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मोदी के समर्थन में विधायक घनश्याम चंद्रवंशी का शायराना अंदाज! वायरल वीडियो में गरजे— विरोधियों का बाप भी चिल्लाएगा, मोदी कहीं नहीं जाएगा!
Anil Sharma
मोदी के समर्थन में विधायक घनश्याम चंद्रवंशी का शायराना अंदाज! वायरल वीडियो में गरजे— विरोधियों का बाप भी चिल्लाएगा, मोदी कहीं नहीं जाएगा!
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- मोदी के समर्थन में विधायक घनश्याम चंद्रवंशी का शायराना अंदाज! वायरल वीडियो में गरजे— विरोधियों का बाप भी चिल्लाएगा, मोदी कहीं नहीं जाएगा!1
- Shujalpur कमलिया बाईपास का अंधा मोड़ बना हादसों का खतरा, कार पलटने के बाद फिर उठे सुरक्षा इंतजामों पर सवाल कमलिया बाईपास का अंधा मोड़ बना हादसों का खतरा, कार पलटने के बाद फिर उठे सुरक्षा इंतजामों पर सवाल शुजालपुर। कमलिया बाईपास से आष्टा रोड की ओर जाने वाले मार्ग पर स्थित अंधा मोड़ वाहन चालकों के लिए खतरा बनता जा रहा है। बीते दिन यहां एक कार अनियंत्रित होकर सड़क पर पलट गई। गनीमत रही कि हादसे में किसी बड़े नुकसान की सूचना सामने नहीं आई, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि इस मोड़ पर आए दिन वाहन दुर्घटनाएं होती रहती हैं। मोड़ की बनावट और सीमित दृश्यता के कारण सामने से आने वाले वाहनों का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है। इसके बावजूद यहां पर्याप्त स्थायी सुरक्षा इंतजाम नजर नहीं आते। बताया जा रहा है कि दुर्घटनाओं को रोकने के लिए पूर्व में अस्थायी प्लास्टिक के स्पीड बैरियर लगाए गए थे, लेकिन अब वे भी मौके पर दिखाई नहीं दे रहे हैं। ऐसे में वाहन चालक तेज रफ्तार में मोड़ पर पहुंचते हैं और अनियंत्रित होने का खतरा बना रहता है। क्या कहते हैं सड़क सुरक्षा के नियम? भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) के सड़क संकेतक संबंधी मानकों के अनुसार खतरनाक और तीखे मोड़ों से पहले वाहन चालकों को चेतावनी देने वाले संकेतक लगाए जाने चाहिए। इनमें आगे तीखा मोड़ होने का संकेत, निर्धारित सुरक्षित गति बताने वाले बोर्ड और मोड़ की दिशा दर्शाने वाले पीले-काले शेवरॉन संकेत शामिल हैं। मोड़ के बाहरी किनारे पर रिफ्लेक्टिव संकेतक और सड़क की किनारियों पर चमकने वाले रोड मार्कर भी लगाए जा सकते हैं, ताकि रात के समय भी रास्ते की दिशा स्पष्ट रहे। क्या हो सकता है स्थायी समाधान? इस स्थान पर संबंधित विभाग द्वारा तकनीकी निरीक्षण कराकर मोड़ की बनावट और दृश्यता का आकलन किया जाना चाहिए। जरूरत के अनुसार चेतावनी बोर्ड, शेवरॉन साइन, रिफ्लेक्टर, रोड मार्किंग, डिलिनेटर और निर्धारित गति नियंत्रण के इंतजाम किए जा सकते हैं। यदि सड़क की चौड़ाई और उपलब्ध जगह अनुमति देती है तो इंजीनियरिंग सर्वे के आधार पर मोड़ को चौड़ा करने या उसकी ज्यामिति सुधारने पर भी विचार होना चाहिए। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब ग्रामीण लगातार इस मोड़ पर दुर्घटनाओं की आशंका जता रहे हैं, तो संबंधित विभाग स्थायी सुरक्षा इंतजाम क्यों नहीं कर रहा? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? जरूरत हादसे के बाद कार्रवाई की नहीं, बल्कि हादसे से पहले सुरक्षा सुनिश्चित करने की है।1
