सीसी रोड और तालाब निर्माण कार्य को अधूरा छोड़कर राशि निकलने का आरोप सरपंच सचिव पर लगा 181 शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई अधूरे निर्माण पर राशि आहरण, शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई उमरिया जिले की बिरसिंहपुर पाली जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत बेली में विकास कार्यों में भारी अनियमितता का मामला सामने आया है। यहाँ सीसी रोड और तालाब निर्माण कार्य को अधूरा छोड़कर पूरी राशि निकालने का आरोप सरपंच-सचिव पर लगा है। ग्रामीणों के अनुसार ग्राम बेली में स्वीकृत सीसी रोड और तालाब निर्माण कार्य मानक के अनुरूप पूरा नहीं किया गया। कार्य अधूरा पड़ा है, जगह-जगह गड्ढे और अधूरी ढलाई स्पष्ट दिखाई देती है, लेकिन कागजों में कार्य को पूर्ण बताकर शासकीय राशि का आहरण कर लिया गया है। इस भ्रष्टाचार को लेकर ग्रामीणों द्वारा 4 दिसंबर 2024 को 181 सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जनपद पंचायत बिरसिंहपुर पाली के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) द्वारा संबंधित सरपंच और सचिव को नोटिस जारी कर जल्द कार्य पूर्ण करने का आदेश दिया गया था। आदेश के बावजूद मौके पर कार्य पूरा नहीं किया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि तकनीकी सहायक (AE) द्वारा बिना स्थल निरीक्षण किए ही शिकायत पोर्टल पर कार्य पूर्ण होने की झूठी रिपोर्ट दर्ज कर दी गई और शिकायत को बंद करने का प्रयास किया गया। जबकि जमीनी हकीकत यह है कि निर्माण आज भी अधूरा पड़ा है। ग्रामीणों ने बताया कि 181 पर दर्ज शिकायत का आज तक संतोषजनक निराकरण नहीं हुआ है। पोर्टल पर कार्य पूर्ण दिखाया जा रहा है, लेकिन गांव में अधूरे निर्माण से लोगों को परेशानी हो रही है। बरसात में सीसी रोड पर पानी भर जाता है और तालाब अधूरा होने से जल संरक्षण का उद्देश्य भी पूरा नहीं हो रहा है। ग्रामीणों ने उच्च अधिकारियों से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए जिला स्तरीय जांच दल गठित किया जाए, मौके का भौतिक सत्यापन कराया जाए और दोषी सरपंच, सचिव व संबंधित एई के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही 181 सीएम हेल्पलाइन शिकायत का गलत निराकरण करने वालों पर भी कार्रवाई की मांग की गई है।
सीसी रोड और तालाब निर्माण कार्य को अधूरा छोड़कर राशि निकलने का आरोप सरपंच सचिव पर लगा 181 शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई अधूरे निर्माण पर राशि आहरण, शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई उमरिया जिले की बिरसिंहपुर पाली जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत बेली में विकास कार्यों में भारी अनियमितता का मामला सामने आया है। यहाँ सीसी रोड और तालाब निर्माण कार्य को अधूरा छोड़कर पूरी राशि निकालने का आरोप सरपंच-सचिव पर लगा है। ग्रामीणों के अनुसार ग्राम बेली में स्वीकृत सीसी रोड और तालाब निर्माण कार्य मानक के अनुरूप पूरा नहीं किया गया। कार्य अधूरा पड़ा है, जगह-जगह गड्ढे और अधूरी ढलाई स्पष्ट दिखाई देती है, लेकिन कागजों में कार्य को पूर्ण बताकर शासकीय राशि का आहरण कर लिया गया है। इस भ्रष्टाचार को लेकर ग्रामीणों द्वारा 4 दिसंबर 2024 को 181 सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जनपद पंचायत बिरसिंहपुर पाली के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) द्वारा संबंधित सरपंच और सचिव को नोटिस जारी कर जल्द कार्य पूर्ण करने का आदेश दिया गया था। आदेश के
