*राजस्थान की राजनीति में खैरथल की अनूठी चुनावी रणभेरी* *45 वार्डों पर टिकी नजर, गली-मोहल्लों से बाजार तक चुनावी चौपाल गर्म, सभापति की कुर्सी के लिए पार्षदों के समीकरणों पर नजर 7 जिला मुख्यालय और शहर के नाम का मुद्दा भी बना चुनावी चर्चा का केंद्र* *राजस्थान की राजनीति में खैरथल की अनूठी चुनावी रणभेरी* *45 वार्डों पर टिकी नजर, गली-मोहल्लों से बाजार तक चुनावी चौपाल गर्म, सभापति की कुर्सी के लिए पार्षदों के समीकरणों पर नजर 7 जिला मुख्यालय और शहर के नाम का मुद्दा भी बना चुनावी चर्चा का केंद्र* विशेष रिपोर्ट / हीरालाल भूरानी खैरथल खैरथल हीरालाल भूरानी नगर परिषद चुनाव की तारीख नजदीक आते ही खैरथल पूरी तरह चुनावी रंग में रंगता नजर आ रहा है। गली-मोहलों की चौपाल हो या बाजार की चाय की दुकान, हर जगह इन दिनों एक ही चर्चा है-45 वार्डों में जनता किसे अपना प्रतिनिधि चुनेगी और इन चुने हुए पार्षदों के बीच से नगर परिषद की कमान किसके हाथ जाएगी? आगमी 9 सितंबर को होने बाले मतदान ने शहर की राजनीतिक हलचल को और तेज कर दिया है। संभावित प्रत्याशियों की सक्रियता, वार्डवार समीकरण और सभापति की कुर्सी को लेकर बनते-बिगड़ते राजनीतिक समीकरणों ने चुनाव को खासा रोचक बना दिया है। *सिर्फ पार्षद का चुनाव नहीं, खैरथल की नई राजनीतिक दिशा का फैसला* इस बार का चुनाव महज पार्षद चुनने तक सीमित नजर नहीं आ रहा। नगर पालिका से नगर परिषद में क्रमोत्रयन और क्षेत्र के विस्तार के चाद चुनाव का दायरा भी बढ़ा है। आसपास के कुछ गांव परिषद क्षेत्र में शामिल होने से नए मतदाता भी पहली बार नगर परिषद की राजनीति में निर्माणक भूमिका निभाएंगे। सड़क, सफाई, पानी, जल निकासी, यातायात और मूलभूत सुविधाओं के साथ शहर के भविष्य और विकास की दिशा भी मतदाताओं के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। पुराने राजनैतिक समीकरणों के साथ नए क्षेत्रों का रुख इस चुनाव में कई परिणामों को प्रभावित कर सकता है। *जिला मुख्यालय और शहर के नाम का मुद्दा फिर सुर्खियों में* खैरथल को जिला घोषित किए जाने के बाद जिला मुख्यालय और शहर के नाम को लेकर चली कवायद ने भी चुनावी माहौल में अपनी जगह बना ली है। पिछले लंबे समय से इस मुद्दे को लेकर विभित्र स्तरों पर आंदोलन और प्रयास होते रहे हैं। नई अनाज मंडी में चले जिला बचाओ संघर्ष समिति के आंदोलन ने भी इसे शहर की राजनीतिक बास का महत्वपूर्ण विषय बनाया। अब चुनाव के दौरान यह देखना दिलचस्प होगा कि इस मुद्दे से जुड़े आंदोलनकारियों और समर्थकों की राजनीतिक सक्रियता मतदाताओं के फैसले को किस हद तक प्रभावित करती है। *45 वार्डों में कई मुकाबले बने आकर्षण का केंद्र* नगर परिषद के 45 वार्षों में होने वाले चुनाव में कई वार्डों के मुकाबले पर शहर की विशेष नजर है। वार्ड नंबर 18 में व्यापार समिति अध्यक्ष सर्वेश गुप्ता, वाई नंबर 2 में उपसभापति वरुण डाटा, वार्ड नंबर 12 में गिरीश डाटा और वाई नंबर 32 में राम सिंह शर्मा जैसे प्रमुख चेहरों की मौजूदगी ने इन वार्डों की चुनावी चर्चा को खासा गर्म कर दिया है। वहीं पूर्व सभापति हरीश रोघा,वरिष्ठ पत्रकार हीरालाल भूरानी,पूर्व प्रधान ओमप्रकाश रोघा और एडवोकेट भानु प्रकाश जैसे