चित्रकूट:- जिलाधिकारी ने रैपुरा ग्राम समूह पेयजल योजना के 29 एमएलडी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का किया निरीक्षण आज दिनांक 14 मार्च 2026 को जिलाधिकारी चित्रकूट द्वारा विकासखंड मानिकपुर के अंतर्गत निर्माणाधीन रैपुरा ग्राम समूह पेयजल योजना के अंतर्गत ग्राम अगरहुण्डा में स्थापित 29 एमएलडी क्षमता के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का स्थलीय निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान पुलिस अधीक्षक चित्रकूट, अपर जिलाधिकारी (नमामि गंगे) चित्रकूट, अधिशासी अभियंता उ.प्र. जल निगम (ग्रामीण) चित्रकूट श्री आशीष कुमार भारती, सहायक अभियंता श्री शशिकांत मौर्य, श्री अनिल कुमार यादव विभागीय अधिकारीगण, टीपीआई के डिप्टी टीम लीडर तथा कार्यदायी संस्था जीवीपीआर हैदराबाद के डिप्टी प्रोजेक्ट मैनेजर एस. मौर्य उपस्थित रहे। इस अवसर पर अधिशासी अभियंता द्वारा अवगत कराया गया कि यह योजना गुंता डैम को जल स्रोत के रूप में आधारित सरफेस सोर्स पेयजल योजना है, जहां पर इंटेक वेल का निर्माण किया गया है। गुंता डैम से कच्चे पानी को इंटेक वेल के माध्यम से पंप कर वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट, अगरहुण्डा तक लाया जाता है, जहां विभिन्न ट्रीटमेंट प्रक्रियाओं के माध्यम से जल का शोधन कर शुद्ध पेयजल के रूप में ग्रामों में आपूर्ति की जाती है। इस योजना के माध्यम से कुल 78 ग्रामों के 28,925 घरों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाना है, जिसमें रैपुरा ग्राम समूह पेयजल योजना के 68 ग्राम तथा रेट्रोफिटिंग योजना के 10 ग्राम सम्मिलित हैं। योजना के अंतर्गत 28 ओवरहेड टैंक (ओएचटी) एवं 11 सीडब्ल्यूआर के माध्यम से लगभग 882.38 किमी पाइपलाइन बिछाकर 68 ग्रामों के 19,570 घरों में पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था की जा रही है। वर्तमान में 26 शिरोपरि जलाशयों का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है तथा शेष 2 ओवरहेड टैंक का कार्य 30 अप्रैल 2026 तक पूर्ण कराया जाना लक्षित है। वर्तमान में योजना के 68 ग्रामों के सापेक्ष 61 ग्रामों में पेयजल आपूर्ति प्रारंभ हो चुकी है तथा 47 ग्रामों को ‘हर घर जल प्रमाणीकरण’ प्राप्त कराया जा चुका है। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी महोदय द्वारा वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के विभिन्न संरचनाओं, ट्रीटमेंट मेथड एवं संपूर्ण ट्रीटमेंट प्रक्रिया का बारीकी से अवलोकन किया गया। उन्होंने एरिएटर, फ्लैश मिक्सर, क्लैरिफ्लोक्यूलेटर, फिल्टर बेड, एमसीडब्ल्यूआर, प्रयोगशाला तथा स्काडा प्रणाली का निरीक्षण करते हुए कार्यों की प्रगति की समीक्षा की तथा योजना के अंतर्गत ग्रामों में प्रारंभ की गई पेयजल आपूर्ति व्यवस्था पर संतोष व्यक्त किया। जिलाधिकारी महोदय ने निर्देशित किया कि री-सर्कुलेशन, बैकवॉश अरेंजमेंट एवं स्काडा से संबंधित अवशेष कार्यों को 30 अप्रैल 2026 तक पूर्ण कराया जाए। साथ ही योजना के अंतर्गत शेष 7 ग्रामों में पाइपलाइन, गृह जल संयोजन एवं रोड रेस्टोरेशन से संबंधित कार्यों को 30 अप्रैल 2026 तक पूर्ण कराते हुए शुद्ध पेयजल आपूर्ति प्रारंभ की जाए तथा सभी ग्रामों को हर घर जल प्रमाणीकरण कराया जाना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि जिन ग्रामों में पेयजल आपूर्ति प्रारंभ हो