आधुनिकता के दौर में डूंगरपुर जिले के सुन्दरपुर ग्राम पंचायत के इंद्रखेत गाँव निवासी जनजाति युवा शैलेश वगात ने श्रद्धा, संस्कार और अटूट दृढ़ इच्छाशक्ति की अनूठी मिसाल पेश की है। उन्होंने मात्र 65 दिनों में चारधाम की अत्यंत कठिन पैदल यात्रा सफलतापूर्वक पूर्ण की। गत 11 अप्रैल को शुरू हुई इस दुर्गम आध्यात्मिक यात्रा के दौरान शैलेश ने लगातार विपरीत मौसम और पहाड़ों के कठिन रास्तों का सामना किया। अपनी गहरी आस्था के बल पर यह कठिन सफर तय कर सोमवार को जब वे अपने गृह जनपद लौटे, तो पूरे क्षेत्र में हर्ष का माहौल छा गया। शैलेश वगात की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर भाजपा नेता बंशी लाल कटारा सहित क्षेत्र के कई गणमान्य नागरिकों ने उनके निवास स्थान इंद्रखेत पहुँचकर उनका भव्य स्वागत किया। इस दौरान शैलेश ही नहीं, बल्कि उनकी इस कठिन साधना में संबल बने उनके माता शांति देवी वगात व पिता काउवा वगात और परिवारजनों का भी माला व शॉल पहनाकर आत्मीय अभिनंदन किया गया। इस अवसर पर युवाओं को संबोधित करते हुए बंशीलाल कटारा ने शैलेश की यात्रा को अनुकरणीय बताते हुए उन्हें आज के युवाओं के लिए बड़ा प्रेरणास्रोत करार दिया। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि जनजाति समाज की असली पहचान उसकी समृद्ध संस्कृति, प्रकृति के प्रति सम्मान और गहरे आध्यात्मिक मूल्यों से है। उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा और तकनीक के साथ-साथ युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक आस्था और सामाजिक मूल्यों से भी मजबूती से जुड़े रहना चाहिए, क्योंकि जड़ों और पूर्वजों के आदर्शों को अपनाकर ही समाज सशक्त और आत्मविश्वासी बनता है। समारोह में उपस्थित अन्य प्रबुद्धजनों ने भी शैलेश के इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि यह यात्रा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आज की युवा पीढ़ी के लिए आत्म-अनुशासन, दृढ़ संकल्प और सांस्कृतिक चेतना का एक जीवंत संदेश है। इस दौरान उपस्थित जनों ने यह संकल्प भी दोहराया कि जनजाति समाज की संस्कृति, परंपराओं और युवा जागरण के लिए काम करने वाले ऐसे होनहार युवाओं को भविष्य में भी हर संभव सहयोग और प्रोत्साहन दिया जाएगा। कार्यक्रम के समापन पर सभी ग्रामीणों और अतिथियों ने शैलेश वगात के उज्ज्वल व मंगलमय भविष्य की कामना करते हुए उनके परिवार को पुनः बधाई दी।
आधुनिकता के दौर में डूंगरपुर जिले के सुन्दरपुर ग्राम पंचायत के इंद्रखेत गाँव निवासी जनजाति युवा शैलेश वगात ने श्रद्धा, संस्कार और अटूट दृढ़ इच्छाशक्ति की अनूठी मिसाल पेश की है। उन्होंने मात्र 65 दिनों में चारधाम की अत्यंत कठिन पैदल यात्रा सफलतापूर्वक पूर्ण की। गत 11 अप्रैल को शुरू हुई इस दुर्गम आध्यात्मिक यात्रा के दौरान शैलेश ने लगातार विपरीत मौसम और पहाड़ों के कठिन रास्तों का सामना किया। अपनी गहरी आस्था के बल पर यह कठिन सफर तय कर सोमवार को जब वे अपने गृह जनपद लौटे, तो पूरे क्षेत्र में हर्ष का माहौल छा गया। शैलेश वगात की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर भाजपा नेता बंशी लाल कटारा सहित क्षेत्र के कई गणमान्य नागरिकों ने उनके निवास स्थान इंद्रखेत पहुँचकर उनका भव्य स्वागत किया। इस दौरान शैलेश ही नहीं, बल्कि उनकी इस कठिन साधना में संबल बने उनके माता शांति देवी वगात व पिता काउवा वगात और परिवारजनों का भी माला व शॉल पहनाकर आत्मीय अभिनंदन किया गया। इस अवसर पर युवाओं को संबोधित करते हुए बंशीलाल कटारा ने शैलेश की यात्रा को अनुकरणीय बताते हुए उन्हें आज के युवाओं के लिए बड़ा प्रेरणास्रोत करार दिया। