नर्मदापुरम में सिल्वर मिस्ट रिटेल प्राइवेट लिमिटेड रेत कंपनी ने जल संरक्षण गतिविधियों और पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। इस पहल के तहत, विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून) के अवसर पर, कंपनी ने पवारखेड़ा ग्राम मंदिर के पास, ग्राम मरोड़ा के उच्चतर माध्यमिक विद्यालय और ग्राम गुवाड़ी के सी एम राइज विद्यालय में फलदार वृक्ष लगाए। कंपनी ने नर्मदापुरम जिले में 800 सदाबहार फलदार पेड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा था, जिसका उद्देश्य आसपास के क्षेत्रों को हरा-भरा और पर्यावरण के लिए बेहतर बनाना है। इस मौके पर 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत व्यापक वृक्षारोपण और स्वच्छता अभियान भी चलाया गया। वृक्षारोपण में मुख्य रूप से अमरूद, आम, जामुन, नीम, पीपल, अशोक, आंवला, गुलमोहर, करंज, बादाम और सप्तकर्णी के पौधे शामिल थे। कंपनी ने पिछले वर्ष भी कुलामड़ी रोड पर 'स्वच्छता ही सेवा अभियान' के तहत जिले में 1000 फलदार पौधे लगाए थे, जिनके साथ ट्री गार्ड भी लगाए गए थे ताकि वृक्षों का उचित रखरखाव सुनिश्चित हो सके। इस कार्यक्रम में कंपनी के प्रतिनिधियों के साथ-साथ जिला खनिज अधिकारी देवेश मरकाम जी, मध्यप्रदेश माइनिंग कॉर्पोरेशन के अधिकारी गोपाल सिंह जी, पवारखेड़ा सरपंच अशोक कीर जी, मरोड़ा सरपंच कलाबाई, गुवाड़ी सरपंच संतोष ककोड़िया जी, विद्यालयों के प्राचार्य और कंपनी के समस्त कर्मचारीगण उपस्थित रहे। खनिज अधिकारी देवेश मरकाम जी ने इस अवसर पर कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक दिन का अभियान नहीं, बल्कि एक सतत प्रक्रिया है। उन्होंने वृक्षारोपण के महत्व पर जोर दिया, जो पर्यावरण संतुलन बनाए रखने, जैव विविधता के संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण योगदान देता है। उन्होंने सभी नागरिकों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी नियमित देखभाल करने की अपील की। रेत कंपनी के ठेकेदार प्रतिनिधि ने बताया कि यह अभी शुरुआत है और बारिश के मौसम से पहले तक नियमित रूप से विभिन्न स्थानों पर वृक्षारोपण का कार्य जारी रहेगा। कंपनी द्वारा जिले में समय-समय पर ऐसे सामाजिक कार्य किए जाते रहे हैं।
नर्मदापुरम में सिल्वर मिस्ट रिटेल प्राइवेट लिमिटेड रेत कंपनी ने जल संरक्षण गतिविधियों और पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। इस पहल के तहत, विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून) के अवसर पर, कंपनी ने पवारखेड़ा ग्राम मंदिर के पास, ग्राम मरोड़ा के उच्चतर माध्यमिक विद्यालय और ग्राम गुवाड़ी के सी एम राइज विद्यालय में फलदार वृक्ष लगाए। कंपनी ने नर्मदापुरम जिले में 800 सदाबहार फलदार पेड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा था, जिसका उद्देश्य आसपास के क्षेत्रों को हरा-भरा और पर्यावरण के लिए बेहतर बनाना है। इस मौके पर 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत व्यापक वृक्षारोपण और स्वच्छता अभियान भी चलाया गया। वृक्षारोपण में मुख्य रूप से अमरूद, आम, जामुन, नीम, पीपल, अशोक, आंवला, गुलमोहर, करंज, बादाम और सप्तकर्णी के पौधे शामिल थे। कंपनी ने पिछले वर्ष भी कुलामड़ी रोड पर 'स्वच्छता ही सेवा अभियान' के तहत जिले में 1000 फलदार पौधे लगाए थे, जिनके साथ ट्री गार्ड भी लगाए गए थे ताकि वृक्षों का उचित रखरखाव सुनिश्चित हो सके। इस
