लामपोलाई से कावरियाट जाने वाली सड़क का निर्माण कुछ महीने पहले हुआ था। सड़क निर्माण के दौरान गांव में आवश्यक नाला नहीं बनाया गया, जिसके कारण अब बरसात के दिनों में ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बारिश और गांव का गंदा पानी सड़क पर जमा होने से गांव के बाहर करीब 3 से 4 फीट तक जलभराव हो गया है। इससे स्थानीय लोगों, स्कूली बच्चों और राहगीरों का आवागमन बेहद कठिन हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क बनने के बाद से पानी की निकासी की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की गई है। परिणामस्वरूप, बारिश का पानी लंबे समय तक सड़क पर ही जमा रहता है। लगातार जलभराव के कारण सड़क पर फिसलन बढ़ गई है, जिससे दोपहिया वाहन चालक आए दिन संतुलन खोकर गिर रहे हैं। कई लोग चोटिल भी हो चुके हैं। ग्रामीणों ने बड़े हादसे की आशंका जताई है। स्कूल जाने वाले बच्चों को रोजाना इसी गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे उनकी यूनिफॉर्म और किताबें भीग जाती हैं। बुजुर्गों और महिलाओं को भी पानी के बीच से निकलने में काफी परेशानी होती है। स्थानीय लोगों ने बताया कि जलभराव के कारण आसपास गंदगी फैल रही है, जिससे बीमारियों का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि सड़क निर्माण के समय नाला भी बना दिया जाता तो यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती। उन्होंने संबंधित विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि अधूरे निर्माण कार्य का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन और सार्वजनिक निर्माण विभाग से मांग की है कि मौके का शीघ्र निरीक्षण कर जल निकासी की उचित व्यवस्था की जाए तथा नाला निर्माण कराया जाए, ताकि सड़क पर जमा गंदे पानी से लोगों को राहत मिल सके। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे प्रशासन के समक्ष विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे। लामपोलाई से कावरियाट जाने वाली सड़क का निर्माण कुछ महीने पहले हुआ था। सड़क निर्माण के दौरान गांव में आवश्यक नाला नहीं बनाया गया, जिसके कारण अब बरसात के दिनों में ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बारिश और गांव का गंदा पानी सड़क पर जमा होने से गांव के बाहर करीब 3 से 4 फीट तक जलभराव हो गया है। इससे स्थानीय लोगों, स्कूली बच्चों और राहगीरों का आवागमन बेहद कठिन हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क बनने के बाद से पानी की निकासी की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की गई है। परिणामस्वरूप, बारिश का पानी लंबे समय तक सड़क पर ही जमा रहता है। लगातार जलभराव के कारण सड़क पर फिसलन बढ़ गई है, जिससे दोपहिया वाहन चालक आए दिन संतुलन खोकर गिर रहे हैं। कई लोग चोटिल भी हो चुके हैं। ग्रामीणों ने बड़े हादसे की आशंका जताई है। स्कूल जाने वाले बच्चों को रोजाना इसी गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे उनकी यूनिफॉर्म और किताबें भीग जाती हैं। बुजुर्गों और महिलाओं को भी पानी के बीच से निकलने में काफी परेशानी होती है। स्थानीय लोगों ने बताया कि जलभराव के कारण आसपास गंदगी फैल रही है, जिससे बीमारियों का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि सड़क निर्माण के समय नाला भी बना दिया जाता तो यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती। उन्होंने संबंधित विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि अधूरे निर्माण कार्य का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन और सार्वजनिक निर्माण विभाग से मांग की है कि मौके का शीघ्र निरीक्षण कर जल निकासी की उचित व्यवस्था की जाए तथा नाला निर्माण कराया जाए, ताकि सड़क पर जमा गंदे पानी से लोगों को राहत मिल सके। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे प्रशासन के समक्ष विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।
