उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर का बताकर वायरल हो रहे एक वीडियो ने शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस वीडियो में एक पीड़ित महिला अपनी व्यथा सुनाते हुए न्याय की मांग कर रही है। पीड़ित पक्ष की ओर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सीधे न्याय की गुहार लगाई गई है। इस घटना के बाद सरकार के 'सबका साथ, सबका विकास और सबका न्याय' के दावों पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर पीड़ितों को अपनी फरियाद लेकर सोशल मीडिया और कैमरों के सामने क्यों आना पड़ रहा है। इस पूरे मामले को लेकर पासी समाज ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। पासी समाज का आरोप है कि समाज को बदनाम करने वाले कुछ तत्वों के कारण पूरे समाज की छवि प्रभावित होती है। उन्होंने मांग की है कि प्रशासन को जाति, दबाव या किसी भी प्रभाव से ऊपर उठकर इस मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच करानी चाहिए ताकि दोषियों पर कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जा सके। सवाल यह भी उठाया जा रहा है कि क्या स्थानीय प्रशासन अपनी जिम्मेदारी सही तरीके से निभा रहा है और पीड़ितों को मुख्यमंत्री तक गुहार लगाने की जरूरत क्यों पड़ रही है। समाज अब उम्मीद कर रहा है कि सरकार इस वायरल वीडियो का संज्ञान लेकर त्वरित कार्रवाई करेगी और पीड़ितों के लिए #न्याय_की_गुहार को सुनिश्चित करेगी।
उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर का बताकर वायरल हो रहे एक वीडियो ने शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस वीडियो में एक पीड़ित महिला अपनी व्यथा सुनाते हुए न्याय की मांग कर रही है। पीड़ित पक्ष की ओर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सीधे न्याय की गुहार लगाई गई है। इस घटना के बाद सरकार के 'सबका साथ, सबका विकास और सबका न्याय' के दावों पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर पीड़ितों को अपनी फरियाद लेकर सोशल मीडिया और कैमरों के सामने क्यों आना पड़ रहा है। इस पूरे मामले को लेकर पासी समाज ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। पासी समाज का आरोप है कि समाज को बदनाम करने वाले कुछ तत्वों के कारण पूरे समाज की छवि प्रभावित होती है। उन्होंने मांग की है कि प्रशासन को जाति, दबाव या किसी भी प्रभाव से ऊपर उठकर इस मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच करानी चाहिए ताकि दोषियों पर कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जा सके। सवाल यह भी उठाया जा रहा है कि क्या स्थानीय प्रशासन अपनी जिम्मेदारी सही तरीके से निभा रहा है और पीड़ितों को मुख्यमंत्री तक गुहार लगाने की जरूरत क्यों पड़ रही है। समाज अब उम्मीद कर रहा है कि सरकार इस वायरल वीडियो का संज्ञान लेकर त्वरित कार्रवाई करेगी और पीड़ितों के लिए #न्याय_की_गुहार को सुनिश्चित करेगी।
- उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के शुक्लागंज में ब्रिटिशकालीन धोबीघाट की तालाब भूमि पर अवैध कब्जे और व्यावसायिक निर्माण का गंभीर मामला सामने आया है। शुक्लागंज-उन्नाव फोरलेन से सटी इस ऐतिहासिक तालाब की भूमि पर अवैध रूप से व्यावसायिक इमारत का निर्माण कराया जा रहा है, जिसे लेकर स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। आरोप है कि करीब पांच करोड़ रुपये मूल्य की इस सरकारी भूमि पर कथित रूप से एक विवादित पट्टे के आधार पर कब्जा कर व्यावसायिक निर्माण कराया जा रहा है। इस मामले