*,,,,,,,,,,,,,,,संस्कार।,,,,,,,, "शादी तय हो गई थी, कार्ड छप चुके थे और पूरा घर खुशियों से चहक रहा था... लेकिन एक फोन कॉल ने खुशियों के उस महल को ताश के पत्तों की तरह ढहा दिया। आखिर दूल्हे के पिता ने ऐन वक्त पर रिश्ता क्यों तोड़ा? वजह ऐसी थी कि हर माता-पिता का कलेजा कांप जाए।"* *अविनाश जी अपनी इकलौती बेटी आंचल की शादी को लेकर फूले नहीं समा रहे थे। दामाद शहर का माना-जाया अफसर था और सबसे बड़ी बात—वे लोग पूरी तरह 'दहेज मुक्त' शादी कर रहे थे। अविनाश जी को लग रहा था जैसे उन्हें दुनिया की सबसे बड़ी लॉटरी लग गई हो।* *लेकिन शादी से ठीक 20 दिन पहले, लड़के के पिता मिस्टर खन्ना का फोन आया।* "अविनाश जी, माफ कीजिएगा, पर हम यह रिश्ता आगे नहीं बढ़ा पाएंगे।" खन्ना जी की आवाज में एक अजीब सी गंभीरता थी। अविनाश जी के पैरों तले जमीन खिसक गई। "लेकिन खन्ना साहब! क्या हुआ? कोई गलती हो गई हमसे? क्या हमने स्वागत-सत्कार में कोई कमी छोड़ दी?" *खन्ना जी ने ठंडी आह भरी और बोले, "अविनाश जी, पिछले दो महीनों में मैं कई बार बिना बताए आपके घर आया। मैंने आपकी बेटी आंचल की डिग्रियाँ देखीं, उसकी खूबसूरती देखी, लेकिन जो नहीं दिखा... वो थे संस्कार और संवेदना।"* *अविनाश जी हक्के-बक्के रह गए। खन्ना जी ने आगे जो कहा, वह हर उस माता-पिता के लिए सबक है जो अपनी बेटी को 'नाजुक कली' बनाकर पालते हैं:* "जब भी मैं आपके घर आया, मैंने आपकी पत्नी को पसीने से तर-बतर किचन में काम करते देखा, कभी झाड़ू लगाते तो कभी भारी सामान उठाते देखा। लेकिन आंचल? वो हर बार अपने कमरे में सजी-धजी मोबाइल पर व्यस्त थी या सोफे पर बैठकर टीवी देख रही थी। उसे एक बार भी यह अहसास नहीं हुआ कि उसकी माँ थक रही है।" *"अविनाश जी, मुझे मेरे घर के लिए एक सजावटी गुड़िया नहीं चाहिए जो बस शो-केस में खड़ी रहे। मुझे वो 'बहू' चाहिए जो रिश्तों का दर्द समझे। जो लड़की अपनी माँ के आंसू और थकान नहीं देख सकती, वो कल को मेरी बुजुर्ग पत्नी की सेवा क्या करेगी? जो हाथ माँ का बोझ नहीं बंटा सकते, वो हमारे घर की जिम्मेदारियाँ कैसे उठाएंगे?"* अविनाश जी की आंखों के सामने अंधेरा छा गया। उन्हें समझ आ गया कि बेटी को 'राजकुमारी' बनाने के चक्कर में उन्होंने उसे एक जिम्मेदार 'इंसान' बनाना भुला दिया था। *आजकल हर माता-पिता अपनी बेटी को ढेर सारा लाड़-प्यार देते हैं, जो सही भी है। लेकिन क्या उस प्यार की आड़ में हम उन्हें अपंग तो नहीं बना रहे?* सोचिए जरूर: 🤔 👉 बेटी को घर के काम सिखाना उसे 'नौकरानी' बनाना नहीं, बल्कि उसे आत्मनिर्भर बनाना है। ताकि कल को उसे किसी के सामने बेबस न होना पड़े। *👉 समय-समय पर उसे उसकी गलतियों पर टोकना जरूरी है। अगर वह मायके में डांट नहीं सहेगी, तो ससुराल में बड़ों की बात उसे 'अपमान' लगेगी और यहीं से घर टूटने की शुरुआत होती है।* *👉 अक्सर लोग बेटों को दोष देते हैं कि उन्होंने माँ-बाप को वृद्धाश्रम भेज दिया। पर याद रखिए, उस बेटे के फैसले के पीछे किसी की 'बेटी' की सोच भी शामिल होती है। अगर हमने अपनी बेटी में सेवा भाव के संस्कार नहीं डाले, तो समाज में वृद्धाश्रम कभी बंद नहीं होंगे।* **** *अपनी बेटी को सिर्फ 'बेटी' बनाकर मत पालिए, उसे किसी घर की 'मान-मर्यादा' और 'संस्कारी बहू' बनने के योग्य बनाइए। वरना सजा सिर्फ उसे नहीं, पूरे परिवार को भुगतनी पड़ेगी।*
