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यूपी में न्याय की नाउम्मीदी? फरियादी अब जान देने की कोशिश तक पहुंच रहे! उत्तर प्रदेश से सामने आई घटना कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। शामली में राजस्व और पुलिस टीम की मौजूदगी में एक किसान ने खुद पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगाने की कोशिश की। आरोप है कि किसान से कानूनगो ने ₹50 हजार की रिश्वत मांगी थी। घटना के दौरान एक पुलिसकर्मी के कथित तौर पर वीडियो बनाने की बात भी सामने आई है।
Deepak ojha
यूपी में न्याय की नाउम्मीदी? फरियादी अब जान देने की कोशिश तक पहुंच रहे! उत्तर प्रदेश से सामने आई घटना कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। शामली में राजस्व और पुलिस टीम की मौजूदगी में एक किसान ने खुद पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगाने की कोशिश की। आरोप है कि किसान से कानूनगो ने ₹50 हजार की रिश्वत मांगी थी। घटना के दौरान एक पुलिसकर्मी के कथित तौर पर वीडियो बनाने की बात भी सामने आई है।
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- bus aap logon ka support aap log ka hi pyar hai mujhe Aage pahunchaega please Mere Instagram Mein channel ko follow Jarur Karen Taki aapko Sabhi chij Ke notification milati Rahe1
- लटेरी के बड़ागांव में वन विकास निगम की जमीन पर लगाई गई फसलों को दवा का छिड़काव कर किया गया नष्ट। लटेरी के बड़ागांव में वन विकास निगम की जमीन पर लगाई गई फसलों को दवा का छिड़काव कर किया गया नष्ट।1
- 8 लाख की लागत से बनेगा आधुनिक अटल ज्ञान केंद्र, युवाओं को मिलेगा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लाभ समरानियां कस्बे में युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की बेहतर तैयारी के लिए आधुनिक सुविधाओं से युक्त अटल ज्ञान केंद्र का निर्माण कराया जाएगा। करीब 8 लाख रुपए की लागत से बनने वाले केंद्र में अध्ययन के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे क्षेत्र के युवाओं को शांत एवं सुविधाजनक वातावरण मिलेगा। केंद्र शुरू होने से विद्यार्थियों को अध्ययन के लिए बेहतर स्थान उपलब्ध होगा और उन्हें अन्यत्र जाने की आवश्यकता कम होगी। स्थानीय युवाओं ने केंद्र निर्माण की पहल का स्वागत किया है।1
- सफाई का टेंडर, फिर भी गंदगी बरकरार: हाट बाजार के बाद 3-4 दिन तक नहीं उठता कचरा कवाई. कस्बे में सफाई व्यवस्था के लिए टेंडर होने के बावजूद हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं। जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हैं, नालियां जाम हैं और बारिश होते ही कई गलियों में पानी भरने की समस्या सामने आ रही है। सबसे खराब स्थिति तालाब की पाल की है, जहां सोमवार को लगने वाले साप्ताहिक हाट बाजार के बाद बड़ी मात्रा में कचरा जमा हो जाता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह कचरा समय पर नहीं उठाया जाता और तीन से चार दिन तक वहीं पड़ा रहता है। करीब दो साल पहले 11 करोड़ रुपए की लागत से तालाब की पाल का सौंदर्यीकरण कराया गया था। इसके बाद लोगों को उम्मीद थी कि क्षेत्र की तस्वीर बदलेगी, लेकिन नियमित साफ-सफाई के अभाव में पाल पर गंदगी फैल रही है। हाट बाजार के बाद सब्जियों के अवशेष और अन्य कचरा पड़ा रहने से बदबू की स्थिति बन जाती है। तेज हवा चलने पर पॉलीथिन और कचरा आसपास के घरों तक पहुंच रहा है। '''''कई बार शिकायत, फिर भी नहीं हुई कार्रवाई मोहल्लेवासियों भवानी शंकर मेहता, रामचरण सोनी सहित अन्य लोगों ने बताया कि सफाई व्यवस्था को लेकर ग्राम पंचायत में कई बार शिकायत की जा चुकी है। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। लोगों का कहना है कि कई बार मृत मवेशियों को भी तालाब में डाल दिया जाता है, जिससे दुर्गंध के कारण आसपास रहने वाले लोगों को परेशानी होती है। कांग्रेस नेता रामचरण सोनी और अन्य मोहल्लेवासियों ने आरोप लगाया कि पंचायत की ओर से सफाई के लिए लाखों रुपए का टेंडर किया गया है, लेकिन मौके पर नियमित सफाई नहीं दिखाई देती। उनका आरोप है कि ठेकेदार द्वारा सफाई के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है और सरकारी राशि का सही उपयोग नहीं हो रहा। '''''नालियां जाम, बारिश से पहले नहीं हुई सफाई कस्बे की सफाई व्यवस्था की दूसरी बड़ी समस्या जाम नालियां हैं। कस्बा निवासी निर्मल मित्तल ने बताया कि कई नालियों में मलबा जमा है और लंबे समय से सफाई नहीं हुई। पहले हर साल बारिश से पहले नालियों और नालों की सफाई कराई जाती थी, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। इसका असर बारिश के दौरान दिखाई देता है। थोड़ी बारिश में ही कई गलियों में पानी भर जाता है और लोगों को आवागमन में परेशानी होती है। कस्बेवासियों और प्रबुद्धजनों का कहना है कि सरकार ने सफाई व्यवस्था के लिए अलग से टेंडर प्रक्रिया लागू की है, लेकिन कवाई में इसका फायदा लोगों को नहीं मिल रहा है। लोगों ने पंचायत प्रशासन से हाट बाजार के बाद तत्काल कचरा उठाने, जाम नालियों की सफाई कराने, नालियों से मलबा निकालने और पूरे कस्बे में नियमित सफाई व्यवस्था की निगरानी कराने की मांग की है। लोगों का सवाल है कि जब सफाई व्यवस्था के लिए टेंडर हो चुका है तो फिर कस्बे में जगह-जगह गंदगी के ढेर और जाम नालियां क्यों नजर आ रही हैं।4
- मंदिर की रेलिंग चोरी का मामला मंदिर की रेलिंग चोरी पर उठे सवाल, पुलिस जांच में रेलिंग लगी मिली लोकेशन : विदिशा स्लग : मंदिर की रेलिंग चोरी का मामला मंदिर की रेलिंग चोरी पर उठे सवाल, पुलिस जांच में रेलिंग लगी मिली लोकेशन : विदिशा एंकर : विदिशा के प्रसिद्ध बाढ़ वाले गणेश मंदिर से सरकारी रेलिंग चोरी होने का मामला सामने आने के बाद अब मामले में नया मोड़ आ गया है। राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने वीडियो जारी कर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। हालांकि मंदिर के पुजारी और पुलिस का कहना है कि रेलिंग चोरी नहीं हुई है। पुलिस जांच में रेलिंग मौके पर लगी मिली है। वीओ : दरअसल, बाढ़ वाले गणेश मंदिर में पर्यटन विभाग की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए रेलिंग लगाई गई थी। रेलिंग चोरी होने की जानकारी सामने आने के बाद राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने वीडियो जारी कर मामले में पुलिस से कार्रवाई की मांग की। उन्होंने लोगों से अपील भी की थी कि यदि किसी को रेलिंग चोरी या उसे ले जाने वालों के संबंध में कोई जानकारी