रामानुजगंज तहसील में ‘हक त्याग’ बना लूट का जरिया, दस्तावेज लेखकों पर गंभीर आरोप बलरामपुर जिले के रामानुजगंज तहसील क्षेत्र से राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा करने वाला एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां दस्तावेज लेखकों द्वारा रजिस्ट्री, नामांतरण और हक त्याग जैसे जरूरी कामों के नाम पर आम नागरिकों से खुलेआम अतिरिक्त वसूली किए जाने के आरोप लग रहे हैं। स्थानीय स्तर पर पिछले कई महीनों से इस तरह की शिकायतें सामने आ रही थीं, लेकिन अब एक ताजा मामले ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला क्या है? ग्राम कानपुर निवासी तस्वुन पति मुस्लिम अपने पिता के निधन के बाद अपनी हिस्सेदारी की भूमि अपने भाइयों—सिराजुद्दीन अंसारी, तैयब अंसारी और तालिब अंसारी (पिता वाजिद अंसारी, निवासी महावीर गंज)—के नाम हक त्याग (रिलinquishment) करने रामानुजगंज तहसील पहुंचीं। यह एक सामान्य प्रक्रिया है, जिसमें शासन द्वारा शुल्क पहले से तय होता है और उसी के आधार पर दस्तावेज तैयार किए जाते हैं। कागजों में कुछ, वसूली में कुछ और दस्तावेज में दर्ज विवरण के अनुसार: सर्विस चार्ज: ₹960 स्टांप ड्यूटी: ₹1600 रजिस्ट्रेशन फीस: ₹500 अन्य शुल्क सहित कुल: लगभग ₹3960 यानी सरकारी नियमों के मुताबिक पूरे काम का खर्च चार हजार रुपये से भी कम होना चाहिए था। लेकिन आरोप है कि हकीकत में इससे कई गुना ज्यादा पैसा लिया गया। तीन भाइयों से अलग-अलग ‘उगाही’ जानकारी के मुताबिक दस्तावेज लेखक ने तीनों भाइयों से अलग-अलग भारी रकम वसूली: एक से ₹10,000 दूसरे से ₹11,000 तीसरे से ₹12,000 इस तरह एक ही हक त्याग प्रक्रिया में कुल मिलाकर हजारों रुपये की अतिरिक्त वसूली की गई। यह रकम तय शुल्क से कई गुना अधिक है, जो सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन है। क्या यह अकेला मामला है? स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई एक मामला नहीं, बल्कि तहसील क्षेत्र में लंबे समय से चल रहा ‘सिस्टम’ है। रजिस्ट्री में अलग दर नामांतरण में अलग ‘सेटिंग’ हक त्याग में अलग ‘रेट’ हर काम के लिए अनौपचारिक शुल्क तय होने की बात कही जा रही है। कई लोग शिकायत करने से डरते हैं या प्रक्रिया में देरी के डर से चुपचाप पैसा दे देते हैं। जिम्मेदार कौन? सबसे बड़ा सवाल यही है कि: क्या तहसील प्रशासन को इस अवैध वसूली की जानकारी नहीं है? अगर जानकारी है, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या यह सब बिना किसी मिलीभगत के संभव है? दस्तावेज लेखकों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है, क्योंकि वही सीधे हितग्राहियों से संपर्क में रहते हैं और पूरी प्रक्रिया को नियंत्रित करते हैं। आम जनता सबसे ज्यादा परेशान इस तरह की वसूली का सबसे ज्यादा असर गरीब और ग्रामीण लोगों पर पड़ता है। जिन्हें नियमों की पूरी जानकारी नहीं होती जो सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने से बचना चाहते हैं और जिन्हें मजबूरी में ज्यादा पैसा देना पड़ता है जांच और कार्रवाई की मांग मामले के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि: पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए दस्तावेज लेखकों की भूमिका की जांच हो दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए और भविष्य में ऐसी वसूली रोकने के लिए पारदर्शी व्यवस्था लागू की जाए अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है, या फिर यह मामला भी बाकी शिकायतों की तरह दबकर रह जाएगा।
