मैहर जिले के घुनवारा गेहूं उपार्जन केंद्र से सामने आए एक वीडियो ने सरकारी खरीदी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों का आरोप है कि केंद्र में निर्धारित मानक से अधिक गेहूं तौलकर लिया जा रहा है और विभिन्न कांटों पर अलग-अलग वजन दर्ज किया जा रहा है। मौके पर रिकॉर्ड किए गए वीडियो और किसानों के बयानों के अनुसार, एक कांटे पर 50.750 किलो, दूसरे पर 50.950 किलो और तीसरे कांटे पर 51.310 किलो तक गेहूं तौला जा रहा है। किसानों ने कैमरे पर दावा किया कि उनसे तय सीमा से अधिक गेहूं लिया जा रहा है। उन्होंने अपनी मजबूरी व्यक्त करते हुए कहा कि, "हम मजबूरी में फसल बेचने आते हैं, अगर यहां ज्यादा तौल लिया जा रहा है तो हम क्या कर सकते हैं?" यह मामला तब और गंभीर हो गया जब वीडियो रिकॉर्डिंग के दौरान समिति प्रबंधन से सवाल पूछे गए। प्रत्यक्षदर्शियों और वीडियो में दर्ज बातचीत के मुताबिक, समिति प्रबंधक नरेंद्र द्विवेदी की मौजूदगी में यह पूरा प्रकरण चलता रहा। बातचीत के दौरान, पहले तौल में गलती होने की बात स्वीकार की गई, लेकिन बाद में कथित तौर पर पत्रकारों को चुनौती भरे लहजे में कहा गया कि "मैहर जिले के पत्रकार मेरा क्या उखाड़ लेंगे सब सेटिंग है।" वीडियो में यह भी कथित तौर पर सामने आया कि तौल कर रहे कर्मचारियों से यह कहलवाने की कोशिश की गई कि वे किसान हैं और अपनी इच्छा से अधिक गेहूं दे रहे हैं। इस पर बड़ा सवाल उठाया गया है कि कोई किसान अपनी मेहनत की फसल में से 700 ग्राम, 900 ग्राम या 1 किलो से ज्यादा गेहूं मुफ्त में क्यों देगा? इस पूरे प्रकरण से घुनवारा उपार्जन केंद्र में तौल मशीनों की समय-समय पर जांच, अलग-अलग कांटों पर अलग-अलग वजन दिखने और किसानों से अतिरिक्त गेहूं लिए जाने जैसे बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। यह भी पूछा जा रहा है कि क्या जिम्मेदार अधिकारी इस मामले से अनजान हैं या कार्रवाई से बच रहे हैं। वीडियो अब प्रशासन और खाद्य खरीदी व्यवस्था दोनों पर गंभीर सवाल छोड़ रहा है, और यदि किसानों के आरोप सही पाए जाते हैं, तो इसे केवल तौल की गड़बड़ी नहीं बल्कि किसानों की मेहनत और अधिकारों पर सीधा प्रहार माना जाएगा। जन आवाज साथी राहुल भाई द्वारा प्रशासन को जगाने की कोशिश के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिससे यह सवाल उठ रहा है कि आखिर किसके दबाव में प्रशासन काम कर रहा है और भ्रष्टाचार के पुख्ता सबूतों पर भी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है।
मैहर जिले के घुनवारा गेहूं उपार्जन केंद्र से सामने आए एक वीडियो ने सरकारी खरीदी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों का आरोप है कि केंद्र में निर्धारित मानक से अधिक गेहूं तौलकर लिया जा रहा है और विभिन्न कांटों पर अलग-अलग वजन दर्ज किया जा रहा है। मौके पर रिकॉर्ड किए गए वीडियो और किसानों के बयानों के अनुसार, एक कांटे पर 50.750 किलो, दूसरे पर 50.950 किलो और तीसरे कांटे पर 51.310 किलो तक गेहूं तौला जा रहा है। किसानों ने कैमरे पर दावा किया कि उनसे तय सीमा से अधिक गेहूं लिया जा रहा है। उन्होंने अपनी मजबूरी व्यक्त करते हुए कहा कि, "हम मजबूरी में फसल बेचने आते हैं, अगर यहां ज्यादा तौल लिया जा रहा है तो हम क्या कर सकते हैं?" यह मामला तब और गंभीर हो गया जब वीडियो रिकॉर्डिंग के दौरान समिति प्रबंधन से सवाल पूछे गए। प्रत्यक्षदर्शियों और वीडियो में दर्ज बातचीत के मुताबिक, समिति प्रबंधक नरेंद्र द्विवेदी की मौजूदगी में यह पूरा प्रकरण चलता रहा। बातचीत के दौरान, पहले तौल में गलती होने की बात स्वीकार की गई, लेकिन बाद में कथित तौर पर पत्रकारों को चुनौती भरे लहजे में कहा गया कि "मैहर जिले के पत्रकार मेरा