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गोरखपुर GRP का बड़ा खुलासा! 510 खोए मोबाइल बरामद, ₹1.30 करोड़ के फोन मालिकों को लौटाए | Gorakhpur News

1 hr ago
user_EN Daily National
EN Daily National
Journalist वाराणसी, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश•
1 hr ago

गोरखपुर GRP का बड़ा खुलासा! 510 खोए मोबाइल बरामद, ₹1.30 करोड़ के फोन मालिकों को लौटाए | Gorakhpur News

More news from Uttar Pradesh and nearby areas
  • GRP गोरखपुर की बड़ी कामयाबी, 1.30 करोड़ के कीमती मोबाइल फोन बरामद SP रेलवे गोरखपुर लक्ष्मी निवास मिश्र के मार्गदर्शन में CO रेलवे बलिया सवि रत्न गौतम व CO रेलवे गोरखपुर अशोक कुमार सिंह के निकट पर्यवेक्षण में अनुभाग गोरखपुर के विगत तीन माह में कुल 510 खोए हुए मोबाइलों को जीआरपी अनुभाग गोरखपुर के सर्विलांस सेल टीम अनुभाग गोरखपुर व जीआरपी अनुभाग गोरखपुर के थानों/चौकी की टीम के प्रयासों से उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों व अन्य प्रान्तों से खोये हुए मोबाइलों को बरामद किया गया। बरामद मोबाइलों में अधिकाशं मोबाइलों की कीमत लगभग 25-30 हजार रुपए तथा कुछ मोबाइलों की कीमत लगभग 80 हजार तक है। सभी बरामद मोबाइलों की अनुमानित कीमत लगभग 01 करोड़ 30 लाख है। SP रेलवे गोरखपुर लक्ष्मी निवास मिश्र द्वारा बरामद मोबाइलों को उनके स्वामियों को SP रेलवे कार्यालय गोरखपुर मे प्रदान किया गया। बता दे केि SP रेलवे लक्ष्मी निवास मिश्र के निर्देशन में सर्विलांस सेल टीम द्वारा मई 2025 से अब तक 1,810 से अधिक मोबाइलों को बरामद कर उनके स्वामियों को सुपुर्द किया गया है। SP रेलवे द्वारा सर्विलांस सेल टीम व जीआरपी थाना गोरखपुर पुलिस टीम को 2 हजार व एक हजार का इनाम दिया खोये हुए 505 एन्ड्रायड मोबाइल फोन व 05 आईफोन कि कुल अनुमानित कीमत ₹01 करोड़ 30 लाख है।
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    GRP गोरखपुर की बड़ी कामयाबी, 1.30 करोड़ के कीमती मोबाइल फोन बरामद
SP रेलवे गोरखपुर लक्ष्मी निवास मिश्र के मार्गदर्शन में CO रेलवे बलिया सवि रत्न गौतम व CO रेलवे गोरखपुर अशोक कुमार सिंह के निकट पर्यवेक्षण में अनुभाग गोरखपुर के विगत 
तीन माह में कुल 510 खोए हुए मोबाइलों को जीआरपी अनुभाग गोरखपुर के सर्विलांस सेल टीम अनुभाग गोरखपुर व जीआरपी अनुभाग गोरखपुर के थानों/चौकी की टीम के प्रयासों से उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों व अन्य प्रान्तों से खोये हुए मोबाइलों को बरामद किया गया। 
बरामद मोबाइलों में अधिकाशं मोबाइलों की कीमत लगभग 25-30 हजार रुपए तथा कुछ मोबाइलों की कीमत लगभग  80 हजार तक है। सभी बरामद मोबाइलों की अनुमानित कीमत लगभग 01 करोड़ 30 लाख है। 
SP रेलवे गोरखपुर लक्ष्मी निवास मिश्र द्वारा बरामद मोबाइलों को उनके स्वामियों को SP रेलवे कार्यालय गोरखपुर मे प्रदान किया गया। बता दे केि SP रेलवे लक्ष्मी निवास मिश्र के निर्देशन में सर्विलांस सेल टीम द्वारा मई 2025 से अब तक 1,810 से अधिक मोबाइलों को बरामद कर उनके स्वामियों को सुपुर्द किया गया है। 
SP रेलवे द्वारा सर्विलांस सेल टीम व जीआरपी थाना गोरखपुर पुलिस टीम को 2 हजार व एक हजार का इनाम दिया खोये हुए 505 एन्ड्रायड मोबाइल फोन व 05 आईफोन कि कुल अनुमानित कीमत ₹01 करोड़ 30 लाख है।
    user_अनूप शुक्ला
    अनूप शुक्ला
    Gorakhpur, Uttar Pradesh•
    19 min ago
  • गोरखपुर GRP का बड़ा खुलासा! 510 खोए मोबाइल बरामद, ₹1.30 करोड़ के फोन मालिकों को लौटाए | Gorakhpur News
