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लॉटरी पर राजनीति करने से पहले अनुराग ठाकुर अपने और केंद्र सरकार के वादों का हिसाब दें : रजत राणा सुजानपुर सुक्खू सरकार की जनहितकारी उपलब्धियों को छिपाने के लिए भाजपा कर रही है मुद्दों को भटकाने की कोशिश हिमाचल प्रदेश में प्रस्तावित लॉटरी व्यवस्था को लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सांसद अनुराग ठाकुर द्वारा कांग्रेस सरकार पर लगाए गए आरोपों पर कांग्रेस मीडिया से जुड़े रजत राणा ने तीखा पलटवार किया है। रजत राणा ने कहा कि अनुराग ठाकुर को हिमाचल के युवाओं की इतनी ही चिंता है तो वे केवल राजनीतिक बयानबाजी करने के बजाय केंद्र की भाजपा सरकार और अपने लंबे राजनीतिक कार्यकाल का भी जनता के सामने हिसाब रखें। उन्होंने कहा कि हिमाचल के युवाओं को रोजगार, बेहतर शिक्षा, कौशल विकास, निवेश और सुरक्षित भविष्य चाहिए, और कांग्रेस सरकार इन्हीं मुद्दों पर लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने कठिन आर्थिक परिस्थितियों के बावजूद जनहित में कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन देने, किसानों की आय बढ़ाने, स्वरोजगार एवं उद्यमिता को बढ़ावा देने और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार करने पर जोर दिया है। रजत राणा ने कहा कि सुक्खू सरकार ने राजीव गांधी स्वरोजगार स्टार्ट-अप योजना जैसी पहल के माध्यम से युवाओं को केवल सरकारी नौकरी पर निर्भर रहने के बजाय अपना रोजगार और उद्यम शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया है। इलेक्ट्रिक वाहन, ई-टैक्सी और अन्य स्वरोजगार गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में भी सरकार ने कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने महिलाओं, किसानों, बागवानों और ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए भी कई नीतिगत फैसले लिए हैं। दूध के खरीद मूल्य में बढ़ोतरी, प्राकृतिक खेती से जुड़े किसानों को प्रोत्साहन तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के प्रयास सरकार की प्राथमिकताओं को स्पष्ट करते हैं। रजत राणा ने कहा कि इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख सम्मान निधि योजना के माध्यम से पात्र महिलाओं को आर्थिक सहायता देने की पहल भी सरकार की सामाजिक सुरक्षा की सोच को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार का लक्ष्य समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों को राहत देना तथा प्रदेश की अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर दिशा में आगे बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि हिमाचल की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार पर्यटन, हरित ऊर्जा, उद्योग, कृषि, बागवानी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दे रही है। राजस्व बढ़ाने और प्रदेश को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी सरकार कई कदम उठा रही है। “अनुराग ठाकुर पहले अपने वादों का हिसाब दें” रजत राणा ने कहा कि भाजपा नेता आज कांग्रेस के वादों की चर्चा करते हैं, लेकिन जनता यह पूछने का अधिकार रखती है कि केंद्र की भाजपा सरकार ने चुनावों के दौरान किए गए अपने बड़े वादों में कितने पूरे किए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के पुराने चुनावी दावों को जनता भूली नहीं है। काले धन की वापसी, रोजगार और आर्थिक सुधारों से जुड़े वादों पर भी भाजपा को जनता के सामने जवाब देना चाहिए। केवल कांग्रेस सरकार पर सवाल उठाने से भाजपा अपने पुराने वादों से बच नहीं सकती। उन्होंने कहा कि “15 लाख” से जुड़े राजनीतिक दावे आज भी देश की राजनीतिक बहस का हिस्सा हैं। भाजपा नेताओं को इस मुद्दे पर भी जनता के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और यह बताना चाहिए कि चुनाव के समय किए गए आर्थिक दावों का वास्तविक परिणाम क्या रहा। रजत राणा ने कहा कि अनुराग ठाकुर स्वयं केंद्र सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। इसलिए उन्हें हिमाचल के युवाओं को यह भी बताना चाहिए कि केंद्र सरकार ने प्रदेश में रोजगार, निवेश और औद्योगिक विकास के लिए क्या ठोस योगदान दिया। “युवाओं को लॉटरी नहीं, अवसर चाहिए” रजत राणा ने कहा कि हिमाचल के युवा मेहनती हैं और वे अपने दम पर आगे बढ़ना चाहते हैं। उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार, स्वरोजगार और निवेश के अवसर चाहिए। उन्होंने कहा कि लॉटरी के मुद्दे पर सरकार की नीति और नियमों पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन इसे आधार बनाकर हिमाचल के युवाओं के भविष्य को लेकर भय का माहौल पैदा करना उचित नहीं है। उन्होंने भाजपा नेताओं से कहा कि यदि उन्हें वास्तव में युवाओं की चिंता है तो वे प्रदेश के विकास से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक सुझाव दें और केंद्र से हिमाचल के लिए अधिक निवेश, औद्योगिक परियोजनाएं और रोजगार के अवसर लाने की मांग करें। रजत राणा ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार आर्थिक चुनौतियों के बीच प्रदेश के हित में फैसले ले रही है। सरकार की प्राथमिकता हिमाचल को आत्मनिर्भर बनाना, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना, युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ना और आम परिवारों को राहत देना है। उन्होंने कहा कि भाजपा को चाहिए कि वह हर उपलब्धि और हर नीति को राजनीतिक चश्मे से देखने के बजाय प्रदेश हित में सहयोग करे। “अनुराग ठाकुर जी, हिमाचल के युवाओं को गुमराह करने की राजनीति छोड़िए। पहले केंद्र की सरकार के पुराने वादों का हिसाब दीजिए और फिर हिमाचल की चुनी हुई सरकार से सवाल कीजिए। हिमाचल की जनता अब सिर्फ भाषण नहीं, काम और परिणाम देखना चाहती है।”

45 min ago
user_Ranjna Kumari
Ranjna Kumari
टीरा सुजानपुर, हमीरपुर, हिमाचल प्रदेश•
45 min ago
4813e7a0-80c5-4a81-9974-7e5e71b9a33f

