जालौन में कोल्ड हाउस फुल, किसानों को उठानी पड़ रही भारी परेशानी — लगी लंबी कतारें जालौन। जनपद में इन दिनों कोल्ड हाउस पूरी तरह भर जाने से किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मटर की फसल लेकर पहुंच रहे किसानों को कोल्ड हाउस के बाहर लंबी-लंबी लाइनों में घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। बताया जा रहा है कि इस बार पहले बारिश के कारण फसल की कटाई प्रभावित हुई और उसके बाद मजदूरों (लेबर) की कमी ने किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दीं। किसी तरह फसल तैयार होने के बाद जब किसान मटर को बाजार में बेचने पहुंचे तो मटर के दाम काफी कम मिले। मटर के भाव गिर जाने के कारण किसान फिलहाल अपनी उपज को कोल्ड हाउस में सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि बाद में बेहतर दाम मिलने पर उसे बाजार में बेच सकें। लेकिन कोल्ड हाउस पहले से ही लगभग फुल हो चुके हैं, जिससे किसानों को घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि अगर जल्द ही कोल्ड हाउस की व्यवस्था बढ़ाई नहीं गई तो उन्हें अपनी फसल को लेकर और भी ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। वहीं कई किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि अतिरिक्त भंडारण की व्यवस्था कराई जाए, ताकि किसानों को राहत मिल सके। स्थानीय किसानों के अनुसार, यदि मटर के दाम नहीं बढ़े और कोल्ड हाउस की समस्या बनी रही तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। फिलहाल किसान अपनी उपज बचाने के लिए कोल्ड हाउस के बाहर घंटों इंतजार करने को मजबूर हैं।
जालौन में कोल्ड हाउस फुल, किसानों को उठानी पड़ रही भारी परेशानी — लगी लंबी कतारें जालौन। जनपद में इन दिनों कोल्ड हाउस पूरी तरह भर जाने से किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मटर की फसल लेकर पहुंच रहे किसानों को कोल्ड हाउस के बाहर लंबी-लंबी लाइनों में घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। बताया जा रहा है कि इस बार पहले बारिश के कारण फसल की कटाई प्रभावित हुई और उसके बाद मजदूरों (लेबर) की कमी ने किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दीं। किसी तरह फसल तैयार होने के बाद जब किसान मटर को बाजार में बेचने पहुंचे तो मटर के दाम काफी कम मिले। मटर के भाव गिर जाने के कारण किसान फिलहाल अपनी उपज को कोल्ड हाउस में सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि बाद में बेहतर दाम मिलने पर उसे बाजार में बेच सकें। लेकिन कोल्ड हाउस पहले से ही लगभग फुल हो चुके हैं, जिससे किसानों को घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि अगर जल्द ही कोल्ड हाउस की व्यवस्था बढ़ाई नहीं गई तो उन्हें अपनी फसल को लेकर और भी ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। वहीं कई किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि अतिरिक्त भंडारण की व्यवस्था कराई जाए, ताकि किसानों को राहत मिल सके। स्थानीय किसानों के अनुसार, यदि मटर के दाम नहीं बढ़े और कोल्ड हाउस की समस्या बनी रही तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। फिलहाल किसान अपनी उपज बचाने के लिए कोल्ड हाउस के बाहर घंटों इंतजार करने को मजबूर हैं।
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- sonai parwai3
- खास खबर है जालौन जिले के सिरसा कलार थाना क्षेत्र से जुड़ी हुई जहां आज़ पुलिस ने दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है इन पर आरोप है कि इन्होंने एक व्यक्ति के साथ मारपीट की और कार चढ़ा कर मारने का प्रयास किया देखें खास रिपोर्ट देवेश कुमार स्वर्णकार के साथ1
- ग्राम पंचायत लहचूरा कोरीपुरा जिला जालौन वर्षों से हमारे गांव में रात में रंगा रंग कार्यक्रम दिन में मेला लगता हैं हनुमान गढ़ी में आयोजित किया जाता है1