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    गोरखपुर GRP का बड़ा खुलासा! 510 खोए मोबाइल बरामद, ₹1.30 करोड़ के फोन मालिकों को लौटाए | Gorakhpur News
    user_EN Daily National
    EN Daily National
    Journalist वाराणसी, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
  • 15 दिनों से धरने पर बैठे छात्र भड़के!,प्रॉक्टर को देखते ही कैंपस में दौड़ाया,छात्रों के हंगामे से मची अफरातफरी कैंपस में तनाव, वीडियो हुआ वायरल..... #ABCहिंदुस्तान #छात्रआंदोलन #प्रॉक्टर #कैंपसहंगामा #छात्रोंकाधरना #15दिनोंसेधरना #यूनिवर्सिटी #कैंपसमेंअफरातफरी #छात्रप्रदर्शन #वायरलवीडियो #छात्रविरोध #UniversityNews #StudentProtest #CampusNews #BreakingNews #GorakhpurNews #UPNews
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    15 दिनों से धरने पर बैठे छात्र भड़के!,प्रॉक्टर को देखते ही कैंपस में दौड़ाया,छात्रों के हंगामे से मची अफरातफरी
कैंपस में तनाव, वीडियो हुआ वायरल.....


#ABCहिंदुस्तान #छात्रआंदोलन #प्रॉक्टर #कैंपसहंगामा #छात्रोंकाधरना #15दिनोंसेधरना #यूनिवर्सिटी #कैंपसमेंअफरातफरी #छात्रप्रदर्शन #वायरलवीडियो #छात्रविरोध #UniversityNews #StudentProtest #CampusNews #BreakingNews #GorakhpurNews #UPNews
    user_Abc Hindustan
    Abc Hindustan
    News Anchor Gorakhpur, Uttar Pradesh•
    1 hr ago
  • ..इतनी फोर्स बुलाऊँगा ठंडा कर दूँगा..गोरखपुर पुलिस है..मैं बता दे रहा हूं.. गोरखपुर विश्वविद्यालय में बोले दरोगा..शांतिपूर्ण धरने के पूरी माँ....। ..इतनी फोर्स बुलाऊँगा ठंडा कर दूँगा..गोरखपुर पुलिस है..मैं बता दे रहा हूं.. गोरखपुर विश्वविद्यालय में बोले दरोगा..शांतिपूर्ण धरने के पूरी माँ....।
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    ..इतनी फोर्स बुलाऊँगा ठंडा कर दूँगा..गोरखपुर पुलिस है..मैं बता दे रहा हूं.. गोरखपुर विश्वविद्यालय में बोले दरोगा..शांतिपूर्ण धरने के पूरी माँ....।
..इतनी फोर्स बुलाऊँगा ठंडा कर दूँगा..गोरखपुर पुलिस है..मैं बता दे रहा हूं.. गोरखपुर विश्वविद्यालय में बोले दरोगा..शांतिपूर्ण धरने के पूरी माँ....।
    user_Nihal
    Nihal
    Media house वाराणसी, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • Post by फ़िरोज़ अहमद
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    Post by फ़िरोज़ अहमद
    user_फ़िरोज़ अहमद
    फ़िरोज़ अहमद
    Photographer वाराणसी, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
  • पीपीगंज में बिना अनुमति रैली को लेकर हंगामा, सपा प्रत्याशी साधु यादव की पुलिस से हुई नोकझोंक गोरखपुर। पीपीगंज थाना क्षेत्र में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी साधु यादव द्वारा बिना अनुमति रैली निकाले जाने को लेकर हंगामा हो गया। रैली के चलते क्षेत्र में जाम की स्थिति उत्पन्न हो गई, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और रैली को बिना अनुमति निकाले जाने से रोकने का प्रयास किया। पुलिस के अनुसार, बिना अनुमति रैली निकाले जाने से यातायात प्रभावित हो रहा था। पुलिसकर्मियों ने मौके पर पहुंचकर आयोजकों और रैली में शामिल लोगों को रैली रोकने के लिए कहा। इसी दौरान पुलिस और रैली में शामिल लोगों के बीच नोकझोंक हो गई। स्थिति बिगड़ने की सूचना पर अतिरिक्त पुलिस बल को मौके पर बुलाया गया। अतिरिक्त पुलिस बल के पहुंचने के बाद पुलिस ने हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रित किया और मौके पर शांति व्यवस्था कायम कराई। पुलिस का कहना है कि बिना अनुमति रैली निकालने और पुलिस के कार्य में बाधा डालने के मामले में आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। फिलहाल पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है।
