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उमरिया जिले भर में अवैध पैकारी का कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है, जिसने स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। इस पूरी स्थिति पर जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी बनी हुई है, जिसके चलते आम जनता की सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।
News 24 Umaria
उमरिया जिले भर में अवैध पैकारी का कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है, जिसने स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। इस पूरी स्थिति पर जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी बनी हुई है, जिसके चलते आम जनता की सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।
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- उमरिया जिले भर में अवैध पैकारी का कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है, जिसने स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। इस पूरी स्थिति पर जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी बनी हुई है, जिसके चलते आम जनता की सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।1
- मध्य प्रदेश के उमरिया जिले में पुलिस मुख्यालय भोपाल के निर्देश पर यातायात विभाग द्वारा 7 दिवसीय स्कूल बस चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत अब तक कुल 10 स्कूल बसों की जांच की गई, जिसमें से 4 बसों में कमियां पाए जाने पर उन पर चालानी कार्रवाई की गई है। यातायात प्रभारी ज्योति शुक्ला ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान 15 जुलाई तक जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि स्कूल बसों के लिए फिटनेस, वैध दस्तावेज, फर्स्ट एड बॉक्स, अग्निशमन यंत्र और आपातकालीन निकास जैसे सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य है। नियमों का उल्लंघन करने वाले संचालकों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, उन्होंने स्कूल संचालकों और वाहन चालकों से अपील की है कि वे विद्यार्थियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें और सभी निर्धारित नियमों का सख्ती से पालन करें।1
- मध्यप्रदेश के उमरिया जिले में 15 से 30 जुलाई तक 'नशे से दूरी है जरूरी 2.0' अभियान चलाया जाएगा। राज्य सरकार के 'नशा मुक्त मध्यप्रदेश' के तहत आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने युवाओं और प्रदेशवासियों से सक्रिय भागीदारी की अपील की है। मुख्यमंत्री का कहना है कि नशा समाज, परिवार और युवा पीढ़ी के भविष्य के लिए विनाशकारी है, इसलिए इसके खिलाफ लड़ाई में जनसहयोग अनिवार्य है। यह अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'नशा मुक्त भारत' के संकल्प और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा वर्ष 2029 तक देश को नशा मुक्त बनाने के लक्ष्य के अनुरूप संचालित किया जा रहा है। उमरिया में प्रशासन और पुलिस मिलकर जनजागरूकता रैलियां, शपथ ग्रहण समारोह और स्कूल-कॉलेजों में विशेष गतिविधियां आयोजित करेंगे। साथ ही, नशे के अवैध कारोबार के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने नागरिकों से नशे से दूर रहने और दूसरों को भी जागरूक करने का आग्रह किया है, ताकि 'नशा मुक्त उमरिया' और 'नशा मुक्त मध्यप्रदेश' का लक्ष्य प्राप्त किया जा सके।2
- उमरिया जिले की मानपुर जनपद पंचायत के ग्राम पड़वार स्थित हलफल-भदार नदी पर पुल का अभाव बारिश के मौसम में एक बड़ी मुसीबत बन गया है। नदी का जलस्तर बढ़ते ही बचहा, मुडगुड़ी, सलैया, कुंडी, भरौली और पड़वार सहित आसपास के गांवों का संपर्क टूट जाता है, जिससे स्थानीय निवासियों का आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो जाता है। इस स्थिति से सबसे अधिक जूझना छात्र-छात्राओं को पड़ रहा है, जो पड़वार स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में पढ़ने जाते हैं। सामान्य दिनों में विद्यालय की दूरी 4 से 5 किलोमीटर है, लेकिन बरसात में नदी उफान पर होने के कारण उन्हें अमरपुर होकर 18 से 20 किलोमीटर का अतिरिक्त सफर तय करना पड़ता है। विद्यार्थियों की पढ़ाई पर इसका सीधा असर पड़ रहा है और कई बार स्कूल पहुंचना भी मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि ग्राम कुंडी के पास बने स्टॉप डेम में किए गए अवरोध के कारण जलभराव की समस्या और बढ़ गई है, जिससे न केवल आवागमन प्रभावित है बल्कि किसानों की कृषि भूमि का कटाव भी हो रहा है। ग्रामीणों ने शिकायत की है कि वे वर्षों से पुल की मांग कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है। उन्होंने