रामानुजगंज तहसील में ‘हक त्याग’ बना लूट का जरिया, दस्तावेज लेखकों पर गंभीर आरोप बलरामपुर जिले के रामानुजगंज तहसील क्षेत्र से राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा करने वाला एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां दस्तावेज लेखकों द्वारा रजिस्ट्री, नामांतरण और हक त्याग जैसे जरूरी कामों के नाम पर आम नागरिकों से खुलेआम अतिरिक्त वसूली किए जाने के आरोप लग रहे हैं। स्थानीय स्तर पर पिछले कई महीनों से इस तरह की शिकायतें सामने आ रही थीं, लेकिन अब एक ताजा मामले ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला क्या है? ग्राम कानपुर निवासी तस्वुन पति मुस्लिम अपने पिता के निधन के बाद अपनी हिस्सेदारी की भूमि अपने भाइयों—सिराजुद्दीन अंसारी, तैयब अंसारी और तालिब अंसारी (पिता वाजिद अंसारी, निवासी महावीर गंज)—के नाम हक त्याग (रिलinquishment) करने रामानुजगंज तहसील पहुंचीं। यह एक सामान्य प्रक्रिया है, जिसमें शासन द्वारा शुल्क पहले से तय होता है और उसी के आधार पर दस्तावेज तैयार किए जाते हैं। कागजों में कुछ, वसूली में कुछ और दस्तावेज में दर्ज विवरण के अनुसार: सर्विस चार्ज: ₹960 स्टांप ड्यूटी: ₹1600 रजिस्ट्रेशन फीस: ₹500 अन्य शुल्क सहित कुल: लगभग ₹3960 यानी सरकारी नियमों के मुताबिक पूरे काम का खर्च चार हजार रुपये से भी कम होना चाहिए था। लेकिन आरोप है कि हकीकत में इससे कई गुना ज्यादा पैसा लिया गया। तीन भाइयों से अलग-अलग ‘उगाही’ जानकारी के मुताबिक दस्तावेज लेखक ने तीनों भाइयों से अलग-अलग भारी रकम वसूली: एक से ₹10,000 दूसरे से ₹11,000 तीसरे से ₹12,000 इस तरह एक ही हक त्याग प्रक्रिया में कुल मिलाकर हजारों रुपये की अतिरिक्त वसूली की गई। यह रकम तय शुल्क से कई गुना अधिक है, जो सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन है। क्या यह अकेला मामला है? स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई एक मामला नहीं, बल्कि तहसील क्षेत्र में लंबे समय से चल रहा ‘सिस्टम’ है। रजिस्ट्री में अलग दर नामांतरण में अलग ‘सेटिंग’ हक त्याग में अलग ‘रेट’ हर काम के लिए अनौपचारिक शुल्क तय होने की बात कही जा रही है। कई लोग शिकायत करने से डरते हैं या प्रक्रिया में देरी के डर से चुपचाप पैसा दे देते हैं। जिम्मेदार कौन? सबसे बड़ा सवाल यही है कि: क्या तहसील प्रशासन को इस अवैध वसूली की जानकारी नहीं है? अगर जानकारी है, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या यह सब बिना किसी मिलीभगत के संभव है? दस्तावेज लेखकों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है, क्योंकि वही सीधे हितग्राहियों से संपर्क में रहते हैं और पूरी प्रक्रिया को नियंत्रित करते हैं। आम जनता सबसे ज्यादा परेशान इस तरह की वसूली का सबसे ज्यादा असर गरीब और ग्रामीण लोगों पर पड़ता है। जिन्हें नियमों की पूरी जानकारी नहीं होती जो सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने से बचना चाहते हैं और जिन्हें मजबूरी में ज्यादा पैसा देना पड़ता है जांच और कार्रवाई की मांग मामले के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि: पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए दस्तावेज लेखकों की भूमिका की जांच हो दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए और भविष्य में ऐसी वसूली रोकने के लिए पारदर्शी व्यवस्था लागू की जाए अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है, या फिर यह मामला भी बाकी शिकायतों की तरह दबकर रह जाएगा।