क्या उखाड़ लेंगे सब सेटिंग है।" वीडियो में यह भी कथित तौर पर सामने आया कि तौल कर रहे कर्मचारियों से यह कहलवाने की कोशिश की गई कि वे किसान हैं और अपनी इच्छा से अधिक गेहूं दे रहे हैं। इस पर बड़ा सवाल उठाया गया है कि कोई किसान अपनी मेहनत की फसल में से 700 ग्राम, 900 ग्राम या 1 किलो से ज्यादा गेहूं मुफ्त में क्यों देगा? इस पूरे प्रकरण से घुनवारा उपार्जन केंद्र में तौल मशीनों की समय-समय पर जांच, अलग-अलग कांटों पर अलग-अलग वजन दिखने और किसानों से अतिरिक्त गेहूं लिए जाने जैसे बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। यह भी पूछा जा रहा है कि क्या जिम्मेदार अधिकारी इस मामले से अनजान हैं या कार्रवाई से बच रहे हैं। वीडियो अब प्रशासन और खाद्य खरीदी व्यवस्था दोनों पर गंभीर सवाल छोड़ रहा है, और यदि किसानों के आरोप सही पाए जाते हैं, तो इसे केवल तौल की गड़बड़ी नहीं बल्कि किसानों की मेहनत और अधिकारों पर सीधा प्रहार माना जाएगा। जन आवाज साथी राहुल भाई द्वारा प्रशासन को जगाने की कोशिश के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिससे यह सवाल उठ रहा है कि आखिर किसके दबाव में प्रशासन काम कर रहा है और भ्रष्टाचार के पुख्ता सबूतों पर भी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है।
- मैहर जिले के घुनवारा गेहूं उपार्जन केंद्र से सामने आए एक वीडियो ने सरकारी खरीदी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों का आरोप है कि केंद्र में निर्धारित मानक से अधिक गेहूं तौलकर लिया जा रहा है और विभिन्न कांटों पर अलग-अलग वजन दर्ज किया जा रहा है। मौके पर रिकॉर्ड किए गए वीडियो और किसानों के बयानों के अनुसार, एक कांटे पर 50.750 किलो, दूसरे पर 50.950 किलो और तीसरे कांटे पर 51.310 किलो तक गेहूं तौला जा रहा है। किसानों ने कैमरे पर दावा किया कि उनसे तय सीमा से अधिक गेहूं लिया जा रहा है। उन्होंने अपनी मजबूरी व्यक्त करते हुए कहा कि, "हम मजबूरी में फसल बेचने आते हैं, अगर यहां ज्यादा तौल लिया जा रहा है तो हम क्या कर सकते हैं?" यह मामला तब और गंभीर हो गया जब वीडियो रिकॉर्डिंग के दौरान समिति प्रबंधन से सवाल पूछे गए। प्रत्यक्षदर्शियों और वीडियो में दर्ज बातचीत के मुताबिक, समिति प्रबंधक नरेंद्र द्विवेदी की मौजूदगी में यह पूरा प्रकरण चलता रहा। बातचीत के दौरान, पहले तौल में गलती होने की बात स्वीकार की गई, लेकिन बाद में कथित तौर पर पत्रकारों को चुनौती भरे लहजे में कहा गया कि "मैहर जिले के पत्रकार मेरा क्या उखाड़ लेंगे सब सेटिंग है।" वीडियो में यह भी कथित तौर पर सामने आया कि तौल कर रहे कर्मचारियों से यह कहलवाने की कोशिश की गई कि वे किसान हैं और अपनी इच्छा से अधिक गेहूं दे रहे हैं। इस पर बड़ा सवाल उठाया गया है कि कोई किसान अपनी मेहनत की फसल में से 700 ग्राम, 900 ग्राम या 1 किलो से ज्यादा गेहूं मुफ्त में क्यों देगा? इस पूरे प्रकरण से घुनवारा उपार्जन केंद्र में तौल मशीनों की समय-समय पर जांच, अलग-अलग कांटों पर अलग-अलग वजन दिखने और किसानों से अतिरिक्त गेहूं लिए जाने जैसे बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। यह भी पूछा जा रहा है कि क्या जिम्मेदार अधिकारी इस मामले से अनजान हैं या कार्रवाई से बच रहे हैं। वीडियो अब प्रशासन और खाद्य खरीदी व्यवस्था दोनों पर गंभीर सवाल छोड़ रहा है, और यदि किसानों के आरोप सही पाए जाते हैं, तो इसे केवल तौल की गड़बड़ी नहीं बल्कि किसानों की मेहनत और अधिकारों पर सीधा प्रहार माना जाएगा। जन आवाज साथी राहुल भाई द्वारा प्रशासन को जगाने की कोशिश के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिससे यह सवाल उठ रहा है कि आखिर किसके दबाव में प्रशासन काम कर रहा है और भ्रष्टाचार के पुख्ता सबूतों पर भी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है।1
