logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…
  • Latest News
  • News
  • Politics
  • Elections
  • Viral
  • Astrology
  • Horoscope in Hindi
  • Horoscope in English
  • Latest Political News
logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…

मानपुर में अवैध शराब का खेल! गांव-गांव में खुलेआम शराब बिक्री के आरोप, फिर भी आबकारी-पुलिस की कार्रवाई पर सवाल? मानपुर में अवैध शराब का खेल! गांव-गांव में खुलेआम शराब बिक्री के आरोप, फिर भी आबकारी-पुलिस की कार्रवाई पर सवाल पेट्रोल-डीजल पर कार्रवाई दिखी, लेकिन शराब के अवैध कारोबार पर चुप्पी क्यों? आशुतोष त्रिपाठी/जनचिंगारी — उमरिया। मानपुर। मानपुर क्षेत्र में कथित अवैध शराब बिक्री को लेकर अब सवाल सिर्फ शराब बेचने वालों पर नहीं, बल्कि कार्रवाई के लिए जिम्मेदार सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी उठने लगे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र के कई गांवों में लंबे समय से अवैध शराब की बिक्री की शिकायतें सामने आ रही हैं, बावजूद इसके जिम्मेदार विभागों की ओर से ऐसी कोई बड़ी और प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही, जिससे अवैध कारोबारियों में कानून का भय पैदा हो। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब प्रशासन पेट्रोल-डीजल से जुड़े मामलों में कार्रवाई कर सकता है, तो फिर खुलेआम चल रही कथित अवैध शराब बिक्री पर कार्रवाई करने में इतनी देरी क्यों? शिकायतें हैं तो छापेमारी क्यों नहीं? मानपुर जनपद पंचायत क्षेत्र के हिरौली, बिजौरी, करौंदी टोला, डोंड़का, भमरहा सहित कई गांवों और मुख्य मार्ग से लगे क्षेत्रों में अवैध शराब बिक्री की शिकायतें सामने आने की बात स्थानीय नागरिकों द्वारा कही जा रही है। ग्रामीणों का दावा है कि कुछ स्थानों पर शराब की बिक्री निर्धारित समय के बाद भी किए जाने की शिकायतें हैं। यदि ये शिकायतें गलत हैं तो प्रशासन मैदानी जांच कर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं करता? और यदि शिकायतें सही पाई जाती हैं तो अब तक प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई? यही सवाल अब ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। कार्रवाई की जिम्मेदारी किसकी? अवैध शराब की बिक्री पर कार्रवाई की जिम्मेदारी संबंधित विभागों की होती है। ऐसे में स्थानीय नागरिकों का सवाल है कि क्या आबकारी विभाग के पास क्षेत्र की नियमित निगरानी की व्यवस्था नहीं है? क्या पुलिस और आबकारी विभाग के बीच समन्वय की कमी है? क्या शिकायतों की सूचना जिम्मेदार अधिकारियों तक नहीं पहुंचती? या फिर शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही? इन सवालों का जवाब संबंधित अधिकारियों को देना चाहिए। छोटे कारोबार से बड़ा नेटवर्क बनने का खतरा ग्रामीणों का कहना है कि यदि गांवों में छोटी मात्रा से शुरू होने वाली अवैध शराब बिक्री पर समय रहते अंकुश नहीं लगाया गया तो यह आगे चलकर बड़े अवैध नेटवर्क का रूप ले सकती है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि ग्रामीण और युवा आबादी के बीच शराब की आसान उपलब्धता सामाजिक समस्या को बढ़ा सकती है। नशे की बढ़ती प्रवृत्ति का असर परिवार, स्वास्थ्य, रोजगार और कानून-व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। नशामुक्ति अभियान बनाम जमीन की हकीकत सरकार नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाती है। युवाओं को नशे से दूर रहने का संदेश दिया जाता है। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि दूसरी ओर यदि गांवों में शराब आसानी से उपलब्ध होती रहे तो केवल जागरूकता अभियान से समस्या का समाधान कैसे होगा? दीवारों पर नशामुक्ति के संदेश और गांवों में कथित अवैध शराब की बिक्री—इन दोनों के बीच का विरोधाभास आखिर कब खत्म होगा? प्रशासन से सीधे सवाल 1. मानपुर क्षेत्र में अवैध शराब बिक्री की कितनी शिकायतें प्राप्त हुईं? 2. पिछले कुछ महीनों में आबकारी विभाग ने कितने छापे मारे? 3. कितने प्रकरण दर्ज किए गए और कितने आरोपियों पर कार्रवाई हुई? 4. क्या हिरौली, बिजौरी, करौंदी टोला, दौड़का और भमराहा में जांच कराई गई? 5. यदि जांच नहीं हुई तो क्यों? 6. क्या पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त टीम बनाकर अभियान चलाया जाएगा? 7. क्या शराब की अवैध सप्लाई के स्रोत तक पहुंचने के लिए जांच की जाएगी? ग्रामीणों की मांग—अब दिखे जमीन पर कार्रवाई स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि सिर्फ कागजी कार्रवाई या औपचारिक जांच के बजाय अचानक और संयुक्त छापेमारी अभियान चलाया जाए। आबकारी विभाग, पुलिस और राजस्व अमले की संयुक्त टीम बनाकर शिकायत वाले क्षेत्रों की जांच की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए और कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक की जाए। अब निगाह प्रशासन पर मानपुर क्षेत्र में अवैध शराब बिक्री के आरोपों ने प्रशासन और आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। अब देखना यह है कि प्रशासन इन शिकायतों को महज ग्रामीणों की नाराजगी मानकर नजरअंदाज करता है या फिर मैदानी स्तर पर जांच कर सच सामने लाता है। क्योंकि सवाल सिर्फ शराब की अवैध बिक्री का नहीं है—सवाल यह भी है कि यदि कानून का उल्लंघन खुलेआम हो रहा है, तो कानून लागू करने वाले तंत्र की नजर आखिर कहां है?

