सीमलवाड़ा क्षेत्र के भैंसला मांडली निवासी युवा मयंक रमेश डामोर ने अदम्य आस्था, साहस और संकल्प का परिचय देते हुए उत्तराखंड स्थित चारधाम की कठिन पैदल यात्रा मात्र 60 दिनों में पूरी कर एक नई मिसाल कायम की है। महज ₹4,000 लेकर घर से निकले मयंक ने गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम के दर्शन पूरी तरह पैदल करते हुए न केवल अपनी धार्मिक आस्था को मजबूत किया, बल्कि समाज को भी एक सकारात्मक संदेश दिया। मयंक डामोर ने बताया कि उनके मन में 9 अप्रैल को चारधाम यात्रा का विचार आया था, और उन्होंने इसे भगवान की प्रेरणा मानते हुए पैदल यात्रा का संकल्प लिया। अगले ही दिन 10 अप्रैल को भगवान महादेव का स्मरण कर वे आवश्यक सामान के साथ यात्रा पर निकल पड़े। उन्होंने बताया कि यात्रा के दौरान पहाड़ों की कठिन चढ़ाइयां, बदलता मौसम और लंबी दूरी जैसी अनेक चुनौतियां सामने आईं, लेकिन ईश्वर में अटूट विश्वास और दृढ़ संकल्प के बल पर वे सभी कठिनाइयों को पार करते हुए सकुशल यात्रा पूरी करने में सफल रहे। यात्रा पूर्ण कर गांव लौटने पर सीमलवाड़ा में उनका भव्य स्वागत किया गया। विश्वनाथ मंदिर परिसर में आयोजित अभिनंदन समारोह में ग्रामीणों, युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने फूल-मालाओं से उनका स्वागत किया, जहां धार्मिक धुनों, जयकारों और डीजे की गूंज के बीच पूरे गांव में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। मयंक ने कहा कि चारधाम पहुंचकर जो आध्यात्मिक शांति, आत्मिक संतुष्टि और दिव्य अनुभूति प्राप्त होती है, उसे शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता, यह यात्रा केवल पैरों से तय की गई दूरी नहीं, बल्कि आत्मा को ईश्वर से जोड़ने का माध्यम है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि शिक्षा, रोजगार और सामाजिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ अपनी संस्कृति, परंपराओं और धार्मिक विरासत को जानना आवश्यक है, तथा प्रत्येक सनातनी परिवार को अपने धर्म, संस्कृति और इतिहास की जानकारी होनी चाहिए। मयंक डामोर की यह यात्रा उन लोगों के लिए भी एक सशक्त संदेश बनकर सामने आई है जो आदिवासी समाज को सनातन परंपरा से अलग बताने का प्रयास करते हैं, क्योंकि उन्होंने दर्शाया कि आदिवासी समाज सदियों से भारतीय संस्कृति, धार्मिक आस्थाओं और सनातन परंपराओं का अभिन्न अंग रहा है। उनकी यह यात्रा समाज में धर्म, संस्कृति और राष्ट्रीय एकता के प्रति जागरूकता का प्रेरणादायक उदाहरण भी बनी है। स्वागत समारोह में कारीलाल ननोमा, गोविंदराम पाटीदार, अनिल मिश्रा, रतन सिंह, हेमेंद्र सिंह, गोपाल त्रिवेदी, दिलीप डामोर सहित सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित रहे, जिन्होंने मयंक डामोर के साहस, श्रद्धा और संकल्प की सराहना करते हुए इसे युवाओं के लिए प्रेरणादायक बताया।
सीमलवाड़ा क्षेत्र के भैंसला मांडली निवासी युवा मयंक रमेश डामोर ने अदम्य आस्था, साहस और संकल्प का परिचय देते हुए उत्तराखंड स्थित चारधाम की कठिन पैदल यात्रा मात्र 60 दिनों में पूरी कर एक नई मिसाल कायम की है। महज ₹4,000 लेकर घर से निकले मयंक ने गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम के दर्शन पूरी तरह पैदल करते हुए न केवल अपनी धार्मिक आस्था को मजबूत किया, बल्कि समाज को भी एक सकारात्मक संदेश दिया। मयंक डामोर ने बताया कि उनके मन में 9 अप्रैल को चारधाम यात्रा का विचार आया था, और उन्होंने इसे भगवान की प्रेरणा मानते हुए पैदल यात्रा का