है तो उन्हें सूचना दी जाए। लेकिन अब इस मामले में मंदिर के पुजारी परसराम चौबे का कहना है कि न तो उन्होंने रेलिंग चोरी होने की कोई शिकायत की है और न ही मंदिर से कोई रेलिंग चोरी हुई है। उनका आरोप है कि किसी ने उनके नाम से झूठी शिकायत कर दी। वहीं सहायक सचिव का कहना है कि सीएसपी कार्यालय से पुलिस टीम जांच के लिए आई थी, लेकिन रेलिंग चोरी होने जैसा कोई मामला नहीं है। बाइट — अतुल सिंह, सीएसपी विदिशा सीएसपी अतुल सिंह के मुताबिक पुलिस अधीक्षक को आवेदन प्राप्त हुआ था, जिसके बाद जांच उन्हें सौंपी गई। पुलिस ने मौके पर जांच करने के साथ संबंधित लोगों के बयान भी लिए हैं। जांच में रेलिंग मौके पर लगी हुई मिली है। वीओ-2 : फिलहाल मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब रेलिंग चोरी होने की बात सामने आई तो शिकायत किस आधार पर हुई और इसकी जानकारी राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के सदस्य तक कैसे पहुंची। वहीं पुलिस जांच में रेलिंग मौके पर लगी मिलने के बाद पूरे मामले की तस्वीर अलग नजर आ रही है। अब पुलिस की जांच और सामने आए बयानों से ही स्पष्ट होगा कि आखिर इस मामले की वास्तविकता क्या है। बाइट : परसराम चौबे पुजारी बाइट : यशवंत मीणा सहायक सचिव4
- शिवपुरी। पोहरी के रोजगार मेले में 8 निजी कंपनियों ने दिया मौका, 333 युवाओं का चयन और 272 को मौके पर मिले ऑफर लेटर शिवपुरी। पोहरी के रोजगार मेले में 8 निजी कंपनियों ने दिया मौका, 333 युवाओं का चयन और 272 को मौके पर मिले ऑफर लेटर1
- स्कूल में पढ़ाई छोड़ प्रेमालाप के आरोप, परेशान छात्रों ने 100 KM दूर पहुंचकर की शिकायत विभाग ने दोनों शिक्षकों पर की कार्रवाई मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के जुन्नारदेव से स्कूल की व्यवस्था और शिक्षकों की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करने वाला हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां विद्यार्थियों ने स्कूल के प्रभारी शिक्षक और अतिथि शिक्षिका पर पढ़ाई के बजाय आपसी प्रेम संबंधों में व्यस्त रहने के आरोप लगाए। बच्चों का कहना है कि शिक्षकों के इस व्यवहार का सीधा असर उनकी पढ़ाई पर पड़ रहा था। मामले की शिकायत करने के लिए विद्यार्थियों को करीब 100 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय तक जाना पड़ा। बच्चों ने कहा—कक्षाएं जल्दी खत्म कर देते थे शिक्षक मामला जुन्नारदेव ब्लॉक के बीचबहरी गांव स्थित शासकीय माध्यमिक शाला का बताया जा रहा है। विद्यार्थियों के आरोपों के मुताबिक प्रभारी शिक्षक और अतिथि शिक्षिका के बीच स्कूल परिसर में अनुचित नजदीकी देखने को मिलती थी। छात्रों का दावा है कि पढ़ाई प्रभावित हो रही थी और कई बार कक्षाएं भी समय से पहले समाप्त कर दी जाती थीं। रिपोर्टों के अनुसार, विद्यार्थियों ने शिक्षकों के कथित व्यवहार से परेशान होकर मामले को अधिकारियों तक पहुंचाने का फैसला किया। इसके लिए बच्चों ने करीब 100 किलोमीटर की यात्रा कर जिला मुख्यालय पहुंचकर अपनी शिकायत रखी। छात्रों की इस पहल ने स्कूलों में शिक्षा और अनुशासन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वायरल वीडियो के बाद मामला गरमाया मामले में 15 अगस्त को विद्यार्थियों द्वारा बनाए गए एक कथित वीडियो