रायगढ़ में जिला दंडाधिकारी के निष्कासन (जिला बदर) आदेश का उल्लंघन कर जिले में प्रवेश करने और पुलिस कार्यालय परिसर में पेट्रोल लेकर हंगामा करने वाले आरोपी चाहत शुक्ला उर्फ आदित्य को पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। घटना 16 जुलाई 2026 की शाम की है, जब आरोपी चाहत शुक्ला हाथ में पेट्रोल से भरी प्लास्टिक की बोतल लेकर पुलिस कार्यालय परिसर पहुंच गया। वहां वह कोतवाली पुलिस द्वारा उसके खिलाफ बार-बार की जा रही जिला बदर की कार्रवाई का विरोध करते हुए जोर-जोर से शोर-शराबा और हंगामा करने लगा। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वहां तैनात पुलिसकर्मियों ने तत्काल उसके कब्जे से पेट्रोल की बोतल सुरक्षित रूप से छीन ली। समझाइश देने के बाद भी जब आरोपी लगातार अभद्र व्यवहार करते हुए उग्र होता रहा, तो कोतवाली पुलिस ने संज्ञेय अपराध की आशंका को देखते हुए उसे धारा 170 बीएनएसएस के तहत गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ इस्तगासा क्रमांक 308/2026 में धारा 170/126/135(3) बीएनएसएस के अंतर्गत प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की और 17 जुलाई 2026 को उसे एसडीएम कार्यालय रायगढ़ में पेश किया, जहां से जारी जेल वारंट के आधार पर उसे जिला जेल रायगढ़ दाखिल करा दिया गया। कोतवाली थाना क्षेत्र के रेलवे स्टेशन मोटरसाइकिल स्टैंड के पीछे का निवासी 29 वर्षीय आरोपी चाहत शुक्ला (पिता अरुण शुक्ला) साल 2023 से लगातार मारपीट जैसे कई आपराधिक मामलों में संलिप्त रहा है। उसके इसी रिकॉर्ड को देखते हुए साल 2024 में उसे एक वर्ष के लिए जिला बदर किया गया था। इस अवधि के समाप्त होने के बाद भी उसकी गतिविधियां नहीं रुकीं, जिसके बाद जिला दंडाधिकारी रायगढ़ ने 23 मार्च 2026 को छत्तीसगढ़ राज्य सुरक्षा अधिनियम, 1990 के तहत उसे रायगढ़ सहित समीपवर्ती जिलों सारंगढ़-बिलाईगढ़, सक्ती, बलौदा बाजार-भाटापारा, महासमुंद, जांजगीर-चांपा, कोरबा और जशपुर की सीमाओं से एक वर्ष के लिए निष्कासित किया था। इसके बावजूद आरोपी ने इस आदेश का उल्लंघन कर रायगढ़ जिले में प्रवेश किया। इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए एसएसपी शशि मोहन सिंह ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जिला बदर आदेश का उल्लंघन करने, लोक शांति भंग करने का प्रयास करने अथवा कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाले किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध रायगढ़ पुलिस तत्काल और कठोर वैधानिक कार्रवाई अमल में लाएगी।
रायगढ़ में जिला दंडाधिकारी के निष्कासन (जिला बदर) आदेश का उल्लंघन कर जिले में प्रवेश करने और पुलिस कार्यालय परिसर में पेट्रोल लेकर हंगामा करने वाले आरोपी चाहत शुक्ला उर्फ आदित्य को पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। घटना 16 जुलाई 2026 की शाम की है, जब आरोपी चाहत शुक्ला हाथ में पेट्रोल से भरी प्लास्टिक की बोतल लेकर पुलिस कार्यालय परिसर पहुंच गया। वहां वह कोतवाली पुलिस द्वारा उसके खिलाफ बार-बार की जा रही जिला बदर की कार्रवाई का विरोध करते हुए जोर-जोर से शोर-शराबा
