ब्यावर में 2001 में अलॉट दुकानों पर कार्रवाई की आशंका से व्यापारी आक्रोशित, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन ब्यावर। नगर परिषद ब्यावर द्वारा मील रोड स्थित दुकानों को हटाने की कार्रवाई के विरोध में प्रभावित दुकानदारों ने जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और कार्रवाई तुरंत रोकने की मांग की। व्यापारियों ने प्रशासन की इस निष्क्रमण कार्रवाई पर कड़ा ऐतराज जताते हुए दुकानों की वैधता पर सवाल खड़े किए हैं। व्यापारियों ने बताया कि वर्ष 2001 में 'मुख्यमंत्री रोजगार योजना' के तहत लॉटरी प्रक्रिया के जरिए उन्हें इन दुकानों का आवंटन किया गया था। दुकानदारों ने निर्धारित राशि परिषद में जमा कराने के बाद ही दुकानों का निर्माण कराया था। पिछले लगभग 25 वर्षों से वे इन दुकानों के माध्यम से व्यापार कर अपने परिवारों का भरण-पोषण कर रहे हैं। पीड़ित दुकानदारों का आरोप है कि शनिवार को नगर परिषद के अधिकारी एवं कर्मचारी अचानक मौके पर पहुंचे और बिना किसी ठोस आधार के दुकानें खाली करने व सामान हटाने के निर्देश देने लगे। दुकानदारों का कहना है कि यह दुकानें ही उनके जीवनयापन का एकमात्र साधन हैं। यदि नगर परिषद द्वारा इन्हें तोड़ा जाता है, तो करीब 40 परिवारों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। व्यापारियों ने सवाल उठाया कि 25 साल पहले नियमानुसा आवंटित की गई दुकानें अचानक अवैध कैसे हो गईं? ज्ञापन देने पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर से मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए इस कार्रवाई को तुरंत प्रभाव से रुकवाने की गुहार लगाई है। ज्ञापन सौंपने के दौरान व्यापारी मुकेश, रमेश, पुरुषोत्तम, संपत, योगेंद्र, योगेश सहित बड़ी संख्या में प्रभावित दुकानदार उपस्थित रहे।
ब्यावर में 2001 में अलॉट दुकानों पर कार्रवाई की आशंका से व्यापारी आक्रोशित, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन ब्यावर। नगर परिषद ब्यावर द्वारा मील रोड स्थित दुकानों को हटाने की कार्रवाई के विरोध में प्रभावित दुकानदारों ने जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और कार्रवाई तुरंत रोकने की मांग की। व्यापारियों ने प्रशासन की इस निष्क्रमण कार्रवाई पर कड़ा ऐतराज जताते हुए दुकानों की वैधता पर सवाल खड़े किए हैं। व्यापारियों ने बताया कि वर्ष 2001 में 'मुख्यमंत्री रोजगार योजना' के तहत लॉटरी प्रक्रिया के जरिए उन्हें इन दुकानों का आवंटन किया गया था। दुकानदारों ने निर्धारित राशि परिषद में जमा कराने के बाद ही दुकानों का निर्माण कराया था। पिछले लगभग 25 वर्षों से वे इन दुकानों के माध्यम से व्यापार कर अपने परिवारों का भरण-पोषण कर रहे हैं। पीड़ित दुकानदारों का आरोप है कि शनिवार को नगर परिषद के अधिकारी एवं कर्मचारी अचानक मौके पर पहुंचे और बिना किसी ठोस आधार के दुकानें खाली करने व सामान हटाने के निर्देश देने लगे। दुकानदारों का कहना है कि यह दुकानें ही उनके जीवनयापन का एकमात्र साधन हैं। यदि नगर परिषद द्वारा इन्हें तोड़ा जाता है, तो करीब 40 परिवारों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। व्यापारियों ने सवाल उठाया कि 25 साल पहले नियमानुसा आवंटित की गई दुकानें अचानक अवैध कैसे हो गईं? ज्ञापन देने पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर से मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए इस कार्रवाई को तुरंत प्रभाव से रुकवाने की गुहार लगाई है। ज्ञापन सौंपने के दौरान व्यापारी मुकेश, रमेश, पुरुषोत्तम, संपत, योगेंद्र, योगेश सहित बड़ी संख्या में प्रभावित दुकानदार उपस्थित रहे।
- नितिन साहू के जन्मदिन पर थैलेसीमिया पीड़ितों के लिए बने ढाल, ब्यावर में हुआ 156 यूनिट रक्तदान!1
