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Shujalpur कमलिया बाईपास का अंधा मोड़ बना हादसों का खतरा, कार पलटने के बाद फिर उठे सुरक्षा इंतजामों पर सवाल कमलिया बाईपास का अंधा मोड़ बना हादसों का खतरा, कार पलटने के बाद फिर उठे सुरक्षा इंतजामों पर सवाल शुजालपुर। कमलिया बाईपास से आष्टा रोड की ओर जाने वाले मार्ग पर स्थित अंधा मोड़ वाहन चालकों के लिए खतरा बनता जा रहा है। बीते दिन यहां एक कार अनियंत्रित होकर सड़क पर पलट गई। गनीमत रही कि हादसे में किसी बड़े नुकसान की सूचना सामने नहीं आई, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि इस मोड़ पर आए दिन वाहन दुर्घटनाएं होती रहती हैं। मोड़ की बनावट और सीमित दृश्यता के कारण सामने से आने वाले वाहनों का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है। इसके बावजूद यहां पर्याप्त स्थायी सुरक्षा इंतजाम नजर नहीं आते। बताया जा रहा है कि दुर्घटनाओं को रोकने के लिए पूर्व में अस्थायी प्लास्टिक के स्पीड बैरियर लगाए गए थे, लेकिन अब वे भी मौके पर दिखाई नहीं दे रहे हैं। ऐसे में वाहन चालक तेज रफ्तार में मोड़ पर पहुंचते हैं और अनियंत्रित होने का खतरा बना रहता है। क्या कहते हैं सड़क सुरक्षा के नियम? भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) के सड़क संकेतक संबंधी मानकों के अनुसार खतरनाक और तीखे मोड़ों से पहले वाहन चालकों को चेतावनी देने वाले संकेतक लगाए जाने चाहिए। इनमें आगे तीखा मोड़ होने का संकेत, निर्धारित सुरक्षित गति बताने वाले बोर्ड और मोड़ की दिशा दर्शाने वाले पीले-काले शेवरॉन संकेत शामिल हैं। मोड़ के बाहरी किनारे पर रिफ्लेक्टिव संकेतक और सड़क की किनारियों पर चमकने वाले रोड मार्कर भी लगाए जा सकते हैं, ताकि रात के समय भी रास्ते की दिशा स्पष्ट रहे। क्या हो सकता है स्थायी समाधान? इस स्थान पर संबंधित विभाग द्वारा तकनीकी निरीक्षण कराकर मोड़ की बनावट और दृश्यता का आकलन किया जाना चाहिए। जरूरत के अनुसार चेतावनी बोर्ड, शेवरॉन साइन, रिफ्लेक्टर, रोड मार्किंग, डिलिनेटर और निर्धारित गति नियंत्रण के इंतजाम किए जा सकते हैं। यदि सड़क की चौड़ाई और उपलब्ध जगह अनुमति देती है तो इंजीनियरिंग सर्वे के आधार पर मोड़ को चौड़ा करने या उसकी ज्यामिति सुधारने पर भी विचार होना चाहिए। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब ग्रामीण लगातार इस मोड़ पर दुर्घटनाओं की आशंका जता रहे हैं, तो संबंधित विभाग स्थायी सुरक्षा इंतजाम क्यों नहीं कर रहा? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? जरूरत हादसे के बाद कार्रवाई की नहीं, बल्कि हादसे से पहले सुरक्षा सुनिश्चित करने की है।

15 hrs ago
user_सत्य एक्सप्रेस न्यूज
सत्य एक्सप्रेस न्यूज
पत्रकार Shujalpur, Shajapur•
15 hrs ago

Shujalpur कमलिया बाईपास का अंधा मोड़ बना हादसों का खतरा, कार पलटने के बाद फिर उठे सुरक्षा इंतजामों पर सवाल कमलिया बाईपास का अंधा मोड़ बना हादसों का खतरा, कार पलटने के बाद फिर उठे सुरक्षा इंतजामों पर सवाल शुजालपुर। कमलिया बाईपास से आष्टा रोड की ओर जाने वाले मार्ग पर स्थित अंधा मोड़ वाहन चालकों के लिए खतरा बनता जा रहा है। बीते दिन यहां एक कार अनियंत्रित होकर सड़क पर पलट गई। गनीमत रही कि हादसे में किसी बड़े नुकसान की सूचना सामने नहीं आई, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि इस मोड़ पर आए दिन वाहन दुर्घटनाएं होती रहती हैं। मोड़ की बनावट और सीमित दृश्यता के कारण सामने से आने वाले वाहनों का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है। इसके बावजूद यहां पर्याप्त स्थायी सुरक्षा इंतजाम नजर नहीं आते। बताया जा रहा है कि दुर्घटनाओं को रोकने के लिए पूर्व में अस्थायी प्लास्टिक के स्पीड बैरियर लगाए गए थे, लेकिन अब वे भी मौके पर दिखाई नहीं दे रहे हैं। ऐसे में वाहन चालक तेज रफ्तार में मोड़ पर पहुंचते हैं और अनियंत्रित होने का खतरा बना रहता है। क्या कहते हैं सड़क सुरक्षा के नियम? भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) के सड़क संकेतक संबंधी मानकों के अनुसार खतरनाक और तीखे मोड़ों से पहले वाहन चालकों को चेतावनी देने वाले संकेतक लगाए जाने चाहिए। इनमें आगे तीखा मोड़ होने का संकेत, निर्धारित सुरक्षित गति बताने वाले बोर्ड और मोड़ की दिशा दर्शाने वाले पीले-काले शेवरॉन संकेत शामिल हैं। मोड़ के बाहरी किनारे पर रिफ्लेक्टिव संकेतक और सड़क की किनारियों पर चमकने वाले रोड मार्कर भी लगाए जा सकते हैं, ताकि रात के समय भी रास्ते की दिशा स्पष्ट रहे। क्या हो सकता है स्थायी समाधान? इस स्थान पर संबंधित विभाग द्वारा तकनीकी निरीक्षण कराकर मोड़ की बनावट और दृश्यता का आकलन किया जाना चाहिए। जरूरत के अनुसार चेतावनी बोर्ड, शेवरॉन साइन, रिफ्लेक्टर, रोड मार्किंग, डिलिनेटर और निर्धारित गति नियंत्रण के इंतजाम किए जा सकते हैं। यदि सड़क की चौड़ाई और उपलब्ध जगह अनुमति देती है तो इंजीनियरिंग सर्वे के आधार पर मोड़ को चौड़ा करने या उसकी ज्यामिति सुधारने पर भी विचार होना चाहिए। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब ग्रामीण लगातार इस मोड़ पर दुर्घटनाओं की आशंका जता रहे हैं, तो संबंधित विभाग स्थायी सुरक्षा इंतजाम क्यों नहीं कर रहा? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? जरूरत हादसे के बाद कार्रवाई की नहीं, बल्कि हादसे से पहले सुरक्षा सुनिश्चित करने की है।

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  • Shujalpur कमलिया बाईपास का अंधा मोड़ बना हादसों का खतरा, कार पलटने के बाद फिर उठे सुरक्षा इंतजामों पर सवाल कमलिया बाईपास का अंधा मोड़ बना हादसों का खतरा, कार पलटने के बाद फिर उठे सुरक्षा इंतजामों पर सवाल शुजालपुर। कमलिया बाईपास से आष्टा रोड की ओर जाने वाले मार्ग पर स्थित अंधा मोड़ वाहन चालकों के लिए खतरा बनता जा रहा है। बीते दिन यहां एक कार अनियंत्रित होकर सड़क पर पलट गई। गनीमत रही कि हादसे में किसी बड़े नुकसान की सूचना सामने नहीं आई, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि इस मोड़ पर आए दिन वाहन दुर्घटनाएं होती रहती हैं। मोड़ की बनावट और सीमित दृश्यता के कारण सामने से आने वाले वाहनों का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है। इसके बावजूद यहां पर्याप्त स्थायी सुरक्षा इंतजाम नजर नहीं आते। बताया जा रहा है कि दुर्घटनाओं को रोकने के लिए पूर्व में अस्थायी प्लास्टिक के स्पीड बैरियर लगाए गए थे, लेकिन अब वे भी मौके पर दिखाई नहीं दे रहे हैं। ऐसे में वाहन चालक तेज रफ्तार में मोड़ पर पहुंचते हैं और अनियंत्रित होने का खतरा बना रहता है। क्या कहते हैं सड़क सुरक्षा के नियम? भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) के सड़क संकेतक संबंधी मानकों के अनुसार खतरनाक और तीखे मोड़ों से पहले वाहन चालकों को चेतावनी देने वाले संकेतक लगाए जाने चाहिए। इनमें आगे तीखा मोड़ होने का संकेत, निर्धारित सुरक्षित गति बताने वाले बोर्ड और मोड़ की दिशा दर्शाने वाले पीले-काले शेवरॉन संकेत शामिल हैं। मोड़ के बाहरी किनारे पर रिफ्लेक्टिव संकेतक और सड़क की किनारियों पर चमकने वाले रोड मार्कर भी लगाए जा सकते हैं, ताकि रात के समय भी रास्ते की दिशा स्पष्ट रहे। क्या हो सकता है स्थायी समाधान? इस स्थान पर संबंधित विभाग द्वारा तकनीकी निरीक्षण कराकर मोड़ की बनावट और दृश्यता का आकलन किया जाना चाहिए। जरूरत के अनुसार चेतावनी बोर्ड, शेवरॉन साइन, रिफ्लेक्टर, रोड मार्किंग, डिलिनेटर और निर्धारित गति नियंत्रण के इंतजाम किए जा सकते हैं। यदि सड़क की चौड़ाई और उपलब्ध जगह अनुमति देती है तो इंजीनियरिंग सर्वे के आधार पर मोड़ को चौड़ा करने या उसकी ज्यामिति सुधारने पर भी विचार होना चाहिए। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब ग्रामीण लगातार इस मोड़ पर दुर्घटनाओं की आशंका जता रहे हैं, तो संबंधित विभाग स्थायी सुरक्षा इंतजाम क्यों नहीं कर रहा? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? जरूरत हादसे के बाद कार्रवाई की नहीं, बल्कि हादसे से पहले सुरक्षा सुनिश्चित करने की है।
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    Shujalpur कमलिया बाईपास का अंधा मोड़ बना हादसों का खतरा, कार पलटने के बाद फिर उठे सुरक्षा इंतजामों पर सवाल
कमलिया बाईपास का अंधा मोड़ बना हादसों का खतरा, कार पलटने के बाद फिर उठे सुरक्षा इंतजामों पर सवाल
शुजालपुर। कमलिया बाईपास से आष्टा रोड की ओर जाने वाले मार्ग पर स्थित अंधा मोड़ वाहन चालकों के लिए खतरा बनता जा रहा है। बीते दिन यहां एक कार अनियंत्रित होकर सड़क पर पलट गई। गनीमत रही कि हादसे में किसी बड़े नुकसान की सूचना सामने नहीं आई, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि इस मोड़ पर आए दिन वाहन दुर्घटनाएं होती रहती हैं। मोड़ की बनावट और सीमित दृश्यता के कारण सामने से आने वाले वाहनों का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है। इसके बावजूद यहां पर्याप्त स्थायी सुरक्षा इंतजाम नजर नहीं आते।
बताया जा रहा है कि दुर्घटनाओं को रोकने के लिए पूर्व में अस्थायी प्लास्टिक के स्पीड बैरियर लगाए गए थे, लेकिन अब वे भी मौके पर दिखाई नहीं दे रहे हैं। ऐसे में वाहन चालक तेज रफ्तार में मोड़ पर पहुंचते हैं और अनियंत्रित होने का खतरा बना रहता है।
क्या कहते हैं सड़क सुरक्षा के नियम?
भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) के सड़क संकेतक संबंधी मानकों के अनुसार खतरनाक और तीखे मोड़ों से पहले वाहन चालकों को चेतावनी देने वाले संकेतक लगाए जाने चाहिए। इनमें आगे तीखा मोड़ होने का संकेत, निर्धारित सुरक्षित गति बताने वाले बोर्ड और मोड़ की दिशा दर्शाने वाले पीले-काले शेवरॉन संकेत शामिल हैं। मोड़ के बाहरी किनारे पर रिफ्लेक्टिव संकेतक और सड़क की किनारियों पर चमकने वाले रोड मार्कर भी लगाए जा सकते हैं, ताकि रात के समय भी रास्ते की दिशा स्पष्ट रहे।
क्या हो सकता है स्थायी समाधान?
इस स्थान पर संबंधित विभाग द्वारा तकनीकी निरीक्षण कराकर मोड़ की बनावट और दृश्यता का आकलन किया जाना चाहिए। जरूरत के अनुसार चेतावनी बोर्ड, शेवरॉन साइन, रिफ्लेक्टर, रोड मार्किंग, डिलिनेटर और निर्धारित गति नियंत्रण के इंतजाम किए जा सकते हैं। यदि सड़क की चौड़ाई और उपलब्ध जगह अनुमति देती है तो इंजीनियरिंग सर्वे के आधार पर मोड़ को चौड़ा करने या उसकी ज्यामिति सुधारने पर भी विचार होना चाहिए।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब ग्रामीण लगातार इस मोड़ पर दुर्घटनाओं की आशंका जता रहे हैं, तो संबंधित विभाग स्थायी सुरक्षा इंतजाम क्यों नहीं कर रहा? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
जरूरत हादसे के बाद कार्रवाई की नहीं, बल्कि हादसे से पहले सुरक्षा सुनिश्चित करने की है।
    user_सत्य एक्सप्रेस न्यूज
    सत्य एक्सप्रेस न्यूज
    पत्रकार Shujalpur, Shajapur•
    15 hrs ago
  • मोदी के समर्थन में विधायक घनश्याम चंद्रवंशी का शायराना अंदाज! वायरल वीडियो में गरजे— विरोधियों का बाप भी चिल्लाएगा, मोदी कहीं नहीं जाएगा!
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    मोदी के समर्थन में विधायक घनश्याम चंद्रवंशी का शायराना अंदाज! वायरल वीडियो में गरजे— विरोधियों का बाप भी चिल्लाएगा, मोदी कहीं नहीं जाएगा!
    user_Anil Sharma
    Anil Sharma
    Local News Reporter कालापीपल, शाजापुर, मध्य प्रदेश•
    3 hrs ago
  • आपकी सरकार आपके गांव पहुंची, समस्याओं का मौके पर निराकरण हमारी प्राथमिकता : मंत्री डॉ. गौतम टेटवाल आपकी सरकार आपके गांव पहुंची, समस्याओं का मौके पर निराकरण हमारी प्राथमिकता : मंत्री डॉ. गौतम टेटवाल मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान के तहत पड़ाना में जनसमस्या निवारण शिविर आयोजित — 15 शिकायतों में से 10 का मौके पर निराकरण, संबल योजना के तहत पांच परिवारों को ₹12 लाख की सहायता गुफरान बैग ब्यूरो चीफ राजगढ़ पड़ाना/सारंगपुर। मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान के तहत शुक्रवार को ग्राम पंचायत पड़ाना में जनसमस्या निवारण शिविर आयोजित किया गया। शिविर में मध्यप्रदेश शासन के कौशल विकास एवं रोजगार विभाग के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. गौतम टेटवाल ने ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और संबंधित अधिकारियों को त्वरित निराकरण के निर्देश दिए। शिविर में विभिन्न विभागों से संबंधित 15 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 10 का मौके पर ही निराकरण किया गया, जबकि शेष शिकायतों के समाधान के लिए अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। मंत्री डॉ. गौतम टेटवाल ने कहा कि “आपकी सरकार आपके गांव पहुंची है। आमजन की समस्याओं का मौके पर निराकरण करना हमारी प्राथमिकता है। सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उनका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है।” उन्होंने कहा कि शिविर में एसडीएम, तहसीलदार, जनपद पंचायत सीईओ सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एक ही स्थान पर उपस्थित रहकर लोगों की समस्याएं सुन रहे हैं। इससे नागरिकों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते। यह सुशासन और जनसेवा की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। संबल योजना के पांच हितग्राही परिवारों को ₹12 लाख की सहायता शिविर के दौरान मुख्यमंत्री जनकल्याण संबल योजना के अंतर्गत पांच हितग्राही परिवारों को कुल ₹12 लाख की अनुग्रह सहायता राशि के चेक प्रदान किए गए। इनमें पड़ाना निवासी जगदीश एवं शशि देवी गुप्ता के परिवार को ₹2 लाख, पप्पी बाई पत्नी पीरूलाल कंडारा को ₹2 लाख, अशोक मंगल शर्मा के परिवार को ₹4 लाख, मगराना निवासी दिनेश एवं पिंकी पुषद के परिवार को ₹2 लाख तथा इटावा निवासी केसर सिंह एवं राजल बाई के परिवार को ₹2 लाख की सहायता राशि दी गई। इसके अतिरिक्त स्वास्थ्य विभाग द्वारा 25 लोगों का नेत्र परीक्षण किया गया तथा जरूरतमंदों को चश्मे वितरित किए गए। शिविर में विभिन्न योजनाओं के पात्र हितग्राहियों को लाभान्वित करने के साथ ग्रामीणों को शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी दी गई। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नेतृत्व में विकास को गति मंत्री डॉ. टेटवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार तथा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार जनकल्याण, सुशासन और विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। शासन की प्राथमिकता पात्र हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ दिलाना और जनसमस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सारंगपुर विधानसभा क्षेत्र के विकास कार्यों में संसाधनों की कमी आड़े नहीं आने दी जाएगी और क्षेत्र के विकास को निरंतर गति दी जाएगी। पांच ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों ने लिया भाग राजगढ़ कलेक्टर के निर्देश पर आयोजित शिविर में पड़ाना के साथ इटावा, करौंदी, मगराना और रामपुरिया ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों ने भाग लिया। अधिकारियों ने विभागीय योजनाओं, सुविधाओं और सेवाओं की जानकारी देते हुए ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान के लिए संवाद किया। स्वास्थ्य विभाग के बीएमओ डॉ. केएन भिलवारे ने स्वास्थ्य सुविधाओं तथा आगामी त्योहारों में पटाखे चलाते समय बरती जाने वाली सावधानियों की जानकारी दी। कृषि विस्तार अधिकारी बलवान सिंह परमार ने रबी सीजन की फसलों की गुणवत्ता, कृषि यंत्रों पर मिलने वाली सब्सिडी और कृषि विभाग की योजनाओं के बारे में बताया। जनपद पंचायत सीईओ महेंद्र गोविल ने जनसंवाद के माध्यम से विभागीय योजनाओं एवं सेवाओं की जानकारी दी। विद्युत विभाग के सुपरवाइजर गिरीश कुमार मिश्रा ने गुलावता गांव में बड़े ट्रांसफार्मर की स्थापना तथा पांदा और मगराना में नए विद्युत ग्रिड से संबंधित जानकारी दी। महिला एवं बाल विकास, हथकरघा सहित अन्य विभागों के अधिकारियों ने भी ग्रामीणों को योजनाओं से अवगत कराया। उद्यम संवाद के माध्यम से रोजगार एवं उद्यमिता से जुड़े विषयों पर चर्चा की गई। जनप्रतिनिधि और अधिकारी रहे उपस्थित इस अवसर पर सारंगपुर एसडीएम जय सोलंकी, जनपद पंचायत सीईओ महेंद्र गोविल, एसडीओपी महेश सुनैया, बीएमओ डॉ. केएन भिलवारे, गुलावता मंडल अध्यक्ष गिरवर भंडारी, जिला सोशल मीडिया संयोजक लोकेंद्र गुर्जर, भाजपा जिला मंत्री मनोहर सिंह परमार, ग्राम पंचायत पड़ाना के सरपंच गोकुल दुगारिया, पंचायत सचिव श्रीलाल नागर, रोजगार सहायक श्याम पाटीदार, जनपद पंचायत सदस्य प्रतिनिधि सोनू मंसूरी, सरपंच संघ के प्रदेश अध्यक्ष गोपाल सिंह पंवार, सरपंच श्री धर्मेंद्र जाट, दिनेश परमार, शरीफ मंसूरी, ओम परमार, यशवंत माली सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाएं और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
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    आपकी सरकार आपके गांव पहुंची, समस्याओं का मौके पर निराकरण हमारी प्राथमिकता : मंत्री डॉ. गौतम टेटवाल
आपकी सरकार आपके गांव पहुंची, समस्याओं का मौके पर निराकरण हमारी प्राथमिकता : मंत्री डॉ. गौतम टेटवाल
मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान के तहत पड़ाना में जनसमस्या निवारण शिविर आयोजित — 15 शिकायतों में से 10 का मौके पर निराकरण, संबल योजना के तहत पांच परिवारों को ₹12 लाख की सहायता
गुफरान बैग ब्यूरो चीफ राजगढ़
पड़ाना/सारंगपुर। मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान के तहत शुक्रवार को ग्राम पंचायत पड़ाना में जनसमस्या निवारण शिविर आयोजित किया गया। शिविर में मध्यप्रदेश शासन के कौशल विकास एवं रोजगार विभाग के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. गौतम टेटवाल ने ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और संबंधित अधिकारियों को त्वरित निराकरण के निर्देश दिए। शिविर में विभिन्न विभागों से संबंधित 15 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 10 का मौके पर ही निराकरण किया गया, जबकि शेष शिकायतों के समाधान के लिए अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
मंत्री डॉ. गौतम टेटवाल ने कहा कि “आपकी सरकार आपके गांव पहुंची है। आमजन की समस्याओं का मौके पर निराकरण करना हमारी प्राथमिकता है। सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उनका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है।” उन्होंने कहा कि शिविर में एसडीएम, तहसीलदार, जनपद पंचायत सीईओ सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एक ही स्थान पर उपस्थित रहकर लोगों की समस्याएं सुन रहे हैं। इससे नागरिकों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते। यह सुशासन और जनसेवा की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
संबल योजना के पांच हितग्राही परिवारों को ₹12 लाख की सहायता
शिविर के दौरान मुख्यमंत्री जनकल्याण संबल योजना के अंतर्गत पांच हितग्राही परिवारों को कुल ₹12 लाख की अनुग्रह सहायता राशि के चेक प्रदान किए गए। इनमें पड़ाना निवासी जगदीश एवं शशि देवी गुप्ता के परिवार को ₹2 लाख, पप्पी बाई पत्नी पीरूलाल कंडारा को ₹2 लाख, अशोक मंगल शर्मा के परिवार को ₹4 लाख, मगराना निवासी दिनेश एवं पिंकी पुषद के परिवार को ₹2 लाख तथा इटावा निवासी केसर सिंह एवं राजल बाई के परिवार को ₹2 लाख की सहायता राशि दी गई।
इसके अतिरिक्त स्वास्थ्य विभाग द्वारा 25 लोगों का नेत्र परीक्षण किया गया तथा जरूरतमंदों को चश्मे वितरित किए गए। शिविर में विभिन्न योजनाओं के पात्र हितग्राहियों को लाभान्वित करने के साथ ग्रामीणों को शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी दी गई।
प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नेतृत्व में विकास को गति
मंत्री डॉ. टेटवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार तथा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार जनकल्याण, सुशासन और विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। शासन की प्राथमिकता पात्र हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ दिलाना और जनसमस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सारंगपुर विधानसभा क्षेत्र के विकास कार्यों में संसाधनों की कमी आड़े नहीं आने दी जाएगी और क्षेत्र के विकास को निरंतर गति दी जाएगी।
