मध्य प्रदेश के डबरा में चर्चा का विषय बने कथित लाखों रुपये के लूटकांड का ग्वालियर पुलिस ने महज 24 घंटे के भीतर पर्दाफाश कर दिया है। पुलिस ने इस सनसनीखेज वारदात के पीछे की साजिश का खुलासा करते हुए बताया कि जिस महिला को पूरे मामले में पीड़िता माना जा रहा था, वह अपने पति और उसके साथियों के साथ मिलकर इस पूरी फर्जी लूट की मुख्य किरदार निकली। पुलिस ने इस मामले में लगभग 49.50 लाख रुपये का पूरा लूटा गया सामान भी बरामद कर लिया है। घटना 4 जून 2026 की है, जब डबरा सिटी थाना क्षेत्र की मोनिका उर्फ रानू श्रीवास्तव ने पुलिस को सूचना दी थी कि उनकी भाभी पिंकी श्रीवास्तव घर पर अकेली थीं। तभी एसी सर्विसिंग के बहाने दो युवक घर में घुसे, उन्होंने मारपीट की, पिंकी को बंधक बनाया और अलमारी से 2.50 लाख रुपये नकद व लाखों के सोने-चांदी के जेवरात लूटकर फरार हो गए। इस खबर से शहर में हड़कंप मच गया और सोशल मीडिया व मीडिया में यह प्रमुखता से प्रसारित हुई। जनदबाव को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह ने विशेष टीमों का गठन कर आरोपियों की गिरफ्तारी पर 10 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया था। डबरा अनुभाग, क्राइम ब्रांच और साइबर टीम ने संयुक्त रूप से जांच शुरू की। घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्य, मोबाइल लोकेशन और संदिग्ध गतिविधियों का विश्लेषण करने पर पुलिस को कथित लूट की कहानी पर संदेह हुआ। सीसीटीवी फुटेज में दिखाई दिए संदिग्धों की पहचान शुभम श्रीवास्तव और सोनू जाटव के रूप में हुई। पुलिस ने जब शुभम श्रीवास्तव को हिरासत में लेकर पूछताछ की, तो उसने पूरी साजिश का खुलासा कर दिया। शुभम ने बताया कि वह अपनी पत्नी पिंकी के साथ पिछले तीन महीनों से अपनी बहन मोनिका के घर रह रहा था। इसी दौरान पिंकी ने मोनिका को अलमारी में बड़ी मात्रा में नकदी और जेवर रखते हुए देख लिया, जिसके बाद दोनों ने संपत्ति हड़पने की योजना बनाई। योजना के तहत शुभम ने अपने दोस्त सोनू जाटव को साथ लिया। घटना वाले दिन जब मोनिका अपने बच्चों के साथ घर से बाहर थीं, तब शुभम और सोनू घर पहुंचे। पिंकी ने खुद दरवाजा खोला और सीसीटीवी कैमरे के सामने सामान्य बातचीत का नाटक किया ताकि किसी को शक न हो। इसके बाद घर के अंदर लोहे की रॉड से अलमारी तोड़ी गई और उसमें रखे 2.50 लाख रुपये नकद तथा लाखों के जेवर निकाल लिए गए। साजिश को असली लूट जैसा दिखाने के लिए ड्रेसिंग टेबल का कांच तोड़ा गया और पिंकी के माथे पर हल्की चोट भी पहुंचाई गई। फिर खुद को पीड़िता साबित करने के लिए पिंकी के हाथ-पैर बांध दिए गए। लूट की रकम में से एक लाख रुपये पिंकी के बैग में छिपाकर रख दिए गए, जबकि डेढ़ लाख रुपये सोनू जाटव को दे दिए गए। करोड़ों के बराबर महत्व रखने वाले जेवरातों को एक बैग में भरकर ग्वालियर निवासी आशिफ खान के घर छिपाया गया था। पुलिस की तकनीकी जांच, सीसीटीवी विश्लेषण और लगातार पूछताछ के दबाव में आरोपियों की कहानी टूट गई। पुलिस ने शुभम की निशानदेही पर सोनू जाटव को गिरफ्तार किया और उसके घर से 1.50 लाख रुपये बरामद किए। इसके बाद आशिफ खान के घर छापा मारकर सोने-चांदी के सभी जेवरात बरामद कर लिए गए और पिंकी के बैग से भी एक लाख रुपये बरामद हुए। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 252.82 ग्राम सोने के जेवर, लगभग 1.9 किलोग्राम चांदी के आभूषण, 2.50 लाख रुपये नकद और घटना में प्रयुक्त डिस्कवर मोटरसाइकिल जब्त की है, जिनकी कुल कीमत लगभग 49 लाख 50 हजार रुपये आंकी गई है। इस पूरे मामले को सुलझाने में डबरा सिटी थाना प्रभारी निरीक्षक संजय शर्मा, एसडीओपी डबरा सौरभ कुमार, डीएसपी अपराध नागेंद्र सिंह सिकरवार, डीएसपी मनीष यादव, क्राइम ब्रांच, साइबर सेल तथा डबरा, पिछोर और गिजौरा थाना पुलिस की संयुक्त टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। तकनीकी साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और वैज्ञानिक जांच के दम पर पुलिस ने 24 घंटे के भीतर इस हाई-प्रोफाइल मामले का सफलतापूर्वक खुलासा कर दिया, यह साबित करते हुए कि अपराधी चाहे कितनी भी शातिर योजना क्यों न बना लें, पुलिस की सतर्कता और जांच के सामने सच्चाई ज्यादा देर तक छिप नहीं सकती।
मध्य प्रदेश के डबरा में चर्चा का विषय बने कथित लाखों रुपये के लूटकांड का ग्वालियर पुलिस ने महज 24 घंटे के भीतर पर्दाफाश कर दिया है। पुलिस ने इस सनसनीखेज वारदात के पीछे की साजिश का खुलासा करते हुए बताया कि जिस महिला को पूरे मामले में पीड़िता माना जा रहा था, वह अपने पति और उसके साथियों के साथ मिलकर इस पूरी फर्जी लूट की मुख्य किरदार निकली। पुलिस ने इस मामले में लगभग 49.50 लाख रुपये का पूरा लूटा गया सामान भी बरामद कर लिया है। घटना 4 जून 2026 की है, जब डबरा सिटी थाना क्षेत्र की मोनिका उर्फ रानू श्रीवास्तव ने पुलिस को सूचना दी थी कि उनकी भाभी पिंकी श्रीवास्तव घर पर अकेली थीं। तभी एसी सर्विसिंग के बहाने दो युवक घर में घुसे, उन्होंने मारपीट की, पिंकी को बंधक बनाया और अलमारी से 2.50 लाख रुपये नकद व लाखों के सोने-चांदी के जेवरात लूटकर फरार हो गए। इस खबर से शहर में हड़कंप मच गया और सोशल मीडिया व मीडिया में यह प्रमुखता से प्रसारित हुई। जनदबाव को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह ने विशेष टीमों का गठन कर आरोपियों की गिरफ्तारी पर 10 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया था। डबरा अनुभाग, क्राइम ब्रांच और साइबर टीम ने संयुक्त रूप से जांच शुरू की। घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्य, मोबाइल लोकेशन और संदिग्ध गतिविधियों का विश्लेषण करने पर
पुलिस को कथित लूट की कहानी पर संदेह हुआ। सीसीटीवी फुटेज में दिखाई दिए संदिग्धों की पहचान शुभम श्रीवास्तव और सोनू जाटव के रूप में हुई। पुलिस ने जब शुभम श्रीवास्तव को हिरासत में लेकर पूछताछ की, तो उसने पूरी साजिश का खुलासा कर दिया। शुभम ने बताया कि वह अपनी पत्नी पिंकी के साथ पिछले तीन महीनों से अपनी बहन मोनिका के घर रह रहा था। इसी दौरान पिंकी ने मोनिका को अलमारी में बड़ी मात्रा में नकदी और जेवर रखते हुए देख लिया, जिसके बाद दोनों ने संपत्ति हड़पने की योजना बनाई। योजना के तहत शुभम ने अपने दोस्त सोनू जाटव को साथ लिया। घटना वाले दिन जब मोनिका अपने बच्चों के साथ घर से