कार्यक्रम में कंपनी के प्रतिनिधियों के साथ-साथ जिला खनिज अधिकारी देवेश मरकाम जी, मध्यप्रदेश माइनिंग कॉर्पोरेशन के अधिकारी गोपाल सिंह जी, पवारखेड़ा सरपंच अशोक कीर जी, मरोड़ा सरपंच कलाबाई, गुवाड़ी सरपंच संतोष ककोड़िया जी, विद्यालयों के प्राचार्य और कंपनी के समस्त कर्मचारीगण उपस्थित रहे। खनिज अधिकारी देवेश मरकाम जी ने इस अवसर पर कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक दिन का अभियान नहीं, बल्कि एक सतत प्रक्रिया है। उन्होंने वृक्षारोपण के महत्व पर जोर दिया, जो पर्यावरण संतुलन बनाए रखने, जैव विविधता के संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण योगदान देता है। उन्होंने सभी नागरिकों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी नियमित देखभाल करने की अपील की। रेत कंपनी के ठेकेदार प्रतिनिधि ने बताया कि यह अभी शुरुआत है और बारिश के मौसम से पहले तक नियमित रूप से विभिन्न स्थानों पर वृक्षारोपण का कार्य जारी रहेगा। कंपनी द्वारा जिले में समय-समय पर ऐसे सामाजिक कार्य किए जाते रहे हैं।
- इटारसी अपडेट के अनुसार, शहर के व्यस्त बाजार क्षेत्र को व्यवस्थित करने के उद्देश्य से नगरपालिका का अतिक्रमण दल पूरी तरह सक्रिय हो गया है। कल दोपहर, टीम ने बाजार की सड़कों पर घूमकर दुकानदारों को कड़ी हिदायत और समझाइश दी है। अधिकारियों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि सभी दुकानदार अपने सामान को निर्धारित सीमा के भीतर ही रखें। यदि सड़कों पर दोबारा अतिक्रमण पाया गया, तो बिना किसी रियायत के उन पर भारी चालानी कार्रवाई की जाएगी।1
- नर्मदापुरम में सिल्वर मिस्ट रिटेल प्राइवेट लिमिटेड रेत कंपनी ने जल संरक्षण गतिविधियों और पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। इस पहल के तहत, विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून) के अवसर पर, कंपनी ने पवारखेड़ा ग्राम मंदिर के पास, ग्राम मरोड़ा के उच्चतर माध्यमिक विद्यालय और ग्राम गुवाड़ी के सी एम राइज विद्यालय में फलदार वृक्ष लगाए। कंपनी ने नर्मदापुरम जिले में 800 सदाबहार फलदार पेड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा था, जिसका उद्देश्य आसपास के क्षेत्रों को हरा-भरा और पर्यावरण के लिए बेहतर बनाना है। इस मौके पर 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत व्यापक वृक्षारोपण और स्वच्छता अभियान भी चलाया गया। वृक्षारोपण में मुख्य रूप से अमरूद, आम, जामुन, नीम, पीपल, अशोक, आंवला, गुलमोहर, करंज, बादाम और सप्तकर्णी के पौधे शामिल थे। कंपनी ने पिछले वर्ष भी कुलामड़ी रोड पर 'स्वच्छता ही सेवा अभियान' के तहत जिले में 1000 फलदार पौधे लगाए थे, जिनके साथ ट्री गार्ड भी लगाए गए थे ताकि वृक्षों का उचित रखरखाव सुनिश्चित हो सके। इस कार्यक्रम में कंपनी के प्रतिनिधियों के साथ-साथ जिला खनिज अधिकारी देवेश मरकाम जी, मध्यप्रदेश माइनिंग कॉर्पोरेशन के अधिकारी गोपाल सिंह जी, पवारखेड़ा सरपंच अशोक कीर जी, मरोड़ा सरपंच कलाबाई, गुवाड़ी सरपंच संतोष ककोड़िया जी, विद्यालयों के प्राचार्य और कंपनी के समस्त कर्मचारीगण उपस्थित रहे। खनिज अधिकारी देवेश मरकाम जी ने इस अवसर पर कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक दिन का अभियान नहीं, बल्कि एक सतत प्रक्रिया है। उन्होंने वृक्षारोपण के महत्व पर जोर दिया, जो पर्यावरण संतुलन बनाए रखने, जैव विविधता के संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण योगदान देता है। उन्होंने सभी नागरिकों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी नियमित देखभाल करने की अपील की। रेत कंपनी के ठेकेदार प्रतिनिधि ने बताया कि यह अभी शुरुआत है और बारिश के मौसम से पहले तक नियमित रूप से विभिन्न स्थानों पर वृक्षारोपण का कार्य जारी रहेगा। कंपनी द्वारा जिले में समय-समय पर ऐसे सामाजिक कार्य किए जाते रहे हैं।2