लॉटरी पर राजनीति करने से पहले अनुराग ठाकुर अपने और केंद्र सरकार के वादों का हिसाब दें : रजत राणा सुजानपुर सुक्खू सरकार की जनहितकारी उपलब्धियों को छिपाने के लिए भाजपा कर रही है मुद्दों को भटकाने की कोशिश हिमाचल प्रदेश में प्रस्तावित लॉटरी व्यवस्था को लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सांसद अनुराग ठाकुर द्वारा कांग्रेस सरकार पर लगाए गए आरोपों पर कांग्रेस मीडिया से जुड़े रजत राणा ने तीखा पलटवार किया है। रजत राणा ने कहा कि अनुराग ठाकुर को हिमाचल के युवाओं की इतनी ही चिंता है तो वे केवल राजनीतिक बयानबाजी करने के बजाय केंद्र की भाजपा सरकार और अपने लंबे राजनीतिक कार्यकाल का भी जनता के सामने हिसाब रखें। उन्होंने कहा कि हिमाचल के युवाओं को रोजगार, बेहतर शिक्षा, कौशल विकास, निवेश और सुरक्षित भविष्य चाहिए, और कांग्रेस सरकार इन्हीं मुद्दों पर लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने कठिन आर्थिक परिस्थितियों के बावजूद जनहित में कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन देने, किसानों की आय बढ़ाने, स्वरोजगार एवं उद्यमिता को बढ़ावा देने और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार करने पर जोर दिया है। रजत राणा ने कहा कि सुक्खू सरकार ने राजीव गांधी स्वरोजगार स्टार्ट-अप योजना जैसी पहल के माध्यम से युवाओं को केवल सरकारी नौकरी पर निर्भर रहने के बजाय अपना रोजगार और उद्यम शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया है। इलेक्ट्रिक वाहन, ई-टैक्सी और अन्य स्वरोजगार गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में भी सरकार ने कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने महिलाओं, किसानों, बागवानों और ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए भी कई नीतिगत फैसले लिए हैं। दूध के खरीद मूल्य में बढ़ोतरी, प्राकृतिक खेती से जुड़े किसानों को प्रोत्साहन तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के प्रयास सरकार की प्राथमिकताओं को स्पष्ट करते हैं। रजत राणा ने कहा कि इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख सम्मान निधि योजना के माध्यम से पात्र महिलाओं को आर्थिक सहायता देने की पहल भी सरकार की सामाजिक सुरक्षा की सोच को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार का लक्ष्य समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों को राहत देना तथा प्रदेश की अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर दिशा में आगे बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि हिमाचल की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार पर्यटन, हरित ऊर्जा, उद्योग, कृषि, बागवानी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दे रही है। राजस्व बढ़ाने और प्रदेश को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी सरकार कई कदम उठा रही है। “अनुराग ठाकुर पहले अपने वादों का हिसाब दें” रजत राणा ने कहा कि भाजपा नेता आज कांग्रेस के वादों की चर्चा करते हैं, लेकिन जनता यह पूछने का अधिकार रखती है कि केंद्र की भाजपा सरकार ने चुनावों के दौरान किए गए अपने बड़े वादों में कितने पूरे किए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के पुराने चुनावी दावों को जनता भूली नहीं है। काले धन की वापसी, रोजगार और आर्थिक सुधारों से जुड़े वादों पर भी भाजपा को जनता के सामने जवाब देना चाहिए। केवल कांग्रेस सरकार पर सवाल उठाने से भाजपा अपने पुराने वादों से बच नहीं सकती। उन्होंने कहा कि “15 लाख” से जुड़े राजनीतिक दावे आज भी देश की राजनीतिक बहस का हिस्सा हैं। भाजपा नेताओं को इस मुद्दे पर भी जनता के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और यह बताना चाहिए कि चुनाव के समय किए गए आर्थिक दावों का वास्तविक परिणाम क्या रहा। रजत राणा ने कहा कि अनुराग ठाकुर स्वयं केंद्र सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। इसलिए उन्हें हिमाचल के युवाओं को यह भी बताना चाहिए कि केंद्र सरकार ने प्रदेश में रोजगार, निवेश और औद्योगिक विकास के लिए क्या ठोस योगदान दिया। “युवाओं को लॉटरी नहीं, अवसर चाहिए” रजत राणा ने कहा कि हिमाचल के युवा मेहनती हैं और वे अपने दम पर आगे बढ़ना चाहते हैं। उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार, स्वरोजगार और निवेश के अवसर चाहिए। उन्होंने कहा कि लॉटरी के मुद्दे पर सरकार की नीति और नियमों पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन इसे आधार बनाकर हिमाचल के युवाओं के भविष्य को लेकर भय का माहौल पैदा करना उचित नहीं है। उन्होंने भाजपा नेताओं से कहा कि यदि उन्हें वास्तव में युवाओं की चिंता है तो वे प्रदेश के विकास से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक सुझाव दें और केंद्र से हिमाचल के लिए अधिक निवेश, औद्योगिक परियोजनाएं और रोजगार के अवसर लाने की मांग करें। रजत राणा ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार आर्थिक चुनौतियों के बीच प्रदेश के हित में फैसले ले रही है। सरकार की प्राथमिकता हिमाचल को आत्मनिर्भर बनाना, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना, युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ना और आम परिवारों को राहत देना है। उन्होंने कहा कि भाजपा को चाहिए कि वह हर उपलब्धि और हर नीति को राजनीतिक चश्मे से देखने के बजाय प्रदेश हित में सहयोग करे। “अनुराग ठाकुर जी, हिमाचल के युवाओं को गुमराह करने की राजनीति छोड़िए। पहले केंद्र की सरकार के पुराने वादों का हिसाब दीजिए और फिर हिमाचल की चुनी हुई सरकार से सवाल कीजिए। हिमाचल की जनता अब सिर्फ भाषण नहीं, काम और परिणाम देखना चाहती है।”

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    user_BHK News Himachal
    BHK News Himachal
    Local News Reporter Una, Himachal Pradesh•
    23 hrs ago
  • वेस्टीज स्पेशल टूर होटल क्लार्क आगरा और आगरा फोर्ट आज ही बिजनेस का जानकारी के लिए मुझे कॉल करें 98161 33991 राजकुमार आपका बिजनेस कोच बिलासपुर हिमाचल प्रदेश दोस्तों वेस्टीज से मिला हमें घूमने का मौका यहां इस बिजनेस का खासियत है आज ही इस बिजनेस के बारे में जानकारी ली और आज ही स्टार्ट करें 9816133991 आपका बिजनेस कोच राजकुमार बिलासपुर हिमाचल प्रदेश
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    user_RAJ KUMAR CROWN HB Power
    RAJ KUMAR CROWN HB Power
