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मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले में स्थित पलेरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एक बार फिर विवादों में घिर गया है। यहां अस्पताल में गंभीर अव्यवस्था और मनमानी के आरोप लगे हैं, जहां मरीजों को समुचित उपचार नहीं मिल पा रहा और डॉक्टरों के बीच चल रहे विवाद का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। इन्हीं तमाम शिकायतों के बाद अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार सुरक्षा संगठन के प्रदेश प्रमुख सचिव राम रतन दीक्षित और उनकी टीम ने अस्पताल का अचानक भ्रमण किया और अव्यवस्थाओं को अपनी आँखों से देखा, जिसके बाद उन्होंने सीएमएचओ डॉक्टर अनुरागी को फोन पर इसकी जानकारी दी। आरोपों के अनुसार, डॉक्टर मुकेश साहू, जिनका बंधपत्र अप्रैल 2026 में समाप्त हो चुका है, वे अब भी अस्पताल की ओपीडी में बैठकर मरीजों का उपचार करते पाए गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बंधपत्र समाप्त होने के बाद भी डॉक्टर साहू सरकारी क्वार्टर में निवास कर रहे हैं और अपनी सेवाएं दे रहे हैं, ऐसे में यदि किसी मरीज की हालत खराब होती है तो इसका जिम्मेदार कौन होगा। मरीजों को अस्पताल में उपलब्ध दवाइयों के बजाय बाहर की कमीशन वाली दवाइयां भी लिखी जा रही हैं, जिससे गरीब मरीजों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। अस्पताल में डॉक्टरों के बीच लगातार विवाद बना हुआ है, जिसके कारण मरीजों को भीषण गर्मी के बीच घंटों तक परेशान होना और इधर-उधर भटकने के लिए मजबूर होना पड़ता है। ड्यूटी पर कुछ डॉक्टर टी-शर्ट और चढ़ा पहने हुए पाए गए, जिससे उनकी पहचान भी स्पष्ट नहीं होती। डॉक्टर अंकित राजपूत एवं डॉक्टर महेंद्र पटेल के नाम भी इस पूरे मामले में चर्चा में हैं, और कुछ दिन पहले अस्पताल परिसर में डॉक्टर के चेंबर में एक आवारा कुत्ते के आराम करते हुए फोटो सामने आने के बाद स्वास्थ्य केंद्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मरीजों और उनके परिजनों का आरोप है कि स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह अव्यवस्थित हो चुकी हैं और जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं। स्थानीय नागरिकों ने स्वास्थ्य विभाग एवं जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार सुरक्षा संगठन आंदोलन करने को मजबूर होगा।

7 hrs ago
user_Anil Mishra patrkar
Anil Mishra patrkar
Photographer जतारा, टीकमगढ़, मध्य प्रदेश•
7 hrs ago

मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले में स्थित पलेरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एक बार फिर विवादों में घिर गया है। यहां अस्पताल में गंभीर अव्यवस्था और मनमानी के आरोप लगे हैं, जहां मरीजों को समुचित उपचार नहीं मिल पा रहा और डॉक्टरों के बीच चल रहे विवाद का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। इन्हीं तमाम शिकायतों के बाद अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार सुरक्षा संगठन के प्रदेश प्रमुख सचिव राम रतन दीक्षित और उनकी टीम ने अस्पताल का अचानक भ्रमण किया और अव्यवस्थाओं को अपनी आँखों से देखा, जिसके बाद उन्होंने सीएमएचओ डॉक्टर अनुरागी को फोन पर इसकी जानकारी दी। आरोपों के अनुसार, डॉक्टर मुकेश साहू, जिनका बंधपत्र अप्रैल 2026 में समाप्त हो चुका है, वे अब भी अस्पताल की ओपीडी में बैठकर मरीजों