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि जनजाति समाज की असली पहचान उसकी समृद्ध संस्कृति, प्रकृति के प्रति सम्मान और गहरे आध्यात्मिक मूल्यों से है। उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा और तकनीक के साथ-साथ युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक आस्था और सामाजिक मूल्यों से भी मजबूती से जुड़े रहना चाहिए, क्योंकि जड़ों और पूर्वजों के आदर्शों को अपनाकर ही समाज सशक्त और आत्मविश्वासी बनता है। समारोह में उपस्थित अन्य प्रबुद्धजनों ने भी शैलेश के इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि यह यात्रा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आज की युवा पीढ़ी के लिए आत्म-अनुशासन, दृढ़ संकल्प और सांस्कृतिक चेतना का एक जीवंत संदेश है। इस दौरान उपस्थित जनों ने यह संकल्प भी दोहराया कि जनजाति समाज की संस्कृति, परंपराओं और युवा जागरण के लिए काम करने वाले ऐसे होनहार युवाओं को भविष्य में भी हर संभव सहयोग और प्रोत्साहन दिया जाएगा। कार्यक्रम के समापन पर सभी ग्रामीणों और अतिथियों ने शैलेश वगात के उज्ज्वल व मंगलमय भविष्य की कामना करते हुए उनके परिवार को पुनः बधाई दी।
- डूंगरपुर में जिला कलेक्टर देशलदान की अध्यक्षता में जिला परिषद के ईडीपी सभागार में एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में पेयजल वितरण, विद्युत आपूर्ति, पीएम सूर्य घर बिजली कनेक्शन और कृषि कनेक्शन जैसे विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी ली गई और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए। बैठक में अतिरिक्त जिला कलेक्टर अरविंद कुमार जाखड़, मुख्य कार्यकारी अधिकारी हनुमान सिंह राठौड़, उपखंड अधिकारी और समस्त जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।1
- पुष्टिमार्गीय संप्रदाय के तृतीय गृह पीठ की श्री द्वारकाधीश हवेली मंदिर, सीमलवाड़ा में पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर, बल्लभ कुल की आज्ञा से एक भव्य सांझी मनोरथ का आयोजन असीम श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर मंदिर परिसर ठाकुरजी के अलौकिक श्रृंगार, मनमोहक पुष्प सज्जा और भक्तिमय कीर्तनों से पूरी तरह भक्तिरस में डूबा नजर आया, जिससे बड़ी संख्या में वैष्णव भक्त भाव-विभोर हो गए। मंदिर कमेटी के अध्यक्ष नवीन मेहता ने बताया कि मुखिया जी प्रदीप व्यास ने ठाकुरजी को विशेष वाघा धारण करवाए और 11 चंद्रिका युक्त मोर पंखों का मुकुट अर्पित किया। साथ ही मोतियों और रंग-बिरंगी फूलमालाओं से ठाकुरजी का मनमोहन और अलौकिक श्रृंगार किया गया, जिसने सभी श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित किया। उत्सव के मनोरथी हेमंत वी. शाह, सोहन भाई सुथार और चेतना बेन धीरजलाल शाह रहे। सांझी मनोरथ के दर्शन के लिए दूर-दूर से बड़ी