चर्चित चेहरों से जुड़े राजनीतिक समीकरण भी शहर में चर्चा का विषय बने हुए है। कई वार्डो में पार्टी समर्थन के साथ व्यक्तिगत संपर्क, सामाजिक समीकरण और प्रत्याशी की स्थानीय पकड़ मुकाबले की दिशा तय कर सकती है। *नए जुड़े गांवों से बदल सकता है चुनावी गणित* नगर परिषद क्षेत्र के विस्तार के बाद शामिल हुए आसपास के गांव इस चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इन क्षेत्रों में पहली चार नगर परिषद की राजनीति को लेकर उत्साह दिखाई दे रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों की प्राथमिकताएं और शहरी क्षेत्रों की समस्याएं अलग होने के कारण प्रत्याशियों को दोनों तरह के मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करनी होगी। राजनीतिक जानकारों की निगाह इस बात पर भी होगी कि नए जुड़े क्षेत्रों के मतदाता किस दिशा में मतदान करते हैं और उनके फैसले का परिषद के सम्हा सत्ता समीकरण पर कितना असर पड़ता है। *सभापति की कुर्सी सबसे बड़ा आकर्षण* पार्टी के चुनाव परिणामों के साथ सबसे ज्यादा चर्चा नगर परिषद सभापति की कुर्सी को लेकर है। प्रत्येक वार्ड का परिणाम केवल स्थानीय जीत-हार नहीं होगा, बल्कि परिषद में बनने वाले बहुमत और सत्ता के समीकरणों को भी प्रभावित करेगा। चुनावी चौपालों में प्रत्याशियों की जीत के साथ यह सवाल भी तैर रहा है कि कौन से पार्षद किस खेमे को मजबूती देंगे और आखिर परिषद की कमान किसके हाथ पहुंचेगी। यही कारण है कि सभापति की दौड़ ने 45 वार्डों के मुकाबले को और भी महावपूर्ण बना दिया है। *9 सितंबर को जनता लिखेगी खैरथल की नई राजनीतिक पटकथा* फिलहाल खैरथल की सियासी चौगलों में दायों, समीकरणों और संभावनाओं का दौर चल रहा है। कहीं प्रत्याशियों की व्यक्तिगत पकड़ चर्चा में है तो कहीं पार्टी समर्थन और सामाजिक समीकरणों की गणित ताई जा रही है। इसी बीच शहर के नाम, जिला मुख्यालय और परिषद क्षेत्र के विस्तार जैसे मुद्दे भी मतदाताओं की सोच को प्रभावित कर सकते हैं। लेकिन अंतिम फैसला चुनावी चर्चाओं में नहीं, मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की मुहर से होगा। 9 सितंबर को खैरथल की जनता 45 वार्डों में अपना फैसला सुनाएगी और इसी फैसले से तय होगी नगर परिषद की नई राजनीतिक तरबीर। अब देखना यह है कि चुनावी रण में कौन बाजी मारता है और आखिर खैरथल की नगर परिषद की कुर्सी तक पहुंचने की राह किसके लिए आसान होती है।
*राजस्थान की राजनीति में खैरथल की अनूठी चुनावी रणभेरी* *45 वार्डों पर टिकी नजर, गली-मोहल्लों से बाजार तक चुनावी चौपाल गर्म, सभापति की कुर्सी के लिए पार्षदों के समीकरणों पर नजर 7 जिला मुख्यालय और शहर के नाम का मुद्दा भी बना चुनावी चर्चा का केंद्र* *राजस्थान की राजनीति में खैरथल की अनूठी चुनावी रणभेरी* *45 वार्डों पर टिकी नजर, गली-मोहल्लों से बाजार तक चुनावी चौपाल गर्म, सभापति की कुर्सी के लिए पार्षदों के समीकरणों पर नजर 7 जिला मुख्यालय और शहर के नाम का मुद्दा भी बना चुनावी चर्चा का केंद्र* विशेष रिपोर्ट / हीरालाल भूरानी खैरथल खैरथल हीरालाल भूरानी नगर परिषद चुनाव की तारीख नजदीक आते ही खैरथल पूरी तरह चुनावी रंग में रंगता नजर आ रहा है। गली-मोहलों की