जिला खनिज प्रतिष्ठान (DMF) या अन्य योजनाओं के माध्यम से पुल निर्माण की मांग रखी है। ग्रामीणों के अनुसार, पूर्व में अपनी पढ़ाई और पुल की मांग को लेकर छात्र-छात्राओं ने 'नदी बचाओ आंदोलन' का समर्थन किया था, जिसके बाद जिला प्रशासन ने कुछ शिक्षकों के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई तो की, लेकिन पुल के निर्माण पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। अब ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर से बरसात के दौरान मौके का निरीक्षण करने और पुल निर्माण की प्रक्रिया शीघ्र शुरू करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो वे क्षेत्रीय नागरिकों के साथ लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन और धरना-प्रदर्शन करेंगे, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।2
- शहडोल में कलेक्टर डॉ. केदार सिंह ने कलेक्ट्रेट कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई के दौरान लोगों की समस्याओं को सुना और उनके निराकरण के निर्देश दिए। इस दौरान ब्यौहारी के भोगियां निवासी श्री रामानंद पटेल ने कलेक्टर के समक्ष अपनी समस्या रखते हुए ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराने की मांग की। इस मांग पर त्वरित कार्रवाई करते हुए डॉ. केदार सिंह ने उपसंचालक, सामाजिक न्याय विभाग को दूरभाष के जरिए निर्देशित किया कि श्री रामानंद पटेल को तत्काल ट्राइसाइकिल दिलाई जाए। इसके अतिरिक्त, कलेक्टर ने वहां मौजूद अन्य फरियादियों की शिकायतों को भी गंभीरता से सुना और संबंधित अधिकारियों को उनके समाधान के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।1
- शहडोल जिले के सोहागपुर में सरपंच संघ ने जिला पंचायत सीईओ पर अभद्रता करने का गंभीर आरोप लगाया है। इस व्यवहार से नाराज सरपंच संघ ने अब सख्त रुख अपनाते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है। संघ का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर गौर नहीं किया गया और स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो वे अपनी नाराजगी जाहिर करने के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।1
- शहडोल जिला मुख्यालय पर शुक्रवार को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं ने राष्ट्रव्यापी आंदोलन के तहत जोरदार प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी 26 सूत्रीय मांगों पर तत्काल निर्णय लेने की पुरजोर मांग उठाई। ज्ञापन में कार्यकर्ताओं ने पोषण ट्रैकर और संपर्क ऐप पर बार-बार एक ही काम कराए जाने से बढ़ रहे अतिरिक्त बोझ पर नाराजगी जताई। उन्होंने नेटवर्क और सर्वर की समस्याओं के चलते समय पर जानकारी अपलोड न हो पाने के कारण मानदेय में की जा रही कटौती का भी कड़ा विरोध किया है। इसके अलावा, उन्होंने 3 से 6 वर्ष के बच्चों को सरकारी स्कूलों में भेजने के आदेश को वापस लेने और आंगनबाड़ी केंद्रों को नर्सरी के रूप में विकसित करने की बात कही है। अपनी मांगों में कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने खुद को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिए जाने, मानदेय में वृद्धि, ग्रेच्युटी, परिवहन व्यय, पक्का भवन और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की मांग रखी है। उन्होंने बीएलओ सहित अन्य विभागीय कार्यों से मुक्त किए जाने की भी मांग की है। संघ के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो प्रदेशव्यापी आंदोलन को और अधिक तेज किया जाएगा।1
- शहडोल जिले में जनपद पंचायत सोहागपुर की ग्राम पंचायत बोडरी की आदिवासी महिला सरपंच गणेशिया बाई के साथ जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) द्वारा कथित रूप से अभद्र व्यवहार करने का मामला सामने आया है। सरपंच का आरोप है कि उनकी पंचायत में पिछले चार माह से सचिव का पद रिक्त होने के कारण विकास कार्य और ग्रामीणों के काम ठप पड़े हैं, इसी समस्या को लेकर वह 6 जुलाई को जिला पंचायत सीईओ से मिलने गई थीं। सरपंच संघ का कहना है कि सीईओ ने उनकी समस्या सुनने के बजाय उनके साथ अभद्र भाषा का उपयोग किया और उन्हें कार्यालय से बाहर जाने के लिए कह दिया। इस घटना के विरोध में जिला सरपंच संघ ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए संबंधित सीईओ के तत्काल स्थानांतरण की मांग की है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर सीईओ के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई, तो जिला पंचायत कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन किया जाएगा और जिलेभर के सरपंच अपने आंदोलन को तेज करेंगे।2