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चितरंगी में बड़ा हादसा टला, डॉक्टर सहित नदी में वही वाइक को ग्रामवासियों ने वाइक को पुल से सुरक्षित निकाला वाहर सिंगरौली। जिले के चितरंगी विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत ब्लॉक चितरंगी की ग्राम पंचायत बैरदह से करलो की ओर आ रहे एक डॉक्टर की वाइक नदी के तेज बहाव की चपेट में आ गई। देखते ही देखते डॉक्टर वाइक छोड़ सुरक्षित वाहर आ गए हालात बिगड़ते देख डॉक्टर ने किसी तरह अपनी जान बचाई और वाइक छोड़कर सुरक्षित बाहर निकल आए। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और मदद करते हुए कार को नदी से सुरक्षित बाहर निकाला।

19 hrs ago
user_Brijesh kumar
Brijesh kumar
सिंगरौली, सिंगरौली, मध्य प्रदेश•
19 hrs ago

चितरंगी में बड़ा हादसा टला, डॉक्टर सहित नदी में वही वाइक को ग्रामवासियों ने वाइक को पुल से सुरक्षित निकाला वाहर सिंगरौली। जिले के चितरंगी विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत ब्लॉक चितरंगी की ग्राम पंचायत बैरदह से करलो की ओर आ रहे एक डॉक्टर की वाइक नदी के तेज बहाव की चपेट में आ गई। देखते ही देखते डॉक्टर वाइक छोड़ सुरक्षित वाहर आ गए हालात बिगड़ते देख डॉक्टर ने किसी तरह अपनी जान बचाई और वाइक छोड़कर सुरक्षित बाहर निकल आए। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और मदद करते हुए कार को नदी से सुरक्षित बाहर निकाला।

More news from मध्य प्रदेश and nearby areas
  • बैढ़न-विंध्यनगर रोड पर बड़ा हादसा टला, सड़क में धंसा हाईवा बैढ़न-विंध्यनगर मुख्य मार्ग पर सागर होटल के सामने मंगलवार को उस समय बड़ा हादसा टल गया, जब सड़क पर चल रहा एक हाईवा अचानक धंसकर फंस गया। वाहन के सड़क में धंसने के बाद मौके पर कुछ देर के लिए अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। गनीमत रही कि इस दौरान कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। स्थानीय लोगों के अनुसार बैढ़न शहर की कई सड़कें इन दिनों बदहाल स्थिति में हैं। सीवरेज लाइन डालने के बाद सड़क और गड्ढों को सही तरीके से समतल नहीं किए जाने के कारण आए दिन वाहन फंसने की घटनाएं सामने आ रही हैं। लगातार बारिश के चलते सड़क की स्थिति और खराब हो गई है तथा कई स्थानों पर गहरे गड्ढे बन गए हैं।
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    बैढ़न-विंध्यनगर रोड पर बड़ा हादसा टला, सड़क में धंसा हाईवा
बैढ़न-विंध्यनगर मुख्य मार्ग पर सागर होटल के सामने मंगलवार को उस समय बड़ा हादसा टल गया, जब सड़क पर चल रहा एक हाईवा अचानक धंसकर फंस गया। वाहन के सड़क में धंसने के बाद मौके पर कुछ देर के लिए अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। गनीमत रही कि इस दौरान कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ।
स्थानीय लोगों के अनुसार बैढ़न शहर की कई सड़कें इन दिनों बदहाल स्थिति में हैं। सीवरेज लाइन डालने के बाद सड़क और गड्ढों को सही तरीके से समतल नहीं किए जाने के कारण आए दिन वाहन फंसने की घटनाएं सामने आ रही हैं। लगातार बारिश के चलते सड़क की स्थिति और खराब हो गई है तथा कई स्थानों पर गहरे गड्ढे बन गए हैं।
    user_Brijesh kumar
    Brijesh kumar
    सिंगरौली, सिंगरौली, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