संख्या में वैष्णव भक्त मंदिर पहुंचे और प्रेमपूर्वक ठाकुरजी के दर्शनलाभ किए। उत्सव के दौरान कीर्तनकारों ने अष्ट सखा के पद "सांझी भली बन आई रे, छाबरिया बास के फूले फूल बनी…" का मधुर स्वर में गायन किया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। इस भव्य उत्सव की आकर्षक सजावट हेमंत शाह और दत्तेश मेहता ने अपने 20-25 साथियों के सहयोग से की, जिसमें रंग-बिरंगी पुष्प सज्जा और पारंपरिक सांझी की कलात्मक प्रस्तुति विशेष रूप से श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रही। शाम 7:30 बजे आरती के पश्चात उपस्थित श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरण किया गया, और मोर मुकुट, फूलमालाओं तथा सांझी की छटा से सजी द्वारकाधीश हवेली में भक्तिरस का सैलाब उमड़ पड़ा।1
- सीमलवाड़ा में विद्या भारती जनजाति शिक्षा समिति राजस्थान द्वारा आयोजित जिला डूंगरपुर आचार्य प्रशिक्षण वर्ग का समापन समारोह उत्साह और गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर जिलेभर से 86 आचार्य-दीदी और 18 प्रवासियों ने भाग लिया, जहाँ उन्हें शिक्षण कौशल, व्यक्तित्व विकास, संगठनात्मक कार्य, संस्कार शिक्षा और राष्ट्र निर्माण से जुड़े विभिन्न विषयों पर मार्गदर्शन प्रदान किया गया। समापन सत्र में मुख्य वक्ता विद्या भारती राजस्थान क्षेत्र के संगठन मंत्री गोविंद कुमार ने आचार्यों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षक केवल ज्ञान देने वाला नहीं, बल्कि समाज निर्माण का आधार है। उन्होंने जोर दिया कि आचार्य की पहचान उसके आचरण, व्यवहार और जीवन मूल्यों से होती है, और उसकी कथनी व करनी में अंतर नहीं होना चाहिए। उनके अनुसार, शिक्षा सिर्फ रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण और संस्कार निर्माण का पवित्र दायित्व है, जिसे पूरी ईमानदारी, समर्पण और निष्ठा के साथ निभाना चाहिए। विशिष्ट अतिथि तहसीलदार राजेश ताबियाड़ ने विद्या भारती के कार्यक्रमों को व्यक्तित्व निखारकर आदर्श नागरिक बनाने वाला बताया। उन्होंने कहा कि हर सौंपे गए दायित्व को निष्ठा और ईमानदारी से पूरा करना ही सफलता का मूल मंत्र है, और आचार्यों से विद्यार्थियों में राष्ट्रभक्ति, नैतिकता एवं सामाजिक उत्तरदायित्व के संस्कार विकसित करने का आह्वान किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रभुलाल कटारा ने प्रशिक्षण वर्ग का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया, जिसमें उन्होंने वर्ग की गतिविधियों और उपलब्धियों की जानकारी देते हुए बताया कि इसका उद्देश्य आचार्यों को शैक्षणिक दक्षता के साथ-साथ सांस्कृतिक, नैतिक और राष्ट्रवादी मूल्यों से सशक्त बनाना था। विभाग प्रमुख दिनेश डामोर द्वारा संचालित इस कार्यक्रम के समापन अवसर पर उपस्थित सभी आचार्यों और अतिथियों ने राष्ट्र निर्माण में शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकारते हुए संस्कारयुक्त शिक्षा के प्रसार का संकल्प लिया। समारोह का समापन 'भारत माता की जय' और 'वंदे मातरम्' के जयघोष के साथ हुआ।3