- जालौन।नगर के चुंगी नं चार पर अंग्रेजी शराब के ठेके पर निर्धारित दरों से अधिक कीमत वसूलने का मामला सामने आया है। ठेका नंबर 3 पर ग्राहकों से शासन द्वारा तय रेट से ज्यादा रुपये ऐठे जाने का मामला प्रकाश मे आया। उपभोकताओ एवं स्थानीय लोगों का आरोप है यहां ठेके पर सेल्स करने बाला सेल्समैन अपनी दंबगई के चलते ग्राहको तथा अन्य लोगो से अभ्रदता भी करता है।जब इस संबंध में ठेके पर मौजूद सेल्समैन से कोई बातचीत करता है या फिर शिकायत करता तो वह अभद्रता का परिचय देते हुए कहता है कि "जहां शिकायत करनी है, कर दो",मेरी ऊपर तक पहुच है,जिससे ग्राहको में आक्रोश व्याप्त है। उक्त ठेका लाइसेंस धारक शशांक गुप्ता के नाम पर संचालित है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जब दूरभाष के माध्यम से आबकारी विभाग के अधिकारी भूपेंद्र सिंह से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। इस पूरे प्रकरण ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और आम जनता को निर्धारित दरों पर ही शराब उपलब्ध कराई।1
- क्षेत्र में अचानक शनिवार को करीब चार बजे हुई तेज बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की सालभर की मेहनत पर पानी फेर दिया। मौसम के इस अचानक बदले मिजाज ने खेतों से लेकर खलिहानों तक तबाही का मंजर खड़ा कर दिया है। गेहूं, सरसों और अन्य रबी फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे किसान आर्थिक संकट में आ गए हैं। मौसम विभाग पहले ही बुंदेलखंड सहित उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि का अलर्ट जारी कर चुका था, जिसके चलते फसलों को नुकसान की आशंका जताई गई थी वही असर अब रामपुरा क्षेत्र में साफ देखने को मिल रहा है। *खेतों में खड़ी फसल बर्बाद* कई किसानों के खेतों में गेहूं की फसल अभी खड़ी थी, जो ओलों की तेज मार से झुककर जमीन पर बिछ गई। इससे उत्पादन में भारी गिरावट की आशंका है। पहले से तैयार फसल अचानक आई इस आपदा को झेल नहीं पाई। *कटी फसल भी नहीं बची* जिन किसानों ने फसल काटकर खेत में ही रखी थी, उनकी मुश्किल और बढ़ गई। बारिश और ओलों से भीगने के कारण फसल खराब होने लगी है। *भूसा भी हुआ खराब* कुछ किसानों ने फसल से भूसा तैयार कर लिया था, लेकिन खेतों में रखा भूसा भी ओलावृष्टि और बारिश की चपेट में आकर भीग गया। इससे पशुओं के चारे का संकट भी खड़ा हो सकता है। *किसानों का छलका दर्द* पीड़ित किसानों सुरेश चंद्र,अमर सिंह,राजू,मोहित,रामसुंदर,अनिल,सुनील का कहना है कि “पूरे साल मेहनत की, लेकिन कुछ ही मिनटों में सब खत्म हो गया।” कई किसानों के सामने अब कर्ज चुकाने और परिवार चलाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। *प्रशासन से मुआवजे की मांग* क्षेत्र के किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द नुकसान का सर्वे कराया जाए और प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए। किसानों राम सिंह,राम कुमार,सोहन,अजीत,सुनील,ने राहत की मांग उठाई है, क्योंकि ओलावृष्टि सीधे उनकी आजीविका पर असर डालती है। लगातार बदल रहे मौसम के कारण किसान पहले से ही चिंतित हैं। और कटाई के वक्त ओलावृष्टि होना, दोनों ही हालात किसानों के लिए दुखदाई साबित हुई। रामपुरा क्षेत्र में ओलावृष्टि ने यह साफ कर दिया है कि प्राकृतिक आपदाओं के सामने किसान कितना असहाय है। अब सभी की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि कब राहत मिलेगी और कैसे इस नुकसान की भरपाई होगी।4
- जनपद जालौन के माधौगढ़ तहसील क्षेत्र में तेज़ आंधी-तूफान के साथ हुई बारिश ने जमकर कहर बरपाया। कई इलाकों में ओलावृष्टि भी देखने को मिली, जिससे जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया। आंधी और बारिश के चलते अनेक घरों को नुकसान पहुंचा है, वहीं किसानों की खड़ी फसल एक बार फिर तबाह हो गई। मेहनत से तैयार की गई फसल पलभर में बर्बाद हो जाने से किसानों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गई है।1
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