चुकी है, वहां के ग्राम प्रधानों को वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का एक्सपोजर विजिट कराया जाए, जिससे उन्हें पूरी ट्रीटमेंट प्रक्रिया एवं योजना की कार्यप्रणाली की जानकारी मिल सके। ग्राम प्रधानों को यह भी अवगत कराया जाए कि पेयजल शोधन की प्रक्रिया अत्यंत जटिल एवं तकनीकी होती है और काफी प्रयासों के पश्चात शुद्ध जल लोगों के घरों तक पहुंचाया जाता है, इसलिए पानी का अनावश्यक अपव्यय न किया जाए। साथ ही निर्देशित किया गया कि योजना के कार्यों एवं उपलब्धियों का विभिन्न समाचार पत्रों तथा सोशल मीडिया माध्यमों के द्वारा व्यापक प्रचार-प्रसार कराया जाए, जिससे आमजन को योजना के महत्व एवं लाभों की जानकारी प्राप्त हो सके। निरीक्षण के उपरांत जिलाधिकारी चित्रकूट, पुलिस अधीक्षक चित्रकूट एवं अपर जिलाधिकारी (नमामि गंगे) द्वारा योजना परिसर में पौधारोपण भी किया गया
चित्रकूट:- जिलाधिकारी ने रैपुरा ग्राम समूह पेयजल योजना के 29 एमएलडी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का किया निरीक्षण आज दिनांक 14 मार्च 2026 को जिलाधिकारी चित्रकूट द्वारा विकासखंड मानिकपुर के अंतर्गत निर्माणाधीन रैपुरा ग्राम समूह पेयजल योजना के अंतर्गत ग्राम अगरहुण्डा में स्थापित 29 एमएलडी क्षमता के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का स्थलीय निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान पुलिस अधीक्षक चित्रकूट, अपर जिलाधिकारी (नमामि गंगे) चित्रकूट, अधिशासी अभियंता उ.प्र. जल निगम (ग्रामीण) चित्रकूट श्री आशीष कुमार भारती, सहायक अभियंता श्री शशिकांत मौर्य, श्री अनिल कुमार यादव विभागीय अधिकारीगण, टीपीआई के डिप्टी टीम लीडर तथा कार्यदायी संस्था जीवीपीआर हैदराबाद के डिप्टी प्रोजेक्ट मैनेजर एस. मौर्य उपस्थित रहे। इस अवसर पर अधिशासी अभियंता द्वारा अवगत कराया गया कि यह योजना गुंता डैम को जल स्रोत के रूप में आधारित सरफेस सोर्स पेयजल योजना है, जहां पर इंटेक वेल का निर्माण किया गया है। गुंता डैम से कच्चे पानी को इंटेक वेल के माध्यम से पंप कर वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट, अगरहुण्डा तक लाया जाता है, जहां विभिन्न ट्रीटमेंट प्रक्रियाओं के माध्यम से जल का शोधन कर शुद्ध पेयजल के रूप में ग्रामों में आपूर्ति की जाती है। इस योजना के माध्यम से कुल 78 ग्रामों के 28,925 घरों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाना है, जिसमें रैपुरा ग्राम समूह पेयजल योजना के 68 ग्राम तथा रेट्रोफिटिंग योजना के 10 ग्राम सम्मिलित हैं। योजना के अंतर्गत 28 ओवरहेड टैंक (ओएचटी) एवं 11 सीडब्ल्यूआर के माध्यम से लगभग 882.38 किमी पाइपलाइन बिछाकर 68 ग्रामों के 19,570 घरों में पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था की जा रही है। वर्तमान में 26 शिरोपरि जलाशयों का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है तथा शेष 2 ओवरहेड टैंक का कार्य 30 अप्रैल 2026 तक पूर्ण कराया जाना लक्षित है। वर्तमान में योजना के 68 ग्रामों के सापेक्ष 61 ग्रामों में पेयजल आपूर्ति