लामपोलाई से कावरियाट जाने वाली सड़क का निर्माण कुछ महीने पहले हुआ था। सड़क निर्माण के दौरान गांव में आवश्यक नाला नहीं बनाया गया, जिसके कारण अब बरसात के दिनों में ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बारिश और गांव का गंदा पानी सड़क पर जमा होने से गांव के बाहर करीब 3 से 4 फीट तक जलभराव हो गया है। इससे स्थानीय लोगों, स्कूली बच्चों और राहगीरों का आवागमन बेहद कठिन हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क बनने के बाद से पानी की निकासी की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की गई है। परिणामस्वरूप, बारिश का पानी लंबे समय तक सड़क पर ही जमा रहता है। लगातार जलभराव के कारण सड़क पर फिसलन बढ़ गई है, जिससे दोपहिया वाहन चालक आए दिन संतुलन खोकर गिर रहे हैं। कई लोग चोटिल भी हो चुके हैं। ग्रामीणों ने बड़े हादसे की आशंका जताई है। स्कूल जाने वाले बच्चों को रोजाना इसी गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे उनकी यूनिफॉर्म और किताबें भीग जाती हैं। बुजुर्गों और महिलाओं को भी पानी के बीच से निकलने में काफी परेशानी होती है। स्थानीय लोगों ने बताया कि जलभराव के कारण आसपास गंदगी फैल रही है, जिससे बीमारियों का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि सड़क निर्माण के समय नाला भी बना दिया जाता तो यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती। उन्होंने संबंधित विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि अधूरे निर्माण कार्य का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन और सार्वजनिक निर्माण विभाग से मांग की है कि मौके का शीघ्र निरीक्षण कर जल निकासी की उचित व्यवस्था की जाए तथा नाला निर्माण कराया जाए, ताकि सड़क पर जमा गंदे पानी से लोगों को राहत मिल सके। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे प्रशासन के समक्ष विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे। लामपोलाई से कावरियाट जाने वाली सड़क का निर्माण कुछ महीने पहले हुआ था। सड़क निर्माण के दौरान गांव में आवश्यक नाला नहीं बनाया गया, जिसके कारण अब बरसात के दिनों में ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बारिश और गांव का गंदा पानी सड़क पर जमा होने से गांव के बाहर करीब 3 से 4 फीट तक जलभराव हो गया है। इससे स्थानीय लोगों, स्कूली बच्चों और राहगीरों का आवागमन बेहद कठिन हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क बनने के बाद से पानी की निकासी की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की गई है। परिणामस्वरूप, बारिश का पानी लंबे समय तक सड़क पर ही जमा रहता है। लगातार जलभराव के कारण सड़क पर फिसलन बढ़ गई है, जिससे दोपहिया वाहन चालक आए दिन संतुलन खोकर गिर रहे हैं। कई लोग चोटिल भी हो चुके हैं। ग्रामीणों ने बड़े हादसे की आशंका जताई है। स्कूल जाने वाले बच्चों को रोजाना इसी गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे उनकी यूनिफॉर्म और किताबें भीग जाती हैं। बुजुर्गों और महिलाओं को भी पानी के बीच से निकलने में काफी परेशानी होती है। स्थानीय लोगों ने बताया कि जलभराव के कारण आसपास गंदगी फैल रही है, जिससे बीमारियों का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि सड़क निर्माण के समय नाला भी बना दिया जाता तो यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती। उन्होंने संबंधित विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि अधूरे निर्माण कार्य का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन और सार्वजनिक निर्माण विभाग से मांग की है कि मौके का शीघ्र निरीक्षण कर जल निकासी की उचित व्यवस्था की जाए तथा नाला निर्माण कराया जाए, ताकि सड़क पर जमा गंदे पानी से लोगों को राहत मिल सके। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे प्रशासन के समक्ष विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।
- लामपोलाई से कावरियाट जाने वाली सड़क का निर्माण कुछ महीने पहले हुआ था। सड़क निर्माण के दौरान गांव में आवश्यक नाला नहीं बनाया गया, जिसके कारण अब बरसात के दिनों में ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बारिश और गांव का गंदा पानी सड़क पर जमा होने से गांव के बाहर करीब 3 से 4 फीट तक जलभराव हो गया है। इससे स्थानीय लोगों, स्कूली बच्चों और राहगीरों का आवागमन बेहद कठिन हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क बनने के बाद से पानी की निकासी की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की गई है। परिणामस्वरूप, बारिश का पानी लंबे समय तक सड़क पर ही जमा रहता है। लगातार जलभराव के कारण सड़क पर फिसलन बढ़ गई है, जिससे दोपहिया वाहन चालक आए दिन संतुलन खोकर गिर रहे हैं। कई लोग चोटिल भी हो चुके हैं। ग्रामीणों ने बड़े हादसे की आशंका जताई है। स्कूल जाने वाले बच्चों को रोजाना इसी गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे उनकी यूनिफॉर्म और किताबें