पांच ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों ने लिया भाग
राजगढ़ कलेक्टर के निर्देश पर आयोजित शिविर में पड़ाना के साथ इटावा, करौंदी, मगराना और रामपुरिया ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों ने भाग लिया। अधिकारियों ने विभागीय योजनाओं, सुविधाओं और सेवाओं की जानकारी देते हुए ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान के लिए संवाद किया।
स्वास्थ्य विभाग के बीएमओ डॉ. केएन भिलवारे ने स्वास्थ्य सुविधाओं तथा आगामी त्योहारों में पटाखे चलाते समय बरती जाने वाली सावधानियों की जानकारी दी। कृषि विस्तार अधिकारी बलवान सिंह परमार ने रबी सीजन की फसलों की गुणवत्ता, कृषि यंत्रों पर मिलने वाली सब्सिडी और कृषि विभाग की योजनाओं के बारे में बताया। जनपद पंचायत सीईओ महेंद्र गोविल ने जनसंवाद के माध्यम से विभागीय योजनाओं एवं सेवाओं की जानकारी दी।
विद्युत विभाग के सुपरवाइजर गिरीश कुमार मिश्रा ने गुलावता गांव में बड़े ट्रांसफार्मर की स्थापना तथा पांदा और मगराना में नए विद्युत ग्रिड से संबंधित जानकारी दी। महिला एवं बाल विकास, हथकरघा सहित अन्य विभागों के अधिकारियों ने भी ग्रामीणों को योजनाओं से अवगत कराया। उद्यम संवाद के माध्यम से रोजगार एवं उद्यमिता से जुड़े विषयों पर चर्चा की गई।
जनप्रतिनिधि और अधिकारी रहे उपस्थित
इस अवसर पर सारंगपुर एसडीएम जय सोलंकी, जनपद पंचायत सीईओ महेंद्र गोविल, एसडीओपी महेश सुनैया, बीएमओ डॉ. केएन भिलवारे, गुलावता मंडल अध्यक्ष गिरवर भंडारी, जिला सोशल मीडिया संयोजक लोकेंद्र गुर्जर, भाजपा जिला मंत्री मनोहर सिंह परमार, ग्राम पंचायत पड़ाना के सरपंच गोकुल दुगारिया, पंचायत सचिव श्रीलाल नागर, रोजगार सहायक श्याम पाटीदार, जनपद पंचायत सदस्य प्रतिनिधि सोनू मंसूरी, सरपंच संघ के प्रदेश अध्यक्ष गोपाल सिंह पंवार, सरपंच श्री धर्मेंद्र जाट, दिनेश परमार, शरीफ मंसूरी, ओम परमार, यशवंत माली सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाएं और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
    user_मिर्ज़ा गुफरान बैग पत्रकार
    मिर्ज़ा गुफरान बैग पत्रकार
    Advertising agency सारंगपुर, राजगढ़, मध्य प्रदेश•
    4 hrs ago
  • नर्मदा का पानी आष्टा पहुंचा, विधायक ने किया लोकार्पण, लेकिन कई गांवों के किसान अब भी इंतजार में! 🚩 ग्राम खाचरौद में शुभारंभ से खुशी, मगर जिन गांवों में पाइपलाइन नहीं पहुंची, वहां के किसानों को कब मिलेगा सिंचाई का पानी? आष्टा। आष्टा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम खाचरौद में नर्मदा परियोजना के तहत पानी पहुंचने पर शुभारंभ कार्यक्रम आयोजित किया गया। विधायक गोपाल सिंह इंजीनियर ने लोकार्पण किया। इस अवसर पर ग्रामीणों और श्रद्धालुओं में उत्साह देखने को मिला। हालांकि, इस खुशी के बीच किसानों की एक बड़ी समस्या भी सामने आ रही है। आष्टा तहसील के कई ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी नर्मदा परियोजना की पाइपलाइन नहीं पहुंची है और किसानों के खेत सिंचाई के पानी का इंतजार कर रहे हैं। एक ओर किसान गेहूं की बोवनी में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर कई गांवों के किसानों को उम्मीद है कि नर्मदा परियोजना का लाभ जल्द उनके खेतों तक भी पहुंचेगा। अब बड़ा सवाल यह है कि जिन गांवों में अभी तक पाइपलाइन नहीं बिछी है, वहां नर्मदा का पानी कब पहुंचेगा? क्या इन किसानों को भी इस परियोजना का लाभ मिलेगा या उन्हें अभी और इंतजार करना पड़ेगा? नर्मदा परियोजना का वास्तविक लाभ तभी माना जाएगा, जब क्षेत्र के सभी पात्र किसानों के खेतों तक सिंचाई के लिए पानी पहुंचेगा। वैष्णव डिजिटल न्यूज़ हर खबर पर हमारी नजर ✍️ दीपक कुमार बैरागी एडिटर एवं संवाददाता
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    नर्मदा का पानी आष्टा पहुंचा, विधायक ने किया लोकार्पण, लेकिन कई गांवों के किसान अब भी इंतजार में!
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ग्राम खाचरौद में शुभारंभ से खुशी, मगर जिन गांवों में पाइपलाइन नहीं पहुंची, वहां के किसानों को कब मिलेगा सिंचाई का पानी?
आष्टा। आष्टा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम खाचरौद में नर्मदा परियोजना के तहत पानी पहुंचने पर शुभारंभ कार्यक्रम आयोजित किया गया। विधायक गोपाल सिंह इंजीनियर ने लोकार्पण किया। इस अवसर पर ग्रामीणों और श्रद्धालुओं में उत्साह देखने को मिला।
हालांकि, इस खुशी के बीच किसानों की एक बड़ी समस्या भी सामने आ रही है। आष्टा तहसील के कई ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी नर्मदा परियोजना की पाइपलाइन नहीं पहुंची है और किसानों के खेत सिंचाई के पानी का इंतजार कर रहे हैं।
एक ओर किसान गेहूं की बोवनी में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर कई गांवों के किसानों को उम्मीद है कि नर्मदा परियोजना का लाभ जल्द उनके खेतों तक भी पहुंचेगा।
अब बड़ा सवाल यह है कि जिन गांवों में अभी तक पाइपलाइन नहीं बिछी है, वहां नर्मदा का पानी कब पहुंचेगा? क्या इन किसानों को भी इस परियोजना का लाभ मिलेगा या उन्हें अभी और इंतजार करना पड़ेगा?
