logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…
  • Latest News
  • News
  • Politics
  • Elections
  • Viral
  • Astrology
  • Horoscope in Hindi
  • Horoscope in English
  • Latest Political News
logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…

सन 1995 से 2013 के दौरान कांग्रेसी सरकार ने देश के परमाणु वैज्ञानिक को मरवा दिया है। उस दौर के शासनकाल पर सीधा हमला बोलते हुए कांग्रेसी सरकार को ही देश के परमाणु वैज्ञानिक की हत्या के लिए पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया गया है।

6 hrs ago
user_Ravi Kashyap
Ravi Kashyap
Video Creator साकेत, दक्षिण दिल्ली, दिल्ली•
6 hrs ago

सन 1995 से 2013 के दौरान कांग्रेसी सरकार ने देश के परमाणु वैज्ञानिक को मरवा दिया है। उस दौर के शासनकाल पर सीधा हमला बोलते हुए कांग्रेसी सरकार को ही देश के परमाणु वैज्ञानिक की हत्या के लिए पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया गया है।

More news from South East Delhi and nearby areas
  • दक्षिण पूर्वी दिल्ली के जैतपुर क्षेत्र में 'बंटी-बबली' के रूप में चर्चित एक जोड़ी पर एक ऑफिस पर अवैध कब्जा करने का आरोप लगा है।
    1
    दक्षिण पूर्वी दिल्ली के जैतपुर क्षेत्र में 'बंटी-बबली' के रूप में चर्चित एक जोड़ी पर एक ऑफिस पर अवैध कब्जा करने का आरोप लगा है।
    user_सनसनी ऑफ़ इंडिया SANSANI
    सनसनी ऑफ़ इंडिया SANSANI
    Media house Sarita Vihar, South East Delhi•
    3 hrs ago
  • पत्रकार पंडित विशाल शर्मा 'लव' द्वारा किए गए कूटनीतिक और आध्यात्मिक विश्लेषण के अनुसार, 2014 से 2026 का यह महा-दशक भारत और संपूर्ण विश्व के लिए एक बहुत बड़े काल-चक्र का मोड़ साबित हो रहा है। वेदों और पुराणों के विधान का हवाला देते हुए आलेख में कहा गया है कि अकारण ज्ञानियों, धर्म-रक्षकों और निर्दोषों को प्रताड़ित करने वाली सत्ता का विनाश तय है। अथर्ववेद और गरुड़ पुराण के संदर्भों के साथ-साथ इतिहास के उदाहरणों जैसे राजा वेन, नहुष, सहस्रबाहु और राजा परीक्षित के पतन का जिक्र किया गया है। इसके अलावा, 7 नवंबर 1966 को संसद के सामने गो-हत्या विरोधी संत आंदोलन पर हुए बल प्रयोग के परिणाम स्वरूप तत्कालीन सत्ताधीश परिवार को संजय गांधी की विमान दुर्घटना, इंदिरा गांधी की हत्या और राजीव गांधी के अंत जैसी त्रासदियों का सामना करना पड़ा। इतिहास की पड़ताल करते हुए आलेख में बताया गया है कि 80 के दशक में हुई कूटनीतिक चूकों, तुष्टिकरण, मुफ्त की योजनाओं और जातिगत विभाजन की राजनीति ने पंजाब में कट्टरपंथ और वैचारिक गुलामी को बढ़ावा दिया। वहीं 2014 से 2026 के वैश्विक दौर में 2014 का क्रीमिया विलय, 2022 का रूस-यूक्रेन युद्ध, अमेरिका-चीन टैक-वॉर, लाल सागर में इसराइल-हमास संघर्ष, कोविड-19 महामारी और तुर्की-सीरिया भूकंप जैसे कई प्राकृतिक व सैन्य संकट देखने को मिले हैं। इस महा-संकट के बीच भारत ने रूस से तेल खरीदकर अपने रणनीतिक हितों की रक्षा की, QUAD व IMEC से जुड़ाव बढ़ाया, 'वैक्सीन मैत्री' के माध्यम से 100 से अधिक देशों की मदद की और G20 के जरिए 'ग्लोबल साउथ' की आवाज बनकर उभरा। दूसरी ओर, वर्तमान व्यवस्था में आंतरिक स्तम्भों पर प्रहार का मुद्दा उठाते हुए आलेख में सच दिखाने वाले स्वतंत्र पत्रकारों के उत्पीड़न, OROP व पेंशन मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे पूर्व सैनिकों, किसानों और रोजगार की मांग कर रहे युवाओं पर लाठियां व जल-तोपें चलाने को एक गंभीर चक्रव्यूह बताया गया है। जंतर-मंतर पर लाठीचार्ज और लाल किले पर निहंग परंपरा द्वारा ध्वज लहराने की घटना को नए युग और 'कलगीधर' की शक्तियों के उदय का आध्यात्मिक संकेत माना गया है। विश्लेषण का निष्कर्ष है कि बाह्य शक्तियां भारत को आंतरिक रूप से बांटना चाहती हैं, लेकिन युवा, किसान, फौजी, मजदूर और पत्रकारों की एकजुटता से अधर्म, छल और लाठी-तंत्र पर टिकी राजनीति का अंत निकट है।
    1
    पत्रकार पंडित विशाल शर्मा 'लव' द्वारा किए गए कूटनीतिक और आध्यात्मिक विश्लेषण के अनुसार, 2014 से 2026 का यह महा-दशक भारत और संपूर्ण विश्व के लिए एक बहुत बड़े काल-चक्र का मोड़ साबित हो रहा है। वेदों और पुराणों के विधान का हवाला देते हुए आलेख में कहा गया है कि अकारण ज्ञानियों, धर्म-रक्षकों और निर्दोषों को प्रताड़ित करने वाली सत्ता का विनाश तय है। अथर्ववेद और गरुड़ पुराण के संदर्भों के साथ-साथ इतिहास के उदाहरणों जैसे राजा वेन, नहुष, सहस्रबाहु और राजा परीक्षित के पतन का जिक्र किया गया है। इसके अलावा, 7 नवंबर 1966 को संसद के सामने गो-हत्या विरोधी संत आंदोलन पर हुए बल प्रयोग के परिणाम स्वरूप तत्कालीन सत्ताधीश परिवार को संजय गांधी की विमान दुर्घटना, इंदिरा गांधी की हत्या और राजीव गांधी के अंत जैसी त्रासदियों का सामना करना पड़ा।

