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सारनी पुलिस द्वारा छह दिवसीय साइबर सुरक्षा सप्ताह के तहत सारनी पेट्रोल पंप पर लोगों को साइबर सुरक्षा संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। इस दौरान, पुलिस ने नागरिकों को जागरूक करने के उद्देश्य से पंपलेट भी वितरित किए।
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सारनी पुलिस द्वारा छह दिवसीय साइबर सुरक्षा सप्ताह के तहत सारनी पेट्रोल पंप पर लोगों को साइबर सुरक्षा संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। इस दौरान, पुलिस ने नागरिकों को जागरूक करने के उद्देश्य से पंपलेट भी वितरित किए।
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- सारनी पुलिस द्वारा छह दिवसीय साइबर सुरक्षा सप्ताह के तहत सारनी पेट्रोल पंप पर लोगों को साइबर सुरक्षा संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। इस दौरान, पुलिस ने नागरिकों को जागरूक करने के उद्देश्य से पंपलेट भी वितरित किए।1
- Post by Nishit Biswas1
- मध्य प्रदेश के आमला नगर में बस स्टैंड से चंद्रभागा तक चल रहे डिवाइडर निर्माण कार्य की धीमी गति अब लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा बन गई है। हाल ही में सोमवार को थाना परिसर के सामने कार क्रमांक MP 48 ZE 8710 एक अधूरे डिवाइडर पर चढ़ गई। गनीमत रही कि आसपास मौजूद लोगों ने तत्काल मदद कर वाहन को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि यह डिवाइडर निर्माण कार्य लंबे समय से अधूरा पड़ा है। कई स्थानों पर न तो पर्याप्त बैरिकेडिंग की गई है और न ही रिफ्लेक्टर, चेतावनी बोर्ड अथवा संकेतक लगाए गए हैं, जिससे विशेषकर रात के समय वाहन चालकों को सड़क की वास्तविक स्थिति समझ नहीं आती और दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना हुआ है। नागरिकों ने नगर पालिका पर यह भी आरोप लगाया है कि एक निर्माण कार्य पूरा किए बिना दूसरा कार्य शुरू कर दिया जाता है, जिसका परिणाम यह है कि शहर की कई प्रमुख सड़कें एक साथ खुदी पड़ी हैं। इससे यातायात प्रभावित हो रहा है और आम लोगों को रोजाना जाम, धूल तथा दुर्घटना के खतरे का सामना करना पड़ रहा है। शहरवासी इस बात पर सवाल उठा रहे हैं कि यदि निर्माण एजेंसी को समय-सीमा के भीतर कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं, तो फिर इतनी देरी क्यों हो रही है। लोगों के बीच यह भी चर्चा है कि आखिर ऐसी क्या वजह है कि संबंधित ठेकेदार पर सख्ती नहीं दिखाई जा रही है। नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जनता जानना चाहती है कि डिवाइडर निर्माण कार्य तय समय में पूरा क्यों नहीं हुआ, अधूरे निर्माण स्थलों पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं किए गए, एक काम पूरा होने से पहले दूसरे निर्माण कार्य को शुरू करने की अनुमति किसने दी, और यदि किसी दिन बड़ा हादसा होता है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। इसके साथ ही, लोग यह भी पूछ रहे हैं कि क्या नगर पालिका के इंजीनियर और सीएमओ नियमित रूप से निर्माण कार्य का निरीक्षण कर रहे हैं। स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन और नगर पालिका से तत्काल मांग की है कि निर्माण कार्य में तेजी लाई जाए तथा जब तक कार्य पूर्ण नहीं होता, तब तक सभी निर्माण स्थलों पर अनिवार्य रूप से बैरिकेडिंग, रिफ्लेक्टर, चेतावनी बोर्ड और अन्य सुरक्षा उपाय लगाए जाएं, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।2
- मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सोमवार को बैतूल दौरे पर संत कबीरदास जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में भाग लिया, जहाँ उनका एक अनूठा अंदाज़ देखने को मिला। उन्होंने सेवा कार्य करते हुए बर्तन धोए और बाद में किसानों के बीच खेत में बैलों के साथ हल भी चलाया। बैतूल के सतलोक आश्रम में संत रामपाल महाराज के सान्निध्य में हुए सत्संग एवं सेवा कार्यक्रम में शामिल होकर जीतू पटवारी ने संत कबीरदास को नमन किया। इस दौरान उन्होंने समाज में समानता, प्रेम और मानवता का संदेश अपनाने का आह्वान किया। पटवारी ने स्वयं बर्तन धोकर सेवा कार्य में सहभागिता निभाई और सभी प्रदेशवासियों के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि तथा उत्तम स्वास्थ्य की कामना की। इस कार्यक्रम में पूर्व मंत्री सुखदेव पांसे, पूर्व विधायक निलय डागा सहित कांग्रेस के कई नेता और कार्यकर्ता भी उपस्थित थे। कार्यक्रम के बाद जीतू पटवारी सीधे किसानों के पास पहुँचे, जहाँ उन्होंने बैलों को हांकते हुए हल चलाया। उन्होंने किसानों के साथ खेती-किसानी से जुड़ी समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की। किसानों ने उन्हें खाद की कमी और कृषि संबंधी अन्य परेशानियों से अवगत कराया। जीतू पटवारी ने किसानों के साथ हुई बातचीत का एक वीडियो अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर साझा करते हुए सरकार पर किसानों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अन्नदाताओं की समस्याओं को गंभीरता से नहीं सुना जा रहा है। साथ ही, उन्होंने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से भी किसानों की समस्याओं को लेकर सवाल उठाए। कबीर जयंती के इस अवसर पर सेवा, सत्संग और किसानों के साथ संवाद के जरिए जीतू पटवारी का यह दौरा चर्चा का मुख्य विषय बना रहा।1
- थाना आठनेर द्वारा नगर परिषद कार्यालय, आठनेर में एक साइबर जागरूकता अभियान आयोजित किया गया, जिसमें नगरपालिका अधिकारी, समस्त कार्यालयीन स्टाफ और पत्रकार बंधु उपस्थित रहे। इस कार्यक्रम का उद्देश्य साइबर अपराधों, विशेषकर डिजिटल ठगी से बचाव के लिए आमजन को जागरूक करना था। अभियान के दौरान, पुलिस अधिकारियों ने साइबर अपराधों से बचने के लिए 'क्या करें और क्या न करें' विषय पर विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया कि किसी भी साइबर फ्रॉड की स्थिति में तुरंत 1930 हेल्पलाइन नंबर पर शिकायत दर्ज करनी चाहिए या साइबर क्राइम रिपोर्टिंग वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन शिकायत करनी चाहिए। अधिकारियों ने सभी से अभियान की थीम 'रुको, सोचो, फिर एक्शन लो' का पालन करने की भी अपील की। उन्होंने विशेष रूप से सचेत किया कि किसी भी अनजान कॉल, लिंक, ओटीपी या बैंक संबंधी जानकारी साझा करने से पहले पूरी तरह सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना पुलिस को दें। कार्यक्रम में लगभग 50 लोग उपस्थित रहे, जिन्होंने साइबर सुरक्षा संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की और आम नागरिकों को भी जागरूक करने का संकल्प लिया।4
- आमला नगर में निर्माणाधीन डिवाइडर पर पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम और चेतावनी संकेत न होने के कारण एक कार उससे टकराकर क्षतिग्रस्त हो गई। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारियों, खासकर इंजीनियर की कार्यप्रणाली को गंभीर लापरवाही बताते हुए उस पर सवाल उठाए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, डिवाइडर के आसपास न तो पर्याप्त बैरिकेडिंग की गई थी और न ही रात में वाहन चालकों को सतर्क करने के लिए रिफ्लेक्टर या चेतावनी बोर्ड लगाए गए थे, जिसके चलते चालक को डिवाइडर दिखाई नहीं दिया और कार सीधे उससे जा टकराई। हालांकि, इस घटना में किसी के हताहत होने की कोई सूचना नहीं है, पर वाहन को नुकसान पहुंचा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गई, तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा हो सकता है। लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि जिला कलेक्टर के निर्देशों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी सुरक्षा मानकों का पालन नहीं कर रहे हैं। वहीं, जनप्रतिनिधियों द्वारा दिए गए निर्देश भी प्रभावी रूप से लागू नहीं हो रहे हैं। नागरिकों ने नगर पालिका प्रशासन से मांग की है कि निर्माण कार्य स्थल पर तत्काल बैरिकेडिंग, चेतावनी संकेतक और रिफ्लेक्टर लगाए जाएं। साथ ही, इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।1