- सीहोर वन विभाग का गजब कारनामा, खुद के 'रेंज ऑफिस' में कट रही हरियाली, रक्षक ही बन गए भक्षक सीहोर। जंगलों और वन्य संपदा की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाले वन विभाग की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सीहोर जिले में वन विभाग की स्थिति लगातार विवादों के साये में है। हालिया मामला तो हद पार करने वाला है जहां विभाग जंगलों की सुरक्षा करना तो दूर, अब अपने ही मुख्य कार्यालय परिसर में खड़े विशालकाय और हरे-भरे पेड़ों को बचाने में भी नाकाम साबित हो रहा है। रेंज ऑफिस के भीतर ही हरियाली पर चल रही आरी इसका ताजा और जीता-जागता उदाहरण शहर के इंदौर नाके के नजदीक स्थित सीहोर रेंज ऑफिस परिसर के भीतर देखने को मिल रहा है। जिम्मेदार अधिकारियों की नाक के नीचे कार्यालय परिसर में ही अनेक बड़े पेड़ों की बड़ी और हरी डालियों को धड़ल्ले से काटा जा रहा है। खुलेआम सीहोर वन विभाग का गजब कारनामा, खुद के 'रेंज ऑफिस' में कट रही हरियाली, रक्षक ही बन गए भक्षक सीहोर। जंगलों और वन्य संपदा की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाले वन विभाग की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सीहोर जिले में वन विभाग की स्थिति लगातार विवादों के साये में है। हालिया मामला तो हद पार करने वाला है जहां विभाग जंगलों की सुरक्षा करना तो दूर, अब अपने ही मुख्य कार्यालय परिसर में खड़े विशालकाय और हरे-भरे पेड़ों को बचाने में भी नाकाम साबित हो रहा है। रेंज ऑफिस के भीतर ही हरियाली पर चल रही आरी इसका ताजा और जीता-जागता उदाहरण शहर के इंदौर नाके के नजदीक स्थित सीहोर रेंज ऑफिस परिसर के भीतर देखने को मिल रहा है। जिम्मेदार अधिकारियों की नाक के नीचे कार्यालय परिसर में ही अनेक बड़े पेड़ों की बड़ी और हरी डालियों को धड़ल्ले से काटा जा रहा है। खुलेआम हरी-भरी छांव पर प्रहार किए जाने से पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश है। सवाल यह उठता है कि जिस विभाग के दफ्तर में ही हरियाली सुरक्षित नहीं है, वह जिले के सुदूर जंगलों की क्या हिफाजत कर रहा होगा। रेहटी के बाद सीहोर मुख्यालय तक फैली लापरवाही यह कोई पहला मौका नहीं है जब वन विभाग की सुस्ती या मिलीभगत सामने आई हो। इससे पहले रेहटी क्षेत्र में भी जंगलों की बड़े पैमाने पर अवैध कटाई के सनसनीखेज मामले सामने आ चुके हैं, जिन पर विभागीय कार्रवाई हमेशा सवालों के घेरे में रही है। अब जिला मुख्यालय पर स्थित रेंज ऑफिस के अंदर ही इस तरह की मनमानी ने वन विभाग के दावों की पोल खोलकर रख दी है। सवालों के घेरे में जिम्मेदार अधिकारी जिले के सर्वोच्च वन अधिकारियों की उदासीनता के चलते मैदानी अमला बेलगाम हो चुका है। एक तरफ शासन पौधारोपण और हरियाली बचाने के लिए करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रहा है, वहीं दूसरी तरफ खुद वन विभाग के दफ्तरों में पेड़ों की बलि दी जा रही है। अब देखना यह होगा कि इस खुलासे के बाद जिम्मेदार उच्च अधिकारी इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं या फिर हमेशा की तरह फाइलों में ही लीपापोती कर दी जाती है।4
- सड़क सुरक्षा और न्याय की गुहार सीहोर सड़क हादसे पर कलेक्टर क़े सामने रखी मांगे। लोकेशन सीहोर पत्रकार हेमन्त त्रिपाठी *सड़क सुरक्षा और न्याय की पुकार , सीहोर सड़क हादसे पर कलेक्टर के सामने रखी मांगे* एंकर सीहोर सीहोर दो दिन पहले हुए एक भीषण सड़क हादसे ने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है। इन्दौर नाके से सोयाबीन प्लांट के बीच घटिया सड़क निर्माण के कारण हुए गहरे गड्ढे ने एक मासूम महिला की जान ले ली, जिससे एक हंसता-खेलता परिवार उजड़ गया। इस दर्दनाक घटना के बाद आक्रोशित सीहोर खाती समाज ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। समाज ने मृतका के परिवार को उचित मुआवजा, बच्चों के लिए एफडी और दोषियों पर कानूनी शिकंजा कसने की अपील की है। साथ ही, शहर की जर्जर सड़कों की तत्काल मरम्मत कराने की गुहार लगाई है, ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को ऐसा असहनीय दर्द न झेलना पड़े।2