भीग जाती हैं। बुजुर्गों और महिलाओं को भी पानी के बीच से निकलने में काफी परेशानी होती है। स्थानीय लोगों ने बताया कि जलभराव के कारण आसपास गंदगी फैल रही है, जिससे बीमारियों का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि सड़क निर्माण के समय नाला भी बना दिया जाता तो यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती। उन्होंने संबंधित विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि अधूरे निर्माण कार्य का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन और सार्वजनिक निर्माण विभाग से मांग की है कि मौके का शीघ्र निरीक्षण कर जल निकासी की उचित व्यवस्था की जाए तथा नाला निर्माण कराया जाए, ताकि सड़क पर जमा गंदे पानी से लोगों को राहत मिल सके। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे प्रशासन के समक्ष विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे। लामपोलाई से कावरियाट जाने वाली सड़क का निर्माण कुछ महीने पहले हुआ था। सड़क निर्माण के दौरान गांव में आवश्यक नाला नहीं बनाया गया, जिसके कारण अब बरसात के दिनों में ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बारिश और गांव का गंदा पानी सड़क पर जमा होने से गांव के बाहर करीब 3 से 4 फीट तक जलभराव हो गया है। इससे स्थानीय लोगों, स्कूली बच्चों और राहगीरों का आवागमन बेहद कठिन हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क बनने के बाद से पानी की निकासी की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की गई है। परिणामस्वरूप, बारिश का पानी लंबे समय तक सड़क पर ही जमा रहता है। लगातार जलभराव के कारण सड़क पर फिसलन बढ़ गई है, जिससे दोपहिया वाहन चालक आए दिन संतुलन खोकर गिर रहे हैं। कई लोग चोटिल भी हो चुके हैं। ग्रामीणों ने बड़े हादसे की आशंका जताई है। स्कूल जाने वाले बच्चों को रोजाना इसी गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे उनकी यूनिफॉर्म और किताबें भीग जाती हैं। बुजुर्गों और महिलाओं को भी पानी के बीच से निकलने में काफी परेशानी होती है। स्थानीय लोगों ने बताया कि जलभराव के कारण आसपास गंदगी फैल रही है, जिससे बीमारियों का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि सड़क निर्माण के समय नाला भी बना दिया जाता तो यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती। उन्होंने संबंधित विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि अधूरे निर्माण कार्य का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन और सार्वजनिक निर्माण विभाग से मांग की है कि मौके का शीघ्र निरीक्षण कर जल निकासी की उचित व्यवस्था की जाए तथा नाला निर्माण कराया जाए, ताकि सड़क पर जमा गंदे पानी से लोगों को राहत मिल सके। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे प्रशासन के समक्ष विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।1
- मांगलियावास पुलिस ने थाना क्षेत्र के चौराहे पर नाकाबंदी कर परिवहन नियमों के खिलाफ चलने वाले 10वाहन चालकों के बनाए चालान, थाना प्रभारी हरीश चौधरी ने कहा अभियान जारी रहेगा मांगलियावास पुलिस ने थाना क्षेत्र के चौराहे पर नाकाबंदी कर परिवहन नियमों के खिलाफ चलने वाले 10वाहन चालकों के बनाए चालान, थाना प्रभारी हरीश चौधरी ने कहा अभियान जारी रहेगा1
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- नितिन साहू के जन्मदिन पर थैलेसीमिया पीड़ितों के लिए बने ढाल, ब्यावर में हुआ 156 यूनिट रक्तदान!1
- उपखंड अधिकारी सरवाड़ गजेंद्र शर्मा ने किया निरीक्षणपीएम श्री राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय सरवाड़ सरवाड़ उपखंड अधिकारी गजेंद्र शर्मा द्वारा आज पीएम श्री राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय सरवाड़ पीएम श्री महात्मा गांधी राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय विजय द्वार महात्मा गांधी राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय सापला गेट विद्यालयों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान आगामी नगर पालिका चुनाव की तैयारियों को देखते हुए मतदान केंद्रों का निरीक्षण किया एवं राजकीय पीएम श्री महात्मा गांधी विद्यालय विजय द्वार में पोषाहार का निरीक्षण किया। जिसमें उपखंड अधिकारी ने रोटी दाल व सब्जी को चक कर गुणवत्ता की जांच की साथ ही बच्चों से भी पोषाहार के बारे में जानकारी प्राप्त की उपखंड अधिकारी ने आवश्यक निर्देश देते हुए कहा कि विद्यालय में व्यवस्थाएं बनाएं रखने में किसी प्रकार की कोताही न बरतें मतदान केंद्रों का निरीक्षण करते हुए प्रधानाध्यापक एवं प्रगणकों को निर्देश दिए की मतदान बूथ में किसी भी प्रकार की कमी नहीं रहे निरीक्षण के दौरान तहसीलदार दिनेश चंद व चुनाव शाखा प्रभारी गोपाल लाल धाकड़ उपस्थित रहे1