- बलरामपुर जिले में अभिभावकों ने प्राइवेट स्कूलों की मनमानी के खिलाफ आवाज उठाई है। फीस में भारी बढ़ोतरी, महंगी किताबें और अतिरिक्त शुल्क वसूली को लेकर अभिभावकों ने कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी से मुलाकात कर शिकायत दर्ज कराई है। दरअसल जिले के अशासकीय विद्यालयों में इस साल 25 से 30 प्रतिशत तक फीस बढ़ाने का मामला सामने आया है। इसके साथ ही कई स्कूलों में मेंटेनेंस, डेवलपमेंट और हर साल री-एडमिशन फीस भी वसूली जा रही है।अभिभावकों का आरोप है कि बोर्ड द्वारा निर्धारित एनसीईआरटी और एससीईआरटी की सस्ती किताबों के बजाय स्कूल प्रबंधन महंगी प्राइवेट प्रकाशकों की किताबें खरीदने के लिए दबाव बना रहे हैं।जिससे पालकों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।इन्हीं समस्याओं को लेकर छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर राजेन्द्र कटारा और जिला शिक्षा अधिकारी एम.आर.यादव से जनदर्शन कार्यक्रम में मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। बाइट01- विशाल सिंह - अभिभावक(व्हाइट टी शर्ट) बाइट02-शैलेंद्र गुप्ता - अभिभावक(ब्लैक शर्ट) वीओ02-मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही टीम गठित कर जिलेभर के प्राइवेट स्कूलों की जांच की जाएगी। जांच के दौरान अभिभावकों की उपस्थिति भी सुनिश्चित की जाएगी और नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर कार्रवाई की जाएगी।प्राइवेट स्कूलों द्वारा मनमानी तरीके से फीस बढ़ाई जा रही है और महंगी किताबें थोपकर पालकों का शोषण किया जा रहा है। हम प्रशासन से मांग करते हैं कि इस पर तत्काल रोक लगाई जाए।1
- बलरामपुर राजीव भवन में मनाई गई डॉ. अंबेडकर जयंती, कांग्रेसियों ने बाबा साहेब के योगदान को किया याद बलरामपुर | 14 अप्रैल 2026 भारतीय संविधान के शिल्पकार और भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती आज जिला कांग्रेस कार्यालय 'राजीव भवन' बलरामपुर में गरिमापूर्ण ढंग से मनाई गई। जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष के निर्देशानुसार आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता ब्लॉक कांग्रेस कमेटी बलरामपुर के अध्यक्ष समीर सिंह देव ने की। श्रद्धांजलि और विचार गोष्ठी कार्यक्रम की शुरुआत में उपस्थित कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने बाबा साहेब के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम का सफल संचालन सेवादल के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष प्रेमसागर सिंह द्वारा किया गया। वक्ताओं ने बाबा साहेब के जीवन संघर्ष और सामाजिक न्याय के प्रति उनके योगदान पर प्रकाश डालते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। इस अवसर पर जिला कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ पदाधिकारियों सहित भारी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे, जिनमें मुख्य रूप से शामिल थे: वरिष्ठ नेतृत्व रिपोजित सिंह देव (वरिष्ठ उपाध्यक्ष), सुनील गुप्ता (कोषाध्यक्ष), छोटू बंगाली (उपाध्यक्ष)। संगठन पदाधिकारी बुद्धदेव सिंह पोया (जिला सचिव), अरुण दास, संजय खाखा, बिगन सिंह (ब्लॉक अध्यक्ष सेवादल)। जनप्रतिनिधि अमृत खलखो (जनपद सदस्य), कृपाशंकर, सूरजदेव ठाकुर, वसीम खान, मुमताज खान, अशरफ अंसारी। सक्रिय कार्यकर्ता इमरान, इरफान खान, हरभजन सिंह, सुभाष गुप्ता, उमाशंकर गुप्ता, तिलदेव यादव, सतनारायण यादव, पारसनाथ यादव, संतोषी सिंह, श्रीमती दुर्गावती, बैजनाथ सिंह, संतन भगत। युवा एवं अन्य सदस्य: विवेक सिंह, सुधांशु मंडल, राजू नायक, रविन्द्र सरकार, राहुल विश्वास, बांसदेव एवं अन्य।1
