राजस्थान के कोटपूतली-बहरोड़ जिले के अजीतपुरा-कुजोता गांव में नेशनल लाइम स्टोन कंपनी से जुड़े एक खनन विवाद का 296 दिन बाद शांतिपूर्ण निपटारा हो गया है, जिसके बाद ग्रामीणों ने अपना धरना स्थगित कर दिया। इस विवाद के दौरान पहले फायरिंग और ग्रामीणों व बदमाशों के बीच करीब पंद्रह मिनट तक लाठी-भाटा जंग भी हुई थी। यह मामला अजीतपुरा-कुजोता गांव में नेशनल लाइम स्टोन कंपनी की खनन गतिविधियों का ग्रामीणों द्वारा विरोध किए जाने से संबंधित था। रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीणों को दबाने के लिए प्रशासन ने कोई कमी नहीं छोड़ी थी। लाठी-भाटा जंग के बाद पुलिस को 7 किलोमीटर दूर सरूंड थाने से मौके पर पहुंचने में आधा घंटे से अधिक का समय लगा, जिससे पुलिस की बीट व्यवस्था पर सवाल उठे। इस घटना के बाद 5 आरोपियों को हिरासत में लिया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए आरएलपी प्रमुख हनुमान बेनीवाल ने एसएमएस अस्पताल जाकर घायलों से मुलाकात की थी। विरोध बढ़ता देखकर प्रशासन हरकत में आया और अंततः, एसडीएम योगेशकुमार देवल, तहसीलदार रामधन गुर्जर और डिप्टी राजेंद्र कुमार बुरड़क की मौजूदगी में रात करीब नौ बजे ग्रामीणों से लिखित समझौता हुआ। इस समझौते के बाद 296 दिन से चला आ रहा ग्रामीणों का धरना समाप्त हो गया, और उन्हें जूस पिलाकर धरना स्थगित किया गया।
राजस्थान के कोटपूतली-बहरोड़ जिले के अजीतपुरा-कुजोता गांव में नेशनल लाइम स्टोन कंपनी से जुड़े एक खनन विवाद का 296 दिन बाद शांतिपूर्ण निपटारा हो गया है, जिसके बाद ग्रामीणों ने अपना धरना स्थगित कर दिया। इस विवाद के दौरान पहले फायरिंग और ग्रामीणों व बदमाशों के बीच करीब पंद्रह मिनट तक लाठी-भाटा जंग भी हुई थी। यह मामला अजीतपुरा-कुजोता गांव में नेशनल लाइम स्टोन कंपनी की खनन गतिविधियों का ग्रामीणों द्वारा विरोध किए जाने से संबंधित था। रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीणों को दबाने के लिए प्रशासन ने कोई कमी नहीं छोड़ी थी। लाठी-भाटा जंग के बाद पुलिस को 7 किलोमीटर दूर सरूंड थाने से मौके पर पहुंचने में आधा घंटे से अधिक का समय लगा, जिससे पुलिस की बीट व्यवस्था पर सवाल उठे। इस घटना के बाद 5 आरोपियों को हिरासत में लिया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए आरएलपी प्रमुख हनुमान बेनीवाल ने एसएमएस अस्पताल जाकर घायलों से मुलाकात की थी। विरोध बढ़ता देखकर प्रशासन हरकत में आया और अंततः, एसडीएम योगेशकुमार देवल, तहसीलदार रामधन गुर्जर और डिप्टी राजेंद्र कुमार बुरड़क की मौजूदगी में रात करीब नौ बजे ग्रामीणों से लिखित समझौता हुआ। इस समझौते के बाद 296 दिन से चला आ रहा ग्रामीणों का धरना समाप्त हो गया, और उन्हें जूस पिलाकर धरना स्थगित किया गया।
- राजस्थान के कोटपूतली स्थित अजीतपुरा-कुजोता में आबादी क्षेत्र के पास लाइम स्टोन खान में ब्लास्टिंग और खनन के विरोध में 295 दिनों से चल रहा धरना मंगलवार रात को समाप्त हो गया। यह धरना खनन माफियाओं के खिलाफ चल रहा था। ग्रामीणों और प्रशासन के अधिकारियों के बीच देर तक चली समझौता वार्ता के बाद कई मांगों पर सहमति बनी, जिसके बाद यह हर्ष और उल्लास का पल आया जब सरपंच, प्रशासन और ग्रामवासियों ने एक-दूसरे को लड्डू खिलाकर बधाई दी, जो ग्रामीणों और जनप्रतिनिधि के बीच आपसी विश्वास और एकजुटता का एक सुंदर उदाहरण