कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुलदीप सिंह राठौर ने केंद्र सरकार पर E20 (20% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) के मुद्दे पर गंभीर आरोप लगाए हैं, कहते हुए कि सरकार बिना ठोस परिणाम और परीक्षण के आम जनता के वाहनों को एक बड़ी 'प्रयोगशाला' में बदल रही है, जिससे नागरिकों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। शिमला में पत्रकार वार्ता में राठौर ने दावा किया कि बीते 30 जून को भारत के सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर देश के प्रथम लॉ ऑफिसर अटॉर्नी जनरल ऑफ इंडिया ने बयान दिया था कि E20 पेट्रोल अभी केवल एक 'प्रयोग' है और इसे विधिवत या पूर्ण रूप से लागू नहीं किया गया है। राठौर ने सवाल उठाया कि अगर यह सिर्फ एक प्रयोग है, तो इसे पूरे देश पर क्यों थोपा जा रहा है, और क्या सरकार ने नागरिकों की गाड़ियों को अपनी प्रयोगशाला बना दिया है, जबकि प्रयोग सीमित संख्या में वाहनों पर होने चाहिए। राठौर ने जोर देकर कहा कि E20 पेट्रोल गाड़ियों के इंजनों के लिए 'धीमा जहर' साबित हो रहा है, जिसके उपयोग से इंजन लगातार खराब हो रहे हैं और उनकी माइलेज में भारी गिरावट आ रही है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी इस ईंधन के कारण गाड़ियों का माइलेज कम होने की बात स्वीकार की है। राठौर ने पूछा कि जिन मासूम नागरिकों की गाड़ियों के इंजन इस प्रयोग के कारण खराब हो रहे हैं और उन्हें आर्थिक नुकसान हो रहा है, क्या सरकार उन्हें कोई मुआवजा देगी? उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार लगातार नुकसान न होने का बयान दे रही है, क्योंकि इस पूरे मामले के पीछे इथेनॉल बनाने वाली किसी विशेष कंपनी या कंपनियों को फायदा पहुँचाने की मंशा है। राठौर ने यह भी दावा किया कि इथेनॉल मिक्सिंग के बावजूद पेट्रोल के दामों में कोई कमी नहीं की गई, और इस 'लूट' से तेल कंपनियों को वर्ष 2024-25 में 80,000 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ, जो 2025-26 में बढ़कर 1,17,142 करोड़ रुपये तक पहुँच गया। राठौर ने केंद्र सरकार के इस 'तानाशाही रवैये' पर जनता में भारी आक्रोश बताते हुए कहा कि कई जगहों पर प्रदर्शन शुरू हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि पड़ोसी देश भूटान ने भी इस मिश्रित तेल को लेने से इनकार कर दिया है, क्योंकि उनके यहाँ ऐसा कोई प्रयोग नहीं हो रहा है। विशेष रूप से पुरानी गाड़ियाँ, दोपहिया वाहन और किसानों व बागवानों के कृषि उपकरण इस ईंधन के अनुकूल नहीं हैं, जिससे उन्हें भारी क्षति हो रही है। कांग्रेस ने मांग की है कि जब तक इस प्रयोग के पारदर्शी परिणाम सामने नहीं आते, तब तक E20 पेट्रोल पर तुरंत प्रभाव से पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए और जनता को शुद्ध पेट्रोल व मिश्रित पेट्रोल में से चुनने का विकल्प दिया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त, राठौर ने सरकार से अपील की है कि सेब सीजन शुरू होने और बरसात के मौसम को देखते हुए, सड़कों को दुरुस्त रखने के लिए उचित प्रबंध किए जाएं ताकि बागवानों का सेब बिना किसी बाधा के समय पर मंडियों तक पहुँच सके। उन्होंने बताया कि इस संबंध में उन्होंने शिमला के डिप्टी कमिश्नर से भी बात की है, जिन्होंने हर संभव कदम उठाने का आश्वासन दिया है।
कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुलदीप सिंह राठौर ने केंद्र सरकार पर E20 (20% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) के मुद्दे पर गंभीर आरोप लगाए हैं, कहते हुए कि सरकार बिना ठोस परिणाम और परीक्षण के आम जनता के वाहनों को एक बड़ी 'प्रयोगशाला' में बदल रही है, जिससे नागरिकों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। शिमला में पत्रकार वार्ता में राठौर ने दावा किया कि बीते 30 जून को भारत के सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर देश के प्रथम लॉ ऑफिसर अटॉर्नी जनरल ऑफ इंडिया ने बयान दिया था कि E20 पेट्रोल अभी केवल एक 'प्रयोग' है और इसे विधिवत या पूर्ण रूप से लागू नहीं किया गया है। राठौर ने सवाल उठाया कि अगर यह सिर्फ एक प्रयोग है, तो इसे पूरे देश पर क्यों थोपा जा रहा है, और
क्या सरकार ने नागरिकों की गाड़ियों को अपनी प्रयोगशाला बना दिया है, जबकि प्रयोग सीमित संख्या में वाहनों पर होने चाहिए। राठौर ने जोर देकर कहा कि E20 पेट्रोल गाड़ियों के इंजनों के लिए 'धीमा जहर' साबित हो रहा है, जिसके उपयोग से इंजन लगातार खराब हो रहे हैं और उनकी माइलेज में भारी गिरावट आ रही है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी इस ईंधन के कारण गाड़ियों का माइलेज कम होने की बात स्वीकार की है। राठौर ने पूछा कि जिन मासूम नागरिकों की गाड़ियों के इंजन इस प्रयोग के कारण खराब हो रहे हैं और उन्हें आर्थिक नुकसान हो रहा है, क्या सरकार उन्हें कोई मुआवजा देगी? उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार लगातार नुकसान न होने का बयान दे
रही है, क्योंकि इस पूरे मामले के पीछे इथेनॉल बनाने वाली किसी विशेष कंपनी या कंपनियों को फायदा पहुँचाने की मंशा है। राठौर ने यह भी दावा किया कि इथेनॉल मिक्सिंग के बावजूद पेट्रोल के दामों में कोई कमी नहीं की गई, और इस 'लूट' से तेल कंपनियों को वर्ष 2024-25 में 80,000 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ, जो 2025-26 में बढ़कर 1,17,142 करोड़ रुपये तक पहुँच गया। राठौर ने केंद्र सरकार के इस 'तानाशाही रवैये' पर जनता में भारी आक्रोश बताते हुए कहा कि कई जगहों पर प्रदर्शन शुरू हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि पड़ोसी देश भूटान ने भी इस मिश्रित तेल को लेने से इनकार कर दिया है, क्योंकि उनके यहाँ ऐसा कोई प्रयोग नहीं हो रहा है। विशेष रूप से पुरानी गाड़ियाँ, दोपहिया वाहन और किसानों व बागवानों
के कृषि उपकरण इस ईंधन के अनुकूल नहीं हैं, जिससे उन्हें भारी क्षति हो रही है। कांग्रेस ने मांग की है कि जब तक इस प्रयोग के पारदर्शी परिणाम सामने नहीं आते, तब तक E20 पेट्रोल पर तुरंत प्रभाव से पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए और जनता को शुद्ध पेट्रोल व मिश्रित पेट्रोल में से चुनने का विकल्प दिया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त, राठौर ने सरकार से अपील की है कि सेब सीजन शुरू होने और बरसात के मौसम को देखते हुए, सड़कों को दुरुस्त रखने के लिए उचित प्रबंध किए जाएं ताकि बागवानों का सेब बिना किसी बाधा के समय पर मंडियों तक पहुँच सके। उन्होंने बताया कि इस संबंध में उन्होंने शिमला के डिप्टी कमिश्नर से भी बात की है, जिन्होंने हर संभव कदम उठाने का आश्वासन दिया है।
- कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुलदीप सिंह राठौर ने केंद्र सरकार पर E20 (20% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) के मुद्दे पर गंभीर आरोप लगाए हैं, कहते हुए कि सरकार बिना ठोस परिणाम और परीक्षण के आम जनता के वाहनों को एक बड़ी 'प्रयोगशाला' में बदल रही है, जिससे नागरिकों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। शिमला में पत्रकार वार्ता में राठौर ने दावा किया कि बीते 30 जून को भारत के सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर देश के प्रथम लॉ ऑफिसर अटॉर्नी जनरल ऑफ इंडिया ने बयान दिया था कि E20 पेट्रोल अभी केवल एक 'प्रयोग' है और इसे विधिवत या पूर्ण रूप से लागू नहीं किया गया है। राठौर ने सवाल उठाया कि अगर यह सिर्फ एक प्रयोग है, तो इसे पूरे देश पर क्यों थोपा जा रहा है, और क्या सरकार ने नागरिकों की गाड़ियों को अपनी प्रयोगशाला बना दिया है, जबकि प्रयोग सीमित संख्या में वाहनों पर होने चाहिए। राठौर ने जोर देकर कहा कि E20 पेट्रोल गाड़ियों के इंजनों के लिए 'धीमा जहर' साबित हो रहा है, जिसके उपयोग से इंजन लगातार खराब हो रहे हैं और उनकी माइलेज में भारी गिरावट आ रही है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी इस ईंधन के कारण गाड़ियों का माइलेज कम होने की बात स्वीकार की है। राठौर ने पूछा कि जिन मासूम नागरिकों की गाड़ियों के इंजन इस प्रयोग के कारण खराब हो रहे हैं और उन्हें आर्थिक नुकसान हो रहा है, क्या सरकार उन्हें कोई मुआवजा देगी? उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार लगातार नुकसान न होने का बयान दे रही है, क्योंकि इस पूरे मामले के पीछे इथेनॉल बनाने वाली किसी विशेष कंपनी या कंपनियों को फायदा पहुँचाने की मंशा है। राठौर ने यह भी दावा किया कि इथेनॉल मिक्सिंग के बावजूद पेट्रोल के दामों में कोई कमी नहीं की गई, और इस 'लूट' से तेल कंपनियों को वर्ष 2024-25 में 80,000 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ, जो 2025-26 में बढ़कर 1,17,142 करोड़ रुपये तक पहुँच गया। राठौर ने केंद्र सरकार के इस 'तानाशाही रवैये' पर जनता में भारी आक्रोश बताते हुए कहा कि कई जगहों पर प्रदर्शन शुरू हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि पड़ोसी देश भूटान ने भी इस मिश्रित तेल को लेने से इनकार कर दिया है, क्योंकि उनके यहाँ ऐसा कोई प्रयोग नहीं हो रहा है। विशेष रूप से पुरानी गाड़ियाँ, दोपहिया वाहन और किसानों व बागवानों के कृषि उपकरण इस ईंधन के अनुकूल नहीं हैं, जिससे उन्हें भारी क्षति हो रही है। कांग्रेस ने मांग की है कि जब तक इस प्रयोग के पारदर्शी परिणाम सामने नहीं आते, तब तक E20 पेट्रोल पर तुरंत प्रभाव से पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए और जनता को शुद्ध पेट्रोल व मिश्रित पेट्रोल में से चुनने का विकल्प दिया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त, राठौर ने सरकार से अपील की है कि सेब सीजन शुरू होने और बरसात के मौसम को देखते हुए, सड़कों को दुरुस्त रखने के लिए उचित प्रबंध किए जाएं ताकि बागवानों का सेब बिना किसी बाधा के समय पर मंडियों तक पहुँच सके। उन्होंने बताया कि इस संबंध में उन्होंने शिमला के डिप्टी कमिश्नर से भी बात की है, जिन्होंने हर संभव कदम उठाने का आश्वासन दिया है।4