    Health and beauty shop Jhanduta, Bilaspur•
    20 hrs ago
  • 'अर्जुनजन कल्याण फाउंडेशन' ने उठाया दिवंगत सैनिक के परिवार की सुरक्षा का मुद्दा, बिजली विभाग से की तुरंत कार्रवाई की मांग श्री नैनादेवी जी (बिलासपुर), 26 अगस्त 2026: श्री नैनादेवी जी विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत लेहड़ी में एक दिवंगत फौजी का परिवार इस बरसात के मौसम में बिजली के करंट के साये में जीने को मजबूर है। स्थानीय स्तर पर सुनवाई न होने के बाद पीड़ित परिवार ने 'अर्जुनजन कल्याण फाउंडेशन' से मदद मांगी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अर्जुन गोसाई खुद इस परिवार की मदद के लिए आगे आए हैं। क्या है समस्या: ग्राम पंचायत लेहड़ी की निवासी और दिवंगत सैनिक की पत्नी श्रीमती अनु कुमारी जी ने बताया कि उनके घर जाने वाली बिजली की लाइन घने जंगल से होकर गुजरती है। सफाई न होने के कारण जंगली झाड़ियाँ और बेलें बिजली के चालू तारों पर बुरी तरह फैल चुकी हैं। इस बरसात में इन गीली झाड़ियों की वजह से करंट लीक हो रहा है, जो सीधे अनु कुमारी जी के घर की दीवारों और फर्श में उतर रहा है। घर में छोटे बच्चे और मवेशी हैं, जिससे हर समय हादसे का डर बना रहता है। संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने उठाया कदम: अनु कुमारी जी ने वीडियो संदेश के जरिए 'अर्जुनजन कल्याण फाउंडेशन' से मदद की अपील की थी। इस पर तुरंत संज्ञान लेते हुए संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अर्जुन गोसाई जी की ओर से पीड़ित महिला की सुरक्षा को देखते हुए विद्युत विभाग को एक औपचारिक और आदरपूर्वक प्रार्थना पत्र भेज दिया गया है। संस्था ने विभाग से विनम्र अपील की है कि किसी भी हादसे से पहले तुरंत टीम भेजकर इन तारों से जंगली झाड़ियों की सफाई करवाई जाए। श्री अर्जुन गोसाई जी ने कहा कि देश की सेवा करने वाले सैनिक के परिवार की सुरक्षा सबसे जरूरी है। हमें बिलासपुर प्रशासन और बिजली विभाग के अधिकारियों पर पूरा विश्वास है कि वे इस समस्या का समाधान जल्दी करेंगे।
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    'अर्जुनजन कल्याण फाउंडेशन' ने उठाया दिवंगत सैनिक के परिवार की सुरक्षा का मुद्दा, बिजली विभाग से की तुरंत कार्रवाई की मांग

श्री नैनादेवी जी (बिलासपुर), 26 अगस्त 2026:

श्री नैनादेवी जी विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत लेहड़ी में एक दिवंगत फौजी का परिवार इस बरसात के मौसम में बिजली के करंट के साये में जीने को मजबूर है। स्थानीय स्तर पर सुनवाई न होने के बाद पीड़ित परिवार ने 'अर्जुनजन कल्याण फाउंडेशन' से मदद मांगी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अर्जुन गोसाई खुद इस परिवार की मदद के लिए आगे आए हैं।

क्या है समस्या:
ग्राम पंचायत लेहड़ी की निवासी और दिवंगत सैनिक की पत्नी श्रीमती अनु कुमारी जी ने बताया कि उनके घर जाने वाली बिजली की लाइन घने जंगल से होकर गुजरती है। सफाई न होने के कारण जंगली झाड़ियाँ और बेलें बिजली के चालू तारों पर बुरी तरह फैल चुकी हैं। इस बरसात में इन गीली झाड़ियों की वजह से करंट लीक हो रहा है, जो सीधे अनु कुमारी जी के घर की दीवारों और फर्श में उतर रहा है। घर में छोटे बच्चे और मवेशी हैं, जिससे हर समय हादसे का डर बना रहता है।

संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने उठाया कदम:
अनु कुमारी जी ने वीडियो संदेश के जरिए 'अर्जुनजन कल्याण फाउंडेशन' से मदद की अपील की थी। इस पर तुरंत संज्ञान लेते हुए संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अर्जुन गोसाई जी की ओर से पीड़ित महिला की सुरक्षा को देखते हुए विद्युत विभाग को एक औपचारिक और आदरपूर्वक प्रार्थना पत्र भेज दिया गया है। संस्था ने विभाग से विनम्र अपील की है कि किसी भी हादसे से पहले तुरंत टीम भेजकर इन तारों से जंगली झाड़ियों की सफाई करवाई जाए।

श्री अर्जुन गोसाई जी ने कहा कि देश की सेवा करने वाले सैनिक के परिवार की सुरक्षा सबसे जरूरी है। हमें बिलासपुर प्रशासन और बिजली विभाग के अधिकारियों पर पूरा विश्वास है कि वे इस समस्या का समाधान जल्दी करेंगे।
    user_Himachal Punjab News
    Himachal Punjab News
    Local News Reporter मेहटपुर, ऊना, हिमाचल प्रदेश•
    1 day ago
  • माजरा के लोगों को आश्वासन या समाधान? शिवालिक प्लांट पर जनता के सवालों का हिसाब कौन देगा? आज DK News Nalagarh किसी नेता की चमचागिरी करने नहीं आया है, किसी अधिकारी की तारीफ करने नहीं आया है और न ही किसी कंपनी का पक्ष लेने आया है। आज हम बात कर रहे हैं गांव माजरा, तहसील नालागढ़ के उन ग्रामीणों की, जो शिवालिक सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट को लेकर लंबे समय से अपनी आवाज उठा रहे हैं। 18 मई 2026 को गांव वासी अपनी मांगों और शिकायतों को लेकर शिवालिक सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के गेट पर धरने पर बैठे। ग्रामीणों का कहना था कि प्लांट से निकलने वाली हवा और पानी दूषित हो रहे हैं, जिससे पर्यावरण और गांववासियों को गम्भीर बिमारियो का सामना करना पड रहा है । इन्हीं समस्याओं और शिकायतों को लेकर गांववासियों ने 18 मई को प्लांट के गेट पर धरना दिया। जनता अपनी समस्या लेकर गेट पर बैठी थी और सवाल था कि आखिर उनकी शिकायतों का समाधान कौन करेगा? इसके बाद 23 मई 2026 को बाबा हरदीप जी और एसडीएम मौके पर पहुंचे। इसके बाद अंदर जाकर कंपनी के साथ बातचीत हुई। लेकिन यहां सबसे बड़ा सवाल यही है कि अंदर क्या बातचीत हुई, क्या फैसला हुआ और ग्रामीणों की मांगों पर क्या तय किया गया—इसकी पूरी जानकारी गांववासियों को आखिर क्यों नहीं दी गई? ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें आश्वासन देकर धरना उठवा दिया गया। लोगों को उम्मीद थी कि अब उनकी समस्या का समाधान होगा। लेकिन धरना उठने के बाद क्या हुआ? आश्वासन पर आश्वासन। एक आश्वासन मिला, फिर दूसरा आश्वासन मिला, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि ग्राउंड लेवल पर स्थायी समाधान आज भी दिखाई नहीं दे रहा। और यही सवाल आज DK News Nalagarh पूछ रहा है— अगर 23 मई को बातचीत के बाद कोई ठोस फैसला हुआ था, तो वह फैसला जमीन पर कहां है? अगर ग्रामीणों को कोई लिखित समाधान दिया गया था तो वह जनता के सामने क्यों नहीं रखा गया? अगर कंपनी ने कोई जिम्मेदारी ली थी तो उसका पालन कितना हुआ? और अगर प्रशासन ने कोई समयसीमा तय की थी तो उस समयसीमा में क्या कार्रवाई हुई? जनता को सिर्फ भरोसा नहीं चाहिए, जनता को हिसाब चाहिए। आज सवाल उस गंदे पानी का भी है जिसे ग्रामीण दूषित बता रहे हैं। सवाल उस दुर्गंध का है जिसकी शिकायत ग्रामीण कर रहे हैं। सवाल यहां आने वाले hazardous और chemical waste को लेकर उठ रही चिंताओं का है। ग्रामीणों का दावा है कि इलाके में लोगों को अस्थमा, एलर्जी और किडनी से जुड़ी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा है। लेकिन इस मुद्दे पर भी हमारा सवाल बिल्कुल साफ है— सरकार स्वतंत्र वैज्ञानिक जांच क्यों नहीं करवाती? पानी की जांच करवाइए। मिट्टी की जांच करवाइए। हवा की जांच करवाइए। रिपोर्ट जनता के सामने रखिए। अगर पानी साफ है तो जनता को बताइए कि पानी साफ है। अगर पानी दूषित है तो जिम्मेदारी तय कीजिए। और अगर इन स्वास्थ्य समस्याओं का प्लांट या पानी से कोई संबंध नहीं है तो वह भी वैज्ञानिक रिपोर्ट से साफ होना चाहिए। क्योंकि DK News Nalagarh हवा में तीर नहीं चलाएगा। हम दस्तावेज के साथ सवाल पूछेंगे और मौके के वीडियो के साथ सवाल पूछेंगे। 23 मई 2026 की बैठक के लिखित दस्तावेज में ग्रामीणों की कई चिंताओं का उल्लेख है। इसमें प्लांट का निरीक्षण, वीडियोग्राफी, hazardous waste के उचित निस्तारण, untreated waste, दुर्गंध और waste management से जुड़े मुद्दों पर चर्चा दर्ज है। तो फिर सवाल यह है कि कागज पर बातें दर्ज होने के बाद जमीन पर बदलाव कितना हुआ? और हमें शर्म आती है उन नेताओं पर जो जनता के बीच आकर बार-बार आश्वासन देते हैं, लोगों को तसल्ली देते हैं, लेकिन जब ग्राउंड लेवल पर काम की बात आती है तो नतीजा दिखाई नहीं देता। नेताओं के पास तीज-त्योहारों में जाने का समय है। शादी समारोहों में पहुंचने का समय है। कार्यक्रमों में जाने का समय है। फोटो खिंचवाने और भाषण देने का समय है। लेकिन इन ग्रामीणों की समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए समय क्यों नहीं है? क्या जनता सिर्फ वोट देने के समय याद आती है? चुनाव के समय नेता उन घरों तक पहुंच जाते हैं जहां पैदल रास्ता भी मुश्किल होता है। बीमार व्यक्ति के घर तक वोट मांगने पहुंचने का रास्ता निकाल लिया जाता है। लेकिन जब वही जनता अपनी समस्या लेकर धरने पर बैठती है तो उसके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होने का समय क्यों नहीं मिलता? और यहां सवाल वर्तमान विधायक से भी है— अगर आश्वासन दिए गए हैं तो अब उसका हिसाब दीजिए। कितने आश्वासन दिए गए? कब तक समाधान होना था? अब तक क्या कार्रवाई हुई? कौन-सा विभाग जिम्मेदार है? और सबसे जरूरी— माजरा के लोगों की समस्या का अंतिम समाधान आखिर कब होगा? क्योंकि ग्रामीणों को अब मीठी गोली नहीं चाहिए। झूठी तसल्ली नहीं चाहिए। सिर्फ बैठक नहीं चाहिए। सिर्फ बयान नहीं चाहिए। सिर्फ फोटो नहीं चाहिए। जनता को चाहिए— साफ पानी। साफ हवा। सुरक्षित वातावरण। वैज्ञानिक जांच। जिम्मेदारी तय होना। और सबसे बढ़कर—स्थायी समाधान। अगर ग्रामीणों के आरोप गलत हैं तो सरकार और संबंधित विभाग सामने आएं और जांच करवाकर सच जनता को बताएं। अगर आरोपों में सच्चाई है तो फिर कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन इस मुद्दे को बार-बार आश्वासन देकर दबा देना समाधान नहीं है। 18 मई को जनता दूषित हवा, दूषित पानी और पर्यावरण व गांववासियों को हो रहे नुकसान के खिलाफ धरने पर बैठी। 23 मई को बातचीत हुई। धरना आश्वासन के बाद उठा। उसके बाद भी आश्वासन चलते रहे। अब सवाल है— आखिर आश्वासन की यह कहानी कब खत्म होगी और समाधान की शुरुआत कब होगी? DK News Nalagarh किसी राजनीतिक पार्टी का प्रवक्ता नहीं है। हम सिर्फ इतना पूछ रहे हैं— माजरा के लोगों की आवाज कब सुनी जाएगी? उनके पानी की जांच कब होगी? उनकी शिकायतों पर अंतिम फैसला कब होगा? और जो वादे किए गए, उनका हिसाब जनता को कब मिलेगा? क्योंकि लोकतंत्र में नेता जनता से बड़े नहीं होते। नेता जनता के वोट से बनते हैं और जनता को जवाब देना उनकी जिम्मेदारी है। और अगर इस समस्या का समाधान समय रहते नहीं निकला, तो आने वाले चुनाव में जनता अपने वोट से जवाब देना अच्छी तरह जानती है। DK News Nalagarh शम्मी राजपूत सवाल पूछता रहेगा—बिना डर, बिना दबाव और बिना किसी की चमचागिरी के। क्योंकि यह सवाल किसी एक व्यक्ति का नहीं है। यह सवाल माजरा के लोगों की जिंदगी, उनके पानी और उनके भविष्य का है।
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    माजरा के लोगों को आश्वासन या समाधान? शिवालिक प्लांट पर जनता के सवालों का हिसाब कौन देगा?


आज DK News Nalagarh किसी नेता की चमचागिरी करने नहीं आया है, किसी अधिकारी की तारीफ करने नहीं आया है और न ही किसी कंपनी का पक्ष लेने आया है। आज हम बात कर रहे हैं गांव माजरा, तहसील नालागढ़ के उन ग्रामीणों की, जो शिवालिक सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट को लेकर लंबे समय से अपनी आवाज उठा रहे हैं।
18 मई 2026 को गांव वासी अपनी मांगों और शिकायतों को लेकर शिवालिक सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के गेट पर धरने पर बैठे। ग्रामीणों का कहना था कि प्लांट से निकलने वाली हवा और पानी दूषित हो रहे हैं, जिससे पर्यावरण और गांववासियों को गम्भीर बिमारियो का सामना करना पड रहा है । इन्हीं समस्याओं और शिकायतों को लेकर गांववासियों ने 18 मई को प्लांट के गेट पर धरना दिया। जनता अपनी समस्या लेकर गेट पर बैठी थी और सवाल था कि आखिर उनकी शिकायतों का समाधान कौन करेगा?
इसके बाद 23 मई 2026 को बाबा हरदीप जी और एसडीएम मौके पर पहुंचे। इसके बाद अंदर जाकर कंपनी के साथ बातचीत हुई। लेकिन यहां सबसे बड़ा सवाल यही है कि अंदर क्या बातचीत हुई, क्या फैसला हुआ और ग्रामीणों की मांगों पर क्या तय किया गया—इसकी पूरी जानकारी गांववासियों को आखिर क्यों नहीं दी गई?
ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें आश्वासन देकर धरना उठवा दिया गया। लोगों को उम्मीद थी कि अब उनकी समस्या का समाधान होगा। लेकिन धरना उठने के बाद क्या हुआ?
