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कमीशन की भूख ने छीना बच्चों का निवाला नौनिहालों की सेहत से खिलवाड़, अस्पताल में 37 बच्चे डीईओ ने साधी चुप्पी, लीपापोती में जुटा अमला क्या मासूम की बलि का इंतजार कर रहा प्रशासन? उमरिया। सरकारी तंत्र की संवेदनहीनता और भ्रष्टाचार की दीमक ने अब हमारे बच्चों की थाली तक अपनी पहुंच बना ली है। करकेली विकासखंड के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जरहा में बुधवार को जो मंजर दिखा, उसने न केवल अभिभावकों की रूह कंपा दी, बल्कि शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन के उन दावों की भी पोल खोल दी, जो स्वच्छता और गुणवत्ता के नाम पर कागजों में दर्ज किए जाते हैं। एक साथ 20 से अधिक बच्चों का उल्टियां करना और बेहोश होकर गिरना कोई सीजनल बीमारी नहीं, बल्कि उस सिस्टम का परिणाम है जो बच्चों के निवाले में भी कमीशन तलाशता है। सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी या किसी मासूम की बलि का इंतजार कर रहा है, जिसके बाद ही असली कार्रवाई होगी? स्व-सहायता समूहों की मनमानी जरहा स्कूल की घटना ने यह साफ कर दिया है कि स्कूलों में संचालित मध्यान्ह भोजन योजना अब केवल भ्रष्टाचार का अड्डा बनकर रह गई है। जमीनी हकीकत यह है कि न तो कभी खाने की गुणवत्ता की जांच होती है और न ही कभी निर्धारित मीनू का पालन किया जाता है। स्व-सहायता समूह अपनी मनमानी पर उतारू हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि ऊपर बैठे जिम्मेदार अधिकारियों तक उनका हिस्सा समय पर पहुंच रहा है। सूत्रों की मानें तो बच्चों को परोसा जाने वाला भोजन जानवरों के खाने लायक भी नहीं होता, लेकिन मजबूरी में मासूम उसे गले उतारते हैं। क्या जरहा की घटना उस दूषित सामग्री का परिणाम है जो 26 जनवरी के नाम पर खपा दी गई, अगर गणतंत्र दिवस पर बांटी गई बूंदी या भोजन से बच्चे बीमार हुए हैं, तो अब तक उस सप्लायर और खरीदी करने वाले पर एफआईआर क्यों नहीं हुई। डीईओ की चुप्पी और विभाग की संवेदनहीनता जब जिले के नौनिहाल अस्पताल में जिंदगी और दर्द से जूझ रहे थे, तब जिला शिक्षा अधिकारी आर.एस. मरावी का फोन रिसीव न करना उनकी कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाता है। यह चुप्पी साधारण नहीं है, यह उस संवेदनहीनता का प्रतीक है जो इशारा करती है कि विभाग को बच्चों की जान से ज्यादा अपनी कुर्सी और कमियों को छिपाने की चिंता है। आखिर साहब को किस बात का डर है या फिर जवाबदेही तय करने के नाम पर उनके हाथ बंधे हुए हैं। कलेक्टर पहुंचे अस्पताल, कार्रवाई शून्य कलेक्टर धरणेन्द्र कुमार जैन ने जिला अस्पताल पहुंचकर बच्चों का हाल जाना और सैंपलिंग की बात कही, लेकिन जनता पूछती है कि ये सैंपलिंग हमेशा घटना के बाद ही क्यों होती है, क्या प्रशासन का काम केवल एम्बुलेंस बुलवाना और अस्पताल के बेड गिनना रह गया है। एसडीएम और स्वास्थ्य विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं, बच्चों को घुलघुली और जिला अस्पताल रेफर किया गया, लेकिन उस ठेकेदार या समूह पर क्या कार्रवाई