*,,,,,,,,,,,,,,,संस्कार।,,,,,,,, "शादी तय हो गई थी, कार्ड छप चुके थे और पूरा घर खुशियों से चहक रहा था... लेकिन एक फोन कॉल ने खुशियों के उस महल को ताश के पत्तों की तरह ढहा दिया। आखिर दूल्हे के पिता ने ऐन वक्त पर रिश्ता क्यों तोड़ा? वजह ऐसी थी कि हर माता-पिता का कलेजा कांप जाए।"* *अविनाश जी अपनी इकलौती बेटी आंचल की शादी को लेकर फूले नहीं समा रहे थे। दामाद शहर का माना-जाया अफसर था और सबसे बड़ी बात—वे लोग पूरी तरह 'दहेज मुक्त' शादी कर रहे थे। अविनाश जी को लग रहा था जैसे उन्हें दुनिया की सबसे बड़ी लॉटरी लग गई हो।* *लेकिन शादी से ठीक 20 दिन पहले, लड़के के पिता मिस्टर खन्ना का फोन आया।* "अविनाश जी, माफ कीजिएगा, पर हम यह रिश्ता आगे नहीं बढ़ा पाएंगे।" खन्ना जी की आवाज में एक अजीब सी गंभीरता थी। अविनाश जी के पैरों तले जमीन खिसक गई। "लेकिन खन्ना साहब! क्या हुआ? कोई गलती हो गई हमसे? क्या हमने स्वागत-सत्कार में कोई कमी छोड़ दी?" *खन्ना जी ने ठंडी आह भरी और बोले, "अविनाश जी, पिछले दो महीनों में मैं कई बार बिना बताए आपके घर आया। मैंने आपकी बेटी आंचल की डिग्रियाँ देखीं, उसकी खूबसूरती देखी, लेकिन जो नहीं दिखा... वो थे संस्कार और संवेदना।"* *अविनाश जी हक्के-बक्के रह गए। खन्ना जी ने आगे जो कहा, वह हर उस माता-पिता के लिए सबक है जो अपनी बेटी को 'नाजुक कली' बनाकर पालते हैं:* "जब भी मैं आपके घर आया, मैंने आपकी पत्नी को पसीने से तर-बतर किचन में काम करते देखा, कभी झाड़ू लगाते तो कभी भारी सामान उठाते देखा। लेकिन आंचल? वो हर बार अपने कमरे में सजी-धजी मोबाइल पर व्यस्त थी या सोफे पर बैठकर टीवी देख रही थी। उसे एक बार भी यह अहसास नहीं हुआ कि उसकी माँ थक रही है।" *"अविनाश जी, मुझे मेरे घर के लिए एक सजावटी गुड़िया नहीं चाहिए जो बस शो-केस में खड़ी रहे। मुझे वो 'बहू' चाहिए जो रिश्तों का दर्द समझे। जो लड़की अपनी माँ के आंसू और थकान नहीं देख सकती, वो कल को मेरी बुजुर्ग पत्नी की सेवा क्या करेगी? जो हाथ माँ का बोझ नहीं बंटा सकते, वो हमारे घर की जिम्मेदारियाँ कैसे उठाएंगे?"* अविनाश जी की आंखों के सामने अंधेरा छा गया। उन्हें समझ आ गया कि बेटी को 'राजकुमारी' बनाने के चक्कर में उन्होंने उसे एक जिम्मेदार 'इंसान' बनाना भुला दिया था। *आजकल हर माता-पिता अपनी बेटी को ढेर सारा लाड़-प्यार देते हैं, जो सही भी है। लेकिन क्या उस प्यार की आड़ में हम उन्हें अपंग तो नहीं बना रहे?* सोचिए जरूर: 🤔 👉 बेटी को घर के काम सिखाना उसे 'नौकरानी' बनाना नहीं, बल्कि उसे आत्मनिर्भर बनाना है। ताकि कल को उसे किसी के सामने बेबस न होना पड़े। *👉 समय-समय पर उसे उसकी गलतियों पर टोकना जरूरी है। अगर वह मायके में डांट नहीं सहेगी, तो ससुराल में बड़ों की बात उसे 'अपमान' लगेगी और यहीं से घर टूटने की शुरुआत होती है।* *👉 अक्सर लोग बेटों को दोष देते हैं कि उन्होंने माँ-बाप को वृद्धाश्रम भेज दिया। पर याद रखिए, उस बेटे के फैसले के पीछे किसी की 'बेटी' की सोच भी शामिल होती है। अगर हमने अपनी बेटी में सेवा भाव के संस्कार नहीं डाले, तो समाज में वृद्धाश्रम कभी बंद नहीं होंगे।* **** *अपनी बेटी को सिर्फ 'बेटी' बनाकर मत पालिए, उसे किसी घर की 'मान-मर्यादा' और 'संस्कारी बहू' बनने के योग्य बनाइए। वरना सजा सिर्फ उसे नहीं, पूरे परिवार को भुगतनी पड़ेगी।*