15 hrs ago
user_Ashutosh tripathi
Ashutosh tripathi
Court reporter मानपुर, उमरिया, मध्य प्रदेश•
15 hrs ago
77cc66e2-0bd9-4ebe-8c93-e6e98b146baa

मानपुर में अवैध शराब का खेल! गांव-गांव में खुलेआम शराब बिक्री के आरोप, फिर भी आबकारी-पुलिस की कार्रवाई पर सवाल? मानपुर में अवैध शराब का खेल! गांव-गांव में खुलेआम शराब बिक्री के आरोप, फिर भी आबकारी-पुलिस की कार्रवाई पर सवाल पेट्रोल-डीजल पर कार्रवाई दिखी, लेकिन शराब के अवैध कारोबार पर चुप्पी क्यों? आशुतोष त्रिपाठी/जनचिंगारी — उमरिया। मानपुर। मानपुर क्षेत्र में कथित अवैध शराब बिक्री को लेकर अब सवाल सिर्फ शराब बेचने वालों पर नहीं, बल्कि कार्रवाई के लिए जिम्मेदार सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी उठने लगे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र के कई गांवों में लंबे समय से अवैध शराब की बिक्री की शिकायतें सामने आ रही हैं, बावजूद इसके जिम्मेदार विभागों की ओर से ऐसी कोई बड़ी और प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही, जिससे अवैध कारोबारियों में कानून का भय पैदा हो। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब प्रशासन पेट्रोल-डीजल से जुड़े मामलों में कार्रवाई कर सकता है, तो फिर खुलेआम चल रही कथित अवैध शराब बिक्री पर कार्रवाई करने में इतनी देरी क्यों? शिकायतें हैं तो छापेमारी क्यों नहीं? मानपुर जनपद पंचायत क्षेत्र के हिरौली, बिजौरी, करौंदी टोला, डोंड़का, भमरहा सहित कई गांवों और मुख्य मार्ग से लगे क्षेत्रों में अवैध शराब बिक्री की शिकायतें सामने आने की बात स्थानीय नागरिकों द्वारा कही जा रही है। ग्रामीणों का दावा है कि कुछ स्थानों पर शराब की बिक्री निर्धारित समय के बाद भी किए जाने की शिकायतें हैं। यदि ये शिकायतें गलत हैं तो प्रशासन मैदानी जांच कर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं करता? और यदि शिकायतें सही पाई

a1fbc137-6c0c-462e-96c6-e2bf8daab9a8

जाती हैं तो अब तक प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई? यही सवाल अब ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। कार्रवाई की जिम्मेदारी किसकी? अवैध शराब की बिक्री पर कार्रवाई की जिम्मेदारी संबंधित विभागों की होती है। ऐसे में स्थानीय नागरिकों का सवाल है कि क्या आबकारी विभाग के पास क्षेत्र की नियमित निगरानी की व्यवस्था नहीं है? क्या पुलिस और आबकारी विभाग के बीच समन्वय की कमी है? क्या शिकायतों की सूचना जिम्मेदार अधिकारियों तक नहीं पहुंचती? या फिर शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही? इन सवालों का जवाब संबंधित अधिकारियों को देना चाहिए। छोटे कारोबार से बड़ा नेटवर्क बनने का खतरा ग्रामीणों का कहना है कि यदि गांवों में छोटी मात्रा से शुरू होने वाली अवैध शराब बिक्री पर समय रहते अंकुश नहीं लगाया गया तो यह आगे चलकर बड़े अवैध नेटवर्क का रूप ले सकती है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि ग्रामीण और युवा आबादी के बीच शराब की आसान उपलब्धता सामाजिक समस्या को बढ़ा सकती है। नशे की बढ़ती प्रवृत्ति का असर परिवार, स्वास्थ्य, रोजगार और कानून-व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। नशामुक्ति अभियान बनाम जमीन की हकीकत सरकार नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाती है। युवाओं को नशे से दूर रहने का संदेश दिया जाता है। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि दूसरी ओर यदि गांवों में शराब आसानी से उपलब्ध होती रहे तो केवल जागरूकता अभियान से समस्या का समाधान कैसे होगा? दीवारों पर नशामुक्ति के संदेश और गांवों में कथित अवैध शराब की बिक्री—इन दोनों के बीच का विरोधाभास आखिर कब खत्म होगा? प्रशासन से सीधे सवाल 1.

मानपुर क्षेत्र में अवैध शराब बिक्री की कितनी शिकायतें प्राप्त हुईं? 2. पिछले कुछ महीनों में आबकारी विभाग ने कितने छापे मारे? 3. कितने प्रकरण दर्ज किए गए और कितने आरोपियों पर कार्रवाई हुई? 4. क्या हिरौली, बिजौरी, करौंदी टोला, दौड़का और भमराहा में जांच कराई गई? 5. यदि जांच नहीं हुई तो क्यों? 6. क्या पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त टीम बनाकर अभियान चलाया जाएगा? 7. क्या शराब की अवैध सप्लाई के स्रोत तक पहुंचने के लिए जांच की जाएगी? ग्रामीणों की मांग—अब दिखे जमीन पर कार्रवाई स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि सिर्फ कागजी कार्रवाई या औपचारिक जांच के बजाय अचानक और संयुक्त छापेमारी अभियान चलाया जाए। आबकारी विभाग, पुलिस और राजस्व अमले की संयुक्त टीम बनाकर शिकायत वाले क्षेत्रों की जांच की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए और कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक की जाए। अब निगाह प्रशासन पर मानपुर क्षेत्र में अवैध शराब बिक्री के आरोपों ने प्रशासन और आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। अब देखना यह है कि प्रशासन इन शिकायतों को महज ग्रामीणों की नाराजगी मानकर नजरअंदाज करता है या फिर मैदानी स्तर पर जांच कर सच सामने लाता है। क्योंकि सवाल सिर्फ शराब की अवैध बिक्री का नहीं है—सवाल यह भी है कि यदि कानून का उल्लंघन खुलेआम हो रहा है, तो कानून लागू करने वाले तंत्र की नजर आखिर कहां है?