संकल्प लिया। अगले ही दिन 10 अप्रैल को भगवान महादेव का स्मरण कर वे आवश्यक सामान के साथ यात्रा पर निकल पड़े। उन्होंने बताया कि यात्रा के दौरान पहाड़ों की कठिन चढ़ाइयां, बदलता मौसम और लंबी दूरी जैसी अनेक चुनौतियां सामने आईं, लेकिन ईश्वर में अटूट विश्वास और दृढ़ संकल्प के बल पर वे सभी कठिनाइयों को पार करते हुए सकुशल यात्रा पूरी करने में सफल रहे। यात्रा पूर्ण कर गांव लौटने पर सीमलवाड़ा में उनका भव्य स्वागत किया गया। विश्वनाथ मंदिर परिसर में आयोजित अभिनंदन समारोह में ग्रामीणों, युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने फूल-मालाओं से उनका स्वागत किया, जहां धार्मिक धुनों, जयकारों
और डीजे की गूंज के बीच पूरे गांव में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। मयंक ने कहा कि चारधाम पहुंचकर जो आध्यात्मिक शांति, आत्मिक संतुष्टि और दिव्य अनुभूति प्राप्त होती है, उसे शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता, यह यात्रा केवल पैरों से तय की गई दूरी नहीं, बल्कि आत्मा को ईश्वर से जोड़ने का माध्यम है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि शिक्षा, रोजगार और सामाजिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ अपनी संस्कृति, परंपराओं और धार्मिक विरासत को जानना आवश्यक है, तथा प्रत्येक सनातनी परिवार को अपने धर्म, संस्कृति और इतिहास की जानकारी होनी चाहिए। मयंक डामोर की यह यात्रा उन लोगों के
लिए भी एक सशक्त संदेश बनकर सामने आई है जो आदिवासी समाज को सनातन परंपरा से अलग बताने का प्रयास करते हैं, क्योंकि उन्होंने दर्शाया कि आदिवासी समाज सदियों से भारतीय संस्कृति, धार्मिक आस्थाओं और सनातन परंपराओं का अभिन्न अंग रहा है। उनकी यह यात्रा समाज में धर्म, संस्कृति और राष्ट्रीय एकता के प्रति जागरूकता का प्रेरणादायक उदाहरण भी बनी है। स्वागत समारोह में कारीलाल ननोमा, गोविंदराम पाटीदार, अनिल मिश्रा, रतन सिंह, हेमेंद्र सिंह, गोपाल त्रिवेदी, दिलीप डामोर सहित सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित रहे, जिन्होंने मयंक डामोर के साहस, श्रद्धा और संकल्प की सराहना करते हुए इसे युवाओं के लिए प्रेरणादायक बताया।
- सीमलवाड़ा में विद्या भारती जनजाति शिक्षा समिति राजस्थान द्वारा आयोजित जिला डूंगरपुर आचार्य प्रशिक्षण वर्ग का समापन समारोह उत्साह और गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर जिलेभर से 86 आचार्य-दीदी और 18 प्रवासियों ने भाग लिया, जहाँ उन्हें शिक्षण कौशल, व्यक्तित्व विकास, संगठनात्मक कार्य, संस्कार शिक्षा और राष्ट्र निर्माण से जुड़े विभिन्न विषयों पर मार्गदर्शन प्रदान किया गया। समापन सत्र में मुख्य वक्ता विद्या भारती राजस्थान क्षेत्र के संगठन मंत्री गोविंद कुमार ने आचार्यों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षक केवल ज्ञान देने वाला नहीं, बल्कि समाज निर्माण का आधार है। उन्होंने जोर दिया कि आचार्य की पहचान उसके आचरण, व्यवहार और जीवन मूल्यों से होती है, और उसकी कथनी व करनी में अंतर नहीं होना चाहिए। उनके अनुसार, शिक्षा सिर्फ रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण और संस्कार निर्माण का पवित्र दायित्व है, जिसे पूरी ईमानदारी, समर्पण और निष्ठा के साथ निभाना चाहिए। विशिष्ट अतिथि तहसीलदार राजेश