- नाले निर्माण में घटिया गुणवत्ता पर भड़के नगर अध्यक्ष प्रभात द्विवेदी, निष्पक्ष जांच की मांग मैहर- शारदा कॉलोनी पुराने एनएच से लगे नाले के निर्माण कार्य को लेकर नगर की राजनीति गर्मा गई है। नगर अध्यक्ष प्रभात द्विवेदी ने निर्माण कार्य पूर्ण होने के महज एक सप्ताह के भीतर ही नाले के क्षतिग्रस्त होने पर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर पालिका प्रशासन द्वारा निर्माण कार्य में गंभीर लापरवाही बरती गई है और गुणवत्ता के नाम पर केवल खानापूर्ति की गई है। नगर अध्यक्ष ने इसे सीधे तौर पर भ्रष्ट तंत्र का परिणाम बताते हुए संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं निर्माण में इस्तेमाल हो रही सामग्री की गुणवत्ता पर भी बड़े प्रश्न खड़े किए निर्माण में इस्तेमाल हो रही रेत नदी की रेत ना होकर मिट्टी है गंभीर जांच की आवश्यकता पूरे मैहर शहर में खासकर सरकारी कार्यों में रामनगर कुबरी से आने वाली गुणवत्ता विहीन रेत का इस्तेमाल किया जा रहा है जिसके परिणाम सामने है। प्रभात द्विवेदी दद्दा ने कहा कि जनता के पैसे से किए जा रहे विकास कार्यों में इस तरह की अनियमितता बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने नवागत कलेक्टर से पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है, ताकि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि निर्माण कार्य में उपयोग की गई सामग्री की गुणवत्ता की जांच कराई जाए और जिम्मेदार लोगों को चिन्हित किया जाए। नगर अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि वे इस मुद्दे को लेकर लगातार प्रयासरत रहेंगे और जब तक गुणवत्ता में सुधार नहीं होता, तब तक आवाज उठाते रहेंगे। स्थानीय नागरिकों ने भी नाले की खराब स्थिति पर नाराजगी व्यक्त की है और जल्द से जल्द सुधार कार्य की मांग की है। लोगों का कहना है कि बरसात के मौसम में यह स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। नगर में इस मुद्दे को लेकर जनचर्चा तेज हो गई है और सभी की नजर अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई है।1
- इस तरह मरीज और उनके परिजनों से वसूले जाते पैसे।1
- धूमधाम से मनाई गई भगवान परशुराम जय कुम्हारी भगवान परशुराम जयंती के अवसर पर माझगुवा, गाड़ाघाट, सागोनी, कुसमी,ब्राहमण समाज द्वारा शोभा यात्रा निकाली गई। जो कि नगर भ्रमण के बाद ग्राम पटेरिया के प्राचीन मढ़ा मंदिर पहुंचकर मंदिर में पूजा अर्चन की गई वहां से बिहारी जी मंदिर पटेरिया में समाप्त हुई। जहां विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सूरज तिवारी रहे। शोभा यात्रा सोमवार की सुबह मुख्य चौराहा बस स्टैंड पटेरिया बिहारी जी मंदिर एवं बड़ा मंदिर से नगर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ने कहा कि यदि तुम मानव योनि में पैदा हुए हो तो मानवता का कार्य करो। भगवान ने तुम्हें जैसी शक्ति प्रदान की है, वैसा ही कार्य करना चाहिए। सत्य के मार्ग पर चलकर किसी का अहित नहीं हो सकता। माता-पिता की सेवा करना ही परम धर्म व मानव का कर्तव्य है क्योंकि उनके आशीर्वाद के बिना सफलता प्राप्त करना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि हर प्राणी की सेवा करना ही ब्राहमण का धर्म है। परोपकार, सत्यमार्ग व दूसरों का हित करना ही परम धर्म है, जिस पर सभी को चलना चाहिए। इसी के साथ कार्यक्रम भोलाराम पांडे, मूलचंद पांडे, अजय पांडे,रवि तिवारी, श्री राम पांडे, कृष्ण कुमार पांडे, ऋषि, डॉ मनु वैरागी, संतोष पांडे, नितिन तिवारी, विजय तिवारी, समेत अन्य पदाधिकारियों ने संबोधित करते हुए भगवान परशुराम के चरित्र का वर्णन किया।1