का उपचार करते पाए गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बंधपत्र समाप्त होने के बाद भी डॉक्टर साहू सरकारी क्वार्टर में निवास कर रहे हैं और अपनी सेवाएं दे रहे हैं, ऐसे में यदि किसी मरीज की हालत खराब होती है तो इसका जिम्मेदार कौन होगा। मरीजों को अस्पताल में उपलब्ध दवाइयों के बजाय बाहर की कमीशन वाली दवाइयां भी लिखी जा रही हैं, जिससे गरीब मरीजों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। अस्पताल में डॉक्टरों के बीच लगातार विवाद बना हुआ है, जिसके कारण मरीजों को भीषण गर्मी के बीच घंटों तक परेशान होना और इधर-उधर भटकने के लिए मजबूर होना पड़ता है। ड्यूटी पर कुछ डॉक्टर टी-शर्ट और चढ़ा पहने हुए पाए गए, जिससे उनकी पहचान भी स्पष्ट नहीं

होती। डॉक्टर अंकित राजपूत एवं डॉक्टर महेंद्र पटेल के नाम भी इस पूरे मामले में चर्चा में हैं, और कुछ दिन पहले अस्पताल परिसर में डॉक्टर के चेंबर में एक आवारा कुत्ते के आराम करते हुए फोटो सामने आने के बाद स्वास्थ्य केंद्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मरीजों और उनके परिजनों का आरोप है कि स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह अव्यवस्थित हो चुकी हैं और जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं। स्थानीय नागरिकों ने स्वास्थ्य विभाग एवं जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार सुरक्षा संगठन आंदोलन करने को मजबूर होगा।

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  • जतारा में राकेश गिरी पर गंभीर आरोप लगाने वाले अंकित पाराशर ने अपने पूर्व बयानों से पलटते हुए एक बड़ा यू-टर्न ले लिया है। पाराशर ने स्पष्ट किया है कि उनके द्वारा लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद, निराधार और तथ्यों से परे थे। इस अचानक हुए बयान बदलाव से राजनीतिक और सामाजिक हलकों में गहरी हलचल मच गई है, और यह घटना एक बड़ी साजिश के बेनकाब होने का संकेत दे रही है।
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    जतारा में राकेश गिरी पर गंभीर आरोप लगाने वाले अंकित पाराशर ने अपने पूर्व बयानों से पलटते हुए एक बड़ा यू-टर्न ले लिया है।

पाराशर ने स्पष्ट किया है कि उनके द्वारा लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद, निराधार और तथ्यों से परे थे। इस अचानक हुए बयान बदलाव से राजनीतिक और सामाजिक हलकों में गहरी हलचल मच गई है, और यह घटना एक बड़ी साजिश के बेनकाब होने का संकेत दे रही है।
    user_Mahendra Kumar Dubey
    Mahendra Kumar Dubey
    Voice of people जतारा, टीकमगढ़, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
  • मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले में स्थित पलेरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एक बार फिर विवादों में घिर गया है। यहां अस्पताल में गंभीर अव्यवस्था और मनमानी के आरोप लगे हैं, जहां मरीजों को समुचित उपचार नहीं मिल पा रहा और डॉक्टरों के बीच चल रहे विवाद का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। इन्हीं तमाम शिकायतों के बाद अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार सुरक्षा संगठन के प्रदेश प्रमुख सचिव राम रतन दीक्षित और उनकी टीम ने अस्पताल का अचानक भ्रमण किया और अव्यवस्थाओं को अपनी आँखों से देखा, जिसके बाद उन्होंने सीएमएचओ डॉक्टर अनुरागी को फोन पर इसकी जानकारी दी। आरोपों के अनुसार, डॉक्टर मुकेश साहू, जिनका बंधपत्र अप्रैल 2026 में समाप्त हो चुका है, वे अब भी अस्पताल की ओपीडी में बैठकर मरीजों का उपचार करते पाए गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बंधपत्र समाप्त होने के बाद भी डॉक्टर साहू सरकारी क्वार्टर में निवास कर रहे हैं और अपनी सेवाएं दे रहे हैं, ऐसे में यदि किसी मरीज की हालत खराब होती है तो इसका जिम्मेदार कौन होगा। मरीजों को अस्पताल में उपलब्ध दवाइयों के बजाय बाहर की कमीशन वाली दवाइयां भी लिखी जा रही हैं, जिससे गरीब मरीजों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। अस्पताल में डॉक्टरों के बीच लगातार विवाद बना हुआ है, जिसके कारण मरीजों को भीषण गर्मी के बीच घंटों तक परेशान होना और इधर-उधर भटकने के लिए मजबूर होना पड़ता है। ड्यूटी पर कुछ डॉक्टर टी-शर्ट और चढ़ा पहने हुए पाए गए, जिससे उनकी पहचान भी स्पष्ट नहीं होती। डॉक्टर अंकित राजपूत एवं डॉक्टर महेंद्र पटेल के नाम भी इस पूरे मामले में चर्चा में हैं, और कुछ दिन पहले अस्पताल परिसर में डॉक्टर के चेंबर में एक आवारा कुत्ते के आराम करते हुए फोटो सामने आने के बाद स्वास्थ्य केंद्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मरीजों और उनके परिजनों का आरोप है कि स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह अव्यवस्थित हो चुकी हैं और जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं। स्थानीय नागरिकों ने स्वास्थ्य विभाग एवं जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार सुरक्षा संगठन आंदोलन करने को मजबूर होगा।
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    मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले में स्थित पलेरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एक बार फिर विवादों में घिर गया है। यहां अस्पताल में गंभीर अव्यवस्था और मनमानी के आरोप लगे हैं, जहां मरीजों को समुचित उपचार नहीं मिल पा रहा और डॉक्टरों के बीच चल रहे विवाद का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। इन्हीं तमाम शिकायतों के बाद अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार सुरक्षा संगठन के प्रदेश प्रमुख सचिव राम रतन दीक्षित और उनकी टीम ने अस्पताल का अचानक भ्रमण किया और अव्यवस्थाओं को अपनी आँखों से देखा, जिसके बाद उन्होंने सीएमएचओ डॉक्टर अनुरागी को फोन पर इसकी जानकारी दी।