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    पीपीगंज में बिना अनुमति रैली को लेकर हंगामा, सपा प्रत्याशी साधु यादव की पुलिस से हुई नोकझोंक

गोरखपुर। पीपीगंज थाना क्षेत्र में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी साधु यादव द्वारा बिना अनुमति रैली निकाले जाने को लेकर हंगामा हो गया। रैली के चलते क्षेत्र में जाम की स्थिति उत्पन्न हो गई, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और रैली को बिना अनुमति निकाले जाने से रोकने का प्रयास किया।
पुलिस के अनुसार, बिना अनुमति रैली निकाले जाने से यातायात प्रभावित हो रहा था। पुलिसकर्मियों ने मौके पर पहुंचकर आयोजकों और रैली में शामिल लोगों को रैली रोकने के लिए कहा। इसी दौरान पुलिस और रैली में शामिल लोगों के बीच नोकझोंक हो गई।
स्थिति बिगड़ने की सूचना पर अतिरिक्त पुलिस बल को मौके पर बुलाया गया। अतिरिक्त पुलिस बल के पहुंचने के बाद पुलिस ने हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रित किया और मौके पर शांति व्यवस्था कायम कराई।
पुलिस का कहना है कि बिना अनुमति रैली निकालने और पुलिस के कार्य में बाधा डालने के मामले में आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। फिलहाल पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है।
    user_Amarjeet paswan
    Amarjeet paswan
    Local News Reporter Gorakhpur, Uttar Pradesh•
    20 hrs ago
  • सेवार्थ विद्यार्थी की पहल: 300 से अधिक विद्यार्थियों की हुई निःशुल्क नेत्र जांच सेवार्थ विद्यार्थी, गोरक्ष प्रांत एवं संगम आई हॉस्पिटल के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार को दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में निःशुल्क नेत्र जांच शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA), गोरखपुर के सचिव एवं नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. वाई. सिंह, सेवार्थ विद्यार्थी की डॉ. बीना कुशवाहा, गोरक्ष प्रांत के संयोजक आकाश सिंह एवं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, गोरखपुर महानगर के अध्यक्ष डॉ. विवेक शाही ने संयुक्त रूप से किया। सेवार्थ विद्यार्थी द्वारा आयोजित शिविर में 300 से अधिक विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों एवं शिक्षकों सहित अन्य सदस्यों की नेत्र जांच की गई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, गोरखपुर के सचिव एवं नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. वाई. सिंह ने कहा कि सेवार्थ विद्यार्थी द्वारा विद्यार्थियों के बीच इस प्रकार के नेत्र जांच शिविर का आयोजन अत्यंत सराहनीय पहल है। की जांच कराने का आह्वान किया। सेवार्थ विद्यार्थी, गोरक्ष प्रांत के संयोजक आकाश सिंह ने कहा कि “नर सेवा नारायण सेवा” हमारे लिए केवल एक विचार नहीं, बल्कि सेवा कार्यों का ध्येय वाक्य भी है। इसी भावना और प्रेरणा से हम विद्यार्थियों के बीच सेवा एवं स्वास्थ्य जागरूकता से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों का निरंतर आयोजन करते हैं। हमारा उद्देश्य समाज के प्रत्येक वर्ग तक सेवा का भाव पहुंचाना और जरूरतमंदों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना है। इस अवसर पर ABVP की राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य संपदा द्विवेदी, गोरखपुर विश्वविद्यालय इकाई अध्यक्ष विभांशु सिंह, अरविंद, अनुराग मिश्रा , विपुल सिंह सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
