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SGN Kinder Garten स्कूल मेराल में अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी मो. आमिर रियाज को सम्मानित किया गया निदेशक श्री धर्मेंद्र देव ने किया सम्मानित
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SGN Kinder Garten स्कूल मेराल में अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी मो. आमिर रियाज को सम्मानित किया गया निदेशक श्री धर्मेंद्र देव ने किया सम्मानित
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- चलती बाइक में लगी भीषण आग, मचा हड़कंप सिंगरौली-बैढन टॉकीज चौराहा की घटना सड़क पर उस वक्त अफरा-तफरी मच गई जब एक चलती बाइक में अचानक आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि चालक को अपनी जान बचाकर मौके से भागना पड़ा। घटना के बाद आसपास मौजूद लोगों ने तत्परता दिखाते हुए आग बुझाने का प्रयास शुरू किया। स्थानीय लोगों की मदद से कुछ ही देर में आग पर काबू पा लिया गया, जिससे बड़ा हादसा टल गया। हालांकि, इस दौरान सड़क पर कुछ समय के लिए आवागमन प्रभावित रहा और मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बाइक चलते-चलते अचानक धू-धू कर जलने लगी, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया। आग लगने की सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस पहुंची मौके पर1
- Post by Bikram reporting News1
- मनिका लातेहार:- मनिका प्रखंड क्षेत्र में शिंजो पंचायत के डिग्री कॉलेज के पास खाता संख्या 271, प्लॉट संख्या 1825 के सरकारी जमीन में अवैध कब्जा कर रात के अंधेरे में चारदीवारी निर्माण का आरोप लग रहा है|जबकि इस प्लॉट का बंदोबस्ती 1955 ई. में लालसहाय घासी के नाम पर हुआ जिसका वंशावली इस प्रकार है लालसहाय घासी > सोहर घासी > दसरथ घासी पत्नी रजोइया कुंवर अब रजोइया कुंवर 27/11/2004 को धनपतिया देवी पति अवधबिहारी ठाकुर को बेच देती है| पुनः इस जमीन को धनपतिया देवी पति अवधबिहारी ठाकुर 9/01/2007 को यशोदा देवीपति रामलोचन यादव को बेच देती है| जो वर्तमान में इस जमीन का केवलादार यशोदा देवी है| इस जमीन में बेवजह अन्य मामलों के आड़ में रमेश पासवान और ईश्वरी प्रसाद का घसीटा जा रहा है,जबकि इस जमीन का इन दोनों से दूर दूर तक कोई तार जुड़ता नहीं दिख रहा है| चारदीवारी निर्माण के पहले ही अंचलाधिकारी ने इस मामले की छानबीन कर के निर्माण कार्य को जारी रखने का आदेश दिया था जबकि कई जनप्रतिनिधि और कांग्रेस नेता जमीन को सरकारी होने का आरोप लगाते दिख रहे है तथा उच्च स्तरीय जांच की मांग कर रहे है जबकि मामला इससे भिन्न है|2
- बलरामपुर जिले के रामानुजगंज तहसील क्षेत्र से राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा करने वाला एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां दस्तावेज लेखकों द्वारा रजिस्ट्री, नामांतरण और हक त्याग जैसे जरूरी कामों के नाम पर आम नागरिकों से खुलेआम अतिरिक्त वसूली किए जाने के आरोप लग रहे हैं। स्थानीय स्तर पर पिछले कई महीनों से इस तरह की शिकायतें सामने आ रही थीं, लेकिन अब एक ताजा मामले ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला क्या है? ग्राम कानपुर निवासी तस्वुन पति मुस्लिम अपने पिता के निधन के बाद अपनी हिस्सेदारी की भूमि अपने भाइयों—सिराजुद्दीन अंसारी, तैयब अंसारी और तालिब अंसारी (पिता वाजिद अंसारी, निवासी महावीर गंज)—के नाम हक त्याग (रिलinquishment) करने रामानुजगंज तहसील पहुंचीं। यह एक सामान्य प्रक्रिया है, जिसमें शासन द्वारा शुल्क पहले से तय होता है और उसी के आधार पर दस्तावेज तैयार किए जाते हैं। कागजों में कुछ, वसूली में कुछ और दस्तावेज