प्रारंभ हो चुकी है तथा 47 ग्रामों को ‘हर घर जल प्रमाणीकरण’ प्राप्त कराया जा चुका है। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी महोदय द्वारा वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के विभिन्न संरचनाओं, ट्रीटमेंट मेथड एवं संपूर्ण ट्रीटमेंट प्रक्रिया का बारीकी से अवलोकन किया गया। उन्होंने एरिएटर, फ्लैश मिक्सर, क्लैरिफ्लोक्यूलेटर, फिल्टर बेड, एमसीडब्ल्यूआर, प्रयोगशाला तथा स्काडा प्रणाली का निरीक्षण करते हुए कार्यों की प्रगति की समीक्षा की तथा योजना के अंतर्गत ग्रामों में प्रारंभ की गई पेयजल आपूर्ति व्यवस्था पर संतोष व्यक्त किया। जिलाधिकारी महोदय ने निर्देशित किया कि री-सर्कुलेशन, बैकवॉश अरेंजमेंट एवं स्काडा से संबंधित अवशेष कार्यों को 30 अप्रैल 2026 तक पूर्ण कराया जाए। साथ ही योजना के अंतर्गत शेष 7 ग्रामों में पाइपलाइन, गृह जल संयोजन एवं रोड रेस्टोरेशन से संबंधित कार्यों को 30 अप्रैल 2026 तक पूर्ण कराते हुए शुद्ध पेयजल आपूर्ति प्रारंभ की जाए तथा सभी ग्रामों को हर घर जल प्रमाणीकरण कराया जाना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि जिन ग्रामों में पेयजल आपूर्ति प्रारंभ हो चुकी है, वहां के ग्राम प्रधानों को वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का एक्सपोजर विजिट कराया जाए, जिससे उन्हें पूरी ट्रीटमेंट प्रक्रिया एवं योजना की कार्यप्रणाली की जानकारी मिल सके। ग्राम प्रधानों को यह भी अवगत कराया जाए कि पेयजल शोधन की प्रक्रिया अत्यंत जटिल एवं तकनीकी होती है और काफी प्रयासों के पश्चात शुद्ध जल लोगों के घरों तक पहुंचाया जाता है, इसलिए पानी का अनावश्यक अपव्यय न किया जाए। साथ ही निर्देशित किया गया कि योजना के कार्यों एवं उपलब्धियों का विभिन्न समाचार पत्रों तथा सोशल मीडिया माध्यमों के द्वारा व्यापक प्रचार-प्रसार कराया जाए, जिससे आमजन को योजना के महत्व एवं लाभों की जानकारी प्राप्त हो सके। निरीक्षण के उपरांत जिलाधिकारी चित्रकूट, पुलिस अधीक्षक चित्रकूट एवं अपर जिलाधिकारी (नमामि गंगे) द्वारा योजना परिसर में पौधारोपण भी किया गया
- चित्रकूट:- जिलाधिकारी ने रैपुरा ग्राम समूह पेयजल योजना के 29 एमएलडी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का किया निरीक्षण आज दिनांक 14 मार्च 2026 को जिलाधिकारी चित्रकूट द्वारा विकासखंड मानिकपुर के अंतर्गत निर्माणाधीन रैपुरा ग्राम समूह पेयजल योजना के अंतर्गत ग्राम अगरहुण्डा में स्थापित 29 एमएलडी क्षमता के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का स्थलीय निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान पुलिस अधीक्षक चित्रकूट, अपर जिलाधिकारी (नमामि गंगे) चित्रकूट, अधिशासी अभियंता उ.प्र. जल निगम (ग्रामीण) चित्रकूट श्री आशीष कुमार भारती, सहायक अभियंता श्री शशिकांत मौर्य, श्री अनिल कुमार यादव विभागीय अधिकारीगण, टीपीआई के डिप्टी टीम लीडर तथा कार्यदायी संस्था जीवीपीआर हैदराबाद के डिप्टी प्रोजेक्ट मैनेजर एस. मौर्य उपस्थित रहे। इस अवसर पर अधिशासी अभियंता द्वारा अवगत कराया गया कि यह योजना गुंता डैम को जल स्रोत के रूप में आधारित सरफेस सोर्स पेयजल योजना है, जहां पर इंटेक वेल का निर्माण किया गया है। गुंता डैम से कच्चे पानी को इंटेक वेल के माध्यम से पंप कर वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट, अगरहुण्डा तक लाया जाता है, जहां विभिन्न ट्रीटमेंट प्रक्रियाओं के माध्यम से जल का शोधन कर शुद्ध पेयजल के रूप में ग्रामों में आपूर्ति की जाती है। इस योजना के माध्यम से कुल 78 ग्रामों के 28,925 घरों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाना है, जिसमें रैपुरा ग्राम