बलरामपुर जिले के रामानुजगंज वन परिक्षेत्र में भीषण गर्मी और हीटवेव का असर अब वन्यजीवों पर भी दिख रहा है। लगभग 22 हाथियों का एक बड़ा झुंड पिछले एक महीने से इसी जंगल में डेरा डाले हुए है, जो गर्मी से राहत पाने के लिए रोज़ाना सेंदुर नदी पहुँचता है। यहाँ हाथी घंटों पानी में नहाकर और जलक्रीड़ा करके गर्मी से निजात पाते नजर आ रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों ने हाथियों के नदी में स्नान करते हुए वीडियो भी बनाए हैं, जो इलाके में खूब चर्चा में हैं। हाथियों का यह दल भोजन करने के बाद विशेष रूप से तकियाटोला क्षेत्र स्थित सेंदुर नदी में समय बिताता है, मानो उन्होंने नदी को अपना प्राकृतिक 'बाथ टब' बना लिया हो। रामानुजगंज वन परिक्षेत्र अपने घने जंगलों और प्राकृतिक संसाधनों के लिए जाना जाता है, जहाँ हाथियों को पर्याप्त भोजन और पानी आसानी से मिल रहा है। यही अनुकूल वातावरण हाथियों के इस बड़े समूह के यहाँ लंबे समय से विचरण करने का मुख्य कारण है। रामानुजगंज की रेंजर दिलरुबा बानो ने बताया कि कनकपुर, रामपुर, चिनिया और तकियाटोला क्षेत्रों में ये 22 हाथी लगातार सक्रिय हैं और सेंदुर नदी में पानी की उपलब्धता ने इस इलाके को उनका अस्थायी निवास बना दिया है। हालांकि, हाथियों की इतनी बड़ी संख्या के कारण आसपास के गांवों में भय और सतर्कता का माहौल बना हुआ है। किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए वन विभाग की टीम लगातार हाथियों की गतिविधियों पर नज़र रख रही है। इसके साथ ही, प्रभावित गांवों में मुनादी कराकर ग्रामीणों को जंगल की ओर न जाने और अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलने की सलाह दी जा रही है। वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे हाथियों के झुंड के करीब जाने या उन्हें उकसाने का प्रयास न करें, क्योंकि सतर्कता और उचित दूरी बनाए रखने से मानव-हाथी संघर्ष की संभावनाओं को कम किया जा सकता है। इस गर्मी के दौर में जहाँ सेंदुर नदी हाथियों के लिए राहत का केंद्र बन गई है, वहीं वन विभाग और ग्रामीण दोनों उनकी गतिविधियों पर पैनी नज़र बनाए हुए हैं।
बलरामपुर जिले के रामानुजगंज वन परिक्षेत्र में भीषण गर्मी और हीटवेव का असर अब वन्यजीवों पर भी दिख रहा है। लगभग 22 हाथियों का एक बड़ा झुंड पिछले एक महीने से इसी जंगल में डेरा डाले हुए है, जो गर्मी से राहत पाने के लिए रोज़ाना सेंदुर नदी पहुँचता है। यहाँ हाथी घंटों पानी में नहाकर और जलक्रीड़ा करके गर्मी से निजात पाते नजर आ रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों ने हाथियों के नदी में स्नान करते हुए वीडियो भी बनाए हैं, जो इलाके में खूब चर्चा
में हैं। हाथियों का यह दल भोजन करने के बाद विशेष रूप से तकियाटोला क्षेत्र स्थित सेंदुर नदी में समय बिताता है, मानो उन्होंने नदी को अपना प्राकृतिक 'बाथ टब' बना लिया हो। रामानुजगंज वन परिक्षेत्र अपने घने जंगलों और प्राकृतिक संसाधनों के लिए जाना जाता है, जहाँ हाथियों को पर्याप्त भोजन और पानी आसानी से मिल रहा है। यही अनुकूल वातावरण हाथियों के इस बड़े समूह के यहाँ लंबे समय से विचरण करने का मुख्य कारण है। रामानुजगंज की रेंजर दिलरुबा बानो ने बताया कि कनकपुर,