  • मछली पालन के कब्जे ने डुबो दी किसानों की मेहनत! गोभा के केरवा में आधी रात टूटा बांध, 50 एकड़ धान की फसल बर्बाद 150 परिवारों की सिंचाई व्यवस्था पर संकट आपातकालीन जल निकासी द्वार पर जाली लगाने का आरोप सिंगरौली- ग्राम पंचायत गोभा के ग्राम केरवा में बहेरा खड़िया नाला पर वर्ष 2008-09 में निर्मित बांध सोमवार-मंगलवार की दरम्यानी रात हुई मूसलाधार बारिश के बीच टूट गया। बांध टूटने से देखते ही देखते खेतों में पानी का ऐसा सैलाब आया कि करीब 50 किसानों की लगभग 50 एकड़ में लगी धान की फसल बर्बाद हो गई। घटना ने न केवल किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया, बल्कि बांध के रखरखाव और जल निकासी व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बारिश बनी वजह या लापरवाही ने बढ़ाया खतरा? ग्रामीणों के अनुसार 16 और 17 अगस्त की मध्यरात्रि में क्षेत्र में हुई भारी बारिश के बाद बांध में पानी का दबाव तेजी से बढ़ा। बताया जा रहा है कि बांध में बने आपातकालीन जल निकासी द्वार से पानी का अतिरिक्त बहाव निकलना था, लेकिन वहां कथित तौर पर लोहे की जाली लगा दिए जाने से पानी की निकासी बाधित हो गई।ग्रामीणों का आरोप है कि पानी के लगातार बढ़ते दबाव के बावजूद निकासी का पर्याप्त रास्ता नहीं मिलने से बांध की संरचना दबाव सहन नहीं कर सकी और आखिरकार बांध टूट गया। स्थानीय ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि असजूद बेग पिता शमशीर बेग, निवासी ग्राम गोभा, पिछले लगभग तीन वर्षों से उक्त बांध में कथित रूप से अवैध तरीके से मछली पालन कर रहा था। ग्रामीणों का आरोप है कि उसने बांध को अपने कब्जे में लेकर स्थानीय लोगों के पानी के उपयोग पर भी रोक लगा रखी थी। ग्रामीणों के मुताबिक आपातकालीन निकासी द्वार पर लोहे की जाली लगाए जाने से पानी का प्राकृतिक बहाव प्रभावित हुआ। हालांकि इन आरोपों की प्रशासनिक जांच होना आवश्यक है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि बांध टूटने के पीछे वास्तविक तकनीकी और मानवीय कारण क्या रहे। 50 एकड़ फसल तबाह, किसानों के सामने बड़ा संकट बांध टूटने का सबसे बड़ा खामियाजा उन किसानों को भुगतना पड़ा है, जिन्होंने धान की फसल में अपनी पूंजी, श्रम और उम्मीदें लगाई थीं। करीब 50 एकड़ फसल के नुकसान से किसानों को भारी आर्थिक क्षति होने की आशंका है।एक ओर तैयार होती फसल पानी में डूबकर बर्बाद हो गई, वहीं दूसरी ओर आगामी खेती के लिए भी किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते बांध की स्थिति और जल निकासी व्यवस्था की निगरानी की जाती तो शायद यह नुकसान टाला जा सकता था। यह बांध केवल एक जल संरचना नहीं था, बल्कि आसपास के लगभग 150 परिवारों के लिए सिंचाई का महत्वपूर्ण स्रोत बताया जा रहा है। बांध टूटने के बाद किसानों के सामने वर्तमान फसल के नुकसान के साथ-साथ आगामी सिंचाई व्यवस्था को लेकर भी चिंता पैदा हो गई है। इस घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में निर्मित जल संरचनाओं के रखरखाव, अतिक्रमण, जल निकासी व्यवस्था और उपयोग की निगरानी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। बांध टूटने की घटना मध्यरात्रि में हुई, जिसके कारण किसी व्यक्ति की जान जाने की सूचना नहीं है। यदि यही घटना दिन के समय या आबादी के बीच हुई होती तो स्थिति कहीं अधिक गंभीर हो सकती थी। ग्रामीणों के अनुसार अचानक पानी के तेज बहाव से आसपास के क्षेत्रों में अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। घटना के बाद ग्रामीणों में जबरदस्त आक्रोश है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष तकनीकी एवं प्रशासनिक जांच कराई जाए। विशेष रूप से आपातकालीन जल निकासी द्वार पर कथित रूप से लगाई गई लोहे की जाली, बांध में मछली पालन तथा बांध के रखरखाव की स्थिति की जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की गई है। ग्रामीणों ने कथित रूप से बांध पर कब्जा कर मछली पालन करने वाले व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई तथा प्रभावित किसानों को उनकी फसल का उचित मुआवजा दिलाने की मांग भी उठाई है।