More news from मध्य प्रदेश and nearby areas
  • मानपुर में अवैध शराब का खेल! गांव-गांव में खुलेआम शराब बिक्री के आरोप, फिर भी आबकारी-पुलिस की कार्रवाई पर सवाल? मानपुर में अवैध शराब का खेल! गांव-गांव में खुलेआम शराब बिक्री के आरोप, फिर भी आबकारी-पुलिस की कार्रवाई पर सवाल पेट्रोल-डीजल पर कार्रवाई दिखी, लेकिन शराब के अवैध कारोबार पर चुप्पी क्यों? आशुतोष त्रिपाठी/जनचिंगारी — उमरिया। मानपुर। मानपुर क्षेत्र में कथित अवैध शराब बिक्री को लेकर अब सवाल सिर्फ शराब बेचने वालों पर नहीं, बल्कि कार्रवाई के लिए जिम्मेदार सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी उठने लगे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र के कई गांवों में लंबे समय से अवैध शराब की बिक्री की शिकायतें सामने आ रही हैं, बावजूद इसके जिम्मेदार विभागों की ओर से ऐसी कोई बड़ी और प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही, जिससे अवैध कारोबारियों में कानून का भय पैदा हो। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब प्रशासन पेट्रोल-डीजल से जुड़े मामलों में कार्रवाई कर सकता है, तो फिर खुलेआम चल रही कथित अवैध शराब बिक्री पर कार्रवाई करने में इतनी देरी क्यों? शिकायतें हैं तो छापेमारी क्यों नहीं? मानपुर जनपद पंचायत क्षेत्र के हिरौली, बिजौरी, करौंदी टोला, डोंड़का, भमरहा सहित कई गांवों और मुख्य मार्ग से लगे क्षेत्रों में अवैध शराब बिक्री की शिकायतें सामने आने की बात स्थानीय नागरिकों द्वारा कही जा रही है। ग्रामीणों का दावा है कि कुछ स्थानों पर शराब की बिक्री निर्धारित समय के बाद भी किए जाने की शिकायतें हैं। यदि ये शिकायतें गलत हैं तो प्रशासन मैदानी जांच कर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं करता? और यदि शिकायतें सही पाई जाती हैं तो अब तक प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई? यही सवाल अब ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। कार्रवाई की जिम्मेदारी किसकी? अवैध शराब की बिक्री पर कार्रवाई की जिम्मेदारी संबंधित विभागों की होती है। ऐसे में स्थानीय नागरिकों का सवाल है कि क्या आबकारी विभाग के पास क्षेत्र की नियमित निगरानी की व्यवस्था नहीं है? क्या पुलिस और आबकारी विभाग के बीच समन्वय की कमी है? क्या शिकायतों की सूचना जिम्मेदार अधिकारियों तक नहीं पहुंचती? या फिर शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही? इन सवालों का जवाब संबंधित अधिकारियों को देना चाहिए। छोटे कारोबार से बड़ा नेटवर्क बनने का खतरा ग्रामीणों का कहना है कि यदि गांवों में छोटी मात्रा से शुरू होने वाली अवैध शराब बिक्री पर समय रहते अंकुश नहीं लगाया गया तो यह आगे चलकर बड़े अवैध नेटवर्क का रूप ले सकती है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि ग्रामीण और युवा आबादी के बीच शराब की आसान उपलब्धता सामाजिक समस्या को बढ़ा सकती है। नशे की बढ़ती प्रवृत्ति का असर परिवार, स्वास्थ्य, रोजगार और कानून-व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। नशामुक्ति अभियान बनाम जमीन की हकीकत सरकार नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाती है। युवाओं को नशे से दूर रहने का संदेश दिया जाता है। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि दूसरी ओर यदि गांवों में शराब आसानी से उपलब्ध होती रहे तो केवल जागरूकता अभियान से समस्या का समाधान कैसे होगा? दीवारों पर नशामुक्ति के संदेश और गांवों में कथित अवैध शराब की बिक्री—इन दोनों के बीच का विरोधाभास आखिर कब खत्म होगा? प्रशासन से सीधे सवाल 1. मानपुर क्षेत्र में अवैध शराब बिक्री की कितनी शिकायतें प्राप्त हुईं? 2. पिछले कुछ महीनों में आबकारी विभाग ने कितने छापे मारे? 3. कितने प्रकरण दर्ज किए गए और कितने आरोपियों पर कार्रवाई हुई? 4. क्या हिरौली, बिजौरी, करौंदी टोला, दौड़का और भमराहा में जांच कराई गई? 5. यदि जांच नहीं हुई तो क्यों? 6. क्या पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त टीम बनाकर अभियान चलाया जाएगा? 7. क्या शराब की अवैध सप्लाई के स्रोत तक पहुंचने के लिए जांच की जाएगी? ग्रामीणों की मांग—अब दिखे जमीन पर कार्रवाई स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि सिर्फ कागजी कार्रवाई या औपचारिक जांच के बजाय अचानक और संयुक्त छापेमारी अभियान चलाया जाए। आबकारी विभाग, पुलिस और राजस्व अमले की संयुक्त टीम बनाकर शिकायत वाले क्षेत्रों की जांच की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए और कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक की जाए। अब निगाह प्रशासन पर मानपुर क्षेत्र में अवैध शराब बिक्री के आरोपों ने प्रशासन और आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। अब देखना यह है कि प्रशासन इन शिकायतों को महज ग्रामीणों की नाराजगी मानकर नजरअंदाज करता है या फिर मैदानी स्तर पर जांच कर सच सामने लाता है। क्योंकि सवाल सिर्फ शराब की अवैध बिक्री का नहीं है—सवाल यह भी है कि यदि कानून का उल्लंघन खुलेआम हो रहा है, तो कानून लागू करने वाले तंत्र की नजर आखिर कहां है?
    3
    मानपुर में अवैध शराब का खेल!
गांव-गांव में खुलेआम शराब बिक्री के आरोप, फिर भी आबकारी-पुलिस की कार्रवाई पर सवाल?

मानपुर में अवैध शराब का खेल!
गांव-गांव में खुलेआम शराब बिक्री के आरोप, फिर भी आबकारी-पुलिस की कार्रवाई पर सवाल
पेट्रोल-डीजल पर कार्रवाई दिखी, लेकिन शराब के अवैध कारोबार पर चुप्पी क्यों?
आशुतोष त्रिपाठी/जनचिंगारी — उमरिया।
मानपुर। मानपुर क्षेत्र में कथित अवैध शराब बिक्री को लेकर अब सवाल सिर्फ शराब बेचने वालों पर नहीं, बल्कि कार्रवाई के लिए जिम्मेदार सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी उठने लगे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र के कई गांवों में लंबे समय से अवैध शराब की बिक्री की शिकायतें सामने आ रही हैं, बावजूद इसके जिम्मेदार विभागों की ओर से ऐसी कोई बड़ी और प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही, जिससे अवैध कारोबारियों में कानून का भय पैदा हो।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब प्रशासन पेट्रोल-डीजल से जुड़े मामलों में कार्रवाई कर सकता है, तो फिर खुलेआम चल रही कथित अवैध शराब बिक्री पर कार्रवाई करने में इतनी देरी क्यों?
शिकायतें हैं तो छापेमारी क्यों नहीं?
मानपुर जनपद पंचायत क्षेत्र के हिरौली, बिजौरी, करौंदी टोला, डोंड़का, भमरहा सहित कई गांवों और मुख्य मार्ग से लगे क्षेत्रों में अवैध शराब बिक्री की शिकायतें सामने आने की बात स्थानीय नागरिकों द्वारा कही जा रही है।
ग्रामीणों का दावा है कि कुछ स्थानों पर शराब की बिक्री निर्धारित समय के बाद भी किए जाने की शिकायतें हैं। यदि ये शिकायतें गलत हैं तो प्रशासन मैदानी जांच कर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं करता? और यदि शिकायतें सही पाई जाती हैं तो अब तक प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
यही सवाल अब ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
कार्रवाई की जिम्मेदारी किसकी?
