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सीएचसी पट्टी में डॉक्टर के चैंबर के बाहर लिखा है,मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव्स (एमआर) Not Allowed फिर डॉक्टर के चैंबर में क्या कर रहे एमआर (MR) ?
नीरज पांडेय पत्रकार प्रतापगढ़
सीएचसी पट्टी में डॉक्टर के चैंबर के बाहर लिखा है,मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव्स (एमआर) Not Allowed फिर डॉक्टर के चैंबर में क्या कर रहे एमआर (MR) ?
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- पट्टी कोतवाली क्षेत्र के उसरौली गांव निवासनी सावित्री पत्नी हरिप्रसाद शनिवार की शाम पट्टी पुलिस को प्रार्थना पत्र देकर आरोपित किया गेहूं मटाई के लिए घर से खेत की तरफ जा रही थी पड़ोस के एक व्यक्ति उसका रास्ता रोकते हुए कहा कि इधर से मत जाओ महिला ने कहा कि यही रास्ता है तो किधर से जाएं किसी बात पर गाली-गलौज शुरू हो गई महिला के विरोध करने पर दो-तीन की संख्या में पड़ोसियों ने महिला को मारपीट कर घायल कर दिया हल्ला गुहार मचाने पर गांव के तमाम लोग इकट्ठा हुए तब महिला की जान बच सकी आरोपीगण जान से मारने की ऐलानियां धमकी देते हुए चले गए,पुलिस मामले की जांच पड़ताल में जुटी।1
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- *बेलाही अग्निकांड: 50 बीघा से अधिक फसल राख, 50 से ज्यादा किसान प्रभावित—प्रशासन पर लापरवाही के आरोप* लम्भुआ, सुल्तानपुर कोतवाली लम्भुआ क्षेत्र के बेलाही गांव में लगी भीषण आग ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। करीब 50 बीघा से अधिक फसल जलकर राख हो गई, जिससे लगभग 50 से अधिक किसान प्रभावित हुए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सूचना देने के बावजूद फायर ब्रिगेड समय से नहीं पहुंची, जिससे नुकसान और बढ़ गया। घटना के दौरान ना ही राजस्व विभाग की टीम समय पर पहुंची और ना ही पुलिसकर्मी मौके पर नजर आए। ऐसे में ग्रामीणों ने अपनी सूझबूझ और एकजुटता से आग पर काबू पाया। प्रभावित किसानों में प्रमुख नाम: अच्छेलाल मिश्रा राधेश्याम मिश्रा राम मिलन मिश्रा हरकेश मिश्रा विद्या प्रसाद मिश्रा बांकेलाल मिश्रा रामलाल मिश्रा ओम प्रकाश शुक्ला हवालदार मिश्रा (इसके अलावा लगभग 50 से अधिक किसान प्रभावित बताए जा रहे हैं) ग्रामीणों का कहना है कि अगर फायर ब्रिगेड समय पर पहुंच जाती तो इतना बड़ा नुकसान टाला जा सकता था। आग लगने का कारण विद्युत शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है, जिसकी निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है। ग्रामीणों की मांग: सभी प्रभावित किसानों का तत्काल सर्वे कर मुआवजा दिया जाए शॉर्ट सर्किट की निष्पक्ष जांच हो फायर ब्रिगेड व प्रशासन की लापरवाही पर कार्रवाई हो2
- सेठ पन्नालाल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, पट्टी एक बार फिर गंभीर आरोपों को लेकर चर्चा में है। ताज़ा मामला डॉक्टर द्वारा मरीजों को बाहर की महंगी दवाएं लिखने से जुड़ा है, जिससे गरीब मरीजों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सूत्रों और मरीजों के अनुसार, सरकारी अस्पताल में उपलब्ध दवाओं के बावजूद डॉक्टर राकेश द्वारा लगातार बाहर की दवाएं लिखी जा रही हैं। बताया जा रहा है कि एक रुपये का पर्चा कटवाने के बाद मरीजों को हजारों रुपये की दवा बाजार से खरीदनी पड़ रही है। इससे अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। मरीजों का आरोप है कि जब अस्पताल में दवाएं उपलब्ध हैं, तो फिर उन्हें बाहर से दवा लेने के लिए क्यों मजबूर किया जा रहा है। कई मरीजों ने यह भी कहा कि इस मनमानी के कारण गरीब और असहाय लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। सूत्रों के हवाले से यह भी जानकारी सामने आई है कि कुछ कर्मचारियों का वेतन समय से नहीं मिल रहा है। वहीं, एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर दावा किया कि बाहर की दवाओं पर 60% तक कमीशन मिलने की बात कही जा रही है, जिससे इस तरह की गतिविधियों को बढ़ावा मिल रहा है। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि मामला लगातार सामने आने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी अब तक इस पर सख्त कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे हैं। यदि आरोप सही हैं, तो यह सीधे तौर पर सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की साख पर सवाल है। *प्रशासन से मांग* स्थानीय लोगों और मरीजों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में मरीजों का शोषण रोका जा सके। *यह खबर मरीजों व सूत्रों से मिली जानकारी पर आधारित है,* जिसकी स्वतंत्र पुष्टि की जानी बाकी है।) बाकी इस पर्ची की पुष्टि मेरे खबर के द्वारा नहीं की जाती मरीज के द्वारा बताई गई इस पर्ची को मैं शेयर किया हूं उनका कहना है कि डॉक्टर राकेश ने यह बाहर की दवा लिखी है।1