ताबियाड़ ने विद्या भारती के कार्यक्रमों को व्यक्तित्व निखारकर आदर्श नागरिक बनाने वाला बताया। उन्होंने कहा कि हर सौंपे गए दायित्व को निष्ठा और ईमानदारी से पूरा करना ही सफलता का मूल मंत्र है, और आचार्यों से विद्यार्थियों में राष्ट्रभक्ति, नैतिकता एवं सामाजिक उत्तरदायित्व के संस्कार विकसित करने का आह्वान किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रभुलाल कटारा ने प्रशिक्षण वर्ग का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया, जिसमें उन्होंने वर्ग की गतिविधियों और उपलब्धियों की जानकारी देते हुए बताया कि इसका उद्देश्य आचार्यों को शैक्षणिक दक्षता के साथ-साथ सांस्कृतिक, नैतिक और राष्ट्रवादी मूल्यों से सशक्त बनाना था। विभाग प्रमुख दिनेश डामोर द्वारा संचालित इस कार्यक्रम के समापन अवसर पर उपस्थित सभी आचार्यों और अतिथियों ने राष्ट्र निर्माण में शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकारते हुए संस्कारयुक्त शिक्षा के प्रसार का संकल्प लिया। समारोह का समापन 'भारत माता की जय' और 'वंदे मातरम्' के जयघोष के साथ हुआ।3
- डूंगरपुर जिले के राजपुर स्थित वागड़ की प्रसिद्ध धर्मनगरी श्री कल्लाजी शिव अन्नपूर्णा पंच धाम में दो दिवसीय श्री विष्णु महायाग का भव्य शुभारंभ हो गया है। ब्रह्मलीन गुरुदेव महंत गौतमदास महाराज की तपोभूमि पर अखिल भारतीय कल्लाजी सम्प्रदाय के राष्ट्रीय महासचिव एवं धाम के गादीपति महंत गोपालदास जी महाराज के पावन सानिध्य में आयोजित इस महोत्सव के पहले दिन श्रद्धा, भक्ति और वैदिक परंपराओं की त्रिवेणी देखने को मिली। कार्यक्रम की शुरुआत प्रातःकाल हेमाद्री पूजन, मंडप प्रवेश और एक विशाल कलश यात्रा के साथ हुई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने मंगल कलश धारण कर भाग लिया। इस धार्मिक अनुष्ठान के तहत एक भव्य संत सम्मेलन का भी आयोजन किया गया, जिसमें देश और क्षेत्र के विभिन्न अंचलों से पधारे संत-महात्माओं, गादीपतियों और सनातन धर्मावलंबियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बेणेश्वर धाम के पीठाधीश्वर परम पूज्य महंत अच्यूतानंद जी महाराज का गरिमामय शुभागमन हुआ, जिनकी अगवानी साद समाज, पाटीदार समाज सहित सर्व समाज के प्रतिनिधियों ने पारंपरिक और आत्मीय तरीके से की। माव भक्तों ने भजनों की सुंदर प्रस्तुतियां देते हुए महाराज को धाम परिसर में स्थित प्राचीन लक्ष्मीनारायण भगवान, माँ अन्नपूर्णा, आंकड़िया गणेश, माँ महिषासुर मर्दिनी, हनुमान जी एवं श्री 1008 विश्व स्वरूपं श्री कल्लाजी महाराज के दिव्य दर्शन करवाए। राजपुर धाम और सर्व समाज की ओर से महंत अच्युतानंद महाराज का भावभीना स्वागत-सत्कार किया गया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए महाराज श्री ने अपने आशीर्वचनों में सनातन धर्म के आदर्शों और मानव जीवन में धर्म की महत्ता को रेखांकित करते हुए सभी को सेवा, धर्म तथा संस्कारों के मार्ग पर चलने का आह्वान किया। समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में अखिल भारतीय कल्लाजी सम्प्रदाय के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत महेंद्र सिंह चौहान (बिछीवाड़ा), महंत नारायण दास वैष्णव (उदयपुर), महंत चंद्रदीप सिंह चौहान (वरदा), महंत धर्मेंद्र शुक्ला (चौपासांग), महंत भरतलाल आहारी (डोला), महंत भैरव सिंह (स्वरूपगढ़), महंत देवी सिंह (बनकोड़ा), महंत मनोज रावल (देवसोमनाथ), महंत करण सिंह (करावाड़ा), भुआजी प्रवीण सिंह (गेंजी) और महंत पुष्पेंद्र सिंह (नौगांमा) सहित सम्प्रदाय के कई पूज्य संत-महंत उपस्थित रहे, जिनका राजपुर धाम के महंत परिवार द्वारा शॉल ओढ़ाकर आत्मीय अभिनंदन किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यज्ञवेदी में मुख्य यजमान विनीता व विनय कुमार तथा शोभिनी व संजय चौबीसा सहित अन्य श्रद्धालुओं ने आचार्यों के निर्देशन में होमात्मक आहुतियां देकर विश्व कल्याण, सुख-समृद्धि और शांति की कामना की। संध्याकाल में ठाकुरजी की दिव्य महाआरती का आयोजन हुआ, जिसमें भक्तगण भाव-विभोर होकर झूम उठे। महाआरती के पश्चात विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने महाप्रसाद ग्रहण किया। इस धार्मिक महोत्सव को सफल बनाने में मंदिर के प्रतिष्ठापकों, अनन्य सेवकों, भक्तों तथा समस्त राजपुर ग्रामवासियों का सराहनीय और विशेष सहयोग रहा।1
- जनजाति मोर्चा के नवनियुक्त जिलाध्यक्ष खेमराज गरासिया का आनंदपुरी में पहली बार आगमन होने पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने उनका भव्य और ऐतिहासिक स्वागत किया। इस दौरान आयोजित बैठक में पंचायत चुनावों की रणनीति, संगठन विस्तार और जनकल्याणकारी योजनाओं को आमजन तक पहुंचाने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। उपस्थित कार्यकर्ताओं ने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत बनाने का संकल्प भी लिया। अब यह देखना होगा कि खेमराज गरासिया के नेतृत्व में भाजपा पंचायत चुनावों में कितना बड़ा प्रदर्शन कर पाती है। पाठकों से अपनी राय कमेंट्स में बताने और इस पोस्ट को अधिक से अधिक साझा करने का आग्रह किया गया है।1
- डूंगरपुर पुलिस ने जिले में वांछित अपराधियों की धरपकड़ के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान 'ऑपरेशन शिकंजा' के तहत एक बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस अधीक्षक मनीष कुमार के कड़े निर्देशानुसार शुरू किए गए इस अभियान में, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक खींव सिंह राठौड़ और वृत्ताधिकारी पारसमल के मार्गदर्शन तथा कोतवाली थानाधिकारी अजय सिंह राव के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया था। पुलिस की टीम ने अपने मुखबिर तंत्र और तकनीकी इनपुट का प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करते हुए गुजरात के अहमदाबाद से एक आरोपी को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, पकड़ा गया आरोपी दीपक खटीक, निवासी नवाडेरा मिल के पास, एक आदतन अपराधी है। दीपक खटीक ₹2,000 का इनामी बदमाश और जिले के 'टॉप टेन' अपराधियों में शामिल है, जिसके खिलाफ लूट और पोक्सो (POCSO) एक्ट सहित कुल 5 गंभीर मामले पहले से दर्ज हैं।1
- खेरवाड़ा/नयागांव उपखंड की ग्राम पंचायत डेरी में हाल ही में आयोजित एक ग्रामीण सेवा शिविर में पाँच साल से रास्ते पर मौजूद एक बड़े अतिक्रमण को मौके पर ही हटाकर ग्रामीणों को बड़ी राहत प्रदान की गई। इस शिविर में उपखंड अधिकारी शिवन्या गुप्ता सहित विभिन्न विभागों के कई अधिकारी उपस्थित रहे। यह महत्वपूर्ण कार्रवाई राजस्थान सरकार के 'ग्रामीण सेवा शिविर' अभियान के तहत की गई है, जिसका उद्देश्य प्रदेश भर की ग्राम पंचायतों में समस्याओं का मौके पर ही निस्तारण करना है। अधिकारियों ने तत्परता दिखाते हुए वर्षों से लंबित पड़े रास्तों और जमीनों से अतिक्रमण हटवाए। शिविर के दौरान, परमारवाड़ा