समाजसेवी मोहन डागला के साफ शब्द खानुवाली दुखांतिका कोई राजनीतिक मंच नहीं है यह एक परिवार के दर्द और न्याय की लड़ाई का मामला खानुवाली प्रकरण को लेकर समाजसेवी मोहन डागला का बयान केवल एक बयान नहीं, बल्कि उस दर्द और आक्रोश की आवाज है जो आज पूरे इलाके में सुनाई दे रही है। मोहन डागला ने बेबाक शब्दों में कहा कि जिस इंसान का घर उजड़ गया, क्या उसकी भरपाई कोई कर सकता है? किसी मां की मौत, किसी अजन्मे बच्चे की मौत उन्होंने तीखे अंदाज में कहा कि आज दुख की बात यह है कि जहां एक तरफ पीड़ित परिवार न्याय की आस लगाए बैठा है, वहीं दूसरी तरफ कुछ नेता एक पूंजीपति और पैसों के दम पर दबाव बनाने वालों के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। यह वही नेता हैं जो हर चुनाव में जनता के सामने बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन जब इंसाफ की लड़ाई का वक्त आता है तो उनकी संवेदनाएं कहीं खो जाती हैं। मोहन डागला ने साफ शब्दों में कहा कि खानुवाली प्रकरण कोई राजनीति का मंच नहीं है, यह एक परिवार के दर्द और न्याय की लड़ाई का मामला है। ऐसे में घड़साना के कुछ नेताओं को नेतागिरी करने से बचना चाहिए। यह समय दिखावे की राजनीति का नहीं, बल्कि इंसाफ के साथ खड़े होने का है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जनता सब देख रही है—कौन पीड़ित के साथ खड़ा है और कौन पैसों वालों के साथ। अगर न्याय के रास्ते में किसी ने भी राजनीति करने की कोशिश की, तो आने वाले समय में जनता ही उसका जवाब देगी। मोहन डागला का यह बयान इलाके की उस कड़वी सच्चाई को उजागर करता है कि जब एक परिवार न्याय के लिए दर-दर भटक रहा हो, तब कुछ लोगों के लिए राजनीति और रसूख ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है। लेकिन अब हालात बदल रहे हैं, और जनता की आवाज पहले से ज्यादा बुलंद हो रही है।
समाजसेवी मोहन डागला के साफ शब्द खानुवाली दुखांतिका कोई राजनीतिक मंच नहीं है यह एक परिवार के दर्द और न्याय की लड़ाई का मामला खानुवाली प्रकरण को लेकर समाजसेवी मोहन डागला का बयान केवल एक बयान नहीं, बल्कि उस दर्द और आक्रोश की आवाज है जो आज पूरे इलाके में सुनाई दे रही है। मोहन डागला ने बेबाक शब्दों में कहा कि जिस इंसान का घर उजड़ गया, क्या उसकी भरपाई कोई कर सकता है? किसी मां की मौत, किसी अजन्मे बच्चे की मौत उन्होंने तीखे अंदाज में कहा कि आज दुख की बात यह है कि जहां एक तरफ पीड़ित परिवार न्याय की आस लगाए बैठा है, वहीं दूसरी तरफ कुछ नेता एक पूंजीपति और पैसों के दम पर दबाव बनाने वालों के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। यह वही नेता हैं जो हर चुनाव में जनता के सामने बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन जब इंसाफ की लड़ाई का वक्त आता है तो उनकी संवेदनाएं कहीं खो जाती हैं। मोहन डागला ने साफ शब्दों में कहा कि खानुवाली प्रकरण कोई राजनीति का मंच नहीं है, यह एक परिवार के दर्द और न्याय की लड़ाई का मामला है। ऐसे में घड़साना के कुछ नेताओं को नेतागिरी करने से बचना चाहिए। यह समय दिखावे की राजनीति का नहीं, बल्कि इंसाफ के साथ खड़े होने का है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जनता सब देख रही है—कौन पीड़ित