राजधानी लखनऊ के नाका हिंडोला थाना क्षेत्र में इन दिनों बिजली विभाग के नाम पर अवैध वसूली करने वाले एक शातिर गिरोह की सक्रियता का सनसनीखेज मामला सामने आया है। लेकिन अब इस बड़े खुलासे के बाद नाका पुलिस की कार्यप्रणाली पर ही बेहद गंभीर और दागदार करने वाले आरोप लग रहे हैं। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, नाका पुलिस ने चेकिंग के दौरान विभागीय सतर्कता के आधार पर चार फर्जी बिजली कर्मियों को दबोचा था। पकड़े गए आरोपियों में खुद को फर्जी SDO बताने वाला मकसूद आलम, फर्जी J.E. आफताब आलम और उनके दो फर्जी कर्मचारी शाहबाज व रेहान शामिल थे। हालांकि, इस बड़े भंडाफोड़ के बाद नाका थाना पुलिस पर आरोप है कि उन्होंने सभी आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजने के बजाय 'खेल' कर दिया। जानकारी के मुताबिक, पुलिसकर्मियों ने गिरोह के दो सदस्यों से ₹30-30 हजार की मोटी रकम (कुल ₹60,000) ऐंठकर उन्हें चुपचाप थाने से रिहा कर दिया। परिणामस्वरूप, जहां जनता को ठगने वाले पूरे गिरोह को जेल भेजा जाना चाहिए था, वहीं पुलिस की इस कथित मेहरबानी के कारण दो शातिर जालसाज आज भी खुलेआम बाहर घूम रहे हैं। इस पूरे लेनदेन और फर्जीवाड़े की पड़ताल करने के लिए जब स्थानीय पत्रकारों ने नाका थाना प्रभारी के सरकारी CUG मोबाइल नंबर पर संपर्क करने की कोशिश की, तो उन्होंने ज़िम्मेदारी भरा जवाब देने के बजाय फोन को डिस्कनेक्ट कर दिया। विभागीय नियमों के अनुसार, पुलिस प्रभारियों को सरकारी CUG नंबर इसलिए दिए जाते हैं ताकि वे पीड़ित जनता की समस्याओं का त्वरित निवारण कर सकें और मीडिया को सही तथ्यों से अवगत करा सकें। लेकिन नाका थाने में CUG नंबर पर यह रवैया साफ दर्शाता है कि मामले में कुछ ऐसा है जिसे दबाने की कोशिश की जा रही है। यह गिरोह खुद को बिजली विभाग (लेसा) की रेड टीम या प्रवर्तन दल बताकर सीधे उपभोक्ताओं के घरों और दुकानों में घुस जाता था। ये लोग मीटर में कमियां निकालने या बिजली चोरी का फर्जी केस बनाने का डर दिखाकर आम जनता से मौके पर ही हजारों रुपये की अवैध वसूली करते थे। हालांकि, पुलिस विभाग की तरफ से इस खबर को लेकर अभी तक कोई जवाब नहीं दिया गया है।
राजधानी लखनऊ के नाका हिंडोला थाना क्षेत्र में इन दिनों बिजली विभाग के नाम पर अवैध वसूली करने वाले एक शातिर गिरोह की सक्रियता का सनसनीखेज मामला सामने आया है। लेकिन अब इस बड़े खुलासे के बाद नाका पुलिस की कार्यप्रणाली पर ही बेहद गंभीर और दागदार करने वाले आरोप लग रहे हैं। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, नाका पुलिस ने चेकिंग के दौरान विभागीय सतर्कता के आधार पर चार फर्जी बिजली कर्मियों को दबोचा था। पकड़े गए आरोपियों में खुद को फर्जी SDO बताने वाला मकसूद आलम, फर्जी J.E. आफताब आलम और उनके दो फर्जी कर्मचारी शाहबाज व रेहान शामिल थे। हालांकि, इस बड़े भंडाफोड़ के बाद नाका थाना पुलिस पर आरोप है कि उन्होंने सभी आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजने के बजाय 'खेल' कर दिया। जानकारी के मुताबिक, पुलिसकर्मियों ने गिरोह के दो सदस्यों से ₹30-30 हजार की मोटी रकम (कुल ₹60,000) ऐंठकर उन्हें चुपचाप थाने से रिहा कर दिया। परिणामस्वरूप, जहां जनता को ठगने वाले पूरे गिरोह को जेल भेजा जाना चाहिए था, वहीं पुलिस की इस कथित मेहरबानी के कारण दो शातिर जालसाज आज भी खुलेआम बाहर घूम रहे हैं। इस पूरे लेनदेन और फर्जीवाड़े की पड़ताल करने के लिए जब स्थानीय पत्रकारों ने नाका थाना प्रभारी के सरकारी CUG मोबाइल नंबर पर संपर्क करने की कोशिश की, तो उन्होंने ज़िम्मेदारी भरा जवाब देने के बजाय फोन को डिस्कनेक्ट कर दिया। विभागीय नियमों के अनुसार, पुलिस प्रभारियों को सरकारी CUG नंबर इसलिए दिए जाते हैं ताकि वे पीड़ित जनता की समस्याओं