हुई जिसने बच्चों की जान खतरे में डाली। प्रशासनिक लीपापोती का खेल शुरू अंदेशा जताया जा रहा है कि हर बार की तरह इस बार भी प्रशासन अपनी खाल बचाने के लिए खंडन जारी कर देगा या मामले को मौसमी बीमारी का नाम देकर रफा-दफा कर देगा। यह बेहद शर्मनाक है कि 37 बच्चों की तबीयत बिगडऩे के बावजूद अब तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी को निलंबित नहीं किया गया है। जरहा की घटना पूरे जिले के सरकारी स्कूलों के लिए एक चेतावनी है। अगर आज दोषियों पर कठोरतम कार्रवाई नहीं हुई, तो कल फिर किसी दूसरे स्कूल में मासूमों की जान दांव पर होगी। प्रशासन को समझना होगा कि बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कल को अगर कोई बड़ी अनहोनी होती है, तो क्या प्रशासन उसकी जिम्मेदारी लेगा, अब जरूरत केवल हालत सामान्य बताने की नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार की जड़ पर प्रहार करने की है।

5 hrs ago
user_Neeraj Singh Raghuvanshi
Neeraj Singh Raghuvanshi
बांधवगढ़, उमरिया, मध्य प्रदेश•
5 hrs ago

कमीशन की भूख ने छीना बच्चों का निवाला नौनिहालों की सेहत से खिलवाड़, अस्पताल में 37 बच्चे डीईओ ने साधी चुप्पी, लीपापोती में जुटा अमला क्या मासूम की बलि का इंतजार कर रहा प्रशासन? उमरिया। सरकारी तंत्र की संवेदनहीनता और भ्रष्टाचार की दीमक ने अब हमारे बच्चों की थाली तक अपनी पहुंच बना ली है। करकेली विकासखंड के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जरहा में बुधवार को जो मंजर दिखा, उसने न केवल अभिभावकों की रूह कंपा दी, बल्कि शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन के उन दावों की भी पोल खोल दी, जो स्वच्छता और गुणवत्ता के नाम पर कागजों में दर्ज किए जाते हैं। एक साथ 20 से अधिक बच्चों का उल्टियां करना और बेहोश होकर गिरना कोई सीजनल बीमारी नहीं, बल्कि उस सिस्टम का परिणाम है जो बच्चों के निवाले में भी कमीशन तलाशता है। सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी या किसी मासूम की बलि का इंतजार कर रहा है, जिसके बाद ही असली कार्रवाई होगी? स्व-सहायता समूहों की मनमानी जरहा स्कूल की घटना ने यह साफ कर दिया है कि स्कूलों में संचालित मध्यान्ह भोजन योजना अब केवल भ्रष्टाचार का अड्डा बनकर रह गई है। जमीनी हकीकत यह है कि न तो कभी खाने की गुणवत्ता की जांच होती है और न ही कभी निर्धारित मीनू का पालन किया

जाता है। स्व-सहायता समूह अपनी मनमानी पर उतारू हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि ऊपर बैठे जिम्मेदार अधिकारियों तक उनका हिस्सा समय पर पहुंच रहा है। सूत्रों की मानें तो बच्चों को परोसा जाने वाला भोजन जानवरों के खाने लायक भी नहीं होता, लेकिन मजबूरी में मासूम उसे गले उतारते हैं। क्या जरहा की घटना उस दूषित सामग्री का परिणाम है जो 26 जनवरी के नाम पर खपा दी गई, अगर गणतंत्र दिवस पर बांटी गई बूंदी या भोजन से बच्चे बीमार हुए हैं, तो अब तक उस सप्लायर और खरीदी करने वाले पर एफआईआर क्यों नहीं हुई। डीईओ की चुप्पी और विभाग की संवेदनहीनता जब जिले के नौनिहाल अस्पताल में जिंदगी और दर्द से जूझ रहे थे, तब जिला शिक्षा अधिकारी आर.