के साथ खड़ा है और कौन पैसों वालों के साथ। अगर न्याय के रास्ते में किसी ने भी राजनीति करने की कोशिश की, तो आने वाले समय में जनता ही उसका जवाब देगी। मोहन डागला का यह बयान इलाके की उस कड़वी सच्चाई को उजागर करता है कि जब एक परिवार न्याय के लिए दर-दर भटक रहा हो, तब कुछ लोगों के लिए राजनीति और रसूख ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है। लेकिन अब हालात बदल रहे हैं, और जनता की आवाज पहले से ज्यादा बुलंद हो रही है।
- खानुवाली प्रकरण को लेकर समाजसेवी मोहन डागला का बयान केवल एक बयान नहीं, बल्कि उस दर्द और आक्रोश की आवाज है जो आज पूरे इलाके में सुनाई दे रही है। मोहन डागला ने बेबाक शब्दों में कहा कि जिस इंसान का घर उजड़ गया, क्या उसकी भरपाई कोई कर सकता है? किसी मां की मौत, किसी अजन्मे बच्चे की मौत उन्होंने तीखे अंदाज में कहा कि आज दुख की बात यह है कि जहां एक तरफ पीड़ित परिवार न्याय की आस लगाए बैठा है, वहीं दूसरी तरफ कुछ नेता एक पूंजीपति और पैसों के दम पर दबाव बनाने वालों के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। यह वही नेता हैं जो हर चुनाव में जनता के सामने बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन जब इंसाफ की लड़ाई का वक्त आता है तो उनकी संवेदनाएं कहीं खो जाती हैं। मोहन डागला ने साफ शब्दों में कहा कि खानुवाली प्रकरण कोई राजनीति का मंच नहीं है, यह एक परिवार के दर्द और न्याय की लड़ाई का मामला है। ऐसे में घड़साना के कुछ नेताओं को नेतागिरी करने से बचना चाहिए। यह समय दिखावे की राजनीति का नहीं, बल्कि इंसाफ के साथ खड़े होने का है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जनता सब देख रही है—कौन पीड़ित के साथ खड़ा है और कौन पैसों वालों के साथ। अगर न्याय के रास्ते में किसी ने भी राजनीति करने की कोशिश की, तो आने वाले समय में जनता ही उसका जवाब देगी। मोहन डागला का यह बयान इलाके की उस कड़वी सच्चाई को उजागर करता है कि जब एक परिवार न्याय के लिए दर-दर भटक रहा हो, तब कुछ लोगों के लिए राजनीति और रसूख ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है। लेकिन अब हालात बदल रहे हैं, और जनता की आवाज पहले से ज्यादा बुलंद हो रही है।1
- शिक्षा से जीवन बदलता है।2
- आंखों में मोतियाबिंद हों चश्मा लगा हो आंखों में पानी आना लाली रहना खारिश हो नज़र कमजोर हो दूर पास की। 75686281431
- श्रीगंगानगर: अवैध देसी शराब के साथ युवक गिरफ्तार श्रीगंगानगर जिले के लालगढ़ जाटान थाना पुलिस ने अवैध देसी मदिरा की बिक्री के खिलाफ कार्रवाई करते हुए एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उसके पास से देसी शराब के 45 पव्वे बरामद किए हैं। पुलिस के अनुसार गश्त के दौरान लालगढ़ जाटान पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि थाना क्षेत्र के गांव सिहागांवाली के पास एक व्यक्ति अवैध शराब बेच रहा है। सूचना के आधार पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की और आरोपी को पकड़ लिया। थानाधिकारी गुरमेल सिंह ने बताया कि आरोपी के खिलाफ आबकारी अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम बादल पुत्र सुभाष चंद्र, जाति नायक, निवासी धर्मसिंहवाला बताया है।1
