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बागेश्वर जिले के कपकोट में हल्की सी बारिश होते ही दणो गधेरा उफान पर आ गया है, जिससे गधेरे के दोनों ओर रहने वाले हजारों लोगों का संपर्क पूरी तरह कट गया है। इस गधेरे का जलस्तर बढ़ते ही लोगों की आवाजाही ठप हो जाती है, जिससे स्कूली बच्चों, मरीजों और ग्रामीणों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। उत्तराखंड गठन के बाद से कई सरकारें आईं और चली गईं, लेकिन इस महत्वपूर्ण स्थान पर आज तक एक पुल का भी निर्माण नहीं हो सका। यही वजह है कि हर मानसून में लोग जान जोखिम में डालकर गधेरा पार करने को मजबूर हैं। एक बारिश होते ही रफ्तार थम जाती है और दणो गधेरे ने एक बार फिर आवाजाही रोककर विकास के तमाम दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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बागेश्वर जिले के कपकोट में हल्की सी बारिश होते ही दणो गधेरा उफान पर आ गया है, जिससे गधेरे के दोनों ओर रहने वाले हजारों लोगों का संपर्क पूरी तरह कट गया है। इस गधेरे का जलस्तर बढ़ते ही लोगों की आवाजाही ठप हो जाती है, जिससे स्कूली बच्चों, मरीजों और ग्रामीणों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। उत्तराखंड गठन के बाद से कई सरकारें आईं और चली गईं, लेकिन इस महत्वपूर्ण स्थान पर आज तक एक पुल का भी निर्माण नहीं हो सका। यही वजह है कि हर मानसून में लोग जान जोखिम में डालकर गधेरा पार करने को मजबूर हैं। एक बारिश होते ही रफ्तार थम जाती है और दणो गधेरे ने एक बार फिर आवाजाही रोककर विकास के तमाम दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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- गोरखपुर में आयोजित विकास परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बड़ा बयान देते हुए भू-माफियाओं और अवैध कब्जाधारियों को सख्त चेतावनी दी है। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने गोरखपुर के बदलते स्वरूप पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि कभी विकास से पिछड़ा माना जाने वाला गोरखपुर आज फोर-लेन सड़कों, फ्लाईओवरों, रेलवे ओवरब्रिज, विश्वविद्यालय, स्वास्थ्य सेवाओं और नई विकास परियोजनाओं के साथ तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने कानून व्यवस्था, रोजगार, शिक्षा और क्षेत्रीय विकास को लेकर भी एक बड़ा संदेश दिया है। गोरखपुर में शुरू हुई इन नई परियोजनाओं, भू-माफियाओं को मिली चेतावनी और तेजी से बदलती तस्वीर के माध्यम से यह सवाल भी सामने आया है कि क्या यह उत्तर प्रदेश के विकास का नया मॉडल बन सकता है।1
- उत्तराखंड के चमोली जिले के अंतर्गत आने वाली ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निर्माण को लेकर चौतरफा आवाज उठाने की पुरजोर वकालत की जा रही है। स्थानीय स्तर पर यह स्पष्ट और कड़ा संदेश दिया जा रहा है कि जब तक क्षेत्र में एम्स का निर्माण नहीं होगा, तब तक हमारा वोट किसी को नहीं मिलेगा। इस मांग को लेकर चारों तरफ से आवाज गुंजाने की अपील की जा रही है ताकि आगामी समय में मतदान को सीधे तौर पर इस आवश्यक स्वास्थ्य सुविधा के मुद्दे से जोड़ा जा सके और परिवर्तन लाया जा सके।1