एस. मरावी का फोन रिसीव न करना उनकी कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाता है। यह चुप्पी साधारण नहीं है, यह उस संवेदनहीनता का प्रतीक है जो इशारा करती है कि विभाग को बच्चों की जान से ज्यादा अपनी कुर्सी और कमियों को छिपाने की चिंता है। आखिर साहब को किस बात का डर है या फिर जवाबदेही तय करने के नाम पर उनके हाथ बंधे हुए हैं। कलेक्टर पहुंचे अस्पताल, कार्रवाई शून्य कलेक्टर धरणेन्द्र कुमार जैन ने जिला अस्पताल पहुंचकर बच्चों का हाल जाना और सैंपलिंग की बात कही, लेकिन

जनता पूछती है कि ये सैंपलिंग हमेशा घटना के बाद ही क्यों होती है, क्या प्रशासन का काम केवल एम्बुलेंस बुलवाना और अस्पताल के बेड गिनना रह गया है। एसडीएम और स्वास्थ्य विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं, बच्चों को घुलघुली और जिला अस्पताल रेफर किया गया, लेकिन उस ठेकेदार या समूह पर क्या कार्रवाई हुई जिसने बच्चों की जान खतरे में डाली। प्रशासनिक लीपापोती का खेल शुरू अंदेशा जताया जा रहा है कि हर बार की तरह इस बार भी प्रशासन अपनी खाल बचाने के लिए खंडन जारी कर देगा या मामले को मौसमी बीमारी का नाम देकर रफा-दफा कर देगा। यह बेहद शर्मनाक है कि 37 बच्चों की तबीयत बिगडऩे के बावजूद अब तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी को निलंबित नहीं किया गया है। जरहा की घटना पूरे जिले के सरकारी स्कूलों के लिए एक चेतावनी है। अगर आज दोषियों पर कठोरतम कार्रवाई नहीं हुई, तो कल फिर किसी दूसरे स्कूल में मासूमों की जान दांव पर होगी। प्रशासन को समझना होगा कि बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कल को अगर कोई बड़ी अनहोनी होती है, तो क्या प्रशासन उसकी जिम्मेदारी लेगा, अब जरूरत केवल हालत सामान्य बताने की नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार की जड़ पर प्रहार करने की है।

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    कमीशन की भूख ने छीना बच्चों का निवाला
नौनिहालों की सेहत से खिलवाड़, अस्पताल में 37 बच्चे 
डीईओ ने साधी चुप्पी, लीपापोती में जुटा अमला
क्या मासूम की बलि का इंतजार कर रहा प्रशासन?
उमरिया। सरकारी तंत्र की संवेदनहीनता और भ्रष्टाचार की दीमक ने अब हमारे बच्चों की थाली तक अपनी पहुंच बना ली है। करकेली विकासखंड के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जरहा में बुधवार को जो मंजर दिखा, उसने न केवल अभिभावकों की रूह कंपा दी, बल्कि शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन के उन दावों की भी पोल खोल दी, जो स्वच्छता और गुणवत्ता के नाम पर कागजों में दर्ज किए जाते हैं। एक साथ 20 से अधिक बच्चों का उल्टियां करना और बेहोश होकर गिरना कोई सीजनल बीमारी नहीं, बल्कि उस सिस्टम का परिणाम है जो बच्चों के निवाले में भी कमीशन तलाशता है। सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी या किसी मासूम की बलि का इंतजार कर रहा है, जिसके बाद ही असली कार्रवाई होगी?