आरोपों के अनुसार, डॉक्टर मुकेश साहू, जिनका बंधपत्र अप्रैल 2026 में समाप्त हो चुका है, वे अब भी अस्पताल की ओपीडी में बैठकर मरीजों का उपचार करते पाए गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बंधपत्र समाप्त होने के बाद भी डॉक्टर साहू सरकारी क्वार्टर में निवास कर रहे हैं और अपनी सेवाएं दे रहे हैं, ऐसे में यदि किसी मरीज की हालत खराब होती है तो इसका जिम्मेदार कौन होगा। मरीजों को अस्पताल में उपलब्ध दवाइयों के बजाय बाहर की कमीशन वाली दवाइयां भी लिखी जा रही हैं, जिससे गरीब मरीजों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। अस्पताल में डॉक्टरों के बीच लगातार विवाद बना हुआ है, जिसके कारण मरीजों को भीषण गर्मी के बीच घंटों तक परेशान होना और इधर-उधर भटकने के लिए मजबूर होना पड़ता है। ड्यूटी पर कुछ डॉक्टर टी-शर्ट और चढ़ा पहने हुए पाए गए, जिससे उनकी पहचान भी स्पष्ट नहीं होती। डॉक्टर अंकित राजपूत एवं डॉक्टर महेंद्र पटेल के नाम भी इस पूरे मामले में चर्चा में हैं, और कुछ दिन पहले अस्पताल परिसर में डॉक्टर के चेंबर में एक आवारा कुत्ते के आराम करते हुए फोटो सामने आने के बाद स्वास्थ्य केंद्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मरीजों और उनके परिजनों का आरोप है कि स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह अव्यवस्थित हो चुकी हैं और जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं।