का त्वरित निवारण कर सकें और मीडिया को सही तथ्यों से अवगत करा सकें। लेकिन नाका थाने में CUG नंबर पर यह रवैया साफ दर्शाता है कि मामले में कुछ ऐसा है जिसे दबाने की कोशिश की जा रही है। यह गिरोह खुद को बिजली विभाग (लेसा) की रेड टीम या प्रवर्तन दल बताकर सीधे उपभोक्ताओं के घरों और दुकानों में घुस जाता था। ये लोग मीटर में कमियां निकालने या बिजली चोरी का फर्जी केस बनाने का डर दिखाकर आम जनता से मौके पर ही हजारों रुपये की अवैध वसूली करते थे। हालांकि, पुलिस विभाग की तरफ से इस खबर को लेकर अभी तक कोई जवाब नहीं दिया गया है।
- राजधानी लखनऊ के नाका हिंडोला थाना क्षेत्र में इन दिनों बिजली विभाग के नाम पर अवैध वसूली करने वाले एक शातिर गिरोह की सक्रियता का सनसनीखेज मामला सामने आया है। लेकिन अब इस बड़े खुलासे के बाद नाका पुलिस की कार्यप्रणाली पर ही बेहद गंभीर और दागदार करने वाले आरोप लग रहे हैं। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, नाका पुलिस ने चेकिंग के दौरान विभागीय सतर्कता के आधार पर चार फर्जी बिजली कर्मियों को दबोचा था। पकड़े गए आरोपियों में खुद को फर्जी SDO बताने वाला मकसूद आलम, फर्जी J.E. आफताब आलम और उनके दो फर्जी कर्मचारी शाहबाज व रेहान शामिल थे। हालांकि, इस बड़े भंडाफोड़ के बाद नाका थाना पुलिस पर आरोप है कि उन्होंने सभी आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजने के बजाय 'खेल' कर दिया। जानकारी के मुताबिक, पुलिसकर्मियों ने गिरोह के दो सदस्यों से ₹30-30 हजार की मोटी रकम (कुल ₹60,000) ऐंठकर उन्हें चुपचाप थाने से रिहा कर दिया। परिणामस्वरूप, जहां जनता को ठगने वाले पूरे गिरोह को जेल भेजा जाना चाहिए था, वहीं पुलिस की इस कथित मेहरबानी के कारण दो शातिर जालसाज आज भी खुलेआम बाहर घूम रहे हैं। इस पूरे लेनदेन और फर्जीवाड़े की पड़ताल करने के लिए जब स्थानीय पत्रकारों ने नाका थाना प्रभारी के सरकारी CUG मोबाइल नंबर पर संपर्क करने की कोशिश की, तो उन्होंने ज़िम्मेदारी भरा जवाब देने के बजाय फोन को डिस्कनेक्ट कर दिया। विभागीय नियमों के अनुसार, पुलिस प्रभारियों को सरकारी CUG नंबर इसलिए दिए जाते हैं ताकि वे पीड़ित जनता की समस्याओं का त्वरित निवारण कर सकें और मीडिया को सही तथ्यों से अवगत करा सकें। लेकिन नाका थाने में CUG नंबर पर यह रवैया साफ दर्शाता है कि मामले में कुछ ऐसा है जिसे दबाने की कोशिश की जा रही है। यह गिरोह खुद को बिजली विभाग (लेसा) की रेड टीम या प्रवर्तन दल बताकर सीधे उपभोक्ताओं के घरों और दुकानों में घुस जाता था। ये लोग मीटर में कमियां निकालने या बिजली चोरी का फर्जी केस बनाने का डर दिखाकर आम जनता से मौके पर ही हजारों रुपये की अवैध वसूली करते थे। हालांकि, पुलिस विभाग की तरफ से इस खबर को लेकर अभी तक कोई जवाब नहीं दिया गया है।1
- उत्तर प्रदेश के सीतापुर में टाउन हॉल परिसर स्थित समाजवादी पार्टी (सपा) का 21 साल पुराना जिला कार्यालय जिला प्रशासन द्वारा ढहा दिया गया है। तड़के 4 बजे बुलडोजर लेकर पहुंची टीम ने इस कार्यालय को जमींदोज कर दिया। यह कार्रवाई नजूल (सरकारी) जमीन पर अवैध कब्जे के कारण की गई। बताया गया है कि इस कार्यालय के लिए पट्टा मुलायम सरकार के कार्यकाल में दिया गया था।1
- लखनऊ की रिजर्व पुलिस लाइन में एक सामूहिक योगाभ्यास कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य योग के माध्यम से एक स्वस्थ और संतुलित जीवनशैली को बढ़ावा देना था, जिसके लिए सभी प्रतिभागियों ने मिलकर अभ्यास किया। योग सत्र के दौरान, उपस्थित सभी लोगों ने विभिन्न योगासन और प्राणायाम का अभ्यास किया। अधिकारियों ने इस अवसर पर बताया कि योग न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह मानसिक मजबूती और कार्यक्षमता बढ़ाने में भी एक अहम भूमिका निभाता है। कार्यक्रम के समापन पर, सभी प्रतिभागियों ने नियमित रूप से योग करने का संकल्प लिया। साथ ही, उन्होंने समाज में स्वास्थ्य, फिटनेस और जागरूकता का संदेश फैलाने का आह्वान भी किया।1