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    सेवार्थ विद्यार्थी की पहल: 300 से अधिक विद्यार्थियों की हुई निःशुल्क नेत्र जांच
सेवार्थ विद्यार्थी, गोरक्ष प्रांत एवं संगम आई हॉस्पिटल के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार को दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में निःशुल्क नेत्र जांच शिविर का आयोजन किया गया। 
कार्यक्रम का उद्घाटन इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA), गोरखपुर के सचिव एवं नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. वाई. सिंह, सेवार्थ विद्यार्थी की डॉ. बीना कुशवाहा, गोरक्ष प्रांत के संयोजक आकाश सिंह एवं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, गोरखपुर महानगर के अध्यक्ष डॉ. विवेक शाही ने संयुक्त रूप से किया।
सेवार्थ विद्यार्थी द्वारा आयोजित शिविर में 300 से अधिक विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों एवं शिक्षकों सहित अन्य सदस्यों की नेत्र जांच की गई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, गोरखपुर के सचिव एवं नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. वाई. सिंह ने कहा कि सेवार्थ विद्यार्थी द्वारा विद्यार्थियों के बीच इस प्रकार के नेत्र जांच शिविर का आयोजन अत्यंत सराहनीय पहल है। की जांच कराने का आह्वान किया।
सेवार्थ विद्यार्थी, गोरक्ष प्रांत के संयोजक आकाश सिंह ने कहा कि “नर सेवा नारायण सेवा” हमारे लिए केवल एक विचार नहीं, बल्कि सेवा कार्यों का ध्येय वाक्य भी है। 
इसी भावना और प्रेरणा से हम विद्यार्थियों के बीच सेवा एवं स्वास्थ्य जागरूकता से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों का निरंतर आयोजन करते हैं। हमारा उद्देश्य समाज के प्रत्येक वर्ग तक सेवा का भाव पहुंचाना और जरूरतमंदों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना है। 
इस अवसर पर ABVP की राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य संपदा द्विवेदी, गोरखपुर विश्वविद्यालय इकाई अध्यक्ष विभांशु सिंह, अरविंद, अनुराग मिश्रा , विपुल सिंह सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
    user_अनूप शुक्ला
    अनूप शुक्ला
    Gorakhpur, Uttar Pradesh•
    22 min ago
  • सत्य निकेतन में पांच मंजिला पीजी इमारत ढही, सात की मौत; अवैध निर्माण और प्रशासनिक लापरवाही पर उठे सवाल 27 घंटे तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन, मलबे से निकाले गए शव; बेसमेंट में चल रहा था मरम्मत का काम, G+1 की अनुमति पर खड़ी कर दी गईं पांच मंजिलें नई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार, 6 सितंबर 2026 को एक दर्दनाक हादसे में छात्रों के लिए संचालित पांच मंजिला पीजी इमारत अचानक भरभराकर ढह गई। हादसे के समय इमारत में कई छात्र मौजूद थे। देखते ही देखते पूरी इमारत मलबे में तब्दील हो गई और कई लोग उसके नीचे दब गए। हादसे में सात लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हुए। घटना के बाद करीब 27 घंटे तक बड़े पैमाने पर राहत एवं बचाव अभियान चलाया