में खसरा नंबर 1052 में 0.21 हेक्टेयर भूमि से अतिक्रमण हटाया गया। यह अतिक्रमण पाँच साल से रास्ते पर था, जिसे जिला कलेक्टर की जन सुनवाई में मिली शिकायत के आधार पर 15 जून 2026 को मौके पर ही निस्तारित किया गया। अवैध निर्माण को हटाने और रास्ता खाली कराने के लिए राजस्व टीम, पुलिस बल और जेसीबी की मदद ली गई। इस शिविर में राजस्व विभाग, पंचायती राज और ग्रामीण विकास सहित कुल 22 विभागों के अधिकारियों ने एक ही छत के नीचे अपनी सेवाएँ प्रदान कीं। यहाँ कुल 162 परिवाद प्रस्तुत हुए, जिनमें से अधिकांश का मौके पर ही समाधान किया गया। पंचायती राज विभाग द्वारा 162(1) के तहत 2 पट्टे भी जारी किए गए, हालाँकि श्रम विभाग, आयुर्वेद चिकित्सा विभाग, आपदा विभाग और सैनिक कल्याण विभाग शिविर में अनुपस्थित रहे। शिविर में उपस्थित प्रमुख अधिकारियों में उपखंड अधिकारी शिवन्या गुप्ता, शिविर प्रभारी चंदू लाल मीणा, नयागांव तहसीलदार हिम्मतराम पटेल, शिविर संयोजक ममता मीणा, प्रशासक शारदा भील, वीडीओ विनोद असवानी और मंडल अध्यक्ष दुर्गा देवी भगोरा शामिल थे। अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान पटवारी लोकेश भगोरा, शुशीला देवी मीणा, शिविर संयोजक ममता मीणा, आरआई अजय अहारी, पटवारी दयाराम मीणा और पटवारी सुनीता रावल भी मौजूद रहे।4
- बांसवाड़ा जिले के बागीदौरा विधानसभा क्षेत्र के आनन्दपुरी मंडल की भारतीय जनता पार्टी की बैठक विद्यानिकेतन विद्यालय परिसर में आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता मंडल अध्यक्ष प्रकाश डामोर ने की, जिसमें अनुसूचित जनजाति प्रदेश महामंत्री राजेश कटारा मुख्य अतिथि और अनुसूचित जनजाति जिला अध्यक्ष खेमराज गरासिया विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। जनजाति मोर्चा जिला अध्यक्ष मनोनीत होने के बाद पहली बार आनन्दपुरी पहुंचने पर खेमराज गरासिया का भव्य स्वागत किया गया। इस अवसर पर सुखलाल पारगी, विनोद डामोर, खातुदास पारगी, मनीष मसार, सोहन गरासिया, ललित पटेल, डॉ. चोरडिया, हितपात सिंह, राजदीप सिंह, हिम्मतलाल गरासिया, मनोहर पूर्व सरपंच और देवा महाराज सहित कई भाजपा कार्यकर्ताओं ने उनका अभिनंदन किया। बैठक में आगामी पंचायत राज चुनावों और पंचायत शिविरों को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यकर्ताओं से सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ आमजन तक पहुंचाने का आह्वान किया गया। इसके अतिरिक्त, संगठन को मजबूत बनाने और बूथ स्तर तक योजनाओं की जानकारी पहुंचाने पर भी विशेष जोर दिया गया।2
- सीमलवाड़ा के विश्वनाथ महादेव मंदिर में सोमवार, 15 जून 2026 को मंदिर की स्थापना के 56 वर्ष पूर्ण होने पर एक दिवसीय पाटोत्सव महोत्सव अत्यंत श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाया गया। मंदिर की प्रतिष्ठा 15 जून 1970 को हुई थी, जिसकी वर्षगाँठ पर इस विशेष आयोजन में लघुरुद्र हवन यज्ञ, महाआरती और महाप्रसाद का वितरण किया गया। यह महत्वपूर्ण आयोजन ब्राह्मण वाड़ी में संपन्न हुआ, जिसमें याग्निक पुत्र दिलीप विठ्ठलदास पंड्या एवं उनके परिवार ने मुख्य यजमान के रूप में सक्रिय भागीदारी निभाई। मंदिर परिसर को विशेष विद्युत रोशनी से सजाया गया था, जबकि भगवान विश्वनाथ और माताजी का आकर्षक श्रृंगार किया गया। समाज गोर भूपेंद्र कुमार के आचार्यत्व में सात वैदिक ब्राह्मणों द्वारा पूरे विधि-विधान के साथ लघुरुद्र हवन संपन्न कराया गया। इस