आश्वासन पर आश्वासन।
एक आश्वासन मिला, फिर दूसरा आश्वासन मिला, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि ग्राउंड लेवल पर स्थायी समाधान आज भी दिखाई नहीं दे रहा।
और यही सवाल आज DK News Nalagarh पूछ रहा है—
अगर 23 मई को बातचीत के बाद कोई ठोस फैसला हुआ था, तो वह फैसला जमीन पर कहां है?
अगर ग्रामीणों को कोई लिखित समाधान दिया गया था तो वह जनता के सामने क्यों नहीं रखा गया?
अगर कंपनी ने कोई जिम्मेदारी ली थी तो उसका पालन कितना हुआ?
और अगर प्रशासन ने कोई समयसीमा तय की थी तो उस समयसीमा में क्या कार्रवाई हुई?
जनता को सिर्फ भरोसा नहीं चाहिए, जनता को हिसाब चाहिए।
आज सवाल उस गंदे पानी का भी है जिसे ग्रामीण दूषित बता रहे हैं। सवाल उस दुर्गंध का है जिसकी शिकायत ग्रामीण कर रहे हैं। सवाल यहां आने वाले hazardous और chemical waste को लेकर उठ रही चिंताओं का है। ग्रामीणों का दावा है कि इलाके में लोगों को अस्थमा, एलर्जी और किडनी से जुड़ी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा है।
लेकिन इस मुद्दे पर भी हमारा सवाल बिल्कुल साफ है—
सरकार स्वतंत्र वैज्ञानिक जांच क्यों नहीं करवाती?
पानी की जांच करवाइए।
मिट्टी की जांच करवाइए।
हवा की जांच करवाइए।
रिपोर्ट जनता के सामने रखिए।
अगर पानी साफ है तो जनता को बताइए कि पानी साफ है। अगर पानी दूषित है तो जिम्मेदारी तय कीजिए। और अगर इन स्वास्थ्य समस्याओं का प्लांट या पानी से कोई संबंध नहीं है तो वह भी वैज्ञानिक रिपोर्ट से साफ होना चाहिए।
क्योंकि DK News Nalagarh हवा में तीर नहीं चलाएगा। हम दस्तावेज के साथ सवाल पूछेंगे और मौके के वीडियो के साथ सवाल पूछेंगे।
23 मई 2026 की बैठक के लिखित दस्तावेज में ग्रामीणों की कई चिंताओं का उल्लेख है। इसमें प्लांट का निरीक्षण, वीडियोग्राफी, hazardous waste के उचित निस्तारण, untreated waste, दुर्गंध और waste management से जुड़े मुद्दों पर चर्चा दर्ज है।
तो फिर सवाल यह है कि कागज पर बातें दर्ज होने के बाद जमीन पर बदलाव कितना हुआ?
और हमें शर्म आती है उन नेताओं पर जो जनता के बीच आकर बार-बार आश्वासन देते हैं, लोगों को तसल्ली देते हैं, लेकिन जब ग्राउंड लेवल पर काम की बात आती है तो नतीजा दिखाई नहीं देता।
नेताओं के पास तीज-त्योहारों में जाने का समय है।
शादी समारोहों में पहुंचने का समय है।
कार्यक्रमों में जाने का समय है।
फोटो खिंचवाने और भाषण देने का समय है।
लेकिन इन ग्रामीणों की समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए समय क्यों नहीं है?
क्या जनता सिर्फ वोट देने के समय याद आती है?
चुनाव के समय नेता उन घरों तक पहुंच जाते हैं जहां पैदल रास्ता भी मुश्किल होता है। बीमार व्यक्ति के घर तक वोट मांगने पहुंचने का रास्ता निकाल लिया जाता है। लेकिन जब वही जनता अपनी समस्या लेकर धरने पर बैठती है तो उसके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होने का समय क्यों नहीं मिलता?
और यहां सवाल वर्तमान विधायक से भी है—
अगर आश्वासन दिए गए हैं तो अब उसका हिसाब दीजिए।
कितने आश्वासन दिए गए?
कब तक समाधान होना था?
अब तक क्या कार्रवाई हुई?
कौन-सा विभाग जिम्मेदार है?
और सबसे जरूरी—
माजरा के लोगों की समस्या का अंतिम समाधान आखिर कब होगा?
क्योंकि ग्रामीणों को अब मीठी गोली नहीं चाहिए।
झूठी तसल्ली नहीं चाहिए।
सिर्फ बैठक नहीं चाहिए।
सिर्फ बयान नहीं चाहिए।
सिर्फ फोटो नहीं चाहिए।
जनता को चाहिए—
साफ पानी।
साफ हवा।
सुरक्षित वातावरण।
वैज्ञानिक जांच।
जिम्मेदारी तय होना।
और सबसे बढ़कर—स्थायी समाधान।
अगर ग्रामीणों के आरोप गलत हैं तो सरकार और संबंधित विभाग सामने आएं और जांच करवाकर सच जनता को बताएं।
अगर आरोपों में सच्चाई है तो फिर कार्रवाई होनी चाहिए।
लेकिन इस मुद्दे को बार-बार आश्वासन देकर दबा देना समाधान नहीं है।
18 मई को जनता दूषित हवा, दूषित पानी और पर्यावरण व गांववासियों को हो रहे नुकसान के खिलाफ धरने पर बैठी।
23 मई को बातचीत हुई।
धरना आश्वासन के बाद उठा।
उसके बाद भी आश्वासन चलते रहे।
अब सवाल है—
आखिर आश्वासन की यह कहानी कब खत्म होगी और समाधान की शुरुआत कब होगी?
DK News Nalagarh किसी राजनीतिक पार्टी का प्रवक्ता नहीं है।
हम सिर्फ इतना पूछ रहे हैं—
माजरा के लोगों की आवाज कब सुनी जाएगी?
उनके पानी की जांच कब होगी?
उनकी शिकायतों पर अंतिम फैसला कब होगा?
और जो वादे किए गए, उनका हिसाब जनता को कब मिलेगा?