के वायरल होने के बाद विवाद सामने आया। वीडियो को लेकर विद्यार्थियों ने प्रभारी शिक्षक और अतिथि शिक्षिका के बीच स्कूल परिसर में कथित आपत्तिजनक नजदीकी के आरोप लगाए। इसके बाद मामला शिक्षा विभाग तक पहुंचा। शिकायत मिलने के बाद शिक्षा विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया और दोनों शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक विभाग ने दोनों को स्कूल से हटा दिया है। अधिकारियों की ओर से स्पष्ट किया गया कि स्कूलों में अनुशासन और शिक्षा की गुणवत्ता सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा शिक्षकों का ऐसा आचरण स्वीकार्य नहीं है। बच्चों की शिकायत ने खड़े किए बड़े सवाल यह मामला सिर्फ दो शिक्षकों के कथित व्यक्तिगत संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि सवाल यह है कि यदि विद्यार्थियों के आरोप सही हैं तो स्कूल समय में शिक्षकों की प्राथमिक जिम्मेदारी—बच्चों की पढ़ाई—क्यों प्रभावित हुई? बच्चों द्वारा अपनी शिक्षा प्रभावित होने की शिकायत लेकर अधिकारियों तक पहुंचना भी चर्चा का विषय बना हुआ है। इस घटनाक्रम ने स्कूलों में शिक्षक-आचरण, अनुशासन और विद्यार्थियों की शिकायतों के त्वरित निस्तारण की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं।1
- सहरोल तलहटी में शिक्षा विभाग की चौपाल, स्कूलों की समस्याओं के समाधान पर बनी कार्ययोजना सहरोल तलहटी क्षेत्र में शिक्षा विभाग की ओर से चौपाल आयोजित की गई। इसमें क्षेत्र के सरकारी विद्यालयों में व्याप्त समस्याओं, विद्यार्थियों की सुविधाओं और शैक्षणिक व्यवस्थाओं को लेकर चर्चा की गई। अधिकारियों ने शिक्षकों और ग्रामीणों से स्कूलों की समस्याओं की जानकारी ली। चौपाल में भवन, पेयजल, शौचालय, बिजली सहित अन्य आवश्यक सुविधाओं से जुड़े मुद्दे सामने आए। अधिकारियों ने समस्याओं के प्राथमिकता से समाधान के लिए कार्ययोजना तैयार की। साथ ही विद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने और विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।1
- नियम विरुद्ध मेडिकल कॉलेज एवं शासकीय अस्पताल में शूट किया हुआ वीडियो वायरल लोकेशन :- विदिशा मध्य प्रदेश स्लग :- नियम विरुद्ध मेडिकल कॉलेज एवं शासकीय अस्पताल में शूट किया हुआ वीडियो वायरल लोकेशन :- विदिशा मध्य प्रदेश एंकर :- शासकीय मेडिकल कॉलेज और अस्पताल प्रशासन की लापरवाही और संवेदनहीनता अब चरम पर पहुंच चुकी है। परिसर में सुरक्षा में हुई भारी चूक और लिफ्ट-कॉरिडोर में हुई कमर्शियल शूटिंग के गंभीर मुद्दे पर जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ते हुए डीन महोदय ने बेहद गैर-जिम्मेदाराना बयान दे डाला। डीन का कहना है कि "इतना बड़ा परिसर है, हम कैसे देख सकते हैं कि कौन आ रहा है और कौन जा रहा है!" लाखों रुपये का सुरक्षा बजट, 60 से 70 सुरक्षा गार्ड्स और सरकार से मोटा वेतन पाने वाले शीर्ष प्रशासनिक पद पर बैठे अधिकारी का ऐसा बयान न केवल उनकी प्रशासनिक नाकामी को दर्शाता है, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है। हॉस्टल में रह रहे छात्र-छात्राओं और मरीजों की सुरक्षा पर बड़ा खतरा डीन का यह बयान बेहद खतरनाक और लापरवाही से भरा है। सवाल यह उठता है कि यदि कल को अस्पताल परिसर या