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नाली बनवानी hai
Brihaspati kumar vaishya
नाली बनवानी hai
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- नाली बनवानी hai1
- बैढ़न-विंध्यनगर रोड पर बड़ा हादसा टला, सड़क में धंसा हाईवा बैढ़न-विंध्यनगर मुख्य मार्ग पर सागर होटल के सामने मंगलवार को उस समय बड़ा हादसा टल गया, जब सड़क पर चल रहा एक हाईवा अचानक धंसकर फंस गया। वाहन के सड़क में धंसने के बाद मौके पर कुछ देर के लिए अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। गनीमत रही कि इस दौरान कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। स्थानीय लोगों के अनुसार बैढ़न शहर की कई सड़कें इन दिनों बदहाल स्थिति में हैं। सीवरेज लाइन डालने के बाद सड़क और गड्ढों को सही तरीके से समतल नहीं किए जाने के कारण आए दिन वाहन फंसने की घटनाएं सामने आ रही हैं। लगातार बारिश के चलते सड़क की स्थिति और खराब हो गई है तथा कई स्थानों पर गहरे गड्ढे बन गए हैं।1
- मछली पालन के कब्जे ने डुबो दी किसानों की मेहनत! गोभा के केरवा में आधी रात टूटा बांध, 50 एकड़ धान की फसल बर्बाद 150 परिवारों की सिंचाई व्यवस्था पर संकट आपातकालीन जल निकासी द्वार पर जाली लगाने का आरोप सिंगरौली- ग्राम पंचायत गोभा के ग्राम केरवा में बहेरा खड़िया नाला पर वर्ष 2008-09 में निर्मित बांध सोमवार-मंगलवार की दरम्यानी रात हुई मूसलाधार बारिश के बीच टूट गया। बांध टूटने से देखते ही देखते खेतों में पानी का ऐसा सैलाब आया कि करीब 50 किसानों की लगभग 50 एकड़ में लगी धान की फसल बर्बाद हो गई। घटना ने न केवल किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया, बल्कि बांध के रखरखाव और जल निकासी व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बारिश बनी वजह या लापरवाही ने बढ़ाया खतरा? ग्रामीणों के अनुसार 16 और 17 अगस्त की मध्यरात्रि में क्षेत्र में हुई भारी बारिश के बाद बांध में पानी का दबाव तेजी से बढ़ा। बताया जा रहा है कि बांध में बने आपातकालीन जल निकासी द्वार से पानी का अतिरिक्त बहाव निकलना था, लेकिन वहां कथित तौर पर लोहे की जाली लगा दिए जाने से पानी की निकासी बाधित हो गई।ग्रामीणों का आरोप है कि पानी के लगातार बढ़ते दबाव के बावजूद निकासी का पर्याप्त रास्ता नहीं मिलने से बांध की संरचना दबाव सहन नहीं कर सकी और आखिरकार बांध टूट गया। स्थानीय ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि असजूद बेग पिता शमशीर बेग, निवासी ग्राम गोभा, पिछले लगभग तीन वर्षों से उक्त बांध में कथित रूप से अवैध तरीके से मछली पालन कर रहा था। ग्रामीणों का आरोप है कि उसने बांध को अपने कब्जे में लेकर स्थानीय लोगों के पानी के उपयोग पर भी रोक लगा रखी थी। ग्रामीणों के मुताबिक आपातकालीन निकासी द्वार पर लोहे की जाली लगाए जाने से पानी का प्राकृतिक बहाव प्रभावित हुआ। हालांकि इन आरोपों की प्रशासनिक जांच होना आवश्यक है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि बांध टूटने के पीछे वास्तविक तकनीकी और मानवीय कारण क्या रहे। 50 एकड़ फसल तबाह, किसानों के सामने बड़ा संकट बांध टूटने का सबसे बड़ा खामियाजा उन किसानों को भुगतना पड़ा है, जिन्होंने धान की फसल में अपनी पूंजी, श्रम और उम्मीदें लगाई थीं। करीब 50 एकड़ फसल के नुकसान से किसानों को भारी आर्थिक क्षति होने की आशंका है।एक ओर तैयार होती फसल पानी में डूबकर बर्बाद हो गई, वहीं दूसरी ओर आगामी खेती के लिए भी किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते बांध की स्थिति और जल निकासी व्यवस्था की निगरानी की जाती तो शायद यह नुकसान टाला जा सकता था। यह बांध केवल एक जल संरचना नहीं था, बल्कि आसपास के लगभग 150 परिवारों के लिए सिंचाई का महत्वपूर्ण स्रोत बताया जा रहा है। बांध टूटने के बाद किसानों के सामने वर्तमान फसल के नुकसान के साथ-साथ आगामी सिंचाई व्यवस्था को लेकर भी चिंता पैदा हो गई है। इस घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में निर्मित जल संरचनाओं के रखरखाव, अतिक्रमण, जल निकासी व्यवस्था और उपयोग की निगरानी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। बांध टूटने की घटना मध्यरात्रि में हुई, जिसके कारण किसी व्यक्ति की जान जाने की सूचना नहीं है। यदि यही घटना दिन के समय या आबादी के बीच हुई होती तो स्थिति कहीं अधिक गंभीर हो सकती थी। ग्रामीणों के अनुसार अचानक पानी के तेज बहाव से आसपास के क्षेत्रों में अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। घटना के बाद ग्रामीणों में जबरदस्त आक्रोश है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष तकनीकी एवं प्रशासनिक जांच कराई जाए। विशेष रूप से आपातकालीन जल निकासी द्वार पर कथित रूप से लगाई गई लोहे की जाली, बांध में मछली पालन तथा बांध के रखरखाव की स्थिति की जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की गई है। ग्रामीणों ने कथित रूप से बांध पर कब्जा कर मछली पालन करने वाले व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई तथा प्रभावित किसानों को उनकी फसल का उचित मुआवजा दिलाने की मांग भी उठाई है।