सवाल सिर्फ बांध टूटने का नहीं, जवाबदेही का भी है । केरवा की घटना को महज प्राकृतिक आपदा मानकर छोड़ देना कई सवालों को अनुत्तरित छोड़ देगा। भारी बारिश निश्चित रूप से बांध टूटने का तत्काल कारण हो सकती है, लेकिन यदि जल निकासी व्यवस्था में मानवीय हस्तक्षेप या लापरवाही की पुष्टि होती है तो जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।अब जरूरत है कि प्रशासन मौके का तकनीकी निरीक्षण कर बांध टूटने के वास्तविक कारणों का पता लगाए, किसानों की क्षति का तत्काल सर्वे कराए और भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति रोकने के लिए बांध की मरम्मत के साथ आपातकालीन जल निकासी व्यवस्था को सुरक्षित और अतिक्रमणमुक्त कराया जाए। केरवा के किसानों के लिए यह सिर्फ 50 एकड़ फसल का नुकसान नहीं, बल्कि उनकी मेहनत, आय और अगले कृषि चक्र पर पड़ा सीधा आघात है। प्रशासन की अगली कार्रवाई ही तय करेगी कि यह घटना महज एक प्राकृतिक दुर्घटना बनकर रह जाती है या इससे जवाबदेही और जल संरचनाओं की सुरक्षा का कोई ठोस रास्ता निकलता है। ........
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    मछली पालन के कब्जे ने डुबो दी किसानों की मेहनत!
गोभा के केरवा में आधी रात टूटा बांध,
 50 एकड़ धान की फसल बर्बाद
150 परिवारों की सिंचाई व्यवस्था पर संकट
आपातकालीन जल निकासी द्वार पर जाली लगाने का आरोप
सिंगरौली-
ग्राम पंचायत गोभा के ग्राम केरवा में बहेरा खड़िया नाला पर वर्ष 2008-09 में निर्मित बांध सोमवार-मंगलवार की दरम्यानी रात हुई मूसलाधार बारिश के बीच टूट गया। बांध टूटने से देखते ही देखते खेतों में पानी का ऐसा सैलाब आया कि करीब 50 किसानों की लगभग 50 एकड़ में लगी धान की फसल बर्बाद हो गई। घटना ने न केवल किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया, बल्कि बांध के रखरखाव और जल निकासी व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

 बारिश बनी वजह या लापरवाही ने बढ़ाया खतरा?
ग्रामीणों के अनुसार 16 और 17 अगस्त की मध्यरात्रि में क्षेत्र में हुई भारी बारिश के बाद बांध में पानी का दबाव तेजी से बढ़ा। बताया जा रहा है कि बांध में बने आपातकालीन जल निकासी द्वार से पानी का अतिरिक्त बहाव निकलना था, लेकिन वहां कथित तौर पर लोहे की जाली लगा दिए जाने से पानी की निकासी बाधित हो गई।ग्रामीणों का आरोप है कि पानी के लगातार बढ़ते दबाव के बावजूद निकासी का पर्याप्त रास्ता नहीं मिलने से बांध की संरचना दबाव सहन नहीं कर सकी और आखिरकार बांध टूट गया।
स्थानीय ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि असजूद बेग पिता शमशीर बेग, निवासी ग्राम गोभा, पिछले लगभग तीन वर्षों से उक्त बांध में कथित रूप से अवैध तरीके से मछली पालन कर रहा था। ग्रामीणों का आरोप है कि उसने बांध को अपने कब्जे में लेकर स्थानीय लोगों के पानी के उपयोग पर भी रोक लगा रखी थी।
ग्रामीणों के मुताबिक आपातकालीन निकासी द्वार पर लोहे की जाली लगाए जाने से पानी का प्राकृतिक बहाव प्रभावित हुआ। हालांकि इन आरोपों की प्रशासनिक जांच होना आवश्यक है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि बांध टूटने के पीछे वास्तविक तकनीकी और मानवीय कारण क्या रहे।

50 एकड़ फसल तबाह, किसानों के सामने बड़ा संकट

बांध टूटने का सबसे बड़ा खामियाजा उन किसानों को भुगतना पड़ा है, जिन्होंने धान की फसल में अपनी पूंजी, श्रम और उम्मीदें लगाई थीं। करीब 50 एकड़ फसल के नुकसान से किसानों को भारी आर्थिक क्षति होने की आशंका है।एक ओर तैयार होती फसल पानी में डूबकर बर्बाद हो गई, वहीं दूसरी ओर आगामी खेती के लिए भी किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते बांध की स्थिति और जल निकासी व्यवस्था की निगरानी की जाती तो शायद यह नुकसान टाला जा सकता था।
यह बांध केवल एक जल संरचना नहीं था, बल्कि आसपास के लगभग 150 परिवारों के लिए सिंचाई का महत्वपूर्ण स्रोत बताया जा रहा है। बांध टूटने के बाद किसानों के सामने वर्तमान फसल के नुकसान के साथ-साथ आगामी सिंचाई व्यवस्था को लेकर भी चिंता पैदा हो गई है।