गया। हादसे की सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस, दिल्ली फायर सर्विस, एनडीआरएफ, डीडीएमए, सिविल डिफेंस समेत अन्य राहत एजेंसियां मौके पर पहुंचीं। मलबा काफी भारी और इमारत की संरचना अस्थिर होने के कारण बचाव कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। राहतकर्मियों ने आधुनिक उपकरणों की मदद से मलबे को सावधानीपूर्वक हटाया और एक-एक कर फंसे लोगों को बाहर निकाला। घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। बेसमेंट में चल रहा था मरम्मत का काम प्रारंभिक जांच में हादसे को लेकर कई गंभीर तथ्य सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि करीब 40 से 50 वर्ष पुरानी इमारत के बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर पर मरम्मत अथवा रेनोवेशन का काम चल रहा था। बेसमेंट में लंबे समय से पानी का रिसाव और सीलन होने की बात भी सामने आई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या मरम्मत के दौरान भवन की संरचनात्मक मजबूती प्रभावित हुई और इसी वजह से इमारत अचानक ढह गई। G+1 की अनुमति, पांच मंजिल तक निर्माण का आरोप हादसे के बाद सबसे गंभीर सवाल अवैध निर्माण को लेकर उठ रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार भवन को मूल रूप से ग्राउंड प्लस एक मंजिल (G+1) के लिए अनुमति मिली थी, लेकिन बाद में कथित तौर पर इसमें अतिरिक्त मंजिलें बनाकर इसे करीब पांच मंजिला कर दिया गया। इतनी पुरानी इमारत पर अतिरिक्त निर्माण किए जाने के बावजूद संबंधित विभागों की निगरानी पर सवाल खड़े हो गए हैं। यह भी जांच का विषय है कि भवन में पीजी का संचालन किस आधार पर किया जा रहा था और क्या वहां रहने वाले छात्रों की सुरक्षा के लिए आवश्यक मानकों का पालन किया जा रहा था। मालिक समेत अन्य के खिलाफ मामला दर्ज हादसे के बाद दिल्ली पुलिस ने भवन मालिक हरिराम बंसल और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी हादसे के वास्तविक कारणों, अवैध निर्माण, मरम्मत कार्य तथा भवन की अनुमति से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रहे हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मामले में मजिस्ट्रेट जांच के निर्देश दिए हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। MCD की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में हादसे ने दिल्ली में अवैध निर्माण और पुराने भवनों की सुरक्षा जांच की व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि यदि भवन में स्वीकृत नक्शे के विपरीत अतिरिक्त मंजिलें बनाई गई थीं और वह लंबे समय से जर्जर स्थिति में था तो संबंधित विभागों को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई? छात्रों के रहने के लिए पीजी के रूप में इस्तेमाल होने वाली इमारत की सुरक्षा जांच समय-समय पर क्यों नहीं की गई? हादसे के बाद नगर निगम ने अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई तेज करने और चिन्हित अवैध संरचनाओं को सील करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है तथा लापरवाही सामने आने पर कार्रवाई की बात कही गई है। छात्रों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल सत्य निकेतन दिल्ली का प्रमुख छात्र इलाका है, जहां बड़ी संख्या में विद्यार्थी पीजी और किराये के मकानों में रहते हैं। ऐसे में इस हादसे ने राजधानी में पीजी, हॉस्टल और किराये की इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल हादसे के बाद कार्रवाई करने के बजाय प्रशासन