- जबलपुर के गौर चौकी अंतर्गत जमतरा पुल के पास उस समय चीख-पुकार मच गई, जब जिला प्रशासन, पुलिस और माइनिंग विभाग की संयुक्त टीम ने अवैध रेत माफियाओं पर दबिश दी। टीम को देखते ही घाट पर मौजूद लोगों में भगदड़ मच गई। जान बचाने के लिए कुछ युवक नदी की ओर भागे, जिसमें खिरहनी बरगी निवासी आकाश बर्मन नदी की गहराई में समा गया। एएसपी सूर्यकांत शर्मा का बयान] "सोमवार को एसडीएम, सीएसपी और माइनिंग विभाग की संयुक्त टीम कार्रवाई के लिए पहुंची थी। इसी दौरान आकाश बर्मन नामक युवक की डूबने से मौत हुई है। पूरे मामले की जांच की जा रही है और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का पता चलेगा। वैधानिक कार्यवाही की जाएगी।" ग्रामीणों का हंगामा, रोते-बिलखते परिजन, पुलिस और जनता के बीच बहस1
- मानपुर नगर में लगने वाले जानलेवा जाम से बेहाल है आवाम-बेकाम साबित हो रहा 4 साल बीतने के बाद भी नप. प्रशासन। *(आशुतोष त्रिपाठी/जनचिंगारी उमरिया)* मानपुर नगर इन दिनों रोज़ाना लगने वाले जाम से जूझ रहा है। बस स्टैंड सहित मुख्य मार्गों पर घंटों तक वाहनों की कतारें लग रही हैं, जिससे आमजन की दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित हो रही है। स्कूल जाने वाले बच्चे देर से पहुंच रहे हैं, मरीज समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पा रहे, और रोज़मर्रा के कामकाज में लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हैरानी की बात यह है कि इस अव्यवस्था से प्रशासनिक अधिकारी भी अछूते नहीं हैं। कई बार खंड स्तर के अधिकारी खुद जाम में घंटों फंसे नजर आते हैं। बावजूद इसके, समस्या का स्थायी समाधान अब तक नहीं निकल पाया है, जिससे व्यवस्था पर सवाल और गहरे हो रहे हैं। बस स्टैंड क्षेत्र के व्यापारियों की स्थिति चिंताजनक है। उनका कहना है कि ऑनलाइन बाजार ने पहले ही व्यापार कमजोर कर दिया था, अब जाम के कारण ग्राहक दुकान तक नहीं पहुंच पा रहे। इससे बिक्री लगातार घट रही है और छोटे व्यापारियों के सामने रोज़ी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। इधर, मानपुर पुलिस को रोज़ अपने अन्य थाना संबंधी कार्य छोड़कर ट्रैफिक व्यवस्था संभालनी पड़ रही है। स्थानीय अधिकारी भी मौके पर पहुंचकर जाम खुलवाने में जुटे रहते हैं, लेकिन यह प्रयास सिर्फ अस्थायी राहत तक सीमित है। अगले ही दिन हालात फिर वही हो जाते हैं। नगर परिषद पर भी सवाल उठ रहे हैं। चुनाव के समय बस स्टैंड के विकास, पार्किंग व्यवस्था और ट्रैफिक सुधार के जो वादे किए गए थे, चार साल बाद भी वे जमीन पर नजर नहीं आते। न अतिक्रमण पर प्रभावी कार्रवाई हो पाई है, न ही कोई ठोस ट्रैफिक योजना लागू हो सकी है। मानपुर की जनता और व्यापारी अब स्पष्ट समाधान की मांग कर रहे हैं—तय पार्किंग व्यवस्था, अतिक्रमण पर सख्ती और स्थायी ट्रैफिक प्रबंधन। वरना यह जाम सिर्फ रास्ता ही नहीं रोकेगा, बल्कि नगर की आर्थिक और प्रशासनिक व्यवस्था पर भी गंभीर असर डालता रहेगा।3
- Post by Unchehra news1
- *शारदा कॉलोनी नाला निर्माण में लापरवाही का आरोप, नगर अध्यक्ष प्रभात द्विवेदी ने जांच की उठाई मांग* मैहर। नगर के शारदा कॉलोनी क्षेत्र में पुराने एनएच से लगे नाले के निर्माण कार्य को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। निर्माण कार्य पूरा होने के कुछ ही दिनों में नाले के क्षतिग्रस्त हो जाने पर नगर अध्यक्ष प्रभात द्विवेदी ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। नगर अध्यक्ष ने नगर पालिका प्रशासन पर निर्माण कार्य में भारी लापरवाही और गुणवत्ता से समझौते का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि जनता के पैसों से किए जा रहे विकास कार्यों में इस तरह की अनियमितता चिंताजनक है और यह सीधे तौर पर व्यवस्था पर सवाल खड़ा करती है। प्रभात द्विवेदी ने आरोप लगाया कि निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि रेत के नाम पर शुद्ध नदी की रेत की जगह मिट्टी युक्त सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे निर्माण की मजबूती पर गंभीर असर पड़ रहा है।