स्थानीय नागरिकों ने स्वास्थ्य विभाग एवं जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार सुरक्षा संगठन आंदोलन करने को मजबूर होगा।
    user_Anil Mishra patrkar
    Anil Mishra patrkar
    Photographer जतारा, टीकमगढ़, मध्य प्रदेश•
    7 hrs ago
  • राजधानी भोपाल स्थित विश्वविद्यालय का नाम बदलकर 'राजा भोज-बागदेवी विश्वविद्यालय' करने का प्रस्ताव कार्य परिषद द्वारा शासन को भेजा गया है। भाजपा ने इस कदम को जनभावना और सनातन संस्कृति के सम्मान का प्रतीक बताया है। यह प्रस्ताव भोपाल के बुद्धिजीवी वर्ग, आमजन और प्रबुद्ध जनों की लंबे समय से चली आ रही मांग पर आधारित है, जिसमें विश्वविद्यालय का नाम महान शासक राजा भोज और विद्या की देवी बागदेवी के नाम पर रखने की बात कही गई थी। भाजपा के अनुसार, यह नामकरण भोपाल की विरासत और सनातन संस्कृति के लिए एक बड़ी सौगात होगा, क्योंकि राजा भोज भोपाल के गौरव हैं और बागदेवी विद्या की अधिष्ठात्री हैं। भाजपा ने इस पर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी तुष्टिकरण की राजनीति में अंधी होकर भोपाल की विरासत, संस्कृति और सनातन तक का विरोध कर रही है। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस से जनभावनाओं का सम्मान करने का आग्रह किया है। वर्तमान में, कार्य परिषद द्वारा भेजा गया यह प्रस्ताव राज्य सरकार के अंतिम निर्णय के लिए लंबित है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद, विश्वविद्यालय का आधिकारिक नाम 'राजा भोज-बागदेवी विश्वविद्यालय' हो जाएगा।
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    राजधानी भोपाल स्थित विश्वविद्यालय का नाम बदलकर 'राजा भोज-बागदेवी विश्वविद्यालय' करने का प्रस्ताव कार्य परिषद द्वारा शासन को भेजा गया है। भाजपा ने इस कदम को जनभावना और सनातन संस्कृति के सम्मान का प्रतीक बताया है। यह प्रस्ताव भोपाल के बुद्धिजीवी वर्ग, आमजन और प्रबुद्ध जनों की लंबे समय से चली आ रही मांग पर आधारित है, जिसमें विश्वविद्यालय का नाम महान शासक राजा भोज और विद्या की देवी बागदेवी के नाम पर रखने की बात कही गई थी।

भाजपा के अनुसार, यह नामकरण भोपाल की विरासत और सनातन संस्कृति के लिए एक बड़ी सौगात होगा, क्योंकि राजा भोज भोपाल के गौरव हैं और बागदेवी विद्या की अधिष्ठात्री हैं। भाजपा ने इस पर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी तुष्टिकरण की राजनीति में अंधी होकर भोपाल की विरासत, संस्कृति और सनातन तक का विरोध कर रही है। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस से जनभावनाओं का सम्मान करने का आग्रह किया है।

