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हिनौती गोधाम में चल रहे निर्माण कार्यों को लेकर उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने की आवश्यक बैठक, अधिकारियों कर्मचारियों को दिए आवश्यक दिशा निर्देश
Ishu kesharwani
हिनौती गोधाम में चल रहे निर्माण कार्यों को लेकर उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने की आवश्यक बैठक, अधिकारियों कर्मचारियों को दिए आवश्यक दिशा निर्देश
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- यह रहा आपका कंटेंट हिंदी में दमदार और प्रोफेशनल तरीके से रीमेक किया हुआ 👇 --- क्या अब भी बार और कोऑर्डिनेशन कमेटी सो रही है? आज Karkardooma Court के अंदर जो घटना हुई है, उसने पूरे न्यायिक तंत्र की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर कोर्ट परिसर के अंदर ही मुजरिम चाकू लेकर घुस सकते हैं और एक अधिवक्ता पर हमला कर सकते हैं, तो सोचिए— वकील आखिर कहां सुरक्षित हैं? यह केवल एक हमला नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था की सुरक्षा में बड़ी चूक है। अब समय आ गया है कि बार एसोसिएशन और कोऑर्डिनेशन कमेटी तुरंत जागे और वकीलों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए। ⚖️ वकीलों की सुरक्षा = न्याय की सुरक्षा --- #Hashtags 👇 #KarkardoomaCourt #LawyersSafety #AdvocateUnderAttack #DelhiCourts #JusticeSystem #LegalNews #BarAssociation #CourtSecurity #WakeUpCall #AdvocateLife #LawAndOrder #BreakingNews #Highlight1
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- न्यायालय का वाद खारिज होने के बाद भी नहीं खाली हुआ बाग, जांच के आदेश कौशांबी, संवाददाता: तहसील चायल क्षेत्र के खानपुर खास निवासी सरफराज पुत्र पुद्दन अली ने अपने पैतृक बाग पर कब्जे को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित के अनुसार, मौजा खानपुर खास स्थित गाटा संख्या 71 रकबा 0.1590 हे0 भूमि उसके पिता के नाम दर्ज है, जिसमें बैर का बाग लगा हुआ है। बताया कि बाग को फल तोड़ने के लिए 10 हजार रुपये सालाना पर गांव के ही अली अहमद व उसकी पत्नी रोशनी को दिया गया था। समय पूरा होने के बाद बाग खाली करने को कहा गया, लेकिन विपक्षीगण ने कब्जा नहीं छोड़ा और न्यायालय में वाद दाखिल कर दिया। पीड़ित का कहना है कि सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत ने 2 अप्रैल 2026 को वाद निरस्त कर दिया, इसके बावजूद भी विपक्षी बाग खाली नहीं कर रहे हैं। आरोप है कि वे बाग में जाने से रोकते हैं, गाली-गलौज करते हैं और झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देते हैं। मामले से परेशान परिवार मंगलवार दोपहर करीब एक बजे तहसील परिसर में उपजिलाधिकारी कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गया और न्याय की गुहार लगाई। पीड़ितों के अनुसार, उपजिलाधिकारी ने उन्हें कुर्सी पर बैठाकर बात सुनी और लेखपाल को मौके पर जाकर जांच करने के निर्देश दिए। इसके बावजूद परिवार ने लेखपाल पर सहयोग न करने का आरोप लगाया है। परिवार का कहना है कि प्रशासनिक उदासीनता के कारण वे अपने ही बाग का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं और भय के माहौल में जीवन यापन करने को मजबूर हैं।1
- आए दिन दुर्घटनाएं घटित हो रही हैं राजस्व विभाग के कर्मचारी प्रशासन शून्य साबित हो रहे हैं9