सवाल सिर्फ बांध टूटने का नहीं, जवाबदेही का भी है । केरवा की घटना को महज प्राकृतिक आपदा मानकर छोड़ देना कई सवालों को अनुत्तरित छोड़ देगा। भारी बारिश निश्चित रूप से बांध टूटने का तत्काल कारण हो सकती है, लेकिन यदि जल निकासी व्यवस्था में मानवीय हस्तक्षेप या लापरवाही की पुष्टि होती है तो जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।अब जरूरत है कि प्रशासन मौके का तकनीकी निरीक्षण कर बांध टूटने के वास्तविक कारणों का पता लगाए, किसानों की क्षति का तत्काल सर्वे कराए और भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति रोकने के लिए बांध की मरम्मत के साथ आपातकालीन जल निकासी व्यवस्था को सुरक्षित और अतिक्रमणमुक्त कराया जाए। केरवा के किसानों के लिए यह सिर्फ 50 एकड़ फसल का नुकसान नहीं, बल्कि उनकी मेहनत, आय और अगले कृषि चक्र पर पड़ा सीधा आघात है। प्रशासन की अगली कार्रवाई ही तय करेगी कि यह घटना महज एक प्राकृतिक दुर्घटना बनकर रह जाती है या इससे जवाबदेही और जल संरचनाओं की सुरक्षा का कोई ठोस रास्ता निकलता है। ........1
- नाग पंचमी पर चोपन में विराट दंगल 🤼♂️🔥 चोपन में नाग पंचमी पर आयोजित विराट दंगल में 5–6 हजार दर्शकों ने पहलवानों के रोमांचक दांव-पेच का आनंद लिया। महिला पहलवानों ने भी शानदार प्रदर्शन कर खूब तालियां बटोरीं। बारिश के बीच कुश्ती, दौड़, लंबी कूद और गद्दा भाजने की प्रतियोगिताओं ने आयोजन में जोश भर दिया। 🇮🇳👏 चोपन की पारंपरिक कुश्ती संस्कृति एक बार फिर जीवंत हुई।1
- Bjp raj jaise chahe jandha fahra sakte hai inko kisi ka dar nahin1
- जनकल्याण सेवा समिति द्वारा आज नाग पंचमी के शुभ अवसर पर फफराकुंड में लंबी कूद ऊंची कूद और कुश्ती कराया गया | कथा खिलाड़ियों को मेडल, टी-शर्ट और नगद इनाम देकर पुरस्कृत किया गया |1
- जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक सोनभद्र ने शिवद्वार मंदिर एवं मंदिर मार्ग का किया निरीक्षण, सुरक्षा एवं श्रद्धालुओं की सुविधा को लेकर दिए आवश्यक दिशा-निर्देश जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक सोनभद्र ने शिवद्वार मंदिर एवं मंदिर मार्ग का किया निरीक्षण, सुरक्षा एवं श्रद्धालुओं की सुविधा को लेकर दिए आवश्यक दिशा-निर्देश घोरावल,सोनभद्र। श्रावण मास के दृष्टिगत शिवद्वार मंदिर में दर्शन-पूजन हेतु आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुगम आवागमन एवं बेहतर व्यवस्थाओं को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से*जिलाधिकारी सोनभद्र चर्चित गौड़ एवं *पुलिस अधीक्षक सोनभद्र अभिषेक वर्मा द्वारा थाना घोरावल क्षेत्रान्तर्गत स्थित प्रसिद्ध *शिवद्वार मंदिर* एवं मंदिर मार्ग का संयुक्त रूप से निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान मंदिर परिसर में प्रवेश एवं निकास मार्ग, पार्किंग, बैरिकेडिंग, श्रद्धालुओं के आवागमन एवं सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। मंदिर मार्ग की स्थिति एवं यातायात व्यवस्था का भी निरीक्षण कर श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन हेतु आवश्यक प्रबंध सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। पुलिस अधीक्षक महोदय द्वारा मंदिर परिसर में लगे CCTV कैमरों का निरीक्षण किया गया तथा ड्रोन कैमरे के माध्यम से मंदिर परिसर एवं आसपास के क्षेत्रों की सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी की गई। भीड़ को दृष्टिगत रखते हुए प्रभावी निगरानी एवं पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही मंदिर परिसर एवं आसपास साफ-सफाई, पेयजल एवं मेडिकल सुविधा की उपलब्धता का जायजा लिया गया। संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो तथा भीड़ एवं यातायात का सुचारु प्रबंधन सुनिश्चित किया जाए। श्रावण मास के दौरान कानून-व्यवस्था एवं सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखते हुए श्रद्धालुओं को सुरक्षित एवं शांतिपूर्ण वातावरण उपलब्ध कराने हेतु संबंधित पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। निरीक्षण के दौरान संबंधित प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारीगण उपस्थित रहे।4
- चितरंगी में बड़ा हादसा टला, डॉक्टर सहित नदी में वही वाइक को ग्रामवासियों ने वाइक को पुल से सुरक्षित निकाला वाहर सिंगरौली। जिले के चितरंगी विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत ब्लॉक चितरंगी की ग्राम पंचायत बैरदह से करलो की ओर आ रहे एक डॉक्टर की वाइक नदी के तेज बहाव की चपेट में आ गई। देखते ही देखते डॉक्टर वाइक छोड़ सुरक्षित वाहर आ गए हालात बिगड़ते देख डॉक्टर ने किसी तरह अपनी जान बचाई और वाइक छोड़कर सुरक्षित बाहर निकल आए। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और मदद करते हुए कार को नदी से सुरक्षित बाहर निकाला।1