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सतना जिले के एक चौरसिया पेट्रोल पंप पर पेट्रोल की कथित चोरी का मामला सामने आया है। एक ग्राहक ने आरोप लगाया है कि उसे 250 रुपये के बदले मात्र 150 रुपये का पेट्रोल दिया गया। पेट्रोल डलवाने आए ग्राहक को मात्रा कम होने का संदेह हुआ, जिसके बाद उसने अपनी गाड़ी की टंकी से तेल वापस निकलवाकर जाँच की। इस जाँच में यह स्पष्ट हो गया कि 250 रुपये के भुगतान पर वास्तव में केवल 150 रुपये मूल्य का ही पेट्रोल मिला था।
Sharda Shrivastava
सतना जिले के एक चौरसिया पेट्रोल पंप पर पेट्रोल की कथित चोरी का मामला सामने आया है। एक ग्राहक ने आरोप लगाया है कि उसे 250 रुपये के बदले मात्र 150 रुपये का पेट्रोल दिया गया। पेट्रोल डलवाने आए ग्राहक को मात्रा कम होने का संदेह हुआ, जिसके बाद उसने अपनी गाड़ी की टंकी से तेल वापस निकलवाकर जाँच की। इस जाँच में यह स्पष्ट हो गया कि 250 रुपये के भुगतान पर वास्तव में केवल 150 रुपये मूल्य का ही पेट्रोल मिला था।
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- भोपाल स्थित राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) में प्रश्नपत्र चोरी होने के कारण भारी बवाल मच गया है। इस घटना के चलते नौ विषयों की परीक्षाओं को रद्द कर दिया गया है, जिससे छात्र काफी परेशान हैं। प्रश्नपत्रों के गायब होने की खबर सामने आने के बाद विद्यार्थी परिषद ने प्रदर्शन किया, जिसके परिणामस्वरूप एक एफआईआर दर्ज की गई है। इस पूरे प्रकरण में अब दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग उठ रही है और विश्वविद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था पर भी बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।1
- विष्णु सागर तालाब के सौन्दर्यीकरण के कार्य को लेकर गंभीर प्रश्न उठ खड़े हुए हैं।1
- मैहर जिले के उदयपुर क्षेत्र में एक बुजुर्ग व्यक्ति ने अपनी दर्दभरी आपबीती सुनाई है, जिसमें उन्होंने गंभीर आरोप लगाए हैं। बुजुर्ग का कहना है कि उन्हें जान देने पर मजबूर किया जा रहा है, उनके साथ मारपीट की गई और उनसे अवैध रूप से पैसों की वसूली भी की गई है। इस घटना के बाद वह मानसिक रूप से काफी परेशान हैं और उन्हें न्याय की उम्मीद है। बुजुर्ग ने प्रशासन से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। वहीं, स्थानीय लोगों ने भी कहा है कि यदि बुजुर्ग के आरोप सही पाए जाते हैं, तो कानून के अनुसार दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।1
- मध्य प्रदेश में जुलाई महीने की शुरुआत से ही मानसून पूरे जोश में बरस रहा है, जिससे पूरा प्रदेश पानी-पानी हो गया है। बारिश की रफ्तार को देखते हुए मौसम केंद्र (IMD) ने राज्य के लिए अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, रविवार को प्रदेश के आधे हिस्से में भारी से अति भारी बारिश होने की प्रबल संभावना है। मौसम विज्ञान केंद्र ने इंदौर और भोपाल सहित राज्य के 20 से अधिक जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इनमें से 9 प्रमुख जिलों के लिए 'ऑरेंज अलर्ट' भी घोषित किया गया है, जिसके चलते प्रशासन को भी मुस्तैद रहने के निर्देश दिए गए हैं। प्रदेश के शेष हिस्सों में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बौछारें गिरने के आसार जताए गए हैं। इससे पहले शनिवार को भी प्रदेश के 20 से ज्यादा जिलों में मूसलाधार बारिश दर्ज की गई। राजधानी भोपाल, खरगोन और हरदा जैसे जिलों में हुई तेज बारिश के बाद नदी-नाले उफान पर आ गए हैं और कई निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। मौसम विभाग का कहना है कि बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से आ रही नमी के कारण अगले कुछ दिनों तक प्रदेश में इसी तरह झमाझम बारिश का दौर जारी रहने की उम्मीद है। मध्य भारत न्यूज़ सभी नागरिकों से अपील करता है कि भारी बारिश के दौरान नदी-नालों और रपटों को पार करने का जोखिम न उठाएं तथा मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनियों और निर्देशों का पालन करें।1
- मैहर जिले की ग्राम पंचायत बदेरा में मुख्य मार्ग से शासकीय महाविद्यालय तक बनाई जा रही पीसीसी सड़क के निर्माण पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों और ग्राम पंचायत के सरपंच ने इस निर्माणाधीन सड़क में गुणवत्ता मानकों की घोर अनदेखी का आरोप लगाया है, जिसके चलते सड़क की मजबूती और उसके टिकाऊपन को लेकर संदेह व्यक्त किया जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, सड़क निर्माण में निर्धारित गुणवत्ता की सामग्री का उपयोग नहीं किया जा रहा है, बल्कि 6 एमएम और 12 एमएम गिट्टी के साथ अत्यधिक मात्रा में डस्ट (एम-सैंड) मिलाया जा रहा है। उनका कहना है कि इस घटिया निर्माण से सड़क बहुत जल्द क्षतिग्रस्त हो सकती है, जिससे सरकारी धन की भारी बर्बादी होगी और क्षेत्र की जनता को खराब सड़क का खामियाजा भुगतना पड़ेगा। आरोप है कि निर्माण एजेंसी कोरदर नाथ एंड कंपनी मनमाने तरीके से काम कर रही है। स्थानीय लोगों द्वारा अनियमितता की जानकारी मिलने पर, सरपंच ने ग्रामीणों के साथ मौके पर पहुँचकर कार्य का निरीक्षण किया। उन्होंने निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए संबंधित विभाग के अधिकारियों और ठेकेदार को इसकी सूचना दी और जांच होने तक कार्य रोकने की मांग की। हालांकि, ठेकेदार ने सरपंच की बात मानने के बजाय कथित तौर पर अपनी 'ऊंची पहुंच' का हवाला देते हुए कहा कि सड़क जैसी बन रही है, वैसी ही बनेगी। उसने सरपंच को चुनौती देते हुए यह भी कहा कि "आपको जो करना है कर लीजिए, हमारी पहुंच बहुत ऊपर तक है। आप भी सरपंच हैं, हम भी आपके कामों की जांच करवा देंगे।" ग्रामीणों ने लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से तत्काल मौके पर पहुंचकर सड़क निर्माण में उपयोग हो रही सामग्री की गुणवत्ता की तकनीकी जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कार्य के नमूने प्रयोगशाला भेजने और अनियमितता पाए जाने पर संबंधित ठेकेदार व जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की अपील की है। ग्रामीणों ने जोर दिया कि यह मार्ग शासकीय महाविद्यालय तक पहुंचने का एक महत्वपूर्ण रास्ता है, जिसका उपयोग विद्यार्थी, शिक्षक और सैकड़ों स्थानीय लोग करते हैं, और घटिया निर्माण से लाखों रुपये व्यर्थ जाएंगे। फिलहाल इस पूरे मामले पर विभागीय अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। अब देखना होगा कि सरपंच और ग्रामीणों की इन गंभीर शिकायतों पर संबंधित विभाग द्वारा कब तक जांच और आवश्यक कार्रवाई की जाती है।3
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