चौपाल हो या बाजार की चाय की दुकान, हर जगह इन दिनों एक ही चर्चा है-45 वार्डों में जनता किसे अपना प्रतिनिधि चुनेगी और इन चुने हुए पार्षदों के बीच से नगर परिषद की कमान किसके हाथ जाएगी? आगमी 9 सितंबर को होने बाले मतदान ने शहर की राजनीतिक हलचल को और तेज कर दिया है। संभावित प्रत्याशियों की सक्रियता, वार्डवार समीकरण और सभापति की कुर्सी को लेकर बनते-बिगड़ते राजनीतिक समीकरणों ने चुनाव को खासा रोचक बना दिया है। *सिर्फ पार्षद का चुनाव नहीं, खैरथल की नई राजनीतिक दिशा का फैसला* इस बार का चुनाव महज पार्षद चुनने तक सीमित नजर नहीं आ रहा। नगर पालिका से नगर परिषद में क्रमोत्रयन और क्षेत्र के विस्तार के चाद चुनाव का दायरा भी बढ़ा है। आसपास के कुछ गांव परिषद क्षेत्र में शामिल होने से नए मतदाता भी पहली बार नगर परिषद की राजनीति में निर्माणक भूमिका निभाएंगे। सड़क, सफाई, पानी, जल निकासी, यातायात और मूलभूत सुविधाओं के साथ शहर के भविष्य और विकास की दिशा भी मतदाताओं के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। पुराने राजनैतिक समीकरणों के साथ नए क्षेत्रों का रुख इस चुनाव में कई परिणामों को प्रभावित कर सकता है। *जिला मुख्यालय और शहर के नाम का मुद्दा फिर सुर्खियों में* खैरथल को जिला घोषित किए जाने के बाद जिला मुख्यालय और शहर के नाम को लेकर चली कवायद ने भी चुनावी माहौल में अपनी जगह बना ली है। पिछले लंबे समय से इस मुद्दे को लेकर विभित्र स्तरों पर आंदोलन और प्रयास होते रहे हैं। नई अनाज मंडी में चले जिला बचाओ संघर्ष समिति के आंदोलन ने भी इसे शहर की राजनीतिक बास का महत्वपूर्ण विषय बनाया। अब चुनाव के दौरान यह देखना दिलचस्प होगा कि इस मुद्दे से जुड़े आंदोलनकारियों और समर्थकों की राजनीतिक सक्रियता मतदाताओं के फैसले को किस हद तक प्रभावित करती है। *45 वार्डों में कई मुकाबले बने आकर्षण का केंद्र* नगर परिषद के 45 वार्षों में होने वाले चुनाव में कई वार्डों के मुकाबले पर शहर की विशेष नजर है। वार्ड नंबर 18 में व्यापार समिति अध्यक्ष सर्वेश गुप्ता, वाई नंबर 2 में उपसभापति वरुण डाटा, वार्ड नंबर 12 में गिरीश डाटा और वाई नंबर 32 में राम सिंह शर्मा जैसे प्रमुख चेहरों की मौजूदगी ने इन वार्डों की चुनावी चर्चा को खासा गर्म कर दिया है। वहीं पूर्व सभापति हरीश रोघा,वरिष्ठ पत्रकार हीरालाल भूरानी,पूर्व प्रधान ओमप्रकाश रोघा और एडवोकेट भानु प्रकाश जैसे चर्चित चेहरों से जुड़े राजनीतिक समीकरण भी शहर में चर्चा का विषय बने हुए है। कई वार्डो में पार्टी समर्थन के साथ व्यक्तिगत संपर्क, सामाजिक समीकरण और प्रत्याशी की स्थानीय पकड़ मुकाबले की दिशा तय कर सकती है। *नए जुड़े गांवों से बदल सकता है चुनावी गणित* नगर परिषद क्षेत्र के विस्तार के बाद शामिल हुए आसपास के गांव इस चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इन क्षेत्रों में पहली चार नगर परिषद की राजनीति को लेकर उत्साह दिखाई दे रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों की प्राथमिकताएं और शहरी क्षेत्रों की समस्याएं अलग होने के कारण प्रत्याशियों को दोनों तरह के मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करनी होगी। राजनीतिक