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a patwari ka stay ka ullanghan kara raha hai aur jaanch mein aaya andar baithkar ke salary le raha hai iski karnama dekhiae aur turant suspend kiya jaaye
Mithlesh Kumar Mishra
a patwari ka stay ka ullanghan kara raha hai aur jaanch mein aaya andar baithkar ke salary le raha hai iski karnama dekhiae aur turant suspend kiya jaaye
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- 🙏कल दिनांक 30 जनवरी दोपहर 12:00 बजे सिस्टम तो सुधरेगा संगठन संस्थापक नीरज शर्मा भारत के राष्ट्रपति महोदय के लिए UGC बिल वापस लेने के संबंध में खून से पत्र लिखेंगे सभी सहयोगियों से निवेदन है ज्यादा से ज्यादा संख्या में धरना स्थल पर पहुंचे 27 जनवरी 2026 से सिस्टम तो सुधरेगा संगठन संस्थापक नीरज शर्मा धरने पर बैठे हैं, धरना स्थल-नागला मकारोल ग्वालियर रोड आगरा सूचना समझ में ना आने पर या स्थान न मिलने पर कॉल करें 88689616091
- भाई ने जातिवादी सिस्टम की पोल खोल दीं 🔥🤟 इस पूरे वीडियो में शुंभाकर मिश्रा जी ने जातिवादी सिस्टम और सबका साथ सबका विकास नाम के योजना की धज्जियां उड़ा दिया UGC पर सबसे सटीक वीडियो1
- कमीशन की भूख ने छीना बच्चों का निवाला नौनिहालों की सेहत से खिलवाड़, अस्पताल में 37 बच्चे डीईओ ने साधी चुप्पी, लीपापोती में जुटा अमला क्या मासूम की बलि का इंतजार कर रहा प्रशासन? उमरिया। सरकारी तंत्र की संवेदनहीनता और भ्रष्टाचार की दीमक ने अब हमारे बच्चों की थाली तक अपनी पहुंच बना ली है। करकेली विकासखंड के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जरहा में बुधवार को जो मंजर दिखा, उसने न केवल अभिभावकों की रूह कंपा दी, बल्कि शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन के उन दावों की भी पोल खोल दी, जो स्वच्छता और गुणवत्ता के नाम पर कागजों में दर्ज किए जाते हैं। एक साथ 20 से अधिक बच्चों का उल्टियां करना और बेहोश होकर गिरना कोई सीजनल बीमारी नहीं, बल्कि उस सिस्टम का परिणाम है जो बच्चों के निवाले में भी कमीशन तलाशता है। सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी या किसी मासूम की बलि का इंतजार कर रहा है, जिसके बाद ही असली कार्रवाई होगी? स्व-सहायता समूहों की मनमानी जरहा स्कूल की घटना ने यह साफ कर दिया है कि स्कूलों में संचालित मध्यान्ह भोजन योजना अब केवल भ्रष्टाचार का अड्डा बनकर रह गई है। जमीनी हकीकत यह है कि न तो कभी खाने की गुणवत्ता की जांच होती है और न ही कभी निर्धारित मीनू का पालन किया जाता है। स्व-सहायता समूह अपनी मनमानी पर उतारू हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि ऊपर बैठे जिम्मेदार अधिकारियों तक उनका हिस्सा समय पर पहुंच रहा है। सूत्रों की मानें तो बच्चों को परोसा जाने वाला भोजन जानवरों के खाने लायक भी नहीं होता, लेकिन मजबूरी में मासूम उसे गले उतारते हैं। क्या जरहा की घटना उस दूषित सामग्री का परिणाम है जो 26 जनवरी के नाम पर खपा दी गई, अगर गणतंत्र दिवस पर बांटी गई बूंदी या भोजन से बच्चे बीमार हुए हैं, तो अब तक उस सप्लायर और खरीदी करने वाले पर एफआईआर क्यों नहीं हुई। डीईओ की चुप्पी और विभाग की संवेदनहीनता जब जिले के नौनिहाल अस्पताल में जिंदगी और दर्द से जूझ रहे थे, तब जिला शिक्षा अधिकारी आर.