वर्तमान में, कार्य परिषद द्वारा भेजा गया यह प्रस्ताव राज्य सरकार के अंतिम निर्णय के लिए लंबित है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद, विश्वविद्यालय का आधिकारिक नाम 'राजा भोज-बागदेवी विश्वविद्यालय' हो जाएगा।
    user_Manish Yadav
    Manish Yadav
    पलेरा, टीकमगढ़, मध्य प्रदेश•
    3 hrs ago
  • टीकमगढ़ जिले में, कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय ने घोषणा की है कि बम्होरी खास पंचायत कचरा प्रबंधन के क्षेत्र में एक अग्रणी स्थान प्राप्त करेगी। यह कदम पंचायत को अपशिष्ट प्रबंधन में आदर्श बनाने की दिशा में उठाया जा रहा है।
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    टीकमगढ़ जिले में, कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय ने घोषणा की है कि बम्होरी खास पंचायत कचरा प्रबंधन के क्षेत्र में एक अग्रणी स्थान प्राप्त करेगी। यह कदम पंचायत को अपशिष्ट प्रबंधन में आदर्श बनाने की दिशा में उठाया जा रहा है।
    user_MUHAMMAD KHWAJA JOURNALIST
    MUHAMMAD KHWAJA JOURNALIST
    Media company पलेरा, टीकमगढ़, मध्य प्रदेश•
    7 hrs ago
  • टीकमगढ़ जिले के जतारा विकास खंड के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत बिदारी, शासन द्वारा प्रदान की जाने वाली मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। एक खास रिपोर्ट में इस स्थिति पर सवाल उठाया गया है कि आखिर क्यों यह पंचायत इन बुनियादी सुविधाओं से महरूम है। राम सिंह यादव जी के साथ इस खास रिपोर्ट में यह गंभीर मुद्दा उठाया गया है।
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    टीकमगढ़ जिले के जतारा विकास खंड के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत बिदारी, शासन द्वारा प्रदान की जाने वाली मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। एक खास रिपोर्ट में इस स्थिति पर सवाल उठाया गया है कि आखिर क्यों यह पंचायत इन बुनियादी सुविधाओं से महरूम है। राम सिंह यादव जी के साथ इस खास रिपोर्ट में यह गंभीर मुद्दा उठाया गया है।
    user_राम सिंह यादव जिला ब्यूरो चीफ टीकमगढ़
    राम सिंह यादव जिला ब्यूरो चीफ टीकमगढ़
    Spa पलेरा, टीकमगढ़, मध्य प्रदेश•
    11 hrs ago
  • जून 2026 के मलेरिया निरोधक माह के तहत, छतरपुर जिले में जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। सीएमएचओ कार्यालय से मलेरिया अधिकारी डॉ. गौरव खरे ने इस रथ को रवाना किया। इस अवसर पर जूनियर मलेरिया इंस्पेक्टर दिनेश कुमार पटेरिया भी मौजूद थे, जिन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि 'जागरूकता ही श्रेष्ठ उपाय है, जो हमें मलेरिया से मुक्ति दिलाएगी'। यह जागरूकता रथ छतरपुर जिले के विभिन्न गांवों और कस्बों में जाकर लोगों को मलेरिया बीमारी के लक्षणों और उससे बचाव के प्रति जागरूक करेगा। मध्य प्रदेश शासन के लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा यह अभियान जनता को जागरूक करने के उद्देश्य से हर वर्ष चलाया जाता है, ताकि मलेरिया के लक्षणों से बचाव सुनिश्चित किया जा सके।
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    जून 2026 के मलेरिया निरोधक माह के तहत, छतरपुर जिले में जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। सीएमएचओ कार्यालय से मलेरिया अधिकारी डॉ. गौरव खरे ने इस रथ को रवाना किया। इस अवसर पर जूनियर मलेरिया इंस्पेक्टर दिनेश कुमार पटेरिया भी मौजूद थे, जिन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि 'जागरूकता ही श्रेष्ठ उपाय है, जो हमें मलेरिया से मुक्ति दिलाएगी'।