इतिहास की पड़ताल करते हुए आलेख में बताया गया है कि 80 के दशक में हुई कूटनीतिक चूकों, तुष्टिकरण, मुफ्त की योजनाओं और जातिगत विभाजन की राजनीति ने पंजाब में कट्टरपंथ और वैचारिक गुलामी को बढ़ावा दिया। वहीं 2014 से 2026 के वैश्विक दौर में 2014 का क्रीमिया विलय, 2022 का रूस-यूक्रेन युद्ध, अमेरिका-चीन टैक-वॉर, लाल सागर में इसराइल-हमास संघर्ष, कोविड-19 महामारी और तुर्की-सीरिया भूकंप जैसे कई प्राकृतिक व सैन्य संकट देखने को मिले हैं। इस महा-संकट के बीच भारत ने रूस से तेल खरीदकर अपने रणनीतिक हितों की रक्षा की, QUAD व IMEC से जुड़ाव बढ़ाया, 'वैक्सीन मैत्री' के माध्यम से 100 से अधिक देशों की मदद की और G20 के जरिए 'ग्लोबल साउथ' की आवाज बनकर उभरा।

दूसरी ओर, वर्तमान व्यवस्था में आंतरिक स्तम्भों पर प्रहार का मुद्दा उठाते हुए आलेख में सच दिखाने वाले स्वतंत्र पत्रकारों के उत्पीड़न, OROP व पेंशन मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे पूर्व सैनिकों, किसानों और रोजगार की मांग कर रहे युवाओं पर लाठियां व जल-तोपें चलाने को एक गंभीर चक्रव्यूह बताया गया है। जंतर-मंतर पर लाठीचार्ज और लाल किले पर निहंग परंपरा द्वारा ध्वज लहराने की घटना को नए युग और 'कलगीधर' की शक्तियों के उदय का आध्यात्मिक संकेत माना गया है। विश्लेषण का निष्कर्ष है कि बाह्य शक्तियां भारत को आंतरिक रूप से बांटना चाहती हैं, लेकिन युवा, किसान, फौजी, मजदूर और पत्रकारों की एकजुटता से अधर्म, छल और लाठी-तंत्र पर टिकी राजनीति का अंत निकट है।
    user_Vishal Sharma journalist
    Vishal Sharma journalist
    Media company Chanakya Puri, New Delhi•
    4 hrs ago
  • लगातार 34 दिन के अनशन के बाद सोनम वांगचुक ने आज अपना अनशन समाप्त कर दिया है। कैबिनेट मंत्री जगत प्रकाश नड्डा और कई अन्य राजनेताओं के शामिल एक सरकारी प्रतिनिधिमंडल ने उनसे मुलाकात की। मुलाकात के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने उन्हें आश्वासन दिया और उनकी कुछ मांगों पर अपनी सहमति भी जताई, जिसके बाद सोनम वांगचुक ने अपना अनशन खत्म करने का फैसला किया। अनशन समाप्त करते ही उन्होंने आंदोलनकारियों से शांतिपूर्वक रहने और किसी भी प्रकार की हिंसा से बचने की अपील की। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारियों के बीच बहुत से अराजक तत्व भी शामिल हो गए हैं, इसलिए सभी को संयम बरतने की जरूरत है। इसके साथ ही उन्होंने विपक्ष से भी आग्रह किया कि वे इसे राजनीतिक अखाड़ा न बनाएं और इस मुद्दे पर संसद में बात करें।
    1
    लगातार 34 दिन के अनशन के बाद सोनम वांगचुक ने आज अपना अनशन समाप्त कर दिया है। कैबिनेट मंत्री जगत प्रकाश नड्डा और कई अन्य राजनेताओं के शामिल एक सरकारी प्रतिनिधिमंडल ने उनसे मुलाकात की। मुलाकात के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने उन्हें आश्वासन दिया और उनकी कुछ मांगों पर अपनी सहमति भी जताई, जिसके बाद सोनम वांगचुक ने अपना अनशन खत्म करने का फैसला किया।

अनशन समाप्त करते ही उन्होंने आंदोलनकारियों से शांतिपूर्वक रहने और किसी भी प्रकार की हिंसा से बचने की अपील की। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारियों के बीच बहुत से अराजक तत्व भी शामिल हो गए हैं, इसलिए सभी को संयम बरतने की जरूरत है। इसके साथ ही उन्होंने विपक्ष से भी आग्रह किया कि वे इसे राजनीतिक अखाड़ा न बनाएं और इस मुद्दे पर संसद में बात करें।