- रियांबड़ी। पर्यावरण संरक्षण और हरियाली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत रियांबड़ी के रामकृष्ण स्कूल परिसर में एक सामूहिक वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में विद्यालय के अध्यापकों और बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस दौरान विद्यालय परिसर में विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए गए, जिनकी संरक्षण जिम्मेदारी विद्यार्थियों को सौंपी गई।वृक्षारोपण के दौरान कक्षा 6 से 10 तक के विद्यार्थियों ने पर्यावरण संरक्षण का विशेष संकल्प लिया। विद्यार्थियों ने वादा किया कि वे अपने घरों पर भी कम से कम एक पौधा लगाएंगे और उसकी नियमित देखभाल करेंगे। उन्होंने विद्यालय परिसर में लगाए गए पौधों को सुरक्षित रखने और उनके विकास में सहयोग करने का भी संकल्प लिया। शिक्षकों ने विद्यार्थियों को पौधों के महत्व और पर्यावरण संतुलन में उनकी भूमिका के बारे में जानकारी दी।कार्यक्रम में मागीलाल हालू, पिंटू हालू, साबू नाथ, राजू जाट, सुभाष जाट, रिजवान खान, मुकेश मेघवाल, रामकिशोर प्रजापत, ओमप्रकाश, सुमन, सुशीला, गंगा, अनीता सहित सुमन माली और गोविंद सिंह ने भी 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत पौधा लगाने और उसकी नियमित देखभाल करने की शपथ ली।वक्ताओं ने कार्यक्रम के दौरान कहा कि बढ़ते प्रदूषण और बदलते पर्यावरण को देखते हुए अधिक से अधिक पौधे लगाना आवश्यक है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि केवल पौधारोपण करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल और सुरक्षा करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने से समाज में जागरूकता का संदेश पहुंचेगा।विद्यालय परिवार ने इस अभियान को निरंतर आगे बढ़ाने तथा विद्यार्थियों और ग्रामीणों को अधिक से अधिक पौधे लगाने के लिए प्रेरित करने का संकल्प लिया। सामूहिक वृक्षारोपण के बाद विद्यार्थियों ने लगाए गए पौधों की देखभाल की जिम्मेदारी भी उत्साह के साथ स्वीकार की। रियांबड़ी। पर्यावरण संरक्षण और हरियाली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत रियांबड़ी के रामकृष्ण स्कूल परिसर में एक सामूहिक वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में विद्यालय के अध्यापकों और बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस दौरान विद्यालय परिसर में विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए गए, जिनकी संरक्षण जिम्मेदारी विद्यार्थियों को सौंपी गई।वृक्षारोपण के दौरान कक्षा 6 से 10 तक के विद्यार्थियों ने पर्यावरण संरक्षण का विशेष संकल्प लिया। विद्यार्थियों ने वादा किया कि वे अपने घरों पर भी कम से कम एक पौधा लगाएंगे और उसकी नियमित देखभाल करेंगे। उन्होंने विद्यालय परिसर में लगाए गए पौधों को सुरक्षित रखने और उनके विकास में सहयोग करने का भी संकल्प लिया। शिक्षकों ने विद्यार्थियों को पौधों के महत्व और पर्यावरण संतुलन में उनकी भूमिका के बारे में जानकारी दी।कार्यक्रम में मागीलाल हालू, पिंटू हालू, साबू नाथ, राजू जाट, सुभाष जाट, रिजवान खान, मुकेश मेघवाल, रामकिशोर प्रजापत, ओमप्रकाश, सुमन, सुशीला, गंगा, अनीता सहित सुमन माली और गोविंद सिंह ने भी 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत पौधा लगाने और उसकी नियमित देखभाल करने की शपथ ली।वक्ताओं ने कार्यक्रम के दौरान कहा कि बढ़ते प्रदूषण और बदलते पर्यावरण को देखते हुए अधिक से अधिक पौधे लगाना आवश्यक है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि केवल पौधारोपण करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल और सुरक्षा करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने से समाज में जागरूकता का संदेश पहुंचेगा।विद्यालय परिवार ने इस अभियान को निरंतर आगे बढ़ाने तथा विद्यार्थियों और ग्रामीणों को अधिक से अधिक पौधे लगाने के लिए प्रेरित करने का संकल्प लिया। सामूहिक वृक्षारोपण के बाद विद्यार्थियों ने लगाए गए पौधों की देखभाल की जिम्मेदारी भी उत्साह के साथ स्वीकार की।1
- जयपुर में दर्दनाक हादसा: स्कूल बस से टकराई तेज रफ्तार स्कॉर्पियो, 18 बच्चे घायल1