समूह पेयजल योजना के 68 ग्राम तथा रेट्रोफिटिंग योजना के 10 ग्राम सम्मिलित हैं। योजना के अंतर्गत 28 ओवरहेड टैंक (ओएचटी) एवं 11 सीडब्ल्यूआर के माध्यम से लगभग 882.38 किमी पाइपलाइन बिछाकर 68 ग्रामों के 19,570 घरों में पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था की जा रही है। वर्तमान में 26 शिरोपरि जलाशयों का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है तथा शेष 2 ओवरहेड टैंक का कार्य 30 अप्रैल 2026 तक पूर्ण कराया जाना लक्षित है। वर्तमान में योजना के 68 ग्रामों के सापेक्ष 61 ग्रामों में पेयजल आपूर्ति प्रारंभ हो चुकी है तथा 47 ग्रामों को ‘हर घर जल प्रमाणीकरण’ प्राप्त कराया जा चुका है। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी महोदय द्वारा वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के विभिन्न संरचनाओं, ट्रीटमेंट मेथड एवं संपूर्ण ट्रीटमेंट प्रक्रिया का बारीकी से अवलोकन किया गया। उन्होंने एरिएटर, फ्लैश मिक्सर, क्लैरिफ्लोक्यूलेटर, फिल्टर बेड, एमसीडब्ल्यूआर, प्रयोगशाला तथा स्काडा प्रणाली का निरीक्षण करते हुए कार्यों की प्रगति की समीक्षा की तथा योजना के अंतर्गत ग्रामों में प्रारंभ की गई पेयजल आपूर्ति व्यवस्था पर संतोष व्यक्त किया। जिलाधिकारी महोदय ने निर्देशित किया कि री-सर्कुलेशन, बैकवॉश अरेंजमेंट एवं स्काडा से संबंधित अवशेष कार्यों को 30 अप्रैल 2026 तक पूर्ण कराया जाए। साथ ही योजना के अंतर्गत शेष 7 ग्रामों में पाइपलाइन, गृह जल संयोजन एवं रोड रेस्टोरेशन से संबंधित कार्यों को 30 अप्रैल 2026 तक पूर्ण कराते हुए शुद्ध पेयजल आपूर्ति प्रारंभ की जाए तथा सभी ग्रामों को हर घर जल प्रमाणीकरण कराया जाना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि जिन ग्रामों में पेयजल आपूर्ति प्रारंभ हो चुकी है, वहां के ग्राम प्रधानों को वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का एक्सपोजर विजिट कराया जाए, जिससे उन्हें पूरी ट्रीटमेंट प्रक्रिया एवं योजना की कार्यप्रणाली की जानकारी मिल सके। ग्राम प्रधानों को यह भी अवगत कराया जाए कि पेयजल शोधन की प्रक्रिया अत्यंत जटिल एवं तकनीकी होती है और काफी प्रयासों के पश्चात शुद्ध जल लोगों के घरों तक पहुंचाया जाता है, इसलिए पानी का अनावश्यक अपव्यय न किया जाए। साथ ही निर्देशित किया गया कि योजना के कार्यों एवं उपलब्धियों का विभिन्न समाचार पत्रों तथा सोशल मीडिया माध्यमों के द्वारा व्यापक प्रचार-प्रसार कराया जाए, जिससे आमजन को योजना के महत्व एवं लाभों की जानकारी प्राप्त हो सके। निरीक्षण के उपरांत जिलाधिकारी चित्रकूट, पुलिस अधीक्षक चित्रकूट एवं अपर जिलाधिकारी (नमामि गंगे) द्वारा योजना परिसर में पौधारोपण भी किया गया2
- Post by शिव प्रकाश चित्रकूट1
- मामला मानिकपुर ब्लाक के अंतर्गत भौंरी के कलवारा पुरवा गांव का है जिसमें एक को समझौते के तौरपर जमीन आवंटित की गई थी लेकिन शिक्षक व ठेकेदार के द्वारा उस जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर उस पर जेसीबी के द्वारा मिट्टी खुदवा कर सड़क निर्माण में कार्य किया जा रहा है स्थानीय लोगों का कहना है कि यह जमीन हमारे पुरखों के द्वारा सरकार को एक समझौता के रूप में दी गई थी कि सबका अनाज रखने के लिए एक जगह निर्धारित की जाए जिसको एक खलिहान का रूप दिया गया है लेकिन शिक्षक व ठेकेदार की मनमानी के आगे एक भी न चाली