    user_Akash Vesnav
    Akash Vesnav
    Local News Reporter सरिता विहार, दक्षिण पूर्व दिल्ली, दिल्ली•
    6 hrs ago
  • अनशन के नाम पर पूरी तरह से झूठा ढोंग किया गया है। असलियत यह है कि अनशन पर बैठा यह ढोंगी बाबा आराम से लेटकर सब कुछ खा-पी रहा है।
    1
    अनशन के नाम पर पूरी तरह से झूठा ढोंग किया गया है। असलियत यह है कि अनशन पर बैठा यह ढोंगी बाबा आराम से लेटकर सब कुछ खा-पी रहा है।
    user_Ravi Kashyap
    Ravi Kashyap
    Video Creator साकेत, दक्षिण दिल्ली, दिल्ली•
    6 hrs ago
  • आंदोलन के दिन एक छात्रा के साथ ऐसा क्या हुआ, जिसे लेकर वह बेहद आक्रोश में नज़र आई है। प्रदर्शन के दौरान छात्रा का यह बेहद गुस्से और आक्रोश से भरा रूप देखने को मिला है।
    1
    आंदोलन के दिन एक छात्रा के साथ ऐसा क्या हुआ, जिसे लेकर वह बेहद आक्रोश में नज़र आई है। प्रदर्शन के दौरान छात्रा का यह बेहद गुस्से और आक्रोश से भरा रूप देखने को मिला है।
    user_Raaz
    Raaz
    Delhi Cantonment, New Delhi•
    7 hrs ago
  • कांठ के बेगमपुर में लंबे समय से मुख्य रास्ते का निर्माण न होने के कारण ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि ग्राम प्रधान काशीराम से कई बार शिकायत करने और मांग उठाने के बावजूद आज तक रास्ते का निर्माण नहीं कराया गया। जनप्रतिनिधियों की इस उपेक्षा की वजह से गांव के लोगों को हर दिन आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बरसात के मौसम में स्थिति बेहद गंभीर हो जाती है, क्योंकि मुख्य रास्ते पर कीचड़, गंदगी और बारिश का पानी जमा हो जाता है। जलभराव के चलते लोगों के घरों की दीवारों पर सांप और बिच्छू जैसे जहरीले कीड़े दिखाई देने लगते हैं। गांव के कई परिवारों को अपने घरों तक पहुंचने के लिए कीचड़ से होकर गुजरना पड़ता है। रास्ते में फिसलकर कई लोग गिर चुके हैं, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका लगातार बनी रहती है। इस बदहाली के कारण स्कूल जाने वाले बच्चों, काम पर जाने वाले लोगों और बुजुर्गों व मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ रही है। आपातकालीन स्थिति में एम्बुलेंस या अन्य वाहन भी गांव के अंदर तक नहीं पहुंच पाते हैं। ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा है कि जनप्रतिनिधियों का मुख्य कर्तव्य गांव की बुनियादी समस्याओं का समाधान करना है, लेकिन इस मामले में उनकी शिकायतों को पूरी तरह से नजरअंदाज किया जा रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले का तुरंत संज्ञान लेकर रास्ते का निर्माण कार्य शुरू कराया जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे संबंधित अधिकारियों के समक्ष उग्र प्रदर्शन करने और अपनी आवाज बुलंद करने के लिए मजबूर होंगे।
    2
    कांठ के बेगमपुर में लंबे समय से मुख्य रास्ते का निर्माण न होने के कारण ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि ग्राम प्रधान काशीराम से कई बार शिकायत करने और मांग उठाने के बावजूद आज तक रास्ते का निर्माण नहीं कराया गया। जनप्रतिनिधियों की इस उपेक्षा की वजह से गांव के लोगों को हर दिन आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

