रियांबड़ी के ग्राम लामपोलाई में आयोजित ग्रामीण सेवा शिविर में भारी अव्यवस्था देखने को मिली, जहां पेयजल की समस्या को लेकर शिकायत दर्ज कराने पहुंचे ग्रामीणों को संबंधित विभाग के अधिकारी नहीं मिलने के कारण बिना शिकायत दर्ज कराए ही वापस लौटना पड़ा। ग्रामीण वासुदेव, जगदीश, कैलाश और रामदयाल ने बताया कि उनके मोहल्ले में लंबे समय से मीठे पेयजल की नियमित आपूर्ति नहीं हो रही है, जिससे लोगों को दैनिक कार्यों में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण इसी समस्या के समाधान की उम्मीद में शिविर में पहुंचे थे ताकि मौके पर ही जलदाय विभाग के अधिकारियों को ज्ञापन दे सकें, लेकिन विभाग का कोई भी अधिकारी या प्रतिनिधि वहां मौजूद नहीं था। ग्रामीणों ने राजस्थान सरकार के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार ग्रामीण सेवा शिविरों के माध्यम से समस्याओं के त्वरित समाधान का दम भरती है और इन शिविरों में 22 विभागों के अधिकारियों की उपस्थिति अनिवार्य बताई गई है। इसके बावजूद जलदाय विभाग की अनुपस्थिति से सरकार की मंशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि ऐसे शिविरों में अक्सर कुछ विभागों के अधिकारी नहीं पहुंचते, जिससे आम जनता को निराश होकर लौटना पड़ता है। उनका मानना है कि यदि अधिकारी ही उपस्थित नहीं रहेंगे तो इन शिविरों को आयोजित करने का मुख्य उद्देश्य ही अधूरा रह जाएगा। परेशान ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि भविष्य में आयोजित होने वाले शिविरों में सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों की अनिवार्य रूप से उपस्थिति सुनिश्चित की जाए, ताकि लोगों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें। इसके साथ ही, उन्होंने अपने मोहल्ले में नियमित और समय पर मीठे पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए शीघ्र ही आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है।
रियांबड़ी के ग्राम लामपोलाई में आयोजित ग्रामीण सेवा शिविर में भारी अव्यवस्था देखने को मिली, जहां पेयजल की समस्या को लेकर शिकायत दर्ज कराने पहुंचे ग्रामीणों को संबंधित विभाग के अधिकारी नहीं मिलने के कारण बिना शिकायत दर्ज कराए ही वापस लौटना पड़ा। ग्रामीण वासुदेव, जगदीश, कैलाश और रामदयाल ने बताया कि उनके मोहल्ले में लंबे समय से मीठे पेयजल की नियमित आपूर्ति नहीं हो रही है, जिससे लोगों को दैनिक कार्यों में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण इसी समस्या के समाधान की उम्मीद में शिविर में पहुंचे थे ताकि मौके पर ही जलदाय विभाग के अधिकारियों को ज्ञापन दे सकें, लेकिन विभाग का कोई भी अधिकारी या प्रतिनिधि वहां मौजूद नहीं था। ग्रामीणों ने राजस्थान सरकार के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार ग्रामीण सेवा शिविरों के माध्यम से समस्याओं के त्वरित समाधान का दम भरती है और इन शिविरों में 22 विभागों के अधिकारियों की उपस्थिति अनिवार्य बताई गई है। इसके बावजूद जलदाय विभाग की अनुपस्थिति से सरकार की मंशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि ऐसे शिविरों में अक्सर कुछ विभागों के अधिकारी नहीं पहुंचते, जिससे आम जनता को निराश होकर लौटना पड़ता है। उनका मानना है कि यदि अधिकारी ही उपस्थित नहीं रहेंगे तो इन शिविरों को आयोजित करने का मुख्य उद्देश्य ही अधूरा रह जाएगा। परेशान ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि भविष्य में आयोजित होने वाले शिविरों में सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों की अनिवार्य रूप से उपस्थिति सुनिश्चित की जाए, ताकि लोगों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें। इसके साथ ही, उन्होंने अपने मोहल्ले में नियमित और समय पर मीठे पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए शीघ्र ही आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है।