वहीं उसके ड्राइवर के द्वारा स्थानीय लोगों पर अभद्र तरीके की टिप्पणी की गई लेकिन जब ठेकेदार आया तो उसको बताया गया कि आपके ड्राइवर के द्वारा अभद्रता की गई मना करने पर नहीं माना वही एक और स्थानीय का कहना था कि यह भूमि हम सभी के लिए उपयोग में आती है चाहे लड़की की शादी हो और उसे पर बारात का ठहराव और बरसात के समय में जब खेतों में पानी भरा रहता है तो जानवरों के बढ़ने के लिए उचित जमीन है और कहा कि अगर एक मुट्ठी मिट्टी जाती है तो इसका परिणाम ठेकेदार को भुगतना पड़ेगा इससे पहले इस ठेकेदार पर कई सारे गंभीर आरोप लगे हैं जिसको लेकर ठेकेदार का टेंडर निरस्त कर दिया गया था लेकिन ठेकेदार अपनी आदतों से बाज नहीं आता है ।।1
- *प्रेस नोटः-चित्रकूट पुलिस* *पुलिस अधीक्षक चित्रकूट ने शुक्रवार की परेड की सलामी लेकर परेड का किया निरीक्षण तत्पश्चात आधारभूत प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे रिक्रूट आरक्षियों के साथ आउटडोर, इनडोर परीक्षा के सम्बन्ध में सम्मेलन आयोजित कर जानकारी दी गई।* आज दिनाँक 13.03.2026 को पुलिस अधीक्षक चित्रकूट श्री अरुण कुमार सिंह द्वारा पुलिस लाइन्स चित्रकूट में शुक्रवार की साप्ताहिक परेड की सलामी लेकर परेड का निरीक्षण किया गया । पुलिस अधीक्षक द्वारा परेड में आधारभूत प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे रिक्रूट आरक्षियों एवं उपस्थित पुलिसकर्मियों को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ,तत्पर और अनुशासन बनाए रखने के लिए विभिन्न प्रकार के शारीरिक व्यायाम कराए गए, स्वास्थ्य के लाभ के लिए परेड की दौड़ करायी गयी साथ ही साथ रैतिक परेड की तैयारी का जायजा लेकर प्रतिसार निरीक्षक को सुधार हेतु निर्देशित किया गया तथा परेड में शामिल अधिकारी/कर्मचारीगण को अनुशासन,एकरूपता और कर्तव्यनिष्ठा के संबंध में बताया गया। तत्पश्चात पुलिस अधीक्षक द्वारा परिवहन शाखा जाकर थानों से आयी समस्त चार/दो पहिया वाहनों,112 पीआरवी वाहन तथा परिवहन शाखा में रखे वाहनों का निरीक्षण कर प्रभारी परिवहन शाखा को वाहनों की कमियों को दूर करने हेतु निर्देशित किया गया तथा डायल 112 कार्यालय,आवास परिसर,आरटीसी बैरक,सीपीसी कैन्टीन,मंदिर,भोजनालय,ऑर्मरी का निरीक्षण किया गया। बाद निरीक्षण पुलिस अधीक्षक द्वारा आधारभूत प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे रिक्रूट आरक्षियों को उनके होने वाले आउटडोर, इनडोर की परीक्षा के सम्बन्ध में विस्तृत जानकारी प्रदान को गई। सभी रिक्रूट आरक्षियों को पूर्ण दक्षता,मनोयोग से परीक्षा में सम्मिलित होने को बताया गया। इस दौरान क्षेत्राधिकारी नगर श्री अरविन्द कुमार वर्मा,प्रतिसार निरीक्षक श्री रामशीष यादव,प्रभारी आरटीसी शिवमूरत यादव व अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।1
- चंद्रशेखर आजाद रावण नहीं चंद्रशेखर विदुर नाम के आगे जोड़े वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण चल रही संसद सभा में सांसद चंद्रशेखर आजाद को नाम के आगे रावण नहीं विदुर लगने की नसीहत दे डालीं हालांकि चंद्रशेखर आजाद ने मीडिया के समक्ष यह साफ कर दिए हैं कि वह नाम के आगे रावण खुद नहीं लिखते उनके विरोधी उनको घृणा भरी नीयत से उनको यह नाम से नवाज देते हैं *स्वतंत्र भारत संदेश* *जनहित कि आवाज*1