- डूंगरपुर जिले के कुआं थाना क्षेत्र के सालेड़ा गांव में रविवार को एक दर्दनाक सड़क हादसे में ट्रैक्टर चालक की मौके पर ही मौत हो गई। यह हादसा उस वक्त हुआ जब चालक ने अचानक सामने आई एक गाय को बचाने का प्रयास किया, जिससे अनियंत्रित ट्रैक्टर-ट्रॉली सड़क से नीचे तालाब में पलट गई। चालक ट्रैक्टर के नीचे दब गया, जिससे उसकी जान चली गई। इस घटना के बाद पूरे गांव में शोक की लहर छा गई है। जानकारी के अनुसार, सालेड़ा निवासी 49 वर्षीय गटु लाल पुत्र कालिया अहारी घरेलू उपयोग के लिए लकड़ियां लेकर गुलाबपुरा से अपने गांव सालेड़ा लौट रहे थे। गमेला-भेंद्रा तालाब के पास अचानक एक गाय ट्रैक्टर के सामने आ गई। गाय को बचाने की कोशिश में गटु लाल ट्रैक्टर से नियंत्रण खो बैठे और वाहन तालाब में जा गिरा। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि ट्रैक्टर-ट्रॉली सड़क से नीचे उतरकर सीधे तालाब में पलट गई और गटुलाल की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के वक्त पीछे आ रहे गांव के एक युवक ने यह पूरी घटना देखी और तुरंत मृतक के परिजनों को सूचना दी, जिसके बाद उनके पुत्रों ने पंचायत प्रशासन और ग्रामीणों को जानकारी दी। घटना की सूचना मिलते ही सालेड़ा पंचायत के प्रशासक दिनेश डामोर सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे। कुआं थाना पुलिस का जाप्ता, जिसमें एएसआई अशोक कुमार पाटीदार, चौकी प्रभारी चिखली और कांस्टेबल चंद्रवीर सिंह शामिल थे, भी घटनास्थल पर पहुंचा। पुलिस और ग्रामीणों की मदद से शव को बाहर निकालकर कुआं के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों द्वारा पोस्टमार्टम किया गया और फिर शव परिजनों को सुपुर्द कर दिया गया। मृतक के पुत्र थावरचंद की रिपोर्ट पर पुलिस ने मामला दर्ज कर हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है। ग्रामीणों ने बताया कि गटु लाल अहारी एक मेहनतकश किसान थे और अपने पीछे पांच पुत्रों व एक पुत्री का बड़ा परिवार छोड़ गए हैं, जिनमें से दो पुत्रों का विवाह हो चुका है। परिवार के मुखिया की अचानक हुई इस मौत से परिजन सदमे में हैं और पूरे गांव में गहरा शोक व्याप्त है। इस दौरान सरपंच प्रतिनिधि रतनलाल अहारी, पूर्व उप प्रधान मणीलाल अहारी, कारीलाल डामोर, चम्पा डामोर, ईश्वरलाल अहारी और थावरचंद अहारी समेत कई ग्रामीण घटनास्थल पर मौजूद रहे।1
- भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहनलाल रोत द्वारा 'वनवासी' शब्द को लेकर की गई एक फेसबुक पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। इस पोस्ट ने आदिवासी समाज में उनकी पहचान, संस्कृति और अस्मिता को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। वायरल हो रही इस पोस्ट के माध्यम से, आदिवासी मंच न्यूज़ ने पाठकों से इस मुद्दे पर अपनी राय माँगी है। लोगों से पूछा गया है कि क्या आदिवासी समाज की पहचान 'आदिवासी' के रूप में होनी चाहिए या 'वनवासी' के रूप में। पाठकों को अपनी राय कमेंट बॉक्स में साझा करने और ऐसी निष्पक्ष, तथ्यात्मक और जनहित की खबरों के लिए आदिवासी मंच न्यूज़ को फॉलो करने तथा पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करने का आह्वान किया गया है, ताकि यह आवाज़ अधिक लोगों तक पहुँच सके।1