- रियांबड़ी के ग्राम लामपोलाई में आयोजित ग्रामीण सेवा शिविर में भारी अव्यवस्था देखने को मिली, जहां पेयजल की समस्या को लेकर शिकायत दर्ज कराने पहुंचे ग्रामीणों को संबंधित विभाग के अधिकारी नहीं मिलने के कारण बिना शिकायत दर्ज कराए ही वापस लौटना पड़ा। ग्रामीण वासुदेव, जगदीश, कैलाश और रामदयाल ने बताया कि उनके मोहल्ले में लंबे समय से मीठे पेयजल की नियमित आपूर्ति नहीं हो रही है, जिससे लोगों को दैनिक कार्यों में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण इसी समस्या के समाधान की उम्मीद में शिविर में पहुंचे थे ताकि मौके पर ही जलदाय विभाग के अधिकारियों को ज्ञापन दे सकें, लेकिन विभाग का कोई भी अधिकारी या प्रतिनिधि वहां मौजूद नहीं था। ग्रामीणों ने राजस्थान सरकार के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार ग्रामीण सेवा शिविरों के माध्यम से समस्याओं के त्वरित समाधान का दम भरती है और इन शिविरों में 22 विभागों के अधिकारियों की उपस्थिति अनिवार्य बताई गई है। इसके बावजूद जलदाय विभाग की अनुपस्थिति से सरकार की मंशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि ऐसे शिविरों में अक्सर कुछ विभागों के अधिकारी नहीं पहुंचते, जिससे आम जनता को निराश होकर लौटना पड़ता है। उनका मानना है कि यदि अधिकारी ही उपस्थित नहीं रहेंगे तो इन शिविरों को आयोजित करने का मुख्य उद्देश्य ही अधूरा रह जाएगा। परेशान ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि भविष्य में आयोजित होने वाले शिविरों में सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों की अनिवार्य रूप से उपस्थिति सुनिश्चित की जाए, ताकि लोगों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें। इसके साथ ही, उन्होंने अपने मोहल्ले में नियमित और समय पर मीठे पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए शीघ्र ही आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है।1
- नागौर के मेड़ता रोड/छापरी में किसानों को पुलिस का खौफ दिखाकर कंपनियां जबरदस्ती खेतों में हाईटेंशन पोल खड़े करना चाहती हैं। डीएलसी दर कम होने के कारण परेशान किसानों की केवल एक ही मांग है कि उन्हें जमीन का उचित मुआवजा दिया जाए। लेकिन किसानों को राहत देने के बजाय स्थानीय प्रशासन और पुलिस बुजुर्ग किसान (अन्नदाता) के साथ बदसलूकी कर रहे हैं और जबरन पोल खड़े करने की कोशिशों में जुटे हैं।1
- राजस्थान के अजमेर शहर के बीचों-बीच स्थित एक "रहस्यमयी" सोने का मंदिर वास्तव में एक बेहद प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्मारक है, जिसे 'सोनी जी की नसियां' जैन मंदिर या 'लाल मंदिर' के नाम से जाना जाता है। यह मंदिर बाहर से देखने पर तो साधारण लाल पत्थरों से बना हुआ दिखाई देता है, लेकिन इसके भीतर एक बेहद भव्य सोने का महल छिपा हुआ है। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके अंदर 1000 किलो सोने से बनी एक पूरी नगरी मौजूद है।1
- नागौर के मेड़ता सिटी में स्थित अरावली हॉस्पिटल उम्मीद की एक नई पहचान बनकर उभरा है। यहाँ 20 साल के लंबे इंतजार के बाद एक घर में किलकारी गूंजी है, जिससे परिवार को संतान सुख का सौभाग्य मिला है। डॉ. धन्नाराम चौधरी और अरावली हॉस्पिटल के इस प्रयास से परिवार में बेहद खुशी का माहौल है और लोगों के बीच इस अस्पताल के प्रति नया भरोसा जागा है।1