- टोल की समय अवधि न बढ़ाने की मांग, टोल संघर्ष समिति ने आज से दी थी पदमपुर श्रीगंगानगर मार्ग पर अनिश्चितकालीन चक्का जाम की दी चेतावनी, CI सुमन जयपाल,सहित पुलिस का भारी जाप्ता मौके पर मौजूद, प्रशासन ने अन्य मार्गो से वाहनों की करवाई आवाजाही शुरू, पूर्व में भी टोल को हटाने के लिए कई बार हो चुके हैं धरने प्रदर्शन,1
- गर्भवती सुदेश की मौत का मामला डॉक्टर के खिलाफ नारेबाजी सामाजिक संगठन कल से करेंगे प्रदर्शन परिजनों का आरोप नॉर्मल डिलीवरी का झांसा देकर डाक्टर ने गुमराह किया हालत बिगड़ती देख सरकारी हॉस्पिटल के रेफर कार्ड पर बीकानेर रवाना किया रास्ते मे जच्चा -बच्चा दोनों की मौत गर्भवती सुदेश की बेटी उत्तरी सड़को सड़को पर मेरी माँ को न्याय दिलवायो परिवार का आरोप हमें डॉक्टर ने उजाड़ दिया मूर्तका के परिजनों और सामाजिक संघठनों की घड़साना के गुरुद्वारा मे हुई बैठक परिजनों के डॉक्टर पर आरोप स्थानीय मीडिया और नेताओं को डॉक्टर ने किया हाइजेक मूर्तका सुदेश खानुवाली की थीं निवासी श्री गंगानगर के खानुवाली की गर्भवती सुदेश कुमारी और उसके गर्भ में बच्चे की मौत के मामले में बुधवार को घड़साना के गुरुद्वारा में विभिन्न सामाजिक संगठनों और सर्व समाज की बैठक आयोजित की गई इस दौरान शांति नर्सिंग होम के संचालक डॉक्टर राजेश गॉड के खिलाफ ग्रामीणों ने नारेबाजी की और 6 मार्च को नर्सिंग होम के खिलाफ एसडीएम कार्यालय पर प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है बैठक में मौजूद लोगों ने एक स्वर में कहा कि जब तक डॉक्टर के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं होती तब तक वह शांत नहीं होंगे 6 मार्च को एसडीएम कार्यालय पर प्रदर्शन के बाद आंदोलन के रणनीति बनाई जाएगी उन्होंने सर्व समाज से कहा कि वह 6 मार्च को अधिक से अधिक संख्या में एसडीएम कार्यालय पहुंचकर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाए गर्भवती सुदेश के पति सुभाष सुथार बताया कि 25 फरवरी को प्रसव के लिए सुदेश कुमारी को घड़साना के शांति नर्सिंग होम में सुबह 9:30 बजे भर्ती कराया गया था डॉक्टर राजेश गॉड ने पूरे दिन नॉर्मल डिलीवरी का झांसा देकर उन्हें गुमराह किया दोपहर 2:00 बाद कहा की डिलीवरी ऑपरेशन से होगी जिसमें 45000 का खर्च आएगा सुभाष के अनुसार बार-बार कहने के बावजूद भी ऑपरेशन नहीं किया गया वे बोले कि नॉर्मल डिलीवरी हो जाएगी शाम 4:00 बजे गर्भ में बच्चों की मौत होना बताया उसके बाद ऑपरेशन के लिए ले जाया गया शाम 6:30 बजे जब हालात बेकाबू हो गई तो डॉक्टर ने सरकारी अस्पताल के रेफर कार्ड बनाकर उन्हें प्राइवेट गाड़ी में बीकानेर के लिए रवाना कर दिया जहां रास्ते में सुदेश और बच्चे की मौत हो गई परिवार और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि घड़साना के डॉक्टर द्वारा पहले भी कई डिलीवरी केस के मामलो की शिकयत मिलती रहती है लेकिन प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जाती जिसके चलते यह लगातार लोगों को मौत के घाट उतारने पर तुला हुआ है वही इस मामले में अब पूरे जोर-शोर के साथ तूल पकड़ना शुरू कर दिया है मूर्तक सुदेश कुमारी की 10 वर्षीय बेटी अंजलि भी पहुंची उसने भावुक होते लोगों से अपील की कि मेरी मम्मी के साथ जो अन्याय हुआ है