बावजूद मौके पर कार्य पूरा नहीं किया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि तकनीकी सहायक (AE) द्वारा बिना स्थल निरीक्षण किए ही शिकायत पोर्टल पर कार्य पूर्ण होने की झूठी रिपोर्ट दर्ज कर दी गई और शिकायत को बंद करने का प्रयास किया गया। जबकि जमीनी हकीकत यह है कि निर्माण आज भी अधूरा पड़ा है। ग्रामीणों ने बताया कि 181 पर दर्ज शिकायत का आज तक संतोषजनक निराकरण नहीं हुआ है। पोर्टल पर कार्य पूर्ण दिखाया जा रहा है, लेकिन गांव में अधूरे निर्माण से लोगों को परेशानी हो रही है। बरसात में सीसी रोड पर पानी भर जाता है और तालाब अधूरा होने से जल संरक्षण का उद्देश्य भी पूरा नहीं हो रहा है। ग्रामीणों ने उच्च अधिकारियों से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए जिला स्तरीय जांच दल गठित किया जाए, मौके का भौतिक सत्यापन कराया जाए और दोषी सरपंच, सचिव व संबंधित एई के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही 181 सीएम हेल्पलाइन शिकायत का गलत निराकरण करने वालों पर भी कार्रवाई की मांग की गई है।
- निजी जमीन पर भवन विभाग के कब्जे का आरोप, किसानों ने कलेक्टर से की शिकायत निजी जमीन पर वन विभाग के कब्जे का आरोप! किसानों ने कलेक्टर से की शिकायत मध्य प्रदेश उमरिया के बांधवगढ़ तहसील के ग्राम मझमानीकला में निजी जमीन पर वन विभाग की कथित कार्रवाई को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है। किसानों का आरोप है कि उनकी जमीन पर मुनारे बनाकर कब्जे की कोशिश की जा रही है और खड़ी फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका है। ग्रामीणों ने कलेक्टर उमरिया से शिकायत कर हस्तक्षेप की मांग की है। मांग पूरी नहीं होने पर धरना-प्रदर्शन की चेतावनी दी है।3
- *बचरवार में रात के अंधेरे में पशु तस्करी, जैतपुर पुलिस बेखबर!* *जैतपुर: थाना क्षेत्र के ग्राम बचरवार में खुलेआम पशु तस्करी का बेखौफ खेल चल रहा है। लिप्टिस के पास नरेंद्र के ठिकाने से 'बल्लू' नाम के व्यक्ति द्वारा रात के सन्नाटे में पिकअप वाहनों में मवेशियों को ठूंस-ठूंसकर भेजा जा रहा है।* *👉ग्रामीणों का आरोप है कि बिना किसी रोक-टोक और प्रशासनिक खौफ के यह अवैध धंधा सरेआम जारी है। जैतपुर पुलिस की गश्त पर सवाल उठाते हुए क्षेत्रवासियों ने तस्करों पर तत्काल सख्त कार्रवाई की मांग की है।* *बचरवार में रात के अंधेरे में पशु तस्करी, जैतपुर पुलिस बेखबर!* *जैतपुर: थाना क्षेत्र के ग्राम बचरवार में खुलेआम पशु तस्करी का बेखौफ खेल चल रहा है। लिप्टिस के पास नरेंद्र के ठिकाने से 'बल्लू' नाम के व्यक्ति द्वारा रात के सन्नाटे में पिकअप वाहनों में मवेशियों को ठूंस-ठूंसकर भेजा जा रहा है।* *👉ग्रामीणों का आरोप है कि बिना किसी रोक-टोक और प्रशासनिक खौफ के यह अवैध धंधा सरेआम जारी है। जैतपुर पुलिस की गश्त पर सवाल उठाते हुए क्षेत्रवासियों ने तस्करों पर तत्काल सख्त कार्रवाई की मांग की है।*1
- chitraw me.bahut.dinsur.nikla Gram Panchayat chitram Thana tahsil jaisinagar Madhya Pradesh2
- मानपुर में अवैध शराब का खेल! गांव-गांव में खुलेआम शराब बिक्री के आरोप, फिर भी आबकारी-पुलिस की कार्रवाई पर सवाल? मानपुर में अवैध शराब का खेल! गांव-गांव में खुलेआम शराब बिक्री के आरोप, फिर भी आबकारी-पुलिस की कार्रवाई पर सवाल पेट्रोल-डीजल पर कार्रवाई दिखी, लेकिन शराब के अवैध कारोबार पर चुप्पी क्यों? आशुतोष त्रिपाठी/जनचिंगारी — उमरिया। मानपुर। मानपुर क्षेत्र में कथित अवैध शराब बिक्री को लेकर अब सवाल सिर्फ शराब बेचने वालों पर नहीं, बल्कि कार्रवाई के लिए जिम्मेदार सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी उठने लगे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र के कई गांवों में लंबे समय से अवैध शराब की बिक्री की शिकायतें सामने आ रही हैं, बावजूद इसके जिम्मेदार विभागों की ओर से ऐसी कोई बड़ी और प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही, जिससे अवैध कारोबारियों में कानून का भय पैदा हो। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब प्रशासन पेट्रोल-डीजल से जुड़े मामलों में कार्रवाई कर सकता है, तो फिर खुलेआम चल रही कथित अवैध शराब बिक्री पर कार्रवाई करने में इतनी देरी क्यों? शिकायतें हैं तो छापेमारी क्यों नहीं? मानपुर जनपद पंचायत क्षेत्र के हिरौली, बिजौरी, करौंदी टोला, डोंड़का, भमरहा सहित कई गांवों और मुख्य मार्ग से लगे क्षेत्रों में अवैध शराब बिक्री की शिकायतें सामने आने की बात स्थानीय नागरिकों द्वारा कही जा रही है। ग्रामीणों का दावा है कि कुछ स्थानों पर शराब की बिक्री निर्धारित समय के बाद भी किए जाने की शिकायतें हैं। यदि ये शिकायतें गलत हैं तो प्रशासन मैदानी जांच कर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं करता? और यदि शिकायतें सही पाई जाती हैं तो अब तक प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई? यही सवाल अब ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। कार्रवाई की जिम्मेदारी किसकी? अवैध शराब की बिक्री पर कार्रवाई की जिम्मेदारी संबंधित विभागों की होती है। ऐसे में स्थानीय नागरिकों का सवाल है कि क्या आबकारी विभाग के पास क्षेत्र की नियमित निगरानी की व्यवस्था नहीं है? क्या पुलिस और आबकारी विभाग के बीच समन्वय की कमी है? क्या शिकायतों की सूचना जिम्मेदार अधिकारियों तक नहीं पहुंचती? या फिर शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही? इन सवालों का जवाब संबंधित अधिकारियों को देना चाहिए। छोटे कारोबार से बड़ा नेटवर्क बनने का खतरा ग्रामीणों का कहना है कि यदि गांवों में छोटी मात्रा से शुरू होने वाली अवैध शराब बिक्री पर समय रहते अंकुश नहीं लगाया गया तो यह आगे चलकर बड़े अवैध नेटवर्क का रूप ले सकती है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि ग्रामीण और युवा आबादी के बीच शराब की आसान उपलब्धता सामाजिक समस्या को बढ़ा सकती है। नशे की बढ़ती प्रवृत्ति का असर परिवार, स्वास्थ्य, रोजगार और कानून-व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। नशामुक्ति अभियान बनाम जमीन की हकीकत सरकार नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाती है। युवाओं को नशे से दूर रहने का संदेश दिया जाता है। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि दूसरी ओर यदि गांवों में शराब आसानी से उपलब्ध होती रहे तो केवल जागरूकता अभियान से समस्या का समाधान कैसे होगा? दीवारों पर नशामुक्ति के संदेश और गांवों में कथित अवैध शराब की बिक्री—इन दोनों के बीच का विरोधाभास आखिर कब खत्म होगा? प्रशासन से सीधे सवाल 1. मानपुर क्षेत्र में अवैध शराब बिक्री की कितनी शिकायतें प्राप्त हुईं? 2. पिछले कुछ महीनों में आबकारी विभाग ने कितने छापे मारे? 3. कितने प्रकरण दर्ज किए गए और कितने आरोपियों पर कार्रवाई हुई? 4. क्या हिरौली, बिजौरी, करौंदी टोला, दौड़का और भमराहा में जांच कराई गई? 5. यदि जांच नहीं हुई तो क्यों? 6. क्या पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त टीम बनाकर अभियान चलाया जाएगा? 