- अजमेर के रामगंज थाना क्षेत्र में इलाज के लिए जयपुर गए एक परिवार के सूने मकान को निशाना बनाकर बदमाशों ने करीब 27.28 लाख रुपये की बड़ी चोरी की वारदात को अंजाम दिया है। जब पीड़ित परिवार घर से बाहर गया हुआ था, तब बेखौफ बदमाशों ने सूने मकान के मुख्य दरवाजे और अलमारी के ताले तोड़ दिए। इसके बाद बदमाश घर के अंदर से सोने-चांदी के जेवर, 35 चांदी के सिक्के और ₹1.50 लाख की नकदी समेटकर फरार हो गए। चोरी की यह पूरी वारदात पड़ोसी के घर में लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरे में कैद हो गई है। इस बड़ी वारदात के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर बदमाशों की तलाश व मामले की जांच शुरू कर दी है।1
- ब्यावर के अमृत कौर अस्पताल में डॉक्टरों की लापरवाही लगातार बढ़ती जा रही है।1
- राजस्थान लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के पदाधिकारियों ने उपखंड अधिकारी विनीत कुमार सुखाड़िया को एक ज्ञापन सौंपकर लूणी नदी क्षेत्र में मानसून के दौरान जारी कथित अवैध बजरी खनन पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि मानसून सीजन में नदी क्षेत्र में बजरी खनन पूरी तरह प्रतिबंधित होने के बावजूद कुछ लीज धारक नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। वे दिन-रात मशीनों के माध्यम से धड़ल्ले से बजरी का खनन कर रहे हैं, जिससे पर्यावरण, नदी के प्राकृतिक स्वरूप और आमजन की सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। पार्टी ने बताया कि भारी मशीनों और वाहनों के उपयोग के कारण नदी का अस्तित्व प्रभावित हो रहा है और बरसात के मौसम में नदी क्षेत्र में खनन होने से हादसों की आशंका काफी बढ़ गई है। आरएलपी नेताओं ने प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि अधिकारियों की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं किए जाने के कारण ही खनन माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। इस संबंध में आरएलपी ने मांग की है कि मानसून अवधि के दौरान बजरी खनन पर लगे पूर्ण प्रतिबंध का कड़ाई से पालन कराया जाए। नियमों का उल्लंघन करने वाले लीज धारकों के खिलाफ तत्काल कानूनी कदम उठाए जाएं और अवैध खनन में शामिल मशीनों व वाहनों को जब्त किया जाए। इसके अलावा, राजस्व, पुलिस और खनिज विभाग की एक संयुक्त टीम का गठन कर क्षेत्र में नियमित निरीक्षण कराने तथा दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग भी उठाई गई है। आरएलपी ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस अवैध बजरी खनन पर रोक नहीं लगी तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। आवश्यकता पड़ने पर धरना-प्रदर्शन के साथ-साथ आरएलपी सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल के नेतृत्व में एक विशाल रैली निकाली जाएगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। ज्ञापन सौंपने के दौरान सुरेंद्र बेड़ा, पूर्व चेयरमैन गिरधारीलाल भाटी, सरपंच हरसुखराम जाट, पुखराज गवाल, हेमाराम बेनीवाल और रामनिवास डांगा सहित बड़ी संख्या में पार्टी के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।1
- ब्यावर के कंचन देवी स्कूल में एक शिक्षक पर मासूम छात्र का हाथ तोड़ने का आरोप लगा है। बर ग्रामीण क्षेत्र के रहने वाले पीड़ित परिजनों का आरोप है कि वे अपने बच्चों को कंचन देवी स्कूल, ब्यावर में पढ़ने के लिए भेजते हैं, जहां एक शिक्षक द्वारा मासूम बच्चे का हाथ तोड़ दिया गया। परिजनों ने आरोप लगाया है कि शिक्षक ने बच्चे को धमकी भी दी है। शिक्षक ने कहा कि अगर उसने यह सब अपने घर पर बताया, तो उसे नंगा करके पूरे स्कूल में घुमाया जाएगा। विद्यालय के शिक्षक पर मासूम छात्र का हाथ तोड़ने और ऐसी घिनौनी धमकी देने को लेकर परिजनों में आक्रोश है।1