- आज, 22 जून 2026 को बल्दीराय थाना क्षेत्र के बरासिन गाँव में गोमती नदी के किनारे एक व्यक्ति के फाँसी लगाने की सूचना मिलने के बाद हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुँची और जाँच शुरू की। आसपास के लोगों से पूछताछ और अन्य माध्यमों से मिली जानकारी के अनुसार, मृतक की पहचान कोतवाली नगर निवासी अय्यूब अली के रूप में हुई। मौके पर पहुँचे उनके भाई ने पुलिस को बताया कि मृतक मानसिक रूप से परेशान थे। पुलिस ने आवश्यक पंचायतनामा की कार्रवाई शुरू कर दी है और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा रहा है। क्षेत्राधिकारी बल्दीराय श्री आशुतोष कुमार ने घटना की पुष्टि की। मौके पर शांति व्यवस्था कायम है और मामले में अग्रिम विधिक कार्रवाई प्रचलित है।1
- Post by Suresh Kumar1
- राजधानी लखनऊ के दुबग्गा थाना क्षेत्र में थाना परिसर के ठीक पीछे स्थित खाली ज़मीन पर कथित तौर पर एक बड़ा अवैध डग्गामार बस अड्डा संचालित होने की चर्चा तेज़ हो गई है। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि इस अड्डे से प्रतिदिन बड़ी संख्या में निजी बसें यात्रियों को लेकर अलग-अलग ज़िलों के लिए रवाना होती हैं, जबकि इन बसों के संचालन में नियमों का पालन न होने पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह अवैध गतिविधि लंबे समय से जारी है, लेकिन संबंधित विभागों द्वारा इस पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है। आरोप है कि बिना किसी अधिकृत बस स्टेशन का उपयोग किए यात्रियों को बैठाकर बसों का संचालन हो रहा है, जिससे यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है और सरकार को भारी राजस्व हानि होने की आशंका भी जताई जा रही है। क्षेत्र के नागरिकों के अनुसार, बसों के भारी जमावड़े के कारण आसपास की सड़कों पर अक्सर जाम लग जाता है और सड़क किनारे यात्रियों के चढ़ने-उतरने से दुर्घटना का ख़तरा भी बना रहता है। स्थानीय लोगों में इस समस्या के स्थायी समाधान न होने पर भारी नाराजगी है, क्योंकि कई बार शिकायतें किए जाने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है। नागरिकों ने आरोप लगाया है कि पुलिस, यातायात विभाग और परिवहन विभाग की सक्रिय मौजूदगी के बावजूद इस कथित अवैध संचालन पर रोक नहीं लग पा रही है, जिससे इन विभागों की कार्यशैली पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रमुख सवालों में यह शामिल है कि क्या इन बसों के पास सभी आवश्यक अनुमति और दस्तावेज़ हैं, यदि संचालन अवैध है तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई, क्या संबंधित विभाग नियमित जांच कर रहे हैं, और सरकारी राजस्व को हो रहे संभावित नुकसान की ज़िम्मेदारी कौन तय करेगा। इन गंभीर चिंताओं के बीच, स्थानीय नागरिकों ने ज़िला प्रशासन, परिवहन विभाग और पुलिस अधिकारियों से इस मामले का संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच करने और अवैध रूप से संचालित इस बस स्टैंड पर तत्काल प्रभावी कार्रवाई करने की मांग की है।1
- लखनऊ के पारा कोतवाली क्षेत्र के बुद्धेश्वर इलाके में बिजली आपूर्ति न होने से नाराज स्थानीय निवासियों ने एएलवाई मैनपुरिया स्कूल के पास आलम नगर रोड को जाम कर दिया है। क्षेत्र में बिजली न मिलने के कारण गुस्साए निवासियों ने यह प्रदर्शन शुरू किया है। मौके पर पारा पुलिस मौजूद है, लेकिन प्रदर्शनकारी क्षेत्र निवासियों का कहना है कि पुलिस भी भ्रष्ट बिजली से संबंधित अधिकारियों के पक्ष में है। इसी वजह से क्षेत्र के निवासियों का गुस्सा प्रदर्शन के रूप में फूट पड़ा है।1