इस घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में निर्मित जल संरचनाओं के रखरखाव, अतिक्रमण, जल निकासी व्यवस्था और उपयोग की निगरानी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
बांध टूटने की घटना मध्यरात्रि में हुई, जिसके कारण किसी व्यक्ति की जान जाने की सूचना नहीं है। यदि यही घटना दिन के समय या आबादी के बीच हुई होती तो स्थिति कहीं अधिक गंभीर हो सकती थी। ग्रामीणों के अनुसार अचानक पानी के तेज बहाव से आसपास के क्षेत्रों में अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। घटना के बाद ग्रामीणों में जबरदस्त आक्रोश है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष तकनीकी एवं प्रशासनिक जांच कराई जाए। विशेष रूप से आपातकालीन जल निकासी द्वार पर कथित रूप से लगाई गई लोहे की जाली, बांध में मछली पालन तथा बांध के रखरखाव की स्थिति की जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की गई है।
ग्रामीणों ने कथित रूप से बांध पर कब्जा कर मछली पालन करने वाले व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई तथा प्रभावित किसानों को उनकी फसल का उचित मुआवजा दिलाने की मांग भी उठाई है।सवाल सिर्फ बांध टूटने का नहीं, जवाबदेही का भी है । केरवा की घटना को महज प्राकृतिक आपदा मानकर छोड़ देना कई सवालों को अनुत्तरित छोड़ देगा। भारी बारिश निश्चित रूप से बांध टूटने का तत्काल कारण हो सकती है, लेकिन यदि जल निकासी व्यवस्था में मानवीय हस्तक्षेप या लापरवाही की पुष्टि होती है तो जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।अब जरूरत है कि प्रशासन मौके का तकनीकी निरीक्षण कर बांध टूटने के वास्तविक कारणों का पता लगाए, किसानों की क्षति का तत्काल सर्वे कराए और भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति रोकने के लिए बांध की मरम्मत के साथ आपातकालीन जल निकासी व्यवस्था को सुरक्षित और अतिक्रमणमुक्त कराया जाए। केरवा के किसानों के लिए यह सिर्फ 50 एकड़ फसल का नुकसान नहीं, बल्कि उनकी मेहनत, आय और अगले कृषि चक्र पर पड़ा सीधा आघात है। प्रशासन की अगली कार्रवाई ही तय करेगी कि यह घटना महज एक प्राकृतिक दुर्घटना बनकर रह जाती है या इससे जवाबदेही और जल संरचनाओं की सुरक्षा का कोई ठोस रास्ता निकलता है।
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    user_Arvind Kumar Mishra
    Arvind Kumar Mishra
    Singrauli, Madhya Pradesh•
    19 hrs ago
  • नाली बनवानी hai
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    नाली बनवानी hai
    user_Brihaspati kumar vaishya
    Brihaspati kumar vaishya
    सिंगरौली नगर, सिंगरौली, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
  • नाग पंचमी पर चोपन में विराट दंगल 🤼‍♂️🔥 चोपन में नाग पंचमी पर आयोजित विराट दंगल में 5–6 हजार दर्शकों ने पहलवानों के रोमांचक दांव-पेच का आनंद लिया। महिला पहलवानों ने भी शानदार प्रदर्शन कर खूब तालियां बटोरीं। बारिश के बीच कुश्ती, दौड़, लंबी कूद और गद्दा भाजने की प्रतियोगिताओं ने आयोजन में जोश भर दिया। 🇮🇳👏 चोपन की पारंपरिक कुश्ती संस्कृति एक बार फिर जीवंत हुई।
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    नाग पंचमी पर चोपन में विराट दंगल 🤼‍♂️🔥
चोपन में नाग पंचमी पर आयोजित विराट दंगल में 5–6 हजार दर्शकों ने पहलवानों के रोमांचक दांव-पेच का आनंद लिया। महिला पहलवानों ने भी शानदार प्रदर्शन कर खूब तालियां बटोरीं।
बारिश के बीच कुश्ती, दौड़, लंबी कूद और गद्दा भाजने की प्रतियोगिताओं ने आयोजन में जोश भर दिया। 🇮🇳👏
चोपन की पारंपरिक कुश्ती संस्कृति एक बार फिर जीवंत हुई।
