अनूपपुर के कलेक्ट्रेट कार्यालय स्थित नर्मदा सभागार में शहडोल संसदीय क्षेत्र की सांसद श्रीमती हिमाद्री सिंह की अध्यक्षता में जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में पूर्व में दिए गए निर्देशों के पालन प्रतिवेदन और विभिन्न विभागों द्वारा संचालित कार्यों की प्रगति पर चर्चा की गई। सांसद ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि वे नियमित रूप से ग्रामीण क्षेत्रों का भ्रमण कर निर्माणाधीन कार्यों का स्थलीय निरीक्षण करें, ताकि कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने अधिकारियों से पूरी प्रतिबद्धता, उत्तरदायित्व और पारदर्शिता के साथ योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की अपेक्षा की। बैठक के दौरान जल जीवन मिशन की प्रगति की समीक्षा करते हुए बताया गया कि जिले में 210 बसाहटों को चिन्हित किया गया है, जहाँ नल-जल योजना के तहत शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा। अधिकारियों ने अवगत कराया कि वर्ष 2025-28 की कार्ययोजना के तहत नल-जल योजना 2.0 के माध्यम से उन योजनाओं को पुनर्संचालित किया जाएगा जो वर्तमान में पाइपलाइन या अन्य तकनीकी कारणों से बंद हैं। साथ ही, पेयजल आपूर्ति में बाधा न आए, इसके लिए ग्राम पंचायतों को 10 हजार रुपये तक की मरम्मत राशि व्यय करने का प्रावधान दिया गया है। विद्युत व्यवस्था पर चर्चा के दौरान अधिकारियों ने जानकारी दी कि जिले में कुल 527 विद्युतविहीन मजरे-टोले चिन्हित हैं। इनमें से जन-मन योजना के तहत 80 और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत 19 मजरे-टोलों में बिजली पहुँचाई जा चुकी है। इसके अलावा, जिले के 411 आंगनबाड़ी केंद्रों में से 110 में विद्युत कनेक्शन प्रदान किए जा चुके हैं, जबकि शेष केंद्रों में कार्य प्रगति पर है।
अनूपपुर के कलेक्ट्रेट कार्यालय स्थित नर्मदा सभागार में शहडोल संसदीय क्षेत्र की सांसद श्रीमती हिमाद्री सिंह की अध्यक्षता में जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में पूर्व में दिए गए निर्देशों के पालन प्रतिवेदन और विभिन्न विभागों द्वारा संचालित कार्यों की प्रगति पर चर्चा की गई। सांसद ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि वे नियमित रूप से ग्रामीण क्षेत्रों का भ्रमण कर निर्माणाधीन कार्यों का स्थलीय निरीक्षण करें, ताकि कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने अधिकारियों से पूरी प्रतिबद्धता, उत्तरदायित्व और पारदर्शिता के साथ योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की अपेक्षा की। बैठक के दौरान जल जीवन मिशन की प्रगति की समीक्षा करते हुए बताया गया कि जिले में 210 बसाहटों को चिन्हित किया गया है, जहाँ नल-जल योजना के तहत शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा। अधिकारियों ने अवगत कराया कि वर्ष 2025-28 की कार्ययोजना के तहत नल-जल योजना 2.0 के माध्यम से उन योजनाओं को पुनर्संचालित किया जाएगा जो वर्तमान में पाइपलाइन या अन्य तकनीकी कारणों से बंद हैं। साथ ही, पेयजल आपूर्ति में बाधा न आए, इसके लिए ग्राम पंचायतों को 10 हजार रुपये तक की मरम्मत राशि व्यय करने का प्रावधान दिया गया है। विद्युत व्यवस्था पर चर्चा के दौरान अधिकारियों ने जानकारी दी कि जिले में कुल 527 विद्युतविहीन मजरे-टोले चिन्हित हैं। इनमें से जन-मन योजना के तहत 80 और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत 19 मजरे-टोलों में बिजली पहुँचाई जा चुकी है। इसके अलावा, जिले के 411 आंगनबाड़ी केंद्रों में से 110 में विद्युत कनेक्शन प्रदान किए जा चुके हैं, जबकि शेष केंद्रों में कार्य प्रगति पर है।
- अनूपपुर के कलेक्टर हर्षल पंचोली ने शुक्रवार को नगर पालिका क्षेत्र की स्वच्छता व्यवस्था का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने नई सब्जी मंडी के पीछे स्थित ट्रेंचिंग ग्राउंड और जैतहरी रोड स्थित पुराने ट्रेंचिंग ग्राउंड का दौरा किया। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि नए ट्रेंचिंग ग्राउंड में जमा कचरे को पुराने स्थल पर स्थानांतरित कर उसका व्यवस्थित तरीके से निस्तारण किया जाए। साथ ही, उन्होंने कहा कि पुराने ग्राउंड की उपलब्धता को देखते हुए नए स्थल पर कचरा डंप करना उचित नहीं है। स्वच्छता को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से कलेक्टर ने सफाई कर्मचारियों की शिफ्टवार ड्यूटी तय करने और नियमित निगरानी रखने के निर्देश दिए, ताकि हर वार्ड में समय पर सफाई हो सके। कचरा संग्रहण वाहनों की समीक्षा के दौरान, अधिकारियों ने बताया कि नगर पालिका के पास 6 वाहन हैं जो घर-घर जाकर कचरा उठाते हैं। इस पर कलेक्टर ने काम में शिथिलता न बरतने की चेतावनी दी और गीले व सूखे कचरे को अलग-अलग संग्रहित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्रोत स्तर पर कचरे का पृथक्करण प्रबंधन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसका पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। निरीक्षण के क्रम में कलेक्टर ने स्वयं स्मार्ट सिटी क्षेत्र और पुलिस लाइन के आवासों में जाकर कचरा संग्रहण व्यवस्था का जायजा लिया और स्थानीय नागरिकों से फीडबैक भी लिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वच्छता व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और उदासीनता बरतने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अंत में उन्होंने कहा कि एक स्वच्छ और सुंदर नगर का निर्माण प्रशासन और नागरिकों की साझा जिम्मेदारी है। इस निरीक्षण के दौरान मुख्य नगर पालिका अधिकारी शशांक आर्मो और उपयंत्री सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।1
- शहडोल जिले के सोहागपुर में सरपंच संघ ने जिला पंचायत सीईओ पर अभद्रता करने का गंभीर आरोप लगाया है। इस व्यवहार से नाराज सरपंच संघ ने अब सख्त रुख अपनाते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है। संघ का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर गौर नहीं किया गया और स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो वे अपनी नाराजगी जाहिर करने के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।1
- शहडोल जिला मुख्यालय पर शुक्रवार को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं ने राष्ट्रव्यापी आंदोलन के तहत जोरदार प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी 26 सूत्रीय मांगों पर तत्काल निर्णय लेने की पुरजोर मांग उठाई। ज्ञापन में कार्यकर्ताओं ने पोषण ट्रैकर और संपर्क ऐप पर बार-बार एक ही काम कराए जाने से बढ़ रहे अतिरिक्त बोझ पर नाराजगी जताई। उन्होंने नेटवर्क और सर्वर की समस्याओं के चलते समय पर जानकारी अपलोड न हो पाने के कारण मानदेय में की जा रही कटौती का भी कड़ा विरोध किया है। इसके अलावा, उन्होंने 3 से 6 वर्ष के बच्चों को सरकारी स्कूलों में भेजने के आदेश को वापस लेने और आंगनबाड़ी केंद्रों को नर्सरी के रूप में विकसित करने की बात कही है। अपनी मांगों में कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने खुद को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिए जाने, मानदेय में वृद्धि, ग्रेच्युटी, परिवहन व्यय, पक्का भवन और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की मांग रखी है। उन्होंने बीएलओ सहित अन्य विभागीय कार्यों से मुक्त किए जाने की भी मांग की है। संघ के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो प्रदेशव्यापी आंदोलन को और अधिक तेज किया जाएगा।1
- मध्य प्रदेश के सतना जिले की मझगवां जनपद पंचायत के सब-इंजीनियर सतीश समेले ने एक नया जनजागरण अभियान शुरू किया है। सतीश समेले वही अधिकारी हैं जो कुछ समय पहले सड़क निरीक्षण के दौरान बंदूक लेकर चर्चा में आए थे, जिसके बाद उन्हें सस्पेंड कर दिया गया था। अब अपने इस अभियान के जरिए वे लोगों को सरकारी कामों में होने वाली कमीशनखोरी के बारे में खुलकर बता रहे हैं। वे चिल्ला-चिल्लाकर काम कराने वाले लोगों को कमीशन की पूरी 'रेट लिस्ट' समझा रहे हैं, जिसके अनुसार सरपंच का 10%, सचिव का 5%, रोजगार सहायक का 3%, सब-इंजीनियर का 5%, सहायक अभियंता का 2% और सीईओ का 2-3% हिस्सा निर्धारित है।1
- शहडोल में शुक्रवार को दोपहर करीब 2:15 बजे आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका एकता यूनियन के सदस्य भारी संख्या में एकत्रित होकर कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे। प्रदर्शन के दौरान सैकड़ों की तादाद में यूनियन के लोग मौजूद रहे। यूनियन के सदस्यों ने अपनी 25 सूत्रीय मांगों को लेकर कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा। कलेक्ट्रेट परिसर में अपनी मांगों को प्रमुखता से उठाते हुए कार्यकर्ताओं ने यह कदम उठाया है।1
- मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में सरपंच संघ ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। जिला अध्यक्ष सरपंच संघ ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर सीईओ को एक सप्ताह के भीतर जिले से हटाने की मांग की है। चेतावनी दी गई है कि यदि निर्धारित समय सीमा में अधिकारी का स्थानांतरण नहीं किया जाता है, तो सरपंच संघ कार्य बंद कर जिला पंचायत शहडोल के समक्ष उग्र धरना प्रदर्शन करेगा। विवाद की शुरुआत 06 जुलाई 2026 को दोपहर करीब 12 बजे हुई, जब ब्यौहारी जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत कुँआ की आदिवासी महिला सरपंच गणेशिया बाई अपनी समस्या को लेकर सीईओ कार्यालय पहुंची थीं। सरपंच संघ का आरोप है कि सीईओ ने उन्हें न्याय देने के बजाय अभद्र भाषा का प्रयोग किया, उन्हें कार्यालय से बाहर निकाल दिया और सरपंच पद से बर्खास्त करने की धमकी दी। संघ का कहना है कि यह व्यवहार एक निर्वाचित जन प्रतिनिधि के सम्मान और शासकीय सेवा आचरण नियमों का खुला उल्लंघन है। ज्ञापन पर सरपंच संघ के जिला अध्यक्ष शिवेन्द्र सिंह "शिब्बू" सहित फूलबाई, प्रज्ञा बसोर, राजकुमारी और राकेश जैसे अन्य जनप्रतिनिधियों के हस्ताक्षर हैं। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि उक्त अधिकारी पूर्व में भी कर्मचारियों के साथ अभद्र व्यवहार कर चुके हैं, जिससे क्षेत्र में भारी आक्रोश व्याप्त है। संघ ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में किसी भी प्रकार की प्रशासनिक बाधा या कानून-व्यवस्था बिगड़ने की पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।1
- कोरिया की कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी श्रीमती रोक्तिमा यादव ने एग्रीस्टैक पंजीयन एवं खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 की तैयारियों की समीक्षा के लिए एक संयुक्त बैठक ली। इस बैठक में तहसीलदारों, आरएईओ, समिति प्रबंधकों तथा कृषि एवं खाद्य विभाग के अधिकारियों को एग्रीस्टैक पंजीयन मॉड्यूल का प्रशिक्षण दिया गया ताकि किसानों को समयबद्ध सेवाएं मिल सकें। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि 135 छूटे हुए एक्सेम्प्टेड किसानों का पंजीयन और लगभग 3500 लंबित खसरों की मैपिंग इसी सप्ताह प्राथमिकता के आधार पर पूरी की जाए। राजस्व, कृषि एवं खाद्य विभाग के अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ मिशन मोड में कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि कोई भी पात्र किसान सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे। कलेक्टर ने चेतावनी दी कि पंजीयन कार्य में लापरवाही या विलंब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषी पाए जाने पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। जिले के सभी भू-स्वामियों से अपील की गई है कि जिन किसानों का पंजीयन या खसरा मैपिंग शेष है, वे शनिवार, 18 जुलाई को अपनी संबंधित प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति में आयोजित विशेष शिविर में अनिवार्य रूप से उपस्थित हों। पंजीयन के लिए आधार कार्ड, आधार से लिंक मोबाइल नंबर और भूमि संबंधी दस्तावेज (खसरा/बी-1) साथ लाना आवश्यक होगा।4
- अनूपपुर के कलेक्ट्रेट कार्यालय स्थित नर्मदा सभागार में शहडोल संसदीय क्षेत्र की सांसद श्रीमती हिमाद्री सिंह की अध्यक्षता में जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में पूर्व में दिए गए निर्देशों के पालन प्रतिवेदन और विभिन्न विभागों द्वारा संचालित कार्यों की प्रगति पर चर्चा की गई। सांसद ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि वे नियमित रूप से ग्रामीण क्षेत्रों का भ्रमण कर निर्माणाधीन कार्यों का स्थलीय निरीक्षण करें, ताकि कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने अधिकारियों से पूरी प्रतिबद्धता, उत्तरदायित्व और पारदर्शिता के साथ योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की अपेक्षा की। बैठक के दौरान जल जीवन मिशन की प्रगति की समीक्षा करते हुए बताया गया कि जिले में 210 बसाहटों को चिन्हित किया गया है, जहाँ नल-जल योजना के तहत शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा। अधिकारियों ने अवगत कराया कि वर्ष 2025-28 की कार्ययोजना के तहत नल-जल योजना 2.0 के माध्यम से उन योजनाओं को पुनर्संचालित किया जाएगा जो वर्तमान में पाइपलाइन या अन्य तकनीकी कारणों से बंद हैं। साथ ही, पेयजल आपूर्ति में बाधा न आए, इसके लिए ग्राम पंचायतों को 10 हजार रुपये तक की मरम्मत राशि व्यय करने का प्रावधान दिया गया है। विद्युत व्यवस्था पर चर्चा के दौरान अधिकारियों ने जानकारी दी कि जिले में कुल 527 विद्युतविहीन मजरे-टोले चिन्हित हैं। इनमें से जन-मन योजना के तहत 80 और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत 19 मजरे-टोलों में बिजली पहुँचाई जा चुकी है। इसके अलावा, जिले के 411 आंगनबाड़ी केंद्रों में से 110 में विद्युत कनेक्शन प्रदान किए जा चुके हैं, जबकि शेष केंद्रों में कार्य प्रगति पर है।1