उसको लेकर मेरी अपील है कि आप 6 मार्च को ज्यादा से ज्यादा संख्या में गुरुद्वारा घड़साना पहुंच मेरी मम्मी को न्याय दिलाने में मेरी मदद करे वही शांति नर्सिंग होम के डॉक्टर राजेश गौड़ ने कहा कि 21 फरवरी की सोनोग्राफी रिपोर्ट मे बच्चे का वजन 4 किलो से ज्यादा था और फिर सोनोग्राफी करवाई गई तो उसमें बच्चे का वजन 4:30 किलो आया था मैंने उन्हें हायर सेंटर जाने की सलाह दी थी परिजन सिजेरीयन करवाने को लेकर तैयार नहीं थे लिहाजा मेरे पास मरीज को रेफर करने के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं था कोई भी डॉक्टर अपने मरीज की मौत नहीं चाहता लेकिन आरोप लगाने वाले कुछ भी कह सकते हैं हालांकि इस मामले में घड़साना के पुलिस स्टेशन में मर्ग दर्ज की गई है और डॉक्टरों की जांच कमेटी गठित कर दी गई है और वह जल्द से जल्द इस पूरे मामले की रिपोर्ट तैयार करेगी उसके बाद ही पता लग पाएगा की वास्तविकता क्या है लेकिन फिलहाल खानुवाली के एक परिवार को पूरी तरह से डॉक्टर की लापरवाही ने उजाड़ दिया है यह लोगों के आरोप लगातार लग रहे हैं1
- Breaking news बीकानेर बीकानेर कोर्ट में बम की सूचना पुलिस मौके पर , परिसर करवाया जा रहा खाली ई मेल कर दी गई धमकी Adsp चक्रवती राठौड़ मौके पर ,डॉग स्क्वाड मौके पर SP कावेंद्र सिंह सागर ने कहा पुलिस चौकस1
- “मौत का कुआं बंद होना ही चाहिए” — समाजसेवी रामेश्वर बाबल की मार्मिक अपील घड़साना में प्रसूता सुदेश कुमारी और उसके नवजात शिशु की दर्दनाक मौत ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। यह सिर्फ एक परिवार का दर्द नहीं, बल्कि पूरे समाज के माथे पर लगा वह कलंक है जो स्वास्थ्य व्यवस्था की लापरवाही और निजी अस्पतालों की मनमानी को उजागर करता है। इसी बीच समाजसेवी रामेश्वर बाबल ने बेहद मार्मिक और भावुक अपील करते हुए कहा कि घड़साना में जिस नर्सिंग होम ने एक माँ और उसके अजन्मे बच्चे की जिंदगी निगल ली, वह अस्पताल नहीं बल्कि “मौत का कुआं” बन चुका है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि ऐसे स्थान को बंद करवाना अब सिर्फ सुथार परिवार की लड़ाई नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की जिम्मेदारी बन चुकी है। रामेश्वर बाबल ने क्षेत्रवासियों से आग्रह करते हुए कहा कि कल अधिक से अधिक संख्या में घड़साना पहुंचकर पीड़ित सुभाष सुथार और उसके परिवार के साथ खड़े हों, ताकि यह संदेश साफ जाए कि समाज अन्याय और लापरवाही को चुपचाप सहने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर आज हम चुप रहे तो कल किसी और की बहू-बेटी इस लापरवाही की भेंट चढ़ सकती है। इसलिए यह सिर्फ एक अस्पताल बंद करवाने की मांग नहीं, बल्कि इंसाफ, मानवता और व्यवस्था को आईना दिखाने की लड़ाई है। रामेश्वर बाबल ने कहा कि जनता की एकजुटता ही सबसे बड़ी ताकत है। अगर पूरा क्षेत्र एक साथ खड़ा हो गया तो वह दिन दूर नहीं जब इस “मौत के कुएं” पर हमेशा के लिए ताला लग जाएगा और सुदेश कुमारी की आत्मा को सच्चा न्याय मिलेगा। अब देखना यह है कि क्या घड़साना की जनता इस दर्द और अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद करने के लिए एकजुट होकर मैदान में उतरती है, या फिर सिस्टम की खामोशी एक और सच्चाई को दफन कर देगी।1