में दर्ज विवरण के अनुसार: सर्विस चार्ज: ₹960 स्टांप ड्यूटी: ₹1600 रजिस्ट्रेशन फीस: ₹500 अन्य शुल्क सहित कुल: लगभग ₹3960 यानी सरकारी नियमों के मुताबिक पूरे काम का खर्च चार हजार रुपये से भी कम होना चाहिए था। लेकिन आरोप है कि हकीकत में इससे कई गुना ज्यादा पैसा लिया गया। तीन भाइयों से अलग-अलग ‘उगाही’ जानकारी के मुताबिक दस्तावेज लेखक ने तीनों भाइयों से अलग-अलग भारी रकम वसूली: एक से ₹10,000 दूसरे से ₹11,000 तीसरे से ₹12,000 इस तरह एक ही हक त्याग प्रक्रिया में कुल मिलाकर हजारों रुपये की अतिरिक्त वसूली की गई। यह रकम तय शुल्क से कई गुना अधिक है, जो सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन है। क्या यह अकेला मामला है? स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई एक मामला नहीं, बल्कि तहसील क्षेत्र में लंबे समय से चल रहा ‘सिस्टम’ है। रजिस्ट्री में अलग दर नामांतरण में अलग ‘सेटिंग’ हक त्याग में अलग ‘रेट’ हर काम के लिए अनौपचारिक शुल्क तय होने की बात कही जा रही है। कई लोग शिकायत करने से डरते हैं या प्रक्रिया में देरी के डर से चुपचाप पैसा दे देते हैं। जिम्मेदार कौन? सबसे बड़ा सवाल यही है कि: क्या तहसील प्रशासन को इस अवैध वसूली की जानकारी नहीं है? अगर जानकारी है, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या यह सब बिना किसी मिलीभगत के संभव है? दस्तावेज लेखकों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है, क्योंकि वही सीधे हितग्राहियों से संपर्क में रहते हैं और पूरी प्रक्रिया को नियंत्रित करते हैं। आम जनता सबसे ज्यादा परेशान इस तरह की वसूली का सबसे ज्यादा असर गरीब और ग्रामीण लोगों पर पड़ता है। जिन्हें नियमों की पूरी जानकारी नहीं होती जो सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने से बचना चाहते हैं और जिन्हें मजबूरी में ज्यादा पैसा देना पड़ता है जांच और कार्रवाई की मांग मामले के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि: पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए दस्तावेज लेखकों की भूमिका की जांच हो दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए और भविष्य में ऐसी वसूली रोकने के लिए पारदर्शी व्यवस्था लागू की जाए अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है, या फिर यह मामला भी बाकी शिकायतों की तरह दबकर रह जाएगा।1
- बलरामपुर: जमवंतपुर उप-स्वास्थ्य केंद्र में साल भर से CBC मशीन खराब, इलाज के अभाव में बैरंग लौट रहे ग्रामीण बलरामपुर जिले के जमान्तपुर में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली का एक बड़ा उदाहरण सामने आया है। विकासखंड के ग्राम जमवंतपुर स्थित उप-स्वास्थ्य केंद्र में पिछले एक साल से CBC (Complete Blood Count) मशीन खराब पड़ी है। अधिकारियों की इस बड़ी लापरवाही के कारण ग्रामीणों को बुनियादी खून जांच की सुविधा भी नहीं मिल पा रही है। इलाज के अभाव में 'उल्टे पैर' लौटने को मजबूर मरीज ग्रामीणों का आरोप है कि उप-स्वास्थ्य केंद्र पहुँचने के बाद जब उन्हें पता चलता है कि ब्लड टेस्ट की सुविधा उपलब्ध नहीं है, तो उन्हें भारी निराशा हाथ लगती है। कई मरीज इलाज के अभाव में अस्पताल से उल्टे पैर घर लौटने को मजबूर हैं। जो ग्रामीण आर्थिक रूप से थोड़े सक्षम हैं, उन्हें मजबूरी में 15 से 20 किलोमीटर दूर रामानुजगंज या जिला मुख्यालय बलरामपुर की दौड़ लगानी पड़ रही है। स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही हैरानी की बात यह है कि मशीन खराब होने की सूचना विभाग को है, लेकिन साल भर बीत जाने के बाद भी इसे सुधारने या नई मशीन लगाने की जहमत नहीं उठाई गई। दूरी की मार: जमवंतपुर