अवैध शराब की बिक्री पर कार्रवाई की जिम्मेदारी संबंधित विभागों की होती है। ऐसे में स्थानीय नागरिकों का सवाल है कि क्या आबकारी विभाग के पास क्षेत्र की नियमित निगरानी की व्यवस्था नहीं है?
क्या पुलिस और आबकारी विभाग के बीच समन्वय की कमी है?
क्या शिकायतों की सूचना जिम्मेदार अधिकारियों तक नहीं पहुंचती?
या फिर शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही?
इन सवालों का जवाब संबंधित अधिकारियों को देना चाहिए।
छोटे कारोबार से बड़ा नेटवर्क बनने का खतरा
ग्रामीणों का कहना है कि यदि गांवों में छोटी मात्रा से शुरू होने वाली अवैध शराब बिक्री पर समय रहते अंकुश नहीं लगाया गया तो यह आगे चलकर बड़े अवैध नेटवर्क का रूप ले सकती है।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि ग्रामीण और युवा आबादी के बीच शराब की आसान उपलब्धता सामाजिक समस्या को बढ़ा सकती है। नशे की बढ़ती प्रवृत्ति का असर परिवार, स्वास्थ्य, रोजगार और कानून-व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
नशामुक्ति अभियान बनाम जमीन की हकीकत
सरकार नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाती है। युवाओं को नशे से दूर रहने का संदेश दिया जाता है। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि दूसरी ओर यदि गांवों में शराब आसानी से उपलब्ध होती रहे तो केवल जागरूकता अभियान से समस्या का समाधान कैसे होगा?
दीवारों पर नशामुक्ति के संदेश और गांवों में कथित अवैध शराब की बिक्री—इन दोनों के बीच का विरोधाभास आखिर कब खत्म होगा?
प्रशासन से सीधे सवाल
1. मानपुर क्षेत्र में अवैध शराब बिक्री की कितनी शिकायतें प्राप्त हुईं?
2. पिछले कुछ महीनों में आबकारी विभाग ने कितने छापे मारे?
3. कितने प्रकरण दर्ज किए गए और कितने आरोपियों पर कार्रवाई हुई?
4. क्या हिरौली, बिजौरी, करौंदी टोला, दौड़का और भमराहा में जांच कराई गई?
5. यदि जांच नहीं हुई तो क्यों?
6. क्या पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त टीम बनाकर अभियान चलाया जाएगा?
7. क्या शराब की अवैध सप्लाई के स्रोत तक पहुंचने के लिए जांच की जाएगी?
ग्रामीणों की मांग—अब दिखे जमीन पर कार्रवाई
स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि सिर्फ कागजी कार्रवाई या औपचारिक जांच के बजाय अचानक और संयुक्त छापेमारी अभियान चलाया जाए। आबकारी विभाग, पुलिस और राजस्व अमले की संयुक्त टीम बनाकर शिकायत वाले क्षेत्रों की जांच की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए और कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक की जाए।
अब निगाह प्रशासन पर
मानपुर क्षेत्र में अवैध शराब बिक्री के आरोपों ने प्रशासन और आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
अब देखना यह है कि प्रशासन इन शिकायतों को महज ग्रामीणों की नाराजगी मानकर नजरअंदाज करता है या फिर मैदानी स्तर पर जांच कर सच सामने लाता है।
क्योंकि सवाल सिर्फ शराब की अवैध बिक्री का नहीं है—सवाल यह भी है कि यदि कानून का उल्लंघन खुलेआम हो रहा है, तो कानून लागू करने वाले तंत्र की नजर आखिर कहां है?
    user_Ashutosh tripathi
    Ashutosh tripathi
    Court reporter मानपुर, उमरिया, मध्य प्रदेश•
    15 hrs ago
  • साइबर अपराध एवं डिजिटल फ्रॉड की शिकायतों पर स्थानीय स्तर पर मिलेगी त्वरित सहायता आज दिनांक 08 सितंबर 2026 को पुलिस अधीक्षक शहडोल डॉ. संजय कुमार अग्रवाल द्वारा थाना बुढ़ार में साइबर डेस्क का शुभारंभ किया गया। वर्तमान समय में बढ़ते साइबर अपराध एवं डिजिटल फ्रॉड की घटनाओं को दृष्टिगत रखते हुए थाना कोतवाली, सोहागपुर, ब्यौहारी, जयसिंहनगर एवं बुढ़ार में साइबर डेस्क प्रारंभ किए गए हैं। साइबर डेस्क पर साइबर अपराध संबंधी शिकायतों को प्राथमिकता से सुनकर पीड़ित को आवश्यक मार्गदर्शन दिया जाएगा। वित्तीय साइबर धोखाधड़ी के मामलों में हेल्पलाइन नंबर 1930 एवं एनसीआरपी के माध्यम से शिकायत दर्ज कराने में सहायता तथा संबंधित बैंक/वित्तीय संस्थाओं से समन्वय कर राशि होल्ड/फ्रीज कराने हेतु त्वरित कार्यवाही की जाएगी। साइबर डेस्क द्वारा फर्जी बैंक खाते एवं मूल अकाउंट, फर्जी सिम, सोशल मीडिया अपराध एवं फिशिंग, OTP/UPI फ्रॉड एवं अन्य साइबर अपराधों में प्रारंभिक कार्यवाही एवं तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा। गंभीर एवं जटिल मामलों में जिला साइबर सेल, साइबर थाना एवं राज्य साइबर पुलिस मुख्यालय से समन्वय स्थापित किया जाएगा। साइबर डेस्क की स्थापना से पीड़ितों को प्रत्येक मामले में जिला मुख्यालय आने की आवश्यकता नहीं होगी तथा उन्हें अपने निकटतम थाने पर ही साइबर अपराध संबंधी सहायता उपलब्ध हो सकेगी। साथ ही आमजन को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जाएगा। द्वारा शहडोल पुलिस
    1
    साइबर अपराध एवं डिजिटल फ्रॉड की शिकायतों पर स्थानीय स्तर पर मिलेगी त्वरित सहायता
आज दिनांक 08 सितंबर 2026 को पुलिस अधीक्षक शहडोल डॉ. संजय कुमार अग्रवाल द्वारा थाना बुढ़ार में साइबर डेस्क का शुभारंभ किया गया। वर्तमान समय में बढ़ते साइबर अपराध एवं डिजिटल फ्रॉड की घटनाओं को दृष्टिगत रखते हुए थाना कोतवाली, सोहागपुर, ब्यौहारी, जयसिंहनगर एवं बुढ़ार में साइबर डेस्क प्रारंभ किए गए हैं।