- नैनीताल के बेतालघाट में उन लोगों के लिए जो कभी समझौता नहीं करते, स्कॉर्पियो-एन हर बार कुछ अधिक प्रदान करती है। इस स्कॉर्पियो-एन की शुरुआती कीमत ESR ₹13.49 लाख* है।2
- सूर्य में इन दिनों लगातार जबरदस्त विस्फोट हो रहे हैं और अब एक नया सनस्पॉट (सौर धब्बा) एआर 4482 धीरे-धीरे पृथ्वी की दिशा की ओर मुड़ रहा है, जो बड़े सौर तूफानों का कारण बन सकता है। आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (एरीज) के पूर्व निदेशक और सौर विज्ञानी डॉ. वहाब उद्दीन के अनुसार, यह 25वां सोलर साइकिल है जो अब तक रिकॉर्डतोड़ साबित हुआ है। पिछले करीब डेढ़ साल के दौरान सूर्य की सतह पर दर्जनों बड़े विस्फोट हो चुके हैं और यह वर्तमान में भी काफी आक्रामक बना हुआ है। हाल ही में हुए एक विस्फोट से एक्स 1.3 क्लास की सौर ज्वाला उत्पन्न हुई थी, जबकि बीते दिनों इस सनस्पॉट से एम 4 क्लास की ज्वाला निकली, जिससे करीब 10 लाख किलोमीटर लंबे क्षेत्र में गर्म प्लाज्मा अंतरिक्ष में फैल गया, हालांकि इसका अधिकांश हिस्सा वापस सूर्य की सतह पर गिर गया था। अब पृथ्वी की दिशा में बढ़ रहा यह शक्तिशाली सनस्पॉट एआर 4482 और अधिक सक्रिय होकर एक्स और एम श्रेणी की बड़ी ज्वालाओं को जन्म देगा, जिससे बड़े भू-चुंबकीय सौर तूफान पैदा होंगे। सौर विज्ञानियों ने चेतावनी दी है कि हालांकि इन तूफानों के कारण पृथ्वी के ध्रुवों पर ऑरोरा के रूप में खूबसूरत रोशनी दिखाई दे सकती है, लेकिन इसके साथ ही सैटेलाइट, पावर ग्रिड और रेडियो सिग्नलों पर भी इसका बुरा असर पड़ने की पूरी आशंका है। इस पूरे घटनाक्रम पर भारत का पहला ऐतिहासिक सौर अंतरिक्षयान आदित्य एल 1 निरंतर निगरानी रख रहा है। आदित्य एल 1 इस सोलर साइकिल के दौरान सूर्य पर हुए सनस्पॉट और विस्फोटों को अपने कैमरे में कैद कर चुका है और लगातार इसके आंकड़े इसरो को भेज रहा है। सूर्य में हो रहे इन जबरदस्त विस्फोटों के कारण आने वाले दिनों में सौर तूफानों का खतरा और अधिक बढ़ने वाला है।3
- नैनीताल के गरमपानी में राष्ट्रीय राजमार्ग-87 (नया 109) पर स्थित रामगढ़ पुल पर भारी और मालवाहक वाहनों के आवागमन पर 20 जुलाई 2026 तक 24 घंटे के लिए पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। दरअसल, 11 जुलाई 2026 को हुई अत्यधिक वर्षा के कारण रामगढ़ पुल के बाएं एबटमेंट के डाउनस्ट्रीम की विंग वॉल करीब 12 मीटर तक क्षतिग्रस्त हो गई है। इसके चलते वर्तमान में पुल की चौड़ाई घटकर सिर्फ 3.50 मीटर ही रह गई है। ऐसे में भारी वाहनों की आवाजाही से पुल और एप्रोच मार्ग को और ज्यादा नुकसान पहुंचने की आशंका को देखते हुए सुरक्षा के लिहाज से प्रशासन द्वारा यह निर्णय लिया गया है। विंग वॉल की मरम्मत का काम पूरा होने तक भारी वाहनों का आवागमन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। यातायात सुचारू बनाए रखने के लिए प्रशासन ने एक विस्तृत डायवर्जन प्लान लागू किया है। इसके तहत अल्मोड़ा से हल्द्वानी जाने वाले