शहडोल जिला मुख्यालय पर शुक्रवार को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं ने राष्ट्रव्यापी आंदोलन के तहत जोरदार प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी 26 सूत्रीय मांगों पर तत्काल निर्णय लेने की पुरजोर मांग उठाई। ज्ञापन में कार्यकर्ताओं ने पोषण ट्रैकर और संपर्क ऐप पर बार-बार एक ही काम कराए जाने से बढ़ रहे अतिरिक्त बोझ पर नाराजगी जताई। उन्होंने नेटवर्क और सर्वर की समस्याओं के चलते समय पर जानकारी अपलोड न हो पाने के कारण मानदेय में की जा रही कटौती का भी कड़ा विरोध किया है। इसके अलावा, उन्होंने 3 से 6 वर्ष के बच्चों को सरकारी स्कूलों में भेजने के आदेश को वापस लेने और आंगनबाड़ी केंद्रों को नर्सरी के रूप में विकसित करने की बात कही है। अपनी मांगों में कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने खुद को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिए जाने, मानदेय में वृद्धि, ग्रेच्युटी, परिवहन व्यय, पक्का भवन और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की मांग रखी है। उन्होंने बीएलओ सहित अन्य विभागीय कार्यों से मुक्त किए जाने की भी मांग की है। संघ के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो प्रदेशव्यापी आंदोलन को और अधिक तेज किया जाएगा।
शहडोल जिला मुख्यालय पर शुक्रवार को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं ने राष्ट्रव्यापी आंदोलन के तहत जोरदार प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी 26 सूत्रीय मांगों पर तत्काल निर्णय लेने की पुरजोर मांग उठाई। ज्ञापन में कार्यकर्ताओं ने पोषण ट्रैकर और संपर्क ऐप पर बार-बार एक ही काम कराए जाने से बढ़ रहे अतिरिक्त बोझ पर नाराजगी जताई। उन्होंने नेटवर्क और सर्वर की समस्याओं के चलते समय पर जानकारी अपलोड न हो पाने के कारण मानदेय में की जा रही कटौती का भी कड़ा विरोध किया है। इसके अलावा, उन्होंने 3 से 6 वर्ष के बच्चों को सरकारी स्कूलों में भेजने के आदेश को वापस लेने और आंगनबाड़ी केंद्रों को नर्सरी के रूप में विकसित करने की बात कही है। अपनी मांगों में कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने खुद को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिए जाने, मानदेय में वृद्धि, ग्रेच्युटी, परिवहन व्यय, पक्का भवन और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की मांग रखी है। उन्होंने बीएलओ सहित अन्य विभागीय कार्यों से मुक्त किए जाने की भी मांग की है। संघ के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो प्रदेशव्यापी आंदोलन को और अधिक तेज किया जाएगा।
- शहडोल जिले के सोहागपुर में सरपंच संघ ने जिला पंचायत सीईओ पर अभद्रता करने का गंभीर आरोप लगाया है। इस व्यवहार से नाराज सरपंच संघ ने अब सख्त रुख अपनाते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है। संघ का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर गौर नहीं किया गया और स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो वे अपनी नाराजगी जाहिर करने के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।1
- शहडोल जिला मुख्यालय पर शुक्रवार को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं ने राष्ट्रव्यापी आंदोलन के तहत जोरदार प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी 26 सूत्रीय मांगों पर तत्काल निर्णय लेने की पुरजोर मांग उठाई। ज्ञापन में कार्यकर्ताओं ने पोषण ट्रैकर और संपर्क ऐप पर बार-बार एक ही काम कराए जाने से बढ़ रहे अतिरिक्त बोझ पर नाराजगी जताई। उन्होंने नेटवर्क और सर्वर की समस्याओं के चलते समय पर जानकारी अपलोड न हो पाने के कारण मानदेय में की जा रही कटौती का भी कड़ा विरोध किया है। इसके अलावा, उन्होंने 3 से 6 वर्ष के बच्चों को सरकारी स्कूलों में भेजने के आदेश को वापस लेने और आंगनबाड़ी केंद्रों को नर्सरी के रूप में विकसित करने की बात कही है। अपनी मांगों में कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने खुद को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिए जाने, मानदेय में वृद्धि, ग्रेच्युटी, परिवहन व्यय, पक्का भवन और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की मांग रखी है। उन्होंने बीएलओ सहित अन्य विभागीय कार्यों से मुक्त किए जाने की भी मांग की है। संघ के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो प्रदेशव्यापी आंदोलन को और अधिक तेज किया जाएगा।1
- मध्य प्रदेश के सतना जिले की मझगवां जनपद पंचायत के सब-इंजीनियर सतीश समेले ने एक नया जनजागरण अभियान शुरू किया है। सतीश समेले वही अधिकारी हैं जो कुछ समय पहले सड़क निरीक्षण के दौरान बंदूक लेकर चर्चा में आए थे, जिसके बाद उन्हें सस्पेंड कर दिया गया था। अब अपने इस अभियान के जरिए वे लोगों को सरकारी कामों में होने वाली कमीशनखोरी के बारे में खुलकर बता रहे हैं। वे चिल्ला-चिल्लाकर काम कराने वाले लोगों को कमीशन की पूरी 'रेट लिस्ट' समझा रहे हैं, जिसके अनुसार सरपंच का 10%, सचिव का 5%, रोजगार सहायक का 3%, सब-इंजीनियर का 5%, सहायक अभियंता का 2% और सीईओ का 2-3% हिस्सा निर्धारित है।1
- शहडोल में शुक्रवार को दोपहर करीब 2:15 बजे आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका एकता यूनियन के सदस्य भारी संख्या में एकत्रित होकर कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे। प्रदर्शन के दौरान सैकड़ों की तादाद में यूनियन के लोग मौजूद रहे। यूनियन के सदस्यों ने अपनी 25 सूत्रीय मांगों को लेकर कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा। कलेक्ट्रेट परिसर में अपनी मांगों को प्रमुखता से उठाते हुए कार्यकर्ताओं ने यह कदम उठाया है।1
- मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में सरपंच संघ ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। जिला अध्यक्ष सरपंच संघ ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर सीईओ को एक सप्ताह के भीतर जिले से हटाने की मांग की है। चेतावनी दी गई है कि यदि निर्धारित समय सीमा में अधिकारी का स्थानांतरण नहीं किया जाता है, तो सरपंच संघ कार्य बंद कर जिला पंचायत शहडोल के समक्ष उग्र धरना प्रदर्शन करेगा। विवाद की शुरुआत 06 जुलाई 2026 को दोपहर करीब 12 बजे हुई, जब ब्यौहारी जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत कुँआ की आदिवासी महिला सरपंच गणेशिया बाई अपनी समस्या को लेकर सीईओ कार्यालय पहुंची थीं। सरपंच संघ का आरोप है कि सीईओ ने उन्हें न्याय देने के बजाय अभद्र भाषा का प्रयोग किया, उन्हें कार्यालय से बाहर निकाल दिया और सरपंच पद से बर्खास्त करने की धमकी दी। संघ का कहना है कि यह व्यवहार एक निर्वाचित जन प्रतिनिधि के सम्मान और शासकीय सेवा आचरण नियमों का खुला उल्लंघन है। ज्ञापन पर सरपंच संघ के जिला अध्यक्ष शिवेन्द्र सिंह "शिब्बू" सहित फूलबाई, प्रज्ञा बसोर, राजकुमारी और राकेश जैसे अन्य जनप्रतिनिधियों के हस्ताक्षर हैं। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि उक्त अधिकारी पूर्व में भी कर्मचारियों के साथ अभद्र व्यवहार कर चुके हैं, जिससे क्षेत्र में भारी आक्रोश व्याप्त है। संघ ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में किसी भी प्रकार की प्रशासनिक बाधा या कानून-व्यवस्था बिगड़ने की पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।1
- उमरिया जिले की मानपुर जनपद पंचायत के ग्राम पड़वार स्थित हलफल-भदार नदी पर पुल का अभाव बारिश के मौसम में एक बड़ी मुसीबत बन गया है। नदी का जलस्तर बढ़ते ही बचहा, मुडगुड़ी, सलैया, कुंडी, भरौली और पड़वार सहित आसपास के गांवों का संपर्क टूट जाता है, जिससे स्थानीय निवासियों का आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो जाता है। इस स्थिति से सबसे अधिक जूझना छात्र-छात्राओं को पड़ रहा है, जो पड़वार स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में पढ़ने जाते हैं। सामान्य दिनों में विद्यालय की दूरी 4 से 5 किलोमीटर है, लेकिन बरसात में नदी उफान पर होने के कारण उन्हें अमरपुर होकर 18 से 20 किलोमीटर का अतिरिक्त सफर तय करना पड़ता है। विद्यार्थियों की पढ़ाई पर इसका सीधा असर पड़ रहा है और कई बार स्कूल पहुंचना भी मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि ग्राम कुंडी के पास बने स्टॉप डेम में किए गए अवरोध के कारण जलभराव की समस्या और बढ़ गई है, जिससे न केवल आवागमन प्रभावित है बल्कि किसानों की कृषि भूमि का कटाव भी हो रहा है। ग्रामीणों ने शिकायत की है कि वे वर्षों से पुल की मांग कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है। उन्होंने जिला खनिज प्रतिष्ठान (DMF) या अन्य योजनाओं के माध्यम से पुल निर्माण की मांग रखी है। ग्रामीणों के अनुसार, पूर्व में अपनी पढ़ाई और पुल की मांग को लेकर छात्र-छात्राओं ने 'नदी बचाओ आंदोलन' का समर्थन किया था, जिसके बाद जिला प्रशासन ने कुछ शिक्षकों के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई तो की, लेकिन पुल के निर्माण पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। अब ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर से बरसात के दौरान मौके का निरीक्षण करने और पुल निर्माण की प्रक्रिया शीघ्र शुरू करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो वे क्षेत्रीय नागरिकों के साथ लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन और धरना-प्रदर्शन करेंगे, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।2
- उमरिया जिले भर में अवैध पैकारी का कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है, जिसने स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। इस पूरी स्थिति पर जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी बनी हुई है, जिसके चलते आम जनता की सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।1
- शहडोल जिले में जनपद पंचायत सोहागपुर की ग्राम पंचायत बोडरी की आदिवासी महिला सरपंच गणेशिया बाई के साथ जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) द्वारा कथित रूप से अभद्र व्यवहार करने का मामला सामने आया है। सरपंच का आरोप है कि उनकी पंचायत में पिछले चार माह से सचिव का पद रिक्त होने के कारण विकास कार्य और ग्रामीणों के काम ठप पड़े हैं, इसी समस्या को लेकर वह 6 जुलाई को जिला पंचायत सीईओ से मिलने गई थीं। सरपंच संघ का कहना है कि सीईओ ने उनकी समस्या सुनने के बजाय उनके साथ अभद्र भाषा का उपयोग किया और उन्हें कार्यालय से बाहर जाने के लिए कह दिया। इस घटना के विरोध में जिला सरपंच संघ ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए संबंधित सीईओ के तत्काल स्थानांतरण की मांग की है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर सीईओ के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई, तो जिला पंचायत कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन किया जाएगा और जिलेभर के सरपंच अपने आंदोलन को तेज करेंगे।2