में स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि पूरी पट्टा प्रक्रिया और अवैध निर्माण में राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों की भूमिका बेहद संदिग्ध है। नियमों के अनुसार, आवासीय पट्टा केवल भूमिहीन और अत्यंत पात्र गरीब परिवारों, जैसे अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, गरीब सामान्य वर्ग, विधवाओं एवं दिव्यांगों को ही निर्धारित शर्तों के तहत दिया जा सकता है, लेकिन यहाँ नियमों के विपरीत जाकर व्यावसायिक निर्माण की अनुमति दी गई है। ग्रामीणों ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न निर्णयों और निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि तालाब, नदी, नाले और अन्य सार्वजनिक जलस्रोतों की भूमि पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण या आवासीय पट्टा नहीं दिया जा सकता और ऐसी जमीनों को संरक्षित रखना अनिवार्य है। स्थानीय लोगों ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, अवैध निर्माण पर रोक लगाने तथा दोषी अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ तत्काल कड़ी कार्रवाई की मांग की है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस मामले में आगे क्या कार्रवाई करता है।1
- उत्तर प्रदेश के उन्नाव में जगत खेड़ा से लेकर कटहर तक का रोड बहुत ही खराब स्थिति में है। इस समस्या को लेकर जगत खेड़ा के रहने वाले मनीष कुमार ने आवाज उठाई है। उन्होंने मांग की है कि इस बदहाल सड़क के मामले की तुरंत सुनवाई की जाए। मनीष कुमार ने अपनी शिकायत के साथ अपना मोबाइल नंबर 9129859414 भी साझा किया है ताकि इस मुद्दे पर ध्यान दिया जा सके।2
- भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक ज्ञापन सौंपकर किसानों, कृषि मजदूरों और ग्रामीण समाज से जुड़ी कई गंभीर मांगें उठाई हैं। संगठन के जिला अध्यक्ष राधेश्याम मौर्य ने अपने पत्र में खेती की बढ़ती लागत, गन्ना भुगतान में देरी, उर्वरकों की कमी और प्राकृतिक आपदाओं से किसानों के बुरी तरह प्रभावित होने की बात कही है। इसके साथ ही, पत्र में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर सबसे बड़ी चिंता जताई गई है, जिससे विदेशी कृषि उत्पादों के आयात से एमएसपी व्यवस्था और डेयरी क्षेत्र कमजोर हो सकता है। संगठन ने ज्ञापन के जरिए सभी फसलों के लिए एमएसपी की कानूनी गारंटी देने, गन्ने का न्यूनतम मूल्य 500 रुपये प्रति क्विंटल करने और किसानों को पूर्ण ऋण माफी व ब्याजमुक्त कर्ज देने की मांग की है। इसके अतिरिक्त, 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने, स्मार्ट मीटर व निजीकरण वापस लेने, मनरेगा में 200 दिन का रोजगार व 700 रुपये दैनिक मजदूरी सुनिश्चित करने की मांग उठाई गई है। संगठन ने प्राकृतिक आपदाओं को राष्ट्रीय आपदा घोषित कर मुआवजा देने और अमेरिका सहित किसी भी ऐसे व्यापार समझौते का विरोध करने की मांग की है जो भारतीय कृषि को नुकसान पहुंचाए। भारतीय किसान यूनियन ने चेतावनी दी कि अगर किसानों की समस्याओं का समय रहते समाधान नहीं किया गया, तो इसका असर पूरी अर्थव्यवस्था और ग्रामीण समाज पर पड़ेगा।2
- उन्नाव के औरास कस्बे में आज दोपहर एक दिल दहला देने वाला हादसा हो गया, जहाँ कुदरत का कहर देखने को मिला। यहाँ एक सैलून की दुकान पर भीड़ देखकर बिना बाल कटवाए वापस लौट रहे दो बाइक सवार युवकों पर चिलवन का पेड़ गिर गया। इस दर्दनाक हादसे में बाइक सवार युवकों की मौत हो गई। इस हादसे की चपेट में आने से दो अन्य बाइक सवार भी गंभीर रूप से घायल हुए हैं।3