- गोगुंदा की छाली ग्राम पंचायत के तहत आने वाले राजस्व गाँव नेवड़िया, कड़ेवावास और उण्डीथल में लगातार हो रही चोरी की घटनाओं से ग्रामीणों में भय और आक्रोश का माहौल है। अज्ञात चोरों द्वारा मंदिरों और मकानों को निशाना बनाए जाने के विरोध में ग्रामीणों ने गोगुंदा थाना अधिकारी को एक ज्ञापन सौंपकर जल्द कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में बताया गया है कि पिछले 5 से 10 दिनों के दौरान क्षेत्र में चोरी की कई वारदातें हुई हैं। राजस्व गाँव नेवड़िया स्थित महादेव मंदिर, आशापुरा मंदिर और रतन सिंह पुत्र तख्त सिंह के मकान में चोरी की घटना हुई। इसी प्रकार, कड़ेवावास में आशापुरा माताजी मंदिर और मांगीलाल पुत्र केशुलाल सेन के घर को चोरों ने निशाना बनाया, जबकि उण्डीथल गाँव के आगलिया गेरूणी मंदिर में भी चोरी की वारदात को अंजाम दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि इन सभी घटनाओं की रिपोर्ट गोगुंदा थाने में दर्ज करवाई जा चुकी है, लेकिन चोर अभी तक पुलिस की गिरफ्त से दूर हैं। ग्रामीणों ने स्वयं भी चोरों को पकड़ने का प्रयास किया था, जिस दौरान चोर अपनी नई हीरो स्प्लेंडर प्लस मोटरसाइकिल मौके पर छोड़कर फरार हो गए थे। ग्रामीणों द्वारा इसकी सूचना पुलिस को दिए जाने के बाद मोटरसाइकिल को जब्त कर लिया गया, बावजूद इसके अब तक आरोपियों की गिरफ्तारी न होने से ग्रामीणों में गहरी नाराजगी है। ग्रामीणों ने इस बात पर जोर दिया कि क्षेत्र के अधिकांश लोग मेहनत-मजदूरी करके अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं, और ऐसे में लगातार हो रही इन चोरियों से उनमें असुरक्षा की भावना बढ़ रही है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो चोरों के हौसले और बुलंद हो जाएँगे, जिससे आमजन का जीवन गंभीर रूप से प्रभावित होगा। ग्रामीणों ने थाना अधिकारी से मांग की है कि अज्ञात चोरों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए, उनके द्वारा चोरी किया गया सामान बरामद किया जाए और क्षेत्र में कानून-व्यवस्था को मजबूत कर ग्रामीणों को राहत प्रदान की जाए। इस ज्ञापन पर क्षेत्र के अनेक ग्रामीणों के हस्ताक्षर मौजूद हैं।1
- आधुनिकता के दौर में डूंगरपुर जिले के सुन्दरपुर ग्राम पंचायत के इंद्रखेत गाँव निवासी जनजाति युवा शैलेश वगात ने श्रद्धा, संस्कार और अटूट दृढ़ इच्छाशक्ति की अनूठी मिसाल पेश की है। उन्होंने मात्र 65 दिनों में चारधाम की अत्यंत कठिन पैदल यात्रा सफलतापूर्वक पूर्ण की। गत 11 अप्रैल को शुरू हुई इस दुर्गम आध्यात्मिक यात्रा के दौरान शैलेश ने लगातार विपरीत मौसम और पहाड़ों के कठिन रास्तों का सामना किया। अपनी गहरी आस्था के बल पर यह कठिन सफर तय कर सोमवार को जब वे अपने गृह जनपद लौटे, तो पूरे क्षेत्र में हर्ष का माहौल छा गया। शैलेश वगात की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर भाजपा नेता बंशी लाल कटारा सहित क्षेत्र के कई गणमान्य नागरिकों ने उनके निवास स्थान इंद्रखेत पहुँचकर उनका भव्य स्वागत किया। इस दौरान शैलेश ही नहीं, बल्कि उनकी इस कठिन साधना में संबल बने उनके माता शांति देवी वगात व पिता काउवा वगात और परिवारजनों का भी माला व शॉल पहनाकर आत्मीय अभिनंदन किया गया। इस अवसर पर युवाओं को संबोधित करते हुए बंशीलाल कटारा ने शैलेश की यात्रा को अनुकरणीय बताते हुए उन्हें आज के युवाओं के लिए बड़ा प्रेरणास्रोत करार दिया। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि जनजाति समाज की असली पहचान उसकी समृद्ध संस्कृति, प्रकृति के प्रति सम्मान और गहरे आध्यात्मिक मूल्यों से है। उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा और तकनीक के साथ-साथ युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक आस्था और सामाजिक मूल्यों से भी मजबूती से जुड़े रहना चाहिए, क्योंकि जड़ों और पूर्वजों के आदर्शों को अपनाकर ही समाज सशक्त और आत्मविश्वासी बनता है। समारोह में उपस्थित अन्य प्रबुद्धजनों ने भी शैलेश के इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि यह यात्रा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आज की युवा पीढ़ी के लिए आत्म-अनुशासन, दृढ़ संकल्प और सांस्कृतिक चेतना का एक जीवंत संदेश है। इस दौरान उपस्थित जनों ने यह संकल्प भी दोहराया कि जनजाति समाज की संस्कृति, परंपराओं और युवा जागरण के लिए काम करने वाले ऐसे होनहार युवाओं को भविष्य में भी हर संभव सहयोग और प्रोत्साहन दिया जाएगा। कार्यक्रम के समापन पर सभी ग्रामीणों और अतिथियों ने शैलेश वगात के उज्ज्वल व मंगलमय भविष्य की कामना करते हुए उनके परिवार को पुनः बधाई दी।1
- सीमलवाड़ा के विश्वनाथ महादेव मंदिर में सोमवार, 15 जून 2026 को मंदिर की स्थापना के 56 वर्ष पूर्ण होने पर एक दिवसीय पाटोत्सव महोत्सव अत्यंत श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाया गया। मंदिर की प्रतिष्ठा 15 जून 1970 को हुई थी, जिसकी वर्षगाँठ पर इस विशेष आयोजन में लघुरुद्र हवन यज्ञ, महाआरती और महाप्रसाद का वितरण किया गया। यह महत्वपूर्ण आयोजन ब्राह्मण वाड़ी में संपन्न हुआ, जिसमें याग्निक पुत्र दिलीप विठ्ठलदास पंड्या एवं उनके परिवार ने मुख्य यजमान के रूप में सक्रिय भागीदारी निभाई। मंदिर परिसर को विशेष विद्युत रोशनी से सजाया गया था, जबकि भगवान विश्वनाथ और माताजी का आकर्षक श्रृंगार किया गया। समाज गोर भूपेंद्र कुमार के आचार्यत्व में सात वैदिक ब्राह्मणों द्वारा पूरे विधि-विधान के साथ लघुरुद्र हवन संपन्न कराया गया। इस महोत्सव में दूर-दराज से आए समाजजन भी शामिल हुए, जहां महिलाओं ने विशेष उत्साह के साथ दिनभर भजन-कीर्तन कर भगवान शिव का गुणगान किया। श्रद्धालुओं ने बताया कि यह आयोजन विश्व शांति, सुख और समृद्धि का संदेश देने वाला है। शाम को नारियल हवन के बाद महाआरती हुई और भक्तों को महाप्रसाद वितरित किया गया। सोमवती अमावस्या के अवसर पर महिलाओं ने पीपल पूजन भी किया। इस अवसर पर प्रियकांत पंड्या, रजनीकांत पंड्या, प्रकाश पंड्या, हरिप्रसाद उपाध्याय, यशवंत उपाध्याय, नरेंद्र उपाध्याय, धरणीधर पंड्या, हरिवल्लभ त्रिवेदी, रमेश त्रिवेदी, अशोक उपाध्याय, मुकेश पंड्या, कन्हैयालाल पंड्या, प्रमोद त्रिवेदी, मयंक उपाध्याय, जगदीश पंड्या, गोपाल पंड्या, हेमंत पंड्या, सुदीप पंड्या, जितेंद्र उपाध्याय, बालकृष्ण उपाध्याय, रोकी पंड्या, भूपेंद्र वैष्णव, रोहित उपाध्याय, लोकेश पंड्या, हरीश पंड्या, मदनलाल पंड्या, वसंत उपाध्याय, रुपेश पंड्या, ब्रजवल्लभ उपाध्याय, महेश उपाध्याय, अनिल त्रिवेदी, वल्लभ पंड्या, परेश उपाध्याय, विजय भट्ट, हार्दिक पंड्या, हरिकृष्ण पंड्या, अरविंद उपाध्याय, हंसमुख पंड्या, देवेंद्र पंड्या, घनश्याम त्रिवेदी, दीपक, प्रवीण, नमन किशोर सहित बड़ी संख्या में समाजजन एवं ग्रामवासी उपस्थित रहे। महिलाओं में सुभद्रा पंड्या, नीता पंड्या, आशाबेन, करुणा बेन, रेखाबेन, सुशीलाबेन, वंदना बेन एवं कैलाश बेन सहित अन्य श्रद्धालु महिलाओं ने सक्रिय भागीदारी निभाई, जिससे पूरे मंदिर परिसर में 'हर-हर महादेव' के जयकारे गूंजते रहे और भक्तिमय माहौल बना रहा।4