- नगर एवं ग्राम नियोजन, आवास, तकनीकी शिक्षा, व्यावसायिक एवं औद्योगिक प्रशिक्षण मंत्री राजेश धर्माणी ने घुमारवीं विधानसभा क्षेत्र के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला हड़वाड़ में आयोजित एक संवाद कार्यक्रम में विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे शिक्षा के साथ-साथ अपने व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास पर भी समान रूप से ध्यान दें। उन्होंने बल दिया कि आज के विद्यार्थी ही कल के जिम्मेदार नागरिक, सक्षम नेतृत्वकर्ता और राष्ट्र निर्माता होते हैं, इसलिए केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, नेतृत्व क्षमता, अनुशासन, नैतिक मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्व का विकास भी उतना ही आवश्यक है। मंत्री धर्माणी ने विद्यार्थियों को बताया कि वर्तमान समय में शिक्षा, तकनीक, नवाचार, कौशल विकास और उद्यमिता के क्षेत्र में असीम संभावनाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने मोबाइल और सोशल मीडिया का रचनात्मक एवं सकारात्मक उपयोग करने की सलाह दी, ताकि वे ज्ञान अर्जित करने, नई तकनीकों को सीखने और स्वयं को निरंतर बेहतर बनाने में इनका प्रभावी माध्यम के रूप में प्रयोग कर सकें। मंत्री ने विद्यार्थियों को एनसीसी, एनएसएस, स्काउट एवं गाइड, खेलकूद, सांस्कृतिक गतिविधियों, विज्ञान प्रदर्शनी, वाद-विवाद, समूह चर्चा और अन्य सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी करने के लिए प्रोत्साहित किया, क्योंकि ऐसी गतिविधियां उनमें नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास, टीम भावना और सामाजिक जिम्मेदारी का विकास करती हैं। उन्होंने सफलता के लिए निरंतर मेहनत, अनुशासन, धैर्य, सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास को अपरिहार्य बताया तथा असफलताओं से घबराने के बजाय उन्हें सीख के रूप में स्वीकार कर और अधिक दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ने का आग्रह किया। राजेश धर्माणी ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में वर्तमान प्रदेश सरकार शिक्षा व्यवस्था को अधिक गुणवत्तापूर्ण, आधुनिक, तकनीक आधारित और रोजगारोन्मुखी बनाने के लिए ऐतिहासिक सुधार लागू कर रही है। सरकारी विद्यालयों में राष्ट्रीय शिक्षा मानकों के अनुरूप एनसीईआरटी पाठ्यक्रम अपनाते हुए सीबीएसई पैटर्न लागू किया गया है तथा विद्यार्थियों को राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर की प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने के उद्देश्य से पहली कक्षा से अंग्रेजी माध्यम में शिक्षा अनिवार्य की गई है। सरकार का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि ऐसे सक्षम, आत्मनिर्भर और नवाचार आधारित युवा तैयार करना है जो भविष्य की चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना कर सकें। उन्होंने यह भी बताया कि तकनीकी शिक्षा, नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने नई राज्य नवाचार नीति को मंजूरी दी है, जिसके अंतर्गत लगभग 2 करोड़ रूपए के विशेष फंड का प्रावधान किया गया है। शिक्षा में पारदर्शिता, जवाबदेही और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए 'समीक्षा' तथा 'शिक्षा साथी' मोबाइल ऐप के माध्यम से विद्यालयों की नियमित डिजिटल मॉनिटरिंग की जा रही है। वहीं, 'समर्थ' योजना के अंतर्गत शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण तकनीकों, डिजिटल लर्निंग और नवाचार आधारित शिक्षण पद्धतियों का प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। राजेश धर्माणी ने कहा कि राज्य सरकार के सतत प्रयासों का परिणाम है कि हिमाचल प्रदेश का विद्यार्थी-अध्यापक अनुपात देश के सर्वश्रेष्ठ राज्यों में शामिल है। मंत्री ने शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर विशेष बल देते हुए विद्यार्थियों से नियमित योग, व्यायाम, खेलकूद और संतुलित जीवनशैली अपनाने का आग्रह किया। संवाद कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने करियर निर्माण, लक्ष्य निर्धारण, व्यक्तित्व विकास, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, तकनीकी शिक्षा, सफलता के सूत्र तथा स्वस्थ जीवनशैली से जुड़े अनेक प्रश्न पूछे। राजेश धर्माणी ने विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का विस्तारपूर्वक समाधान करते हुए उन्हें मेहनत, अनुशासन, सकारात्मक सोच, निरंतर सीखने की आदत, आत्मविश्वास तथा समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करने की प्रेरणा दी।2
- पंचकूला पुलिस ने पिंजौर थाना परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और आमजन को जाम तथा अव्यवस्था से राहत दिलाने के उद्देश्य से सार्वजनिक स्थानों पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की है। डीसीपी सृष्टि गुप्ता के निर्देशानुसार पिंजौर थाना क्षेत्र के बाहर सड़क किनारे लगे अतिक्रमण, जिसमें विशेष रूप से फल-सब्जियों की रेहड़ियाँ शामिल थीं, को हटाया गया। इस कदम से यातायात को सुचारू रखने और थाना परिसर की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिली। पुलिस के अनुसार, पिंजौर थाना के बाहर लंबे समय से रेहड़ियों और अन्य अस्थायी कब्जों के कारण यातायात बाधित रहता था, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों को भारी परेशानी होती थी। आमजन से लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि थाना के बाहर अतिक्रमण से जाम की स्थिति बनती है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि थाना परिसर के आसपास किसी भी प्रकार का अतिक्रमण सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं है, जिसके चलते नियमों के तहत यह कार्रवाई की गई। कुछ समय पहले पुलिस और माइनिंग विभाग ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए जब्त किए गए टिप्परों और अन्य वाहनों को भी थाना परिसर से हटवाया था, ताकि सड़क पर यातायात सामान्य हो सके। इस अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान, जब पिंजौर थाना प्रभारी इंस्पेक्टर राजेश कुमार रेहड़ियों को हटवाने पहुँचे, तो पार्षद सौरभ गुप्ता ने इस पर ऐतराज जताया। हालांकि, थाना प्रभारी ने उन्हें अवगत कराया कि यह कार्रवाई कानून के पालन और सुरक्षा व्यवस्था के लिए की जा रही है। डीसीपी सृष्टि गुप्ता ने दोहराया कि पुलिस की यह कार्रवाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि कानून का पालन सुनिश्चित करने, सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने और आमजन की सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से की गई है। उन्होंने सभी नागरिकों से सार्वजनिक स्थानों पर अतिक्रमण न करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस प्रशासन का सहयोग करने की अपील की।1
- अंबाला छावनी के पड़ाव थाना क्षेत्र स्थित बंधुनगर मकान नंबर 58 में रहने वाले जयदेव के पिता जयबंटू 4 फरवरी 2026 को शाम करीब 6 बजे बिना बताए घर से कहीं चले गए। उनके परिवारजनों ने उन्हें बहुत तलाश किया, लेकिन वे नहीं मिले। उन्होंने 6 फरवरी 2026 को आखिरी कॉल किया था, पर उनसे बात नहीं हो पाई, जिसके बाद उनका फोन बंद आने लगा। पिता जयबंटू के लापता होने के बाद जयदेव की माता जी गहरे सदमे में चली गईं और दुखद रूप से 16 मार्च 2026 को उनका देहांत हो गया। जयबंटू मनिहार का काम करते थे और अक्सर छोटे-बड़े मेलों में अपनी दुकान लगाते थे। उनके हुलिए का विवरण दिया गया है: रंग सांवला, कद 5 फुट 8 इंच, दाहिने पैर