नर्मदा परियोजना का वास्तविक लाभ तभी माना जाएगा, जब क्षेत्र के सभी पात्र किसानों के खेतों तक सिंचाई के लिए पानी पहुंचेगा।
वैष्णव डिजिटल न्यूज़ हर खबर पर हमारी नजर
✍️ दीपक कुमार बैरागी एडिटर एवं संवाददाता
    user_MRDKbairagi
    MRDKbairagi
    Local News Reporter आष्टा, सीहोर, मध्य प्रदेश•
    9 min ago
  • अजहर उद्दीन की रिपोर्ट करंट का झटका लगने से कुएं में गिरा 22 वर्षीय युवक, जिला अस्पताल से इंदौर रेफर करंट का झटका लगने से कुएं में गिरा 22 वर्षीय युवक, जिला अस्पताल से इंदौर रेफर शाजापुर। जिले के सूरजपुर निवासी 22 वर्षीय युवक अजय मुकाती पिता जुगल किशोर के साथ करंट लगने से हादसा हो गया। जानकारी के अनुसार युवक को अचानक करंट का झटका लगा, जिससे वह संतुलन खो बैठा और पास ही स्थित कुएं में जा गिरा। घटना के बाद परिवार के लोगों ने तत्परता दिखाते हुए युवक को कुएं से बाहर निकाला और उपचार के लिए जिला चिकित्सालय शाजापुर लेकर पहुंचे। यहां डॉ. विनोद गुर्जर एवं जिला अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सकों की निगरानी में युवक का उपचार किया गया। प्राथमिक उपचार के बाद युवक की स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने उसे बेहतर उपचार के लिए इंदौर रेफर कर दिया। घटना के बाद परिवार के लोग चिंतित हैं।
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    अजहर उद्दीन की रिपोर्ट करंट का झटका लगने से कुएं में गिरा 22 वर्षीय युवक, जिला अस्पताल से इंदौर रेफर
करंट का झटका लगने से कुएं में गिरा 22 वर्षीय युवक, जिला अस्पताल से इंदौर रेफर
शाजापुर। जिले के सूरजपुर निवासी 22 वर्षीय युवक अजय मुकाती पिता जुगल किशोर के साथ करंट लगने से हादसा हो गया। जानकारी के अनुसार युवक को अचानक करंट का झटका लगा, जिससे वह संतुलन खो बैठा और पास ही स्थित कुएं में जा गिरा।
घटना के बाद परिवार के लोगों ने तत्परता दिखाते हुए युवक को कुएं से बाहर निकाला और उपचार के लिए जिला चिकित्सालय शाजापुर लेकर पहुंचे। यहां डॉ. विनोद गुर्जर एवं जिला अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सकों की निगरानी में युवक का उपचार किया गया।
प्राथमिक उपचार के बाद युवक की स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने उसे बेहतर उपचार के लिए इंदौर रेफर कर दिया। घटना के बाद परिवार के लोग चिंतित हैं।
    user_अजहर उद्दीन
    अजहर उद्दीन
    शाजापुर, शाजापुर, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
  • शाजापुर चोरी की घटना के 8 दिन बाद जांच करने पहुंची पुलिस चोरी की घटना के 8 दिन बाद पुलिस ने किया मौका मुआयना करीब 30 हजार रुपये की चोरी के मामले में पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का किया निरीक्षण शाजापुर। शहर में मोबाइल दुकान पर करीब 8 दिन पहले हुई चोरी की घटना के मामले में पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का मौका मुआयना किया। दुकान से करीब 30 हजार रुपये की चोरी होने की जानकारी सामने आई है। घटना के बाद पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है। जानकारी के अनुसार, मोबाइल दुकान पर चोरी की वारदात हुई थी। घटना के बाद पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण किया और मामले से जुड़े पहलुओं की जानकारी ली।
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    शाजापुर चोरी की घटना के 8 दिन बाद जांच करने पहुंची पुलिस
चोरी की घटना के 8 दिन बाद पुलिस ने किया मौका मुआयना
करीब 30 हजार रुपये की चोरी के मामले में पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का किया निरीक्षण
शाजापुर। शहर में मोबाइल दुकान पर करीब 8 दिन पहले हुई चोरी की घटना के मामले में पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का मौका मुआयना किया। दुकान से करीब 30 हजार रुपये की चोरी होने की जानकारी सामने आई है। घटना के बाद पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है।
जानकारी के अनुसार, मोबाइल दुकान पर चोरी की वारदात हुई थी। घटना के बाद पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण किया और मामले से जुड़े पहलुओं की जानकारी ली।
    user_Amjad Khan
    Amjad Khan
    शाजापुर, शाजापुर, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
  • ​सीहोर वन विभाग का गजब कारनामा, खुद के 'रेंज ऑफिस' में कट रही हरियाली, रक्षक ही बन गए भक्षक ​सीहोर। जंगलों और वन्य संपदा की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाले वन विभाग की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सीहोर जिले में वन विभाग की स्थिति लगातार विवादों के साये में है। हालिया मामला तो हद पार करने वाला है जहां विभाग जंगलों की सुरक्षा करना तो दूर, अब अपने ही मुख्य कार्यालय परिसर में खड़े विशालकाय और हरे-भरे पेड़ों को बचाने में भी नाकाम साबित हो रहा है। ​रेंज ऑफिस के भीतर ही हरियाली पर चल रही आरी ​इसका ताजा और जीता-जागता उदाहरण शहर के इंदौर नाके के नजदीक स्थित सीहोर रेंज ऑफिस परिसर के भीतर देखने को मिल रहा है। जिम्मेदार अधिकारियों की नाक के नीचे कार्यालय परिसर में ही अनेक बड़े पेड़ों की बड़ी और हरी डालियों को