उन्होंने नवागत कलेक्टर से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। नगर अध्यक्ष ने चेतावनी दी कि यदि गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया गया तो वह आगे भी आवाज उठाते रहेंगे।स्थानीय लोगों ने भी नाले की खराब स्थिति पर नाराजगी जताई है और जल्द सुधार कार्य की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते सुधार नहीं हुआ तो बरसात में समस्या और बढ़ सकती है।1
- मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के पाटन थाना क्षेत्र में चोरी की एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां एक किसान के घर के बाहर खड़े दो ट्रैक्टरों में से चोरों ने केवल नया ट्रैक्टर ही निशाना बनाया और उसे लेकर फरार हो गए। जानकारी के अनुसार, ग्राम तिमरी निवासी किसान नरेंद्र कुमार साह ने 16 अप्रैल की शाम अपने दोनों ट्रैक्टर घर के पास बने बाड़े में खड़े किए थे। रात करीब ढाई बजे पूरा परिवार कूलर की हवा में सो रहा था, तभी अज्ञात चोर बाड़े में घुसे और करीब डेढ़ साल पहले खरीदा गया नया ट्रैक्टर स्टार्ट कर ले गए, जबकि पुराना ट्रैक्टर वहीं खड़ा रहा। सबसे हैरानी की बात यह है कि चोरों ने दोनों ट्रैक्टर देखे, लेकिन बिना किसी जल्दबाजी के सीधे नए ट्रैक्टर को ही चुना और आसानी से गेट खोलकर फरार हो गए। अगली सुबह जब किसान बाड़े में पहुंचा तो नया ट्रैक्टर गायब था। इसके बाद गांव और आसपास तलाश की गई, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। किसान और उसके साथियों ने पाटन से जबलपुर होते हुए मंडला तक करीब 100 से ज्यादा CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली, जिसमें एक व्यक्ति ट्रैक्टर को मंडला की ओर ले जाते हुए नजर आया। फिलहाल किसान अपने साथियों के साथ ट्रैक्टर की तलाश में जुटा है। 18 अप्रैल को पाटन थाने में अज्ञात चोरों के खिलाफ FIR दर्ज कराई गई है। साथ ही किसान ने घोषणा की है कि जो भी ट्रैक्टर के बारे में पुख्ता जानकारी देगा, उसे 50 हजार रुपये का इनाम दिया जाएगा। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और CCTV फुटेज के आधार पर आरोपियों की तलाश की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि मुखबिर तंत्र सक्रिय कर दिया गया है और जल्द ही चोरों को पकड़कर ट्रैक्टर बरामद कर लिया जाएगा।1
- - पुलिस के अनुसार आरोपी विशाल (उम्र लगभग 26 वर्ष) को शिकायत मिलते ही कुछ ही घंटों में गिरफ्तार कर लिया गया। आरोप है कि बच्ची के साथ करीब एक साल से शोषण किया जा रहा था। बच्ची दादी के साथ रहती थी और अकेले होने पर आरोपी घर आता था। - बताया गया कि पीड़िता लंबे समय तक डर के कारण चुप रही, लेकिन बाद में हिम्मत दिखाते हुए थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले में सख्त धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। - पुलिस का कहना है कि पीड़िता की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए गए हैं और आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। - जबलपुर से दीपक विश्वकर्मा की रिपोर्ट1