- ब्यावर में 2001 में अलॉट दुकानों पर कार्रवाई की आशंका से व्यापारी आक्रोशित, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन ब्यावर। नगर परिषद ब्यावर द्वारा मील रोड स्थित दुकानों को हटाने की कार्रवाई के विरोध में प्रभावित दुकानदारों ने जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और कार्रवाई तुरंत रोकने की मांग की। व्यापारियों ने प्रशासन की इस निष्क्रमण कार्रवाई पर कड़ा ऐतराज जताते हुए दुकानों की वैधता पर सवाल खड़े किए हैं। व्यापारियों ने बताया कि वर्ष 2001 में 'मुख्यमंत्री रोजगार योजना' के तहत लॉटरी प्रक्रिया के जरिए उन्हें इन दुकानों का आवंटन किया गया था। दुकानदारों ने निर्धारित राशि परिषद में जमा कराने के बाद ही दुकानों का निर्माण कराया था। पिछले लगभग 25 वर्षों से वे इन दुकानों के माध्यम से व्यापार कर अपने परिवारों का भरण-पोषण कर रहे हैं। पीड़ित दुकानदारों का आरोप है कि शनिवार को नगर परिषद के अधिकारी एवं कर्मचारी अचानक मौके पर पहुंचे और बिना किसी ठोस आधार के दुकानें खाली करने व सामान हटाने के निर्देश देने लगे। दुकानदारों का कहना है कि यह दुकानें ही उनके जीवनयापन का एकमात्र साधन हैं। यदि नगर परिषद द्वारा इन्हें तोड़ा जाता है, तो करीब 40 परिवारों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। व्यापारियों ने सवाल उठाया कि 25 साल पहले नियमानुसा आवंटित की गई दुकानें अचानक अवैध कैसे हो गईं? ज्ञापन देने पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर से मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए इस कार्रवाई को तुरंत प्रभाव से रुकवाने की गुहार लगाई है। ज्ञापन सौंपने के दौरान व्यापारी मुकेश, रमेश, पुरुषोत्तम, संपत, योगेंद्र, योगेश सहित बड़ी संख्या में प्रभावित दुकानदार उपस्थित रहे।1
- मांगलियावास पुलिस ने थाना क्षेत्र के चौराहे पर नाकाबंदी कर परिवहन नियमों के खिलाफ चलने वाले 10वाहन चालकों के बनाए चालान, थाना प्रभारी हरीश चौधरी ने कहा अभियान जारी रहेगा मांगलियावास पुलिस ने थाना क्षेत्र के चौराहे पर नाकाबंदी कर परिवहन नियमों के खिलाफ चलने वाले 10वाहन चालकों के बनाए चालान, थाना प्रभारी हरीश चौधरी ने कहा अभियान जारी रहेगा1
- राजस्थान काई जिलों में भारि बारिश का अलर्ट जयपुर भरतपुर अति भारी बारिश का अलर्ट 7 से 10 अगस्त तक राजस्थान में भारी बारिश का अलर्ट प्रदेश में मानसून फिर एक्टिव, अगले एक सप्ताह तक बारिश के आसार पूर्वी राजस्थान के अधिकांश जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी भरतपुर, जयपुर, कोटा, उदयपुर संभाग में भारी बारिश के आसार 8 से 10 अगस्त के बीच कई इलाकों में भारी से अतिभारी बारिश की संभावना1
- लामपोलाई से कावरियाट जाने वाली सड़क का निर्माण कुछ महीने पहले हुआ था। सड़क निर्माण के दौरान गांव में आवश्यक नाला नहीं बनाया गया, जिसके कारण अब बरसात के दिनों में ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बारिश और गांव का गंदा पानी सड़क पर जमा होने से गांव के बाहर करीब 3 से 4 फीट तक जलभराव हो गया है। इससे स्थानीय लोगों, स्कूली बच्चों और राहगीरों का आवागमन बेहद कठिन हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क बनने के बाद से पानी की निकासी की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की गई है। परिणामस्वरूप, बारिश का पानी लंबे समय तक सड़क पर ही जमा रहता है। लगातार जलभराव के कारण सड़क पर फिसलन बढ़ गई है, जिससे दोपहिया वाहन चालक आए दिन संतुलन खोकर गिर रहे हैं। कई लोग चोटिल भी हो चुके हैं। ग्रामीणों ने बड़े हादसे की आशंका जताई है। स्कूल जाने वाले बच्चों को रोजाना इसी गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे उनकी यूनिफॉर्म और किताबें भीग जाती हैं। बुजुर्गों और महिलाओं को भी पानी के बीच से निकलने में काफी परेशानी होती है। स्थानीय लोगों ने बताया कि जलभराव के कारण आसपास गंदगी फैल रही है, जिससे बीमारियों का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि सड़क निर्माण के समय नाला भी बना दिया जाता तो यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती। उन्होंने संबंधित विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि अधूरे निर्माण कार्य का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन और सार्वजनिक निर्माण विभाग से मांग की है कि मौके का शीघ्र निरीक्षण कर जल निकासी की उचित व्यवस्था की जाए तथा नाला निर्माण कराया जाए, ताकि सड़क पर जमा गंदे पानी से लोगों को राहत मिल सके। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे प्रशासन के समक्ष विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे। लामपोलाई से कावरियाट जाने वाली सड़क का निर्माण कुछ महीने पहले हुआ था। सड़क निर्माण के दौरान गांव में आवश्यक नाला नहीं बनाया गया, जिसके कारण अब बरसात के दिनों में ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बारिश और गांव का गंदा पानी सड़क पर जमा होने से गांव के बाहर करीब 3 से 4 फीट तक जलभराव हो गया है। इससे स्थानीय लोगों, स्कूली बच्चों और राहगीरों का आवागमन बेहद कठिन हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क बनने के बाद से पानी की निकासी की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की गई है। परिणामस्वरूप, बारिश का पानी लंबे समय तक सड़क पर ही जमा रहता है। लगातार जलभराव के कारण सड़क पर फिसलन बढ़ गई है, जिससे दोपहिया वाहन चालक आए दिन संतुलन खोकर गिर रहे हैं। कई लोग चोटिल भी हो चुके हैं। ग्रामीणों ने बड़े हादसे की आशंका जताई है। स्कूल जाने वाले बच्चों को रोजाना इसी गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे उनकी यूनिफॉर्म और किताबें भीग जाती हैं। बुजुर्गों और महिलाओं को भी पानी के बीच से निकलने में काफी परेशानी होती है। स्थानीय लोगों ने बताया कि जलभराव के कारण आसपास गंदगी फैल रही है, जिससे बीमारियों का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि सड़क निर्माण के समय नाला भी बना दिया जाता तो यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती। उन्होंने संबंधित विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि अधूरे निर्माण कार्य का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन और सार्वजनिक निर्माण विभाग से मांग की है कि मौके का शीघ्र निरीक्षण कर जल निकासी की उचित व्यवस्था की जाए तथा नाला निर्माण कराया जाए, ताकि सड़क पर जमा गंदे पानी से लोगों को राहत मिल सके। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे प्रशासन के समक्ष विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।1
- उपखंड अधिकारी सरवाड़ गजेंद्र शर्मा ने किया निरीक्षणपीएम श्री राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय सरवाड़ सरवाड़ उपखंड अधिकारी गजेंद्र शर्मा द्वारा आज पीएम श्री राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय सरवाड़ पीएम श्री महात्मा गांधी राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय विजय द्वार महात्मा गांधी राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय सापला गेट विद्यालयों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान आगामी नगर पालिका चुनाव की तैयारियों को देखते हुए मतदान केंद्रों का निरीक्षण किया एवं राजकीय पीएम श्री महात्मा गांधी विद्यालय विजय द्वार में पोषाहार का निरीक्षण किया। जिसमें उपखंड अधिकारी ने रोटी दाल व सब्जी को चक कर गुणवत्ता की जांच की साथ ही बच्चों से भी पोषाहार के बारे में जानकारी प्राप्त की उपखंड अधिकारी ने आवश्यक निर्देश देते हुए कहा कि विद्यालय में व्यवस्थाएं बनाएं रखने में किसी प्रकार की कोताही न बरतें मतदान केंद्रों का निरीक्षण करते हुए प्रधानाध्यापक एवं प्रगणकों को निर्देश दिए की मतदान बूथ में किसी भी प्रकार की कमी नहीं रहे निरीक्षण के दौरान तहसीलदार दिनेश चंद व चुनाव शाखा प्रभारी गोपाल लाल धाकड़ उपस्थित रहे1
- बामणिया बालाजी धाम में गूंजे हर-हर महादेव के जयकारे, सहस्र जलधारा में उमड़ा भक्ति का सैलाब बामणिया बालाजी धाम में गूंजे हर-हर महादेव के जयकारे, सहस्र जलधारा में उमड़ा भक्ति का सैलाब1
- राजस्थान मे ग्रामीणों का जल सत्याग्रह जानिए कपड़े उतार कर क्यों उतारे पानी में ब्यावर: श्री सीमेंट के भयंकर प्रदूषण के खिलाफ ग्रामीणों का उग्र 'जल सत्याग्रह'! फैक्ट्री से फैल रहे जहर से न पीने को साफ पानी बचा है और न ही खेती बची है। फसलों की बर्बादी और ग्रामीणों में फैल रही गंभीर बीमारियों से परेशान होकर आज ग्रामीणों ने अर्धनग्न हालत में दूषित तालाब में उतरकर प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। ग्रामीणों की साफ चेतावनी — जब तक प्रदूषण पर रोक और मुआवजा नहीं मिलेगा, यह लड़ाई जारी रहेगी! क्या प्रशासन को इस पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए? अपनी राय कमेंट में दर्ज करें।1