महोत्सव में दूर-दराज से आए समाजजन भी शामिल हुए, जहां महिलाओं ने विशेष उत्साह के साथ दिनभर भजन-कीर्तन कर भगवान शिव का गुणगान किया। श्रद्धालुओं ने बताया कि यह आयोजन विश्व शांति, सुख और समृद्धि का संदेश देने वाला है। शाम को नारियल हवन के बाद महाआरती हुई और भक्तों को महाप्रसाद वितरित किया गया। सोमवती अमावस्या के अवसर पर महिलाओं ने पीपल पूजन भी किया। इस अवसर पर प्रियकांत पंड्या, रजनीकांत पंड्या, प्रकाश पंड्या, हरिप्रसाद उपाध्याय, यशवंत उपाध्याय, नरेंद्र उपाध्याय, धरणीधर पंड्या, हरिवल्लभ त्रिवेदी, रमेश त्रिवेदी, अशोक उपाध्याय, मुकेश पंड्या, कन्हैयालाल पंड्या, प्रमोद त्रिवेदी, मयंक उपाध्याय, जगदीश पंड्या, गोपाल पंड्या, हेमंत पंड्या, सुदीप पंड्या, जितेंद्र उपाध्याय, बालकृष्ण उपाध्याय, रोकी पंड्या, भूपेंद्र वैष्णव, रोहित उपाध्याय, लोकेश पंड्या, हरीश पंड्या, मदनलाल पंड्या, वसंत उपाध्याय, रुपेश पंड्या, ब्रजवल्लभ उपाध्याय, महेश उपाध्याय, अनिल त्रिवेदी, वल्लभ पंड्या, परेश उपाध्याय, विजय भट्ट, हार्दिक पंड्या, हरिकृष्ण पंड्या, अरविंद उपाध्याय, हंसमुख पंड्या, देवेंद्र पंड्या, घनश्याम त्रिवेदी, दीपक, प्रवीण, नमन किशोर सहित बड़ी संख्या में समाजजन एवं ग्रामवासी उपस्थित रहे। महिलाओं में सुभद्रा पंड्या, नीता पंड्या, आशाबेन, करुणा बेन, रेखाबेन, सुशीलाबेन, वंदना बेन एवं कैलाश बेन सहित अन्य श्रद्धालु महिलाओं ने सक्रिय भागीदारी निभाई, जिससे पूरे मंदिर परिसर में 'हर-हर महादेव' के जयकारे गूंजते रहे और भक्तिमय माहौल बना रहा।4
- सीमलवाड़ा क्षेत्र के भैंसला मांडली निवासी युवा मयंक रमेश डामोर ने अदम्य आस्था, साहस और संकल्प का परिचय देते हुए उत्तराखंड स्थित चारधाम की कठिन पैदल यात्रा मात्र 60 दिनों में पूरी कर एक नई मिसाल कायम की है। महज ₹4,000 लेकर घर से निकले मयंक ने गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम के दर्शन पूरी तरह पैदल करते हुए न केवल अपनी धार्मिक आस्था को मजबूत किया, बल्कि समाज को भी एक सकारात्मक संदेश दिया। मयंक डामोर ने बताया कि उनके मन में 9 अप्रैल को चारधाम यात्रा का विचार आया था, और उन्होंने इसे भगवान की प्रेरणा मानते हुए पैदल यात्रा का संकल्प लिया। अगले ही दिन 10 अप्रैल को भगवान महादेव का स्मरण कर वे आवश्यक सामान के साथ यात्रा पर निकल पड़े। उन्होंने बताया कि यात्रा के दौरान पहाड़ों की कठिन चढ़ाइयां, बदलता मौसम और लंबी दूरी जैसी अनेक चुनौतियां सामने आईं, लेकिन ईश्वर में अटूट विश्वास और दृढ़ संकल्प के बल पर वे सभी कठिनाइयों को पार करते हुए सकुशल यात्रा पूरी करने में सफल रहे। यात्रा पूर्ण कर गांव लौटने पर सीमलवाड़ा में उनका भव्य स्वागत किया गया। विश्वनाथ मंदिर परिसर में आयोजित अभिनंदन समारोह में ग्रामीणों, युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने फूल-मालाओं से उनका स्वागत किया, जहां धार्मिक धुनों, जयकारों और डीजे की गूंज के बीच पूरे गांव में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। मयंक ने कहा कि चारधाम पहुंचकर जो आध्यात्मिक शांति, आत्मिक संतुष्टि और दिव्य अनुभूति प्राप्त होती है, उसे शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता, यह यात्रा केवल पैरों से तय की गई दूरी नहीं, बल्कि आत्मा को ईश्वर से जोड़ने का माध्यम है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि शिक्षा, रोजगार और सामाजिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ अपनी संस्कृति, परंपराओं और धार्मिक विरासत को जानना आवश्यक है, तथा प्रत्येक सनातनी परिवार को अपने धर्म, संस्कृति और इतिहास की जानकारी होनी चाहिए। मयंक डामोर की यह यात्रा उन लोगों के लिए भी एक सशक्त संदेश बनकर सामने आई है जो आदिवासी समाज को सनातन परंपरा से अलग बताने का प्रयास करते हैं, क्योंकि उन्होंने दर्शाया कि आदिवासी समाज सदियों से भारतीय संस्कृति, धार्मिक आस्थाओं और सनातन परंपराओं का अभिन्न अंग रहा है। उनकी यह यात्रा समाज में धर्म, संस्कृति और राष्ट्रीय एकता के प्रति जागरूकता का प्रेरणादायक उदाहरण भी बनी है। स्वागत समारोह में कारीलाल ननोमा, गोविंदराम पाटीदार, अनिल मिश्रा, रतन सिंह, हेमेंद्र सिंह, गोपाल त्रिवेदी, दिलीप डामोर सहित सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित रहे, जिन्होंने मयंक डामोर के साहस, श्रद्धा और संकल्प की सराहना करते हुए इसे युवाओं के लिए प्रेरणादायक बताया।4
- आधुनिकता के दौर में डूंगरपुर जिले के सुन्दरपुर ग्राम पंचायत के इंद्रखेत गाँव निवासी जनजाति युवा शैलेश वगात ने श्रद्धा, संस्कार और अटूट दृढ़ इच्छाशक्ति की अनूठी मिसाल पेश की है। उन्होंने मात्र 65 दिनों में चारधाम की अत्यंत कठिन पैदल यात्रा सफलतापूर्वक पूर्ण की। गत 11 अप्रैल को शुरू हुई इस दुर्गम आध्यात्मिक यात्रा के दौरान शैलेश ने लगातार विपरीत मौसम और पहाड़ों के कठिन रास्तों का सामना किया। अपनी गहरी आस्था के बल पर यह कठिन सफर तय कर सोमवार को जब वे अपने गृह जनपद लौटे, तो पूरे क्षेत्र में हर्ष का माहौल छा गया। शैलेश वगात की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर भाजपा नेता बंशी लाल कटारा सहित क्षेत्र के कई गणमान्य नागरिकों ने उनके निवास स्थान इंद्रखेत पहुँचकर उनका भव्य स्वागत किया। इस दौरान शैलेश ही नहीं, बल्कि उनकी इस कठिन साधना में संबल बने उनके माता शांति देवी वगात व पिता काउवा वगात और परिवारजनों का भी माला व शॉल पहनाकर आत्मीय अभिनंदन किया गया। इस अवसर पर युवाओं को संबोधित करते हुए बंशीलाल कटारा ने शैलेश की यात्रा को अनुकरणीय बताते हुए उन्हें आज के युवाओं के लिए बड़ा प्रेरणास्रोत करार दिया। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि जनजाति समाज की असली पहचान उसकी समृद्ध संस्कृति, प्रकृति के प्रति सम्मान और गहरे आध्यात्मिक मूल्यों से है। उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा और तकनीक के साथ-साथ युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक आस्था और सामाजिक मूल्यों से भी मजबूती से जुड़े रहना चाहिए, क्योंकि जड़ों और पूर्वजों के आदर्शों को अपनाकर ही समाज सशक्त और आत्मविश्वासी बनता है। समारोह में उपस्थित अन्य प्रबुद्धजनों ने भी शैलेश के इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि यह यात्रा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आज की युवा पीढ़ी के लिए आत्म-अनुशासन, दृढ़ संकल्प और सांस्कृतिक चेतना का एक जीवंत संदेश है। इस दौरान उपस्थित जनों ने यह संकल्प भी दोहराया कि जनजाति समाज की संस्कृति, परंपराओं और युवा जागरण के लिए काम करने वाले ऐसे होनहार युवाओं को भविष्य में भी हर संभव सहयोग और प्रोत्साहन दिया जाएगा। कार्यक्रम के समापन पर सभी ग्रामीणों और अतिथियों ने शैलेश वगात के उज्ज्वल व मंगलमय भविष्य की कामना करते हुए उनके परिवार को पुनः बधाई दी।1