सिंह ने कहा — “लगातार बारिश हो रही है, ऐसे में लोग कच्चे और क्षतिग्रस्त मकानों से दूर रहें। हमारी टीमें मदद के लिए तैयार हैं। यदि किसी के पास पक्का मकान या सुरक्षित आश्रय नहीं है तो प्रशासन उसके लिए रहने और भोजन की व्यवस्था करेगा। लोग सतर्क और सावधान रहें और फिलहाल ऐसे मकानों में जाने से बचें। 25, 26 और 27 सितंबर के लिए बारिश का अलर्ट जारी किया गया है और कल भी इसी तरह का मौसम बने रहने की संभावना है। सभी बैराजों में जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। बाढ़ प्रभावित गांवों में टीमें लगातार पहुंच रही हैं और जरूरत पड़ने पर लोगों के लिए आश्रय, भोजन और अन्य जरूरी सहायता उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।”
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    लखीमपुर खीरी-  डीएम  अंजनी  कुमार सिंह  ने  कहा      —

“लगातार बारिश हो रही है, ऐसे में लोग कच्चे और क्षतिग्रस्त मकानों से दूर रहें। हमारी टीमें मदद के लिए तैयार हैं। यदि किसी के पास पक्का मकान या सुरक्षित आश्रय नहीं है तो प्रशासन उसके लिए रहने और भोजन की व्यवस्था करेगा।
लोग सतर्क और सावधान रहें और फिलहाल ऐसे मकानों में जाने से बचें। 25, 26 और 27 सितंबर के लिए बारिश का अलर्ट जारी किया गया है और कल भी इसी तरह का मौसम बने रहने की संभावना है।
सभी बैराजों में जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। बाढ़ प्रभावित गांवों में टीमें लगातार पहुंच रही हैं और जरूरत पड़ने पर लोगों के लिए आश्रय, भोजन और अन्य जरूरी सहायता उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।”
    user_संदीप कुमार शर्मा
    संदीप कुमार शर्मा
    Photographer लखीमपुर, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश•
    20 hrs ago
  • जलभराव से राहत नहीं मिल रही लोगो का आक्रोश बढ़ता जा रहा है ✅ Lakhimpur Kheri dewkali road Gandhinagar shubham Shrivastava
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    जलभराव से राहत नहीं मिल रही 
लोगो का आक्रोश बढ़ता जा रहा है ✅
Lakhimpur Kheri dewkali road Gandhinagar 
shubham Shrivastava
    user_Subham shrivtastava
    Subham shrivtastava
    लखीमपुर, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश•
    13 hrs ago
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