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राज्य सरकार द्वारा चलाए गए ग्रामीण सेवा शिविर का आयोजन 2026 में ग्राम पंचायत पटोंदा में किया गया। इस शिविर में श्री महावीर जी तहसीलदार हरसहाय मीना और पंचायत ग्राम विकास अधिकारी ने एक प्रार्थी को मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया। शिविर में सहकारी विभाग के श्याम सिंह, विद्युत विभाग, सार्वजनिक निर्माण विभाग, चिकित्सा विभाग, रसद विभाग की प्रवर्तन निरीक्षक सुनीता मीणा, शिक्षा विभाग और कृषि विभाग सहित राज्य सरकार के सभी विभागों के कर्मचारी और अधिकारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने राज्य सरकार की योजनाओं के बारे में जानकारी प्रदान की और मौके पर ही विभिन्न परिवादों का निस्तारण किया गया।
Bajrang singh Rajasthan patrika
राज्य सरकार द्वारा चलाए गए ग्रामीण सेवा शिविर का आयोजन 2026 में ग्राम पंचायत पटोंदा में किया गया। इस शिविर में श्री महावीर जी तहसीलदार हरसहाय मीना और पंचायत ग्राम विकास अधिकारी ने एक प्रार्थी को मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया। शिविर में सहकारी विभाग के श्याम सिंह, विद्युत विभाग, सार्वजनिक निर्माण विभाग, चिकित्सा विभाग, रसद विभाग की प्रवर्तन निरीक्षक सुनीता मीणा, शिक्षा विभाग और कृषि विभाग सहित राज्य सरकार के सभी विभागों के कर्मचारी और अधिकारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने राज्य सरकार की योजनाओं के बारे में जानकारी प्रदान की और मौके पर ही विभिन्न परिवादों का निस्तारण किया गया।
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- राज्य सरकार द्वारा चलाए गए ग्रामीण सेवा शिविर का आयोजन 2026 में ग्राम पंचायत पटोंदा में किया गया। इस शिविर में श्री महावीर जी तहसीलदार हरसहाय मीना और पंचायत ग्राम विकास अधिकारी ने एक प्रार्थी को मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया। शिविर में सहकारी विभाग के श्याम सिंह, विद्युत विभाग, सार्वजनिक निर्माण विभाग, चिकित्सा विभाग, रसद विभाग की प्रवर्तन निरीक्षक सुनीता मीणा, शिक्षा विभाग और कृषि विभाग सहित राज्य सरकार के सभी विभागों के कर्मचारी और अधिकारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने राज्य सरकार की योजनाओं के बारे में जानकारी प्रदान की और मौके पर ही विभिन्न परिवादों का निस्तारण किया गया।1
- हिन्डौन सिटी में रिफाइंड तेल की बड़े पैमाने पर कालाबाजारी सामने आई है, जहाँ असली मार्का की जगह नकली मार्का 'सोना सिक्का' रिफाइंड तेल धड़ल्ले से बेचा जा रहा है। यह गंभीर स्थिति आमजन के स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा पैदा कर रही है, क्योंकि नकली तेल की बिक्री से जनजीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका है।1
- देश में जातिवाद के अस्तित्व और इसके भविष्य को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रश्न उठाया गया है। इस बात पर विचार किया जा रहा है कि क्या भारत से जातिवाद की समस्या को पूरी तरह से समाप्त किया जा सकता है या नहीं। इसके साथ ही, यह भी पूछा गया है कि यदि इस देश से जातिवाद पूरी तरह से मिट जाए, तो इसके क्या परिणाम होंगे और समाज पर इसका क्या असर पड़ेगा।1
- राजस्थान के करौली जिले के भैसा गांव में सड़कों के अभाव के कारण गंभीर जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है, जिससे गांव का बाजार एक स्थायी तालाब में तब्दील हो गया है। इस जलभराव के कारण भैसा गांव के बाजार को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।1