क्योंकि लोकतंत्र में नेता जनता से बड़े नहीं होते।
नेता जनता के वोट से बनते हैं और जनता को जवाब देना उनकी जिम्मेदारी है।
और अगर इस समस्या का समाधान समय रहते नहीं निकला, तो आने वाले चुनाव में जनता अपने वोट से जवाब देना अच्छी तरह जानती है।
DK News Nalagarh शम्मी राजपूत सवाल पूछता रहेगा—बिना डर, बिना दबाव और बिना किसी की चमचागिरी के।
क्योंकि यह सवाल किसी एक व्यक्ति का नहीं है।
यह सवाल माजरा के लोगों की जिंदगी, उनके पानी और उनके भविष्य का है।
    user_Dk News Nalagarh
    Dk News Nalagarh
    Local News Reporter पंजेहरा, सोलन, हिमाचल प्रदेश•
    29 min ago
  • "दूध प्लांट में 24° (डिग्री) से कम का दूध स्वीकार नहीं किया जा रहा है। इसी नियम के कारण आज तीन बाल्टियां वापस कर दी गई हैं, क्योंकि जांच में उनका तापमान 24° से नीचे पाया गया था।" "दूध प्लांट में 24° (डिग्री) से कम का दूध दत्तनगर मिल्क प्लांट में स्वीकार नहीं किया जा रहा है। इसी नियम के कारण आज तीन बाल्टियां वापस कर दी गई हैं, क्योंकि जांच में उनका तापमान 24° से नीचे पाया गया था।"
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    "दूध प्लांट में 24° (डिग्री) से कम का दूध स्वीकार नहीं किया जा रहा है। इसी नियम के कारण आज तीन बाल्टियां वापस कर दी गई हैं, क्योंकि जांच में उनका तापमान 24° से नीचे पाया गया था।"
"दूध प्लांट में 24° (डिग्री) से कम का दूध दत्तनगर मिल्क प्लांट में स्वीकार नहीं किया जा रहा है। इसी नियम के कारण आज तीन बाल्टियां वापस कर दी गई हैं, क्योंकि जांच में उनका तापमान 24° से नीचे पाया गया था।"
    user_Him News Update
    Him News Update
    रामपुर, शिमला, हिमाचल प्रदेश•
    2 hrs ago
  • रामपुर बुशहर में न्यू बस स्टैंड में परिवहन निगम द्वारा इलेक्ट्रिक बसों के लिए चार्जिंग पवांइट का कार्य जोरों पर #kullutodaynews #himachalpradesh #himachalupdate #MediaPower #himachalkiawaaz #KTN #ATM #shimla #kullu #rampur
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    रामपुर बुशहर में न्यू बस स्टैंड में परिवहन निगम द्वारा  इलेक्ट्रिक बसों के लिए चार्जिंग पवांइट का कार्य जोरों पर
#kullutodaynews #himachalpradesh #himachalupdate #MediaPower #himachalkiawaaz #KTN #ATM #shimla #kullu #rampur
    user_Dev Raj  Thakur
    Dev Raj Thakur
    Farmer निरमंड, कुल्लू, हिमाचल प्रदेश•
    9 hrs ago
  • नेपाल में भोटे कोशी नदी ने बुधवार को ऐसा रौद्र रूप दिखाया कि रसुवा जिले में भारी तबाही मच गई। कृष्ण चंद राणा | पांगी न्यूज़ टुडे नेपाल से बड़ी खबर... नेपाल में भोटे कोशी नदी ने बुधवार को ऐसा रौद्र रूप दिखाया कि रसुवा जिले में भारी तबाही मच गई। तिब्बत सीमा से सटे तिमुरे, रसुवागढ़ी और स्याफ्रुबेसी सहित आसपास के इलाकों में अचानक आई बाढ़ ने घरों, वाहनों, सड़कों और पुलों को अपनी चपेट में ले लिया। बाढ़ की तेज धार के साथ आया मलबा कई इलाकों में तबाही मचाता हुआ आगे बढ़ा। हाइड्रो पावर परियोजनाओं और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचने की खबर है। शुरुआती जानकारी में सात लोगों की मौत की पुष्टि हुई थी और 25 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला गया था। बाद में नेपाल पुलिस की ओर से मृतकों की संख्या बढ़कर 95 तक पहुंचने की सूचना सामने आई। हालांकि, प्रभावित क्षेत्रों में संचार और सड़क संपर्क बाधित होने के कारण नुकसान का पूरा आकलन अभी बाकी है। इस प्राकृतिक आपदा में सुरक्षाकर्मी भी प्रभावित हुए हैं। नेपाल पुलिस मुख्यालय के अनुसार विभिन्न प्रभावित क्षेत्रों में तैनात 28 पुलिसकर्मी लापता बताए गए हैं। इनमें तिमुरे, रसुवागढ़ी, स्याफ्रुबेसी और आसपास के क्षेत्रों में तैनात जवान शामिल हैं। बाढ़ से कई सड़क मार्ग और पुल टूट गए हैं, जिसके चलते राहत और बचाव अभियान में भी मुश्किलें सामने आ रही हैं। नेपाल सरकार ने सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल को राहत एवं बचाव कार्य में लगाया है। हेलीकॉप्टरों के माध्यम से भी लापता लोगों की तलाश की जा रही है। अधिकारियों ने नदी किनारे रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है। वहीं, बाढ़ के कारणों को लेकर अभी अंतिम पुष्टि नहीं हुई है। प्रारंभिक सूचनाओं में तिब्बत क्षेत्र में भूस्खलन अथवा नदी के अस्थायी रूप से अवरुद्ध होने की संभावना जताई जा रही है। नेपाल में भोटे कोशी की इस भीषण बाढ़ ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्रों में अचानक आने वाली बाढ़ और भूस्खलन के खतरे की गंभीरता को सामने ला दिया है। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है और लापता लोगों की तलाश की जा रही है। कृष्ण चंद राणा | पांगी न्यूज़ टुडे
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    नेपाल में भोटे कोशी नदी ने बुधवार को ऐसा रौद्र रूप दिखाया कि रसुवा जिले में भारी तबाही मच गई।
कृष्ण चंद राणा | पांगी न्यूज़ टुडे

नेपाल से बड़ी खबर...
नेपाल में भोटे कोशी नदी ने बुधवार को ऐसा रौद्र रूप दिखाया कि रसुवा जिले में भारी तबाही मच गई। तिब्बत सीमा से सटे तिमुरे, रसुवागढ़ी और स्याफ्रुबेसी सहित आसपास के इलाकों में अचानक आई बाढ़ ने घरों, वाहनों, सड़कों और पुलों को अपनी चपेट में ले लिया।
बाढ़ की तेज धार के साथ आया मलबा कई इलाकों में तबाही मचाता हुआ आगे बढ़ा। हाइड्रो पावर परियोजनाओं और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचने की खबर है।
शुरुआती जानकारी में सात लोगों की मौत की पुष्टि हुई थी और 25 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला गया था। बाद में नेपाल पुलिस की ओर से मृतकों की संख्या बढ़कर 95 तक पहुंचने की सूचना सामने आई। हालांकि, प्रभावित क्षेत्रों में संचार और सड़क संपर्क बाधित होने के कारण नुकसान का पूरा आकलन अभी बाकी है।
इस प्राकृतिक आपदा में सुरक्षाकर्मी भी प्रभावित हुए हैं। नेपाल पुलिस मुख्यालय के अनुसार विभिन्न प्रभावित क्षेत्रों में तैनात 28 पुलिसकर्मी लापता बताए गए हैं। इनमें तिमुरे, रसुवागढ़ी, स्याफ्रुबेसी और आसपास के क्षेत्रों में तैनात जवान शामिल हैं।
बाढ़ से कई सड़क मार्ग और पुल टूट गए हैं, जिसके चलते राहत और बचाव अभियान में भी मुश्किलें सामने आ रही हैं। नेपाल सरकार ने सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल को राहत एवं बचाव कार्य में लगाया है। हेलीकॉप्टरों के माध्यम से भी लापता लोगों की तलाश की जा रही है।
अधिकारियों ने नदी किनारे रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है।