साइबर डेस्क पर साइबर अपराध संबंधी शिकायतों को प्राथमिकता से सुनकर पीड़ित को आवश्यक मार्गदर्शन दिया जाएगा। वित्तीय साइबर धोखाधड़ी के मामलों में हेल्पलाइन नंबर 1930 एवं एनसीआरपी के माध्यम से शिकायत दर्ज कराने में सहायता तथा संबंधित बैंक/वित्तीय संस्थाओं से समन्वय कर राशि होल्ड/फ्रीज कराने हेतु त्वरित कार्यवाही की जाएगी।
साइबर डेस्क द्वारा फर्जी बैंक खाते एवं मूल अकाउंट, फर्जी सिम, सोशल मीडिया अपराध एवं फिशिंग, OTP/UPI फ्रॉड एवं अन्य साइबर अपराधों में प्रारंभिक कार्यवाही एवं तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा। गंभीर एवं जटिल मामलों में जिला साइबर सेल, साइबर थाना एवं राज्य साइबर पुलिस मुख्यालय से समन्वय स्थापित किया जाएगा।
साइबर डेस्क की स्थापना से पीड़ितों को प्रत्येक मामले में जिला मुख्यालय आने की आवश्यकता नहीं होगी तथा उन्हें अपने निकटतम थाने पर ही साइबर अपराध संबंधी सहायता उपलब्ध हो सकेगी। साथ ही आमजन को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जाएगा।
द्वारा
शहडोल पुलिस
    user_Angad Tiwari
    Angad Tiwari
    पत्रकार जयसिंहनगर, शहडोल, मध्य प्रदेश•
    9 hrs ago
  • mulchant.basor.ghar.gira Gram Post chitram Moolchand basavar ka Bhari Pani Varsha Karan uska Ghar gir Gaya purana jagah ke
    2
    mulchant.basor.ghar.gira
Gram Post chitram Moolchand basavar ka Bhari Pani Varsha Karan uska Ghar gir Gaya purana jagah ke
    user_Durgesh Ashirwar
    Durgesh Ashirwar
    Singer जयसिंहनगर, शहडोल, मध्य प्रदेश•
    10 hrs ago
  • पीएम आवास योजना सूची में गड़बड़ी ग्रामीणों ने की जांच की मांग, पीएम आवास योजना सूची में कथित घरवाली काआप, गर्मियों में कलेक्टर से की शिकायत और जांच की मांग आज तक लाइव 24 जिला ब्यूरो बाल्मीकि यादव पीएम आवास योजना सूची में गड़बड़ी, ग्रामीणों ने की जांच की मांग , पीएम आवास योजना सूची में कथित गड़बड़ी का आरोप, ग्रामीणों ने कलेक्टर से की जांच की मांग मध्य प्रदेश उमरिया- जिले के ग्राम पंचायत कछरवार , थाना उमरिया के ग्रामीणों ने प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों की सूची में कथित अनिमियता का आरोप लगाते हुए कलेक्टर उमरिया को लिखित शिकायत दी गई है। ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर पात्र हितग्राहियों को योजना के लाभ दिलाने की मांग की है। शिकायत में ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि ग्राम पंचायत में पीएम आवास योजना के सर्वे के दौरान करीब 900 से 920 लोगों के सूची में नाम आये थे। आरोप है की जांच के बाद सरपंच, सचिव एवं रोजगार सहायक के मार्गदर्शन में कई पात्र एवं गरीब हितग्राहीयो के नाम सूची से काट दिए गए हैं। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि नई सूची तैयार करते समय कुछ ऐसे लोगों के नाम जोड़े गए जो कथित तौर पर योजना के लिए अपात्र है।
    3
    पीएम आवास योजना सूची में गड़बड़ी ग्रामीणों ने की जांच की मांग, पीएम आवास योजना सूची में कथित घरवाली काआप, गर्मियों में कलेक्टर से की शिकायत और जांच की मांग
आज तक लाइव 24 जिला ब्यूरो बाल्मीकि यादव 
पीएम आवास योजना सूची में गड़बड़ी, ग्रामीणों ने की जांच की मांग , पीएम आवास योजना सूची में कथित गड़बड़ी का आरोप, ग्रामीणों ने कलेक्टर से की जांच की मांग 
मध्य प्रदेश 
उमरिया- जिले के ग्राम पंचायत कछरवार , थाना उमरिया के ग्रामीणों ने प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों की सूची में कथित अनिमियता का आरोप लगाते हुए कलेक्टर उमरिया को लिखित शिकायत दी गई है। ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर पात्र हितग्राहियों को योजना के लाभ दिलाने की मांग की है। शिकायत में ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि ग्राम पंचायत में पीएम आवास योजना के सर्वे के दौरान करीब 900 से 920 लोगों के सूची में नाम आये थे। आरोप है की जांच के बाद सरपंच, सचिव एवं रोजगार सहायक के मार्गदर्शन में कई पात्र एवं गरीब हितग्राहीयो के नाम सूची से काट दिए गए हैं। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि नई सूची तैयार करते समय कुछ ऐसे लोगों के नाम जोड़े गए जो कथित तौर पर योजना के लिए अपात्र है।
    user_ब्यूरो चीफ/बाल्मीकि यादव
    ब्यूरो चीफ/बाल्मीकि यादव
    बांधवगढ़, उमरिया, मध्य प्रदेश•
    11 hrs ago
  • सीसी रोड और तालाब निर्माण कार्य को अधूरा छोड़कर राशि निकलने का आरोप सरपंच सचिव पर लगा 181 शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई अधूरे निर्माण पर राशि आहरण, शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई उमरिया जिले की बिरसिंहपुर पाली जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत बेली में विकास कार्यों में भारी अनियमितता का मामला सामने आया है। यहाँ सीसी रोड और तालाब निर्माण कार्य को अधूरा छोड़कर पूरी राशि निकालने का आरोप सरपंच-सचिव पर लगा है। ग्रामीणों के अनुसार ग्राम बेली में स्वीकृत सीसी रोड और तालाब निर्माण कार्य मानक के अनुरूप पूरा नहीं किया गया। कार्य अधूरा पड़ा है, जगह-जगह गड्ढे और अधूरी ढलाई स्पष्ट दिखाई देती है, लेकिन कागजों में कार्य को