जानकारों की निगाह इस बात पर भी होगी कि नए जुड़े क्षेत्रों के मतदाता किस दिशा में मतदान करते हैं और उनके फैसले का परिषद के सम्हा सत्ता समीकरण पर कितना असर पड़ता है। *सभापति की कुर्सी सबसे बड़ा आकर्षण* पार्टी के चुनाव परिणामों के साथ सबसे ज्यादा चर्चा नगर परिषद सभापति की कुर्सी को लेकर है। प्रत्येक वार्ड का परिणाम केवल स्थानीय जीत-हार नहीं होगा, बल्कि परिषद में बनने वाले बहुमत और सत्ता के समीकरणों को भी प्रभावित करेगा। चुनावी चौपालों में प्रत्याशियों की जीत के साथ यह सवाल भी तैर रहा है कि कौन से पार्षद किस खेमे को मजबूती देंगे और आखिर परिषद की कमान किसके हाथ पहुंचेगी। यही कारण है कि सभापति की दौड़ ने 45 वार्डों के मुकाबले को और भी महावपूर्ण बना दिया है। *9 सितंबर को जनता लिखेगी खैरथल की नई राजनीतिक पटकथा* फिलहाल खैरथल की सियासी चौगलों में दायों, समीकरणों और संभावनाओं का दौर चल रहा है। कहीं प्रत्याशियों की व्यक्तिगत पकड़ चर्चा में है तो कहीं पार्टी समर्थन और सामाजिक समीकरणों की गणित ताई जा रही है। इसी बीच शहर के नाम, जिला मुख्यालय और परिषद क्षेत्र के विस्तार जैसे मुद्दे भी मतदाताओं की सोच को प्रभावित कर सकते हैं। लेकिन अंतिम फैसला चुनावी चर्चाओं में नहीं, मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की मुहर से होगा। 9 सितंबर को खैरथल की जनता 45 वार्डों में अपना फैसला सुनाएगी और इसी फैसले से तय होगी नगर परिषद की नई राजनीतिक तरबीर। अब देखना यह है कि चुनावी रण में कौन बाजी मारता है और आखिर खैरथल की नगर परिषद की कुर्सी तक पहुंचने की राह किसके लिए आसान होती है।
- खैरथल वार्ड 33 में चुनावी सरगर्मियां तेज, निशा बालानी ने शुरू किया जनसंपर्क अभियान वार्ड 33 में चुनावी सरगर्मियां तेज, निशा बालानी ने शुरू किया जनसंपर्क अभियान खैरथल। स्थानीय निकाय चुनावों की तैयारियों के साथ ही वार्डों में चुनावी गतिविधियां तेज हो गई हैं। प्रत्याशियों ने मतदाताओं से संपर्क कर अपने पक्ष में समर्थन जुटाना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में खैरथल की आनंदनगर कॉलोनी स्थित वार्ड नंबर 33 से प्रत्याशी निशा बालानी ने भी अपना जनसंपर्क अभियान शुरू कर दिया है। निशा बालानी वार्ड के विभिन्न क्षेत्रों में घर-घर पहुंचकर मतदाताओं से मुलाकात कर रही हैं और क्षेत्र की समस्याओं एवं विकास की जरूरतों को लेकर लोगों से संवाद कर रही हैं। जनसंपर्क के दौरान निशा बालानी ने मतदाताओं को अपने चुनावी एजेंडे और वार्ड के विकास को लेकर अपनी प्राथमिकताओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने क्षेत्र के लोगों से संवाद करते हुए वार्ड के बेहतर विकास, मूलभूत सुविधाओं और जनहित से जुड़े मुद्दों पर काम करने की बात कही। जनसंपर्क के दौरान स्थानीय लोगों से मिलते हुए निशा बालानी का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वे वार्ड में लोगों से संपर्क करती और समर्थन की अपील करती नजर आ रही हैं।1