स्व-सहायता समूहों की मनमानी
जरहा स्कूल की घटना ने यह साफ कर दिया है कि स्कूलों में संचालित मध्यान्ह भोजन योजना अब केवल भ्रष्टाचार का अड्डा बनकर रह गई है। जमीनी हकीकत यह है कि न तो कभी खाने की गुणवत्ता की जांच होती है और न ही कभी निर्धारित मीनू का पालन किया जाता है। स्व-सहायता समूह अपनी मनमानी पर उतारू हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि ऊपर बैठे जिम्मेदार अधिकारियों तक उनका हिस्सा समय पर पहुंच रहा है। सूत्रों की मानें तो बच्चों को परोसा जाने वाला भोजन जानवरों के खाने लायक भी नहीं होता, लेकिन मजबूरी में मासूम उसे गले उतारते हैं। क्या जरहा की घटना उस दूषित सामग्री का परिणाम है जो 26 जनवरी के नाम पर खपा दी गई, अगर गणतंत्र दिवस पर बांटी गई बूंदी या भोजन से बच्चे बीमार हुए हैं, तो अब तक उस सप्लायर और खरीदी करने वाले पर एफआईआर क्यों नहीं हुई। 
डीईओ की चुप्पी और विभाग की संवेदनहीनता
जब जिले के नौनिहाल अस्पताल में जिंदगी और दर्द से जूझ रहे थे, तब जिला शिक्षा अधिकारी आर.एस. मरावी का फोन रिसीव न करना उनकी कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाता है। यह चुप्पी साधारण नहीं है, यह उस संवेदनहीनता का प्रतीक है जो इशारा करती है कि विभाग को बच्चों की जान से ज्यादा अपनी कुर्सी और कमियों को छिपाने की चिंता है। आखिर साहब को किस बात का डर है या फिर जवाबदेही तय करने के नाम पर उनके हाथ बंधे हुए हैं। 
कलेक्टर पहुंचे अस्पताल, कार्रवाई शून्य
कलेक्टर धरणेन्द्र कुमार जैन ने जिला अस्पताल पहुंचकर बच्चों का हाल जाना और सैंपलिंग की बात कही, लेकिन जनता पूछती है कि ये सैंपलिंग हमेशा घटना के बाद ही क्यों होती है, क्या प्रशासन का काम केवल एम्बुलेंस बुलवाना और अस्पताल के बेड गिनना रह गया है। एसडीएम और स्वास्थ्य विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं, बच्चों को घुलघुली और जिला अस्पताल रेफर किया गया, लेकिन उस ठेकेदार या समूह पर क्या कार्रवाई हुई जिसने बच्चों की जान खतरे में डाली। 
प्रशासनिक लीपापोती का खेल शुरू
अंदेशा जताया जा रहा है कि हर बार की तरह इस बार भी प्रशासन अपनी खाल बचाने के लिए खंडन जारी कर देगा या मामले को मौसमी बीमारी का नाम देकर रफा-दफा कर देगा। यह बेहद शर्मनाक है कि 37 बच्चों की तबीयत बिगडऩे के बावजूद अब तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी को निलंबित नहीं किया गया है। जरहा की घटना पूरे जिले के सरकारी स्कूलों के लिए एक चेतावनी है। अगर आज दोषियों पर कठोरतम कार्रवाई नहीं हुई, तो कल फिर किसी दूसरे स्कूल में मासूमों की जान दांव पर होगी। प्रशासन को समझना होगा कि बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कल को अगर कोई बड़ी अनहोनी होती है, तो क्या प्रशासन उसकी जिम्मेदारी लेगा, अब जरूरत केवल हालत सामान्य बताने की नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार की जड़ पर प्रहार करने की है।
    user_Neeraj Singh Raghuvanshi
    Neeraj Singh Raghuvanshi
    बांधवगढ़, उमरिया, मध्य प्रदेश•
    5 hrs ago
  • traffic police ka dada giri
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    traffic police ka dada giri
    user_Neeraj Tiwari
    Neeraj Tiwari
    सोहागपुर, शहडोल, मध्य प्रदेश•
    9 hrs ago
  • पूरा शहडोल का यही हाल
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    पूरा शहडोल का यही हाल
    user_Shahdol news
    Shahdol news
    Local News Reporter सोहागपुर, शहडोल, मध्य प्रदेश•
    11 hrs ago
  • a patwari ka stay ka ullanghan kara raha hai aur jaanch mein aaya andar baithkar ke salary le raha hai iski karnama dekhiae aur turant suspend kiya jaaye