- सतना जिले में चंदन के पेड़ चोरी करने वाले एक गिरोह का नागौद पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस पारदी गिरोह की तीन महिलाओं समेत कुल 6 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पूछताछ के दौरान, गिरोह के सदस्यों ने नागौद, रामपुर बाघेलान, सिंहपुर, अमरपाटन और चौकी बाबूपुर जैसे विभिन्न इलाकों में चंदन के पेड़ चोरी की कई घटनाओं को अंजाम देने की बात स्वीकार की है। यह सफलता टीआई अशोक पांडेय के नेतृत्व में पुलिस टीम को मिली है।1
- एक तीखा और बार-बार दोहराया गया सवाल उठाया गया है, जिसमें नेताओं और अधिकारियों से पूछा जा रहा है कि क्या वे 'ऐसी जगह' में रह सकते हैं। इस प्रश्न को कई बार दोहराकर इस बात पर जोर दिया गया है कि जिस 'जगह' का जिक्र किया जा रहा है, वहां की परिस्थितियां संभवतः स्वीकार्य नहीं हैं। यह सवाल एक चुनौती के रूप में सामने आता है, जो उन जिम्मेदार लोगों से उन स्थितियों का अनुभव करने की अपेक्षा करता है, जिनका सामना अन्य लोग कर रहे होंगे।1
- मैहर के ग्राम डेल्हा में एक भव्य निःशुल्क नेत्र प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया। इस आयोजन की खास बात यह रही कि सरपंच अभिषेक जायसवाल ने इसमें सक्रिय और अहम भूमिका निभाई, जिनके प्रयासों और पहल से ही यह स्वास्थ्य शिविर संभव हो सका। शिविर में उपस्थित डॉक्टरों की टीम ने आंखों की देखभाल, बीमारियों की प्रारंभिक पहचान, उचित पोषण और नियमित जांच के महत्व पर ग्रामीणों को विस्तार से जानकारी प्रदान की। ग्रामीणों ने इस कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और विशेषज्ञों से अपने नेत्र स्वास्थ्य से जुड़े कई सवालों के समाधान भी प्राप्त किए। लोगों ने सरपंच की इस पहल की सराहना करते हुए मांग की कि गांव में स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच बेहतर बनाने के लिए ऐसे शिविरों का समय-समय पर आयोजन किया जाना चाहिए। यह निःशुल्क नेत्र प्रशिक्षण शिविर ग्राम डेल्हा में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक प्रभावी और अत्यंत सराहनीय कदम माना जा रहा है, जिससे ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को नेत्र स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होने का महत्वपूर्ण अवसर मिला।4
- कटनी जिले के बड़वारा थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम विलायत कला में नियमों का सरेआम उल्लंघन कर संचालित हो रही एक शासकीय शराब दुकान के खिलाफ स्थानीय ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा है। दुकान को हटाने की मांग को लेकर ग्रामीणों का विरोध प्रदर्शन लगातार तेज होता जा रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह विवादित शराब दुकान विलायत कला के खमतरा तिराहे पर स्थित है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस दुकान के कारण नेशनल-स्टेट हाईवे पर आए दिन भारी जाम लगता है। उनका यह भी कहना है कि शराबियों की आवाजाही और अव्यवस्था के चलते इस क्षेत्र में सड़क दुर्घटनाओं का ग्राफ तेजी से बढ़ा है, जिससे राहगीरों और स्थानीय निवासियों का जीवन दूभर हो गया है। बढ़ती दुर्घटनाओं और क्षेत्र में फैल रही अशांति से परेशान होकर, सोमवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्रित हुए। उन्होंने तहसीलदार को एक लिखित ज्ञापन सौंपकर प्रशासनिक अधिकारी को क्षेत्र की गंभीर स्थिति से अवगत कराया और शराब दुकान को तत्काल प्रभाव से वहां से हटाने की मांग की। ग्रामीणों ने प्रशासन को स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि सात दिन के भीतर इस शराब दुकान को खमतरा तिराहे से हटाकर अन्यत्र स्थानांतरित नहीं किया गया, तो वे उग्र आंदोलन और चक्काजाम करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण और स्थानीय युवा उपस्थित रहे, जिन्होंने प्रशासन से इस मामले में तुरंत सख्त कदम उठाने की अपील की। अब देखना यह होगा कि बड़वारा प्रशासन इस संवेदनशील मामले पर सात दिनों के भीतर क्या कार्रवाई करता है।1