रामपुर, चिनिया और तकियाटोला क्षेत्रों में ये 22 हाथी लगातार सक्रिय हैं और सेंदुर नदी में पानी की उपलब्धता ने इस इलाके को उनका अस्थायी निवास बना दिया है। हालांकि, हाथियों की इतनी बड़ी संख्या के कारण आसपास के गांवों में भय और सतर्कता का माहौल बना हुआ है। किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए वन विभाग की टीम लगातार हाथियों की गतिविधियों पर नज़र रख रही है। इसके साथ ही, प्रभावित गांवों में मुनादी कराकर ग्रामीणों को जंगल की ओर न जाने और अनावश्यक
रूप से घरों से बाहर न निकलने की सलाह दी जा रही है। वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे हाथियों के झुंड के करीब जाने या उन्हें उकसाने का प्रयास न करें, क्योंकि सतर्कता और उचित दूरी बनाए रखने से मानव-हाथी संघर्ष की संभावनाओं को कम किया जा सकता है। इस गर्मी के दौर में जहाँ सेंदुर नदी हाथियों के लिए राहत का केंद्र बन गई है, वहीं वन विभाग और ग्रामीण दोनों उनकी गतिविधियों पर पैनी नज़र बनाए हुए हैं।
- बलरामपुर जिले की बासेन पंचायत में इन दिनों वन भूमि पर अवैध तरीके से कब्ज़ा कर मकान बनाने की होड़ मची हुई है। खासकर NH 343 मुख्य मार्ग, विशेषकर सरईसिंया NH से लगे क्षेत्रों में, सड़क किनारे की जमीनों पर अवैध निर्माण का काम तेज़ी से चल रहा है। इस अवैध कब्ज़े का स्थानीय लोग बड़ी संख्या में विरोध कर रहे हैं। आरोप है कि वन विभाग के स्थानीय बीट के वनकर्मी भी दबे पांव मिलीभगत कर बाहरी लोगों को संरक्षण दे रहे हैं। इसी को लेकर सर्व आदिवासी समाज के जिलाध्यक्ष ने इस अवैध कब्ज़े का कड़ा विरोध जताते हुए नाराज़गी व्यक्त की। उन्होंने 'बाहरी भगाओ छत्तीसगढ़ बचाओ' का नारा देते हुए कहा कि आदिवासी बाहरी लोगों को वहाँ बसने नहीं देंगे। उनके अनुसार, यह वन भूमि पर अवैध कब्ज़ा आदिवासियों के हितों की अनदेखी है, जिसे वे कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे और इस पर तत्काल कार्रवाई की मांग की। इस शिकायत पर अपर कलेक्टर ने तत्काल जांच कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।1
- बलरामपुर जिले के रामानुजगंज वन परिक्षेत्र में भीषण गर्मी और हीटवेव का असर अब वन्यजीवों पर भी दिख रहा है। लगभग 22 हाथियों का एक बड़ा झुंड पिछले एक महीने से इसी जंगल में डेरा डाले हुए है, जो गर्मी से राहत पाने के लिए रोज़ाना सेंदुर नदी पहुँचता है। यहाँ हाथी घंटों पानी में नहाकर और जलक्रीड़ा करके गर्मी से निजात पाते नजर आ रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों ने हाथियों के नदी में स्नान करते हुए वीडियो भी बनाए हैं, जो इलाके में खूब चर्चा में हैं। हाथियों का यह दल भोजन करने के बाद विशेष रूप से तकियाटोला क्षेत्र स्थित सेंदुर नदी में समय बिताता है, मानो उन्होंने नदी को अपना प्राकृतिक 'बाथ टब' बना लिया हो। रामानुजगंज वन परिक्षेत्र अपने घने जंगलों और प्राकृतिक संसाधनों के लिए जाना जाता है, जहाँ हाथियों को पर्याप्त भोजन और पानी आसानी से मिल रहा है। यही अनुकूल वातावरण हाथियों के इस बड़े समूह के यहाँ लंबे समय से विचरण करने का मुख्य कारण है। रामानुजगंज की रेंजर