- बलरामपुर: रविदास समाज एवं सर्व अनुसूचित जाति समाज, पुराना बाजार बलरामपुर के तत्वावधान में आज डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान समाज के लोगों ने पुराना बाजार से रैली निकालकर अंबेडकर भवन तक मार्च किया। रैली के दौरान “जय भीम” के नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा और बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल हुए। रैली के अंबेडकर भवन पहुंचने के बाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जहां उपस्थित लोगों ने डॉ. भीमराव अंबेडकर के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम स्थल पर बड़ी संख्या में समाज के लोग एकत्रित हुए और बाबा साहेब के विचारों को याद करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।4
- बलरामपुर जिले के रामानुजगंज तहसील क्षेत्र से राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा करने वाला एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां दस्तावेज लेखकों द्वारा रजिस्ट्री, नामांतरण और हक त्याग जैसे जरूरी कामों के नाम पर आम नागरिकों से खुलेआम अतिरिक्त वसूली किए जाने के आरोप लग रहे हैं। स्थानीय स्तर पर पिछले कई महीनों से इस तरह की शिकायतें सामने आ रही थीं, लेकिन अब एक ताजा मामले ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला क्या है? ग्राम कानपुर निवासी तस्वुन पति मुस्लिम अपने पिता के निधन के बाद अपनी हिस्सेदारी की भूमि अपने भाइयों—सिराजुद्दीन अंसारी, तैयब अंसारी और तालिब अंसारी (पिता वाजिद अंसारी, निवासी महावीर गंज)—के नाम हक त्याग (रिलinquishment) करने रामानुजगंज तहसील पहुंचीं। यह एक सामान्य प्रक्रिया है, जिसमें शासन द्वारा शुल्क पहले से तय होता है और उसी के आधार पर दस्तावेज तैयार किए जाते हैं। कागजों में कुछ, वसूली में कुछ और दस्तावेज में दर्ज विवरण के अनुसार: सर्विस चार्ज: ₹960 स्टांप ड्यूटी: ₹1600 रजिस्ट्रेशन फीस: ₹500 अन्य शुल्क सहित कुल: लगभग ₹3960 यानी सरकारी नियमों के मुताबिक पूरे काम का खर्च चार हजार रुपये से भी कम होना चाहिए था। लेकिन आरोप है कि हकीकत में इससे कई गुना ज्यादा पैसा लिया गया। तीन भाइयों से अलग-अलग ‘उगाही’ जानकारी के मुताबिक दस्तावेज लेखक ने तीनों भाइयों से अलग-अलग भारी रकम वसूली: एक से ₹10,000 दूसरे से ₹11,000 तीसरे से ₹12,000 इस तरह एक ही हक त्याग प्रक्रिया में कुल मिलाकर हजारों रुपये की अतिरिक्त वसूली की गई। यह रकम तय शुल्क से कई गुना अधिक है, जो सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन है। क्या यह अकेला मामला है? स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई एक मामला नहीं, बल्कि तहसील क्षेत्र में लंबे समय से चल रहा ‘सिस्टम’ है। रजिस्ट्री में अलग दर नामांतरण में अलग ‘सेटिंग’ हक त्याग में अलग ‘रेट’ हर काम के लिए अनौपचारिक शुल्क तय होने की बात कही जा रही है। कई लोग शिकायत करने से डरते हैं या प्रक्रिया में देरी के डर से चुपचाप पैसा दे देते हैं। जिम्मेदार कौन? सबसे बड़ा सवाल यही है कि: क्या तहसील प्रशासन को इस अवैध वसूली की जानकारी नहीं है? अगर जानकारी है, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या यह सब बिना किसी मिलीभगत के संभव है? दस्तावेज लेखकों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है, क्योंकि वही सीधे हितग्राहियों से संपर्क में रहते हैं और पूरी प्रक्रिया को नियंत्रित करते हैं। आम जनता सबसे ज्यादा परेशान इस तरह की वसूली का सबसे ज्यादा असर गरीब और ग्रामीण लोगों पर पड़ता है। जिन्हें नियमों की पूरी जानकारी नहीं होती जो सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने से बचना चाहते हैं और जिन्हें मजबूरी में ज्यादा पैसा देना पड़ता है जांच और कार्रवाई की मांग मामले के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि: पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए दस्तावेज लेखकों की भूमिका की जांच हो दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए और भविष्य में ऐसी वसूली रोकने के लिए पारदर्शी व्यवस्था लागू की जाए अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है, या फिर यह मामला भी बाकी शिकायतों की तरह दबकर रह जाएगा।1
- हेमंत कुमार की रिपोर्ट डंडई प्रखंड मुख्यालय स्थित पैराडाइज पब्लिक स्कूल के छात्र-छात्राओं ने डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती के अवसर पर उत्साह और जोश के साथ भव्य शोभा यात्रा सह जागरूकता रैली निकाली। मंगलवार सुबह निकली रैली में शामिल बच्चों ने हाथों में तख्तियां लेकर समाज को शिक्षा, समानता और एकता का संदेश दिया। रैली बाजार समिति से शुरू होकर रविदास टोला, हनीफ शेख पेट्रोल पंप, थाना रोड और पुरानी बाजार होते हुए अंबेडकर चौक पहुंची। पूरे रास्ते “शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो”, “बेटा-बेटी एक समान”, “भेदभाव मिटाओ, भाईचारा बढ़ाओ” जैसे जोशीले नारों से माहौल गूंजता रहा। अंबेडकर चौक पर पहुंचकर छात्र-छात्राओं ने बाबा साहेब सहित अन्य महापुरुषों के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस दौरान भारतीय संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक पाठ भी किया गया, जिससे कार्यक्रम का महत्व और भी बढ़ गया। इसके बाद विद्यालय परिसर में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में मुख्य अतिथि जमुना प्रसाद रवि ने कहा कि ऐसे आयोजन समाज को जागरूक करने और इतिहास से सीख लेने का सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने विद्यालय के प्रयासों की सराहना करते हुए हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया। विद्यालय के निदेशक सिकंदर प्रजापति ने बाबा साहेब के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने समाज के हर वर्ग को अधिकार दिलाने का मार्ग प्रशस्त किया। वहीं पूर्व प्राचार्य आर.के. विश्वकर्मा ने उनके मूल मंत्र “शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो” को जीवन में अपनाने पर जोर दिया। प्राचार्य बिंदु कुमार रवि ने भी छात्र-छात्राओं को बाबा साहेब के आदर्शों पर चलने की प्रेरणा दी। कार्यक्रम में शिक्षक-शिक्षिकाओं और विद्यार्थियों की बड़ी भागीदारी देखने को मिली, जिससे पूरा वातावरण प्रेरणादायक बन गया।1