धड़ल्ले से काटा जा रहा है। खुलेआम ​सीहोर वन विभाग का गजब कारनामा, खुद के 'रेंज ऑफिस' में कट रही हरियाली, रक्षक ही बन गए भक्षक ​सीहोर। जंगलों और वन्य संपदा की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाले वन विभाग की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सीहोर जिले में वन विभाग की स्थिति लगातार विवादों के साये में है। हालिया मामला तो हद पार करने वाला है जहां विभाग जंगलों की सुरक्षा करना तो दूर, अब अपने ही मुख्य कार्यालय परिसर में खड़े विशालकाय और हरे-भरे पेड़ों को बचाने में भी नाकाम साबित हो रहा है। ​रेंज ऑफिस के भीतर ही हरियाली पर चल रही आरी ​इसका ताजा और जीता-जागता उदाहरण शहर के इंदौर नाके के नजदीक स्थित सीहोर रेंज ऑफिस परिसर के भीतर देखने को मिल रहा है। जिम्मेदार अधिकारियों की नाक के नीचे कार्यालय परिसर में ही अनेक बड़े पेड़ों की बड़ी और हरी डालियों को धड़ल्ले से काटा जा रहा है। खुलेआम हरी-भरी छांव पर प्रहार किए जाने से पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश है। ​सवाल यह उठता है कि जिस विभाग के दफ्तर में ही हरियाली सुरक्षित नहीं है, वह जिले के सुदूर जंगलों की क्या हिफाजत कर रहा होगा। ​रेहटी के बाद सीहोर मुख्यालय तक फैली लापरवाही ​यह कोई पहला मौका नहीं है जब वन विभाग की सुस्ती या मिलीभगत सामने आई हो। इससे पहले रेहटी क्षेत्र में भी जंगलों की बड़े पैमाने पर अवैध कटाई के सनसनीखेज मामले सामने आ चुके हैं, जिन पर विभागीय कार्रवाई हमेशा सवालों के घेरे में रही है। अब जिला मुख्यालय पर स्थित रेंज ऑफिस के अंदर ही इस तरह की मनमानी ने वन विभाग के दावों की पोल खोलकर रख दी है। ​सवालों के घेरे में जिम्मेदार अधिकारी ​जिले के सर्वोच्च वन अधिकारियों की उदासीनता के चलते मैदानी अमला बेलगाम हो चुका है। एक तरफ शासन पौधारोपण और हरियाली बचाने के लिए करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रहा है, वहीं दूसरी तरफ खुद वन विभाग के दफ्तरों में पेड़ों की बलि दी जा रही है। ​अब देखना यह होगा कि इस खुलासे के बाद जिम्मेदार उच्च अधिकारी इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं या फिर हमेशा की तरह फाइलों में ही लीपापोती कर दी जाती है।
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    ​सीहोर वन विभाग का गजब कारनामा, खुद के 'रेंज ऑफिस' में कट रही हरियाली, रक्षक ही बन गए भक्षक

​सीहोर। जंगलों और वन्य संपदा की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाले वन विभाग की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सीहोर जिले में वन विभाग की स्थिति लगातार विवादों के साये में है। हालिया मामला तो हद पार करने वाला है जहां विभाग जंगलों की सुरक्षा करना तो दूर, अब अपने ही मुख्य कार्यालय परिसर में खड़े विशालकाय और हरे-भरे पेड़ों को बचाने में भी नाकाम साबित हो रहा है।
​रेंज ऑफिस के भीतर ही हरियाली पर चल रही आरी
​इसका ताजा और जीता-जागता उदाहरण शहर के इंदौर नाके के नजदीक स्थित सीहोर रेंज ऑफिस परिसर के भीतर देखने को मिल रहा है। जिम्मेदार अधिकारियों की नाक के नीचे कार्यालय परिसर में ही अनेक बड़े पेड़ों की बड़ी और हरी डालियों को धड़ल्ले से काटा जा रहा है। खुलेआम
​सीहोर वन विभाग का गजब कारनामा, खुद के 'रेंज ऑफिस' में कट रही हरियाली, रक्षक ही बन गए भक्षक
​सीहोर। जंगलों और वन्य संपदा की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाले वन विभाग की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सीहोर जिले में वन विभाग की स्थिति लगातार विवादों के साये में है। हालिया मामला तो हद पार करने वाला है जहां विभाग जंगलों की सुरक्षा करना तो दूर, अब अपने ही मुख्य कार्यालय परिसर में खड़े विशालकाय और हरे-भरे पेड़ों को बचाने में भी नाकाम साबित हो रहा है।
​रेंज ऑफिस के भीतर ही हरियाली पर चल रही आरी
​इसका ताजा और जीता-जागता उदाहरण शहर के इंदौर नाके के नजदीक स्थित सीहोर रेंज ऑफिस परिसर के भीतर देखने को मिल रहा है। जिम्मेदार अधिकारियों की नाक के नीचे कार्यालय परिसर में ही अनेक बड़े पेड़ों की बड़ी और हरी डालियों को धड़ल्ले से काटा जा रहा है। खुलेआम हरी-भरी छांव पर प्रहार किए जाने से पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश है।
​सवाल यह उठता है कि जिस विभाग के दफ्तर में ही हरियाली सुरक्षित नहीं है, वह जिले के सुदूर जंगलों की क्या हिफाजत कर रहा होगा।
​रेहटी के बाद सीहोर मुख्यालय तक फैली लापरवाही
​यह कोई पहला मौका नहीं है जब वन विभाग की सुस्ती या मिलीभगत सामने आई हो। इससे पहले रेहटी क्षेत्र में भी जंगलों की बड़े पैमाने पर अवैध कटाई के सनसनीखेज मामले सामने आ चुके हैं, जिन पर विभागीय कार्रवाई हमेशा सवालों के घेरे में रही है। अब जिला मुख्यालय पर स्थित रेंज ऑफिस के अंदर ही इस तरह की मनमानी ने वन विभाग के दावों की पोल खोलकर रख दी है।
​सवालों के घेरे में जिम्मेदार अधिकारी
​जिले के सर्वोच्च वन अधिकारियों की उदासीनता के चलते मैदानी अमला बेलगाम हो चुका है। एक तरफ शासन पौधारोपण और हरियाली बचाने के लिए करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रहा है, वहीं दूसरी तरफ खुद वन विभाग के दफ्तरों में पेड़ों की बलि दी जा रही है।