बाहर थीं, तब शुभम और सोनू घर पहुंचे। पिंकी ने खुद दरवाजा खोला और सीसीटीवी कैमरे के सामने सामान्य बातचीत का नाटक किया ताकि किसी को शक न हो। इसके बाद घर के अंदर लोहे की रॉड से अलमारी तोड़ी गई और उसमें रखे 2.50 लाख रुपये नकद तथा लाखों के जेवर निकाल लिए गए। साजिश को असली लूट जैसा दिखाने के लिए ड्रेसिंग टेबल का कांच तोड़ा गया और पिंकी के माथे पर हल्की चोट भी पहुंचाई गई। फिर खुद को पीड़िता साबित करने के लिए पिंकी के हाथ-पैर बांध दिए गए। लूट की रकम में से एक लाख रुपये पिंकी के बैग में छिपाकर रख दिए गए, जबकि डेढ़ लाख रुपये
सोनू जाटव को दे दिए गए। करोड़ों के बराबर महत्व रखने वाले जेवरातों को एक बैग में भरकर ग्वालियर निवासी आशिफ खान के घर छिपाया गया था। पुलिस की तकनीकी जांच, सीसीटीवी विश्लेषण और लगातार पूछताछ के दबाव में आरोपियों की कहानी टूट गई। पुलिस ने शुभम की निशानदेही पर सोनू जाटव को गिरफ्तार किया और उसके घर से 1.50 लाख रुपये बरामद किए। इसके बाद आशिफ खान के घर छापा मारकर सोने-चांदी के सभी जेवरात बरामद कर लिए गए और पिंकी के बैग से भी एक लाख रुपये बरामद हुए। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 252.82 ग्राम सोने के जेवर, लगभग 1.9 किलोग्राम चांदी के आभूषण, 2.50 लाख रुपये नकद और घटना में प्रयुक्त डिस्कवर मोटरसाइकिल जब्त की है, जिनकी कुल कीमत लगभग 49 लाख 50 हजार रुपये आंकी गई है। इस पूरे मामले को सुलझाने में डबरा सिटी थाना प्रभारी निरीक्षक संजय शर्मा, एसडीओपी डबरा सौरभ कुमार, डीएसपी अपराध नागेंद्र सिंह सिकरवार, डीएसपी मनीष यादव, क्राइम ब्रांच, साइबर सेल तथा डबरा, पिछोर और गिजौरा थाना पुलिस की संयुक्त टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। तकनीकी साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और वैज्ञानिक जांच के दम पर पुलिस ने 24 घंटे के भीतर इस हाई-प्रोफाइल मामले का सफलतापूर्वक खुलासा कर दिया, यह साबित करते हुए कि अपराधी चाहे कितनी भी शातिर योजना क्यों न बना लें, पुलिस की सतर्कता और जांच के सामने सच्चाई ज्यादा देर तक छिप नहीं सकती।
- User10718Khandwa Nagar, East Nimar😡8 min ago
- डबरा सिटी थाना पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर कार्रवाई करते हुए एक मारुति वैगनआर कार से 35 पेटी अवैध शराब बरामद की है। इस बड़ी कार्रवाई के तहत, पुलिस ने तत्काल शराब से लदी इस गाड़ी को जब्त कर लिया। पुलिस ने मौके से शेखर शाक्य नामक आरोपी को भी गिरफ्तार किया है। आरोपी के खिलाफ आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और अब आगे की जांच जारी है।1
- मध्य प्रदेश के डबरा में चर्चा का विषय बने कथित लाखों रुपये के लूटकांड का ग्वालियर पुलिस ने महज 24 घंटे के भीतर पर्दाफाश कर दिया है। पुलिस ने इस सनसनीखेज वारदात के पीछे की साजिश का खुलासा करते हुए बताया कि जिस महिला को पूरे मामले में पीड़िता माना जा रहा था, वह अपने पति और उसके साथियों के साथ मिलकर इस पूरी फर्जी लूट की मुख्य किरदार निकली। पुलिस ने इस मामले में लगभग 49.50 लाख रुपये का पूरा लूटा गया सामान भी बरामद कर लिया है। घटना 4 जून 