- सीमलवाड़ा क्षेत्र के भैंसला मांडली निवासी युवा मयंक रमेश डामोर ने अदम्य आस्था, साहस और संकल्प का परिचय देते हुए उत्तराखंड स्थित चारधाम की कठिन पैदल यात्रा मात्र 60 दिनों में पूरी कर एक नई मिसाल कायम की है। महज ₹4,000 लेकर घर से निकले मयंक ने गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम के दर्शन पूरी तरह पैदल करते हुए न केवल अपनी धार्मिक आस्था को मजबूत किया, बल्कि समाज को भी एक सकारात्मक संदेश दिया। मयंक डामोर ने बताया कि उनके मन में 9 अप्रैल को चारधाम यात्रा का विचार आया था, और उन्होंने इसे भगवान की प्रेरणा मानते हुए पैदल यात्रा का संकल्प लिया। अगले ही दिन 10 अप्रैल को भगवान महादेव का स्मरण कर वे आवश्यक सामान के साथ यात्रा पर निकल पड़े। उन्होंने बताया कि यात्रा के दौरान पहाड़ों की कठिन चढ़ाइयां, बदलता मौसम और लंबी दूरी जैसी अनेक चुनौतियां सामने आईं, लेकिन ईश्वर में अटूट विश्वास और दृढ़ संकल्प के बल पर वे सभी कठिनाइयों को पार करते हुए सकुशल यात्रा पूरी करने में सफल रहे। यात्रा पूर्ण कर गांव लौटने पर सीमलवाड़ा में उनका भव्य स्वागत किया गया। विश्वनाथ मंदिर परिसर में आयोजित अभिनंदन समारोह में ग्रामीणों, युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने फूल-मालाओं से उनका स्वागत किया, जहां धार्मिक धुनों, जयकारों और डीजे की गूंज के बीच पूरे गांव में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। मयंक ने कहा कि चारधाम पहुंचकर जो आध्यात्मिक शांति, आत्मिक संतुष्टि और दिव्य अनुभूति प्राप्त होती है, उसे शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता, यह यात्रा केवल पैरों से तय की गई दूरी नहीं, बल्कि आत्मा को ईश्वर से जोड़ने का माध्यम है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि शिक्षा, रोजगार और सामाजिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ अपनी संस्कृति, परंपराओं और धार्मिक विरासत को जानना आवश्यक है, तथा प्रत्येक सनातनी परिवार को अपने धर्म, संस्कृति और इतिहास की जानकारी होनी चाहिए। मयंक डामोर की यह यात्रा उन लोगों के लिए भी एक सशक्त संदेश बनकर सामने आई है जो आदिवासी समाज को सनातन परंपरा से अलग बताने का प्रयास करते हैं, क्योंकि उन्होंने दर्शाया कि आदिवासी समाज सदियों से भारतीय संस्कृति, धार्मिक आस्थाओं और सनातन परंपराओं का अभिन्न अंग रहा है। उनकी यह यात्रा समाज में धर्म, संस्कृति और राष्ट्रीय एकता के प्रति जागरूकता का प्रेरणादायक उदाहरण भी बनी है। स्वागत समारोह में कारीलाल ननोमा, गोविंदराम पाटीदार, अनिल मिश्रा, रतन सिंह, हेमेंद्र सिंह, गोपाल त्रिवेदी, दिलीप डामोर सहित सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित रहे, जिन्होंने मयंक डामोर के साहस, श्रद्धा और संकल्प की सराहना करते हुए इसे युवाओं के लिए प्रेरणादायक बताया।4