7. क्या शराब की अवैध सप्लाई के स्रोत तक पहुंचने के लिए जांच की जाएगी? ग्रामीणों की मांग—अब दिखे जमीन पर कार्रवाई स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि सिर्फ कागजी कार्रवाई या औपचारिक जांच के बजाय अचानक और संयुक्त छापेमारी अभियान चलाया जाए। आबकारी विभाग, पुलिस और राजस्व अमले की संयुक्त टीम बनाकर शिकायत वाले क्षेत्रों की जांच की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए और कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक की जाए। अब निगाह प्रशासन पर मानपुर क्षेत्र में अवैध शराब बिक्री के आरोपों ने प्रशासन और आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। अब देखना यह है कि प्रशासन इन शिकायतों को महज ग्रामीणों की नाराजगी मानकर नजरअंदाज करता है या फिर मैदानी स्तर पर जांच कर सच सामने लाता है। क्योंकि सवाल सिर्फ शराब की अवैध बिक्री का नहीं है—सवाल यह भी है कि यदि कानून का उल्लंघन खुलेआम हो रहा है, तो कानून लागू करने वाले तंत्र की नजर आखिर कहां है?3
- शहडोल जिले के 5 थानों में साइबर डेस्क का शुभारंभ, अब स्थानीय थाने में ही मिलेगी साइबर ठगी से मदद शहडोल। बढ़ते साइबर अपराध और डिजिटल फ्रॉड पर लगाम लगाने के लिए शहडोल पुलिस ने बड़ी पहल की है। पुलिस अधीक्षक डॉ. संजय कुमार अग्रवाल द्वारा आज थाना बुढार में साइबर डेस्क का शुभारंभ किया गया। जिले के 05 प्रमुख थानों - कोतवाली, सोहागपुर, ब्यौहारी, जयसिंहनगर एवं बुढार में साइबर डेस्क की स्थापना की गई है। इस सुविधा के शुरू होने से अब साइबर अपराध के पीड़ितों को हर छोटे-बड़े मामले के लिए जिला मुख्यालय नहीं आना पड़ेगा। उन्हें अपने निकटतम थाने में ही त्वरित सहायता मिल सकेगी। साइबर डेस्क पर मिलेंगी ये सुविधाएं: साइबर अपराध संबंधी शिकायतों को प्राथमिकता से सुना जाएगा और पीड़ित को तत्काल मार्गदर्शन दिया जाएगा। वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में हेल्पलाइन नंबर 1930 और NCRP पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने में पुलिस द्वारा सहयोग किया जाएगा। पीड़ित की राशि को बचाने के लिए संबंधित बैंक और वित्तीय संस्थाओं से समन्वय कर राशि को होल्ड/फ्रीज कराने की त्वरित कार्रवाई की जाएगी। फर्जी बैंक खाते, म्यूल अकाउंट, फर्जी सिम, सोशल मीडिया अपराध, फिशिंग, OTP/UPI फ्रॉड जैसे मामलों में प्रारंभिक कार्रवाई और तकनीकी सहायता प्रदान की जाएगी। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि गंभीर एवं जटिल मामलों में साइबर डेस्क द्वारा जिला साइबर सेल, साइबर थाना एवं राज्य साइबर पुलिस मुख्यालय से समन्वय स्थापित किया जाएगा। इसके साथ ही साइबर डेस्क के माध्यम से आमजन को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक भी किया जाएगा।4
- हर अंत के बाद एक नई उम्मीद होती है ठोकरे ही सिखाती है चलना रुकना नहीं बस बढ़ते रहना एक खाता अनेक फायदे1
- चार करोड़ की बाईपास सड़क पर 300 मीटर का संकट विशालकाय गड्ढे में फंसा ट्रक, दो जेसीबी भी नहीं निकाल सकीं; शाम से ठप यातायात, मुख्य बाजार पर बढ़ा दबाव चार करोड़ की बाईपास सड़क पर 300 मीटर का संकट विशालकाय गड्ढे में फंसा ट्रक, दो जेसीबी भी नहीं निकाल सकीं; शाम से ठप यातायात, मुख्य बाजार पर बढ़ा दबाव मानपुर। नगर परिषद मानपुर में नवनिर्मित बाईपास सड़क का अधूरा 300 मीटर हिस्सा अब लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। सोमवार शाम विशालकाय गड्ढे में एक ट्रक फंस गया। उसे निकालने के लिए दो जेसीबी मशीनें लगाई गईं, लेकिन सुबह तक ट्रक बाहर नहीं निकल सका। शाम करीब 7 बजे से बाईपास मार्ग पर यातायात बाधित है और बड़े वाहनों को मुख्य बाजार से होकर गुजरना पड़ रहा है, जिससे बाजार में यातायात का दबाव भी बढ़ गया है। *अब नाली क्रॉसिंग के नाम पर सड़क तोड़ने का मामला* मामले को और गंभीर बनाने वाली बात यह है कि मानपुर-व्यौहारी रोड से जहां बाईपास सड़क शुरू होती है, उसी स्थान पर नाली क्रॉस करने