- चकबंदी में ‘200 बीघा का खेल’! बिना नोटिस जमीन खारिज, किसानों में उबाल — क्या नैसर्गिक न्याय की हुई हत्या? चकबंदी में बड़ा बवाल! गरीब किसानों की जमीन खारिज, प्रभावशालियों पर मेहरबानी? चित्रकूट रिपोर्ट | अजय पाण्डेय चित्रकूट। मानिकपुर तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत खरौध में चल रही चकबंदी प्रक्रिया अब बड़े विवाद और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के घेरे में आ गई है। किसानों का आरोप है कि चकबंदी अधिकारियों ने नियम-कानूनों को दरकिनार करते हुए करीब 200 बीघा जमीन को बिना किसी समन या नोटिस के “बीहड़ श्रेणी” में डालकर खारिज कर दिया, जिससे गरीब और सीमांत किसानों की जमीन पर संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने इस पूरे मामले को “नैसर्गिक न्याय की हत्या” बताते हुए जिलाधिकारी चित्रकूट को शिकायती पत्र सौंपा है और पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है। ग्रामीणों के अनुसार गांव में साल 2005 से चकबंदी प्रक्रिया चल रही है, लेकिन मूल्यांकन, रकबा दुरुस्ती और चक आवंटन में भारी अनियमितताएं की गई हैं। आरोप है कि चकबंदी अधिकारियों ने सुनियोजित तरीके से गरीब और अनपढ़ किसानों को निशाना बनाते हुए उनकी जमीन को बीहड़ बताकर खारिज कर दिया, जबकि कई प्रभावशाली लोगों की जमीन को बचाने का खेल खेला गया। ग्रामीणों का आरोप है कि 7 मार्च 2026 को चकबंदी अधिकारी मानिकपुर संजय शुक्ला ने बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के करीब 200 बीघा भूमि को श्रेणी 6(4) बीहड़ बताते हुए खारिज कर दिया। इससे दर्जनों किसानों के सामने अपनी ही जमीन बचाने का संकट खड़ा हो गया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि 1959 के खसरा अभिलेखों में बीहड़ खाते में दर्ज करीब 350 बीघा भूमि पर आज तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई? ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ प्रभावशाली लोगों से मोटी रकम लेकर उनकी जमीन पर कार्रवाई से बचाया गया, जबकि गरीब किसानों की जमीन को निशाना बनाया गया। इस पूरे प्रकरण में ग्रामीणों ने चकबंदी अधिकारी, सहायक चकबंदी अधिकारी, चकबंदी कर्ता और संबंधित लेखपाल पर भ्रष्टाचार में लिप्त होने का आरोप लगाते हुए कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है। इधर, किसानों के समर्थन में भारतीय किसान यूनिटी यूनियन (आ.हिंद) चित्रकूट के मानिकपुर तहसील अध्यक्ष एडवोकेट राम दिनेश द्विवेदी खुलकर सामने आ गए हैं। उन्होंने दो टूक चेतावनी देते हुए कहा कि किसानों की जमीन पर डाका किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा, “यदि प्रशासन ने जल्द निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई नहीं की, तो किसान संगठन सड़क पर उतरकर बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होगा।” अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि किसानों के गंभीर आरोपों के बाद जिला प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाता है? क्या सच में चकबंदी प्रक्रिया में भ्रष्टाचार का बड़ा खेल हुआ है या फिर प्रशासन जांच कर सच्चाई सामने लाएगा। फिलहाल गांव में आक्रोश, असंतोष और न्याय की मांग तेज होती जा रही है।1
- Post by Abhay TV News1
- गैस की किल्लत को लेकर रीवा के लोक कलाकार रघुवीर शरण श्रीवास्तव का गीत काफी वायरल हो रहा है. जिसमें वह कह रहे हैं की "11 सौ के पार हुआ गैस सिलेंडर का रेट...?1