- हिंडौन सिटी के खरेटा रोड स्थित एक निजी अस्पताल में डीएनसी (DNC) के तीन दिन बाद रविवार को एक महिला की मृत्यु हो गई। नई मंडी थाना पुलिस ने सोमवार को मृतका का जिला अस्पताल की मोर्चरी में पोस्टमार्टम कराकर शव परिजनों को सौंप दिया। जिला जाटव समाज सुधार समिति 360 गांव के हिंडौन तहसील अध्यक्ष बबलू चौरसिया ने इस घटना की जानकारी दी। मृतका की पहचान श्री महावीरजी के नौरंगाबाद निवासी पुष्पा देवी जाटव पत्नी भंवर सिंह के रूप में हुई है, जो तीन माह की गर्भवती थीं। पुष्पा देवी 19 जून को अपनी ननद अनीता (निवासी मनेमा) के साथ गर्भ में पल रहे बच्चे की जांच कराने निजी अस्पताल पहुंची थीं। वहां चिकित्सक ने जांच के बाद बच्चा खराब होने की जानकारी देते हुए डीएनसी कराने की सलाह दी। उसी दिन शाम को पुष्पा देवी को अस्पताल में भर्ती कर डीएनसी की गई। इसके कुछ देर बाद उन्हें पेट में तेज दर्द हुआ, जिस पर डॉक्टर के उपचार के बाद दर्द कम हुआ और उन्हें रात में छुट्टी दे दी गई। 20 जून को पुष्पा को एक बार फिर पेट दर्द हुआ, जिस पर परिजन उन्हें दोबारा उसी निजी अस्पताल ले गए। डॉक्टर के उपचार से दर्द कम होने पर उन्हें फिर घर भेज दिया गया। घर पर तबीयत बिगड़ने पर परिजन उन्हें जिला अस्पताल ले गए, जहां से उपचार के बाद उनकी मां उन्हें ऑटो से बेरखौ ले जा रही थीं। जटनगला नदी के पास उनकी तबीयत फिर बिगड़ गई और मां उन्हें दोबारा जिला अस्पताल लेकर पहुंचीं, जहां रविवार को पुष्पा की मौत हो गई। चिकित्सकों ने शव को मोर्चरी में रखवाया, जिसका पोस्टमार्टम सोमवार को परिजनों की मौजूदगी में करवाकर शव उन्हें सौंप दिया गया।1
- करौली जिले के श्यामपुर मूंडरी में नौ गांवों के प्रतिनिधियों ने खंडीप महापंचायत के समर्थन में एक बैठक आयोजित की। इस महत्वपूर्ण बैठक में यह निर्णय लिया गया कि सभी नौ गांवों के ग्रामीण कल एक साथ मिलकर धरना स्थल की ओर कूच करेंगे।1
- राजस्थान के हिंडौन सिटी में 'शुभम एंटरप्राइजेज' द्वारा बेचे जा रहे नकली सारस घी और नकली रिफाइंड तेल का सेवन करने से मासूम बच्चों सहित कई लोगों के बीमार पड़ने की अत्यंत दुखद खबर सामने आई है। इस घटना को पैसों के लालच में आम जनता की सेहत और बच्चों की जान के साथ किया गया घोर निंदनीय खिलवाड़ बताया गया है। इस नकली माल के काले कारोबार से एक तरफ राजस्थान सरकार को करोड़ों रुपये की जीएसटी का चूना लगाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर घरों में 'जहर' परोसा जा रहा है। आरोप है कि यह पूरा घोटाला भ्रष्ट अधिकारियों की शह पर चल रहा है और इसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन से पुरजोर मांग की गई है कि पीड़ित बच्चों के इलाज की उचित व्यवस्था की जाए, संबंधित फर्म 'शुभम एंटरप्राइजेज' को तुरंत सीज किया जाए और इस पूरे मामले के दोषियों को तत्काल जेल भेजा जाए।1
- मेघराज मीणा नारौली डांग की कलम से लिखे अनुसार, खण्डीप और उसके आसपास के करीब 25 गांवों में एक अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिल रहा है। यहाँ माता-बहनें, बड़े-बुजुर्ग और छोटे-छोटे बच्चे आने-जाने वाले लोगों को हाथ जोड़कर ठंडा नींबू पानी, कोल्ड ड्रिंक और नाश्ते का वितरण कर रहे हैं। इस आयोजन को अश्वमेघ यज्ञ की आहुति के समान बताया जा रहा है, जो खण्डीप की धरा पर हो रहा है। इस विराट आयोजन में, कमेटी, कार्यकर्ता और हजारों सेवकों के पैरों में रोज़ धूप में घूमने से छाले पड़ चुके हैं, फिर भी उनके चेहरे पर कोई शिकन नहीं दिखती। लगभग 400-500 महिला-पुरुष बिना रुके, कई घंटों तक हाथों में बीजना लेकर आगंतुकों को हवा कर रहे हैं। यहाँ तक कि 70-80 साल के बुजुर्ग भी हाथ जोड़कर व्यवस्था संभाल रहे हैं, जिनमें कहीं कोई थकान या शिकन का भाव नहीं है। इस महापड़ाव में ना कोई राजनीति, ना कोई पार्टी, ना कोई क्षेत्र और ना ही कोई जाति की भावना है; बल्कि सभी किसान एक अविश्वसनीय एकता का प्रदर्शन कर रहे हैं। वक्ताओं द्वारा सहज और संविधान के दायरे में भाषण दिए जा रहे हैं। यहाँ हर व्यक्ति गांव के मुख्य द्वार से प्रवेश करते ही खुद को जिम्मेदार मानता है, जिसके हाथ अभिवादन के लिए और सिर सम्मान के लिए झुके रहते हैं। इसे सर्व समाज का समुद्र मंथन बताया गया है, जो मात्र एक आंदोलन नहीं बल्कि संविधान पर चलने वालों के लिए एक चुनौतीपूर्ण परीक्षा है, जिसकी तैयारी अब तक जोरों पर चल रही है। जनसमूह की भावना अपने चरम पर है, और लेखक का मानना है कि यदि किसी ने इस 'अश्वमेघ यज्ञ की आहुति ज्वाला' के दर्शन नहीं किए हैं, तो वे जीवन के सबसे बेहतरीन और भावुक क्षणों से वंचित हो रहे हैं। लेखक इस बात पर गर्व महसूस करने का आह्वान करते हैं कि उन्होंने एक सभ्य, संविधान को मानने वाली और समझदार कौम में जन्म लिया है।1