का अंगूठा कटा हुआ और उम्र करीब 49 साल। जब वे घर से निकले थे, तब उन्होंने पौली कमीज, काली जींस और जूते पहने हुए थे। अब जयदेव के छोटे भाई श्रीकांत और बहन लक्षिता बंधुनगर में अकेले रह रहे हैं। जयदेव स्वयं आज तक अपने पिता की तलाश करते रहे हैं, पर वे कहीं नहीं मिले। अंततः उन्होंने DSP से गुहार लगाई और थाना पड़ाव में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस इस मामले में अपनी कार्यवाही में जुटी हुई है। जयदेव ने आम जनता से निवेदन किया है कि यदि किसी को भी उनके पिता जयबंटू दिखें या उनके बारे में कोई भी जानकारी हो, तो वे तुरंत मोबाइल नंबर 7082503215 पर संपर्क करें।1
- मुख्यमंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने राम मंदिर चंदा मामले को लेकर भाजपा पर तीखा हमला बोला है, जिसमें उन्होंने इसे आस्था के नाम पर हुआ कथित घोटाला बताया। उन्होंने कहा कि इस घटना से देशभर के हिंदुओं की भावनाएं आहत हुई हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। चौहान ने जोर देकर कहा कि प्रभु राम के चरणों में श्रद्धालुओं द्वारा आस्था के साथ चढ़ाई गई धनराशि की सुरक्षा की जिम्मेदारी जिन लोगों पर थी, उन्हीं पर चोरी के आरोप लगे हैं, जो अत्यंत गंभीर है। उन्होंने दावा किया कि सिर्फ 40 दिनों में 70 बार चोरी की घटनाएं सामने आई हैं, जो व्यवस्था की गंभीर विफलता को दर्शाती हैं। नरेश चौहान ने इसे केवल आर्थिक अनियमितता का मामला नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा गंभीर विषय करार दिया। इसलिए, उन्होंने इसकी जांच केवल एसआईटी के बजाय किसी सिटिंग जज की निगरानी में करवाए जाने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने राम मंदिर निर्माण के लिए देशभर से चंदा एकत्र किया और इस मुद्दे पर राजनीति करके सत्ता हासिल की, लेकिन अब इस मामले पर जवाब देने से बच रही है। चौहान ने भाजपा पर देश की जनता के साथ धोखा करने का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग दोहराई। चौहान ने यह भी कहा कि देश में भगवान राम को मानने के लिए किसी को भाजपा से प्रमाण पत्र लेने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने उल्लेख किया कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू भाजपा को सद्बुद्धि देने की कामना के साथ राम मंदिर और हनुमान मंदिर में पूजा-अर्चना करने गए थे। इसके साथ ही, उन्होंने राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के इस बयान का भी जिक्र किया कि उनका मुंह न खुलवाया जाए। वहीं, भाजपा कोर ग्रुप की बैठक में कांग्रेस सरकार के खिलाफ चार्जशीट लाने के सवाल पर नरेश चौहान ने पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा को चार्जशीट लाने से कोई नहीं रोक रहा। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि भाजपा प्रदेश हितों और जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करती तो बेहतर होता। चौहान के अनुसार, चार्जशीट की राजनीति भाजपा के भीतर चल रही गुटबाजी का संकेत देती है। उन्होंने भाजपा से केवल विरोध की राजनीति छोड़कर सकारात्मक भूमिका निभाने की अपील करते हुए कहा कि प्रदेश में विपक्ष बंटा हुआ और मुद्दाविहीन है।2
- राजस्थान पुलिस ने 13 साल की एक मासूम लड़की के साथ हैवानियत करने वाले दरिंदों के लिए एक बेहद सही तरीका अपनाया है। पुलिस ने इन अपराधियों की सड़क पर परेड कराई, जहाँ बहनों के हाथों में डंडे थे। यह तरीका अपराधियों को सबक सिखाने का एक प्रभावी उपाय माना जा रहा है।1