​अब देखना यह होगा कि इस खुलासे के बाद जिम्मेदार उच्च अधिकारी इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं या फिर हमेशा की तरह फाइलों में ही लीपापोती कर दी जाती है।
    user_Dharmendra Yadav
    Dharmendra Yadav
    सीहोर नगर, सीहोर, मध्य प्रदेश•
    3 hrs ago
  • छोटे भाई की हत्या के दोषी भाई और भाभी को आजीवन कारावास छोटे भाई की हत्या के दोषी भाई और भाभी को आजीवन कारावास गुफरान बैग ब्यूरो चीफ राजगढ़ सारंगपुर छोटे भाई कमल पुष्पद की हत्या के मामले में प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश अतुल राज भलावी की अदालत ने आरोपी भाई बाबूलाल पुष्पद और भाभी सोना बाई पुष्पद, निवासी कीड़ी रोड, सारंगपुर, जिला राजगढ़ को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने दोनों आरोपियों पर 3-3 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। प्रकरण में न्यायालय ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 103 (1) एवं 3 (5) के तहत दोषसिद्धि की। शासन की ओर से पैरवी कर रहे अतिरिक्त लोक अभियोजक शिव प्रसाद शर्मा ने बताया कि घटना 15 अगस्त 2025 को सुबह करीब 7 बजे की है। जमीन, मकान और दुकान के किराए से जुड़े विवाद तथा रुपयों के लालच में बाबूलाल और उसकी पत्नी सोना बाई ने अपने छोटे भाई कमल पुष्पद की कुल्हाड़ी से हत्या कर दी थी। आरोप है कि हत्या में सोना बाई ने बाबूलाल का साथ दिया था। घटना की सूचना मिलने पर सारंगपुर थाना पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर विवेचना शुरू की। मामले में मृतक की माता चश्मदीद साक्षी थीं, लेकिन लकवा होने के कारण न्यायालय में उनके बयान दर्ज नहीं हो सके। घटना का कोई अन्य प्रत्यक्षदर्शी नहीं होने से अभियोजन का पूरा मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित था। अभियोजन पक्ष ने न्यायालय में 18 साक्षियों के बयान कराए। आरोपी बाबूलाल से जब्त कुल्हाड़ी और कपड़ों को परीक्षण के लिए एफएसएल भेजा गया। एफएसएल रिपोर्ट और साक्षियों के बयानों के आधार पर न्यायालय ने बाबूलाल और सोना बाई को हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास और अर्थदंड से दंडित किया। न्यायालय ने मृतक की पत्नी को आर्थिक सहायता दिलाने के लिए मध्यप्रदेश अपराध पीड़ित प्रतिकर योजना, 2015 के अंतर्गत जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, राजगढ़ को प्रतिकर प्रदान करने की अनुशंसा भी की है। प्रकरण की विवेचना सारंगपुर थाना प्रभारी आकांक्षा हाडा ने की, जबकि शासन की ओर से पैरवी अतिरिक्त लोक अभियोजक शिव प्रसाद शर्मा ने की।
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    छोटे भाई की हत्या के दोषी भाई और भाभी को आजीवन कारावास

छोटे भाई की हत्या के दोषी भाई और भाभी को आजीवन कारावास
गुफरान बैग ब्यूरो चीफ राजगढ़
सारंगपुर छोटे भाई कमल पुष्पद की हत्या के मामले में प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश अतुल राज भलावी की अदालत ने आरोपी भाई बाबूलाल पुष्पद और भाभी सोना बाई पुष्पद, निवासी कीड़ी रोड, सारंगपुर, जिला राजगढ़ को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने दोनों आरोपियों पर 3-3 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। प्रकरण में न्यायालय ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 103 (1) एवं 3 (5) के तहत दोषसिद्धि की। शासन की ओर से पैरवी कर रहे अतिरिक्त लोक अभियोजक शिव प्रसाद शर्मा ने बताया कि घटना 15 अगस्त 2025 को सुबह करीब 7 बजे की है। जमीन, मकान और दुकान के किराए से जुड़े विवाद तथा रुपयों के लालच में बाबूलाल और उसकी पत्नी सोना बाई ने अपने छोटे भाई कमल पुष्पद की कुल्हाड़ी से हत्या कर दी थी। आरोप है कि हत्या में सोना बाई ने बाबूलाल का साथ दिया था। घटना की सूचना मिलने पर सारंगपुर थाना पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर विवेचना शुरू की। मामले में मृतक की माता चश्मदीद साक्षी थीं, लेकिन लकवा होने के कारण न्यायालय में उनके बयान दर्ज नहीं हो सके। घटना का कोई अन्य प्रत्यक्षदर्शी नहीं होने से अभियोजन का पूरा मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित था। अभियोजन पक्ष ने न्यायालय में 18 साक्षियों के बयान कराए। आरोपी बाबूलाल से जब्त कुल्हाड़ी और कपड़ों को परीक्षण के लिए एफएसएल भेजा गया। एफएसएल रिपोर्ट और साक्षियों के बयानों के आधार पर न्यायालय ने बाबूलाल और सोना बाई को हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास और अर्थदंड से दंडित किया। न्यायालय ने मृतक की पत्नी को आर्थिक सहायता दिलाने के लिए मध्यप्रदेश अपराध पीड़ित प्रतिकर योजना, 2015 के अंतर्गत जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, राजगढ़ को प्रतिकर प्रदान करने की अनुशंसा भी की है। प्रकरण की विवेचना सारंगपुर थाना प्रभारी आकांक्षा हाडा ने की, जबकि शासन की ओर से पैरवी अतिरिक्त लोक अभियोजक शिव प्रसाद शर्मा ने की।
    user_मिर्ज़ा गुफरान बैग पत्रकार
    मिर्ज़ा गुफरान बैग पत्रकार
    Advertising agency सारंगपुर, राजगढ़, मध्य प्रदेश•
    4 hrs ago
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