- *टपूकड़ा में खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई, करीब 220 किलो मिठाई कराई नष्ट* खैरथल-तिजारा, 26 अगस्त। आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए जिला कलेक्टर अतुल प्रकाश के निर्देशन में खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा जिले में मिलावटी एवं खराब खाद्य पदार्थों के विरुद्ध अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में बुधवार को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अरविंद गेट के निर्देश पर खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने टपूकड़ा कस्बे में कार्रवाई की। खाद्य सुरक्षा अधिकारी हेमंत कुमार यादव ने बताया कि स्थानीय शिकायत के आधार पर टीम टपूकड़ा कस्बे पहुंची। त्योहारी सीजन के दौरान बाहर से आकर ठेलों एवं अस्थायी दुकानों के माध्यम से मिठाइयों की बिक्री करने वाले विक्रेताओं की जांच की जा रही है। निरीक्षण के दौरान कई ऐसे विक्रेता भी सामने आए, जिनके पास खाद्य कारोबार के लिए आवश्यक फूड रजिस्ट्रेशन नहीं पाया गया। कार्रवाई के दौरान नरेश कुमार पुत्र श्री विजय सिंह, निवासी खोहरी खुर्द, टपूकड़ा की दुकान से कलाकंद, रसगुल्ला एवं बर्फी के खाद्य नमूने लिए गए। सभी नमूनों को अग्रिम जांच के लिए खाद्य सुरक्षा प्रयोगशाला भिजवाया गया। निरीक्षण के दौरान दुकान में रखी मिठाइयों में दुर्गंध एवं फफूंद पाए जाने पर खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने मौके पर ही करीब 220 किलो मिठाइयों को नष्ट करवाया। विभाग द्वारा खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता एवं स्वच्छता को लेकर विक्रेताओं को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गए। कार्रवाई के दौरान खाद्य सुरक्षा अधिकारी हेमंत कुमार यादव के साथ महिपाल सिंह एवं सुभाष यादव मौजूद रहे। खाद्य सुरक्षा विभाग ने बताया कि आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए इस प्रकार की कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी।3
- सिहाली कलां में 200 मीटर सड़क बदहाल, गहरे गड्ढों से हादसे का खतरा मुंडावर। उपखण्ड क्षेत्र के गांव सिहाली कलां में गांव के छोर से कुंदनदास मंदिर मार्ग तक करीब 200 मीटर सड़क पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है। सड़क पर जगह-जगह बड़े और गहरे गड्ढे बन गए हैं, जिससे इस मार्ग से गुजरने वाले वाहन चालकों और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बारिश के दौरान स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, क्योंकि गड्ढों में पानी भर जाने से उनकी गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता और दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है। यह मार्ग क्षेत्र का प्रमुख रास्ता है, जहां से प्रतिदिन सैकड़ों वाहन गुजरते हैं। इसी मार्ग से विद्यार्थी विद्यालयों और महाविद्यालयों में पढ़ने के लिए आवागमन करते हैं। इसके अलावा यह सड़क भिवाड़ी, टपूकड़ा और तिजारा क्षेत्र को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण मार्गों में शामिल है। ग्रामीणों का कहना है कि खराब सड़क के कारण उन्हें जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ रहा है। ग्रामीण समाजसेवी देवेंद्र सिंह चौहान, कैप्टन रणधीर सिंह, सूबेदार दिलीप सिंह, राजू पंच, जयसिंह, रोहतास सिंह, सुनील, विजेंदर सिंह, इसब खान, मोहर सिंह थानेदार, मिन्नी ठेकेदार, प्रदीप, लक्ष्मण, सियाराम, धर्मेंद्र और शक्ति सिंह के अनुसार इस समस्या को लेकर संबंधित अधिकारियों से एक-दो बार नहीं, बल्कि अनेक बार शिकायत एवं मुलाकात की जा चुकी है, लेकिन अभी तक स्थायी समाधान नहीं हुआ है। ग्रामीणों ने प्रशासन से सड़क की तत्काल मरम्मत कराने की मांग की है। उनका कहना है कि प्रशासन शायद किसी बड़े हादसे के बाद ही जागेगा।1