- रंका में युवा की असमय मृत्यु पर शोक: डॉ. पतंजलि केसरी ने परिवार से मिलकर दी सांत्वना, आर्थिक सहयोग का दिया भरोसा रंका में एक दुखद घटना सामने आई है, जहां मेन रोड निवासी विनय चंद्रवंशी के 25 वर्षीय पुत्र लव कुमार चंद्रवंशी की असमय मृत्यु से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है। बताया जा रहा है कि लव कुमार अंबिकापुर में एक दुकान पर काम करने गए थे, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। वह अपने परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य थे, जिनके निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। इस दुखद खबर के बाद सोमवार दोपहर करीब 1:00 बजे राधा पार्वती एजुकेशन ट्रस्ट के ऑर्गेनाइजर डॉ. पतंजलि केसरी, एकल विद्यालय के जिला सचिव सियाराम शरण वर्मा सहित अन्य लोग मृतक के घर पहुंचे। उन्होंने शोक संतप्त परिवार से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया और हर संभव आर्थिक सहयोग का भरोसा दिलाया। डॉ. पतंजलि केसरी ने मौके पर कहा कि समाज ने एक होनहार युवा को खो दिया है, जिसकी भरपाई संभव नहीं है। उन्होंने परिवार की दयनीय स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि पूरा परिवार एक ही कमरे में रहने को मजबूर है। उन्होंने कहा कि संभवतः अनुमंडल पदाधिकारी और उपायुक्त को इस स्थिति की जानकारी नहीं है, अन्यथा प्रशासन की ओर से जरूर मदद मिलती। उन्होंने प्रशासन से अपील करते हुए कहा कि ऐसे गरीब और जरूरतमंद परिवारों की पहचान कर उन्हें हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि वे सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें। इस मौके पर जिला नाई संघ के अध्यक्ष घनश्याम ठाकुर सहित अन्य गणमान्य लोग भी उपस्थित रहे और सभी ने मिलकर शोक संतप्त परिवार को सांत्वना दी तथा इस कठिन समय में उनके साथ खड़े रहने का भरोसा दिलाया।1
- अंबेडकर जयंती पर संबोधित करती डंडई पैराडाइज स्कूल की छात्रा साधना कुमारी1
- जागरूकता हेतु निकाली गई रैली बलरामपुर/ राष्ट्रीय अग्निशमन सेवा दिवस के अवसर पर कलेक्टर श्री राजेंद्र कटारा द्वारा अग्नि सुरक्षा बचाव कार्य के दौरान शहीद हुए अग्निशमन अधिकारी एवं कर्मचारियों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए दो मिनट का मौन धारण किया गया। इस अवसर पर कलेक्टर श्री कटारा ने जिलेवासियों से अग्नि सुरक्षा उपायों के प्रति सजग एवं जागरूक रहने की अपील की। उन्होंने जवानों से अग्नि दुर्घटनाओं से होने वाली क्षति को रोकने तथा समय रहते बचाव के उपायों की जानकारी आमजनो तक पहुंचाने की बात कही। कलेक्टर ने उपस्थित अधिकारियों एवं अग्निशमन कर्मियों को निर्देशित करते हुए कहा कि वे जिले के सभी स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों, जनसभाओं, हाट-बाजारों तथा आवासीय एवं व्यावसायिक क्षेत्रों में जाकर अग्नि सुरक्षा के उपायों का व्यापक प्रचार-प्रसार करें, ताकि अधिक से अधिक लोग जागरूक हो सकें। कार्यक्रम के अंतर्गत कलेक्टर श्री कटारा ने पुराना बस स्टैंड (कलेक्टर बंगला के समीप) से अग्नि सुरक्षा जागरूकता एवं यातायात नियमों के पालन हेतु बाइक रैली को हरी झंडी दिखाई। रैली पुराना बस स्टैंड से प्रारंभ होकर संयुक्त कलेक्ट्रेट कार्यालय तक शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए संपन्न हुई। रैली में अग्निशमन विभाग, पुलिस बल एवं नगर सैनिकों ने सक्रिय सहभागिता निभाई। इस अवसर पर रक्षित निरीक्षक श्री विमलेश कुमार देवांगन, अग्निशमन केंद्र प्रभारी उपनिरीक्षक श्री अखिलेश कुमार, फायरमेन श्री श्रवण कुमार लकड़ा, श्री सुनील एक्का, वाहन चालक सह ऑपरेटर श्री फ्रांसिस जेवियर, मेजर श्री संजय पटेल, श्री धर्मजीत नेताम सहित कार्यालय के अन्य कर्मचारी एवं जवान उपस्थित रहे।2