के लिए नगर परिषद के ठेकेदार द्वारा सड़क का हिस्सा तोड़े जाने की शिकायत सामने आई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि करीब चार करोड़ रुपये की लागत से बनी नवनिर्मित सड़क को कथित तौर पर बिना अनुमति तोड़ा गया, लेकिन कार्य पूरा होने के बाद सड़क की मरम्मत नहीं कराई जा रही है। इस संबंध में लोक निर्माण विभाग को शिकायत भी की गई है, लेकिन शिकायत के बावजूद अब तक न तो क्षतिग्रस्त सड़क को दुरुस्त कराया गया और न ही संबंधित ठेकेदार के विरुद्ध किसी कार्रवाई की जानकारी सामने आई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि सरकारी राशि से बनी सड़क को क्षतिग्रस्त करने के मामले में जिम्मेदारी तय करने की कार्रवाई कब होगी? *एक तरफ 300 मीटर अधूरा, दूसरी तरफ बनी सड़क भी क्षतिग्रस्त* बाईपास का करीब 300 मीटर हिस्सा भूमि विवाद एवं न्यायालयीन प्रकरण के कारण अधूरा बताया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर सड़क के प्रारंभिक हिस्से में नाली क्रॉसिंग के लिए सड़क तोड़े जाने की शिकायत ने निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सड़क को अंधे मोड़ से मुक्त कर सीधा करने के उद्देश्य से ठेकेदार द्वारा सड़क की चौड़ाई बढ़ाने के लिए बेस तैयार किया गया था। लेकिन विवादित हिस्से में निर्माण रुकने के बाद यहां बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं। बारिश में स्थिति और खराब हो जाती है तथा वाहन चालकों के साथ बच्चों और बुजुर्गों को भी जोखिम उठाकर गुजरना पड़ता है। *हाईकोर्ट प्रकरण के बीच प्रशासनिक भूमिका पर सवाल* स्थानीय लोगों के अनुसार सड़क को सीधा करने और अंधे मोड़ को समाप्त करने को लेकर भूमि संबंधी विवाद का मामला माननीय उच्च न्यायालय तक पहुंचा था। न्यायालयीन प्रक्रिया के कारण निर्माण प्रभावित होने की बात सामने आई है। ऐसे में लोगों का कहना है कि स्थायी निर्माण में यदि कानूनी बाधा है तो प्रशासन को वैकल्पिक व्यवस्था कर मार्ग को सुरक्षित रखना चाहिए। *रहवासियों की मांग—पहले रास्ता सुरक्षित करें, फिर विवाद का समाधान* स्थानीय रहवासियों ने जिला प्रशासन, लोक निर्माण विभाग और नगर परिषद से मांग की है कि बाईपास मार्ग के विशालकाय गड्ढों को तत्काल गिट्टी-मुरम से भरकर आवागमन योग्य बनाया जाए। साथ ही नाली क्रॉसिंग के लिए जहां सड़क तोड़ी गई है, वहां भी सड़क को तत्काल दुरुस्त कराया जाए। लोगों का सीधा सवाल है—चार करोड़ रुपये की लागत से बनी सड़क की निगरानी कौन कर रहा है? यदि सड़क तोड़ने की अनुमति नहीं थी तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी और कार्रवाई कब होगी? और यदि 300 मीटर हिस्से में न्यायालयीन विवाद के कारण निर्माण संभव नहीं है, तो तब तक सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था कौन करेगा? अब देखना यह है कि प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार करता है या बाईपास की इस बदहाल स्थिति पर तत्काल संज्ञान लेकर रास्ता दुरुस्त कराता है।1
- धुरवार टोल प्लाजा शहडोल-शहडोल मे ट्रक ड्राइवर क़ो गाड़ी मे घुस कर टोल प्लाजा के कर्मचारियों ने मार मार कर अधमरा कर दिया। बात केवल इतनी थी की गाड़ी का टैग नहीं लिया टोल प्लाजा के कर्मचारियों का पुलिस वेरिफिकेशन होना चाहिए और टोल के कर्मचारियों कों नेम प्लेट के साथ ड्रेस मे होना चाहिए।* धुरवार टोल प्लाजा शहडोल-शहडोल मे ट्रक ड्राइवर क़ो गाड़ी मे घुस कर टोल प्लाजा के कर्मचारियों ने मार मार कर अधमरा कर दिया। बात केवल इतनी थी की गाड़ी का टैग नहीं लिया टोल प्लाजा के कर्मचारियों का पुलिस वेरिफिकेशन होना चाहिए और टोल के कर्मचारियों कों नेम प्लेट के साथ ड्रेस मे होना चाहिए।*1