वहीं, बाढ़ के कारणों को लेकर अभी अंतिम पुष्टि नहीं हुई है। प्रारंभिक सूचनाओं में तिब्बत क्षेत्र में भूस्खलन अथवा नदी के अस्थायी रूप से अवरुद्ध होने की संभावना जताई जा रही है।
नेपाल में भोटे कोशी की इस भीषण बाढ़ ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्रों में अचानक आने वाली बाढ़ और भूस्खलन के खतरे की गंभीरता को सामने ला दिया है। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है और लापता लोगों की तलाश की जा रही है।
कृष्ण चंद राणा | पांगी न्यूज़ टुडे
    user_PANGI NEWS TODAY
    PANGI NEWS TODAY
    किताब की दुकान पांगी, चंबा, हिमाचल प्रदेश•
    5 hrs ago
  • मोरनी में बढ़ती चोरी पर ग्रामीणों का ज्ञापन, पुलिस बल बढ़ाने और CCTV लगाने की मांग मोरनी में बढ़ती चोरी की घटनाओं पर ग्रामीणों ने पुलिस उपायुक्त को सौंपा ज्ञापन, पुलिस बल बढ़ाने और CCTV लगाने की मांग मोरनी। मोरनी क्षेत्र में बढ़ रही चोरी और अन्य आपराधिक घटनाओं को लेकर ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों ने पुलिस उपायुक्त, पंचकूला के नाम ज्ञापन सौंपकर क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है। मोरनी पंचायत संगठन के प्रधान मोहित परमार ने वीडियो जारी कर इस संबंध में जानकारी साझा की। ज्ञापन में कहा गया है कि मोरनी क्षेत्र शांत, सुरक्षित और प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में जाना जाता है, लेकिन पिछले कुछ समय से चोरी की घटनाओं में बढ़ोतरी के कारण स्थानीय लोगों में असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। घरों के बाहर खड़े मोटरसाइकिल, कार सहित अन्य वाहनों की चोरी की घटनाओं को लेकर ग्रामीणों ने चिंता जताई है। ग्रामीणों ने मांग की है कि मोरनी पुलिस चौकी में पर्याप्त संख्या में अतिरिक्त पुलिस कर्मचारियों की नियुक्ति की जाए। साथ ही पुलिस गश्त को प्रभावी बनाने के लिए कम से कम चार मोटरसाइकिल राइडर उपलब्ध करवाए जाएं। ज्ञापन में रात के समय खेड़ा बागड़ा और भुड़ मोड़ (किलापुर मार्ग) सहित प्रमुख स्थानों पर विशेष पुलिस चेक पोस्ट और नाकाबंदी लगाने की मांग की गई है। इसके अलावा मोरनी के प्रमुख चौराहों और संवेदनशील स्थानों पर उच्च गुणवत्ता वाले CCTV कैमरे लगाने का सुझाव भी दिया गया है। मोहित परमार ने वीडियो के माध्यम से बताया कि क्षेत्र के ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों की ओर से पुलिस प्रशासन के समक्ष सुरक्षा से जुड़े इन मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया है। उन्होंने पुलिस प्रशासन से चोरी की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने, सक्रिय चोरों और असामाजिक तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने तथा हाल ही में चोरी हुए वाहनों की जल्द बरामदगी की मांग की। उन्होंने क्षेत्रवासियों से भी सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तत्काल पुलिस को देने की अपील की। ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि पुलिस प्रशासन उनकी मांगों पर गंभीरता से कार्रवाई करते हुए मोरनी क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करेगा। ज्ञापन पर मोरनी क्षेत्र के विभिन्न गांवों के सरपंचों, जिला परिषद सदस्य, मोरनी युवा संगठन के पदाधिकारियों और स्थानीय निवासियों के हस्ताक्षर भी बताए गए हैं।
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    मोरनी में बढ़ती चोरी पर ग्रामीणों का ज्ञापन, पुलिस बल बढ़ाने और CCTV लगाने की मांग
मोरनी में बढ़ती चोरी की घटनाओं पर ग्रामीणों ने पुलिस उपायुक्त को सौंपा ज्ञापन, पुलिस बल बढ़ाने और CCTV लगाने की मांग
मोरनी। मोरनी क्षेत्र में बढ़ रही चोरी और अन्य आपराधिक घटनाओं को लेकर ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों ने पुलिस उपायुक्त, पंचकूला के नाम ज्ञापन सौंपकर क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है। मोरनी पंचायत संगठन के प्रधान मोहित परमार ने वीडियो जारी कर इस संबंध में जानकारी साझा की।
ज्ञापन में कहा गया है कि मोरनी क्षेत्र शांत, सुरक्षित और प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में जाना जाता है, लेकिन पिछले कुछ समय से चोरी की घटनाओं में बढ़ोतरी के कारण स्थानीय लोगों में असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। घरों के बाहर खड़े मोटरसाइकिल, कार सहित अन्य वाहनों की चोरी की घटनाओं को लेकर ग्रामीणों ने चिंता जताई है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि मोरनी पुलिस चौकी में पर्याप्त संख्या में अतिरिक्त पुलिस कर्मचारियों की नियुक्ति की जाए। साथ ही पुलिस गश्त को प्रभावी बनाने के लिए कम से कम चार मोटरसाइकिल राइडर उपलब्ध करवाए जाएं।
ज्ञापन में रात के समय खेड़ा बागड़ा और भुड़ मोड़ (किलापुर मार्ग) सहित प्रमुख स्थानों पर विशेष पुलिस चेक पोस्ट और नाकाबंदी लगाने की मांग की गई है। इसके अलावा मोरनी के प्रमुख चौराहों और संवेदनशील स्थानों पर उच्च गुणवत्ता वाले CCTV कैमरे लगाने का सुझाव भी दिया गया है।
मोहित परमार ने वीडियो के माध्यम से बताया कि क्षेत्र के ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों की ओर से पुलिस प्रशासन के समक्ष सुरक्षा से जुड़े इन मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया है। उन्होंने पुलिस प्रशासन से चोरी की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने, सक्रिय चोरों और असामाजिक तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने तथा हाल ही में चोरी हुए वाहनों की जल्द बरामदगी की मांग की।
उन्होंने क्षेत्रवासियों से भी सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तत्काल पुलिस को देने की अपील की। ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि पुलिस प्रशासन उनकी मांगों पर गंभीरता से कार्रवाई करते हुए मोरनी क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करेगा।
ज्ञापन पर मोरनी क्षेत्र के विभिन्न गांवों के सरपंचों, जिला परिषद सदस्य, मोरनी युवा संगठन के पदाधिकारियों और स्थानीय निवासियों के हस्ताक्षर भी बताए गए हैं।
    user_DEV DARSHAN SHARMA PRESS
    DEV DARSHAN SHARMA PRESS
    Local News Reporter पंचकूला, पंचकूला, हरियाणा•
    37 min ago