यह जागरूकता रथ छतरपुर जिले के विभिन्न गांवों और कस्बों में जाकर लोगों को मलेरिया बीमारी के लक्षणों और उससे बचाव के प्रति जागरूक करेगा। मध्य प्रदेश शासन के लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा यह अभियान जनता को जागरूक करने के उद्देश्य से हर वर्ष चलाया जाता है, ताकि मलेरिया के लक्षणों से बचाव सुनिश्चित किया जा सके।
    user_ब्यूरो पत्रकार सुरेश चौधरी BLG
    ब्यूरो पत्रकार सुरेश चौधरी BLG
    Farmer बलदेवगढ़, टीकमगढ़, मध्य प्रदेश•
    52 min ago
  • खरगापुर/कुड़ीला से एक दुखद घटना सामने आई है, जहाँ कुड़ीला थाना क्षेत्र के ग्राम बरमे में बीमारी से परेशान एक 62 वर्षीय बुजुर्ग महिला ने आत्मघाती कदम उठाते हुए फाँसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इस घटना के बाद पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम खरगापुर में कराया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत बरमे की निवासी श्रीमती बाई सेन (62 वर्ष), जो छबिलाल सेन की पत्नी थीं, लंबे समय से एक गंभीर बीमारी से ग्रसित थीं। बताया जा रहा है कि बीमारी के कारण वे अत्यधिक परेशान और मानसिक तनाव में थीं, जिसके चलते उन्होंने अपने घर पर फाँसी लगा ली, जिससे उनकी मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस तत्काल मौके पर पहुँची और शव को फाँसी के फंदे से नीचे उतारा। पुलिस ने पंचनामा कार्रवाई पूरी करने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए खरगापुर भेजा, जहाँ पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस ने इस मामले में फिलहाल मर्ग कायम कर जाँच शुरू कर दी है।
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    खरगापुर/कुड़ीला से एक दुखद घटना सामने आई है, जहाँ कुड़ीला थाना क्षेत्र के ग्राम बरमे में बीमारी से परेशान एक 62 वर्षीय बुजुर्ग महिला ने आत्मघाती कदम उठाते हुए फाँसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इस घटना के बाद पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम खरगापुर में कराया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत बरमे की निवासी श्रीमती बाई सेन (62 वर्ष), जो छबिलाल सेन की पत्नी थीं, लंबे समय से एक गंभीर बीमारी से ग्रसित थीं। बताया जा रहा है कि बीमारी के कारण वे अत्यधिक परेशान और मानसिक तनाव में थीं, जिसके चलते उन्होंने अपने घर पर फाँसी लगा ली, जिससे उनकी मौत हो गई।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस तत्काल मौके पर पहुँची और शव को फाँसी के फंदे से नीचे उतारा। पुलिस ने पंचनामा कार्रवाई पूरी करने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए खरगापुर भेजा, जहाँ पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस ने इस मामले में फिलहाल मर्ग कायम कर जाँच शुरू कर दी है।
    user_रिपोर्टधर्मेंद्र सिंह लोधी
    रिपोर्टधर्मेंद्र सिंह लोधी
    बलदेवगढ़, टीकमगढ़, मध्य प्रदेश•
    5 hrs ago
  • टीकमगढ़ जिले की ग्राम पंचायत बम्होरी खास (जनपद जतारा) में 03 जून 2026 को कलेक्टर श्री विवेक श्रोत्रिय ने भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों से संवाद कर गांव में स्वच्छता के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी ली और पंचायत को कचरा प्रबंधन में अग्रणी बनाने पर जोर दिया। जनसमुदाय ने कलेक्टर को बताया कि उनकी ग्राम पंचायत घर-घर से कचरा संग्रहण करा रही है और इसके लिए स्वच्छता कर (टैक्स) भी लिया जा रहा है। ग्राम पंचायत के दुकानदार भी प्रतिमाह स्वच्छता कर का भुगतान कर रहे हैं। कलेक्टर श्री श्रोत्रिय ने ग्राम पंचायत द्वारा अपनाई जा रही घर-घर कचरा संग्रहण और अपशिष्ट-निष्पादन प्रक्रिया की सराहना की। संवाद के दौरान, कलेक्टर ने लोगों को कचरा प्रबंधन का विस्तार पूरे गांव में करने की समझाइश दी। उन्होंने कचरे को स्रोत पर ही अलग-अलग करने – प्लास्टिक, ऑर्गेनिक (खाद्य पदार्थ) और अन्य कचरे को अलग रखने, तथा घर से निकलने वाले कचरे को केवल संग्रहण वाहन में ही डालने का आग्रह किया। उन्होंने प्लास्टिक/पॉलीथिन का कम से कम इस्तेमाल करने, एक बार इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक से बचने और पुनः उपयोग में आने वाले सामान को अपनाने पर जोर दिया। ग्रामीण पृष्ठभूमि को देखते हुए, उन्होंने घरों में कंपोस्टिंग प्रक्रिया का उपयोग कर खाद बनाने की आदत डालने की सलाह दी, ताकि ऑर्गेनिक वेस्ट और घरेलू कचरे जैसे गोबर, बचे हुए भोजन के अवशेष, सब्जी, फूल, फल और पत्तों का सही उपयोग हो सके। कलेक्टर श्री श्रोत्रिय ने निर्देश दिए कि घर-घर से कचरा संग्रहण सुनिश्चित करना ग्राम पंचायत की जिम्मेदारी है। उन्होंने नियमित निरीक्षण कर इसकी रिपोर्ट जनपद पंचायत को देने को कहा। मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत और स्वयंसेवी कार्यकर्ताओं को मिलकर प्रति सप्ताह सफाई की स्थिति का जायजा लेने और ग्राम पंचायत तथा जन समुदाय के माध्यम से सफाई की बेहतर एवं नियमित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए। इस अवसर पर, कलेक्टर श्री विवेक श्रोत्रिय और संबंधित अधिकारियों की उपस्थिति में लोगों ने अपनी ग्राम पंचायत बम्होरी खास को स्वच्छ बनाने, बाहर कचरा न फेंकने, प्लास्टिक/पॉलीथिन का कम से कम उपयोग करने और ग्राम पंचायत का सहयोग करते हुए नियमित रूप से स्वच्छता कर देने का संकल्प लिया। इस भ्रमण के दौरान प्रभारी जनपद सीईओ श्री अरविंद बोरकर, तहसीलदार श्री निशांत चौरसिया और जिला समन्वयक, जिला पंचायत श्री मनीष जैन भी उपस्थित रहे।
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    टीकमगढ़ जिले की ग्राम पंचायत बम्होरी खास (जनपद जतारा) में 03 जून 2026 को कलेक्टर श्री विवेक श्रोत्रिय ने भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों से संवाद कर गांव में स्वच्छता के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी ली और पंचायत को कचरा प्रबंधन में अग्रणी बनाने पर जोर दिया।