पूर्ण बताकर शासकीय राशि का आहरण कर लिया गया है। इस भ्रष्टाचार को लेकर ग्रामीणों द्वारा 4 दिसंबर 2024 को 181 सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जनपद पंचायत बिरसिंहपुर पाली के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) द्वारा संबंधित सरपंच और सचिव को नोटिस जारी कर जल्द कार्य पूर्ण करने का आदेश दिया गया था। आदेश के बावजूद मौके पर कार्य पूरा नहीं किया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि तकनीकी सहायक (AE) द्वारा बिना स्थल निरीक्षण किए ही शिकायत पोर्टल पर कार्य पूर्ण होने की झूठी रिपोर्ट दर्ज कर दी गई और शिकायत को बंद करने का प्रयास किया गया। जबकि जमीनी हकीकत यह है कि निर्माण आज भी अधूरा पड़ा है। ग्रामीणों ने बताया कि 181 पर दर्ज शिकायत का आज तक संतोषजनक निराकरण नहीं हुआ है। पोर्टल पर कार्य पूर्ण दिखाया जा रहा है, लेकिन गांव में अधूरे निर्माण से लोगों को परेशानी हो रही है। बरसात में सीसी रोड पर पानी भर जाता है और तालाब अधूरा होने से जल संरक्षण का उद्देश्य भी पूरा नहीं हो रहा है। ग्रामीणों ने उच्च अधिकारियों से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए जिला स्तरीय जांच दल गठित किया जाए, मौके का भौतिक सत्यापन कराया जाए और दोषी सरपंच, सचिव व संबंधित एई के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही 181 सीएम हेल्पलाइन शिकायत का गलत निराकरण करने वालों पर भी कार्रवाई की मांग की गई है।
    2
    सीसी रोड और तालाब निर्माण कार्य को अधूरा छोड़कर राशि निकलने का आरोप सरपंच सचिव पर लगा 181 शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
अधूरे निर्माण पर राशि आहरण, शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
उमरिया जिले की बिरसिंहपुर पाली जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत बेली में विकास कार्यों में भारी अनियमितता का मामला सामने आया है। यहाँ सीसी रोड और तालाब निर्माण कार्य को अधूरा छोड़कर पूरी राशि निकालने का आरोप सरपंच-सचिव पर लगा है।
ग्रामीणों के अनुसार ग्राम बेली में स्वीकृत सीसी रोड और तालाब निर्माण कार्य मानक के अनुरूप पूरा नहीं किया गया। कार्य अधूरा पड़ा है, जगह-जगह गड्ढे और अधूरी ढलाई स्पष्ट दिखाई देती है, लेकिन कागजों में कार्य को पूर्ण बताकर शासकीय राशि का आहरण कर लिया गया है।
इस भ्रष्टाचार को लेकर ग्रामीणों द्वारा 4 दिसंबर 2024 को 181 सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जनपद पंचायत बिरसिंहपुर पाली के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) द्वारा संबंधित सरपंच और सचिव को नोटिस जारी कर जल्द कार्य पूर्ण करने का आदेश दिया गया था।
आदेश के बावजूद मौके पर कार्य पूरा नहीं किया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि तकनीकी सहायक (AE) द्वारा बिना स्थल निरीक्षण किए ही शिकायत पोर्टल पर कार्य पूर्ण होने की झूठी रिपोर्ट दर्ज कर दी गई और शिकायत को बंद करने का प्रयास किया गया। जबकि जमीनी हकीकत यह है कि निर्माण आज भी अधूरा पड़ा है।
ग्रामीणों ने बताया कि 181 पर दर्ज शिकायत का आज तक संतोषजनक निराकरण नहीं हुआ है। पोर्टल पर कार्य पूर्ण दिखाया जा रहा है, लेकिन गांव में अधूरे निर्माण से लोगों को परेशानी हो रही है। बरसात में सीसी रोड पर पानी भर जाता है और तालाब अधूरा होने से जल संरक्षण का उद्देश्य भी पूरा नहीं हो रहा है।
ग्रामीणों ने उच्च अधिकारियों से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए जिला स्तरीय जांच दल गठित किया जाए, मौके का भौतिक सत्यापन कराया जाए और दोषी सरपंच, सचिव व संबंधित एई के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही 181 सीएम हेल्पलाइन शिकायत का गलत निराकरण करने वालों पर भी कार्रवाई की मांग की गई है।
    user_Shambhu nath Soni
    Shambhu nath Soni
    पाली, उमरिया, मध्य प्रदेश•
    15 min ago
  • *शहडोल पुलिस की बड़ी सौगात: अब हर थाने में साइबर डेस्क* *शहडोल। पुलिस अधीक्षक ने आम जन के प्रति संवेदनशील भाव का फिर परिचय देते हुए जिले को एक बहुत बड़ी सुविधा दी है।* *अब साइबर क्राइम से जुड़े हर अपराध की शिकायत आपके नजदीकी थाने में ही दर्ज हो सकेगी। जिले के सभी 14 थानों में साइबर डेस्क का शुभारंभ हो गया है।* *यही नहीं, यह सुविधा गांव-गांव तक भी पहुंचाई जाएगी। अब आम नागरिकों को साइबर ठगी, ऑनलाइन फ्रॉड या किसी भी डिजिटल अपराध की शिकायत के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा।* *पुलिस की यह पहल लोगों के लिए आसान, तेज और भरोसेमंद सेवा लेकर आई है।* *शहडोल पुलिस की बड़ी सौगात: अब हर थाने में साइबर डेस्क* *शहडोल। पुलिस अधीक्षक ने आम जन के प्रति संवेदनशील भाव का फिर परिचय देते हुए जिले को एक बहुत बड़ी सुविधा दी है।* *अब साइबर क्राइम से जुड़े हर अपराध की शिकायत आपके नजदीकी थाने में ही दर्ज हो सकेगी। जिले के सभी 14 थानों में साइबर डेस्क का शुभारंभ हो गया है।* *यही नहीं, यह सुविधा गांव-गांव तक भी पहुंचाई जाएगी। अब आम नागरिकों को साइबर ठगी, ऑनलाइन फ्रॉड या किसी भी डिजिटल अपराध की शिकायत के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा।* *पुलिस की यह पहल लोगों के लिए आसान, तेज और भरोसेमंद सेवा लेकर आई है।*