- तालाबों के जीर्णोद्धार एवं सौंदर्यीकरण कार्यों में जल प्रवाह एवं आवक-निकासी का रखें विशेष ध्यान - कलेक्टर निर्माण कार्यों में गुणवत्ता एवं निर्धारित मानकों का रखें विशेष ध्यान - कलेक्टर अनूपपुर - कलेक्ट्रेट स्थित नर्मदा सभागार में कलेक्टर श्री रत्नाकर झा ने जिले के समस्त नगरीय निकायों में संचालित विभिन्न विकास कार्यों एवं जनकल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा बैठक ली। बैठक में कलेक्टर ने निकायवार कार्यों की प्रगति की जानकारी लेते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माणाधीन कार्यों में तेजी लाकर उन्हें निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण कराया जाए। उन्होंने कहा कि नागरिक सुविधाओं से जुड़े कार्यों में गुणवत्ता, समय-सीमा एवं निर्धारित मानकों का विशेष ध्यान रखते हुए कार्यों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने नगरीय क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाले तालाबों के सौंदर्यीकरण एवं जीर्णोद्धार कार्य इस प्रकार कराने के निर्देश दिए कि तालाब में पानी की आवक एवं निकासी की व्यवस्था किसी भी तरह प्रभावित न हो। उन्होंने कहा कि तालाब में प्राकृतिक रूप से आने वाले पानी के प्रवाह के साथ-साथ अन्य माध्यमों से तालाब में पानी पहुंचाने के लिए निर्धारित इंटक मार्ग भी सुचारू एवं सुरक्षित रहें। सौंदर्यीकरण एवं जीर्णोद्धार कार्यों से तालाब के जल प्रवाह में किसी प्रकार का अवरोध उत्पन्न नहीं होना चाहिए। तालाब की जलधारण क्षमता एवं उपयोगिता को बनाए रखते हुए जल की आवक एवं निकासी की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के बाद ही सौंदर्यीकरण, जीर्णोद्धार एवं आसपास स्वच्छता से संबंधित विकास कार्य कराए जाएं। बैठक में अमरकंटक के धार्मिक एवं पर्यावरणीय महत्व को ध्यान में रखते हुए कलेक्टर ने वहां संचालित एमआरएफ (मटीरियल रिकवरी फैसिलिटी) सेंटर को किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर स्थानांतरित करने हेतु मुख्य नगर पालिका अधिकारी अमरकंटक को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही निर्माणाधीन सीसी सड़कों के कार्यों में प्रॉपर लेवलिंग का विशेष ध्यान रखने और निर्धारित मानकों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण निर्माण सुनिश्चित करने को कहा। खेल प्रतिभाओं के प्रोत्साहन के लिए निर्माणाधीन स्टेडियम की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने इसे जिले के लिए एक महत्वपूर्ण खेल परिसर बताया। उन्होंने निर्देश दिए कि स्टेडियम का निर्माण उच्च गुणवत्ता के साथ किया जाए तथा वर्षा जल के जमाव को रोकने के लिए मैदान में व्यवस्थित ड्रेनेज सिस्टम विकसित किया जाए, जिससे जलभराव की स्थिति निर्मित न हो और खिलाड़ियों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। कलेक्टर ने जिले में स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप सुविधाओं के विस्तार एवं नागरिक सुविधाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़े एवं सुव्यवस्थित मार्केटिंग परिसर के विकास के लिए आवश्यक प्रयास करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी नगरीय निकायों के अधिकारियों से कहा कि जिले के समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप कार्ययोजना तैयार करें। साथ ही नियमित मैदानी निरीक्षण करते हुए विकास एवं निर्माण कार्यों की प्रगति, गुणवत्ता एवं उपयोगिता सुनिश्चित करें। बैठक में अपर कलेक्टर बालवीर रमन सहित विभिन्न नगरीय निकायों के अधिकारी एवं अभियंता उपस्थित रहे।1