दिलरुबा बानो ने बताया कि कनकपुर, रामपुर, चिनिया और तकियाटोला क्षेत्रों में ये 22 हाथी लगातार सक्रिय हैं और सेंदुर नदी में पानी की उपलब्धता ने इस इलाके को उनका अस्थायी निवास बना दिया है। हालांकि, हाथियों की इतनी बड़ी संख्या के कारण आसपास के गांवों में भय और सतर्कता का माहौल बना हुआ है। किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए वन विभाग की टीम लगातार हाथियों की गतिविधियों पर नज़र रख रही है। इसके साथ ही, प्रभावित गांवों में मुनादी कराकर ग्रामीणों को जंगल की ओर न जाने और अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलने की सलाह दी जा रही है। वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे हाथियों के झुंड के करीब जाने या उन्हें उकसाने का प्रयास न करें, क्योंकि सतर्कता और उचित दूरी बनाए रखने से मानव-हाथी संघर्ष की संभावनाओं को कम किया जा सकता है। इस गर्मी के दौर में जहाँ सेंदुर नदी हाथियों के लिए राहत का केंद्र बन गई है, वहीं वन विभाग और ग्रामीण दोनों उनकी गतिविधियों पर पैनी नज़र बनाए हुए हैं।4
- बलरामपुर जिला मुख्यालय को विकासखंड कुसमी से जोड़ने वाला कंटी घाट रोड, जो कि एक महत्वपूर्ण मुख्य मार्ग है, आज बदहाल स्थिति में है। इस 28 करोड़ रुपये के सड़क निर्माण कार्य की समय सीमा (एग्रीमेंट) समाप्त हो चुकी है, लेकिन ठेकेदार की लापरवाही और सुस्त रफ्तार के कारण काम अभी भी अधूरा पड़ा है, जिससे हजारों राहगीरों और ग्रामीणों को रोज भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कुसमी लोक निर्माण विभाग (PWD) के SDO जे. के. तिग्गा ने बताया कि इस सड़क निर्माण के लिए कुल 28 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए थे, जिसका ठेका 'मारुति कंस्ट्रक्शन' को दिया गया है। ठेकेदार ने अब तक 6 करोड़ रुपये का भुगतान भी प्राप्त कर लिया है, लेकिन जमीनी स्तर पर काम का उतना हिस्सा भी दिखाई नहीं देता है जितने पैसे निकाले जा चुके हैं। ठेकेदार का एग्रीमेंट पेपर पूरी तरह विफल हो चुका है, फिर भी काम की गति बेहद धीमी बनी हुई है। एस.डी.ओ. तिग्गा ने इस मामले में विभाग की बेबसी व्यक्त करते हुए सीधे तौर पर कहा कि "ठेकेदार की राजनीतिक पकड़ बहुत जबरदस्त है, जिसके कारण हम लोग ज्यादा कुछ नहीं बोल सकते हैं।" स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, यह सड़क जिला मुख्यालय तक पहुँचने का मुख्य साधन है और इसके अधूरे रहने से लोग आए दिन हादसों का शिकार हो रहे हैं, गाड़ियाँ खराब हो रही हैं और धूल के गुबार से परेशान हैं। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि जब जनता बेहाल है, ठेकेदार सुस्त है और विभाग तरस रहा है, तो कमी किसकी है? यह देखना होगा कि इस खबर के सामने आने के बाद प्रशासन ठेकेदार पर कोई ठोस कार्रवाई करता है या 'राजनीतिक रसूख' के आगे जनता यूं ही पिसती रहेगी और सरकारी नियम-कानून बौने साबित होते रहेंगे।1