को ऐसे सभी पुराने भवनों का संरचनात्मक ऑडिट कराना चाहिए, जहां बड़ी संख्या में छात्र या अन्य लोग रह रहे हैं। विशेष रूप से उन भवनों की जांच जरूरी है, जिनमें स्वीकृत मानकों से अधिक निर्माण किया गया है। जिम्मेदारी तय होने का इंतजार सत्य निकेतन हादसे ने एक साथ कई सवाल खड़े किए हैं—क्या अवैध निर्माण पर समय रहते कार्रवाई हुई थी? क्या भवन की संरचनात्मक जांच की गई थी? बेसमेंट में चल रहे काम की अनुमति किसने दी? और यदि भवन असुरक्षित था तो उसमें छात्रों के रहने की व्यवस्था कैसे चलती रही? अब लोगों की नजर जांच रिपोर्ट और प्रशासनिक कार्रवाई पर है। हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के लिए यह अपूरणीय क्षति है। जरूरत है कि जांच निष्पक्ष और समयबद्ध तरीके से पूरी हो तथा केवल भवन मालिक ही नहीं, बल्कि यदि किसी अधिकारी या संबंधित विभाग की लापरवाही सामने आती है तो उसकी भी जवाबदेही तय की जाए। सत्य निकेतन का मलबा हटाने के साथ राहत अभियान भले समाप्त हो गया हो, लेकिन यह हादसा दिल्ली में भवन सुरक्षा और अवैध निर्माण की निगरानी व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल छोड़ गया है।
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    सत्य निकेतन में पांच मंजिला पीजी इमारत ढही, सात की मौत; अवैध निर्माण और प्रशासनिक लापरवाही पर उठे सवाल

27 घंटे तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन, मलबे से निकाले गए शव; बेसमेंट में चल रहा था मरम्मत का काम, G+1 की अनुमति पर खड़ी कर दी गईं पांच मंजिलें
नई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार, 6 सितंबर 2026 को एक दर्दनाक हादसे में छात्रों के लिए संचालित पांच मंजिला पीजी इमारत अचानक भरभराकर ढह गई। हादसे के समय इमारत में कई छात्र मौजूद थे। देखते ही देखते पूरी इमारत मलबे में तब्दील हो गई और कई लोग उसके नीचे दब गए। हादसे में सात लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हुए। घटना के बाद करीब 27 घंटे तक बड़े पैमाने पर राहत एवं बचाव अभियान चलाया गया।
हादसे की सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस, दिल्ली फायर सर्विस, एनडीआरएफ, डीडीएमए, सिविल डिफेंस समेत अन्य राहत एजेंसियां मौके पर पहुंचीं। मलबा काफी भारी और इमारत की संरचना अस्थिर होने के कारण बचाव कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। राहतकर्मियों ने आधुनिक उपकरणों की मदद से मलबे को सावधानीपूर्वक हटाया और एक-एक कर फंसे लोगों को बाहर निकाला। घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया।
बेसमेंट में चल रहा था मरम्मत का काम
प्रारंभिक जांच में हादसे को लेकर कई गंभीर तथ्य सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि करीब 40 से 50 वर्ष पुरानी इमारत के बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर पर मरम्मत अथवा रेनोवेशन का काम चल रहा था। बेसमेंट में लंबे समय से पानी का रिसाव और सीलन होने की बात भी सामने आई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या मरम्मत के दौरान भवन की संरचनात्मक मजबूती प्रभावित हुई और इसी वजह से इमारत अचानक ढह गई।
G+1 की अनुमति, पांच मंजिल तक निर्माण का आरोप
हादसे के बाद सबसे गंभीर सवाल अवैध निर्माण को लेकर उठ रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार भवन को मूल रूप से ग्राउंड प्लस एक मंजिल (G+1) के लिए अनुमति मिली थी, लेकिन बाद में कथित तौर पर इसमें अतिरिक्त मंजिलें बनाकर इसे करीब पांच मंजिला कर दिया गया। इतनी पुरानी इमारत पर अतिरिक्त निर्माण किए जाने के बावजूद संबंधित विभागों की निगरानी पर सवाल खड़े हो गए हैं।