- भैरुंदा पुलिस की बड़ी कार्रवाई: हत्या के 6 आरोपी 48 घंटे के भीतर गिरफ्तार, जेल भेजे गए सीहोर। भैरुंदा पुलिस ने मारपीट के दौरान गंभीर रूप से घायल हुए रामद्वार गाथले की इलाज के दौरान हुई मौत के मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए सभी 6 आरोपियों को 48 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आरोपियों को न्यायालय में पेश किया, जहां से जेल वारंट जारी होने पर उन्हें उपजेल भैरुंदा भेज दिया गया। यह है पूरा मामला पुलिस के अनुसार, 27 अक्टूबर 2026 को शाम करीब 6:50 बजे ग्राम लाचौर में संतू गाथले, बलराम गाथले, सिंदेश गाथले, दुर्गेश गाथले, चीन्टू बेलदार और राहुल सिवरा कथित रूप से लाठी-डंडे लेकर रामद्वार गाथले के घर में घुस गए। आरोप है कि सभी ने परिवार के सदस्यों के साथ गाली-गलौज करते हुए मारपीट की। इस घटना में रामद्वार गाथले, उनकी पत्नी सीताबाई, बेटे अरुण और बेटी कंचन को चोटें आईं। रामद्वार को गंभीर चोटें आने के कारण प्राथमिक उपचार के बाद भोपाल रेफर किया गया था। इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। फरियादिया कंचन गाथले की रिपोर्ट पर थाना भैरुंदा में अपराध क्रमांक 634/2026 के तहत बीएनएस की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की गई। रामद्वार की मृत्यु होने के बाद प्रकरण में धारा 103(1) बीएनएस का इजाफा किया गया। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में हुई कार्रवाईमामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक सीहोर श्रीमती सोनाक्षी सक्सेना के निर्देशन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. प्रशांत चौबे एवं एसडीओपी रौशन जैन के मार्गदर्शन में थाना भैरुंदा पुलिस की टीम ने कार्रवाई की। पुलिस ने सभी छह आरोपियों को गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय में पेश किया। न्यायालय से जेल वारंट जारी होने के बाद सभी आरोपियों को उपजेल भैरुंदा में दाखिल कराया गया। भैरुंदा पुलिस की त्वरित कार्रवाई से हत्या के इस मामले में सभी छह नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी हुई। भैरुंदा पुलिस की बड़ी कार्रवाई: हत्या के 6 आरोपी 48 घंटे के भीतर गिरफ्तार, जेल भेजे गए सीहोर। भैरुंदा पुलिस ने मारपीट के दौरान गंभीर रूप से घायल हुए रामद्वार गाथले की इलाज के दौरान हुई मौत के मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए सभी 6 आरोपियों को 48 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आरोपियों को न्यायालय में पेश किया, जहां से जेल वारंट जारी होने पर उन्हें उपजेल भैरुंदा भेज दिया गया। यह है पूरा मामला पुलिस के अनुसार, 27 अक्टूबर 2026 को शाम करीब 6:50 बजे ग्राम लाचौर में संतू गाथले, बलराम गाथले, सिंदेश गाथले, दुर्गेश गाथले, चीन्टू बेलदार और राहुल सिवरा कथित रूप से लाठी-डंडे लेकर रामद्वार गाथले के घर में घुस गए। आरोप है कि सभी ने परिवार के सदस्यों के साथ गाली-गलौज करते हुए मारपीट की। इस घटना में रामद्वार गाथले, उनकी पत्नी सीताबाई, बेटे अरुण और बेटी कंचन को चोटें आईं। रामद्वार को गंभीर चोटें आने के कारण प्राथमिक उपचार के बाद भोपाल रेफर किया गया था। इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। फरियादिया कंचन गाथले की रिपोर्ट पर थाना भैरुंदा में अपराध क्रमांक 634/2026 के तहत बीएनएस की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की गई। रामद्वार की मृत्यु होने के बाद प्रकरण में धारा 103(1) बीएनएस का इजाफा किया गया। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में हुई कार्रवाईमामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक सीहोर श्रीमती सोनाक्षी सक्सेना के निर्देशन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. प्रशांत चौबे एवं एसडीओपी रौशन जैन के मार्गदर्शन में थाना भैरुंदा पुलिस की टीम ने कार्रवाई की। पुलिस ने सभी छह आरोपियों को गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय में पेश किया। न्यायालय से जेल वारंट जारी होने के बाद सभी आरोपियों को उपजेल भैरुंदा में दाखिल कराया गया। भैरुंदा पुलिस की त्वरित कार्रवाई से हत्या के इस मामले में सभी छह नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी हुई।1
- जनता की सेवा और क्षेत्र का चहुंमुखी विकास ही हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। गोपाल सिंह इंजिनियर शासकीय शहीद भगत सिंह महाविद्यालय आष्टा में News24 Madhya Pradesh Chhattisgarh द्वारा आयोजित 'मध्यप्रदेश का भविष्य - आष्टा' में मुख्य वक्ता के रूप में विधायक श्री गोपाल सिंह इंजिनियर ने शामिल होकर क्षेत्र के समग्र विकास, जनहित की योजनाओं, युवाओं के भविष्य और आष्टा विधानसभा क्षेत्र को प्रगति के नए पथ पर अग्रसर करने के विज़न पर विस्तार से चर्चा की।1
- मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल है, जहां सड़कों पर गड्ढे हैं या गड्डों में सड़क, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल हो गया है। बड़े-बड़े गड्ढे अब हादसों की वजह बन रहे हैं। ताजा मामला 80 फीट रोड, करोंद का है, जहां अंडों से भरा एक लोडिंग ऑटो सड़क पर पलट गया। बताया जा रहा है कि सड़क पर बने गड्डों के कारण यह हादसा हुआ। एक ओर भोपाल में मेट्रो का काम तेजी से चल रहा है, तो दूसरी ओर सड़कों की हालत लगातार खराब होती जा रही है। हैरानी की बात है कि हादसों के बावजूद जिम्मेदार विभागों की ओर से अब तक ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही है। आखिर इन गड्डों की जिम्मेदारी कौन लेगा? कब सुधरेगी भोपाल की सड़कों की हालत? #bhopal #instagram #reels #viral #BMC1
- नर्मदा का पानी आष्टा पहुंचा, विधायक ने किया लोकार्पण, लेकिन कई गांवों के किसान अब भी इंतजार में! 🚩 ग्राम खाचरौद में शुभारंभ से खुशी, मगर जिन गांवों में पाइपलाइन नहीं पहुंची, वहां के किसानों को कब मिलेगा सिंचाई का पानी? आष्टा। आष्टा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम खाचरौद में नर्मदा परियोजना के तहत पानी पहुंचने पर शुभारंभ कार्यक्रम आयोजित किया गया। विधायक गोपाल सिंह इंजीनियर ने लोकार्पण किया। इस अवसर पर ग्रामीणों और श्रद्धालुओं में उत्साह देखने को मिला। हालांकि, इस खुशी के बीच किसानों की एक बड़ी समस्या भी सामने आ रही है। आष्टा तहसील के कई ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी नर्मदा परियोजना की पाइपलाइन नहीं पहुंची है और किसानों के खेत सिंचाई के पानी का इंतजार कर रहे हैं। एक ओर किसान गेहूं की बोवनी में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर कई गांवों के किसानों को उम्मीद है कि नर्मदा परियोजना का लाभ जल्द उनके खेतों तक भी पहुंचेगा। अब बड़ा सवाल यह है कि जिन गांवों में अभी तक पाइपलाइन नहीं बिछी है, वहां नर्मदा का पानी कब पहुंचेगा? क्या इन किसानों को भी इस परियोजना का लाभ मिलेगा या उन्हें अभी और इंतजार करना पड़ेगा? नर्मदा परियोजना का वास्तविक लाभ तभी माना जाएगा, जब क्षेत्र के सभी पात्र किसानों के खेतों तक सिंचाई के लिए पानी पहुंचेगा। वैष्णव डिजिटल न्यूज़ हर खबर पर हमारी नजर ✍️ दीपक कुमार बैरागी एडिटर एवं संवाददाता1