भारी और मालवाहक वाहन अब क्वारब–नथुवाखान–रामगढ़–भवाली होकर हल्द्वानी जाएंगे, जबकि रानीखेत से हल्द्वानी जाने वाले वाहनों को खैरना–क्वारब–नथुवाखान–रामगढ़–भवाली मार्ग का उपयोग करना होगा। इसी तरह, हल्द्वानी से अल्मोड़ा जाने वाले वाहनों को खुटानी मार्ग से और अन्य वाहनों को भवाली–रामगढ़–नथुवाखान–क्वारब होकर भेजा जाएगा। हल्द्वानी से रानीखेत जाने वाले सभी भारी वाहन भवाली–रामगढ़–नथुवाखान–क्वारब–खैरना होकर जाएंगे, जबकि नैनीताल व ज्योलीकोट से अल्मोड़ा और रानीखेत जाने वाले वाहनों को भवाली–रामगढ़–नथुवाखान–क्वारब मार्ग से गुजारा जाएगा। इस डायवर्जन व्यवस्था से सेना के वाहनों, गैस, तेल, यात्री वाहनों और अन्य अति आवश्यक सामग्री लेकर चलने वाले वाहनों को पूरी तरह मुक्त रखा गया है। यातायात पुलिस नैनीताल ने सभी भारी व मालवाहक वाहनों के स्वामियों और चालकों से अपील की है कि वे इस निर्धारित डायवर्जन प्लान का कड़ाई से पालन करें और सुरक्षित यात्रा के लिए पुलिस निर्देशों का पूरा सहयोग करें।3
- नैनीताल के हिमालयन बॉटनिकल गार्डन में झाड़ियों की सफाई के दौरान एक अत्यंत दुर्लभ और विषैला 'व्हाइट लिप्ड पिट वाइपर' सांप मिला है। इस गार्डन में पहली बार इस विशेष प्रजाति की मौजूदगी दर्ज की गई है। कर्मचारियों की सूचना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए वन विभाग की रेस्क्यू टीम ने मौके पर पहुंचकर सांप को सुरक्षित पकड़ा और उसे रिहायशी इलाके से दूर एक संरक्षित वन क्षेत्र में छोड़ दिया। वन बीट अधिकारी अरविंद कुमार ने बताया कि 'ट्राइमेरेसुरस अल्बोलाब्रिस' वैज्ञानिक नाम वाला यह सांप आमतौर पर हिमालयी क्षेत्रों और दक्षिण-पूर्व एशिया में पाया जाता है। यह दो से तीन फीट लंबा, चमकदार हरे रंग का एक निशाचर जीव है, जिसकी मुख्य पहचान इसके सफेद होंठ (व्हाइट लिप) हैं। यह सांप खतरनाक 'हेमोटॉक्सिन' जहर से युक्त होता है, जो सीधे मानव रक्त और ऊतकों को प्रभावित करता है। इसके साथ ही वन विभाग ने जनता से अपील की है कि सांप दिखने पर उसे मारने के बजाय तुरंत विभाग को सूचित करें।1
- नैनीताल के बेतालघाट में उन लोगों के लिए जो कभी समझौता नहीं करते, स्कॉर्पियो-एन (Scorpio-N) हर बार पहले से अधिक देने का वादा करती है। इस गाड़ी की शुरुआती कीमत ₹13.49 लाख* (ESR) तय की गई है।2
- बागेश्वर जिले के कपकोट में हल्की सी बारिश होते ही दणो गधेरा उफान पर आ गया है, जिससे गधेरे के दोनों ओर रहने वाले हजारों लोगों का संपर्क पूरी तरह कट गया है। इस गधेरे का जलस्तर बढ़ते ही लोगों की आवाजाही ठप हो जाती है, जिससे स्कूली बच्चों, मरीजों और ग्रामीणों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। उत्तराखंड गठन के बाद से कई सरकारें आईं और चली गईं, लेकिन इस महत्वपूर्ण स्थान पर आज तक एक पुल का भी निर्माण नहीं हो सका। यही वजह है कि हर मानसून में लोग जान जोखिम में डालकर गधेरा पार करने को मजबूर हैं। एक बारिश होते ही रफ्तार थम जाती है और दणो गधेरे ने एक बार फिर आवाजाही रोककर विकास के तमाम दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।1