है। समझौते में महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमति बनी, जिनमें खान क्षेत्र में आबादी के निकट एक नंबर ब्लॉक में पूरी तरह से खनन बंद करना शामिल है। इसके अतिरिक्त, ग्रामीणों के खिलाफ दर्ज मुकदमों पर मेरिट के आधार पर कार्रवाई करने और सोमवार को ग्रामीणों की ओर से दर्ज कराए गए मामले में दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई करने पर भी सहमति बनी। खान पर कार्य करने वाले श्रमिकों का पुलिस सत्यापन करना और आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों को खान पर कार्य करने से रोकना भी समझौते का हिस्सा है। बी ब्लॉक में 300 मीटर की दूरी तक कोई खनन कार्य नहीं करने पर भी सहमति बनी है। इस दौरान कोटपूतली पुलिस प्रशासन अलर्ट पर था, खासकर जब पांवटा के स्थित अजीतपुरा कलां में चल रहे धरने में हनुमान बेनीवाल ने अपनी टीम भेजी, जिससे बेनीवाल के आने का 'खोफ' प्रशासन में बना रहा। समझौता वार्ता के दौरान पुलिस उप अधीक्षक राजेंद्र बुरडक, एसडीएम योगेश सिंह देवल, सहायक खनि अभियंता अमीचंद दहुारियाव और तहसीलदार सहित पांच थानों का पुलिस जाप्ता तैनात रहा। धरना संयोजक नेतराम ने स्पष्ट किया है कि यदि समझौते की पालना नहीं की जाती है, तो ग्रामीण वापस धरना शुरू करेंगे। इस मौके पर रामस्वरूप कसाना, रामनिवास यादव, नेतराम, मुकेश गोयल, मंजू रावत, जगदीश मीणा, सुभाष घोघड़, राधेश्याम शुक्लाबास, दिनेश मीणा और हनुमान बेनीवाल की टीम के छुटटन यादव, प्रभाती लाल जाट, शंकरलाल, कालूराम, जयराम ताखर, राधेश्याम तंवर व विनेद कसाना सहित कई लोग मौजूद थे।1
- घरों में पाई जाने वाली छिपकलियां दीवारों पर लगे बल्ब या ट्यूबलाइट के आसपास मंडराने वाले मच्छरों और अन्य कीड़ों का शिकार करती हैं। हालांकि, कई बार वे उड़ते हुए मच्छरों को पकड़ने की बजाय फर्श या किसी सतह पर बैठे कीड़ों को भी अपना भोजन बनाती हैं। इस तरह, छिपकलियां घर में प्राकृतिक कीटनाशक के रूप में काम करती हैं, जो कीड़ों को नियंत्रित करने में सहायक हैं।1
- एक गाने को प्रस्तुत किया गया है, जिसके हर एक शब्द को अत्यंत सार्थक बताया जा रहा है। यह गाना विशेष रूप से पेंशनधारी वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक अद्भुत संदेश देता है। सभी श्रोताओं से इसे अवश्य सुनने का आग्रह किया गया है, ताकि वे इसे सुनकर अच्छा महसूस कर सकें।1
- यह संदेश उन लोगों के लिए है जो बुजुर्गों और विशेष रूप से अपने माता-पिता का सम्मान नहीं करते हैं, और यह मानते हैं कि वे हमेशा जवान रहेंगे। पोस्ट में कहा गया है कि 'नजरें उठा के देखिए जर्जर मकान पर', और इस बात पर जोर दिया गया है कि 'जाएंगी उम्र ऐसे ही सबकी ढलान पर', जिसका अर्थ है कि हर व्यक्ति को वृद्धावस्था का सामना करना ही है। यह संदेश सभी से इसे सुनने और महसूस करने का आग्रह करता है, ताकि वे बुजुर्गों के प्रति आदर भाव रख सकें।1
- राजस्थान के टपूकड़ा में एक ठेकेदार द्वारा एक सफाई कर्मचारी से मारपीट करने का मामला सामने आया है, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। आरोप है कि ठेकेदार ने मजदूरी मांगने पर सफाई कर्मचारी के साथ उत्पीड़न किया और मारपीट की।1
- दिल्ली में एक 6 मंजिला होटल में भीषण आग लगने की दुखद घटना सामने आई है, जिसमें 21 लोगों की मौत हो गई है। इस हादसे में कई विदेशी नागरिक भी प्रभावित हुए हैं।1