यह भी जांच का विषय है कि भवन में पीजी का संचालन किस आधार पर किया जा रहा था और क्या वहां रहने वाले छात्रों की सुरक्षा के लिए आवश्यक मानकों का पालन किया जा रहा था।
मालिक समेत अन्य के खिलाफ मामला दर्ज
हादसे के बाद दिल्ली पुलिस ने भवन मालिक हरिराम बंसल और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी हादसे के वास्तविक कारणों, अवैध निर्माण, मरम्मत कार्य तथा भवन की अनुमति से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रहे हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मामले में मजिस्ट्रेट जांच के निर्देश दिए हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।
MCD की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में
हादसे ने दिल्ली में अवैध निर्माण और पुराने भवनों की सुरक्षा जांच की व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि यदि भवन में स्वीकृत नक्शे के विपरीत अतिरिक्त मंजिलें बनाई गई थीं और वह लंबे समय से जर्जर स्थिति में था तो संबंधित विभागों को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई? छात्रों के रहने के लिए पीजी के रूप में इस्तेमाल होने वाली इमारत की सुरक्षा जांच समय-समय पर क्यों नहीं की गई?
हादसे के बाद नगर निगम ने अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई तेज करने और चिन्हित अवैध संरचनाओं को सील करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है तथा लापरवाही सामने आने पर कार्रवाई की बात कही गई है।
छात्रों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल
सत्य निकेतन दिल्ली का प्रमुख छात्र इलाका है, जहां बड़ी संख्या में विद्यार्थी पीजी और किराये के मकानों में रहते हैं। ऐसे में इस हादसे ने राजधानी में पीजी, हॉस्टल और किराये की इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल हादसे के बाद कार्रवाई करने के बजाय प्रशासन को ऐसे सभी पुराने भवनों का संरचनात्मक ऑडिट कराना चाहिए, जहां बड़ी संख्या में छात्र या अन्य लोग रह रहे हैं। विशेष रूप से उन भवनों की जांच जरूरी है, जिनमें स्वीकृत मानकों से अधिक निर्माण किया गया है।
जिम्मेदारी तय होने का इंतजार
सत्य निकेतन हादसे ने एक साथ कई सवाल खड़े किए हैं—क्या अवैध निर्माण पर समय रहते कार्रवाई हुई थी? क्या भवन की संरचनात्मक जांच की गई थी? बेसमेंट में चल रहे काम की अनुमति किसने दी? और यदि भवन असुरक्षित था तो उसमें छात्रों के रहने की व्यवस्था कैसे चलती रही?
अब लोगों की नजर जांच रिपोर्ट और प्रशासनिक कार्रवाई पर है। हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के लिए यह अपूरणीय क्षति है। जरूरत है कि जांच निष्पक्ष और समयबद्ध तरीके से पूरी हो तथा केवल भवन मालिक ही नहीं, बल्कि यदि किसी अधिकारी या संबंधित विभाग की लापरवाही सामने आती है तो उसकी भी जवाबदेही तय की जाए।
सत्य निकेतन का मलबा हटाने के साथ राहत अभियान भले समाप्त हो गया हो, लेकिन यह हादसा दिल्ली में भवन सुरक्षा और अवैध निर्माण की निगरानी व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल छोड़ गया है।
    user_G News Journalist Vikas Sharma
    G News Journalist Vikas Sharma
    Teacher वाराणसी, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश•
    15 hrs ago
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