    1
    *शहडोल पुलिस की बड़ी सौगात: अब हर थाने में साइबर डेस्क*

*शहडोल। पुलिस अधीक्षक ने आम जन के प्रति संवेदनशील भाव का फिर परिचय देते हुए जिले को एक बहुत बड़ी सुविधा दी है।*

*अब साइबर क्राइम से जुड़े हर अपराध की शिकायत आपके नजदीकी थाने में ही दर्ज हो सकेगी। जिले के सभी 14 थानों में साइबर डेस्क का शुभारंभ हो गया है।*

*यही नहीं, यह सुविधा गांव-गांव तक भी पहुंचाई जाएगी। अब आम नागरिकों को साइबर ठगी, ऑनलाइन फ्रॉड या किसी भी डिजिटल अपराध की शिकायत के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा।*

*पुलिस की यह पहल लोगों के लिए आसान, तेज और भरोसेमंद सेवा लेकर आई है।*
*शहडोल पुलिस की बड़ी सौगात: अब हर थाने में साइबर डेस्क*
*शहडोल। पुलिस अधीक्षक ने आम जन के प्रति संवेदनशील भाव का फिर परिचय देते हुए जिले को एक बहुत बड़ी सुविधा दी है।*
*अब साइबर क्राइम से जुड़े हर अपराध की शिकायत आपके नजदीकी थाने में ही दर्ज हो सकेगी। जिले के सभी 14 थानों में साइबर डेस्क का शुभारंभ हो गया है।*
*यही नहीं, यह सुविधा गांव-गांव तक भी पहुंचाई जाएगी। अब आम नागरिकों को साइबर ठगी, ऑनलाइन फ्रॉड या किसी भी डिजिटल अपराध की शिकायत के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा।*
*पुलिस की यह पहल लोगों के लिए आसान, तेज और भरोसेमंद सेवा लेकर आई है।*
    user_पंडित कृष्णा मिश्रा पत्रकार
    पंडित कृष्णा मिश्रा पत्रकार
    Insurance Agent सोहागपुर, शहडोल, मध्य प्रदेश•
    5 hrs ago
  • 💥 सोधनिया के शक में महिला को बनाया बंधक,गर्म चिमटे से उंगलियां भी दागी💥 अंधविश्वास की आड़ में इंसानियत को शर्मसार करने वाला सनसनीखेज मामला कोतवाली थाना अंतर्गत ग्राम रोहनिया से सामने आया है।पीड़िता सरोज बाई बैगा ने पुलिस अधीक्षक को दी शिकायत में आरोप लगाया है कि उसे ‘सोधनिया’ यानी कथित डायन होने के शक में जबरन घर में घुसाकर बंधक बना लिया गया।इसके बाद उसके बाल पकड़कर घसीटा गया,बेरहमी से मारपीट की गई और गर्म चिमटे से उंगलियां दागने का आरोप है।इतना ही नहीं,महिला और उसके पति मुकेश बैगा को कथित तौर पर पिकअप वाहन में बैठाकर नयागांव स्थित पंडा के पास ले जाया गया।पीड़िता के मुताबिक 30 अगस्त की शाम करीब 5 बजे वह घर के पास रास्ते में थी।इसी दौरान कौशिल्या बाई उसे काम के बहाने अपने घर के भीतर ले गई।शिकायत के अनुसार वहां निरंजन सिंह,बिहारी सिंह, वीरेन्द्र सिंह,राजेन्द्र सिंह समेत अन्य लोग मौजूद थे।आरोप है कि अंदर पहुंचते ही उसे पकड़ लिया गया और बाल खींचकर जमीन पर घसीटते हुए मारपीट की गई।इसके बाद गर्म चिमटे से उसकी उंगलियां छुआकर दागी गईं और ‘सोधनिया’ होने का आरोप लगाते हुए गाली-गलौज की गई।शिकायत में बताया गया है कि कथित बंधक बनाए जाने के बाद उसके पति मुकेश बैगा को भी वहां बुलाया गया। दोनों को पिकअप में बैठाकर नयागांव के एक पंडा के पास ले जाया गया।पीड़िता का दावा है कि पंडा ने उसे ‘सोधनिया’ नहीं बताया, जिसके बाद दोनों को वापस लाया गया।रास्ते में पति का मोबाइल भी कथित तौर पर छीन लिया गया,ताकि वह किसी से संपर्क न कर सके।महिला का आरोप है कि घटना उजागर करने या पुलिस में शिकायत करने पर उसे और उसके पति को जान से खत्म करने की धमकी दी गई तथा मामला दबाने के लिए पैसों का लालच भी दिया गया।पीड़िता के अनुसार उसने उमरिया थाने में लिखित शिकायत दी,लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। अब उसने एसपी से निष्पक्ष जांच,आरोपियों पर कार्रवाई और सुरक्षा की मांग की है।शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।
    1
    💥 सोधनिया के शक में महिला को बनाया बंधक,गर्म चिमटे से उंगलियां भी दागी💥
अंधविश्वास की आड़ में इंसानियत को शर्मसार करने वाला सनसनीखेज मामला कोतवाली थाना अंतर्गत ग्राम रोहनिया से सामने आया है।पीड़िता सरोज बाई बैगा ने पुलिस अधीक्षक को दी शिकायत में आरोप लगाया है कि उसे ‘सोधनिया’ यानी कथित डायन होने के शक में जबरन घर में घुसाकर बंधक बना लिया गया।इसके बाद उसके बाल पकड़कर घसीटा गया,बेरहमी से मारपीट की गई और गर्म चिमटे से उंगलियां दागने का आरोप है।इतना ही नहीं,महिला और उसके पति मुकेश बैगा को कथित तौर पर पिकअप वाहन में बैठाकर नयागांव स्थित पंडा के पास ले जाया गया।पीड़िता के मुताबिक 30 अगस्त की शाम करीब 5 बजे वह घर के पास रास्ते में थी।इसी दौरान कौशिल्या बाई उसे काम के बहाने अपने घर के भीतर ले गई।शिकायत के अनुसार वहां निरंजन सिंह,बिहारी सिंह, वीरेन्द्र सिंह,राजेन्द्र सिंह समेत अन्य लोग मौजूद थे।आरोप है कि अंदर पहुंचते ही उसे पकड़ लिया गया और बाल खींचकर जमीन पर घसीटते हुए मारपीट की गई।इसके बाद गर्म चिमटे से उसकी उंगलियां छुआकर दागी गईं और ‘सोधनिया’ होने का आरोप लगाते हुए गाली-गलौज की गई।शिकायत में बताया गया है कि कथित बंधक बनाए जाने के बाद उसके पति मुकेश बैगा को भी वहां बुलाया गया। दोनों को पिकअप में बैठाकर नयागांव के एक पंडा के पास ले जाया गया।पीड़िता का दावा है कि पंडा ने उसे ‘सोधनिया’ नहीं बताया, जिसके बाद दोनों को वापस लाया गया।रास्ते में पति का मोबाइल भी कथित तौर पर छीन लिया गया,ताकि वह किसी से संपर्क न कर सके।महिला का आरोप है कि घटना उजागर करने या पुलिस में शिकायत करने पर उसे और उसके पति को जान से खत्म करने की धमकी दी गई तथा मामला दबाने के लिए पैसों का लालच भी दिया गया।पीड़िता के अनुसार उसने उमरिया थाने में लिखित शिकायत दी,लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। अब उसने एसपी से निष्पक्ष जांच,आरोपियों पर कार्रवाई और सुरक्षा की मांग की है।शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।