और हंगामा करने लगा। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वहां तैनात पुलिसकर्मियों ने तत्काल उसके कब्जे से पेट्रोल की बोतल सुरक्षित रूप से छीन ली। समझाइश देने के बाद भी जब आरोपी लगातार अभद्र व्यवहार करते हुए उग्र होता रहा, तो कोतवाली पुलिस ने संज्ञेय अपराध की आशंका को देखते हुए उसे धारा 170 बीएनएसएस के तहत गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ इस्तगासा क्रमांक 308/2026 में धारा 170/126/135(3) बीएनएसएस के अंतर्गत प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की और 17 जुलाई 2026 को उसे एसडीएम कार्यालय रायगढ़ में पेश किया, जहां से जारी
जेल वारंट के आधार पर उसे जिला जेल रायगढ़ दाखिल करा दिया गया। कोतवाली थाना क्षेत्र के रेलवे स्टेशन मोटरसाइकिल स्टैंड के पीछे का निवासी 29 वर्षीय आरोपी चाहत शुक्ला (पिता अरुण शुक्ला) साल 2023 से लगातार मारपीट जैसे कई आपराधिक मामलों में संलिप्त रहा है। उसके इसी रिकॉर्ड को देखते हुए साल 2024 में उसे एक वर्ष के लिए जिला बदर किया गया था। इस अवधि के समाप्त होने के बाद भी उसकी गतिविधियां नहीं रुकीं, जिसके बाद जिला दंडाधिकारी रायगढ़ ने 23 मार्च 2026 को छत्तीसगढ़ राज्य सुरक्षा अधिनियम, 1990
के तहत उसे रायगढ़ सहित समीपवर्ती जिलों सारंगढ़-बिलाईगढ़, सक्ती, बलौदा बाजार-भाटापारा, महासमुंद, जांजगीर-चांपा, कोरबा और जशपुर की सीमाओं से एक वर्ष के लिए निष्कासित किया था। इसके बावजूद आरोपी ने इस आदेश का उल्लंघन कर रायगढ़ जिले में प्रवेश किया। इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए एसएसपी शशि मोहन सिंह ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जिला बदर आदेश का उल्लंघन करने, लोक शांति भंग करने का प्रयास करने अथवा कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाले किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध रायगढ़ पुलिस तत्काल और कठोर वैधानिक कार्रवाई अमल में लाएगी।
- छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में गृह विभाग के निर्देशन में चल रहे 'ऑपरेशन प्रहार' के तहत पुलिस ने अवैध कबाड़ के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। रायगढ़ के पूंजीपथरा और जूटमिल थाना पुलिस की टीम ने 15 और 16 जुलाई को तीन अलग-अलग कार्रवाइयों में दो ट्रक और एक माजदा वाहन को जब्त किया है, जिनमें अवैध रूप से स्क्रैप कबाड़ का परिवहन किया जा रहा था। इस पूरी कार्रवाई में करीब 79 टन स्क्रैप कबाड़ सहित 48 लाख रुपये की संपत्ति पुलिस ने अपने कब्जे में ली है। सभी मामलों में वाहन चालक माल के संबंध में कोई भी वैध दस्तावेज पेश नहीं कर सके, जिसके चलते चोरी की संपत्ति होने के संदेह में पुलिस द्वारा वैधानिक कार्रवाई की गई है। पहली कार्रवाई 15 जुलाई को पूंजीपथरा थाना पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर तमनार चौक में घेराबंदी कर की। यहां माजदा वाहन (CG-12-AY-0313) को रोककर जांच करने पर बुधवारी बाजार, कोरबा निवासी चालक देवेन्द्र तिवारी (58 वर्ष) के पास से करीब 3 टन 390 किलोग्राम स्क्रैप कबाड़ मिला, जिसकी अनुमानित कीमत ₹91,530 है। पुलिस ने ₹5 लाख की कीमत वाले वाहन और कबाड़ को जब्त कर आरोपी के खिलाफ धारा 35(क)(ड) बीएनएसएस/303(2) बीएनएस के तहत कार्रवाई की। दूसरी कार्रवाई 16 जुलाई को जूटमिल पुलिस ने कबीर चौक क्षेत्र में की, जहां सड़क किनारे खड़े एक ट्रक (CG-13-AB-9599) की जांच में भारी मात्रा में लोहे