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    a patwari ka stay ka ullanghan kara raha hai aur jaanch mein aaya andar baithkar ke salary le raha hai iski karnama dekhiae aur turant suspend kiya jaaye
    user_Mithlesh Kumar Mishra
    Mithlesh Kumar Mishra
    ब्योहारी, शहडोल, मध्य प्रदेश•
    3 hrs ago
  • *यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ सुभाष चौक पर प्रदर्शन, युवाओं ने केंद्र सरकार को घेरा* कटनी – केंद्र सरकार द्वारा यूजीसी (UGC) के नए नियमों के विरोध में आज कटनी जिले में जबरदस्त आक्रोश देखने को मिला। गुरुवार को इन नियमों से नाराज सैकड़ों नागरिकों ने सवर्ण समाज के बैनर तले शहर के प्रमुख सुभाष चौक पर एकत्रित होकर जोरदार प्रदर्शन किया और केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। *सुभाष चौक पर हुआ शक्ति प्रदर्शन* प्रदर्शनकारी सुबह से ही एकजुट होने लगे थे। सुभाष चौक पर जुटे युवाओं ने 'यूजीसी रोल बैक' के नारे लगाकर अपना विरोध दर्ज कराया। *प्रदर्शनकारियों ने लगाए गंभीर आरोप* युवाओं का कहना है कि सरकार के ये नए नियम शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित करेंगे। प्रदर्शन के दौरान मुख्य रूप से निम्नलिखित बातें उठाई गईं: * *भेदभावपूर्ण नीति:* प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा के क्षेत्र में भी जातिवादी राजनीति को बढ़ावा दे रही है, जो भविष्य के लिए घातक है। * *सवर्णों के हितों पर कुठाराघात*: युवाओं का तर्क है कि यह कानून सवर्ण छात्र-छात्राओं के हितों के विपरीत है और उन्हें डर के साए में रहने पर मजबूर करेगा। * *आंदोलन की चेतावनी:* वक्ताओं ने कहा कि सरकार ने अब तक केवल समर्थन देखा है, लेकिन यदि जनविरोधी फैसले लिए गए तो उसे उग्र विरोध का भी सामना करना पड़ेगा।
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    *यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ सुभाष चौक पर प्रदर्शन, युवाओं ने केंद्र सरकार को घेरा*
कटनी – केंद्र सरकार द्वारा यूजीसी (UGC) के नए नियमों के विरोध में आज कटनी जिले में जबरदस्त आक्रोश देखने को मिला। गुरुवार को इन नियमों से नाराज सैकड़ों नागरिकों ने सवर्ण समाज के बैनर तले शहर के प्रमुख सुभाष चौक पर एकत्रित होकर जोरदार प्रदर्शन किया और केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
*सुभाष चौक पर हुआ शक्ति प्रदर्शन*
प्रदर्शनकारी सुबह से ही एकजुट होने लगे थे। सुभाष चौक पर जुटे युवाओं ने 'यूजीसी रोल बैक' के नारे लगाकर अपना विरोध दर्ज कराया।
*प्रदर्शनकारियों ने लगाए गंभीर आरोप*
युवाओं का कहना है कि सरकार के ये नए नियम शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित करेंगे। प्रदर्शन के दौरान मुख्य रूप से निम्नलिखित बातें उठाई गईं:
* *भेदभावपूर्ण नीति:* प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा के क्षेत्र में भी जातिवादी राजनीति को बढ़ावा दे रही है, जो भविष्य के लिए घातक है।
* *सवर्णों के हितों पर कुठाराघात*: युवाओं का तर्क है कि यह कानून सवर्ण छात्र-छात्राओं के हितों के विपरीत है और उन्हें डर के साए में रहने पर मजबूर करेगा।
* *आंदोलन की चेतावनी:* वक्ताओं ने कहा कि सरकार ने अब तक केवल समर्थन देखा है, लेकिन यदि जनविरोधी फैसले लिए गए तो उसे उग्र विरोध का भी सामना करना पड़ेगा।
    user_Deepak Gupta
    Deepak Gupta
    Murwara Or Katni, Madhya Pradesh•
    4 hrs ago
  • शिक्षक के पद की गरिमा को कलंकित करता शराब के नशे धुत शिक्षक वीडियो वायरल
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    शिक्षक के पद की गरिमा को कलंकित करता शराब के नशे धुत शिक्षक वीडियो वायरल