    user_Buro chief Sonbhadra Kameshwar Buro Chief
    Buro chief Sonbhadra Kameshwar Buro Chief
    आवाज न्यूज़ 24X7 ब्यूरो चीफ ओबरा, सोनभद्र, उत्तर प्रदेश•
    15 hrs ago
  • Bjp raj jaise chahe jandha fahra sakte hai inko kisi ka dar nahin
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    Bjp raj jaise chahe jandha fahra sakte hai inko kisi  ka dar nahin
    user_Pappu singh
    Pappu singh
    ओबरा, सोनभद्र, उत्तर प्रदेश•
    16 hrs ago
  • विद्यालय में शिक्षक के नशे में होने का वीडियो सामने आने का दावा, जांच और कार्रवाई की उठी मांग सीधी। रामपुर नैकिन ब्लॉक अंतर्गत खड्डी के पास ग्राम रिमारी स्थित प्राथमिक शासकीय विद्यालय से एक कथित वीडियो सामने आया है, जिसमें एक शिक्षक के शराब के नशे में विद्यालय परिसर में पड़े होने का दावा किया जा रहा है। मामला शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय खड्डी संकुल केंद्र से जुड़ा बताया जा रहा है। यदि जांच में शिक्षक के ड्यूटी के दौरान शराब के नशे में होने की पुष्टि होती है, तो यह बेहद गंभीर और निंदनीय मामला है। विद्यालय में बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा की जिम्मेदारी शिक्षकों पर होती है। ऐसे में ड्यूटी के समय नशे की हालत में पाए जाने का मामला सामने आना शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों और अभिभावकों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने तथा आरोप सही पाए जाने पर संबंधित शिक्षक के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई किए जाने की मांग की है। अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग इस मामले में क्या कार्रवाई करता है। सीधी। रामपुर नैकिन ब्लॉक अंतर्गत खड्डी के पास ग्राम रिमारी स्थित प्राथमिक शासकीय विद्यालय से एक कथित वीडियो सामने आया है, जिसमें एक शिक्षक के शराब के नशे में विद्यालय परिसर में पड़े होने का दावा किया जा रहा है। मामला शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय खड्डी संकुल केंद्र से जुड़ा बताया जा रहा है। यदि जांच में शिक्षक के ड्यूटी के दौरान शराब के नशे में होने की पुष्टि होती है, तो यह बेहद गंभीर और निंदनीय मामला है। विद्यालय में बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा की जिम्मेदारी शिक्षकों पर होती है। ऐसे में ड्यूटी के समय नशे की हालत में पाए जाने का मामला सामने आना शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों और अभिभावकों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने तथा आरोप सही पाए जाने पर संबंधित शिक्षक के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई किए जाने की मांग की है। अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग इस मामले में क्या कार्रवाई करता है।
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    विद्यालय में शिक्षक के नशे में होने का वीडियो सामने आने का दावा, जांच और कार्रवाई की उठी मांग
सीधी। रामपुर नैकिन ब्लॉक अंतर्गत खड्डी के पास ग्राम रिमारी स्थित प्राथमिक शासकीय विद्यालय से एक कथित वीडियो सामने आया है, जिसमें एक शिक्षक के शराब के नशे में विद्यालय परिसर में पड़े होने का दावा किया जा रहा है। मामला शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय खड्डी संकुल केंद्र से जुड़ा बताया जा रहा है।
यदि जांच में शिक्षक के ड्यूटी के दौरान शराब के नशे में होने की पुष्टि होती है, तो यह बेहद गंभीर और निंदनीय मामला है। विद्यालय में बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा की जिम्मेदारी शिक्षकों पर होती है। ऐसे में ड्यूटी के समय नशे की हालत में पाए जाने का मामला सामने आना शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