और टीन का स्क्रैप मिला। पलामू (झारखंड) निवासी चालक महेन्द्र यादव (34 वर्ष) द्वारा कोई दस्तावेज न देने पर धर्मकांटा से तौल कराने पर ट्रक सहित कुल वजन 40,630 किलोग्राम पाया गया, जिसमें लोड स्क्रैप की कीमत करीब ₹9 लाख आंकी गई है। तीसरी कार्रवाई भी 16 जुलाई को जूटमिल पुलिस ने रायगढ़-सारंगढ़ मुख्य मार्ग पर की, जहां ट्रक (OR-15-S-0187) की जांच में बरगढ़ (ओडिशा) निवासी चालक दुर्योधन पाणिग्रही (52 वर्ष) से करीब ₹8 लाख का कबाड़ जब्त किया गया, जिसका कुल वजन 35,410 किलोग्राम था। इन दोनों मामलों में पुलिस ने धारा 106 बीएनएसएस के तहत इस्तगासा तैयार कर न्यायालय में पेश किया है। पुलिस अब इन जब्त वाहनों, स्क्रैप सामग्रियों और उनके वास्तविक मालिकों की विस्तृत जांच कर रही है, साथ ही इस अवैध नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी तलाश की जा रही है। इस कार्रवाई पर एसएसपी शशि मोहन सिंह ने कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि रायगढ़ पुलिस अवैध कबाड़ के कारोबार पर लगातार प्रहार कर रही है और बिना वैध दस्तावेजों के परिवहन करने वालों के खिलाफ यह कठोर वैधानिक कार्रवाई जारी रहेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि अवैध कबाड़ की खरीद-बिक्री और इसके परिवहन से जुड़े पूरे नेटवर्क पर पुलिस पैनी नजर रख रही है।4
- छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में एसएसपी श्री शशि मोहन सिंह के निर्देशन में चलाए जा रहे 'ऑपरेशन प्रहार' के तहत पुलिस ने अवैध कबाड़ के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। पूंजीपथरा और जूटमिल थाना पुलिस ने दो अलग-अलग दिनों में कार्रवाई करते हुए दो ट्रक और एक माजदा वाहन में ले जाए जा रहे करीब 79 टन संदिग्ध स्क्रैप कबाड़ को जब्त किया है। जब्त किए गए वाहनों और कबाड़ समेत कुल संपत्ति की अनुमानित कीमत लगभग ₹48 लाख आंकी गई है। पुलिस ने यह वैधानिक कार्रवाई अवैध तरीके से कबाड़ परिवहन करने और चोरी की संपत्ति होने के संदेह में की है। पहली कार्रवाई 15 जुलाई को थाना पूंजीपथरा पुलिस द्वारा की गई। मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर तमनार चौक पूंजीपथरा में घेराबंदी कर माजदा वाहन क्रमांक CG-12-AY-0313 को रोका गया। वाहन चालक कोरबा के बुधवारी बाजार निवासी 58 वर्षीय देवेन्द्र तिवारी से पूछताछ करने पर वाहन में करीब 3 टन 390 किलोग्राम स्क्रैप और टिन का कबाड़ मिला, जिसकी अनुमानित कीमत ₹91,530 है। वैध दस्तावेज पेश न करने पर पुलिस ने ₹5 लाख की कीमत वाले वाहन और कबाड़ को जब्त कर आरोपी चालक के खिलाफ धारा 35(क)(ड) बीएनएसएस/303(2) बीएनएस के तहत कार्रवाई की। दूसरी और तीसरी कार्रवाई 16 जुलाई को थाना जूटमिल पुलिस द्वारा की गई। जूटमिल पुलिस ने कबीर चौक क्षेत्र में छातामुड़ा-काशीराम चौक के बीच सड़क किनारे खड़े ट्रक क्रमांक CG-13-AB-9599 की जांच की, जिसमें भारी मात्रा में लोहे और टीन का स्क्रैप मिला। झारखंड के पलामू निवासी 34 वर्षीय चालक महेन्द्र यादव द्वारा दस्तावेज न दिए जाने पर धर्मकांटा से तौल कराने पर ट्रक सहित कुल वजन 40,630 किलोग्राम और कबाड़ की कीमत करीब ₹9 लाख पाई गई। इसी तरह, छातामुड़ा गांव के बाहर रायगढ़-सारंगढ़ मुख्य मार्ग पर ट्रक क्रमांक OR-15-S-0187 की जांच में भारी मात्रा में कबाड़ मिला। ओडिशा के बरगढ़ निवासी 52 वर्षीय चालक दुर्योधन पाणिग्रही के पास वैध दस्तावेज न होने पर तौल कराने पर कुल वजन 35,410 किलोग्राम और कबाड़ की कीमत करीब ₹8 लाख पाई गई। इन दोनों मामलों में संदिग्ध संपत्ति मानकर वाहन व माल जब्त कर चालकों के खिलाफ धारा 106 बीएनएसएस के तहत इस्तगासा तैयार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। रायगढ़ पुलिस की यह कार्रवाई अवैध कबाड़ के कारोबार पर सख्त शिकंजा कसने के अभियान का हिस्सा है। पुलिस अब जब्त वाहनों, स्क्रैप और उनके वास्तविक मालिकों की विस्तृत जांच के साथ इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है। इस कार्रवाई पर एसएसपी श्री शशि मोहन सिंह ने सख्त संदेश देते हुए कहा कि पुलिस अवैध कबाड़ के कारोबार पर लगातार प्रहार कर रही है और बिना वैध दस्तावेजों के परिवहन करने वालों के खिलाफ कड़ी वैधानिक कार्रवाई जारी रहेगी। पुलिस की अवैध कबाड़ की खरीद-बिक्री और परिवहन से जुड़े हर नेटवर्क पर पैनी नजर है।4
- छत्तीसगढ़ के कोरबा से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां पहली ही बारिश में निर्माण कार्य में बड़ी लापरवाही या भ्रष्टाचार का मामला उजागर हुआ है। पहली ही बारिश के बाद निर्माण कार्य को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इस निर्माण में लापरवाही बरती गई है या फिर यह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है।1
- बिलासपुर जिले के रतनपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम नवागांव (गिरजाबंद) में रिश्तों को शर्मसार कर देने वाली एक दर्दनाक घटना सामने आई है। यहां शराब के नशे में धुत एक बेटे ने मामूली बात पर अपने ही पिता की डंडे से वार कर बेरहमी से हत्या कर दी। घटना की सूचना मिलते ही रतनपुर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को कुछ ही समय में गिरफ्तार कर लिया और उसे न्यायिक रिमांड पर भेज दिया। पुलिस के अनुसार, 17 जुलाई 2026 को ग्राम नवागांव (गिरजाबंद) के निवासी विमल सूर्यवंशी ने रतनपुर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता ने बताया कि उसके मामा शिवचरण सूर्यवंशी उर्फ पिंटू ने खुद उसके घर आकर यह कबूल किया कि उसने अपने पिता रिखीराम सूर्यवंशी की हत्या कर दी है। पूछताछ के दौरान आरोपी ने बताया कि वह शराब पीकर घर लौटा था, जहां खाट पर लेटे हुए उसके पिता रिखीराम ने उसे डांट दिया था। इसी डांट से नाराज होकर आरोपी ने पास ही रखे लकड़ी के डंडे से पिता के सिर पर हमला कर दिया, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई। मामले की जानकारी मिलते ही रतनपुर थाने में हत्या का केस दर्ज किया गया। थाना प्रभारी निरीक्षक निलेश पाण्डेय ने तुरंत वरिष्ठ अधिकारियों को इस घटना की जानकारी दी और उनके निर्देश पर पुलिस टीम ने घेराबंदी कर आरोपी शिवचरण सूर्यवंशी उर्फ पिंटू (38 वर्ष) को उसके घर से गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद आरोपी को कोर्ट में पेश कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया। इस त्वरित कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक निलेश पाण्डेय, उप निरीक्षक विष्णु यादव, सहायक उप निरीक्षक नीलाकर सेठ और आरक्षक धीरज कश्यप की विशेष भूमिका रही।1