  • 100 फीट गहरी खाई में गिरा भेड़पालक, साथियों ने पीठ पर उठाकर बचाई जान; ‘जाको राखे साइयां…’ कहावत हुई चरितार्थ। चंबा जिले के चुराह क्षेत्र में एक भेड़पालक के साथ हुए हादसे ने हर किसी को हैरान कर दिया। करीब 100 फीट गहरी खाई में गिरने के बावजूद भेड़पालक की जान बच गई। हादसे के बाद उसके साथियों ने जिस साहस और इंसानियत का परिचय दिया, वह काबिले तारीफ है। घायल साथी को सड़क तक पहुंचाने के लिए उन्होंने उसे अपनी पीठ पर उठाया और कई किलोमीटर का कठिन सफर पैदल तय किया। घटना की तस्वीरें चुराह क्षेत्र की बताई जा रही हैं। जानकारी के अनुसार भेड़पालकों का एक दल हर वर्ष की तरह इस बार भी लाहौल-स्पीति से अपनी भेड़-बकरियों को लेकर वापस अपने घर लौट रहा था। इसी दौरान दल जब तंगेड़ा नाले के समीप पहुंचा तो अचानक एक भेड़पालक का पैर फिसल गया। पैर फिसलते ही उसका संतुलन बिगड़ गया और वह पहाड़ी से करीब 100 फीट नीचे गहरी खाई में जा गिरा। हादसे में भेड़पालक गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद मौके पर मौजूद उसके साथियों में अफरा-तफरी मच गई, लेकिन उन्होंने घबराने के बजाय तुरंत घायल साथी को बचाने के लिए प्रयास शुरू कर दिए। साथियों ने पीठ पर उठाकर तय किया कई किलोमीटर का सफर हादसे की गंभीरता के बावजूद घायल को मौके से सड़क तक पहुंचाना आसान नहीं था। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र और रास्ते की कठिन परिस्थितियों के बीच साथियों ने अदम्य साहस दिखाते हुए घायल भेड़पालक को खाई से बाहर निकाला। सड़क तक पहुंचने के लिए कोई आसान रास्ता नहीं होने के कारण साथियों ने घायल को अपनी पीठ पर उठाया और कई किलोमीटर तक पैदल लेकर चले। इस दौरान उन्होंने न केवल अपने साथी की जान बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया, बल्कि कठिन पहाड़ी परिस्थितियों में भी हिम्मत नहीं हारी। काफी मशक्कत के बाद घायल भेड़पालक को चांजू पहुंचाया गया, जहां उसे प्राथमिक उपचार दिया गया। इसके बाद भूमि कंपनी की एंबुलेंस के माध्यम से घायल को बेहतर उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल चंबा भेजा गया। मुश्किल वक्त में साथियों का हौसला बना जीवन की सबसे बड़ी ताकत हादसा कितना गंभीर था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भेड़पालक करीब 100 फीट गहरी खाई में जा गिरा था। इतनी ऊंचाई से गिरने के बाद भी उसका जीवित बचना किसी चमत्कार से कम नहीं माना जा रहा है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर कहावत “जाको राखे साइयां, मार सके ना कोई” को चरितार्थ कर दिया। वहीं, घायल भेड़पालक के साथियों ने जिस तरह अपनी जान की परवाह किए बिना उसे पीठ पर उठाकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया, वह इंसानियत और आपसी भाईचारे की मिसाल है। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में किसी हादसे के बाद समय पर मदद मिलना बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस घटना में साथियों की तत्परता, हिम्मत और सूझबूझ ने घायल को समय पर उपचार तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। यह घटना यह संदेश भी देती है कि मुश्किल वक्त में अपनों का साथ, हौसला और इंसानियत किसी की जिंदगी बचाने की सबसे बड़ी ताकत बन सकते हैं।
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    100 फीट गहरी खाई में गिरा भेड़पालक, साथियों ने पीठ पर उठाकर बचाई जान; ‘जाको राखे साइयां…’ कहावत हुई चरितार्थ।
चंबा जिले के चुराह क्षेत्र में एक भेड़पालक के साथ हुए हादसे ने हर किसी को हैरान कर दिया। करीब 100 फीट गहरी खाई में गिरने के बावजूद भेड़पालक की जान बच गई। हादसे के बाद उसके साथियों ने जिस साहस और इंसानियत का परिचय दिया, वह काबिले तारीफ है। घायल साथी को सड़क तक पहुंचाने के लिए उन्होंने उसे अपनी पीठ पर उठाया और कई किलोमीटर का कठिन सफर पैदल तय किया।
घटना की तस्वीरें चुराह क्षेत्र की बताई जा रही हैं। जानकारी के अनुसार भेड़पालकों का एक दल हर वर्ष की तरह इस बार भी लाहौल-स्पीति से अपनी भेड़-बकरियों को लेकर वापस अपने घर लौट रहा था। इसी दौरान दल जब तंगेड़ा नाले के समीप पहुंचा तो अचानक एक भेड़पालक का पैर फिसल गया।
पैर फिसलते ही उसका संतुलन बिगड़ गया और वह पहाड़ी से करीब 100 फीट नीचे गहरी खाई में जा गिरा। हादसे में भेड़पालक गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद मौके पर मौजूद उसके साथियों में अफरा-तफरी मच गई, लेकिन उन्होंने घबराने के बजाय तुरंत घायल साथी को बचाने के लिए प्रयास शुरू कर दिए।
साथियों ने पीठ पर उठाकर तय किया कई किलोमीटर का सफर
हादसे की गंभीरता के बावजूद घायल को मौके से सड़क तक पहुंचाना आसान नहीं था। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र और रास्ते की कठिन परिस्थितियों के बीच साथियों ने अदम्य साहस दिखाते हुए घायल भेड़पालक को खाई से बाहर निकाला।
सड़क तक पहुंचने के लिए कोई आसान रास्ता नहीं होने के कारण साथियों ने घायल को अपनी पीठ पर उठाया और कई किलोमीटर तक पैदल लेकर चले। इस दौरान उन्होंने न केवल अपने साथी की जान बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया, बल्कि कठिन पहाड़ी परिस्थितियों में भी हिम्मत नहीं हारी।
काफी मशक्कत के बाद घायल भेड़पालक को चांजू पहुंचाया गया, जहां उसे प्राथमिक उपचार दिया गया। इसके बाद भूमि कंपनी की एंबुलेंस के माध्यम से घायल को बेहतर उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल चंबा भेजा गया।
मुश्किल वक्त में साथियों का हौसला बना जीवन की सबसे बड़ी ताकत
हादसा कितना गंभीर था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भेड़पालक करीब 100 फीट गहरी खाई में जा गिरा था। इतनी ऊंचाई से गिरने के बाद भी उसका जीवित बचना किसी चमत्कार से कम नहीं माना जा रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर कहावत “जाको राखे साइयां, मार सके ना कोई” को चरितार्थ कर दिया। वहीं, घायल भेड़पालक के साथियों ने जिस तरह अपनी जान की परवाह किए बिना उसे पीठ पर उठाकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया, वह इंसानियत और आपसी भाईचारे की मिसाल है।
दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में किसी हादसे के बाद समय पर मदद मिलना बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस घटना में साथियों की तत्परता, हिम्मत और सूझबूझ ने घायल को समय पर उपचार तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। यह घटना यह संदेश भी देती है कि मुश्किल वक्त में अपनों का साथ, हौसला और इंसानियत किसी की जिंदगी बचाने की सबसे बड़ी ताकत बन सकते हैं।
    user_हिम संदेश
    हिम संदेश
    Social Media Manager पांगी, चंबा, हिमाचल प्रदेश•
    5 hrs ago
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