- माखननगर क्षेत्र में प्री-मानसून की पहली तेज बारिश और आंधी ने शनिवार को महज 15 मिनट के भीतर भारी असर दिखाया। तेज हवाओं और तूफानी मौसम के कारण साकेत वेयरहाउस के सामने एक विशाल शीशम का पेड़ सड़क पर गिर गया, जिससे माखननगर-पिपरिया मार्ग पर यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, तेज आंधी के साथ अचानक बारिश शुरू हुई और देखते ही देखते कई स्थानों पर पेड़ धराशायी हो गए। साकेत वेयरहाउस के सामने गिरे इस पेड़ ने सड़क को अवरुद्ध कर दिया, जिसके कारण दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। स्थानीय लोगों ने बताया कि क्षेत्र के अन्य हिस्सों से भी पेड़ गिरने और बिजली आपूर्ति प्रभावित होने की खबरें सामने आई हैं। हालांकि, किसी जनहानि की कोई सूचना नहीं मिली है, लेकिन अचानक बदले मौसम ने लोगों के लिए परेशानी खड़ी कर दी है। मौसम विभाग ने पहले ही प्रदेश में तेज आंधी और बारिश की संभावना जताई थी, लेकिन पहली ही बारिश ने प्रशासन की तैयारियों और पेड़ों के रखरखाव की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि सड़कों के किनारे मौजूद जर्जर और जोखिमपूर्ण पेड़ों की पहचान कर समय रहते उनकी छंटाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। फिलहाल, प्रशासन और स्थानीय अमला मार्ग से पेड़ हटाने के प्रयास में जुटा हुआ है, ताकि यातायात को जल्द से जल्द बहाल किया जा सके।3
- पिपरिया ब्लॉक के 10 गांवों में एकिडना फाउंडेशन और एकलव्य फाउंडेशन के सहयोग से संचालित एग्री प्रोजेक्ट के तहत आयोजित पांच दिवसीय समर कैंप आज, 6 जून को सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। इस शिविर में 150 से अधिक छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कैंप के दौरान बच्चों ने खेल, आर्ट-क्राफ्ट, कहानी लेखन, चित्रकला, विज्ञान प्रयोग, प्रकृति भ्रमण और कई अन्य रचनात्मक गतिविधियों में हिस्सा लिया। इस समर कैंप का मुख्य उद्देश्य बच्चों को उनकी ग्रीष्मकालीन छुट्टियों के दौरान सीखने और उनके रचनात्मक विकास के लिए अवसर प्रदान करना था। स्थानीय युवा संचालिकाओं और एकलव्य फाउंडेशन की टीम ने इस कैंप के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम के समापन पर, अभिभावकों और समुदाय के सदस्यों ने बच्चों की प्रतिभा और उनके उत्साह की भरपूर सराहना की।1
- विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के आवाहन और प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की प्रेरणा से, नर्मदापुरम कलेक्टर ने पर्यावरण संरक्षण एवं ईंधन की बचत की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की। वे हर्बल पार्क में आयोजित पौधारोपण एवं ट्रांसिट वॉक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए अपने निवास से कार्यक्रम स्थल तक इलेक्ट्रिक स्कूटर चलाते हुए पहुँचे। इस दौरान, उन्होंने नागरिकों को दो पहिया वाहन चलाते समय हेलमेट पहनने के लिए भी जागरूक किया और यातायात नियमों का पालन किए जाने का संदेश दिया। कलेक्टर का ई-स्कूटर से कार्यक्रम स्थल तक पहुँचना पर्यावरण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और ईंधन बचाने के संदेश को प्रदर्शित करता है।1
- विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर बुधनी में नगर परिषद बुधनी और ट्रायडेंट ग्रुप के संयुक्त तत्वावधान में 5 किलोमीटर लंबी 'ग्रीन वॉकाथॉन' का आयोजन किया गया। नगर परिषद अध्यक्ष के नेतृत्व में हुई इस दौड़ में एसडीएम दिनेश तोमर, तहसीलदार ललित सोनी, एसडीओपी रवि शर्मा और सीएमओ संतोष रघुवंशी सहित पुलिस प्रशासन, ट्रायडेंट ग्रुप के कर्मचारियों, युवाओं और विभिन्न सामाजिक संगठनों के सदस्यों ने बड़ी संख्या में सक्रिय रूप से भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने पर्यावरण संरक्षण को प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व बताया। आयोजन के समापन पर, सभी उपस्थित लोगों ने मिलकर "एक कदम प्रकृति के लिए एक कदम स्वच्छ एवं हरित भविष्य के लिए" का संकल्प लिया, जिसके माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का महत्वपूर्ण संदेश प्रसारित किया गया।2