- सरगुजा पुलिस ने अंबिकापुर में संदीप अग्रवाल को आत्महत्या के लिए उकसाने और कर्जा एक्ट के मामले में आरोपी पंकज चौधरी (50 वर्ष) को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर मृतक संदीप अग्रवाल को अत्यधिक ब्याज पर रकम देकर, मूल और ब्याज की वसूली के लिए लगातार जान से मारने की धमकी देने और प्रताड़ित करने का आरोप है। पुलिस को मर्ग जांच के दौरान मिले सुसाइड नोट, परिजनों व गवाहों के बयान, बैंक लेनदेन और तकनीकी जांच से आरोपी पंकज चौधरी की इस अपराध में संलिप्तता का पता चला। पुलिस जांच में यह बात सामने आई कि आरोपी की इसी प्रताड़ना से परेशान होकर संदीप अग्रवाल ने आत्महत्या की थी। इसके बाद कोतवाली थाना पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 108, 351(3) और कर्जा एक्ट की धारा 4 के तहत अपराध दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया। पुलिस ने आरोपी के पास से घटना में इस्तेमाल किया गया मोबाइल भी जब्त कर लिया है और उसे न्यायालय में पेश कर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। यह कार्रवाई डीआईजी एवं एसएसपी राजेश अग्रवाल के निर्देशन और नगर पुलिस अधीक्षक राहुल बंसल के नेतृत्व में कोतवाली पुलिस की टीम द्वारा की गई।3
- छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में महज़ 15 घंटे की मूसलाधार बारिश ने बिलासपुर नगर निगम और जिला प्रशासन के दावों की पोल खोलकर रख दी है। हर साल मानसून से पहले नालों की सफाई और ड्रेनेज सिस्टम दुरुस्त करने के नाम पर करोड़ों रुपये फूंकने वाले प्रशासन की विफलता के कारण पूरा शहर 'जलपुर' में तब्दील हो चुका है। शहर की रफ्तार पूरी तरह थम गई है और जिन सड़कों पर रोजाना गाड़ियां दौड़ती थीं, वहां अब प्रशासनिक नाकामी के चलते रेस्क्यू और फ्लोटिंग नावें तैरती नजर आ रही हैं। घटिया ड्रेनेज सिस्टम और बंद नालों के कारण पानी की निकासी के कोई ठोस इंतजाम नहीं किए गए, जिससे प्रमुख रिहायशी इलाकों और मुख्य सड़कों पर घुटनों से लेकर कमर तक पानी भर गया है। नालियों की समय पर सफाई न होने से बारिश का गंदा पानी बैक मारकर लोगों के ड्राइंग रूम और किचन तक में घुस गया है, जिससे लाखों लोगों का जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुका है। ड्रेनेज फेल होने के कारण पॉश और निचली कॉलोनियों के लोग अपने ही घरों में कैद हो गए हैं और उनके सामने खाने-पीने व जरूरी सामानों की भारी किल्लत पैदा हो गई है। कागजों पर दिखाई गई प्री-मानसून तैयारियां हकीकत के धरातल पर पूरी तरह फ्लॉप साबित हुई हैं। इस नरकीय स्थिति से आक्रोशित जनता सीधे नगर निगम और स्थानीय प्रशासन को जिम्मेदार ठहराते हुए सवाल पूछ रही है। लोगों का सीधा सवाल है कि आखिर हर साल मानसून तैयारियों के नाम पर पास होने वाला करोड़ों का बजट किसकी जेब में जाता है? क्या अधिकारियों को 15 घंटे की बारिश झेलने लायक ड्रेनेज सिस्टम बनाने की सुध नहीं थी, और क्या प्रशासन लोगों के नुकसान व मानसिक प्रताड़ना की जिम्मेदारी लेगा या हर बार की तरह इसे 'प्राकृतिक आपदा' बताकर पल्ला झाड़ लेगा? बिलासपुर की यह बदहाली साफ बयां कर रही है कि यह कोई प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि घोर प्रशासनिक लापरवाही और कुप्रबंधन का नतीजा है, जिस पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी बेहद जरूरी है।2