हॉस्टल में कोई अनजान व्यक्ति घुसकर छात्र-छात्राओं या महिला डॉक्टरों के साथ कोई अप्रिय घटना या अपराध घटित कर देता है, तो उसकी जवाबदेही किसकी होगी? जब सरकार सुरक्षा और सफाई व्यवस्था पर हर महीने लाखों रुपये का शासकीय बजट पानी की तरह बहा रही है, तब भी मरीज, मेडिकल छात्र और डॉक्टर सुरक्षा के अभाव में खौफ के साए में जीने को मजबूर हैं। कॉलेज प्रशासन, डीन और अस्पताल अधीक्षक का ध्यान इन संवेदनशील मुद्दों पर बिल्कुल नहीं है। आलम यह है कि जिम्मेदार अधिकारी अपने वातानुकूलित कमरों में बैठकर आराम फरमा रहे हैं और जमीनी स्तर पर अस्पताल लावारिस हाल में छोड़ दिया गया है। संवेदनशील लिफ्ट और कॉरिडोर में कमर्शियल रील्स हाल ही में अस्पताल के आपातकालीन भाग एवं लिफ्ट कोरिडोर जैसे संवेदनशील भाग में एक व्यावसायिक डांस क्लास के प्रमोशन के लिए वीडियो और रील्स शूट किए गए। नियमतः किसी भी शासकीय अस्पताल में कमर्शियल गतिविधियों और शूटिंग पर कानूनी प्रतिबंध होता है। आपातकालीन सेवाओं के लिए बनी लिफ्ट को शूटिंग के लिए रोके जाने से गंभीर मरीजों के इलाज में बाधा उत्पन्न हुई और मरीजों की गोपनीयता का सरेआम उल्लंघन हुआ। प्राथमिकताओं पर सवाल :- मंदिर पर 24 घंटे कड़ा पहरा, अस्पताल अनाथ डीन और अधीक्षक की प्राथमिकताओं का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जहां पूरा अस्पताल परिसर बाहरी तत्वों के लिए खुला छोड़ दिया गया है, वहीं परिसर में स्थित शिव मंदिर पर 24 घंटे गार्ड की विशेष ड्यूटी लगाई गई है और CCTV कैमरे से सीधी निगरानी रखी जा रही है। हाल ही में प्रशासन ने एक सख्त आदेश जारी कर कर्मचारियों को मंदिर में पूजा-पाठ करने पर कार्रवाई की धमकी दी थी। आस्था पर तुरंत प्रतिबंध लगाने वाले डीन महोदय, जब परिसर में कमर्शियल शूटिंग होती है और सुरक्षा में सेंध लगती है, तो पूरी तरह मौन धारण कर लेते हैं। सुरक्षा एजेंसी और कंपनी मैनेजर पर मेहरबानी अस्पताल में 60 से 70 सुरक्षा गार्ड्स की फौज तैनात होने के बावजूद बाहरी व्यक्ति बेझिझक मुख्य भवन और लिफ्ट तक पहुंचकर रील्स बना लेते हैं। इतनी बड़ी लापरवाही के बाद भी सुरक्षा एजेंसी या उसके मैनेजर पर कोई आर्थिक दंड या ब्लैकलिस्टिंग की कार्रवाई न होना, शीर्ष प्रबंधन और एजेंसी के बीच सांठगांठ की ओर साफ इशारा करता है। उठते सीधे सवाल :- सुरक्षा की गारंटी कौन लेगा? यदि 'इतने बड़े परिसर' का बहाना बनाकर डीन पल्ला झाड़ लेंगे, तो हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं और अस्पताल के मरीजों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा? कमरों में बैठकर क्या कर रहा प्रबंधन? लाखों रुपये वेतन लेने वाले डीन और अधीक्षक अगर अपने दफ्तरों से निकलकर सुरक्षा का जायजा नहीं ले सकते, तो वे पदों पर क्यों बने हुए हैं? बजट की बर्बादी :- जब 60-70 गार्ड्स के रहते बाहरी लोग आकर डांस वीडियो बना रहे हैं, तो सुरक्षा पर खर्च हो रहे लाखों रुपये के बजट का क्या मतलब रह जाता है? अस्पताल के डॉक्टरों, मेडिकल छात्रों और भर्ती मरीजों के परिजनों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की जाए और गैर-जिम्मेदाराना रवैया अपनाने वाले डीन, अधीक्षक और सुरक्षा एजेंसी के मैनेजर पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए।4