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हिमाचल के नूरपुर में अपने भतीजे की बरसी कार्यक्रम में मौजूद रहा। हिमाचल के नूरपुर में अपने भतीजे की बरसी कार्यक्रम में मौजूद रहा।
Rohit Singh Chauhan
हिमाचल के नूरपुर में अपने भतीजे की बरसी कार्यक्रम में मौजूद रहा। हिमाचल के नूरपुर में अपने भतीजे की बरसी कार्यक्रम में मौजूद रहा।
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- Post by Rohit Kumar1
- हिमाचल के नूरपुर में अपने भतीजे की बरसी कार्यक्रम में मौजूद रहा।4
- *जिला अस्पताल में सर्जन डॉ मंगल सिंह द्वारा दलालों के माध्यम से आपरेशन कराने के नाम पर खुलकर मरीजों से रिश्वत ली जा रही है।* जिला अस्पताल के सीनियर सर्जन डॉ मंगल सिंह द्वारा पीड़ित मरीजों से आपरेशन कराने के नाम पर अस्पताल के वार्ड बॉय द्वारा खुलेआम रिश्वत लेकर आपरेशन किया जा रहा जहां सी एम एस व सीएमओ भी इस भ्रष्टाचार में लिप्त होकर मूल दर्शक बने हुए हैं। तथा जिला अस्पताल में एक्स-रे रिपोर्ट दवा वितरण व आपरेशन कराने के नाम पर खुलकर दलालों के माध्यम से पैसा लिया जाता है।1
- जिला अस्पताल के सीनियर सर्जन डॉ मंगल सिंह द्वारा पीड़ित मरीजों से आपरेशन कराने के नाम पर अस्पताल के वार्ड बॉय द्वारा खुलेआम रिश्वत लेकर आपरेशन किया जा रहा जहां सी एम एस व सीएमओ भी इस भ्रष्टाचार में लिप्त होकर मूल दर्शक बने हुए हैं। तथा जिला अस्पताल में एक्स-रे रिपोर्ट दवा वितरण व आपरेशन कराने के नाम पर खुलकर दलालों के माध्यम से पैसा लिया जाता है। रजत यादव पत्रकार नव भारत संवाद इटावा1
- Post by Urvashi singh1
- Post by PK Crime Story1
- भागवत कथा में सुखदेव जन्म व सती चरित्र का भावपूर्ण वर्णन, श्रद्धालु भाव-विभोर जसवंतनगर। क्षेत्र के बलरई गांव स्थित मोहल्ला विकास नगर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कथा के दौरान कन्नौज से पधारे व्यास आचार्य ब्रजेश कुमार द्विवेदी ने सुखदेव जन्म और सती चरित्र का अत्यंत भावपूर्ण एवं मार्मिक वर्णन किया, जिसे सुनकर उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। व्यास जी ने सुखदेव जी के जन्म प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि वे महर्षि वेदव्यास के पुत्र थे, जिन्होंने जन्म लेते ही सांसारिक मोह-माया का त्याग कर दिया और वन की ओर प्रस्थान कर गए। उनका जीवन वैराग्य, ज्ञान और भक्ति का अद्वितीय उदाहरण है। उन्होंने कहा कि सुखदेव जी ने राजा परीक्षित को भागवत कथा सुनाकर उन्हें मोक्ष का मार्ग दिखाया, जो आज भी मानव जीवन के लिए प्रेरणास्रोत है। साथ ही सती चरित्र का वर्णन करते हुए व्यास जी ने बताया कि माता सती ने अपने पिता दक्ष द्वारा भगवान शिव का अपमान सहन न कर यज्ञ कुंड में आत्माहुति दे दी। यह प्रसंग हमें आत्मसम्मान, निष्ठा और भगवान के प्रति अटूट श्रद्धा का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि सती का त्याग और समर्पण आज भी धर्म और मर्यादा का प्रतीक है। व्यास आचार्य ने अपने प्रवचन में कहा कि मनुष्य जीवन में जाने-अनजाने अनेक पाप हो जाते हैं, लेकिन श्रद्धा और भक्ति भाव से कथा श्रवण करने से अंत:करण शुद्ध होता है और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है। भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और सद्बुद्धि प्राप्त करने का सशक्त माध्यम है। इस आयोजन में परीक्षित की भूमिका मुकेश पाठक एवं उनकी पत्नी बीना पाठक निभा रहे हैं, जबकि यज्ञपति के रूप में योगेश कुमार पाठक, बृजेश कुमार पाठक और राकेश कुमार पाठक,विवेक पाठक, विपुल पाठक, आरती पाठक सहयोग कर रहे हैं। आयोजक मुकेश पाठक ने क्षेत्रवासियों से अधिक से अधिक संख्या में कथा में पहुंचकर धर्म लाभ लेने की अपील की है। फोटो: भागवत कथा का वाचन करते व्यास आचार्य ब्रजेश कुमार द्विवेदी, उपस्थित श्रद्धालु। संवाददाता -सुशील कान्त1
- बड़ी खबर - मिर्जापुर में वकील की गोली मारकर हत्या, हत्या का लाइव वीडियो मॉर्निंग वॉक पर निकले अधिवक्ता राजीव सिंह की दिन दहाड़े हत्या !1