    user_पत्रकारिता
    पत्रकारिता
    बांधवगढ़, उमरिया, मध्य प्रदेश•
    9 hrs ago
  • सोधनिया के शक में महिला को बनाया बंधक,गर्म चिमटे से उंगलियां भी दागी _अंधविश्वास की आड़ में इंसानियत को शर्मसार करने वाला सनसनीखेज मामला सोधनिया के शक में महिला को बनाया बंधक,गर्म चिमटे से उंगलियां भी दागी _अंधविश्वास की आड़ में इंसानियत को शर्मसार करने वाला सनसनीखेज मामला कोतवाली थाना अंतर्गत ग्राम रोहनिया से सामने आया है।पीड़िता सरोज बाई बैगा ने पुलिस अधीक्षक को दी शिकायत में आरोप लगाया है कि उसे ‘सोधनिया’ यानी कथित डायन होने के शक में जबरन घर में घुसाकर बंधक बना लिया गया।इसके बाद उसके बाल पकड़कर घसीटा गया,बेरहमी से मारपीट की गई और गर्म चिमटे से उंगलियां दागने का आरोप है।इतना ही नहीं,महिला और उसके पति मुकेश बैगा को कथित तौर पर पिकअप वाहन में बैठाकर नयागांव स्थित पंडा के पास ले जाया गया।पीड़िता के मुताबिक 30 अगस्त की शाम करीब 5 बजे वह घर के पास रास्ते में थी।इसी दौरान कौशिल्या बाई उसे काम के बहाने अपने घर के भीतर ले गई।शिकायत के अनुसार वहां निरंजन सिंह,बिहारी सिंह, वीरेन्द्र सिंह,राजेन्द्र सिंह समेत अन्य लोग मौजूद थे।आरोप है कि अंदर पहुंचते ही उसे पकड़ लिया गया और बाल खींचकर जमीन पर घसीटते हुए मारपीट की गई।इसके बाद गर्म चिमटे से उसकी उंगलियां छुआकर दागी गईं और ‘सोधनिया’ होने का आरोप लगाते हुए गाली-गलौज की गई।शिकायत में बताया गया है कि कथित बंधक बनाए जाने के बाद उसके पति मुकेश बैगा को भी वहां बुलाया गया। दोनों को पिकअप में बैठाकर नयागांव के एक पंडा के पास ले जाया गया।पीड़िता का दावा है कि पंडा ने उसे ‘सोधनिया’ नहीं बताया, जिसके बाद दोनों को वापस लाया गया।रास्ते में पति का मोबाइल भी कथित तौर पर छीन लिया गया,ताकि वह किसी से संपर्क न कर सके।महिला का आरोप है कि घटना उजागर करने या पुलिस में शिकायत करने पर उसे और उसके पति को जान से खत्म करने की धमकी दी गई तथा मामला दबाने के लिए पैसों का लालच भी दिया गया।पीड़िता के अनुसार उसने उमरिया थाने में लिखित शिकायत दी,लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। अब उसने एसपी से निष्पक्ष जांच,आरोपियों पर कार्रवाई और सुरक्षा की मांग की है।शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।_
    3
    सोधनिया के शक में महिला को बनाया बंधक,गर्म चिमटे से उंगलियां भी दागी

_अंधविश्वास की आड़ में इंसानियत को शर्मसार करने वाला सनसनीखेज मामला
सोधनिया के शक में महिला को बनाया बंधक,गर्म चिमटे से उंगलियां भी दागी
_अंधविश्वास की आड़ में इंसानियत को शर्मसार करने वाला सनसनीखेज मामला कोतवाली थाना अंतर्गत ग्राम रोहनिया से सामने आया है।पीड़िता सरोज बाई बैगा ने पुलिस अधीक्षक को दी शिकायत में आरोप लगाया है कि उसे ‘सोधनिया’ यानी कथित डायन होने के शक में जबरन घर में घुसाकर बंधक बना लिया गया।इसके बाद उसके बाल पकड़कर घसीटा गया,बेरहमी से मारपीट की गई और गर्म चिमटे से उंगलियां दागने का आरोप है।इतना ही नहीं,महिला और उसके पति मुकेश बैगा को कथित तौर पर पिकअप वाहन में बैठाकर नयागांव स्थित पंडा के पास ले जाया गया।पीड़िता के मुताबिक 30 अगस्त की शाम करीब 5 बजे वह घर के पास रास्ते में थी।इसी दौरान कौशिल्या बाई उसे काम के बहाने अपने घर के भीतर ले गई।शिकायत के अनुसार वहां निरंजन सिंह,बिहारी सिंह, वीरेन्द्र सिंह,राजेन्द्र सिंह समेत अन्य लोग मौजूद थे।आरोप है कि अंदर पहुंचते ही उसे पकड़ लिया गया और बाल खींचकर जमीन पर घसीटते हुए मारपीट की गई।इसके बाद गर्म चिमटे से उसकी उंगलियां छुआकर दागी गईं और ‘सोधनिया’ होने का आरोप लगाते हुए गाली-गलौज की गई।शिकायत में बताया गया है कि कथित बंधक बनाए जाने के बाद उसके पति मुकेश बैगा को भी वहां बुलाया गया। दोनों को पिकअप में बैठाकर नयागांव के एक पंडा के पास ले जाया गया।पीड़िता का दावा है कि पंडा ने उसे ‘सोधनिया’ नहीं बताया, जिसके बाद दोनों को वापस लाया गया।रास्ते में पति का मोबाइल भी कथित तौर पर छीन लिया गया,ताकि वह किसी से संपर्क न कर सके।महिला का आरोप है कि घटना उजागर करने या पुलिस में शिकायत करने पर उसे और उसके पति को जान से खत्म करने की धमकी दी गई तथा मामला दबाने के लिए पैसों का लालच भी दिया गया।पीड़िता के अनुसार उसने उमरिया थाने में लिखित शिकायत दी,लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। अब उसने एसपी से निष्पक्ष जांच,आरोपियों पर कार्रवाई और सुरक्षा की मांग की है।शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।_
    user_पत्रकारिता
    पत्रकारिता
    बांधवगढ़, उमरिया, मध्य प्रदेश•
    9 hrs ago
View latest news on Shuru App
Download_Android
  • Terms & Conditions
  • Career
  • Privacy Policy
  • Blogs
Shuru, a product of Close App Private Limited.