से मुख्य शहरों की दूरी अधिक होने के कारण गरीब मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। समय पर इलाज नहीं: ब्लड रिपोर्ट न होने की वजह से डॉक्टर भी सही उपचार शुरू करने में असमर्थ रहते हैं। इलाके के ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के प्रति कड़ा रोष व्यक्त किया है। उनका कहना है कि सरकार एक तरफ बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण अंचलों में एक मशीन तक ठीक नहीं कराई जा रही है। हम बीमार होकर अस्पताल जाते हैं ताकि जांच हो सके, लेकिन वहां मशीन बंद पड़ी है। अब गरीब आदमी 20 किलोमीटर दूर टेस्ट कराने कैसे जाए1
- पांकी के शिक्षा निकेतन स्कूल में भीमराव अंबेडकर जयंती के अवसर पर आयोजित स्मृति सभा में छात्रों और शिक्षकों ने बाबा साहेब को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। समानता, शिक्षा और अधिकार के उनके विचारों को अपनाने का संकल्प लिया गया। 🙏📚 हैशटैग: #AmbedkarJayanti #BabaSahebAmbedkar #PankiNews #EducationForAll #Equality #Samanta #JanSamvad #SchoolEvent #JharkhandNews1
- लोगो को जागरूक किया, कैसे लोग आज के दौर में सोशल मीडिया से कमाई कर आगे बढ़ गए हैं l सुनिये बाबा जी के मुख से और सभी लाज सरमछोर कर, कमाई कi जरिया शुरू करें l लेकिन उचित मुदा और सफ बिचार हो l1
- लातेहार, लातेहार:लातेहार उपायुक्त श्री उत्कर्ष गुप्ता ने लातेहार जिला के सभी नागरिकों से विनम्र निवेदन करते हुए कहा कि नए शैक्षणिक सत्र में अपने बच्चों का विद्यालय में अनिवार्य रूप से नामांकन कराए तथा जो बच्चे किसी कारणवश विद्यालय छोड़ चुके है उन्हें विद्यालय पुनः नामांकन अवश्य कराए| इसके अतिरिक्त सभी अभिभावकों से आग्रह है कि आप अपने बच्चों को नियमित विद्यालय जाने के लिए प्रेरित करें|1
- बरवाडीह(लातेहार)। लातेहार जिले के बरवाडीह प्रखंड अंतर्गत केचकी पंचायत के ग्राम कंचनपुर स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय में पिछले कई महीनों से पेयजल की गंभीर समस्या बनी हुई है। स्कूल परिसर में लगा जलमीनार खराब पड़ा है, जिससे स्कूली बच्चों को पीने के पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। इस मामले में जब विद्यालय के प्रधानाध्यापक कुश कुमार पांडे से पूछताछ की गई तो उन्होंने बताया कि जलमीनार की मोटर का स्टार्टर जल गया है। उसे ठीक कराने का प्रयास किया गया, लेकिन अब तक सफलता नहीं मिल सकी। वहीं, जब उनसे मध्यान भोजन के लिए पानी की व्यवस्था के बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने अनभिज्ञता जाहिर करते हुए कहां कि रसोइया कहीं से भी पानी लाकर भोजन बनाती होगी। प्रधानाध्यापक का यह गैर-जिम्मेदाराना बयान कई सवाल खड़े करता है। बच्चों के लिए बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करना विद्यालय प्रबंधन की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है, लेकिन यहां स्थिति इसके विपरीत नजर आ रही है। बच्चों को पीने के पानी के लिए खुद इंतजाम करना पड़ रहा है, जो उनकी सेहत के लिए भी जोखिम भरा हो सकता है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इस स्थिति को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए विभागीय लापरवाही करार दिया है। उनका कहना है कि विद्यालय में न सिर्फ पेयजल, बल्कि अन्य बुनियादी सुविधाओं की भी जांच होनी चाहिए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके। ग्रामीणों और अभिभावकों ने प्रशासन से जल्द से जल्द समस्या के समाधान की मांग की है, ताकि बच्चों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो सके और उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो।1