जनसमुदाय ने कलेक्टर को बताया कि उनकी ग्राम पंचायत घर-घर से कचरा संग्रहण करा रही है और इसके लिए स्वच्छता कर (टैक्स) भी लिया जा रहा है। ग्राम पंचायत के दुकानदार भी प्रतिमाह स्वच्छता कर का भुगतान कर रहे हैं। कलेक्टर श्री श्रोत्रिय ने ग्राम पंचायत द्वारा अपनाई जा रही घर-घर कचरा संग्रहण और अपशिष्ट-निष्पादन प्रक्रिया की सराहना की।

संवाद के दौरान, कलेक्टर ने लोगों को कचरा प्रबंधन का विस्तार पूरे गांव में करने की समझाइश दी। उन्होंने कचरे को स्रोत पर ही अलग-अलग करने – प्लास्टिक, ऑर्गेनिक (खाद्य पदार्थ) और अन्य कचरे को अलग रखने, तथा घर से निकलने वाले कचरे को केवल संग्रहण वाहन में ही डालने का आग्रह किया। उन्होंने प्लास्टिक/पॉलीथिन का कम से कम इस्तेमाल करने, एक बार इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक से बचने और पुनः उपयोग में आने वाले सामान को अपनाने पर जोर दिया। ग्रामीण पृष्ठभूमि को देखते हुए, उन्होंने घरों में कंपोस्टिंग प्रक्रिया का उपयोग कर खाद बनाने की आदत डालने की सलाह दी, ताकि ऑर्गेनिक वेस्ट और घरेलू कचरे जैसे गोबर, बचे हुए भोजन के अवशेष, सब्जी, फूल, फल और पत्तों का सही उपयोग हो सके।

कलेक्टर श्री श्रोत्रिय ने निर्देश दिए कि घर-घर से कचरा संग्रहण सुनिश्चित करना ग्राम पंचायत की जिम्मेदारी है। उन्होंने नियमित निरीक्षण कर इसकी रिपोर्ट जनपद पंचायत को देने को कहा। मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत और स्वयंसेवी कार्यकर्ताओं को मिलकर प्रति सप्ताह सफाई की स्थिति का जायजा लेने और ग्राम पंचायत तथा जन समुदाय के माध्यम से सफाई की बेहतर एवं नियमित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए। इस अवसर पर, कलेक्टर श्री विवेक श्रोत्रिय और संबंधित अधिकारियों की उपस्थिति में लोगों ने अपनी ग्राम पंचायत बम्होरी खास को स्वच्छ बनाने, बाहर कचरा न फेंकने, प्लास्टिक/पॉलीथिन का कम से कम उपयोग करने और ग्राम पंचायत का सहयोग करते हुए नियमित रूप से स्वच्छता कर देने का संकल्प लिया। इस भ्रमण के दौरान प्रभारी जनपद सीईओ श्री अरविंद बोरकर, तहसीलदार श्री निशांत चौरसिया और जिला समन्वयक, जिला पंचायत श्री मनीष जैन भी उपस्थित रहे।
    user_Anil Mishra patrkar
    Anil Mishra patrkar
    Photographer जतारा, टीकमगढ़, मध्य प्रदेश•
    19 hrs ago
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