ग्रामीणों और अभिभावकों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने तथा आरोप सही पाए जाने पर संबंधित शिक्षक के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई किए जाने की मांग की है। अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग इस मामले में क्या कार्रवाई करता है।
सीधी। रामपुर नैकिन ब्लॉक अंतर्गत खड्डी के पास ग्राम रिमारी स्थित प्राथमिक शासकीय विद्यालय से एक कथित वीडियो सामने आया है, जिसमें एक शिक्षक के शराब के नशे में विद्यालय परिसर में पड़े होने का दावा किया जा रहा है। मामला शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय खड्डी संकुल केंद्र से जुड़ा बताया जा रहा है।
यदि जांच में शिक्षक के ड्यूटी के दौरान शराब के नशे में होने की पुष्टि होती है, तो यह बेहद गंभीर और निंदनीय मामला है। विद्यालय में बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा की जिम्मेदारी शिक्षकों पर होती है। ऐसे में ड्यूटी के समय नशे की हालत में पाए जाने का मामला सामने आना शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
ग्रामीणों और अभिभावकों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने तथा आरोप सही पाए जाने पर संबंधित शिक्षक के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई किए जाने की मांग की है। अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग इस मामले में क्या कार्रवाई करता है।
    user_पत्रकार,Kuber Tomar
    पत्रकार,Kuber Tomar
    पत्रकार, संवाददाता,रिपोर्टर गोपदबनास, सीधी, मध्य प्रदेश•
    16 hrs ago
  • जनकल्याण सेवा समिति द्वारा आज नाग पंचमी के शुभ अवसर पर फफराकुंड में लंबी कूद ऊंची कूद और कुश्ती कराया गया | कथा खिलाड़ियों को मेडल, टी-शर्ट और नगद इनाम देकर पुरस्कृत किया गया |
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    जनकल्याण सेवा समिति द्वारा आज नाग पंचमी के शुभ अवसर पर फफराकुंड में लंबी कूद ऊंची कूद और कुश्ती कराया गया | कथा खिलाड़ियों को मेडल, टी-शर्ट और नगद इनाम देकर पुरस्कृत किया गया |
    user_बमबम दुबे
    बमबम दुबे
    Local News Reporter ओबरा, सोनभद्र, उत्तर प्रदेश•
    17 hrs ago
  • चितरंगी में बड़ा हादसा टला, डॉक्टर सहित नदी में वही वाइक को ग्रामवासियों ने वाइक को पुल से सुरक्षित निकाला वाहर सिंगरौली। जिले के चितरंगी विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत ब्लॉक चितरंगी की ग्राम पंचायत बैरदह से करलो की ओर आ रहे एक डॉक्टर की वाइक नदी के तेज बहाव की चपेट में आ गई। देखते ही देखते डॉक्टर वाइक छोड़ सुरक्षित वाहर आ गए हालात बिगड़ते देख डॉक्टर ने किसी तरह अपनी जान बचाई और वाइक छोड़कर सुरक्षित बाहर निकल आए। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और मदद करते हुए कार को नदी से सुरक्षित बाहर निकाला।
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    चितरंगी में बड़ा हादसा टला, डॉक्टर सहित नदी में वही वाइक को ग्रामवासियों ने वाइक को पुल से सुरक्षित निकाला वाहर 

सिंगरौली। जिले के चितरंगी विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत ब्लॉक चितरंगी की ग्राम पंचायत बैरदह से करलो की ओर आ रहे एक डॉक्टर की वाइक नदी के तेज बहाव की चपेट में आ गई। देखते ही देखते डॉक्टर वाइक छोड़ सुरक्षित वाहर आ गए हालात बिगड़ते देख डॉक्टर ने किसी तरह अपनी जान बचाई और वाइक छोड़कर सुरक्षित बाहर निकल आए। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और मदद करते हुए कार को नदी से सुरक्षित बाहर निकाला।
    user_Brijesh kumar
    Brijesh kumar
    सिंगरौली, सिंगरौली, मध्य प्रदेश•
    19 hrs ago
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