एस. मरावी का फोन रिसीव न करना उनकी कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाता है। यह चुप्पी साधारण नहीं है, यह उस संवेदनहीनता का प्रतीक है जो इशारा करती है कि विभाग को बच्चों की जान से ज्यादा अपनी कुर्सी और कमियों को छिपाने की चिंता है। आखिर साहब को किस बात का डर है या फिर जवाबदेही तय करने के नाम पर उनके हाथ बंधे हुए हैं। कलेक्टर पहुंचे अस्पताल, कार्रवाई शून्य कलेक्टर धरणेन्द्र कुमार जैन ने जिला अस्पताल पहुंचकर बच्चों का हाल जाना और सैंपलिंग की बात कही, लेकिन जनता पूछती है कि ये सैंपलिंग हमेशा घटना के बाद ही क्यों होती है, क्या प्रशासन का काम केवल एम्बुलेंस बुलवाना और अस्पताल के बेड गिनना रह गया है। एसडीएम और स्वास्थ्य विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं, बच्चों को घुलघुली और जिला अस्पताल रेफर किया गया, लेकिन उस ठेकेदार या समूह पर क्या कार्रवाई हुई जिसने बच्चों की जान खतरे में डाली। प्रशासनिक लीपापोती का खेल शुरू अंदेशा जताया जा रहा है कि हर बार की तरह इस बार भी प्रशासन अपनी खाल बचाने के लिए खंडन जारी कर देगा या मामले को मौसमी बीमारी का नाम देकर रफा-दफा कर देगा। यह बेहद शर्मनाक है कि 37 बच्चों की तबीयत बिगडऩे के बावजूद अब तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी को निलंबित नहीं किया गया है। जरहा की घटना पूरे जिले के सरकारी स्कूलों के लिए एक चेतावनी है। अगर आज दोषियों पर कठोरतम कार्रवाई नहीं हुई, तो कल फिर किसी दूसरे स्कूल में मासूमों की जान दांव पर होगी। प्रशासन को समझना होगा कि बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कल को अगर कोई बड़ी अनहोनी होती है, तो क्या प्रशासन उसकी जिम्मेदारी लेगा, अब जरूरत केवल हालत सामान्य बताने की नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार की जड़ पर प्रहार करने की है।3
- मैहर संत रविदास मंदिर ट्रस्ट और मुनि रामपाल के विवाद ने पकड़ा तूल, प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल मैहर संत शिरोमणि रविदास मंदिर निर्माण और उसके प्रबंधन को लेकर जिला मैहर में विवाद गहराता जा रहा है। संत शिरोमणि रविदास मंदिर समिति, जिसने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में इस मंदिर के निर्माण के लिए लंबा संघर्ष किया था, ने अब वर्तमान प्रशासनिक कार्रवाई और मुनि रामपाल की भूमिका पर गंभीर आरोप लगाए हैं *मुख्य विवाद व्यक्तिगत नाम पर ट्रस्ट का आवेदन* समिति का आरोप है कि नियमानुसार रविदास मंदिर के नाम पर एक सार्वजनिक ट्रस्ट का पंजीकरण किया जाना चाहिए था। लेकिन, मुनि रामपाल द्वारा अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) मैहर के समक्ष कथित तौर पर किसी व्यक्ति विशेष के नाम से ट्रस्ट का आवेदन प्रस्तुत किया गया है कानूनी पक्ष: मप्र सार्वजनिक ट्रस्ट अधिनियम 1951 के तहत, किसी भी धार्मिक या सामाजिक संपत्ति को सार्वजनिक ट्रस्ट के रूप में पंजीकृत किया जाना चाहिए। यदि सार्वजनिक चंदे या सरकारी अनुदान से निर्मित संपत्ति को निजी या व्यक्तिगत लाभ के लिए ट्रस्ट बनाने की कोशिश की जाती है, तो यह कानूनन अवैध माना जा सकता है *चौधरी समाज का अपमान और प्रशासनिक चुप्पी* समिति के सदस्यों का कहना है कि मुनि रामपाल ने न केवल समिति की अनदेखी की, बल्कि चौधरी समाज के प्रति कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी कर सामाजिक समरसता को बिगाड़ने का प्रयास किया है। समिति ने सवाल उठाया है कि गंभीर