बरसात के मौसम में स्थिति बेहद गंभीर हो जाती है, क्योंकि मुख्य रास्ते पर कीचड़, गंदगी और बारिश का पानी जमा हो जाता है। जलभराव के चलते लोगों के घरों की दीवारों पर सांप और बिच्छू जैसे जहरीले कीड़े दिखाई देने लगते हैं। गांव के कई परिवारों को अपने घरों तक पहुंचने के लिए कीचड़ से होकर गुजरना पड़ता है। रास्ते में फिसलकर कई लोग गिर चुके हैं, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका लगातार बनी रहती है। इस बदहाली के कारण स्कूल जाने वाले बच्चों, काम पर जाने वाले लोगों और बुजुर्गों व मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ रही है। आपातकालीन स्थिति में एम्बुलेंस या अन्य वाहन भी गांव के अंदर तक नहीं पहुंच पाते हैं।

ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा है कि जनप्रतिनिधियों का मुख्य कर्तव्य गांव की बुनियादी समस्याओं का समाधान करना है, लेकिन इस मामले में उनकी शिकायतों को पूरी तरह से नजरअंदाज किया जा रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले का तुरंत संज्ञान लेकर रास्ते का निर्माण कार्य शुरू कराया जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे संबंधित अधिकारियों के समक्ष उग्र प्रदर्शन करने और अपनी आवाज बुलंद करने के लिए मजबूर होंगे।
    user_BEBAAK NEWS ONLINE
    BEBAAK NEWS ONLINE
    Delhi Cantonment, New Delhi•
    11 hrs ago
  • लखीमपुर खीरी स्थित DM कार्यालय में राम सिंह नाम का एक शख्स अचानक पहुँचकर अधिकारियों और भ्रष्टाचार के खिलाफ बोलने लगा। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, यह पूरा मामला जमीन विवाद से जुड़ा हुआ है। मामले में सिंगाही थाना प्रभारी दिलीप चौबे ने बताया कि राम सिंह प्रशासन पर दबाव बनाने के इरादे से कुल्हाड़ी लेकर DM कार्यालय पहुँचा था।
    1
    लखीमपुर खीरी स्थित DM कार्यालय में राम सिंह नाम का एक शख्स अचानक पहुँचकर अधिकारियों और भ्रष्टाचार के खिलाफ बोलने लगा। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, यह पूरा मामला जमीन विवाद से जुड़ा हुआ है।

मामले में सिंगाही थाना प्रभारी दिलीप चौबे ने बताया कि राम सिंह प्रशासन पर दबाव बनाने के इरादे से कुल्हाड़ी लेकर DM कार्यालय पहुँचा था।
    user_AIB Hindi
    AIB Hindi
    Media house चाणक्यपुरी, नई दिल्ली, दिल्ली•
    5 hrs ago
View latest news on Shuru App
Download_Android
  • Terms & Conditions
  • Career
  • Privacy Policy
  • Blogs
Shuru, a product of Close App Private Limited.