- रोनाल्डो की यह कहानी बचपन से लेकर आज तक का पूरा चिट्ठा। रोनाल्डो के बारे में सभी जानकारी उपलब्ध है इस वीडियो में देखने के लिए आप पूरे वीडियो चेंज से देखें और रोनाल्डो बचपन से आज तक क्या क्या हुआ था उसके साथ1
- गांव सुलैला स्कूल के सामने जलभराव, पानी में चलने को मजबूर बच्चे और ग्रामीण फिरोजपुर झिरका क्षेत्र के गांव सुलैला में सरकारी स्कूल के सामने मुख्य रास्ते पर जलभराव से ग्रामीण परेशान हैं। ग्रामीणों के मुताबिक गलियों और नालियों का पानी सड़क पर जमा हो रहा है, जिसकी निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है। बच्चों को रोज इसी पानी से होकर स्कूल जाना पड़ता है, जबकि आए दिन बाइक फिसलने की घटनाएं भी हो रही हैं। ग्रामीणों का दावा है कि जलभराव के कारण करीब 40 प्रतिशत बच्चे स्कूल नहीं आ पाते। ग्रामीणों ने पंचायत या पीडब्ल्यूडी से जल्द जल निकासी और रास्ते की मरम्मत कराने की मांग की है।1
- Haryanvi gayak Ankit Baliyan ki hatyakand Revadi Haryana1
- *खाद्य सुरक्षा विभाग की तिजारा में कार्रवाई, 25 लीटर खराब तेल नष्ट कराया* खैरथल-तिजारा, 26 अगस्त। आगामी त्योहार को देखते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत बुधवार को तिजारा कस्बे में खाद्य प्रतिष्ठानों का औचक निरीक्षण कर कार्रवाई की गई। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अरविंद गेट के दिशा-निर्देश में विभाग की टीम ने संपर्क पोर्टल पर प्राप्त शिकायत के आधार पर बाईपास टोल टैक्स के नजदीक स्थित मैसर्स सम्राट होटल एंड रेस्टोरेंट का निरीक्षण किया। खाद्य सुरक्षा अधिकारी हेमंत कुमार यादव ने बताया कि निरीक्षण के दौरान प्रतिष्ठान में साफ-सफाई की स्थिति संतोषजनक नहीं पाई गई। साथ ही पकौड़े बनाने के लिए रिफाइंड सोयाबीन तेल का बार-बार उपयोग किया जाना पाया गया। कार्रवाई के दौरान पकौड़े बनाने में उपयोग किए जा रहे पनीर एवं रिफाइंड सोयाबीन तेल के नमूने लिए गए, जिन्हें जांच के लिए खाद्य प्रयोगशाला भिजवाया गया है। उन्होंने बताया कि मौके पर करीब 25 लीटर उपयोग में लिया गया खराब रिफाइंड सोयाबीन तेल पाया गया, जिसे विभाग की मौजूदगी में नष्ट करवाया गया। खाद्य प्रयोगशाला से जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत नियमानुसार अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। निरीक्षण के दौरान प्रतिष्ठान को 7 दिवस का इंप्रूवमेंट नोटिस भी जारी किया गया है। निर्धारित अवधि में प्रतिष्ठान संचालक द्वारा साफ-सफाई में सुधार एवं निरीक्षण के दौरान पाई गई कमियों को दूर नहीं किए जाने पर फूड रजिस्ट्रेशन निलंबित किए जाने की कार्रवाई की अनुशंसा की जाएगी। कार्रवाई के दौरान महिपाल सिंह एवं सुभाष भी मौजूद रहे।2