शिकायतों के बावजूद जिला कलेक्टर मैहर ने अब तक इस मामले में कोई दंडात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की *सत्ता के दबाव की आशंका* समिति के प्रतिनिधियों ने आशंका जताई है कि प्रशासन स्थानीय भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के दबाव में काम कर रहा है। आरोप है कि राजनैतिक रसूख के चलते ही मुनि रामपाल को संरक्षण मिल रहा है और मंदिर की संपत्ति को एक 'व्यक्ति विशेष' के नाम करने की साजिश रची जा रही है। "जिस मंदिर के लिए हमने वर्षों संघर्ष किया, उसे निजी स्वार्थों की भेंट नहीं चढ़ने दिया जाएगा। प्रशासन की चुप्पी यह संकेत देती है कि कहीं न कहीं सत्ता का संरक्षण प्राप्त है प्रतिनिधि, संत शिरोमणि रविदास मंदिर समिति निष्कर्ष और आगामी कदम यदि प्रशासन इस मामले में निष्पक्ष जांच नहीं करता है, तो यह मामला केवल स्थानीय विवाद न रहकर एक बड़े कानूनी और सामाजिक आंदोलन का रूप ले सकता है। पारदर्शिता की मांग कर रहे समाज के लोगों का कहना है कि वे इस मामले को उच्च न्यायालय तक ले जाने के लिए तैयार हैं।1
- मैहर को मिला पत्रकार भवन की सौगात जगह मिलने पर जल्द होगा निर्माण---श्रीकांत चतुर्वेदी मैहर । जैसा कि भाजपा की नीति हमेशा ही पत्रकारों के हित में रही है उसी तर्ज में विगत दिनों ग्राम पंचायत बदेरा में मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ इकाई मैहर के पत्रकार सम्मान समारोह में मैहर विधायक ने दी पत्रकार भवन की सौगात ज्ञात हो हाल में ही मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ के जिला अध्यक्ष श्रीनिवास चतुर्वेदी लल्लू महराज को नियुक्त किया गया जिस पर श्री चतुर्वेदी के सानिध्य में पत्रकार सम्मान समारोह रखा गया जिस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि मैहर विधायक माननीय श्रीकांत चतुर्वेदी जी रहे उक्त कार्यक्रम में मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ मैहर के जिला अध्यक्ष ने मैहर विधायक से मांग की कि मैहर जिला बन गया है और मैहर में पत्रकार भवन नहीं है इस लिए मैहर में एक पत्रकार भवन होना आवश्यक है जिस पर मैहर विधायक श्रीकांत चतुर्वेदी ने कहा कि आप लोग सभी मैहर के पत्रकार साथी जगह बताए हम प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री जी से राशि स्वीकृत कराते हुए भवन का निर्माण कराएंगे पैसे की कोई कमी नहीं आएगी आगे मैहर विधायक ने पत्रकारों के सम्मान में अपने वक्तव्यों में कहा कि पत्रकारों के सम्मान में मेरे द्वारा कभी कोई कमी नहीं आएगी हा आप सभी तमाम मुद्दों से हमें अवगत कराते रहे अभी मैहर के देवी जी धाम में माई का लोक भी बनने जा रहा जिसकी बेहतर तैयारी हो गई है हम सब का दायित्व है कि सकारात्मक विचार के साथ मैहर के विकाश में एकजुट होकर कार्य करे विधायक ने संबोधन में कहा कि मैहर में जो विकाश कार्य चल रहे है उनको भी जनता के समक्ष बीच बीच में प्रकाशित करते रहे सभी पत्रकार साथियों ने मैहर के लोकप्रिय विधायक का आभार व्यक्त किया1
- दारू की तस्करी मनगांव में हो रही है1
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- अयोध्या श्री राम लला सरकार जी के दिव्य दर्शन एवं आरती1
- UGC को अपने नए नियम वापस लेने होंगे। भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्रा जी ने भी UGC के नए नियमों के खिलाफ खुलकर अपनी आवाज़ बुलंद की है और UGC का विरोध किया हैं।1