    user_Sourabh Shrivastava
    Sourabh Shrivastava
    Journalist कटनी (मुरवारा), कटनी, मध्य प्रदेश•
    4 hrs ago
  • *यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ सुभाष चौक पर प्रदर्शन, युवाओं ने केंद्र सरकार को घेरा* कटनी। केंद्र सरकार द्वारा यूजीसी (UGC) के नए नियमों के विरोध में आज कटनी जिले में जबरदस्त आक्रोश देखने को मिला। गुरुवार को इन नियमों से नाराज सैकड़ों नागरिकों ने सवर्ण समाज के बैनर तले शहर के प्रमुख सुभाष चौक पर एकत्रित होकर जोरदार प्रदर्शन किया और केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। *सुभाष चौक पर हुआ शक्ति प्रदर्शन* प्रदर्शनकारी सुबह से ही एकजुट होने लगे थे। सुभाष चौक पर जुटे युवाओं ने 'यूजीसी रोल बैक' के नारे लगाकर अपना विरोध दर्ज कराया। *प्रदर्शनकारियों ने लगाए गंभीर आरोप* युवाओं का कहना है कि सरकार के ये नए नियम शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित करेंगे। प्रदर्शन के दौरान मुख्य रूप से निम्नलिखित बातें उठाई गईं: * *भेदभावपूर्ण नीति:* प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा के क्षेत्र में भी जातिवादी राजनीति को बढ़ावा दे रही है, जो भविष्य के लिए घातक है। * *सवर्णों के हितों पर कुठाराघात*: युवाओं का तर्क है कि यह कानून सवर्ण छात्र-छात्राओं के हितों के विपरीत है और उन्हें डर के साए में रहने पर मजबूर करेगा। * *आंदोलन की चेतावनी:* वक्ताओं ने कहा कि सरकार ने अब तक केवल समर्थन देखा है, लेकिन यदि जनविरोधी फैसले लिए गए तो उसे उग्र विरोध का भी सामना करना पड़ेगा।
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    *यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ सुभाष चौक पर प्रदर्शन, युवाओं ने केंद्र सरकार को घेरा*
कटनी। केंद्र सरकार द्वारा यूजीसी (UGC) के नए नियमों के विरोध में आज कटनी जिले में जबरदस्त आक्रोश देखने को मिला। गुरुवार को इन नियमों से नाराज सैकड़ों नागरिकों ने सवर्ण समाज के बैनर तले शहर के प्रमुख सुभाष चौक पर एकत्रित होकर जोरदार प्रदर्शन किया और केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
*सुभाष चौक पर हुआ शक्ति प्रदर्शन*
प्रदर्शनकारी सुबह से ही एकजुट होने लगे थे। सुभाष चौक पर जुटे युवाओं ने 'यूजीसी रोल बैक' के नारे लगाकर अपना विरोध दर्ज कराया।
*प्रदर्शनकारियों ने लगाए गंभीर आरोप*
युवाओं का कहना है कि सरकार के ये नए नियम शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित करेंगे। प्रदर्शन के दौरान मुख्य रूप से निम्नलिखित बातें उठाई गईं:
* *भेदभावपूर्ण नीति:* प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा के क्षेत्र में भी जातिवादी राजनीति को बढ़ावा दे रही है, जो भविष्य के लिए घातक है।
* *सवर्णों के हितों पर कुठाराघात*: युवाओं का तर्क है कि यह कानून सवर्ण छात्र-छात्राओं के हितों के विपरीत है और उन्हें डर के साए में रहने पर मजबूर करेगा।
* *आंदोलन की चेतावनी:* वक्ताओं ने कहा कि सरकार ने अब तक केवल समर्थन देखा है, लेकिन यदि जनविरोधी फैसले लिए गए तो उसे उग्र विरोध का भी सामना करना पड़ेगा।
    user_Balkishan Namdev
    Balkishan Namdev
    Electrician कटनी (मुरवारा), कटनी, मध्य प्रदेश•
    5 hrs ago
  • कटनी ग्रामोदय से अभ्युदय अभियान के तहत में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
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    कटनी ग्रामोदय से अभ्युदय अभियान के तहत में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
    user_विकास श्रीवास्तव
    विकास श्रीवास्तव
    Journalist कटनी नगर, कटनी, मध्य प्रदेश•
    6 hrs ago
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