- फिल्म एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत की जांच अब अंतिम चरण में है, जिससे यह साफ हो गया है कि यह केवल दहेज से जुड़ा मामला नहीं है, बल्कि अन्य कई पहलू भी इसमें शामिल हैं। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने ट्विशा के डिप्रेशन की वजह और ड्रग्स लेने के आरोपों की भी पड़ताल की है। अब तक की जांच से यह स्पष्ट हो चुका है कि समर्थ और ट्विशा के बीच प्रेग्नेंसी सबसे बड़ी कंट्रोवर्सी थी। सीबीआई की पूछताछ में यह खुलासा हुआ है कि समर्थ सिंह ने अपनी पत्नी से स्पष्ट शब्दों में सवाल किया था कि 'यह बच्चा किसका है!' इस घटना के बाद दोनों के संबंधों में ऐसी खटास आई कि स्थिति फिर कभी सामान्य नहीं हो सकी, जिसका कथित रूप से अंत ट्विशा की फांसी लगाने से हुआ। सीबीआई जांच में अहम परतें खुली हैं, जिसके अनुसार ट्विशा की प्रेग्नेंसी पर समर्थ सिंह ने सवाल उठाए थे, जो दोनों के बीच झगड़े की सबसे बड़ी वजह थी। समर्थ ने ट्विशा से स्पष्ट पूछा था, 'तुम प्रेग्नेंट कैसे हो सकती हो, यह किसका बच्चा है?' इस प्रश्न से ट्विशा क्षुब्ध हो गई थीं और उन्होंने अपनी मां को भी यह बात बताई थी। मां के इसे इग्नोर करने के लिए कहने के बाद भी ट्विशा शांत नहीं रह सकीं। जांच अधिकारियों के अनुसार, पूछताछ और डिजिटल एविडेंस ने इस तथ्य को पूर्णतः स्पष्ट कर दिया है कि प्रेग्नेंसी पर उठा यह विवाद इतना बढ़ा कि आखिरकार ट्विशा ने कथित रूप से आत्मघाती कदम उठा लिया। सीबीआई की जांच में आपसी सहमति से गर्भपात कराने की बात भी शामिल है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने ट्विशा की संदिग्ध मौत के सभी अहम पहलुओं की पड़ताल पूरी कर ली है। अब सीबीआई चार्जशीट तैयार करने की तैयारी में है, जिसके लिए केस से जुड़ी कड़ियों को जोड़ा जा रहा है। इसमें आरोपियों के बयानों का मिलान, वारदात से संबंधित सभी सबूत और फॉरेंसिक रिपोर्ट के तथ्यों को शामिल किया जा रहा है। सीबीआई अधिकारी केस को अंतिम रूप देने के लिए विशेषज्ञों की राय भी ले रहे हैं।1
- जनपद पंचायत पिपरिया के ग्राम मरकाढाना में निर्माणाधीन सड़क की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। आज शाम 4:00 बजे ग्रामीणों ने घटिया सड़क निर्माण का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत के सरपंच प्रहलाद पटेल पर घटिया निर्माण कार्य कराने और उनकी शिकायतों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि सड़क निर्माण में गुणवत्ता मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है और उपयोग की जा रही सामग्री निम्न स्तर की है, जिससे सड़क के टिकाऊ होने पर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि उन्होंने निर्माण कार्य के दौरान कई बार आपत्ति दर्ज कराई थी, लेकिन उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया गया। ग्रामीणों के अनुसार, जब उन्होंने सड़क निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सरपंच प्रहलाद पटेल से शिकायत की, तो सरपंच ने कथित रूप से कहा कि "जिससे शिकायत करना हो कर दो, सड़क का निर्माण हमारे हिसाब से ही होगा।" इस बयान के बाद ग्रामीणों में और अधिक आक्रोश फैल गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत द्वारा कराए जा रहे विकास कार्यों में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है और उन्होंने निर्माण कार्य की स्वतंत्र जांच कराए जाने की मांग की है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से मौके पर पहुंचकर सड़क निर्माण की गुणवत्ता की जांच करने और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई करने की अपील की है। इस मामले पर ग्राम पंचायत प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उचित कार्रवाई नहीं हुई, तो वे जनपद एवं जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उनकी मुख्य मांग है कि निर्माणाधीन सड़क की तकनीकी जांच कराकर गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए, ताकि शासन की राशि का दुरुपयोग न हो और गांव को टिकाऊ सड़क सुविधा मिल सके।1