- मैहर में हुई पहली बारिश ने नगर पालिका की मानसून तैयारियों और जल निकासी व्यवस्था की पोल खोल दी है। वार्ड क्रमांक 21 में रहने वाले अशोक कुमार सोनी के घर में नाले का गंदा पानी घुस जाने से परिवार को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। यह घटना नगर पालिका के मानसून पूर्व नालों की सफाई और आवश्यक व्यवस्थाओं के दावों की सच्चाई को उजागर करती है। सतना रोड स्थित बाबा तालाब के सामने अशोक कुमार सोनी के मकान में बारिश के दौरान नाले का दूषित पानी घुस गया, जिससे घर के आंगन और कमरों में गंदा पानी भर गया। इससे घरेलू सामान प्रभावित हुए और परिवार के सदस्यों को पानी निकालने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि नालों की समय पर सफाई न होने और जल निकासी व्यवस्था के कमजोर होने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। क्षेत्रवासियों ने चिंता जताई है कि नाले का गंदा पानी घरों में भरने से न केवल आर्थिक नुकसान होता है, बल्कि स्वास्थ्य संबंधी गंभीर खतरे भी पैदा होते हैं। दूषित पानी के संपर्क में आने से डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड, हैजा, डायरिया, त्वचा रोग और अन्य संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका बढ़ जाती है, खासकर छोटे बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों के लिए यह स्थिति अधिक जोखिमपूर्ण हो सकती है। निवासियों ने नगर पालिका से तत्काल प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण करने और जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने की मांग की है। उन्होंने प्राथमिकता के आधार पर नालों की सफाई और आवश्यक सुधार कार्य कराने की अपील की है, ताकि आगामी बारिश में लोग ऐसी समस्याओं और संभावित बीमारियों के खतरे से बच सकें। पहली ही बरसात में घरों तक पहुंचे नाले के गंदे पानी ने नगर पालिका की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं, और अब देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए कितनी तत्परता दिखाते हैं।2
- मैहर नगर पालिका परिषद के मुख्य नगरपालिका अधिकारी (सीएमओ) प्रिंस अग्रवाल ने शहर की स्वच्छता और जल निकासी व्यवस्था को लेकर सक्रियता दिखाते हुए रेलवे स्टेशन क्षेत्र में एक विशेष सफाई अभियान चलाया। यह कदम बीते दिन हुई सिर्फ आधे घंटे की बारिश के बाद रेलवे स्टेशन परिसर और आसपास के क्षेत्र में हुए गंभीर जलभराव के परिणामस्वरूप उठाया गया, जिससे यात्रियों और श्रद्धालुओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा था। इस मामले की गंभीरता को समझते हुए, सीएमओ प्रिंस अग्रवाल ने तत्काल संज्ञान लिया और आज स्वयं मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण किया। उनके नेतृत्व में चले इस विशेष सफाई अभियान के कारण, आधे घंटे की बारिश के बाद उत्पन्न हुई जलभराव की समस्या का तत्काल समाधान किया जा सका।3
- आज मैहर जिले में रेल रोको आंदोलन किया गया, जहाँ ग्रामीणों का तीव्र आक्रोश स्पष्ट रूप से सामने आया। इस प्रदर्शन में भारी संख्या में लोगों ने भाग लिया। प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि जब तक उनकी माँगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक वे इस आंदोलन को जारी रखेंगे।1