2026 की है, जब डबरा सिटी थाना क्षेत्र की मोनिका उर्फ रानू श्रीवास्तव ने पुलिस को सूचना दी थी कि उनकी भाभी पिंकी श्रीवास्तव घर पर अकेली थीं। तभी एसी सर्विसिंग के बहाने दो युवक घर में घुसे, उन्होंने मारपीट की, पिंकी को बंधक बनाया और अलमारी से 2.50 लाख रुपये नकद व लाखों के सोने-चांदी के जेवरात लूटकर फरार हो गए। इस खबर से शहर में हड़कंप मच गया और सोशल मीडिया व मीडिया में यह प्रमुखता से प्रसारित हुई। जनदबाव को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह ने विशेष टीमों का गठन कर आरोपियों की गिरफ्तारी पर 10 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया था। डबरा अनुभाग, क्राइम ब्रांच और साइबर टीम ने संयुक्त रूप से जांच शुरू की। घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्य, मोबाइल लोकेशन और संदिग्ध गतिविधियों का विश्लेषण करने पर पुलिस को कथित लूट की कहानी पर संदेह हुआ। सीसीटीवी फुटेज में दिखाई दिए संदिग्धों की पहचान शुभम श्रीवास्तव और सोनू जाटव के रूप में हुई। पुलिस ने जब शुभम श्रीवास्तव को हिरासत में लेकर पूछताछ की, तो उसने पूरी साजिश का खुलासा कर दिया। शुभम ने बताया कि वह अपनी पत्नी पिंकी के साथ पिछले तीन महीनों से अपनी बहन मोनिका के घर रह रहा था। इसी दौरान पिंकी ने मोनिका को अलमारी में बड़ी मात्रा में नकदी और जेवर रखते हुए देख लिया, जिसके बाद दोनों ने संपत्ति हड़पने की योजना बनाई। योजना के तहत शुभम ने अपने दोस्त सोनू जाटव को साथ लिया। घटना वाले दिन जब मोनिका अपने बच्चों के साथ घर से बाहर थीं, तब शुभम और सोनू घर पहुंचे। पिंकी ने खुद दरवाजा खोला और सीसीटीवी कैमरे के सामने सामान्य बातचीत का नाटक किया ताकि किसी को शक न हो। इसके बाद घर के अंदर लोहे की रॉड से अलमारी तोड़ी गई और उसमें रखे 2.50 लाख रुपये नकद तथा लाखों के जेवर निकाल लिए गए। साजिश को असली लूट जैसा दिखाने के लिए ड्रेसिंग टेबल का कांच तोड़ा गया और पिंकी के माथे पर हल्की चोट भी पहुंचाई गई। फिर खुद को पीड़िता साबित करने के लिए पिंकी के हाथ-पैर बांध दिए गए। लूट की रकम में से एक लाख रुपये पिंकी के बैग में छिपाकर रख दिए गए, जबकि डेढ़ लाख रुपये सोनू जाटव को दे दिए गए। करोड़ों के बराबर महत्व रखने वाले जेवरातों को एक बैग में भरकर ग्वालियर निवासी आशिफ खान के घर छिपाया गया था। पुलिस की तकनीकी जांच, सीसीटीवी विश्लेषण और लगातार पूछताछ के दबाव में आरोपियों की कहानी टूट गई। पुलिस ने शुभम की निशानदेही पर सोनू जाटव को गिरफ्तार किया और उसके घर से 1.50 लाख रुपये बरामद किए। इसके बाद आशिफ खान के घर छापा मारकर सोने-चांदी के सभी जेवरात बरामद कर लिए गए और पिंकी के बैग से भी एक लाख रुपये बरामद हुए। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 252.82 ग्राम सोने के जेवर, लगभग 1.9 किलोग्राम चांदी के आभूषण, 2.50 लाख रुपये नकद और घटना में प्रयुक्त डिस्कवर मोटरसाइकिल जब्त की है, जिनकी कुल कीमत लगभग 49 लाख 50 हजार रुपये आंकी गई है। इस पूरे मामले को सुलझाने में डबरा सिटी थाना प्रभारी निरीक्षक संजय शर्मा, एसडीओपी डबरा सौरभ कुमार, डीएसपी अपराध नागेंद्र सिंह सिकरवार, डीएसपी मनीष यादव, क्राइम ब्रांच, साइबर सेल तथा डबरा, पिछोर और गिजौरा थाना पुलिस की संयुक्त टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। तकनीकी साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और वैज्ञानिक जांच के दम पर पुलिस ने 24 घंटे के भीतर इस हाई-प्रोफाइल मामले का सफलतापूर्वक खुलासा कर दिया, यह साबित करते हुए कि अपराधी चाहे कितनी भी शातिर योजना क्यों न बना लें, पुलिस की सतर्कता और जांच के सामने सच्चाई ज्यादा देर तक छिप नहीं सकती।3
- दतिया पुलिस अधीक्षक मयूर खंडेलवाल के निर्देशन में चलाए गए एक चेकिंग अभियान के तहत कार्रवाई की गई है। इस अभियान के दौरान पुलिस ने एक युवक को चार अवैध हथियारों के साथ गिरफ्तार किया है। यह रिपोर्ट दतिया से जिला ब्यूरो चीफ संजीव रिछारिया द्वारा दी गई है।1
- दतिया में सिविल लाइन पुलिस ने कट्टाधारी बदमाशों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए उनका जुलूस निकाला। यह कार्रवाई सेबड़ा चुंगी पर चेकिंग के दौरान की गई, जहाँ से इन कट्टाधारी बदमाशों को पकड़ा गया। पुलिस ने जिन बदमाशों का जुलूस निकाला, उनमें सागर अहिरवार, धर्मेंद्र पाल और सतेंद्र पाल शामिल हैं। सिविल लाइन पुलिस ने जुआ, सट्टा और कट्टाधारियों के विरुद्ध कड़ा रुख अपनाया है। सिविल लाइन टीआई वैभव गुप्ता के नेतृत्व में, पुलिस ऐसे बदमाशों का जुलूस निकालकर उन पर कार्रवाई कर रही है जो “भौकाल बनाने” का प्रयास करते हैं।1
- मध्य प्रदेश के इन्दरगढ़ में नगर परिषद को जनसमस्याओं के समाधान के लिए 20 दिन का अल्टीमेटम दिया गया है। यह अल्टीमेटम नगर परिषद से लोगों की समस्याओं को जल्द से जल्द हल करने की मांग के साथ सामने आया है।1
- सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में ग्वालियर पुलिस की भाषा शैली और उनके असली चेहरे को सामने लाया गया है। इस पोस्ट के माध्यम से ग्वालियर की पुलिस के प्रति तीखी नाराजगी व्यक्त की गई है, जहाँ उनकी कार्यप्रणाली और संवाद शैली पर सीधा प्रहार किया गया है।1
- दतिया जिले के ग्रामीणों ने एक अनोखा और गंभीर आरोप लगाया है, जिसमें उनका कहना है कि उनके भगवान ताले में बंद रहते हैं। ग्रामीणों ने कलेक्टर साहब से सीधे गुहार लगाते हुए इन भगवानों को ताले से 'छुड़ाने' की मांग की है।1
- ग्वालियर पुलिस ने डबरा में कट्टे की नोक पर 49 लाख रुपये और जेवरात की कथित लूट की घटना का महज 24 घंटे के भीतर पर्दाफाश कर दिया है, जो पूरी तरह से फर्जी निकली। इस मामले में सबसे हैरान कर देने वाला खुलासा यह हुआ कि इस पूरी साजिश की मास्टरमाइंड स्वयं शिकायतकर्ता गर्भवती महिला ही थी। महिला ने अपने पति और एक अन्य साथी के साथ मिलकर लूट की यह पूरी मनगढ़ंत पटकथा रची थी। ग्वालियर पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और सीसीटीवी फुटेज के गहन विश्लेषण के आधार पर मामले की सच्चाई उजागर की। पुलिस ने इस संबंध में चार आरोपियों को गिरफ्तार करने के साथ ही लूटा गया बताया जा रहा पूरा माल भी बरामद कर लिया है। यह घटना रिश्तों में विश्वास को झकझोर देने वाली है, जहाँ लालच के आगे पारिवारिक संबंध भी बेमानी साबित हुए।1