- गढ़वा जिले के रंका प्रखंड में 90 दिवसीय आउटरीच एवं गहन जागरूकता अभियान के तहत एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA), नई दिल्ली और झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (JHALSA), रांची के निर्देशों पर तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA), गढ़वा के अध्यक्ष सह जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज प्रसाद एवं सचिव निभा रंजना लकड़ा के मार्गदर्शन में संचालित हो रहा है। बुधवार को रंका पीएलवी टीम ने कंचनपुर पंचायत के अनुसूचित जाति बहुल पहाड़ी टोला में यह जागरूकता कार्यक्रम किया। इस दौरान, पीएलवी टीम ने ग्रामीणों की समस्याओं को सुना। पीएलवी राजेश कुमार चौधरी ने बुधवार दोपहर दो बजे इस संबंध में जानकारी दी। समस्याओं पर ग्रामीणों से सीधे संवाद स्थापित करने के लिए पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि शेखर कुमार को भी बुलाया गया।1
- गढ़वा (झारखंड) के डंडई थाना क्षेत्र निवासी 23 वर्षीय अमित कुमार पिछले 11 दिनों से लापता हैं। उनके परिजनों ने बताया कि अमित कुमार अपनी मां से अंतिम बार 23 मई को मेरठ रेलवे स्टेशन से बात करने के बाद से गुमशुदा हैं, जिसके बाद से उनका मोबाइल बंद आ रहा है और कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। परिजनों के अनुसार, अमित कुमार मजदूरी करने के लिए महाराष्ट्र गए थे। उनकी अंतिम जानकारी मेरठ रेलवे स्टेशन से मिली थी। अब उनकी तलाश में जन सहयोग की अपील की जा रही है। अमित कुमार के संबंध में किसी भी प्रकार की जानकारी मिलने पर तुरंत 8969272480 नंबर पर संपर्क करने का आग्रह किया गया है।1
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने कर्नाटक दौरे के तहत बेंगलुरु में ध्याण मंदिर का लोकार्पण किया। इस दौरे पर उन्होंने कर्नाटक में कई नई पहलें भी शुरू कीं।1
- झारखंड के गढ़वा जिले के झलुवा गांव में उस समय हड़कंप मच गया, जब एक मामा ने यह गंभीर आरोप लगाया कि उनकी जमीन हड़पने के उद्देश्य से एक फर्जी हिबानामा (उपहारनामा) तैयार किया गया है। मामा के अनुसार, यह दस्तावेज उनकी जानकारी और सहमति के बिना बनाया गया है। इस मामले के सामने आने के बाद से पूरे गांव में विभिन्न प्रकार की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। इस विवाद से जुड़ी पूरी सच्चाई अब जांच और कानूनी प्रक्रिया के संपन्न होने के बाद ही सामने आने की उम्मीद है।1
- डंडई प्रखंड क्षेत्र में प्रशासन ने अवैध बालू कारोबार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई की है। अंचलाधिकारी जयशंकर पाठक के नेतृत्व में चलाए गए एक विशेष छापेमारी अभियान के दौरान सोनेहरा गांव के समीप से बालू से लदे दो टिप्पर वाहनों को जब्त किया गया है। जब्त किए गए वाहनों के नंबर जेएच-14एल-0783 और जेएच-01टीसी-2406 हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि धुरकी प्रखंड की कनहर नदी से रात के अंधेरे में अवैध रूप से बालू का उत्खनन कर उसे ट्रैक्टर और टिप्पर के माध्यम से डंडई क्षेत्र में लाकर ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा था। प्रशासन की इस कार्रवाई से अवैध बालू कारोबार से जुड़े लोगों में हड़कंप मच गया है। अंचलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि अवैध खनन और बालू ढुलाई में संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा, और यह अभियान लगातार जारी रहेगा।1